Sunday, June 7, 2026

अहमदपुर में वार्ड स्तरीय बाल संरक्षण समिति का गठन, बाल विवाह मुक्त समाज का संकल्प

सरायरंजन (समस्तीपुर)। प्रखंड के ग्राम पंचायत राज गंगसारा अंतर्गत अहमदपुर गाँव (वार्ड नंबर 5) में गुरुवार को बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, अख्तियारपुर के सहयोग से आयोजित इस बैठक में सर्वसम्मति से ‘वार्ड स्तरीय बाल कल्याण और संरक्षण समिति’ का गठन किया गया।

प्रशासनिक मार्गदर्शन और उद्देश्य

यह पहल प्रखंड पंचायती राज विभाग, समेकित बाल विकास परियोजना (ICDS) और जिला बाल संरक्षण इकाई, समस्तीपुर के मार्गदर्शन में शुरू की गई है। संस्था द्वारा क्षेत्र के आठ गाँवों के विभिन्न वार्डों में इस तरह की समितियों का गठन किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर बच्चों के मुद्दों का समाधान हो सके।

सुरक्षा और शिक्षा पर जोर

बैठक की अध्यक्षता वार्ड सदस्या  राधा देवी ने की, जबकि संचालन सीनियर रिसर्च कंसल्टेंट दिनेश प्रसाद चौरसिया ने किया। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और समाज की है।

  • शिक्षा: 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए आंगनवाड़ी और 6-18 वर्ष के बच्चों के लिए अनिवार्य स्कूली शिक्षा पर जोर दिया गया।
  • बाल विवाह: विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि लड़कियों की 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष से कम उम्र में शादी करना कानूनी अपराध है।

समिति का स्वरूप

नवनियुक्त समिति में समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया गया है:

  • अध्यक्ष: राधा देवी (वार्ड सदस्य)
  • उपाध्यक्ष: भगवान यादव (पंच सदस्य)
  • सचिव: सुनीता देवी (सेविका)
  • सदस्य: संजय कुमार महतो (शिक्षक), जयंती कुमारी (आशा), स्वाति कुमारी (बाल संसद), संगम कुमारी (किशोरी समूह), रूबी कुमारी (जीविका), लक्ष्मी पासवान (चौकीदार) समेत 14 सदस्य।
पदनामप्रतिनिधित्व
अध्यक्षराधा देवीवार्ड सदस्य
उपाध्यक्षभगवान यादवपंच सदस्य
सचिवसुनीता देवीआंगनवाड़ी सेविका
सदस्यसंजय कुमार महतोशिक्षक (प्रा. वि. अहमदपुर)
सदस्यजयंती कुमारीआशा कार्यकर्ता
सदस्यस्वाति कुमारीबाल संसद
सदस्यसंगम कुमारीकिशोरी समूह
सदस्यरूबी कुमारीजीविका
सदस्यलक्ष्मी पासवानचौकीदार

नियमित निगरानी की अपील

संस्था की कोषाध्यक्ष वीणा कुमारी और कंसल्टेंट ललिता कुमारी ने कहा कि बच्चों की खुशहाली के लिए परिवार का संवेदनशील होना जरूरी है। कार्यक्रम के अंत में शिक्षक संजय कुमार महतो ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी सदस्यों से महीने में कम से कम एक बार बैठक कर गांव के बच्चों की समस्याओं पर चर्चा करने का आग्रह किया।

संसाधनों की चिंता छोड़ें, शिक्षा पर दें ध्यान: संत जोसेफ स्कूल में नामांकन परीक्षा संपन्न, छात्रों को मिलेगी ‘फ्री बस’ की सौगात

??????????

सकरा (मुजफ्फरपुर): शिक्षा के प्रति समर्पण और छात्रों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए संत जोसेफ प्रेप पब्लिक स्कूल, सरमस्‍तपुर (सकरा) ने नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को विद्यालय में नामांकन हेतु प्रवेश परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस विशेष जांच परीक्षा के लिए सबहा सुजावलपुर शाखा को केंद्र बनाया गया था, जहाँ सुबह से ही परीक्षार्थियों और अभिभावकों की भारी चहल-पहल देखी गई।

मेधावियों का जमावड़ा: 250 से अधिक बच्चों ने दी परीक्षा

विद्यालय के प्राचार्य दीपक मिश्र ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस सत्र में नामांकन के लिए क्षेत्र के बच्चों में अभूतपूर्व उत्साह देखा गया। परीक्षा के लिए 250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपना पंजीकरण कराया था। परीक्षा अपने निर्धारित समय सुबह 10:30 बजे शुरू हुई और पूरी तरह से कदाचार मुक्त व शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। प्रश्न पत्र को इस तरह तैयार किया गया था कि वह बच्चों की तार्किक क्षमता और रचनात्मकता का सही आकलन कर सके।

प्रबंधन का बड़ा फैसला: निःशुल्क बस सेवा की घोषणा

परीक्षा के दौरान विद्यालय प्रबंधन ने छात्रों के हित में एक क्रांतिकारी घोषणा की। प्रबंधन के अनुसार, सबहा सुजावलपुर शाखा के वे छात्र जो वर्तमान में अपने निजी संसाधनों (साइकिल या अन्य वाहनों) से विद्यालय आते हैं, यदि वे उच्च शिक्षा या बेहतर समन्वय के लिए सरमस्‍तपुर (सकरा) शाखा में पढ़ाई करना चाहते हैं, तो उन्हें विद्यालय प्रशासन की ओर से निःशुल्क बस सेवा (Free Bus Facility) प्रदान की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य छात्रों के यातायात के बोझ को कम करना और उन्हें सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित कराना है।

परिणाम और स्पॉट नामांकनकी प्रक्रिया

प्राचार्य दीपक मिश्रा ने बताया कि प्रवेश परीक्षा का परिणाम 22 फरवरी 2026 को घोषित किया जाएगा। परिणाम जारी होने के साथ ही सफल अभ्यर्थियों का साक्षात्कार और नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी। जो छात्र किसी कारणवश आज की परीक्षा में शामिल होने से चूक गए हैं, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है; वे स्पॉट नामांकन‘ (On-the-spot Admission) प्रक्रिया के माध्यम से इस अवसर का लाभ उठा सकेंगे।

अभिभावकों ने की सराहना

केंद्र पर मौजूद अभिभावकों ने विद्यालय के अनुशासित माहौल और प्रबंधन द्वारा दी गई मुफ्त बस सेवा की सराहना की। अभिभावकों का कहना है कि आर्थिक संसाधनों की चिंता किए बिना अब उनके बच्चे बेहतर परिसर में शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे। प्राचार्य ने स्पष्ट किया कि स्कूल का विजन केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को हर प्रकार की सुविधा देकर उनके भविष्य को संवारना है।

चिमनियों से धुआं निकलने तक जारी रहेगा संघर्ष: समस्तीपुर चीनी मिल को लेकर 22 को ‘नागरिक मार्च’

समस्तीपुर | 19 फरवरी, 2026

शहर की लाइफलाइन को पुनर्जीवित करने की जगी आस, जिला विकास मंच ने जारी किया पोस्टर

समस्तीपुर की ऐतिहासिक पहचान और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार रही समस्तीपुर चीनी मिल को पुनः चालू करने की मांग ने अब एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। जिला विकास मंच, समस्तीपुर ने इस आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए कमर कस ली है। मंच द्वारा जारी ताजा पोस्टर के अनुसार, आगामी 22 फरवरी, 2026 को शहर में एक विशाल नागरिक मार्च निकाला जाएगा।

22 फरवरी को सरकारी बस स्टैंड पर जुटेगा जनसैलाब

जिला विकास मंच ने आह्वान किया है कि चीनी मिल की बहाली के लिए सभी नागरिक रविवार (22 फरवरी) को दोपहर 3:00 बजे स्थानीय सरकारी बस स्टैंड पर एकत्रित हों। यहाँ से शुरू होने वाला यह मार्च प्रशासन और सरकार तक क्षेत्र की जनता की दबी हुई आवाज को पहुँचाने का काम करेगा।

कल माधुरी चौक पर गूंजा था इंकलाब

विदित हो कि मंगलवार (18 फरवरी) को रेल विकास-विस्तार मंच और जिला विकास मंच के बैनर तले कार्यकर्ताओं ने माधुरी चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया था।

  • हुंकार: मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी की अध्यक्षता में आयोजित सभा में वक्ताओं ने मिल को चालू करने की मांग को लेकर हुंकार भरी।
  • दर्द: सेवानिवृत्त शिक्षक शंकर साह ने कहा कि 1917 में अंग्रेजों द्वारा स्थापित यह मिल 1995 में बंद होने के बाद से क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई है।
  • समर्थन: राजद नेता राकेश ठाकुर और माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने भी इस लड़ाई में किसानों, मजदूरों और नौजवानों को एकजुट होने की अपील की है।

क्यों जरूरी है मिल का चालू होना?

1917 में स्थापित यह मिल न केवल चीनी उत्पादन का केंद्र थी, बल्कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार देती थी। मिल के पास आज भी पर्याप्त भूमि और रेल-सड़क मार्ग की बेहतर कनेक्टिविटी मौजूद है। 1995 से बंद पड़ी इस मिल को चालू करना अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि समस्तीपुर के मान-सम्मान की लड़ाई बन गई है।

मुजफ्फरपुर: सरकारी स्कूलों में ‘डिजिटल हाजिरी’ पर कड़ा रुख, लापरवाह एचएम को 72 घंटे का अल्टीमेटम

मुजफ्फरपुर | 18 फरवरी, 2026 बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की मुहिम में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर जिला शिक्षा विभाग ने शिकंजा कस दिया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान), सुजीत कुमार दास ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को कड़े निर्देश दिए हैं कि छात्रों की उपस्थिति अब अनिवार्य रूप से ‘ई-शिक्षाकोष’ पोर्टल पर दर्ज की जाए।

समीक्षा में खुली पोल: आदेश के बाद भी नहीं बदला ढर्रा

विभागीय पत्र (पत्रांक-404) के अनुसार, इससे पूर्व 5 फरवरी 2026 को ज्ञापांक-292 के माध्यम से जिले के सभी सरकारी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि वे विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए टैब (Tab) का उपयोग कर ई-शिक्षाकोष पर छात्र-छात्राओं की उपस्थिति दर्ज करें। हालांकि, हाल ही में जब विभाग ने इसकी समीक्षा की, तो पाया गया कि अधिकांश विद्यालयों में इस डिजिटल प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और पोर्टल पर उपस्थिति शून्य या नगण्य है।

72 घंटे के भीतर सुधारने होंगे हालात

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से सभी छात्रों की हाजिरी टैब के माध्यम से सुनिश्चित कराई जाए। विभाग ने साफ कर दिया है कि टैब उपलब्ध होने के बावजूद डिजिटल पोर्टल का उपयोग न करना विभागीय दिशा-निर्देशों की अवहेलना है।

इन अधिकारियों और कर्मियों को दी गई जिम्मेदारी

व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए इस आदेश की प्रतिलिपि निम्नलिखित स्तरों पर भेजी गई है:

  • प्रखंड संसाधन केंद्र (BRC): सभी लेखा सहायक और डेटा एंट्री ऑपरेटरों को निगरानी के लिए सूचित किया गया है।
  • विद्यालय स्तर: जिले के सभी प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों (HM) और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।
  • वरिष्ठ अधिकारी: जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को भी इस कार्यवाही की सूचना साझा की गई है।

शिक्षा विभाग के इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में मुजफ्फरपुर के सरकारी स्कूलों में उपस्थिति की निगरानी पूरी तरह डिजिटल होगी। यदि अगले तीन दिनों में पोर्टल पर सुधार नहीं दिखता है, तो संबंधित विद्यालयों के प्रधानों पर विभागीय गाज गिरनी तय मानी जा रही है।

बिहार में दिखा रमजान का चाँद: कल 19 फरवरी को होगा पहला रोजा, मिल्ली काउंसिल ने की घोषणा

पटना (बिहार): इबादत और बरकतों का पवित्र महीना ‘रमजान’ कल से शुरू होने जा रहा है। ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल, बिहार ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि देश के विभिन्न हिस्सों में रमजान-उल-मुबारक 1447 हिजरी का चाँद नजर आ गया है। इसके साथ ही कल, 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) को रमजान की पहली तारीख होगी और पहला रोजा रखा जाएगा।

चाँद की तस्दीक और आधिकारिक घोषणा ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष और रुइयत-ए-हिलाल कमेटी के संयोजक हजरत मौलाना डॉ. मोहम्मद आलम कासमी ने बताया कि बुधवार शाम को पटना के फुलवारी शरीफ स्थित राज्य कार्यालय और राज्य की विभिन्न शाखाओं में चाँद देखने का विशेष इंतजाम किया गया था। यद्यपि पटना और आसपास के आसमान में बादलों या अन्य कारणों से चाँद स्पष्ट रूप से नहीं दिखा, लेकिन देश के अन्य राज्यों और शहरों से चाँद दिखने की पुख्ता और विश्वसनीय गवाही (खबर) प्राप्त हुई है।

सांप्रदायिक सौहार्द की अपील मिल्ली काउंसिल के सचिव फैजान रजी कासमी द्वारा जारी इस विज्ञप्ति के बाद मुस्लिम समुदाय में खुशी की लहर है। मस्जिदों में आज रात से ही विशेष नमाज ‘तरावीह’ शुरू हो जाएगी। काउंसिल ने इस पाक महीने के अवसर पर मुल्क में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ करने की अपील की है।

मुख्य बिंदु:

  • चाँद दिखने की तारीख: 18 फरवरी 2026 (बुधवार)
  • पहला रोजा: 19 फरवरी 2026 (गुरुवार)
  • घोषणाकर्ता: ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल, बिहार

बेटियों के बेहतर स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए जागरूकता शिविर का आयोजन

बाल विवाह के खिलाफ एकजुट हुआ समाज; ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओके तहत हांसा में लगा स्वास्थ्य शिविर

समस्तीपुर | 18 फरवरी, 2026 राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले के विकास खंडों में बेटियों के सशक्तिकरण की गूँज सुनाई दी। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास निगम, समस्तीपुर द्वारा उच्च माध्यमिक विद्यालय, हांसा एवं राजकीय बुनियादी विद्यालय, हांसा में संयुक्त रूप से स्वास्थ्य जांच शिविर और जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

बाल विवाह कुप्रथा पर प्रहार

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र की कार्यक्रम समन्वयक दीप्ति कुमारी ने छात्राओं को बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों के प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा, “बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह एक बालिका के शारीरिक और मानसिक विकास को पूरी तरह बाधित कर देता है।” उन्होंने इसके सामाजिक प्रभाव और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जोर

लेखापाल पप्पू यादव ने किशोरियों के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Health & Hygiene) के महत्व को साझा किया। उन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी।

विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य जांच

स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉ. प्रशांत कुमार एवं डॉ. संजुक्ता आनंद के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने छात्राओं की स्वास्थ्य जांच की। इसमें एएनएम वीणा कुमारी, सीएचओ नेहा कुमारी और फार्मासिस्ट ब्रजेश कुमार ने छात्राओं को आवश्यक चिकित्सीय परामर्श और दवाएं उपलब्ध कराईं।

प्रशासनिक और स्वयंसेवी संस्थाओं की उपस्थिति

महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से गौरव कुमार (DMC), रवि प्रकाश सिंह (DPM), डॉली कुमारी (जेंडर स्पेशलिस्ट) सहित कुणाल, राजेश और दीपशिखा कुमारी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं ‘प्रयास’ संस्था से नीतू जोशेफ, सोनेलाल ठाकुर और प्रभात कुमार ने भी अपने अनुभवों और विभागीय योजनाओं को साझा किया।

विद्यालय प्रशासन का सहयोग

कार्यक्रम को सफल बनाने में उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय कुमार एवं राजकीय बुनियादी विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय कुमार की अहम भूमिका रही। शिक्षक किरण कुमारी एवं गुंजेश कुमार ‘गुंजन’ ने छात्राओं को प्रेरित किया। छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े अपनी शंकाओं का समाधान किया।

सिस्टम की जर्जर हालत: परीक्षा केंद्र के गेट पर ही जान जोखिम में डाल रहे छात्र, निकास द्वार के सामने खुला नाला बना मुसीबत

समस्तीपुर, शहर के घोषलेन स्थित परीक्षा केंद्र पर प्रशासन और नगर निगम की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। केंद्र के मुख्य निकास द्वार के ठीक सामने नाले पर रखा स्लैब पूरी तरह जर्जर होकर टूट चुका है। परीक्षा खत्म होते ही जब सैकड़ों छात्र एक साथ बाहर निकलते हैं, तो यहाँ जान जोखिम में डालने वाली स्थिति पैदा हो जाती है।

780 परीक्षार्थी, एक टूटा स्लैब और गहरा नाला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस केंद्र पर प्रतिदिन लगभग 780 परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुँच रहे हैं। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब छात्र-छात्राओं की भीड़ बाहर निकलती है, तो उन्हें इसी टूटे हुए स्लैब के संकरे हिस्से से होकर गुजरना पड़ता है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि छात्र संतुलन बनाकर इस गड्ढे को पार कर रहे हैं। जरा सी चूक या पीछे से आने वाले धक्का-मुक्की के कारण कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।

भगदड़ और बड़े हादसे की आशंका

निकास द्वार पर जगह कम होने के कारण अक्सर छात्रों के बीच आपाधापी मच जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि:

अगर भीड़ के दबाव में किसी का पैर फिसला, तो वह सीधे गहरे नाले में जा गिरेगा। भगदड़ की स्थिति में यहाँ बड़ी जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”

मुख्य समस्याएं जो प्रशासन को नहीं दिख रहीं:

  • संकरा रास्ता: निकास द्वार के ठीक सामने नाला होने से रास्ता बेहद संकरा हो गया है।
  • जर्जर स्लैब: स्लैब का आधा हिस्सा टूटकर नाले में गिर चुका है, जिससे केवल एक पतली पट्टी बची है।
  • सुरक्षा का अभाव: इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी के बावजूद वहां सुरक्षा के लिए कोई बैरिकेडिंग या वैकल्पिक रास्ता नहीं बनाया गया है।

हमारी मांग: अभिभावकों और छात्रों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि परीक्षा की गंभीरता को देखते हुए इस स्लैब की तत्काल मरम्मत कराई जाए या वहां लोहे की प्लेट डालकर रास्ता सुरक्षित किया जाए ताकि भविष्य में किसी अनहोनी को टाला जा सके।

समस्तीपुर की बंद चीनी मिल को पुनर्जीवित करने की उठी मांग, शहर में निकला विरोध जुलूस

समस्तीपुर | 18 फरवरी, 2026

शहर की ऐतिहासिक समस्तीपुर चीनी मिल को पुनः चालू करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। मंगलवार की शाम रेल विकास-विस्तार मंच एवं जिला विकास मंच के संयुक्त तत्वावधान में कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। माधुरी चौक से जोरदार नारों के साथ जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

हुंकार: “रोजी-रोटी का आधार थी यह मिल”

जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण करने के पश्चात पुनः माधुरी चौक पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया। सभा की अध्यक्षता मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने की।

सभा को संबोधित करते हुए सेवानिवृत्त शिक्षक और मंच के वरीय सदस्य शंकर साह ने भावुक होते हुए कहा:

“अंग्रेजों के जमाने की यह मिल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों के भरण-पोषण का साधन थी। मिल के पास आज भी पर्याप्त जमीन और आवागमन के बेहतर साधन उपलब्ध हैं। अगर सरकार की इच्छाशक्ति हो, तो इसे आसानी से शुरू कर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदला जा सकता है।”

राजनीतिक दलों ने दिया समर्थन

आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। राजद नेता राकेश ठाकुर और भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने साझा बयान में कहा कि अब समय आ गया है जब सभी राजनीतिक दलों, बुद्धिजीवियों, छात्रों और किसानों को एक मंच पर आकर संघर्ष तेज करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मिल चालू नहीं होती, यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

1995 से बंद है समस्तीपुर की लाइफलाइन

विदित हो कि इस चीनी मिल की स्थापना 1917 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी। दशकों तक यह मिल जिले की आर्थिक रीढ़ बनी रही, लेकिन 1995 में अचानक आई रुकावटों के कारण इसे बंद कर दिया गया। तब से लेकर आज तक कई चुनाव हुए और कई वादे किए गए, लेकिन मिल की चिमनियों से धुआं नहीं निकला।

सभा में ये रहे मौजूद: कार्यक्रम में मुख्य रूप से राम विनोद ,जीबछ पासवान, अरुण कुमार राय, राजेंद्र राय, पिंकू पासवान, रामलाल राम, संतोष कुमार निराला, डोमन राय, विश्वनाथ सिंह हजारी, रंभू राय, नंदू महतो, शाहीद हुसैन, मनोज कुमार राय, सुधीर प्रसाद गुप्ता और रामदयालू महतो सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

महिला सहकारी समितियों की ताकत और भविष्य पर वेबिनार का आयोजन कल

मुजफ्फरपुर : महिला सशक्तिकरण और सहकारी समितियों की भूमिका पर चर्चा करने के लिए आगामी शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। ‘जब महिला श्रमिक कमान संभालती हैं: महिला सहकारी समितियों की आवाज़ें’ विषय पर आधारित यह ऑनलाइन सत्र शाम 6:00 बजे से 8:00 बजे तक चलेगा।

यह वेबिनार 24 अक्टूबर 2025 को श्रमिक सहकारी समितियों और लोकतांत्रिक आर्थिक व्यवस्था पर आयोजित सफल सत्र की अगली कड़ी है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम कर रही महिला कामगारों के अनुभवों और चुनौतियों को साझा करना है।

प्रमुख वक्ता और विशेषज्ञ

सत्र में देश के विभिन्न हिस्सों से महिला नेतृत्व भाग लेंगी:

  • गीता खाँट: पनम महिला क्रेडिट सहकारी समिति (गुजरात)
  • एम. नूकम्मा: एसएसएफ फिश प्रोड्यूसर को-ऑप लिमिटेड (आंध्र प्रदेश)
  • कोनिका धनवार: मधु चाय बागान (पश्चिम बंगाल)
  • शीबा संजेश: करी पाउडर कंसोर्टियम (केरल)

कार्यक्रम का संचालन कृष्णा प्रिया चोरागुड़ी द्वारा किया जाएगा। चर्चा को समृद्ध बनाने के लिए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़, शोधकर्ता शुभश्री घटक और एम.के. श्रवण, आनंदी इंडिया से तारुलता सोलंकी और फिशकॉन से अर्जिली दासू भी शामिल होंगे।

आयोजन का उद्देश्य

जन स्वास्थ्य अभियान (JSA) और ‘रिसर्च फॉर एक्शन’ के सहयोग से आयोजित इस चर्चा का केंद्र यह है कि कैसे सहकारी समितियां महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक नेतृत्व प्रदान कर रही हैं। यह सत्र स्वास्थ्य समानता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शामिल होने का माध्यम

इच्छुक प्रतिभागी ज़ूम (Zoom) लिंक https://shorturl.at/GhEnP के माध्यम से या पोस्टर पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके इस वेबिनार का हिस्सा बन सकते हैं। यह डिस्कशन देखने के लिए, https://groups.google.com/d/msgid/jsadiscuss/010e5445-6049-4e58-b387-6f278b59d866%40riseup.net पर जाएं।

सकरा में दहेजमुक्त और आडंबररहित बौद्ध रीति-रिवाज से संपन्न हुआ नंदिनी और राजीव का विवाह

विजन वैली हॉल में गूंजे नमो बुद्धायके जयकारे, भंते मणिकीर्ति पासवान ने कराया विवाह संपन्न

सकरा (मुजफ्फरपुर): समाज में फैली कुरीतियों और फिजूलखर्ची पर प्रहार करते हुए, सकरा प्रखंड के विजन वैली हॉल में एक आदर्श विवाह का आयोजन किया गया। यह विवाह पूरी तरह से बौद्ध रीति-रिवाज (बौद्ध विधि) से संपन्न हुआ, जिसमें न तो दहेज की मांग थी और न ही कोई दिखावा या आडंबर। राजीव कुमार बौद्ध और नंदिनी कुमारी बौद्ध के परिणय सूत्र में बंधने के इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने सैकड़ों मेहमानों ने इस अनूठी पहल की जमकर सराहना की।

आडंबरमुक्त और सादगीपूर्ण समारोह : शादी का माहौल पारंपरिक शोर-शराबे से कोसों दूर था। आमतौर पर शादियों में होने वाला डीजे का शोर, फिजूलखर्ची और दिखावा यहाँ पूरी तरह नदारद था। कार्यक्रम की शुरुआत तथागत बुद्ध की वंदना के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने बुद्ध और डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों का पालन करते हुए सादगी के साथ वर-वधू को आशीर्वाद दिया।

भंते मणिकीर्ति पासवान ने दिलाई शपथ : इस विवाह को संपन्न कराने के लिए विशेष रूप से भंते मणिकीर्ति पासवान एवं पवन शर्मा  उपस्थित थे। उन्होंने बौद्ध विधियों का पालन करते हुए वर-वधू को अष्टशील और पंचशील का पाठ पढ़ाया। भंते जी ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्ध विवाह का उद्देश्य केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों को बुद्ध के धम्म और तर्कसंगत विचारधारा से जोड़ना है। उन्होंने वर-वधू को जीवन भर एक-दूसरे का सम्मान करने और विपत्ति में भी धम्म के मार्ग पर चलने की शपथ दिलाई।

दहेजमुक्त समाज का संदेश : आयोजकों का मुख्य उद्देश्य समाज को दहेजमुक्त बनाना था। इस विवाह में वर पक्ष ने कन्या पक्ष से किसी भी प्रकार के लेनदेन से साफ इनकार कर दिया, जो आज के समय में एक मिसाल है। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि एवं भन्‍ते पवन शर्मा ने कहा कि “यह शादी सामाजिक बदलाव का एक बड़ा प्रतीक है। युवा पीढ़ी को ऐसी सादी शादियों से प्रेरणा लेनी चाहिए।”

प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति : कार्यक्रम में वर-वधू को आशीर्वाद देने के लिए क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। बैनर पर महात्मा बुद्ध, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, संत रविदास सहित अन्य महापुरुषों की तस्वीरें इस बात की गवाह थीं कि यह विवाह सामाजिक समानता और तर्कवादी सोच पर आधारित था।

मिशन सिंगरने बिखेरा धम्म का रंग : कार्यक्रम को संगीतमय बनाने के लिए प्रसिद्ध ‘मिशन सिंगर’ राजेश कुमार बौद्ध, संगीता बौद्ध, महेश्वरी बौद्ध और निम्ति बौद्ध ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने बुद्ध और अंबेडकर के गीतों के माध्यम से माहौल को भक्तिमय और बौद्धमय बना दिया।

परिजनों और स्वागतकर्ता का सहयोग : शादी के आयोजन में स्वागतकर्ता जलेंद्र राम (ग्राम: चंदपुर फतेह, पोस्ट: राजापाकर, थाना: पातेपुर, जिला: वैशाली) और वर-वधू के परिजनों ने मेहमानों के स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ी। कार्यक्रम को सफल बनाने में ऋषि कुमार, सोनू कुमार, वकील कुमार और समस्त बौद्ध परिवार ने अहम भूमिका निभाई। यह विवाह न केवल राजीव और नंदिनी के जीवन की नई शुरुआत है, बल्कि यह सकरा क्षेत्र में एक नए, शिक्षित और आडंबरमुक्त समाज की दिशा में एक बड़ा कदम है।