Thursday, July 30, 2026

ब्रेकिंग: बिहार के नवगठित नगर निकायों में गैस संकट पर आर-पार की लड़ाई! पार्षद आनंद कंद साह ने छेड़ा ‘अधिकार का महासंग्राम’

शहरी टैक्स, ग्रामीण सुविधा: आखिर कब तक चलेगी ये दोहरी नीति?

मुजफ्फरपुर: बिहार के नवगठित नगर निकायों में व्याप्त प्रशासनिक उदासीनता और जनता के साथ हो रहे घोर भेदभाव के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का शंखनाद हो चुका है। मुरौल नगर पंचायत के वार्ड संख्या-03 के पार्षद आनंद कंद साह ने 30 अप्रैल 2026 से जिलाधिकारी कार्यालय, मुजफ्फरपुर के समक्ष ‘आमरण अनशन’ पर बैठने का अंतिम अल्टीमेटम जारी कर दिया है। यह अनशन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए जनता के आक्रोश का ज्वलंत प्रतीक है।

जिलाधिकारी कार्यालय, मुजफ्फरपुर के समक्ष ‘आमरण अनशन’ की प्रतीकात्‍मक तैयारी (दायें) एवं जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर को ‘आमरण अनशन’ की सूचनात्‍मक प्रति (बायें से ) ।

यह लड़ाई सिर्फ मुरौल की नहीं, पूरे बिहार के नवगठित निकायों की है

पार्षद आनंद कंद साह का यह संघर्ष अब केवल मुरौल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बिहार के उन तमाम नवगठित नगर निकायों के लिए एक महासंग्राम बन चुका है, जहाँ शासन का तंत्र ‘दोहरी नीति’ का खेल,खेल रहा है। इस दायरे में मुरौल के साथ-साथ  सकरा, कांटी, बरूराज, मोतीपुर, साहेबगंज, ताजपुर और सरायरंजन जैसे क्षेत्र भी प्रमुखता से शामिल हैं। इन इलाकों को नगर पंचायत या नगर परिषद का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन गैस आपूर्ति के मामले में इन्हें आज भी ग्रामीण क्षेत्र के ’45-दिवसीय चक्र’ की बेड़ियों में जकड़ रखा है। जबकि, नियमानुसार शहरी निकायों में उपभोक्ताओं को 25 दिन में गैस रिफिलिंग की सुविधा मिलनी चाहिए।

जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर को प्रेषित पत्र में क्‍या कहा है पार्षद आनन्‍द कंद ने जाने क्या है पूरा मामला?

‘सॉफ्टवेयर डेटाबेस’ के नाम पर जनता के अधिकारों का खुला हनन हो रहा है। प्रशासन का तर्क और प्रणाली इन क्षेत्रों को शहरी मानने को तैयार नहीं है, जबकि हकीकत यह है कि इन इलाकों के निवासियों से होल्डिंग टैक्स, बिजली बिल और जमीन की रजिस्ट्री (MVR) जैसे सभी सरकारी शुल्क ‘शहरी दरों’ पर वसूले जा रहे हैं। जनता टैक्स तो शहरी भर रही है, लेकिन सुविधा उन्हें ग्रामीण स्तर की भी ठीक से नहीं मिल रही। पार्षद आनंद कंद साह ने इसे ‘डेटाबेस घोटाला’ और ‘जनता के साथ विश्वासघात’ करार दिया है।

बड़े संवैधानिक संस्थानों के निर्देशों की सरेआम धज्जियाँ

यह प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि ‘संवैधानिक अवहेलना’ है। बिहार सरकार की गजट अधिसूचना (संख्या 1037, दिनांक 03.03.2021) के तहत इन क्षेत्रों को नगर निकाय का दर्जा मिले 5 साल बीत चुके हैं। राष्ट्रपति सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और मुख्य सचिव तक के निर्देश मिलने के बावजूद धरातल पर सुधार न होना, यह सिद्ध करता है कि विभाग उच्च संवैधानिक संस्थाओं को भी गंभीरता से नहीं ले रहा है।

कौन हैं आनंद कंद साह?

नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या-03 के पार्षद आनंद कंद साह केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता की प्रखर आवाज बनकर उभरे हैं। वे पिछले कई महीनों से लगातार स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और जन-अधिकारों के लिए जमीनी स्तर पर संघर्षरत हैं। उनका यह अनशन महज एक विरोध नहीं है, बल्कि अपनी कर्तव्यनिष्ठा और नगर पंचायत मुरौल की जनता के प्रति अपनी गहरी जवाबदेही का प्रतीक है।

प्रशासन को सीधी चेतावनी: तीन दिन का अल्टीमेटम

पार्षद आनंद कंद साह ने शासन और प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है, अब निर्णय आपके हाथों में है।” उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यदि आगामी तीन कार्यदिवसों के भीतर तेल कंपनियों के डेटाबेस में सुधार कर 25-दिवसीय शहरी रिफिल चक्र लागू नहीं किया गया, तो 30 अप्रैल की सुबह 11:30 बजे से वे आमरण अनशन शुरू कर देंगे। अनशन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित तेल कंपनियों की होगी।

किन अधिकारियों को दी गई सूचना?

पार्षद आनंद कंद साह ने इस आंदोलन की विधिवत सूचना और कार्रवाई हेतु मांग पत्र निम्नलिखित उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया है:

  1. सचिव, राष्ट्रपति सचिवालय, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली।
  2. प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली।
  3. अध्यक्ष, राष्ट्रीय/राज्य मानवाधिकार आयोग
  4. सचिव, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।
  5. मुख्य सचिव, बिहार सरकार, पटना।
  6. वरीय आरक्षी अधीक्षक, मुजफ्फरपुर।
  7. असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर।
  8. क्षेत्रीय प्रबंधक, संबंधित तेल कंपनी।

अब देखना यह है कि क्या प्रशासन का कुंभकरण जागता है या फिर इन नवगठित निकायों की लाखों जनता को अपने मूलभूत अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा।

जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर को दिए गये ‘आमरण अनशन’ की सूचनात्‍मक प्रति

पटना में छेड़खानी की तो खैर नहीं! छात्राओं की मदद को सड़कों पर उतरा ‘शक्ति सुरक्षा दल’, कॉल करते ही दौड़ेगी खाकी

कोचिंग सेंटरों और स्कूल-कॉलेजों के बाहर अब पुलिस की सीधी निगरानी; छात्राओं की हर समस्या पर ऑन-द-स्पॉटहोगी कार्रवाई

विशेष संवाददाता, पटना

पटना की सड़कों पर अब मनचलों की मनमानी नहीं चलेगी। छात्राओं, युवतियों और महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के संकल्प के साथ, वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) पटना के मार्गदर्शन और नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) के नेतृत्व में शक्ति सुरक्षा दल ने मोर्चा संभाल लिया है। अब कोचिंग सेंटरों, स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस की सीधी नजर है। छेड़खानी की एक कॉल और पुलिस की टीम मौके पर हाजिर होगी।

सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस(‘शक्ति सुरक्षा दल’) की सीधी नजर , जानकारी देती  सुश्री  दीक्षा नगर पुलिस अधीक्षक पटना (मध्य)

सीधा संवाद, त्वरित समाधान

यह टीम केवल शिकायतों का इंतजार नहीं करती, बल्कि खुद शिक्षण संस्थानों तक पहुँचकर छात्राओं से सीधा संवाद स्थापित कर रही है। उनका उद्देश्य एक ऐसा सुरक्षा चक्र तैयार करना है जहाँ महिलाएं बिना किसी डर के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। इस टीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि शिकायत मिलते ही पुलिस ‘ऑन-द-स्पॉट’ (घटनास्थल पर ही) कार्रवाई को प्राथमिकता देती है, ताकि पीड़िता को थाने के चक्कर न काटने पड़ें।

हालिया घटनाओं से मिली सीख, टीम हुई और आक्रामक

शक्ति सुरक्षा दल की सक्रियता का असर पिछले कुछ दिनों में साफ देखा गया है:

  • इस्कॉन मंदिर के पास: फिजिक्स वाला कोचिंग सेंटर के पास छात्राओं ने कॉल कर बताया था कि लड़कों का एक समूह उन्हें लगातार परेशान कर रहा है। शक्ति सुरक्षा दल ने न केवल उन लड़कों को चिह्नित किया, बल्कि उन्हें सख्त चेतावनी देकर सुधारा। बाद में छात्राओं से पुष्टि करने पर पाया गया कि अब वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।
  • रवींद्र बालिका विद्यालय एवं NIFT: कदमकुआं स्थित रवींद्र बालिका विद्यालय और NIFT के बाहर भी छेड़खानी की शिकायतें मिलने पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। कदमकुआं के मामले में तो एक विक्षिप्त व्यक्ति द्वारा छात्राओं को डराने की सूचना पर टीम तुरंत वहां पहुंची और स्थिति को संभाला।

पहचान रहेगी पूरी तरह गोपनीय

नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) पटना, सुश्री दिक्षा ने इस पहल के बारे में स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और गोपनीयता पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, हेल्पलाइन नंबरों पर केवल महिला पुलिस अधिकारी ही कॉल उठाएंगी, ताकि लड़कियां बिना किसी संकोच के अपनी बात रख सकें। उनकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी। यदि मामला गंभीर हुआ, तो स्थानीय थाने के सहयोग से सख्त कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।”

तुरंत करें संपर्क, पटना पुलिस है साथ

पटना पुलिस ने सभी छात्राओं और महिलाओं से अपील की है कि वे किसी भी अवांछित गतिविधि को नजरअंदाज न करें। यदि कोई उन्हें परेशान कर रहा है, तो सीधे नीचे दिए गए नंबरों पर कॉल या व्हाट्सएप करें:

टीम का नामसंपर्क नंबर
शक्ति सुरक्षा दल – 01 (गांधी मैदान पूर्व)9296598170
शक्ति सुरक्षा दल – 02 (गांधी मैदान पश्चिम)9296580210

नोट: यद्यपि क्षेत्रों का बंटवारा किया गया है, लेकिन आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी नंबर पर कॉल कर तुरंत सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

अंतिम 72 घंटे: अगर वोटर लिस्ट में नाम नहीं, तो नहीं चुन पाएंगे अपना पार्षद; जानिए सुधार का पूरा तरीका

पटना। बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरपालिका आम और उप-निर्वाचन 2026 के लिए प्रारूप मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) सार्वजनिक कर दी है। आयोग ने मतदाताओं को सचेत किया है कि यदि सूची में कोई गड़बड़ी है या नाम गायब है, तो उसे ठीक कराने के लिए अब आपके पास केवल 3 दिन (28 अप्रैल तक) का समय बचा है।

लापरवाही पड़ सकती है भारी

अक्सर देखा जाता है कि मतदाता सीधे पोलिंग बूथ पर पहुंचते हैं और वहां नाम न होने पर मायूस होकर लौट जाते हैं। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का प्रकाशन इसीलिए पहले किया गया है ताकि नागरिक अपनी प्रविष्टियों की जांच कर सकें। यदि आपकी आयु 18 वर्ष पूरी हो चुकी है, या आपके वार्ड/मकान संख्या में कोई त्रुटि है, तो आप ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से दावा/आपत्ति (Claim/Objection) दर्ज कर सकते हैं। 28 अप्रैल के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार करना संभव नहीं होगा।

इन क्षेत्रों में होने हैं उपचुनाव

बिहार के विभिन्न जिलों में खाली पड़े पदों के लिए यह चुनाव प्रक्रिया चल रही है। मुख्य रूप से पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और आरा जैसे बड़े नगर निगमों के रिक्त वार्डों के साथ-साथ राज्य की विभिन्न नगर परिषदों और नगर पंचायतों में जहां पार्षदों या मुख्य पार्षदों के पद किसी कारणवश (त्यागपत्र, मृत्यु या अयोग्यता) खाली हुए हैं, वहां उप-निर्वाचन कराए जा रहे हैं। इसके अलावा नई गठित नगर पालिकाओं में आम चुनाव की तैयारी भी इसी मतदाता सूची के आधार पर की जा रही है।

आम चुनाव मुख्य रूप से नवगठित और उत्क्रमित निकायों में हो रहे हैं, जिनमें नगर परिषद फुलवारी शरीफ, दानापुर निजामत, खगौल (पटना), सोनपुर (सारण) और नगर पंचायत मदनपुर, जम्हौर (औरंगाबाद), महाराजगंज (सिवान) एवं मधुबन (पूर्वी चम्पारण) शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न नगर निकायों में रिक्त हुए पदों को भरने के लिए उपचुनाव भी कराए जा रहे हैं। इनमें नगर पंचायत नौबतपुर (पटना), नगर परिषद डुमराव (बक्सर), रक्सौल (पूर्वी चम्पारण), नगर पंचायत बिरौल (दरभंगा) और अलौली (खगड़िया) समेत करीब 26 अन्य निकायों के विभिन्न वार्डों में मतदान होना है। इन क्षेत्रों के निवासियों के लिए मतदाता सूची में नाम चेक करना अनिवार्य है।


चेक करने के 5 आसान स्टेप्स

1 वेबसाइट एक्सेस करें

आधिकारिक पोर्टल                      

1.वेबसाइट एक्सेस करें:आधिकारिक पोर्टल.

अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर www.sec.bihar.gov.in टाइप करें। होमपेज पर दाहिनी ओर ऊपर ‘तीन लाइन’ वाले मेनू बटन पर क्लिक करें।

2 इलेक्शन टैब चुनें, सही साल का चयन,

2.इलेक्शन टैब चुनें:सही साल का चयन.मेनू में ‘नगरपालिका आम/उप निर्वाचन 2022/2023/2025/2026’ के विकल्प पर जाएं और वहां मतदाता सूची से संबंधित लिंक को चुनें।

3 प्रारूप प्रकाशन 2026, सूची का लिंक

3.प्रारूप प्रकाशन 2026:सूची का लिंक.अगले पेज पर मतदाता सूची का प्रकाशन 2026′ वाले लिंक पर क्लिक करें। आप सीधे अपने EPIC नंबर (वोटर कार्ड नंबर) से भी नाम खोज सकते हैं।

4 क्षेत्रीय विवरण भरें, फिल्टर प्रक्रिया

4.क्षेत्रीय विवरण भरें:फिल्टर प्रक्रिया.ड्रॉप-डाउन मेनू से अपना जिला, अनुमंडल और संबंधित नगरपालिका का नाम चुनें। इसके बाद ‘SHOW’ बटन पर क्लिक करें।

5 वार्ड वार सूची, अंतिम जांच

5.वार्ड वार सूची:अंतिम जांच.अब आपके सामने वार्डों की सूची आ जाएगी। अपने वार्ड के सामने दिए गए लिंक पर क्लिक करें और पीडीएफ में अपना नाम, पिता का नाम और फोटो की शुद्धता जांच लें।

चूंकि आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि 28 अप्रैल 2026 है, इसलिए यदि आपको कोई त्रुटि दिखती है, तो तुरंत नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:


ऑनलाइन दावा/आपत्ति (Claim/Objection) दर्ज करने की प्रक्रिया

आप सीधे राज्य निर्वाचन आयोग की समर्पित वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं:

  1. वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले sec.bihar.gov.in पर जाएं।
  2. दावा-आपत्ति पोर्टल खोजें: होमपेज पर या ‘मतदाता कॉर्नर’ (Voter Corner) सेक्शन में ‘Electoral-Roll Claim & Objection 2026’ (निर्वाचक सूची दावा आपत्ति 2026) लिंक पर क्लिक करें।
  3. ऑनलाइन आवेदन चुनें: पोर्टल पर आपको ‘Online Apply’ का विकल्प मिलेगा। उस पर क्लिक करते ही एक नया फॉर्म खुल जाएगा।
  4. विवरण भरें: फॉर्म में अपना नाम, पता, वार्ड संख्या, जिला और जिस सुधार की आवश्यकता है (जैसे- नया नाम जोड़ने हेतु, नाम हटाने हेतु या त्रुटि सुधार हेतु) उसका चयन करें।
  5. दस्तावेज अपलोड करें: सुधार के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज (जैसे- आधार कार्ड, वोटर आईडी, या निवास प्रमाण पत्र) स्कैन करके अपलोड करें।
  6. सबमिट करें: सभी जानकारी भरने के बाद फॉर्म को सबमिट करें और प्राप्त ‘रसीद/एप्लिकेशन नंबर’ को भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रख लें।

ऑफ़लाइन (Offline) प्रक्रिया

यदि आप तकनीकी रूप से ऑनलाइन आवेदन करने में सहज नहीं हैं, तो आप पारंपरिक तरीके से भी आवेदन कर सकते हैं:

  1. फॉर्म डाउनलोड करें: वेबसाइट पर ‘Offline Download’ या ‘नगरपालिका निर्वाचन प्रपत्र’ वाले सेक्शन से संबंधित प्रपत्र (Form) डाउनलोड करें।
    • नाम जोड़ने के लिए: प्रपत्र-1 (Form-1)
    • नाम पर आपत्ति/हटाने के लिए: प्रपत्र-2 (Form-2)
  2. फॉर्म भरें: प्रपत्र को साफ-साफ अक्षरों में भरें और अपने नजदीकी संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO/ARO) या जिला निर्वाचन कार्यालय (नगरपालिका) में जमा करें।
  3. पावती (Receipt) लें: फॉर्म जमा करते समय संबंधित कार्यालय से पावती अवश्य प्राप्त करें।

विशेष सुझाव: > * अंतिम समय की प्रतीक्षा न करें: 28 अप्रैल बहुत करीब है, सर्वर पर दबाव हो सकता है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

  • दस्तावेज तैयार रखें: आधार कार्ड या पहचान पत्र की फोटोकॉपी/स्कैन कॉपी हमेशा साथ रखें, इसकी जरूरत हर चरण में पड़ेगी।
  • हेल्पलाइन: यदि वेबसाइट खोलने या फॉर्म भरने में कोई तकनीकी समस्या आती है, तो बिना संकोच के आयोग के टोल फ्री नंबर 1800 3457 243 पर कॉल करें।

विशेष नोट: यदि सूची में आपका नाम नहीं है, तो तुरंत अपने प्रखंड (Block) कार्यालय या संबंधित नगर निकाय के कार्यालय में जाकर फॉर्म भरें या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आपत्ति दर्ज करें। आपकी एक छोटी सी जागरूकता आपके मताधिकार की रक्षा करेगी।


“बिहार को बुलडोजर राज की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे”: भाकपा माले का सरकार के खिलाफ आर-पार का एलान

दरभंगा: बिहार की राजनीति में एक बड़े तूफान के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। आगामी 16-18 मई, 2026 को दरभंगा के लहेरियासराय स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले भाकपा (माले) के 12वें राज्य सम्मेलन को लेकर पार्टी ने अपनी कमर कस ली है। शुक्रवार को हुई मिथिला जोन स्तरीय बैठक में पार्टी ने सिर्फ सम्मेलन की तैयारी ही नहीं की, बल्कि सरकार के खिलाफ “जन-आंदोलन” का शंखनाद भी कर दिया है।

दरभंगा के लहेरियासराय में आयोजित भाकपा माले की मिथिला जोन स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए राज्य सचिव का० कुणाल,  मंच पर उनके साथ मिथिलांचल प्रभारी का० धीरेंद्र झा, पोलिट ब्यूरो सदस्य का० अमर एवं अन्य पार्टी पदाधिकारी।

भाजपा का असली चेहरा अब सामने है”

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के राज्य सचिव का० कुणाल ने तीखे शब्दों में कहा कि, “विगत चुनाव के बाद से भाजपा अपने असली तेवर में आ गई है। बिहार की सत्ता अब सीधे उनके नियंत्रण में है और आते ही उन्होंने राज्य को ‘बुलडोजर राज की प्रयोगशाला’ में बदलने की साजिश शुरू कर दी है।”

पार्टी ने स्पष्ट किया कि अब बिहार में महिला उत्पीड़न, मॉब लिंचिंग, दलितों और गरीबों के घर उजाड़ने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। यह सम्मेलन इन्हीं चुनौतियों के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई की शुरुआत है।

देश की विदेश नीति पर तीखा प्रहार

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सचिव ने मोदी सरकार की विदेश नीति को “दलाली” करार देते हुए कहा कि देश को संकट की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा देश कभी न्याय की आवाज बुलंद करता था, लेकिन आज मोदी सरकार अमेरिका और इजरायल के सामने घुटने टेक चुकी है। रूस से तेल खरीदने और न खरीदने के अमेरिकी आदेशों का पालन करना हमारी संप्रभुता पर चोट है। भाजपा के पूर्वज जो पहले अंग्रेजों की दलाली करते थे, आज वही दल सत्ता में आकर अमेरिकी गुलामी में लगा हुआ है।”

भाकपा माले की मिथिला जोन स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी पदाधिकारी एवं मंच के सामने कार्यकर्त्‍ता गण ।

उल्टा पलायन” और मजदूरों का दर्द

भाकपा (माले) ने देश की अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई पर भी सरकार को घेरा। का० कुणाल ने चेतावनी दी कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण जो वैश्विक गैस और तेल संकट पैदा हुआ है, उसका सीधा असर बिहार के मजदूरों पर पड़ रहा है। लाखों मजदूर देश के विभिन्न कोनों से वापस अपने घरों की ओर लौट रहे हैं—जिसे पार्टी ने ‘उल्टा पलायन’ कहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और स्थिर मजदूरी ने मजदूरों का जीवन दूभर कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप नोएडा से लेकर लुधियाना तक मजदूरों के स्वतःस्फूर्त आंदोलन शुरू हो गए हैं।

मिथिलांचल में फिर से गूंजेगी वामपंथ की आवाज

इस सम्मेलन का एक बड़ा राजनीतिक संदेश उत्तर बिहार (दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर) के लिए है। मिथिलांचल प्रभारी का० धीरेंद्र झा और पोलिट ब्यूरो सदस्य का० अमर की मौजूदगी में पार्टी ने साफ किया कि मिथिलांचल और कोसी इलाका हमेशा से वाम आंदोलन का गढ़ रहा है। इस सम्मेलन के जरिए पार्टी अपनी पुरानी साख को फिर से हासिल करने और गरीबों के हक की लड़ाई को सड़क से सदन तक मजबूती से ले जाने की तैयारी में है।

पार्टी का केंद्रीय नारा है—बिहार को भाजपाई बुलडोजर राज की प्रयोगशाला बनाने के खिलाफ व्यापक जनप्रतिरोध खड़ा करें।” आगामी 16 से 18 मई तक दरभंगा का पोलो मैदान इसी संकल्प के साथ एक बड़े जनांदोलन का केंद्र बनेगा।


ताजपुर को ‘शहर’ का टैक्स, पर सुविधाएं ‘गांव’ वाली! रसोई गैस के लिए हाहाकार, माले ने दी आंदोलन की चेतावनी

ताजपुर/समस्तीपुर : ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत ने आम जनता के घरों का चूल्हा ठंडा कर दिया है। शहर के उपभोक्ता पिछले काफी समय से इस दोहरी मार को झेल रहे हैं—जहाँ उनसे टैक्स की वसूली तो ‘शहर’ के हिसाब से की जा रही है, लेकिन उन्हें मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं ‘गांव’ के स्तर की भी नहीं हैं। इसी प्रशासनिक उपेक्षा और गैस एजेंसियों की मनमानी के खिलाफ भाकपा माले ने मोर्चा खोलते हुए जिलाधिकारी को अल्टीमेटम दिया है।

“इंतजार की इंतेहा: ताजपुर में रसोई गैस की भारी किल्लत के बीच एजेंसियां और उपभोक्ता आमने-सामने। जहां एक ओर गोदामों में गैस की उपलब्धता के दावे किए जाते हैं, वहीं आम जनता को 45 दिन की लंबी प्रतीक्षा सूची में धकेल दिया गया है।”

दोहरी मार: शहर का दर्जा, लेकिन गैस में गांववाली देरी

ताजपुर के निवासियों के लिए यह स्थिति किसी दुस्वप्न से कम नहीं है। भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में इस विसंगति को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने बताया कि ताजपुर वर्ष 2021 से ही ‘नगर परिषद’ के रूप में अस्तित्व में है। सरकारी नियमों के मुताबिक, यहाँ होल्डिंग टैक्स, बिजली बिल और जमीन रजिस्ट्री जैसे सभी महत्वपूर्ण शुल्क शहरी दरों पर वसूले जा रहे हैं।

लेकिन, जब बात रसोई गैस आपूर्ति की आती है, तो गैस एजेंसियां खुद को प्रशासनिक भूल या अस्पष्टता की आड़ में बचा लेती हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रावधानों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को 25 दिनों के भीतर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना अनिवार्य है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह सीमा 45 दिन है। ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र होने के बावजूद, यहां की गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं को 45 दिनों का इंतजार करवा रही हैं।

एजेंसियों का पल्ला झाड़ने वाला तर्क

जब इस देरी पर एजेंसी संचालकों से सवाल पूछा जाता है, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला होता है। उनका तर्क होता है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने ताजपुर को अभी तक अपनी आधिकारिक सूची में ‘शहरी क्षेत्र’ के रूप में अपडेट नहीं किया है। माले नेता ने इसे स्थानीय जनता के साथ सरासर अन्याय और प्रशासन की लापरवाही करार दिया है।

आम गृहणियों और परिवारों पर संकट

45 दिनों के लंबे इंतजार के कारण आम परिवारों का बजट पूरी तरह चरमरा गया है। एक सिलेंडर के भरोसे रहने वाले घरों में गैस खत्म होने पर उन्हें या तो महंगे दामों पर कालाबाजारी से गैस खरीदने को मजबूर होना पड़ता है, या फिर वैकल्पिक ईंधन के रूप में लकड़ी या कोयले पर निर्भर होना पड़ता है। विशेष रूप से कामकाजी महिलाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टकारी बनी हुई है।

माले का अल्टीमेटम: सुधार नहीं, तो आंदोलन

भाकपा माले के प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने स्पष्ट कहा है:

ताजपुर नगर परिषद से शहरी टैक्स तो वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधा देने के वक्त उसे गांव बता दिया जाता है। यह प्रशासनिक विफलता है। प्रशासन तत्काल गैस एजेंसियों की जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि बुकिंग के अधिकतम 25 दिनों के भीतर हर उपभोक्ता को सिलेंडर मिल जाए। यदि जल्द ही इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो हम आम उपभोक्ताओं को साथ लेकर सड़कों पर उतरेंगे और उग्र जनांदोलन शुरू करेंगे।”

मुख्य मांगें:

  • 25-दिवसीय चक्र: गैस बुकिंग के 25 दिन के भीतर सिलेंडर की होम डिलीवरी सुनिश्चित हो।
  • स्थिति स्पष्ट करें: प्रशासन पेट्रोलियम मंत्रालय से समन्वय कर ताजपुर को शहरी क्षेत्र की सूची में शामिल कराए।
  • एजेंसियों की जांच: गैस एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी हो।

अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी कार्यालय पर टिकी हैं कि क्या इस विरोध के बाद प्रशासन गैस एजेंसियों पर नकेल कसता है या जनता को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।

शिक्षा के दम पर बदलेंगे मुसहर टोले की तकदीर: सरायरंजन में खुला ज्ञान का नया अध्याय, प्रमुख वीणा कुमारी ने कहा—”कोई जाति से नहीं, कर्म से होता है बड़ा”

सरायरंजन (समस्तीपुर), 24 अप्रैल 2026: सरायरंजन प्रखंड के मुसहर बाहुल्य इलाकों में शिक्षा की अलख जगाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। ‘जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र’ और ‘क्राई (CRY-Child Rights and You)’ के संयुक्त तत्वाधान में प्रखंड के दो महत्वपूर्ण मुसहर टोलों—ग्राम पंचायत राज अख्तियारपुर बलभद्र (वार्ड-12, भोजपुर) और रायपुर बुजुर्ग (वार्ड-9)—में नए सामुदायिक शिक्षा केंद्रों का भव्य उद्घाटन किया गया।

“सरायरंजन में सामुदायिक शिक्षा केंद्र का उद्घाटन करती प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति; इस दौरान उन्होंने बच्चों के बीच पोषण सामग्री का भी वितरण किया।”

फीता काटकर खोला शिक्षा का द्वार

इस उद्घाटन समारोह का नेतृत्व प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी ने किया। उनके साथ वार्ड सदस्य बेचनी देवी, सामुदायिक लीडर रामउमेद राम, सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार राय, शिक्षिका संगीता कुमारी, मुस्कान कुमारी, कोषाध्यक्ष वीणा कुमारी, दिनेश प्रसाद चौरसिया और बलराम चौरसिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर केंद्र का शुभारंभ किया।

शिक्षा ही एकमात्र विकल्प”

समारोह को संबोधित करते हुए सीनियर रिसर्च कंसल्टेंट दिनेश प्रसाद चौरसिया ने बताया कि जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र पिछले 8 वर्षों से 9 मुसहर बाहुल्य गांवों में नि:शुल्क शिक्षा केंद्र चला रहा है। उन्होंने कहा, हमारा मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ना है जो स्कूल से दूर हो गए हैं या जिनका नामांकन अब तक नहीं हो पाया है।”

इस मौके पर प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी ने भावुक अपील करते हुए कहा, माता-पिता बच्चों को नियमित स्कूल भेजें। अगर कहीं कोई बाधा आती है, तो सीधा हमसे संपर्क करें, हम समाधान करेंगे।” उन्होंने बिहार के गौरव दशरथ मांझी और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म या जाति से बड़ा नहीं होता, वह अपने नेक कर्तव्यों और शिक्षा से बड़ा बनता है।”

भीषण गर्मी में मिली राहत, डाबर इंडिया का साथ

उद्घाटन के बाद, जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र द्वारा डाबर इंडिया लिमिटेड के सीएसआर (CSR) कार्यक्रम के तहत बच्चों के बीच पोषण सामग्री का वितरण किया गया। भीषण गर्मी को देखते हुए सचिव सुरेन्द्र कुमार और अध्यक्ष गौरीशंकर चौरसिया ने बच्चों को जूस और ग्लूकोज वितरित किए, जिससे बच्चों के चेहरे खिल उठे।

कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन सामुदायिक शिक्षक संदीप कुमार सादा ने किया। साथ ही, दामोदरपुर महुली और अख्तियारपुर बेदौलिया की अल्पसंख्यक एवं अनुसूचित जाति बस्तियों में भी लगभग 200 परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया गया।

इस अवसर पर विद्यानंद राय, ललित कुमार झा, संदीप कुमार राम, सोहन कुमार, सुरज राम, राजकुमार राम, अकलु सादा, संजु देवी, नीतू देवी सहित दर्जनों गणमान्य लोग उपस्थित थे।


‘तिवारी गैंग’ का बड़ा खेल नाकाम, हथियार और कारतूस के साथ पटना के दो शातिर गिरफ्तार; बैंक लूट का भी हुआ खुलासा

Muzaffarpur: The Sakra police in the district have achieved a major success against criminal elements. During an intensive vehicle checking campaign conducted under the direction of the Senior Superintendent of Police, Muzaffarpur, police arrested two active members of the notorious “Tiwari Gang.” Illegal weapons, live cartridges, and mobile phones were recovered from the accused. The arrested criminals also confessed to snatching 50,000 rupees from a bank customer two days ago.

सकरा थाना परिसर में गिरफ्तार ‘तिवारी गैंग’ के सदस्य (चेहरे ढके हुए)। मौके पर मौजूद पुलिस पदाधिकारी और बरामद अवैध हथियार, कारतूस व अन्य सामग्री के साथ थाना परिसर का दृश्य।

क्या है पूरा मामला?

एसडीपीओ (पूर्वी-02) मनोज कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि बीते 23 अप्रैल 2026 की रात वरीय पुलिस अधीक्षक के आदेशानुसार जिले भर में विशेष वाहन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान सकरा पुलिस की टीम मुरौल बांध के पास तिरहुत नगर नहर के निकट वाहनों की जांच कर रही थी। तभी लौतन की ओर से एक मोटरसाइकिल पर सवार तीन संदिग्ध युवक आते हुए दिखे। पुलिस को देख वे हड़बड़ा गए और बाइक घुमाकर भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उनका पीछा किया, जिसमें दो को दबोच लिया गया, जबकि तीसरा अपराधी बाइक लेकर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहा।

पटना से नाता, अपराध का पुराना इतिहास

पकड़े गए अपराधियों की पहचान छोटू मिश्रा और विकास कुमार के रूप में हुई है, जो पटना के रहने वाले हैं। तलाशी लेने पर इनके पास से एक देशी पिस्टल, तीन जिंदा कारतूस और एक मोबाइल बरामद हुआ। पुलिसिया पूछताछ में पता चला कि गिरफ्तार छोटू कुमार का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है। वह पूर्व में भी छपरा जिले के मुढ़ौरा थाना कांड संख्या 811/25 में आर्म्स एक्ट और डकैती की योजना बनाने के आरोप में जेल जा चुका है।

तिवारी गैंगका आतंक, बैंक लूट की वारदात का खुलासा

पुलिस की पूछताछ में गिरफ्तार बदमाशों ने बड़ा राज उगला है। उन्होंने स्वीकार किया कि वे कुख्यात ‘तिवारी गैंग’ से जुड़े हैं। यह गिरोह मुख्य रूप से बैंक ग्राहकों को निशाना बनाता है और पैसा-मोबाइल झपटकर फरार हो जाता है। बदमाशों ने दो दिन पहले ही एक बैंक ग्राहक से 50,000 रुपये झपटने की घटना में अपनी संलिप्तता कबूल की है। हालांकि, लूट की रकम वे खर्च कर चुके हैं, लेकिन उनकी निशानदेही पर पुलिस ने लूटा गया बैग बरामद कर लिया है।

एसडीपीओ का बयान

एसडीपीओ मनोज कुमार सिंह ने बताया, “ये शातिर अपराधी ‘तिवारी गैंग’ के सदस्य हैं, जो इलाके में छिनतई और लूट की वारदातों को अंजाम देते हैं। फिलहाल लूटी गई नकदी की रिकवरी का प्रयास जारी है और फरार तीसरे साथी की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। इनका पूरा नेटवर्क खंगाला जा रहा है और इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”


सनसनी की भूख, पत्रकारिता का पतन: मासूम को बदनाम करने वाले यूट्यूबर्स बेनकाब!

पटना | डिजिटल डेस्क | आज के डिजिटल दौर में ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ की अंधी दौड़ ने पत्रकारिता की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। व्यूज बटोरने और सनसनी फैलाने के चक्कर में कुछ तथाकथित यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया चैनलों ने (न्‍यूज भारत टीवी नहीं ) संवेदनशीलता की सभी हदें पार कर दी हैं। पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र से आई एक घटना ने इस कड़वे सच को उजागर किया है कि कैसे बिना किसी पुष्टि के, एक मासूम छात्रा की तस्वीर के साथ छेड़खानी की फर्जी खबर फैलाकर पूरे शहर में दहशत का माहौल बनाया गया।

तथाकथित चैनलों के द्वारा गलत खबर चलाये जाने की जानकारी रखते हुए  सुश्री दिक्षा, नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) पटना,

क्या थी फेक न्यूज़की साजिश?

दिनांक 22 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर एक सनसनीखेज खबर प्रसारित की गई कि कदमकुआं इलाके में एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़खानी हुई है। इस खबर के साथ छात्रा की फोटो भी वायरल कर दी गई, जिससे समाज में न केवल आक्रोश फैला, बल्कि पीड़ित परिवार की प्रतिष्ठा को भी गहरी चोट पहुंची। यह उस पत्रकारिता का चेहरा है, जहाँ सच से ज्यादा सनसनी को प्राथमिकता दी जा रही है।

पुलिस की जांच में खुला झूठ का पुलिंदा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस ने त्वरित संज्ञान लिया। नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य), सुश्री दिक्षा ने स्वयं जांच का नेतृत्व किया। जब पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के लोगों, विद्यालय प्रबंधन और स्वयं छात्रा से पूछताछ की, तो सच्चाई सामने आई। पुलिस के अनुसार, किसी प्रकार की छेड़खानी नहीं हुई थी। सच्चाई यह थी कि एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति राहगीरों पर ईंट-पत्थर फेंक रहा था, जिससे छात्रा डर गई थी। स्थानीय लोगों ने उसे सुरक्षित घर पहुंचाया। छात्रा और परिजनों ने स्पष्ट रूप से छेड़खानी की घटना को नकार दिया है।

मीडिया की जिम्मेदारी

नगर पुलिस अधीक्षक सुश्री दिक्षा ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों से अनुरोध है कि मामले की पुष्टि किए बिना कोई खबर आगे न बढ़ाएं। इस तरह की भ्रामक खबरों से आम जन में असुरक्षा का माहौल बनता है।” एक मीडिया चैनल के लिए अपनी ही खबर का खंडन करना बेहद शर्मनाक होता है। पत्रकारिता का सिद्धांत कहता है कि यदि कोई चैनल या पत्रकार गलत खबर प्रसारित करता है, तो उसे सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि कोई बार-बार ऐसी गलती करता है, तो ऐसे पत्रकारों और मीडिया चैनलों को प्रतिबंधित (बैन) कर देना चाहिए ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे।

भ्रामक खबर फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई

सोशल मीडिया पर गलत सूचना या भ्रामक खबरें फैलाने वाले ‘डिजिटल अपराधियों’ पर कानून का शिकंजा कसना तय है। भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत, सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने (Section 505), मानहानि, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के लिए ऐसे व्यक्तियों/चैनलों पर कठोर कार्रवाई की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को कारावास (जेल) के साथ-साथ भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। साथ ही, ऐसी सामग्री को हटाने के निर्देश के साथ-साथ उन चैनलों या सोशल मीडिया हैंडल्स को स्थायी रूप से ब्लॉक (Ban) करवाने की प्रक्रिया भी पुलिस प्रशासन द्वारा अपनाई जाती है ताकि समाज में अफवाहों और भय का वातावरण समाप्त किया जा सके।


बिहार पंचायत चुनाव 2026: कहीं कट न जाए आपका नाम! 27 अप्रैल से शुरू हो रहा ‘महा-मिलान’ अभियान, 11 मई तक ही मिलेगा मौका!

राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी की समय-सारणी; मतदाता सूची के प्रारूप (प्रपत्र-1) में नाम चेक करना अब हुआ अनिवार्य, ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प खुले।

पटना, बिहार: बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 की सुगबुगाहट तेज  है। राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने चुनाव की तैयारियों का बिगुल फूंकते हुए मतदाता क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण और मतदाता सूची के प्रारूप (प्रपत्र-1) के प्रकाशन की तारीख घोषित कर दी है। यदि आप भी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं या एक जागरूक मतदाता हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने साफ कर दिया है कि 27 अप्रैल 2026 को प्रपत्र-1 का प्रकाशन होगा। इसके साथ ही, आपत्तियां दर्ज कराने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।


तारीखों का कैलेंडर: कब क्या होगा?

आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस चुनावी प्रक्रिया का शेड्यूल इस प्रकार है:

कार्यमहत्वपूर्ण तिथियां
प्रपत्र-1 का प्रारूप प्रकाशन27 अप्रैल 2026
दावा/आपत्ति दर्ज करने की अवधि27 अप्रैल से 11 मई 2026
आपत्तियों का निष्पादन27 अप्रैल से 14 मई 2026
अपील वादों का निष्पादन18 मई से 22 मई 2026
प्रपत्र-1 का अंतिम प्रकाशन25 मई 2026
जिला गजट में प्रकाशन29 मई 2026

सावधान! प्रारूप सूचीही अंतिम नहीं है

राज्य निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया के माध्यम से सभी मतदाताओं को आगाह किया है कि “प्रारूप मतदाता सूची” केवल एक कच्चा मसौदा है। कई बार लोग इसे ही अंतिम मानकर बैठ जाते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती हो सकती है। आयोग का स्पष्ट निर्देश है कि मतदाता सूची में अपना नाम, वार्ड संख्या और अन्य विवरणों की अनिवार्य रूप से जांच करें ताकि अंतिम प्रकाशन से पहले गलतियों को सुधारा जा सके।

कैसे चेक करें और कहां करें आवेदन?

यदि आपको सूची में कोई त्रुटि मिलती है या नाम दर्ज नहीं है, तो आप इन दो माध्यमों से अपना दावा या आपत्ति दर्ज कर सकते हैं:

  • ऑनलाइन: आप सीधे राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट sec.bihar.gov.in पर जाकर अपनी आपत्ति दर्ज कर सकते हैं।
  • ऑफलाइन: प्रपत्र-1 से संबंधित दावा/आपत्ति के लिए एक लिखित आवेदन अपने संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) या अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के कार्यालय में जमा कर सकते हैं।
    • नोट: आवेदन जमा करने के बाद पावती रसीद (Acknowledgment Receipt) लेना न भूलें।

प्रकाशन स्थल:

प्रारूप प्रपत्र-1 का प्रकाशन निम्नलिखित स्थानों पर किया जाएगा:

  1. ग्राम पंचायत एवं पंचायत समिति पद हेतु: ग्राम पंचायत कार्यालय एवं प्रखंड कार्यालय।
  2. जिला परिषद सदस्य पद हेतु: अनुमंडल कार्यालय एवं जिला पदाधिकारी कार्यालय।
  3. आयोग की वेबसाइट पर।

चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए सलाह: यह समय आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अपने क्षेत्र की मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की विसंगति को समय रहते दूर करवाएं। 11 मई के बाद कोई भी नया दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा, इसलिए अंतिम तिथि का इंतजार न करें।

जागरूक बनें, अपना अधिकार निभाएं!


किसी भी सहायता के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के हेल्पलाइन नंबर 1800 3457 243 पर संपर्क करें।

बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री पर ‘ब्रेक’: 11 बड़े शहरों में निर्माण कार्यों पर सरकार की पाबंदी, जानें क्या है सरकार का ‘मास्टर प्लान’

पटना: बिहार सरकार ने राज्य के शहरी विकास को लेकर एक बेहद साहसी और बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में कुल 22 एजेंडों पर मुहर लगी, जिसमें सबसे चर्चित निर्णय “11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप” के विकास का रहा। सरकार ने राज्य के 11 प्रमुख शहरों में जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और नए निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

यह निर्णय न केवल प्रॉपर्टी मार्केट में हलचल मचाने वाला है, बल्कि बिहार के भविष्य के शहरीकरण की दिशा भी तय करेगा।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

नगर विकास एवं आवास विभाग के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राज्य में अनियोजित शहरीकरण (Haphazard Urbanization) को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। ‘सात निश्चय-3’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए सरकार का मुख्य उद्देश्य इन 11 शहरों को आधुनिक और व्यवस्थित टाउनशिप के रूप में विकसित करना है।

सरकार के इस कदम के मुख्य लाभ:

  • सुनियोजित शहरीकरण: मास्टर प्लान के तहत शहर का विकास, ताकि गलियां, सड़कें और जल निकासी जैसी समस्याएं न हों।
  • दबाव में कमी: सैटेलाइट टाउनशिप बनने से पुराने शहरों (Existing Cities) पर आबादी का दबाव कम होगा।
  • आर्थिक विकास: नए आर्थिक केंद्रों (Economic Activity Centers) का निर्माण होगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
  • विश्वस्तरीय सुविधाएं: नागरिकों को बेहतर और आधुनिक शहरी सुविधाएं मिल सकेंगी।

किन शहरों पर लगा ताला‘? (सूची और समय-सीमा)

सरकार ने इन शहरों को दो समूहों में बांटकर अलग-अलग डेडलाइन तय की है। इन तिथियों तक इन क्षेत्रों में भूमि विकास या निर्माण कार्य पर प्रतिबंध प्रभावी रहेगा:

चरणशहर (टाउनशिप)डेडलाइन (रोक की अवधि)
प्रथम चरणपटना, सोनपुर, गयाजी, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर31 मार्च, 2027 तक
द्वितीय चरणमुजफ्फरपुर, छपरा, भागलपुर, सीतामढ़ी (सीतापुरम)30 जून, 2027 तक

आम जनता के लिए क्या हैं मायने?

इस फैसले का सीधा असर रियल एस्टेट सेक्टर और उन लोगों पर पड़ेगा जो इन चिन्हित शहरों के ‘कोर एरिया’ या ‘विशेष क्षेत्र’ में जमीन खरीदने या घर बनाने की योजना बना रहे हैं।

  1. जमीन की रजिस्ट्री/हस्तांतरण पर रोक: चिन्हित टाउनशिप क्षेत्रों के मास्टर प्लान और जोनल प्लान लागू होने तक यहां भूमि हस्तांतरण और खरीद-बिक्री प्रभावित रहेगी।
  2. निर्माण पर पाबंदी: बिना मास्टर प्लान की स्वीकृति के नए भवनों का निर्माण या भूमि विकास के कार्य (जैसे प्लाटिंग या कमर्शियल निर्माण) अब संभव नहीं होंगे।
  3. सावधानी जरूरी: सरकार का स्पष्ट संकेत है कि अब बिहार में बिना योजना (Master Plan) के कोई भी निर्माण नहीं होगा। यदि आप इन क्षेत्रों में निवेश करना चाहते हैं, तो स्थानीय नगर विकास कार्यालय से संपर्क करना उचित होगा।

सरकार का विजन: सात निश्चय-3

यह कवायद सरकार के बहुप्रतीक्षित ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम का हिस्सा है। सरकार चाहती है कि जिस तरह देश के कुछ बड़े राज्यों ने सैटेलाइट टाउनशिप के जरिए शहरों का विस्तार किया है, उसी तर्ज पर बिहार के इन 11 शहरों को विकसित किया जाए। यह प्राइवेट और संस्थागत निवेश को आकर्षित करने के लिए भी एक बड़ी पहल मानी जा रही है।

निष्कर्ष: भले ही यह रोक अस्थायी है, लेकिन यह बिहार के शहरी परिदृश्य को बदलने वाला एक दूरगामी फैसला है। सरकार अब “पहले योजना, फिर निर्माण” की नीति पर काम कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए व्यवस्थित और सुविधापूर्ण शहर तैयार किए जा सकें।


(अस्वीकरण: यह खबर सरकारी प्रेस नोट और कैबिनेट के निर्णयों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए स्थानीय जिला प्रशासन या नगर विकास विभाग की आधिकारिक वेबसाइट देखें।)