Thursday, July 30, 2026

बिहार में ‘मौसम का डबल अटैक’: 50 किमी/घंटा की आंधी और बिजली गिरने का ‘हाई अलर्ट’, अगले 3 दिनों तक संभलकर रहें!

पटना: बिहार में मौसम का मिजाज एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर आ गया है। बिहार मौसम सेवा केंद्र (Bihar Mausam Seva Kendra) ने राज्यभर के लिए चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि अगले कुछ घंटे प्रदेशवासियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। राज्य के अधिकतर हिस्सों में अब आंधी-तूफान के साथ आकाशीय बिजली का खतरा मंडरा रहा है।

50 किमी की रफ्तार से चलेगी हवा मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, बिहार के कई इलाकों में मौसम में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और इस दौरान 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने आम लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है।

बारिश और वज्रपात की चेतावनी अगले 24 घंटों के लिए जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य के कई स्थानों पर बहुत हल्की से लेकर हल्की बारिश होने की संभावना है। हालांकि, चिंता का विषय ‘वज्रपात’ (आकाशीय बिजली) है। विभाग ने चेतावनी दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले में रहने से बचें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें।

अगले 3 दिनों का तापमान का हाल तापमान के लिहाज से देखें तो अगले 3 दिनों तक लोगों को गर्मी का मिला-जुला अहसास होगा:

  • अधिकतम तापमान: 28°C से 39°C के बीच रहने की संभावना।
  • न्यूनतम तापमान: 20°C से 26°C के बीच रहने का अनुमान है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि भले ही तापमान बहुत अधिक नहीं है, लेकिन हवा की गति और वज्रपात की संभावनाओं को देखते हुए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।

बिहार मौसम सेवा केंद्र द्वारा जारी आगामी 3 दिनों का वेदर अलर्ट मैप, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों में संभावित अधिकतम तापमान और मौसमी बदलावों (तेज हवा व बारिश) को दर्शाया गया है।

सावधानी ही बचाव है: वज्रपात और आंधी से निपटने के लिए जरूरी टिप्स

मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार, खराब मौसम के दौरान निम्नलिखित सुरक्षा उपायों का पालन करें:

वज्रपात (आकाशीय बिजली) से बचाव:

  • घर के अंदर रहें: बिजली कड़कने की आवाज सुनाई दे तो तुरंत सुरक्षित पक्के घर में चले जाएं। खिड़की-दरवाजों से दूर रहें।
  • पेड़ों के नीचे न छिपें: कभी भी अकेले खड़े पेड़ या ऊंचे खंभों के नीचे शरण न लें। यह बिजली को आकर्षित करते हैं।
  • पानी से दूर रहें: यदि आप बाहर हैं, तो तालाब, नदी या किसी भी जलस्रोत से तुरंत दूर हट जाएं।
  • खुले मैदान में: यदि आप किसी खुले मैदान में हैं, तो सिमटकर बैठ जाएं (उकड़ू बैठें) और अपने सिर को दोनों हाथों से ढक लें। कभी भी जमीन पर न लेटें।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: बिजली कड़कने के दौरान टीवी, फ्रिज, या कंप्यूटर जैसे बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल न करें।

तेज आंधी (आंधी-तूफान) से बचाव:

  • कमजोर ढांचों से दूर रहें: तेज हवाओं के दौरान टीन के शेड, कच्चे मकान, और जर्जर दीवारों से दूर रहें।
  • सामान को सुरक्षित करें: घर की छतों या बालकनी पर रखे ढीले सामान (गमले, टीन, प्लास्टिक) को हटा दें ताकि वे हवा में उड़कर किसी को चोट न पहुंचाएं।
  • वाहन न चलाएं: यदि आंधी बहुत तेज हो, तो गाड़ी को सड़क किनारे सुरक्षित स्थान पर खड़ी कर दें। चलते हुए पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे गाड़ी न रोकें।
  • बिजली के तारों से बचें: आंधी के कारण गिरे हुए बिजली के तारों से दूर रहें और तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित करें

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मुजफ्फरपुर में भीषण गर्मी और आग से निपटने को प्रशासन ‘अलर्ट मोड’ पर: डीएम का स्पष्ट निर्देश, पेयजल और अग्नि सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन जारी

मुजफ्फरपुर, 28 अप्रैल 2026

भारतीय मौसम विभाग द्वारा जारी भीषण गर्मी के पूर्वानुमान के बीच, मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी (DM) सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिले की कार्ययोजना को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। पेयजल संकट से लेकर आगजनी की घटनाओं तक, प्रशासन ने आम नागरिकों के लिए युद्धस्तर पर तैयारी करने का निर्णय लिया है।

“जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में समीक्षात्मक बैठक”- समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को कड़े शब्दों में निर्देश देते हुए जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन (तस्वीर के केंद्र में)। उन्होंने स्पष्ट किया कि भीषण गर्मी के बीच निर्बाध पेयजल की आपूर्ति प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

पेयजल संकट: 7 दिनों में दुरुस्त हों सभी चापाकल और नल-जल

जिलाधिकारी ने पीएचईडी (PHED) विभाग को सख्त लहजे में निर्देश दिया है कि जिले में कोई भी चापाकल या नल-जल योजना बंद नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कार्यपालक अभियंता से लेकर कनीय अभियंताओं तक को ‘मिशन मोड’ में काम करने को कहा है।

  • डेडलाइन: सभी खराब चापाकलों और नल-जल योजनाओं को एक सप्ताह के भीतर हर हाल में दुरुस्त करना अनिवार्य है।
  • मोतीपुर पर नाराजगी: समीक्षा के दौरान मोतीपुर क्षेत्र में पेयजल की लचर व्यवस्था पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई और तुरंत सुधार के निर्देश दिए।
  • निगरानी: अनुमंडल अधिकारियों (पूर्वी एवं पश्चिमी) को प्रखंड स्तर पर नियमित समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुजफ्फरपुर: समाहरणालय सभागार में जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिले भर से आए अधिकारी और जन प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में बढ़ती गर्मी, निर्बाध पेयजल आपूर्ति और अगलगी (आग लगने) की घटनाओं की रोकथाम पर गंभीरता से चर्चा की गई और डीएम द्वारा कड़े दिशा-निर्देश दिए गए।

📞 आम नागरिकों के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर

पेयजल और अन्य संबंधित समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जिला प्रशासन ने निम्नलिखित हेल्पलाइन्स जारी की हैं। नागरिक इन नंबरों पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं:

सेवा का प्रकारहेल्पलाइन नंबर
मुजफ्फरपुर कार्य प्रमंडल0621-2242445
मोतीपुर कार्य प्रमंडल0622-3291255
टोल फ्री हेल्पलाइन (1)1800-123-1121
टोल फ्री हेल्पलाइन (2)1800-345-1121

अगलगी (आग लगने) से बचाव पर प्रशासन का अलर्ट

बढ़ती गर्मी के साथ आगजनी की घटनाओं के प्रति जिलाधिकारी ने अंचलाधिकारियों और एडीएम आपदा को पूरी तरह अलर्ट रहने का निर्देश दिया है। आपदा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने के साथ ही, प्रशासन ने बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) की गाइडलाइन को आम जनता के लिए साझा किया है।

सावधानी बरतें, सुरक्षित रहें (मुख्य बिंदु):

  • घर पर रखें तैयारी: अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher), बालू और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
  • गैस सुरक्षा: गैस रिसाव होने पर रेगुलेटर बंद कर दें और तुरंत खिड़की-दरवाजे खोलें; इस दौरान बिजली का कोई भी स्विच न छुएं और माचिस/लाइटर का प्रयोग न करें।
  • आपातकाल: आग लगने पर तुरंत 101 (फायर ब्रिगेड) या 112 (आपातकालीन सेवा) पर सूचना दें।
  • क्या न करें: खुले में कचरा या पराली न जलाएं। बिजली के एक ही सॉकेट पर कई उपकरण लगाकर लोड न बढ़ाएं।

अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय

1. जनगणना कार्य (2 मई से 31 मई तक): जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि मकान गणना कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। बुधवार तक सभी प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए जाएंगे। उप विकास आयुक्त और एडीएम (विभागीय जांच) को इस कार्य की कमान सौंपी गई है। जिले में अब तक 80,456 लोगों ने स्व-गणना पूरी कर ली है।

2. जन-शिकायत निवारण: प्रशासन ने जनता की समस्याओं के समाधान के लिए एक निश्चित समय-सारणी तय की है। अधिकारी प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को अपने कार्यालय में जनसुनवाई करेंगे, जबकि शनिवार को अंचल स्तर पर बैठकें होंगी। लंबित मामलों को एक सप्ताह में निपटाना होगा।

3. सामाजिक सुरक्षा पेंशन: सभी छह पेंशन योजनाओं के लिए अब आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। जिन लाभार्थियों के पास आधार नहीं है, उनके तत्काल पंजीकरण के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन योजना से सहमति पत्र की बाध्यता समाप्त कर दी गई है।

4. पीएम सूर्य घर योजना: इस योजना के तहत जिले में 1708 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 569 का निष्पादन हो चुका है। शेष आवेदनों के लिए बैंकर्स के साथ समन्वय कर ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है।


जिला प्रशासन की अपील: भीषण गर्मी में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल की उपलब्धता पर विशेष नजर है। नागरिकों से अपील है कि वे सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर जारी हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें।

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पटना में ‘घूसखोर’ रजिस्ट्रार का गेम ओवर: छात्रों के भविष्य के बदले 2.50 लाख मांग रहे थे साहब, अब सलाखों के पीछे।

पटना। राजधानी पटना में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Bureau) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय के सहायक कुल सचिव (Assistant Registrar) मो. सनाउल्लाह खान को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर घूस की मांग करने वाले इस अधिकारी का ‘गेम’ उस वक्त ओवर हो गया, जब निगरानी की टीम ने उन्हें उनके कार्यालय कक्ष से ही ढाई लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए दबोच लिया।

‘रिश्वतखोर’ की तस्वीर: मौलाना मजहरूल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, मीठापुर, पटना के सहायक कुल सचिव मो. सनाउल्लाह खान को ढाई लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार करने के बाद निगरानी ब्यूरो की टीम के साथ।

क्या था पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, समस्तीपुर के रोसड़ा निवासी शिकायतकर्ता रामानंद महतो ने निगरानी ब्यूरो में एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, आरोपी सहायक कुल सचिव मो. सनाउल्लाह खान ने विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित KRC-402 और 403 में नामांकित छात्रों के प्रैक्टिकल मार्क्स चढ़ाने और उनके लंबित परीक्षा फल (Result) को प्रकाशित करने के एवज में भारी-भरकम रिश्वत की मांग की थी।

फिल्मी अंदाज में बिछाया गया जाल

शिकायतकर्ता की आपबीती सुनने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसका सत्यापन कराया। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद, डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में एक विशेष ‘धावा दल’ का गठन किया गया।

28 अप्रैल, 2026 को जैसे ही आरोपी ने अपने कार्यालय कक्ष में ढाई लाख रुपये की रिश्वत राशि ली, निगरानी ब्यूरो की टीम ने उन्हें रंगे हाथों धर दबोचा। आरोपी को फिलहाल हिरासत में ले लिया गया है और पूछताछ के बाद उन्हें पटना की विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा। इस गिरफ्तारी के बाद से ही विश्वविद्यालय परिसर में हड़कंप मचा हुआ है।

निगरानी ब्यूरो: 2026 का ट्रैक रिकॉर्ड

इस कार्रवाई के साथ ही निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने साल 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज कर दिया है। ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

विवरणआंकड़े
कुल प्राथमिकी (Cases Registered)49
ट्रैप के मामले (Trap Cases)44
गिरफ्तार अभियुक्त42
बरामद कुल राशि₹16,41,000

भ्रष्टाचार के खिलाफ आपकी जागरूकता ही हथियार है

यदि आपसे या आपके आसपास कोई सरकारी सेवक (सरकारी अधिकारी/कर्मचारी) किसी भी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो चुप न बैठें। सीधे निगरानी ब्यूरो से संपर्क करें:

  • हेल्पलाइन: 0612-2215344
  • मोबाइल/व्हाट्सएप: 7765953261, 9473494167
  • ईमेल: spvig-bih@nic.in
  • पता: निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, 6 सर्कुलर रोड, पटना।

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पटना में कल ‘सियासी महासंग्राम’: गांधी मैदान में हुंकार भरने को तैयार बिहार, मुजफ्फरपुर की बैठक से आंदोलन को मिली नई धार!

मुजफ्फरपुर/पटना: कल 29 अप्रैल, 2026 का दिन बिहार की राजनीति का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकता है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से उठने वाली दलित, पिछड़े और अति-पिछड़े वर्ग की हुंकार को रोकने की ताकत शायद ही किसी सरकार में हो। केशोपुर स्थित गाइडलाइन विद्याश्रम स्कूल में मुजफ्फरपुर इकाई की समीक्षा बैठक के बाद, नेताओं ने जो तेवर दिखाए हैं, वह स्पष्ट संकेत हैं कि सरकार के लिए ‘चेतावनी का समय’ समाप्त हो चुका है और अब ‘संघर्ष का समय’ आ गया है।

“क्रांति का ब्लूप्रिंट: अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ द्वारा जारी किए गए विरोध प्रदर्शन का रूट चार्ट। 29 अप्रैल को 10,000 से अधिक कार्यकर्ता गांधी मैदान से निकलकर सरकार को ज्ञापन सौंपेंगे और शिक्षा से लेकर न्यायपालिका तक में हिस्सेदारी की मांग करेंगे।”

नेताओं की ललकार: सत्ता की चूलें हिलाने को तैयार

आगामी प्रदर्शन को लेकर जो बातें प्रमुख नेताओं ने कहीं, वे इस आंदोलन की गंभीरता को दर्शाती हैं:

 संतोष कुशवाहा (जगदेव विचार मंच): “यह आंदोलन नहीं, वैचारिक क्रांति है”

बैठक को संबोधित करते हुए संतोष कुशवाहा ने पूरे आंदोलन को एक वैचारिक पृष्ठभूमि दी। उन्होंने कहा:

“बिहार की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आने वाला है। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि ‘शहीद जगदेव प्रसाद’, ‘महात्मा ज्योतिबा फुले’ और ‘संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अम्बेडकर’ की विरासत को पुनर्जीवित करने का संकल्प है। हमारा कारवां जब गांधी मैदान के गेट नंबर 1 से निकलेगा, तो वह सत्ता के गलियारों में बैठे हर उस शख्स को सोचने पर मजबूर कर देगा, जो पिछले कई वर्षों से उपेक्षित वर्गों के अधिकारों को दबाए बैठा है। 29 अप्रैल का दिन इस बात का गवाह बनेगा कि जब शोषित वर्ग अपनी अस्मिता के लिए खड़ा होता है, तो बड़े-बड़े सिंहासन डोलने लगते हैं।”

 शशि गुप्ता: “मांगें नहीं, ये हमारे अधिकार हैंसरकार के पास कोई विकल्प नहीं”

आंदोलन के एजेंडे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए शशि गुप्ता ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने साफ कहा:

“हमारी मांगें अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि सड़कों पर उतर चुकी हैं। ‘UGC बिल’ को लागू न करना शिक्षा जगत के साथ अपराध है। हमने बिहार में 65% आरक्षण और OBC महिलाओं के लिए 33% हिस्सेदारी की मांग रखी है, जो कि न्यायसंगत है। सबसे गंभीर मुद्दा ‘जातिगत जनगणना’ में ‘OBC कॉलम’ जोड़ने का है—आखिर सरकार इस सच्चाई को दर्ज करने से क्यों डर रही है? यह प्रदर्शन स्पष्ट करता है कि अब समाज का हर वर्ग जाग चुका है। अगर सरकार ने इन मांगों को अनदेखा किया, तो इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने के लिए उन्हें तैयार रहना होगा।”

अनिल अकेला: “यह अंतिम चेतावनी है, 29 अप्रैल तय करेगा भविष्य”

आंदोलन की धार को तेज करते हुए अनिल अकेला ने सरकार को ‘अंतिम चेतावनी’ दी:

“यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक ‘आर-पार की लड़ाई’ का शंखनाद है। हम सप्तमूर्ति (शहीद स्मारक) तक मार्च करेंगे और मुख्यमंत्री व राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर यह संदेश देंगे कि अब और इंतजार नहीं किया जाएगा। 29 अप्रैल को गांधी मैदान में जो भीड़ उमड़ेगी, वह पूरे देश की राजनीति की दिशा तय करेगी। यह आंदोलन केवल बिहार की सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी गूंज केंद्र सरकार तक पहुंचेगी। क्या सत्ता इन मांगों के आगे झुककर न्याय करेगी, या यह एक नए, लंबे और व्यापक टकराव की शुरुआत होगी? जवाब अब सरकार को देना है।”

समीक्षा बैठक में दिखी एकता

गाइडलाइन विद्याश्रम स्कूल के प्रांगण में हुई इस समीक्षा बैठक में ममता जायसवाल, श्याम नंदन महतो, मुकेश कुमार, विजय कुमार और संजय कुमार यादव सहित कई प्रमुख कार्यकर्ताओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

  • प्रदर्शन का समय: 29 अप्रैल, 2026 | सुबह 11:00 बजे
  • स्थान: गांधी मैदान, गेट नंबर 1
  • मार्ग: डाकबंगला चौराहा → आयकर गोलंबर → सप्तमूर्ति (शहीद स्मारक)

कल 29 अप्रैल को पटना की सड़कों पर जनसैलाब का उमड़ना तय है। मुजफ्फरपुर इकाई की यह बैठक आंदोलन को एक संगठित और सशक्त रूप दे चुकी है। अब सबकी नजरें कल के प्रदर्शन पर टिकी हैं, जो बिहार के भविष्य की इबारत लिखने जा रहा है।

महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस का ‘वार’: मुजफ्फरपुर में मोदी सरकार के खिलाफ हुआ पुतला दहन, नेताओं ने कहा- ‘यह जनता को ठगने की राजनीति’

सकरा |मुजफ्फरपुर |  ‘महिला आरक्षण बिल 2023’ को लेकर सियासत गरमा गई है। मुजफ्फरपुर जिले के सकरा और मुरौल प्रखंड कांग्रेस कमेटी ने संयुक्त रूप से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कार्यकर्ताओं ने सकरा प्रखंड कांग्रेस आश्रम कार्यालय से पैदल मार्च निकालते हुए सकरा प्रखंड मुख्यालय (आश्रम चौक) तक प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार का पुतला फूंका। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

सकरा प्रखंड मुख्यालय (आश्रम चौक) पर महिला आरक्षण बिल 2023 को अविलंब लागू करने की मांग को लेकर केंद्र सरकार का पुतला फूंकते हुए सकरा और मुरौल प्रखंड के कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता।

बिल के समर्थन पर उठ रहे सवालों पर कांग्रेस का पलटवार

प्रदर्शन के दौरान जब रिपोर्टर ने उमेश कुमार राम से संसद में बिल को लेकर कांग्रेस पर लगे ‘सपोर्ट न करने’ के आरोपों के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने तीखा जवाब दिया।

तस्‍वीर में दायें से न्‍यूज भारत टीवी के कैमरा पर अपनी बात रखते हुए  उमेश कुमार राम (ए०आई०सी०सी० मेम्बर), मनोज कुमार सिंह (अध्यक्ष, सकरा प्रखण्ड कांग्रेस कमिटी)एवं सरोज कुमार (कांग्रेस कार्यकर्ता)

उमेश कुमार राम (सदस्य, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं पूर्व प्रत्याशी, सकरा विधानसभा): रिपोर्टर के सवाल का जवाब देते हुए उमेश कुमार राम ने कहा, “हमारी स्पष्ट मांग है कि केंद्र सरकार केवल बिल लाकर इतिश्री न करे। हमारी पार्टी की मांग है कि 2023 में लाया गया महिला बिल तुरंत प्रभाव से धरातल पर लागू किया जाए। कांग्रेस पार्टी का स्टैंड साफ है—हम महिलाओं को उनका अधिकार दिलाना चाहते हैं। केंद्र सरकार अपनी दुरंगी नीति छोड़कर इसे जल्द से जल्द क्रियान्वित करे।”

राजनीतिक स्टंट है मोदी सरकार की नीति”

प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस बिल को आगामी चुनावों से जोड़कर देखा।

मनोज कुमार सिंह (कार्यकारी अध्यक्ष, सकरा प्रखंड): मनोज कुमार सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “2023 के बिल को तोड़-मरोड़ कर पेश करना केवल आने वाले तीन राज्यों के चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश है। नरेंद्र मोदी सरकार की यह दोहरी नीति है। पहले नोटबंदी, फिर अन्य मुद्दों के नाम पर जनता को ठगा गया और अब महिला आरक्षण के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। ‘जनता को तोड़ो और राजनीति करो’—यही भाजपा की कार्यशैली है, जिससे आज पूरा देश आहत है।”

आगे और तेज होगा आंदोलन”

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा।

सरोज कुमार (कांग्रेस कार्यकर्ता): कांग्रेस कार्यकर्ता सरोज कुमार ने कहा, “नरेंद्र मोदी जी की सरकार सिर्फ लोगों को लाइनों में खड़ा करने और परेशान करने का काम करती है—चाहे वो आधार का मुद्दा हो या नोटबंदी। महिला बिल के नाम पर भी वे जनता का ध्यान भटका रहे हैं। हम चुप बैठने वाले नहीं हैं, कांग्रेस पार्टी का हाथ मजबूत करेंगे और सरकार को जनता की आवाज सुननी ही होगी।”

इस प्रदर्शन के माध्यम से कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर केंद्र सरकार को बैकफुट पर धकेलने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

महिला आरक्षण बिल (2023) क्या है?

महिला आरक्षण बिल, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कहा गया है, संसद (लोकसभा) और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% (एक-तिहाई) सीटें आरक्षित करने का संवैधानिक प्रावधान करता है। इसका उद्देश्य निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है। हालांकि, इसे जनगणना और परिसीमन की शर्तों से जोड़े जाने के कारण विपक्ष इसे लागू करने की मंशा पर सवाल उठा रहा है।

प्रदर्शन में इनकी रही मुख्य भागीदारी

इस प्रदर्शन में स्थानीय स्तर के कई प्रमुख कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें शामिल हैं:

  • उमेश कुमार राम (ए०आई०सी०सी० मेम्बर)
  • मनोज कुमार सिंह (अध्यक्ष, सकरा प्रखण्ड कांग्रेस कमिटी)
  • मो० गुलाम मैनुद्दीन (अध्यक्ष, मुरौल प्रखण्ड युवा कांग्रेस)
  • अनीता देवी (बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी प्रतिनिधि)
  • अन्य प्रमुख कार्यकर्ता: शिवम कुमार, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव, डा० मनीष यादव, मो० हैदर रजक, राकेश कु० राय, रबीन्द्र पोद्दार, उपेन्द्र राम, मो० जसीम, संजय दास, मो० सुल्तान, नुनू राय सहित भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

मुजफ्फरपुर का ‘महा-सत्याग्रह’: 16,000 मजदूरों की जिद्द के आगे क्या झुकेगा सिस्टम? मंगलवार को पटना में होगी ‘आर-पार’ की वार्ता

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर इन दिनों एक ऐतिहासिक संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। ‘मनरेगा वॉच’ के नेतृत्व में पिछले 116 दिनों से जारी मजदूरों का धरना अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार की तमाम अनदेखी और तकनीकी पेच-फंसने के बावजूद, 16,000 से अधिक मजदूरों ने अपने हक को पाने की जो जिद्द ठानी है, उसने जिला प्रशासन से लेकर पटना तक की नींद उड़ा दी है।

मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर में 116वें दिन भी जारी मजदूरों का संघर्ष। हाथों में तख्तियां और हौसलों में चट्टानी इरादे लिए ये मजदूर मंगलवार को पटना में होने वाली उच्च-स्तरीय वार्ता से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

100 से ज्यादा मजदूर, एक ही संकल्प

भले ही कागज पर 16,000 मजदूरों का संघर्ष है, लेकिन समाहरणालय परिसर में रोज 100 से अधिक मजदूर 116 वें दिन पूरी ताकत और धैर्य के साथ डटे हुए हैं। भीषण गर्मी और तमाम परेशानियों के बीच ये मजदूर केवल एक ही मांग कर रहे हैं—’हमें हमारा रोजगार दो, हमारा बकाया भुगतान करो।’ मुजफ्फरपुर के सभी 16 प्रखंडों से आई ये आवाजें अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी हैं।

मंगलवार को पटना में फिक्सहोगा भविष्य

धरने के 116वें दिन, आंदोलन ने एक नई करवट ली है। मनरेगा वॉच के संजय सहनी ने जानकारी दी कि अब गेंद सीधे बिहार सरकार के पाले में है। मंगलवार को पटना में सरकारी अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक तय हुई है। यह बैठक महज औपचारिकता नहीं, बल्कि मजदूरों के भविष्य का फैसला करेगी। मजदूरों ने स्पष्ट कर दिया है कि कल की वार्ता के बाद ही तय होगा कि संघर्ष की अगली रणनीति क्या होगी।

‘VB-G RAM G’ बना मजदूरों का काल

मजदूरों का आरोप है कि सरकार की नई नीति ‘VB-G RAM G’ उनके लिए रोजगार का जरिया बनने के बजाय ‘काल’ बन गई है।

  • जॉब कार्ड का खेल: हजारों मजदूरों के जॉब कार्ड या तो डिलीट कर दिए गए हैं या फिर उन पर नई योजनाएं नहीं खोली जा रही हैं।
  • ऑफलाइन अटेंडेंस: तकनीकी खामियों के कारण मजदूरों की हाजिरी नहीं लग रही, जिससे काम करने के बावजूद उन्हें मजदूरी नहीं मिल रही।
  • बकाया भुगतान: सालों से लंबित भुगतान अभी भी हवा में लटका हुआ है।

सरकारी फाइलों में गोला-बारूद‘, धरातल पर सन्नाटा

दस्तावेजों (पत्रांक 388175, दिनांक 30.03.2026) से खुलासा हुआ है कि मजदूरों के आंदोलन की गूँज पटना तक पहुँच चुकी है। सरकार ने मामले की जाँच के लिए राज्य स्तरीय ‘जाँच दल’ तो गठित कर दिया है, लेकिन मजदूरों का सवाल है—जाँच तो होती रहेगी, पेट की भूख कैसे मिटेगी? जिला प्रशासन की ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR 2026) का कड़वा सच यह है कि मुशहरी, तरौरा गोपालपुर और नरौली जैसे इलाकों में ‘तकनीकी खामियों’ और ‘प्रोजेक्ट उपलब्ध न होने’ का बहाना बनाकर मजदूरों को काम से वंचित रखा गया है। कहीं ‘Scure’ (सॉफ्टवेयर) का रोना रोया जा रहा है, तो कहीं ‘शहरी क्षेत्र’ बताकर काम देने से मना किया जा रहा है। 15 वर्षों से चल रहे इस मनरेगा विभाग के खेल ने अब मजदूरों की कमर तोड़ दी है।

116 दिनों का अंधेरा‘, और अब मंगलवार की निर्णायक घड़ी

‘मनरेगा वॉच’ के संजय सहनी के नेतृत्व में हो रहे इस धरने में रोज 100 से ज्यादा मजदूर अपनी पूरी ताकत के साथ डटे हैं। मनरेगा के तहत नए निबंधन, पुराने जॉब कार्ड को सक्रिय करने और लंबित भुगतान की मांग केवल कागजों पर नहीं, बल्कि सड़कों पर दम तोड़ रही है।

प्रशासन पर सवाल     

संजय सहनी कहते हैं, “116 दिन हो गए, लेकिन सरकार की आंखें तब भी नहीं खुलीं। क्या सरकार नहीं चाहती कि गरीब का चूल्हा जले? हम कोई भीख नहीं मांग रहे, हम अपना कानूनी अधिकार मांग रहे हैं।”

अब सबकी निगाहें मंगलवार को पटना में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं। क्या सरकार मजदूरों के इस 116 दिनों के लंबे संयम और संघर्ष का सम्मान करेगी? या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और विकराल रूप लेगा? मुजफ्फरपुर की जनता से लेकर सरकार तक, सबकी नजरें कल के नतीजों पर हैं।


“आर-पार का अल्टीमेटम”: मुजफ्फरपुर में गैस आपूर्ति के दोहरे मापदंड के खिलाफ पार्षद का प्रशासन को ‘फिजिकल नोटिस’, 30 अप्रैल से होगा आमरण अनशन!

मुजफ्फरपुर, बिहार। नगर पंचायत मुरौल में गैस आपूर्ति को लेकर व्याप्त विसंगतियों और स्थानीय निवासियों के शोषण के खिलाफ अब मामला गंभीर हो गया है। ईमेल के जरिए पूर्व में दी गई सूचना के बाद, आज 27 अप्रैल को वार्ड संख्या 03 के पार्षद आनंद कंद साह ने खुद कमान संभालते हुए जिला प्रशासन को ‘अंतिम नोटिस’ सौंप दिया है। पार्षद ने मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी , जिला चिकित्सा पदाधिकारी और जिला आपूर्ति पदाधिकारी के कार्यालय पहुंचकर विधिवत रूप से आवेदन सौंपा है, जिससे प्रशासन के गलियारों में हलचल मच गई है।

मुजफ्फरपुर: जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन सौंपने के बाद मीडिया से मुखातिब होते वार्ड पार्षद आनंद कंद साह। गैस आपूर्ति में हो रहे भेदभाव को लेकर उन्होंने प्रशासन को 30 अप्रैल के आमरण अनशन का अल्टीमेटम दिया है।

प्रशासन के सामने रखी मांग, अब समाधान का इंतजार

दस्तावेजों के साथ दफ्तर पहुंचे आनंद कंद साह ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह लड़ाई अब और नहीं टलेगी। उन्होंने कहा, हमने ईमेल के माध्यम से पहले ही सूचना दे दी थी, लेकिन आज हमने भौतिक रूप से जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंप दिया है। यह हमारी आखिरी चेतावनी है। अगर 30 तारीख तक गैस कंपनियों का डेटाबेस सुधारकर हमें 25 दिनों में गैस रिफिल की सुविधा नहीं दी गई, तो हम आमरण अनशन पर बैठने के लिए मजबूर होंगे।”

मीडिया के सामने पार्षद का तीखा बयान

कार्यालय से बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए आनंद कंद साह ने कहा:

हमसे सेवा के नाम पर शहरी शुल्कवसूला जा रहा है, होल्डिंग टैक्स से लेकर बिजली बिल (DS-2) तक हम शहरी दर पर दे रहे हैं, लेकिन सुविधा हमें ग्रामीण स्तर की मिल रही है। 45 दिन का रिफिल चक्र हमारी माताओं-बहनों के लिए अभिशाप है। उन्हें लकड़ी बीनने को मजबूर किया जा रहा है। हमारी मांग एक सूत्रीय हैमुरौल को शहरी क्षेत्र का दर्जा मिल चुका है, तो हमें 25 दिन पर गैस रिफिल चाहिए और यह हमें मिलकर रहेगा।”

पार्षद ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अनशन में सिर्फ वे अकेले नहीं हैं, बल्कि नगर पंचायत मुरौल के तमाम ग्रामीण और नागरिक उनके साथ खड़े हैं। 30 अप्रैल, सुबह 11:30 बजे से जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर होने वाला यह प्रदर्शन अब मुजफ्फरपुर में चर्चा का विषय बन गया है।

शिक्षा का दीप जला, गरीबी का अंधेरा मिटा: सरायरंजन की मुसहर टोली में बच्चों के भविष्य को मिली नई उड़ान

सरायरंजन (समस्तीपुर) | 26 अप्रैल 2026 |  सरायरंजन प्रखंड के वार्ड संख्या 21, रविदास टोला में शिक्षा की एक ऐसी मशाल जली है, जो आने वाले समय में बाल श्रम और बाल विवाह के अंधेरे को पूरी तरह मिटाने का दम रखती है। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, अख्तियारपुर और ‘क्राई’  के संयुक्त प्रयासों से यहाँ एक सामुदायिक शिक्षा केंद्र का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र उन गरीब बच्चों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर आया है, जो संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित रह जाते थे।

ज्ञान की ज्योति: सरायरंजन के रविदास टोला में सामुदायिक शिक्षा केंद्र के उद्घाटन अवसर पर दीप प्रज्वलित करते हुए वार्ड पार्षद सविता कुमारी, संस्था के पदाधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति।

दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत उद्घाटन समारोह का आयोजन अत्यंत भव्य रहा। वार्ड पार्षद सविता कुमारी, विद्यालय शिक्षा समिति की सचिव मुन्नी देवी, आंगनबाड़ी सेविका रिंकू कुमारी और जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर केंद्र का शुभारंभ किया।

शिक्षा ही गरीबी का काल: वार्ड पार्षद समारोह की मुख्य अतिथि वार्ड पार्षद सविता कुमारी ने कहा, “शिक्षा ही वह अनमोल रत्न है जो समाज में बराबरी लाती है। यह केंद्र न केवल बच्चों को पढ़ाएगा, बल्कि समाज से छुआ-छूत, गरीबी, बाल श्रम और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने में एक ढाल का काम करेगा।” उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को इस नि:शुल्क केंद्र में जरूर भेजें।

संस्था के सिनियर रिसर्च कंसल्टेंट बलराम चौरसिया और ललिता कुमारी ने शिक्षा की बढ़ती लागत पर चिंता जताते हुए कहा कि आज साधारण ट्यूशन फीस भी गरीब परिवारों के लिए पहाड़ जैसी है। इसी समस्या को देखते हुए संस्था सरायरंजन के कई महादलित टोलों में नि:शुल्क शिक्षा और पठन-पाठन सामग्री उपलब्ध करा रही है। इस उद्घाटन समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पहलू सामुदायिक शिक्षक संदीप कुमार सादा रहे। संदीप ने बताया कि वे स्वयं जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सहयोग से पढ़-लिखकर आज मैट्रिक-इंटर उत्तीर्ण कर पाए हैं। संस्था के कार्यों से प्रेरित होकर वे अब अपने ही समुदाय के 50 से अधिक गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ा रहे हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष गौरीशंकर चौरसिया ने की। इस अवसर पर नेहा कुमारी, दिव्या कुमारी, सुनील कुमार, आदर्श कुमार समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और जीविका दीदीयां मौजूद रहीं।


मानेसर जेल में कैद समस्तीपुर का ‘मजदूर बेटा’, रिहाई के बाद होगा ‘सम्मान’: भूख से बिलखते परिवार के आंसू पोंछने पहुंची माले टीम

समस्तीपुर, 26 अप्रैल 2026 , हरियाणा के मानेसर में ‘हक की आवाज’ उठाने की सजा समस्तीपुर के एक गरीब मजदूर को सलाखों के पीछे जाकर चुकानी पड़ी है। मानेसर के चर्चित मजदूर आंदोलन में समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र के मोहनपुर वार्ड-39 के निवासी मो० शाहीद (23 वर्ष) की गिरफ्तारी ने न केवल उनके परिवार को सड़क पर ला दिया है, बल्कि पूरे इलाके में आक्रोश है। बेटे की गिरफ्तारी के बाद घर में पसरे सन्नाटे और चूल्हा न जलने की मजबूरी को देखते हुए अब खेग्रामस-माले की टीम ने मोर्चा संभाल लिया है।

तस्वीर : समस्तीपुर के मोहनपुर स्थित अपने घर पर जेल में बंद बेटे मो० शाहीद की राह तकती मां रिजवाना खातुन और परिवार के अन्य सदस्य, नीचे  दायें लाल घेरे में शाहीद ।

अन्याय के खिलाफ आवाज बनी गुनाह खेग्रामस जिला सचिव जीबछ पासवान के नेतृत्व में भाकपा माले की टीम जब मोहनपुर स्थित पीड़ित मजदूर के घर पहुंची, तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था। स्थानीय लोगों ने टीम को बताया कि शाहीद किसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल नहीं है, बल्कि वह तो अपनी बड़ी बहन की शादी और परिवार का आशियाना बनाने के सपने लेकर मानेसर गया था। वहां वह स्पोर्ट्स कंपनी में सिलाई का काम करता था। कंपनी में 12 घंटे जबरन ओवरटाइम और तय मजदूरी से कम पैसे देने के खिलाफ जब उसने अन्य मजदूरों के साथ मिलकर आवाज उठाई, तो सरकारी शह पर पुलिस ने उसे जेल की कालकोठरी में डाल दिया।

बेटे के इंतजार में बिलखती मां शाहीद की गिरफ्तारी से घर में दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बूढ़ी मां रिजवाना खातुन और पिता मो० यूसुफ का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का इकलौता सहारा जेल में है, जिससे पूरे घर के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। खेग्रामस जिला अध्यक्ष उपेंद्र राय ने कहा कि शाहीद जैसे मेहनतकश युवाओं का जेल में होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

रिहाई के बाद होगा सम्मान, कानूनी लड़ाई जारी खेग्रामस-माले की टीम ने शाहीद के परिजनों को भरोसा दिलाया है कि वे दिल्ली और गुरुग्राम स्थित खेग्रामस-माले-ऐक्टू की टीम के साथ मिलकर हरसंभव कानूनी और आर्थिक मदद पहुंचाएंगे। टीम ने घोषणा की है कि जिस दिन शाहीद जेल से रिहा होकर समस्तीपुर लौटेगा, उसे एक ‘मजदूर योद्धा’ की तरह सम्मानित किया जाएगा। माले ने जिला प्रशासन और तमाम राजनीतिक दलों से इस संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार को मदद करने की अपील की है।


मिशन ‘सृजन’: सकरा में कांग्रेस का बड़ा दांव, चुनावी बिगुल फूंकते हुए उमेश राम ने भरी हुंकार—”देश बचाना है तो कांग्रेस को लाना है”


सकरा (मुजफ्फरपुर): सकरा विधानसभा क्षेत्र की सियासत में हलचल तेज हो गई है। सकरा प्रखंड कांग्रेस कमिटी ने अब जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी तरह कमर कस ली है। इसी कड़ी में ‘कांग्रेस आश्रम’ में सृजन साथी सदस्यता अभियान की जोरदार शुरुआत की गई, जिसने आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गरम कर दी हैं।

“सकरा में कांग्रेस की नई रणनीति: जन-जुड़ाव के साथ वादों की भी तैयारी।

चुनावी बिगुल और उमेश राम की अपील कार्यक्रम में पहुंचे अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सदस्य और सकरा (सु०) विधानसभा से कांग्रेस महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी, उमेश कुमार राम ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा। उन्होंने मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए सीधा और आक्रामक संदेश दिया। उन्होंने कहा, देश को बचाना है तो कांग्रेस को लाना है।” उनकी इस हुंकार ने कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों में नई ऊर्जा का संचार किया।

सृजन साथीअभियान से बढ़ेगा कुनबा सकरा प्रखंड कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में दर्जनों नए सदस्यों को पार्टी से जोड़ा गया। ‘सृजन साथी’ अभियान के तहत कांग्रेस ने अब बूथ स्तर पर अपनी ताकत को विस्तार देने की रणनीति बनाई है। कार्यक्रम स्थल पर लगे पोस्टरों में सरकार की योजनाओं और आर्थिक सहयोग के वादों का जिक्र भी साफ तौर पर देखा गया, जो सीधे जनता से जुड़ाव की कोशिश है।

ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित: इस राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के दौरान कई दिग्गज नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  • डा० मनीष यादव
  • सरोज कुमार उर्फ हरी यादव
  • मो० हैदर रजक
  • मो० सुल्तान
  • रामभरोस साह
  • जमीला खारुन
  • लीला देवी
  • मो० अरफात अली उर्फ चांद
  • शीला देवी
  • मो० जसीम
  • मो० जावेद
  • सत्यनारायण प्रसाद सहित अन्य कार्यकर्ता।

सियासी मायना: जानकारों का मानना है कि ‘सृजन साथी’ अभियान के माध्यम से कांग्रेस सकरा विधानसभा क्षेत्र में अपनी पुरानी साख को फिर से जीवंत करने की कोशिश में है। आने वाले समय में यह सदस्यता अभियान कितना असरदार साबित होगा, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस ने अब आर-पार की लड़ाई के संकेत दे दिए हैं।