मुजफ्फरपुर/पटना: कल 29 अप्रैल, 2026 का दिन बिहार की राजनीति का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से उठने वाली दलित, पिछड़े और अति-पिछड़े वर्ग की हुंकार को रोकने की ताकत शायद ही किसी सरकार में हो। केशोपुर स्थित गाइडलाइन विद्याश्रम स्कूल में मुजफ्फरपुर इकाई की समीक्षा बैठक के बाद, नेताओं ने जो तेवर दिखाए हैं, वह स्पष्ट संकेत हैं कि सरकार के लिए ‘चेतावनी का समय’ समाप्त हो चुका है और अब ‘संघर्ष का समय’ आ गया है।

“क्रांति का ब्लूप्रिंट: अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ द्वारा जारी किए गए विरोध प्रदर्शन का रूट चार्ट। 29 अप्रैल को 10,000 से अधिक कार्यकर्ता गांधी मैदान से निकलकर सरकार को ज्ञापन सौंपेंगे और शिक्षा से लेकर न्यायपालिका तक में हिस्सेदारी की मांग करेंगे।”

नेताओं की ललकार: सत्ता की चूलें हिलाने को तैयार

आगामी प्रदर्शन को लेकर जो बातें प्रमुख नेताओं ने कहीं, वे इस आंदोलन की गंभीरता को दर्शाती हैं:

 संतोष कुशवाहा (जगदेव विचार मंच): “यह आंदोलन नहीं, वैचारिक क्रांति है”

बैठक को संबोधित करते हुए संतोष कुशवाहा ने पूरे आंदोलन को एक वैचारिक पृष्ठभूमि दी। उन्होंने कहा:

“बिहार की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आने वाला है। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि ‘शहीद जगदेव प्रसाद’, ‘महात्मा ज्योतिबा फुले’ और ‘संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अम्बेडकर’ की विरासत को पुनर्जीवित करने का संकल्प है। हमारा कारवां जब गांधी मैदान के गेट नंबर 1 से निकलेगा, तो वह सत्ता के गलियारों में बैठे हर उस शख्स को सोचने पर मजबूर कर देगा, जो पिछले कई वर्षों से उपेक्षित वर्गों के अधिकारों को दबाए बैठा है। 29 अप्रैल का दिन इस बात का गवाह बनेगा कि जब शोषित वर्ग अपनी अस्मिता के लिए खड़ा होता है, तो बड़े-बड़े सिंहासन डोलने लगते हैं।”

 शशि गुप्ता: “मांगें नहीं, ये हमारे अधिकार हैंसरकार के पास कोई विकल्प नहीं”

आंदोलन के एजेंडे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए शशि गुप्ता ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने साफ कहा:

“हमारी मांगें अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि सड़कों पर उतर चुकी हैं। ‘UGC बिल’ को लागू न करना शिक्षा जगत के साथ अपराध है। हमने बिहार में 65% आरक्षण और OBC महिलाओं के लिए 33% हिस्सेदारी की मांग रखी है, जो कि न्यायसंगत है। सबसे गंभीर मुद्दा ‘जातिगत जनगणना’ में ‘OBC कॉलम’ जोड़ने का है—आखिर सरकार इस सच्चाई को दर्ज करने से क्यों डर रही है? यह प्रदर्शन स्पष्ट करता है कि अब समाज का हर वर्ग जाग चुका है। अगर सरकार ने इन मांगों को अनदेखा किया, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने के लिए उन्हें तैयार रहना होगा।”

अनिल अकेला: “यह अंतिम चेतावनी है, 29 अप्रैल तय करेगा भविष्य”

आंदोलन की धार को तेज करते हुए अनिल अकेला ने सरकार को ‘अंतिम चेतावनी’ दी:

“यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक ‘आर-पार की लड़ाई’ का शंखनाद है। हम सप्तमूर्ति (शहीद स्मारक) तक मार्च करेंगे और मुख्यमंत्री व राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर यह संदेश देंगे कि अब और इंतजार नहीं किया जाएगा। 29 अप्रैल को गांधी मैदान में जो भीड़ उमड़ेगी, वह पूरे देश की राजनीति की दिशा तय करेगी। यह आंदोलन केवल बिहार की सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी गूंज केंद्र सरकार तक पहुंचेगी। क्या सत्ता इन मांगों के आगे झुककर न्याय करेगी, या यह एक नए, लंबे और व्यापक टकराव की शुरुआत होगी? जवाब अब सरकार को देना है।”

समीक्षा बैठक में दिखी एकता

गाइडलाइन विद्याश्रम स्कूल के प्रांगण में हुई इस समीक्षा बैठक में ममता जायसवाल, श्याम नंदन महतो, मुकेश कुमार, विजय कुमार और संजय कुमार यादव सहित कई प्रमुख कार्यकर्ताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

  • प्रदर्शन का समय: 29 अप्रैल, 2026 | सुबह 11:00 बजे
  • स्थान: गांधी मैदान, गेट नंबर 1
  • मार्ग: डाकबंगला चौराहा → आयकर गोलंबर → सप्तमूर्ति (शहीद स्मारक)

कल 29 अप्रैल को पटना की सड़कों पर जनसैलाब का उमड़ना तय है। मुजफ्फरपुर इकाई की यह बैठक आंदोलन को एक संगठित और सशक्त रूप दे चुकी है। अब सबकी नजरें कल के प्रदर्शन पर टिकी हैं, जो बिहार के भविष्य की इबारत लिखने जा रहा है।

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