Wednesday, July 29, 2026

सुशासन का ‘सम्राट’ संदेश: “जनता की फाइल रुकी तो अधिकारियों पर गिरेगी गाज”, DM-SP की बैठक में मुख्यमंत्री के कड़े तेवर

पटना | विशेष संवाददाता | बिहार में सुशासन की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज राज्य की पूरी प्रशासनिक मशीनरी को स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित जिला पदाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) की उच्चस्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका शत-प्रतिशत लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।

सत्ता का संकल्प: पटना स्थित अधिवेशन भवन में आयोजित कार्यशाला में मंच से अधिकारियों को संबोधित करते माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। मुख्यमंत्री ने मंच से ही अधिकारियों को जनसेवा के प्रति पूर्ण समर्पित होने का कड़ा निर्देश दिया।

समीक्षा में फूटा गुस्सा: योजनाओं की कछुआ चाल पर नाराजगी

बैठक की शुरुआत विभिन्न जिलों में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा से हुई। मुख्यमंत्री ने कई जिलों में योजनाओं की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता और जवाबदेही में किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा, हमारी सरकार की प्राथमिकता अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति है। यदि उस तक लाभ नहीं पहुँच रहा, तो यह प्रशासन की विफलता मानी जाएगी।”

विधि-व्यवस्था: अपराधियों में खौफ और जनता में विश्वास जरूरी

पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ संवाद के दौरान मुख्यमंत्री का रुख काफी सख्त नजर आया। राज्य की विधि-व्यवस्था पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस की छवि ऐसी होनी चाहिए कि अपराधी काँपें और आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे। उन्होंने थानों में आने वाले फरियादियों के साथ संवेदनशीलता बरतने और लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन करने का आदेश दिया।

अधिकारियों के लिए पंचामृतनिर्देश:

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के लिए पांच मुख्य सिद्धांतों पर जोर दिया:

  1. संवेदनशीलता: आम जनता की समस्याओं को अपनी समस्या समझकर सुनें।
  2. तत्परता: फाइलों को अटकाने के बजाय तत्काल निर्णय लें।
  3. पारदर्शिता: हर योजना और चयन प्रक्रिया में ईमानदारी बरतें।
  4. प्रतिबद्धता: जनसेवा को केवल नौकरी नहीं, अपना सर्वोच्च दायित्व समझें।
  5. जवाबदेही: हर गलती की जिम्मेदारी तय की जाएगी और कार्रवाई होगी।

जनता ही मालिक है”

मुख्यमंत्री ने कार्यशाला के समापन संबोधन में भावुक होते हुए कहा कि बिहार की जनता ने हमें सेवा का अवसर दिया है। अधिकारियों को यह याद रखना चाहिए कि वे जनता के सेवक हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार या लापरवाही की शिकायत मिली, तो संबंधित अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस कार्यशाला में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) सहित राज्य के सभी वरीय क्षेत्रीय पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है और इसे आने वाले समय में बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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बिहार की झोली में गिरे 63 बड़े फैसले: 50 करोड़ के टेंडर पर बाहरी कंपनियों की ‘नो एंट्री’, अब सिर्फ लोकल ठेकेदारों का जलवा!

संजय गांधी जैविक उद्यान अब हुआ ‘पटना जू’, बिजली उपभोक्ताओं को 23,165 करोड़ की राहत, पुलिस में 50 प्रतिशत पद प्रमोशन से भरेंगे

पटना | मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की दूसरी बैठक में विकास और जनहित से जुड़े कई क्रांतिकारी फैसले लिए गए हैं. मुख्यमंत्री सचिवालय के संवाद कक्ष में आयोजित इस बैठक में सरकार ने कुल 63 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है.

ठेकेदारों और स्थानीय उद्योगों की खुली लॉटरी सरकार ने राज्य के ठेकेदारों और बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ी घोषणा की है. अब बिहार सरकार के किसी भी विभाग द्वारा जारी होने वाले 50 करोड़ रुपये तक के टेंडर में बाहरी कंपनियों का पत्ता साफ कर दिया गया है. इन टेंडरों में केवल बिहार के स्थानीय संवेदकों (ठेकेदारों) को ही प्राथमिकता दी जाएगी. इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देना और राज्य में विकास कार्यों की रफ्तार को तेज करना है.

बिजली उपभोक्ताओं को 23,165 करोड़ की भारी राहत राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना’ के तहत कुल 23,165 करोड़ रुपये अनुदान के रूप में स्वीकृत किए हैं. इस भारी-भरकम सब्सिडी से आम उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बड़ी राहत मिलेगी. अनुदान की राशि सीधे एनटीपीसी और बीएसपीएचसीएल को उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे राज्य के हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी मिलेंगे.

पुलिस महकमे में पदोन्नति का रास्ता साफ कैबिनेट ने बिहार पुलिस को सुदृढ़ करने के लिए सृजित किए गए 20,937 पदों की बहाली प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है. अब इन पदों में से 50 फीसदी (10,468 पद) पदोन्नति (Promotion) के जरिए भरे जाएंगे. शेष 10,469 पदों पर सीधी बहाली की जाएगी. इसके अलावा भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बिहारशरीफ और गया जैसे शहरों में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए 485 नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है.

अब ‘पटना जू’ के नाम से जाना जाएगा जैविक उद्यान राजधानी के प्रसिद्ध संजय गांधी जैविक उद्यान का नाम अब आधिकारिक रूप से बदलकर ‘पटना जू’ (Patna Zoo) कर दिया गया है. इसके संचालन के लिए गठित सोसाइटी का नाम भी अब ‘पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी’ होगा.

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खनन और जल संसाधन पर कड़े फैसले

  • अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर लगाम लगाने के लिए ‘बिहार खनिज (संशोधन) नियमावली, 2024’ को स्वीकृति दी गई है.
  • जल संसाधन विभाग के तहत मंडई वीयर और उससे जुड़ी नहर प्रणालियों के निर्माण के लिए 424.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक एवं व्यय की स्वीकृति मिली है.

चुनावी शंखनाद: ‘सुशासन’ के संकल्प के साथ रण में उतरे सूर्य कुमार शर्मा, सम्राट चौधरी की मौजूदगी में विपक्ष के उड़े होश!

NDA उम्मीदवार अरविंद शर्मा ने लाव-लश्कर के साथ भरा पर्चा, बिहार विधान परिषद उपचुनाव में जीत का हुंकार।

मुख्य समाचार (पटना): बिहार की राजनीतिक सरगर्मी के बीच एनडीए ने अपनी एकजुटता और ताकत का जबरदस्त अहसास कराया। बिहार विधान परिषद उप-चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर उम्मीदवार सूर्य कुमार शर्मा (अरविंद शर्मा) ने आज अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान उनके साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और एनडीए गठबंधन के तमाम दिग्गज नेता मौजूद रहे।

“ऐतिहासिक क्षण: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की गरिमामयी उपस्थिति में अपना नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी को सौंपते भाजपा-एनडीए उम्मीदवार सूर्य कुमार शर्मा (अरविंद शर्मा)।”

नामांकन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सूर्य कुमार शर्मा की उम्मीदवारी बिहार में विकास की गति को और तेज करेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि एनडीए उम्मीदवार न केवल जीत हासिल करेंगे, बल्कि जनसेवा और सुशासन के हमारे संकल्प को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

जीत का दावा: अरविंद शर्मा के नामांकन के समय कार्यकर्ताओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। समर्थकों ने फूलों की बारिश और नारों के साथ आसमान गुंजा दिया। राजनीतिक गलियारों में इस नामांकन को एनडीए के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है, जिसने विरोधियों के खेमे में हलचल पैदा कर दी है। सूर्य कुमार शर्मा ने अपनी जीत सुनिश्चित बताते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘सबका साथ-सबका विकास’ के विजन को मजबूती से आगे बढ़ाएंगे।

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टैक्स शहर वाला और गैस गांव वाला! प्रशासन की दोहरी नीति के खिलाफ मुरौल की जनता का फूटा गुस्सा, डीएम ऑफिस पर आमरण अनशन शुरू

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर के नवगठित नगर निकाय मुरौल में प्रशासन और तेल कंपनियों की ‘दोहरी नीति’ के खिलाफ जन-आक्रोश चरम पर है। वार्ड पार्षद आनंद कंद साह के नेतृत्व में स्थानीय नागरिकों ने 30 अप्रैल 2026 से जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष अपना ऐतिहासिक आमरण अनशन प्रारंभ कर दिया है। जनता का स्पष्ट कहना है कि जब सरकार उनसे होल्डिंग टैक्स और बिजली बिल ‘शहरी दरों’ पर वसूल रही है, तो उन्हें रसोई गैस की सुविधा ‘ग्रामीण मानकों’ (45 दिन) पर क्यों दी जा रही है?

हक की हुंकार: मुजफ्फरपुर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने ‘सत्याग्रह एवं आमरण अनशन’ पर बैठे वार्ड पार्षद आनंद कंद साह और मुरौल की आक्रोशित महिलाएं, जो दोहरी नीति के खिलाफ एकजुट हुई हैं।

डी डी सी को सौंपा गया मांग पत्र

आंदोलन के दौरान वार्ड पार्षद आनंद कंद साह ने जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में उप विकास आयुक्त मुजफ्फरपुर से मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में बिहार सरकार की गजट अधिसूचना (संख्या 1037) का हवाला देते हुए मांग की गई है कि तेल कंपनियों के पुराने और त्रुटिपूर्ण ‘सॉफ्टवेयर डेटाबेस’ में तत्काल सुधार किया जाए। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्रशासन की सुस्ती के कारण नागरिकों के ‘समान अधिकार’ का हनन हो रहा है, और जब तक 25-दिवसीय शहरी रिफिल चक्र को लागू नहीं किया जाता, यह सत्याग्रह और आमरण अनशन जारी रहेगा। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और मुख्य सचिव, बिहार सरकार को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है।

बारिश में गीली लकड़ी और खाली चूल्हा: मुरौल की माताओं-बहनों ने पूछा- कब मिलेगा शहरी हक?

आंदोलन में शामिल महिलाओं का दर्द तब छलक पड़ा जब उन्होंने रसोई चलाने में हो रही दिक्कतों को साझा किया। 45 दिनों के लंबे रिफिल चक्र के कारण अधिकांश परिवारों के घरों में महीने भर बाद ही सिलेंडर खाली हो जाते हैं।

  • दुखनी देवी का बयान: “लकड़ी पर खाना बनावे में बहुत नोरियाई (दिक्कत) है। गैस मिलबे न करई है। हमरा समय से गैस चाही, केत्ते दिन से बुकिंग भइले है और ना मिलइया।”
  • अंजना देवी का बयान: “हम गैस बुक करते हैं तो 52 दिन या 60 दिन में मिलता है। फैमिली वाले हैं, गैस 25-30 दिन में खत्म हो जाता है। जलावन की व्यवस्था नहीं है जो खरीद सकें, गरीब आदमी हैं।”
  • सविता देवी का बयान: “हम लोग का नगर पंचायत है, फिर भी 45 दिन पर गैस मिलता है। जबकि बाकी शहरी क्षेत्रों में 25 दिन पर मिलता है। घर में बहुत दिक्कत हो रहा है।”

दोहरा शोषण: बिल शहरी, सुविधा ग्रामीण

अनशनकारी वार्ड पार्षद आनंद कंद साह ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि मुरौल को शहरी निकाय घोषित हुए 5 साल हो चुके हैं। अधिसूचना (गजट संख्या 1037) के बावजूद तेल कंपनियों ने अपने डेटाबेस में सुधार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आम जनता जमीन रजिस्ट्री से लेकर बिजली बिल तक में अतिरिक्त ‘शहरी शुल्क’ दे रही है, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण रसोई गैस के लिए अभी भी ग्रामीण कोटे की बेड़ियों में जकड़ी हुई है।  

आमरण अनशन में शामिल प्रमुख नागरिक

इस ‘रसोई की लड़ाई’ में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए हैं, जिनमें मुख्य रूप से: कृष्णा देवी, पिंकी देवी, सविता देवी, मेथुर भगत, विनोद राम, दुखनी देवी, इंदु देवी, संगीत देवी, झलिया देवी, शोभा देवी, फुलझरिया देवी, रीता देवी, ममता देवी, रामपरी देवी, मीना देवी, सीता देवी, रंजना देवी, नगीना देवी, सोनी देवी, और आशा देवी शामिल हैं।

प्रशासनिक कदम: वहीं इस मामले में सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर ने भी अनशन के मद्देनजर अधीक्षक, सदर अस्पताल को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्रांक 1822 दिनांक 30.04.26 के माध्यम से निर्देशित किया है।


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निगरानी की ‘हाफ सेंचुरी’: 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे तेज स्ट्राइक, कापें रिश्वतखोर!

ऐतिहासिक रफ्तार: 29 अप्रैल 2026 को इस साल का 50वां कांड दर्ज किया गया, जो पिछले 6 वर्षों में सबसे तेज है।

पटना | विशेष संवाददाता

बिहार में भ्रष्टाचार के दानव पर लगाम कसने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (VIB) ने इस वर्ष ‘सुपरफास्ट’ मोड में काम शुरू किया है। राज्य में जीरो टॉलरेंस की नीति को चरितार्थ करते हुए निगरानी ब्यूरो ने वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही कार्रवाई का ‘अर्धशतक’ जड़ दिया है। ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 29 अप्रैल 2026 को इस साल का 50वां कांड दर्ज किया गया, जिसने पिछले 6 वर्षों के सभी रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर दिया है।

पिछले 6 वर्षों में सबसे प्रचंड प्रहार

निगरानी ब्यूरो द्वारा जारी तुलनात्मक आंकड़ों पर नजर डालें तो भ्रष्टाचार के विरुद्ध यह अब तक की सबसे तेज स्ट्राइक है। साल 2025 में 50वां मामला दर्ज होने में जुलाई तक का समय लगा था, जबकि 2024 में पूरे साल में केवल 12 और 2023 में महज 36 मामले ही सामने आए थे। ब्यूरो की इस सक्रियता ने सचिवालय से लेकर प्रखंड कार्यालयों तक बैठे घूसखोरों की नींद उड़ा दी है।

ट्रैप का जाल: राजस्व और पुलिस विभाग में हड़कंप

इस साल अब तक हुए कुल कांडों में से 45 मामले ‘रंगे हाथ गिरफ्तारी’ (Trap) के हैं। विभागवार आंकड़ों के मुताबिक:

  • राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग: 08 ट्रैप (सबसे ज्यादा)
  • पुलिस विभाग: 07 ट्रैप
  • पंचायती राज विभाग: 04 ट्रैप
  • स्वास्थ्य विभाग: 03 ट्रैप इसके अलावा शिक्षा, खनन, कृषि और विश्वविद्यालय स्तर पर भी भ्रष्ट अधिकारी ब्यूरो के चंगुल में फंसे हैं।

बड़ी मछलियां भी नहीं बच पाईं

इस साल के अभियान की खास बात यह रही कि ब्यूरो ने सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि ‘बड़ी मछलियों’ पर भी शिकंजा कसा है। 45 ट्रैप कांडों में से 8 मुख्य मामले ऐसे हैं जहाँ रिश्वत की राशि 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक थी:

  1. परमजय सिंह (सहायक निदेशक, युवा रोजगार): 5,00,000 रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार।
  2. मो. सनाउल्लाह खान (सहायक कुल सचिव, पटना): 2,50,000 रुपये घूस लेते धरे गए।
  3. मुकेश कुमार (प्रशाखा पदाधिकारी, मुंगेर): 1,70,000 रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार।
  4. देवकांत कुमार (पु.अ.नि., राजगीर): 90,000 रुपये लेते होटल से पकड़े गए।

जनता से सीधी अपील

निगरानी ब्यूरो ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई जनता के सहयोग से ही संभव है। यदि कोई सरकारी सेवक रिश्वत की मांग करता है, तो आम नागरिक बेझिझक ब्यूरो के टोल-फ्री नंबरों, व्हाट्सएप नंबर (9473494167) या ईमेल पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ब्यूरो ने आश्वासन दिया है कि शिकायतकर्ताओं की पहचान गुप्त रखी जाएगी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुरौल नगर पंचायत में ‘गैस’ पर घमासान! उप-मुख्य पार्षद बोले- ‘चुप’ है पद, मुख्य पार्षद ने झाड़ा पल्ला, पार्षद जाएंगे अनशन पर!

मुद्दे की बात पर बकलोलीका ठप्पा! मुरौल में गैस संकट पर भिड़े माननीय, जनता पूछ रहीहमारा हक कहाँ है?”

मुरौल (मुजफ्फरपुर): नगर पंचायत मुरौल में जनता की मूलभूत सुविधाओं को लेकर सियासत का पारा चढ़ गया है। एक तरफ वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कंद साह ने गैस आपूर्ति की समस्या को लेकर 30 अप्रैल से ‘आमरण अनशन’ का बिगुल फूंक दिया है, तो दूसरी तरफ नगर सरकार के शीर्ष पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों के बयानों ने इस विवाद में घी डालने का काम किया है। न्यूज़ भारत टीवी के पत्रकार कुमार ‘पंकज’ ने जब इस मुद्दे पर ‘नगर सरकार’ के कर्ता-धर्ताओं से सीधी बात की, तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।


प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

मुख्य पार्षद की बेरुखी: सवाल सुनते ही काटा फोन

नगर पंचायत के अध्यक्ष (मुख्य पार्षद) नरेश मेहता का रवैया इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह उदासीन दिखा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस अनशन या पार्षद आनंद कंद साह से कोई लेना-देना नहीं है। हद तो तब हो गई जब पत्रकार ने उनसे जनता से जुड़ा वाजिब सवाल पूछा— “नगर पंचायत घोषित होने के बाद भी जनता को शहरी गैस सुविधा क्यों नहीं मिल रही?” इस सवाल का जवाब देने के बजाय मुख्य पार्षद ने फोन ही काट दिया। उनका यह मौन, इशारा करता है कि जैसे क्षेत्र में कोई समस्या ही नहीं है।

उप-मुख्य पार्षद का बकलोलीवाला तंज और लाचारी

उपाध्यक्ष (उप-मुख्य पार्षद) अजय कुमार ने इस पूरे आंदोलन को ही ‘बकलोली’ करार दे दिया। उन्होंने कहा कि यह आनंद कंद साह की ‘स्पेशल राजनीति’ है। हालांकि, जब उनसे किये गये कागजी कार्रवाई पर सवाल हुआ, तो उन्होंने अपनी लाचारी जाहिर करते हुए यहाँ तक कह दिया कि— “उप मतलब ‘चुप’ होता है।” उन्होंने अधिकारियों (EO) पर असहयोग का ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि वे लिखकर थक चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती।

पार्षदों का मिला-जुला रुख: कोई साथ, कोई अनजान

जहाँ वार्ड 2 के पार्षद श्याम कुमार और वार्ड 6 की पार्षद गुड़िया देवी ने आनंद कंद साह के अनशन का खुला समर्थन किया है और साथ बैठने का दावा किया है, वहीं वार्ड 1 के पार्षद राजीव कुमार, वार्ड 5 के पार्षद विजय पासवान और वार्ड 7 की पार्षद संजू देवी के प्रतिनिधि विजय राय ने बताया कि उन्हें इस अनशन की जानकारी व्यक्तिगत तौर पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है। हालांकि, सभी ने माना कि गैस आपूर्ति का मुद्दा जायज है।


इन जनप्रतिनिधियों से नहीं हो सका संपर्क

जनता की आवाज बुलंद करने की इस कोशिश में कई पार्षदों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। वार्ड संख्या 8 के पार्षद संजय कुमार के बारे में पता चला कि वे बीमार हैं। वार्ड संख्या 9 की पार्षद जुबैदा खातून को कई बार (शाम 4:17 और 4:27 बजे) कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। वहीं वार्ड संख्या 10 की पार्षद सरस्वती देवी एवं उनके प्रतिनिधी संतोष कुमार के नंबर पर संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में इन वार्डों की जनता की राय इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सामने नहीं आ पाई।


 टैक्स शहरी, सुविधा ग्रामीण! आखिर क्यों?

नगर पंचायत मुरौल की जनता आज दोहरी मार झेल रही है। नियमतः नगर निकाय बनने के बाद गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी 25 दिनों के भीतर होनी चाहिए, लेकिन यहाँ आज भी 45 दिनों का ग्रामीण नियम लागू है। पार्षद बबलू कुमार (वार्ड 4) ने सही सवाल उठाया है कि सरकार होल्डिंग टैक्स तो शहरी दर पर वसूल रही है, लेकिन राशन, बिजली और गैस जैसी बुनियादी सुविधाओं के समय हमें ‘ग्रामीण’ मानकर छोड़ दिया जाता है।

30 अप्रैल का अनशन यह तय करेगा कि मुरौल की नगर सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है या फिर यह आपसी गुटबाजी और ‘चुप’ रहने के खेल में ही उलझी रहेगी।


ब्यूरो रिपोर्ट: न्यूज़ भारत टीवी।

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आरक्षण का रण: ‘90% कोटा नहीं तो राज नहीं’, पटना की सड़कों पर पिछड़ों का सैलाब, पुलिस से भारी भिड़ंत!

पटना | विशेष संवाददाता बिहार की राजधानी पटना आज एक बार फिर बड़े आंदोलन की गवाह बनी। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के आह्वान पर आयोजित ‘विराट महारैली’ ने आज पटना की सड़कों पर ऐसा सैलाब लाया कि प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। गांधी मैदान के गेट नंबर 1 से शुरू हुआ यह जनसैलाब जब डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ा, तो पूरा सड़क ‘आरक्षण हमारा हक है’ के नारों से गूंज उठा।

राजभवन की ओर बढ़ते राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्र कुमार सिंह चंद्रपुरी एवं डाकबंगला चौराहे पर पुलिस के घेरे को चुनौती देते अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के कार्यकर्ता।

पुलिसिया घेराबंदी और तीखी झड़प

महारैली जैसे ही डाकबंगला चौराहे पर पहुँची, पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। देखते ही देखते शांतिपूर्ण प्रदर्शन रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों ने जब राजभवन कूच के लिए बैरिकेडिंग लांघने का प्रयास किया, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा, जिसके बाद प्रशासन ने पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल से मिलने की अनुमति दी।

डाकबंगला चौराहे पर पुलिस के घेरे को चुनौती देते अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के कार्यकर्ता।

वही राज करेगा, जो 90% आरक्षण की बात करेगा

संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्र कुमार सिंह चंद्रपुरी ने मीडिया को संबोधित करते हुए दो-टूक शब्दों में कहा, अब याचक बनकर नहीं, बल्कि हकदार बनकर लड़ाई लड़ी जाएगी। जो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में 90% आरक्षण की बात करेगा, वही अब बिहार और भारत पर राज करेगा।” उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को सीधी चेतावनी दी कि बहुसंख्यक आबादी की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डाकबंगला चौराहे पर पुलिस के द्वारा की गई बैरेकेडिंग को धकेल कर आगे बढतें अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के कार्यकर्ता।

आंदोलन की 4 मुख्य धुरी:

  1. न्यायपालिका में आरक्षण: संघ ने मांग की है कि उच्च न्यायपालिका (SC/HC) में जजों की नियुक्ति में SC, ST और OBC को प्राथमिकता दी जाए।
  2. 65% से 90% का सफर: बिहार में लागू 65% आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 90% करने की मांग बुलंद की गई।
  3. महिला आरक्षण में कोटा के भीतर कोटा‘: वक्ताओं ने कहा कि 33% महिला आरक्षण में केवल पिछड़ी, दलित और अल्पसंख्यक महिलाओं को जगह मिले, क्योंकि सवर्ण महिलाएं पहले से ही सशक्त हैं।
  4. UGC बिल: यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में वंचित वर्ग के छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी बिल को अविलंब लागू करने की मांग की गई।
आरक्षण की सीमा को बढ़ाने को लेकर पटना की सड़को पर प्रदर्शन करती महिलायें  

मुजफ्फरपुर से लेकर पटना तक एकजुटता

इस महारैली में सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर, गया और दरभंगा जैसे जिलों से हजारों की संख्या में छात्र, युवा, महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। मुजफ्फरपुर से आए संतोष कुमार कुशवाहा के नेतृत्व में हजारों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आंदोलन में अनिमेष कुमार मलिक, शशि गुप्ता और आनंद सिंह जैसे नेताओं ने साफ किया कि यह लड़ाई तब तक थमेगी नहीं, जब तक संवैधानिक अधिकारों को पूरी तरह से लागू नहीं कर दिया जाता।

“जुझारू नेतृत्व” – तपती धूप में भी अपने अधिकारों के लिए डटे हुए विभिन्न जिलों से आए युवा और महिलाएं।

राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन जाकर महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यदि इन मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले चुनाव में बहुजन समाज अपनी ताकत का अहसास करा देगा। देर शाम तक पटना की सड़कों पर आंदोलनकारियों की भीड़ जमी रही, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

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118 दिनों से जारी ‘मनरेगा वॉच’ का महा-आंदोलन फिलहाल स्थगित; सरकार को 15 दिन का अल्टीमेटम, वरना फिर भड़केगा जन-आक्रोश!

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर में बीते 118 दिनों से मनरेगा मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ रहे ‘मनरेगा वॉच’ के आंदोलन ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे मजदूरों का आक्रोश फिलहाल थम गया है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ी शर्त और सरकार को दिया गया सख्त अल्टीमेटम छिपा है।

मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर में अपनी मांगों को लेकर माइक थामे आंदोलन का नेतृत्व करते संजय सहनी और उनके साथ मौजूद मनरेगा वॉच के सदस्य।

पटना से सकारात्मक वार्ता के बाद फैसला मनरेगा वॉच के मुख्य कार्यकर्ता संजय सहनी ने जानकारी दी कि पटना में ग्रामीण विकास विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद इस आंदोलन को फिलहाल 15 दिनों के लिए स्थगित किया गया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अगले पखवाड़े में मजदूरों की सभी लंबित समस्याओं का निराकरण कर दिया जाएगा।

क्यों सुलग रहा था आंदोलन? बता दें कि मनरेगा में ‘कैंपिंग एक्जम्पशन’ और प्रशासनिक जटिलताओं के कारण मजदूरों को लंबे समय से काम नहीं मिल रहा था, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा गया था। इसी मुद्दे को लेकर मुजफ्फरपुर के समाहरणालय पर 118 दिनों से निरंतर धरना प्रदर्शन चल रहा था।

‘वादा खिलाफी हुई तो फिर सड़कों पर उतरेंगे’ संजय सहनी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह पूर्ण विराम नहीं, बल्कि एक अल्पविराम है। यदि 15 दिनों के भीतर सरकार ने अपनी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो मनरेगा वॉच फिर से उग्र आंदोलन शुरू करेगा। इस धरना प्रदर्शन में बबीता देवी, जीनत प्रवीण, पिंकी देवी, मुन्नी देवी और रेखा देवी समेत दर्जनों कार्यकर्ताओं ने अपनी आवाज बुलंद की।

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दिल्ली पुलिस की ‘गुंडागर्दी’ का शिकार हुआ बिहारी युवक: समस्तीपुर में फूटा जनता का गुस्सा, फूंका गृहमंत्री का पुतला

समस्तीपुर, 29 अप्रैल 2026 | देश की राजधानी दिल्ली में बिहारी पहचान को निशाना बनाकर की गई एक जघन्य हत्‍या ने बिहार के समस्तीपुर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। दिल्ली के द्वारका इलाके में एक डिलीवरी बॉय की दिल्ली पुलिस के जवान द्वारा गोली मारकर हत्या किए जाने के विरोध में आज समस्तीपुर की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। आइसा (AISA) और नागरिक समाज के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने जोरदार प्रतिरोध मार्च निकाला और दिल्ली पुलिस की ‘गुंडागर्दी’ के खिलाफ अपना गुस्सा जताते हुए गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंका।

समस्तीपुर की सड़कों पर गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंकते आइसा और नागरिक समाज के कार्यकर्ता, घटना के प्रति गहरे आक्रोश में दिख रहे हैं प्रदर्शनकारी।

सड़कों पर गूंजे न्याय के नारे

शहर के सर्किट हाउस से शुरू हुआ यह प्रतिरोध मार्च मुख्य मार्गों से होता हुआ गायत्री कॉम्प्लेक्स तक पहुंचा। हाथों में ‘क्‍या बिहारी होना गुनाह है?’ और दोषियों को फांसी देने की मांग वाली तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यह मार्च देखते ही देखते एक  सभा में तब्दील हो गया, जिसकी अध्यक्षता आइसा जिला अध्यक्ष लोकेश राज ने की और मंच का संचालन जिला सचिव सुनील कुमार सिंह ने किया।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात दिल्ली के द्वारका इलाके में खगड़िया जिले का निवासी और डिलीवरी बॉय का काम करने वाला पांडव कुमार अपने एक दोस्त के साथ पार्टी से घर लौट रहा था। आरोप है कि दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल नीरज बलहारा ने उन्हें रोककर अभद्र भाषा का प्रयोग किया। जब पांडव ने इस ‘गुंडागर्दी’ का विरोध किया, तो पुलिसकर्मी ने उसे सीने में गोली मार दी। गोली पांडव के सीने को भेदते हुए पीछे बैठे उसके दोस्त को भी जा लगी। अस्पताल ले जाने के दौरान पांडव की मौत हो गई, जबकि उसका साथी अभी भी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।

‘क्या बिहारी होना गुनाह है?’ के पोस्टर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारी। ये तस्वीरें दिल्ली पुलिस की बर्बरता के खिलाफ समस्तीपुर के लोगों के भारी गुस्से को बयां कर रही हैं।

नेताओं ने की तीखी आलोचना, रखीं मांगें

सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने घटना को ‘बिहारियों का अपमान’ करार दिया। उन्होंने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग करते हुए कहा:

  • घटना की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पुलिसकर्मी पर बिहार में एफआईआर दर्ज कर ‘स्पीडी ट्रायल’ के जरिए फांसी दी जाए।
  • मृतक के परिजनों को 20 लाख रुपए का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।
  • देश के अन्य राज्यों में काम कर रहे बिहारियों की सुरक्षा सरकार सुनिश्चित करे।
  • बिहार में ही कल-कारखाने लगाकर रोजगार के साधन पैदा किए जाएं ताकि बिहारियों को जान जोखिम में डालकर पलायन न करना पड़े।

माले नेता ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चुटकी लेने वाले नेताओं पर भी निशाना साधा। उन्होंने ‘मार दिया तो क्या हुआ’ का बयान देने वाले जीतन राम मांझी और ‘बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट’ का नारा देने वाले चिराग पासवान की कड़े शब्दों में आलोचना की।

पुतला दहन के साथ खत्म हुआ प्रदर्शन

सभा के अंत में आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंका और चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन में नागरिक समाज के दीनबंधु प्रसाद, रामबली सिंह, राजद नेता शाहीद हुसैन, मो० सगीर, मनोज कुमार सिंह, मनोज शर्मा, मो० सोनू, राजू झा और दीपक यदुवंशी समेत भारी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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PM आवास योजना बनी कमाई का जरिया: जमुई में रिश्वत लेते नगर कार्यपालक पदाधिकारी समेत दो गिरफ्तार!

जमुई/पटना: गरीबों के उत्थान के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) अब बिहार के जमुई जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। सिकंदरा नगर पंचायत में आवास योजना के नाम पर अवैध वसूली का एक बड़ा मामला सामने आया है। विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार और उनके साथ काम करने वाले स्वच्छता साथी सोनू कुमार को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है।

विशेष निगरानी इकाई (SVU) द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर 50,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए सिकंदरा नगर पंचायत के नगर कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार (चश्‍मा में ) और स्वच्छता साथी सोनू कुमार।

गरीबों का हक मारकर भर रहे थे तिजोरी

मामले की शुरुआत तब हुई जब नगर पंचायत सिकंदरा के वार्ड-03 के निवासी और शिकायतकर्ता राजेश कुमार मिश्रा ने विशेष निगरानी इकाई के समक्ष अपनी आपबीती सुनाई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि नगर कार्यपालक पदाधिकारी संतोष कुमार और उनके सहयोगी स्वच्छता साथी सोनू कुमार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना की स्वीकृति के लिए 1 लाख रुपये से अधिक की घूस मांगी जा रही थी।

आरोपियों का लालच इतना बढ़ गया था कि उन्होंने साफ शब्दों में कह दिया था कि जब तक 50,000 रुपये (रिश्वत की पहली किश्त) नहीं दी जाएगी, तब तक आवास योजना का आवेदन स्वीकृत नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि सिकंदरा के वार्ड-03 में लगभग 60 आवेदकों ने आवास योजना के लिए आवेदन किया था, और अधिकारियों ने प्रति आवेदक 2,500 रुपये रिश्वत देने का दबाव बनाया था।

SVU के मिशनके आगे फेल हुए घूसखोर

शिकायत मिलते ही विशेष निगरानी इकाई, पटना हरकत में आई। मामले का सत्यापन किया गया, जिसमें घूसखोरी की पुष्टि हुई। इसके बाद, पुलिस उपाधीक्षक (DSP) सुधीर कुमार के नेतृत्व में SVU की एक विशेष टीम और धावा-दल का गठन किया गया।

28 अप्रैल 2026 को SVU की टीम ने पूरी सतर्कता के साथ नगर पंचायत कार्यालय पर धावा बोला। जैसे ही आरोपियों ने घूस की रकम (50,000 रुपये) स्वीकार की, टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए SVU कार्यालय ले गई।

कानूनी शिकंजा: दर्ज हुआ मुकदमा

इस गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। SVU थाना कांड संख्या- 16/2026, दिनांक 28.04.2026 के तहत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (यथा संशोधित 2018) की धारा-7 और भारतीय न्याय संहिता की धारा- 61(2)(a) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। SVU के अपर पुलिस महानिदेशक पंकज कुमार दारद के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

जनहित में अपील: भ्रष्टाचार को ना कहें

विशेष निगरानी इकाई ने आम जनता से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी कर्मी या अधिकारी किसी भी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो कार्यालय अवधि के दौरान विशेष निगरानी इकाई से तुरंत संपर्क करें। आप अपनी शिकायतें इन नंबरों पर दर्ज करा सकते हैं:

  • दूरभाष: 0612-2506253
  • मोबाइल: 9031633644

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