पटना | डिजिटल डेस्क | आज के डिजिटल दौर में ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ की अंधी दौड़ ने पत्रकारिता की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। व्यूज बटोरने और सनसनी फैलाने के चक्कर में कुछ तथाकथित यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया चैनलों ने (न्‍यूज भारत टीवी नहीं ) संवेदनशीलता की सभी हदें पार कर दी हैं। पटना के कदमकुआं थाना क्षेत्र से आई एक घटना ने इस कड़वे सच को उजागर किया है कि कैसे बिना किसी पुष्टि के, एक मासूम छात्रा की तस्वीर के साथ छेड़खानी की फर्जी खबर फैलाकर पूरे शहर में दहशत का माहौल बनाया गया।

तथाकथित चैनलों के द्वारा गलत खबर चलाये जाने की जानकारी रखते हुए  सुश्री दिक्षा, नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) पटना,

क्या थी फेक न्यूज़की साजिश?

दिनांक 22 अप्रैल 2026 को सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर एक सनसनीखेज खबर प्रसारित की गई कि कदमकुआं इलाके में एक नाबालिग लड़की के साथ छेड़खानी हुई है। इस खबर के साथ छात्रा की फोटो भी वायरल कर दी गई, जिससे समाज में न केवल आक्रोश फैला, बल्कि पीड़ित परिवार की प्रतिष्ठा को भी गहरी चोट पहुंची। यह उस पत्रकारिता का चेहरा है, जहाँ सच से ज्यादा सनसनी को प्राथमिकता दी जा रही है।

पुलिस की जांच में खुला झूठ का पुलिंदा

मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना पुलिस ने त्वरित संज्ञान लिया। नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य), सुश्री दिक्षा ने स्वयं जांच का नेतृत्व किया। जब पुलिस ने घटनास्थल के आसपास के लोगों, विद्यालय प्रबंधन और स्वयं छात्रा से पूछताछ की, तो सच्चाई सामने आई। पुलिस के अनुसार, किसी प्रकार की छेड़खानी नहीं हुई थी। सच्चाई यह थी कि एक मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति राहगीरों पर ईंट-पत्थर फेंक रहा था, जिससे छात्रा डर गई थी। स्थानीय लोगों ने उसे सुरक्षित घर पहुंचाया। छात्रा और परिजनों ने स्पष्ट रूप से छेड़खानी की घटना को नकार दिया है।

मीडिया की जिम्मेदारी

नगर पुलिस अधीक्षक सुश्री दिक्षा ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, सोशल मीडिया और यूट्यूब चैनलों से अनुरोध है कि मामले की पुष्टि किए बिना कोई खबर आगे न बढ़ाएं। इस तरह की भ्रामक खबरों से आम जन में असुरक्षा का माहौल बनता है।” एक मीडिया चैनल के लिए अपनी ही खबर का खंडन करना बेहद शर्मनाक होता है। पत्रकारिता का सिद्धांत कहता है कि यदि कोई चैनल या पत्रकार गलत खबर प्रसारित करता है, तो उसे सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि कोई बार-बार ऐसी गलती करता है, तो ऐसे पत्रकारों और मीडिया चैनलों को प्रतिबंधित (बैन) कर देना चाहिए ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे।

भ्रामक खबर फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई

सोशल मीडिया पर गलत सूचना या भ्रामक खबरें फैलाने वाले ‘डिजिटल अपराधियों’ पर कानून का शिकंजा कसना तय है। भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट के तहत, सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने (Section 505), मानहानि, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के लिए ऐसे व्यक्तियों/चैनलों पर कठोर कार्रवाई की जा सकती है। दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति को कारावास (जेल) के साथ-साथ भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। साथ ही, ऐसी सामग्री को हटाने के निर्देश के साथ-साथ उन चैनलों या सोशल मीडिया हैंडल्स को स्थायी रूप से ब्लॉक (Ban) करवाने की प्रक्रिया भी पुलिस प्रशासन द्वारा अपनाई जाती है ताकि समाज में अफवाहों और भय का वातावरण समाप्त किया जा सके।


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