पटना। राजधानी पटना में सरकारी जमीन पर कब्जा जमाने वालों की अब खैर नहीं है। गंगा नदी के किनारे बसे अवैध कब्जेदार प्रशासन के रडार पर आ गए हैं। जिलाधिकारी, पटना की अगुवाई में प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए एक बड़े अतिक्रमण-उन्मूलन अभियान को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि जनहित और सरकारी नियमों के आगे किसी की भी मनमानी नहीं चलेगी।

ताबड़तोड़ कार्रवाई: दो दिनों में ‘सफाई‘
जिलाधिकारी के सख्त निर्देश के बाद पटना में लगातार दूसरे दिन विशेष अभियान चलाया गया। पटना सिटी से लेकर पटना सदर तक प्रशासन का बुलडोजर पूरी ताकत के साथ गरजा।
- पटना सिटी का इलाका: भद्र घाट से कंगन घाट तक प्रशासन का दस्ता पहुँचा और वहां जमा अवैध कब्जों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान 17 अस्थायी संरचनाओं (9 झोपड़ी और 8 स्टॉल) को मिट्टी में मिला दिया गया। इसके अलावा 2 टीपर बालू भी जब्त किए गए। प्रशासनिक सख्ती इतनी थी कि मौके पर ही अतिक्रमणकारियों से 10,000 रुपये का भारी जुर्माना वसूला गया।
- पटना सदर का इलाका: दीघा के पास का क्षेत्र ‘हॉटस्पॉट’ बना रहा। पटना-दीघा मुख्य सड़क और सुरक्षा बांध के गेट नंबर 79 से 83 के बीच 35 अवैध पक्की स्थायी संरचनाओं को जमींदोज कर दिया गया। यह क्षेत्र विकास की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है, जहाँ सरकारी योजनाओं में कोई बाधा स्वीकार्य नहीं है।
डीएम की दो टूक: “नियम तोड़ोगे, तो सलाखों के पीछे जाओगे”
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि गंगा के किनारे की असर्वेक्षित भूमि पर किसी व्यक्ति विशेष का दावा कतई मान्य नहीं है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अब केवल अतिक्रमण हटाएं नहीं, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि वहां दोबारा कब्जा न हो।
प्रशासन के सख्त फरमान:
- FIR अनिवार्य: यदि कोई दोबारा अतिक्रमण करता पाया गया, तो बिना किसी रियायत के सीधे प्राथमिकी (FIR) दर्ज होगी।
- आदतन अपराधियों की पहचान: ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है जो आदतन अतिक्रमणकारी हैं। इनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का चाबुक चलेगा।
- NGT और सुप्रीम कोर्ट का डंडा: जिलाधिकारी ने याद दिलाया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, फ्लड प्लेन एरिया में किसी भी तरह का निर्माण अवैध है। चाहे जमीन निजी ही क्यों न हो, निर्माण की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।

असामाजिक तत्वों के स्वार्थ पर कड़ा प्रहार
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा किनारे की असर्वेक्षित सरकारी जमीनों पर असामाजिक तत्वों द्वारा निहित स्वार्थों के तहत कब्जा किया जा रहा था। जिलाधिकारी ने इसे ‘खेदजनक’ करार देते हुए अनुमंडल पदाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे इस अभियान को और प्रभावी बनाएं। उन्होंने कहा कि नदी क्षेत्र की जमीन सरकारी है और इस पर किसी का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पटना प्रशासन की इस आक्रामक कार्रवाई ने साफ संकेत दिया है कि अब सरकारी जमीन पर ‘कब्जा राज’ का अंत हो चुका है और कानून तोड़ने वालों के लिए अब केवल जेल का रास्ता बचा है।



