पटना। बिहार सरकार ने राज्य के छात्र-छात्राओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डिजिटल लाइब्रेरी योजना के तहत अब राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में आधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी केंद्रों की स्थापना की जा रही है।
प्रतीकात्मक तस्वीर
सबके लिए शिक्षा, सबकी उन्नति
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच के ‘डिजिटल डिवाइड’ को कम करना है। इस योजना का स्लोगन “डिजिटल लाइब्रेरी से प्रगति” रखा गया है, जो राज्य के युवाओं को आधुनिक संसाधनों से जोड़कर उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाने के संकल्प को दर्शाता है।
योजना की मुख्य विशेषताएं:
आधुनिक सुविधाएं: इन केंद्रों पर हाई-स्पीड इंटरनेट, ई-बुक्स, और आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम उपलब्ध होंगे।
व्यापक पहुंच: राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में केंद्र होने से दूर-दराज के गांवों के छात्रों को भी शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद: छात्र यहां बैठकर यूपीएससी, बीपीएससी, बैंकिंग और रेलवे जैसी परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन स्टडी मटेरियल का उपयोग कर सकेंगे।
नि:शुल्क संसाधन: इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्रों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण और संसाधन सुलभ होंगे।
बदलेगी बिहार की शैक्षणिक तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना बिहार के युवाओं को न केवल शिक्षित करेगी, बल्कि उन्हें डिजिटल रूप से साक्षर बनाकर रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री की इस पहल से “सबके लिए शिक्षा” का सपना अब हकीकत में बदलता नजर आ रहा है।
पटना। बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने राज्य के गरीब और वंचित परिवारों के लिए एक बड़ी राहत की घोषणा की है। ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास सहायता योजना’ के तहत अब उन परिवारों का अपने पक्के घर का सपना सच हो सकेगा, जिनके निर्माण कार्य आर्थिक तंगी के कारण बीच में ही रुक गए थे।
किन परिवारों को मिलेगा लाभ?
इस योजना का मुख्य फोकस समाज के उन वर्गों पर है जिन्हें सिर छिपाने के लिए छत की सबसे ज्यादा जरूरत है। योजना के दायरे में निम्नलिखित श्रेणियों को रखा गया है:
अनुसूचित जाति (SC)
अनुसूचित जनजाति (ST)
अति पिछड़ा वर्ग (EBC)
₹50,000 की सीधी मदद
अक्सर देखा जाता है कि कई परिवार सरकारी आवास योजना की शुरुआती किश्त या अपनी जमापूंजी से घर बनाना शुरू तो कर देते हैं, लेकिन फंड खत्म होने के कारण घर ‘अधूरे या अपूर्ण’ अवस्था में ही रह जाते हैं। ऐसे ही अधूरे घरों को पूरा कराने के लिए सरकार ₹50,000 की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
“सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब परिवार अधूरे घर में रहने को मजबूर न हो। यह सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी जाएगी ताकि वे अपने घर की छत, फिनिशिंग या अन्य छूटे हुए कार्यों को पूरा कर सकें।”
— ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार
योजना की मुख्य बातें एक नज़र में:
विवरण
जानकारी
योजना का नाम
मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास सहायता योजना
सहायता राशि
₹50,000
पात्र वर्ग
SC, ST एवं अति पिछड़ा वर्ग
उद्देश्य
अधूरे/अपूर्ण आवासों को पूर्ण कराना
इस पहल से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर में सुधार आएगा, बल्कि उन हजारों परिवारों को संबल मिलेगा जो वर्षों से अपने घर के पूरा होने की राह देख रहे थे।
मधेपुरा/सुपौल | 10 मार्च, 2026 बिहार को विकसित राज्यों की अग्रणी श्रेणी में लाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ का तीसरा चरण आज कोसी क्षेत्र में विकास की नई इबारत लिख गया। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को सुपौल और मधेपुरा जिलों का सघन दौरा किया, जहाँ उन्होंने न केवल ₹1,000 करोड़ से अधिक की योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया, बल्कि जन-संवाद के माध्यम से सीधा फीडबैक भी लिया।
मधेपुरा में जीविका दीदियों का बढ़ा मान, करोड़ों के चेक वितरित
मधेपुरा में मुख्यमंत्री का मुख्य फोकस महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर रहा। उन्होंने जीविका दीदियों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया और उनके उत्पादों की सराहना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने:
15,748 स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के बीच ₹173 करोड़ की राशि का सांकेतिक चेक प्रदान किया।
सतत् जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत 472 लाभार्थियों को ₹2,60,96,000 की सहायता राशि सौंपी।
मधेपुरा पुलिस लाइन के नवनिर्मित प्रशासनिक एवं आवासीय भवनों का भी उद्घाटन किया।
सुपौल में बुनियादी ढांचे को मजबूती
सुपौल जिला प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने ₹570 करोड़ की योजनाओं का उपहार दिया। इसमें:
435 करोड़ रु. की लागत वाली 84 योजनाओं का शिलान्यास।
135 करोड़ रु. की 129 योजनाओं का लोकार्पण।
निर्मली रिंग बांध के जीर्णोद्धार कार्य का स्थल निरीक्षण कर अधिकारियों को गुणवत्ता के सख्त निर्देश दिए।
अधिकारियों को निर्देश: “समयबद्धता और पारदर्शिता से समझौता नहीं”
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट लहजे में कहा कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुँचना चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि:
सभी चालू योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से हो।
आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन संवेदनशील और सक्रिय रहे।
जन-संवाद: “सुशासन से समृद्धि” का संकल्प
विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों और प्रदर्शनी (शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य) का अवलोकन करते हुए मुख्यमंत्री ने युवाओं और स्कूली बच्चों से भी बातचीत की। जन-संवाद कार्यक्रम में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने दोहराया कि ‘समृद्धि यात्रा’ का उद्देश्य न्याय के साथ विकास और हर क्षेत्र की समान प्रगति सुनिश्चित करना है।
पटना | मुख्य संवाददाता बिहार के शहरों को सुंदर, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के संकल्प के साथ राज्य सरकार ने अवैध होर्डिंग और विज्ञापनों के खिलाफ एक निर्णायक जंग छेड़ दी है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर पूरे प्रदेश के 38 जिलों में सघन तलाशी और जब्ती अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब सड़कों पर नियमों को ताक पर रखकर विज्ञापन लगाने वालों को ‘आर्थिक अपराधी’ मानकर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रतिकात्मक तस्वीर
11 हजार से अधिक मामले, 20 लाख की वसूली
ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य के 264 नगर निकायों में चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत अब तक 11,000 से अधिक अवैध होर्डिंग के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए सरकार ने करीब 20 लाख रुपये का जुर्माना वसूला है। यह अभियान केवल विज्ञापन हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नियम तोड़ने वाले संस्थानों पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया जा रहा है।
प्रमुख शहरों में सख्त कार्रवाई का ब्योरा
अभियान का सबसे व्यापक असर राजधानी पटना सहित प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर देखा जा रहा है:
पटना: पटना नगर निगम क्षेत्र में 200 से अधिक अवैध होर्डिंग हटाए गए हैं, जबकि 250 से अधिक अन्य होर्डिंग मालिकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
भागलपुर: यहां प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 10 बड़े संस्थानों पर FIR दर्ज की है और अकेले इस जिले से 19 लाख रुपये से अधिक का दंड वसूला गया है।
मुजफ्फरपुर और बेगूसराय: मुजफ्फरपुर में 55 अवैध होर्डिंग हटाए गए और 71 को नोटिस दिया गया है, वहीं बेगूसराय में भी 7 प्रमुख अवैध विज्ञापनों पर कार्रवाई की गई है।
जनसुरक्षा और यातायात है प्राथमिकता
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि शहरों की सुंदरता के साथ-साथ यातायात व्यवस्था और जनसुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अक्सर अवैध होर्डिंग सड़कों के मोड़ों या बिजली के खंभों पर इस तरह लगा दिए जाते हैं जिससे वाहन चालकों का ध्यान भटकता है और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही, बिना अनुमति लगे भारी-भरकम होर्डिंग गिरने से जान-माल का खतरा भी बना रहता है।
चेतावनी: आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि यह कोई सांकेतिक अभियान नहीं है। आने वाले दिनों में राज्य के अन्य छोटे शहरों और कस्बों में भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। नगर विकास विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतिदिन की रिपोर्ट तैयार करें।
“अवैध विज्ञापन सामग्री हटाने की प्रक्रिया एक निरंतर चलने वाली कार्रवाई है। जो लोग शहर की सूरत बिगाड़ रहे हैं, उन पर हमारी नजर है। आने वाले समय में कार्रवाई का दायरा और बढ़ेगा।” — विजय कुमार सिन्हा, उपमुख्यमंत्री, बिहार
प्रशासन ने व्यवसायियों और विज्ञापन एजेंसियों से अपील की है कि वे निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें और केवल वैध स्थानों पर ही होर्डिंग लगाएं, अन्यथा भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
पटना/सुपौल । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज यानी मंगलवार, 10 मार्च 2026 से अपनी बहुचर्चित ‘समृद्धि यात्रा‘ के तीसरे और निर्णायक चरण का शुभारंभ कर रहे हैं। बजट सत्र के कारण स्थगित हुई यह यात्रा अब कोसी और सीमांचल के क्षेत्रों से दोबारा शुरू हो रही है। यात्रा के पहले दिन मुख्यमंत्री सुपौल और मधेपुरा जिलों का दौरा करेंगे, जहाँ वे न केवल सरकारी फाइलों की समीक्षा करेंगे बल्कि सीधे जनता के बीच जाकर सरकारी योजनाओं का ‘फीडबैक’ भी लेंगे।
फाइल फोटो (प्रतिकात्मक)
आज की कार्ययोजना: स्पॉट विजिट और समीक्षा बैठक
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री आज सुबह सुपौल पहुंचेंगे। यहाँ वे विभिन्न विकास योजनाओं का ‘स्पॉट विजिट‘ करेंगे, जिसमें सड़क, पुल, स्वास्थ्य केंद्र और हर घर नल का जल जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। दोपहर बाद वे मधेपुरा के लिए रवाना होंगे। मधेपुरा में मुख्यमंत्री जिले के आला अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। बताया जा रहा है कि आज का रात्रि विश्राम मधेपुरा में ही होगा, जिससे वे स्थानीय समस्याओं को और अधिक गहराई से समझ सकें।
दौरा: 10 मार्च से 14 मार्च तक कुल 10 जिलों का भ्रमण।
आज का कार्यक्रम: सुपौल और मधेपुरा में योजनाओं की समीक्षा और जनसंवाद।
मकसद: जमीनी हकीकत का आकलन और लंबित परियोजनाओं को गति देना।
10 जिलों का ‘तूफानी‘ दौरा (शेड्यूल)
अगले पांच दिनों में मुख्यमंत्री बिहार के 10 जिलों की खाक छानेंगे। प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम इस प्रकार है:
10 मार्च: सुपौल एवं मधेपुरा
11 मार्च: अररिया एवं किशनगंज
12 मार्च: पूर्णिया एवं कटिहार
13 मार्च: सहरसा एवं खगड़िया
14 मार्च: बेगूसराय एवं शेखपुरा (समापन)
यात्रा के मुख्य उद्देश्य: घोषणा नहीं, अब हिसाब की बारी
इस यात्रा को लेकर सियासी गलियारों में काफी चर्चा है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य केवल नई घोषणाएं करना नहीं, बल्कि पूर्व में घोषित योजनाओं की प्रगति का हिसाब लेना है।
जनसंवाद: मुख्यमंत्री ग्राम पंचायतों में जाकर सीधे लाभार्थियों से बात करेंगे कि क्या उन्हें राशन, पेंशन और अन्य सहायता समय पर मिल रही है।
परियोजनाओं की समीक्षा: ₹50,000 करोड़ से अधिक की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जांच करना।
अधिकारियों को निर्देश: लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर मौके पर ही कार्रवाई या सख्त निर्देश दिए जा सकते हैं।
संसदीय राजनीति के बाद अब ‘जनता की अदालत’ में नीतीश
राजधानी पटना में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया और राजनीतिक जोड़-घटाव को सुव्यवस्थित करने के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब ‘जनता की अदालत’ में उतर चुके हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि जहाँ एक ओर उन्होंने उच्च सदन के लिए अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी है, वहीं दूसरी ओर ‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए वे सीधे आम जनमानस की नब्ज टटोलने निकल पड़े हैं। नामांकन की गहमागहमी से निकलकर सीधे सुपौल और मधेपुरा की धरती पर जनता से संवाद करना यह दर्शाता है कि नीतीश कुमार संसदीय समीकरणों के साथ-साथ जमीनी फीडबैक को भी समान प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों और राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा के बीच, राज्यसभा नामांकन के ठीक बाद शुरू हुई यह यात्रा राज्य की राजनीति में एक बड़े ‘मास्टरस्ट्रोक’ के रूप में देखी जा रही है।
सियासी मायने और ‘समृद्धि‘ का संकल्प
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की यह ‘समृद्धि यात्रा’ नीतीश कुमार के सुशासन के मॉडल को और अधिक धार देने की कोशिश है। यात्रा के माध्यम से वे यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार सचिवालय से नहीं, बल्कि जनता के बीच से चल रही है। 16 जनवरी को बेतिया से शुरू हुई इस यात्रा के अब तक के दो चरणों ने राज्य में विकास की एक नई बहस छेड़ दी है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह यात्रा बिहार को ‘विकसित बिहार‘ बनाने के संकल्प की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
मुजफ्फरपुर | 09 मार्च, 2026 शहर के प्रतिष्ठित महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (एमडीडीएम) के शिक्षाशास्त्र विभाग (बी.एड.) में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस अत्यंत उत्साहपूर्वक और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस वर्ष के विशेष विषय “सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए अधिकार, न्याय और कार्रवाई” पर केंद्रित इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज में महिलाओं की सशक्त भूमिका और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।
मंच पर जीवंत हुआ ‘चिंकी का संघर्ष‘
कार्यक्रम की शुरुआत बी.एड. विभाग की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत एक प्रेरणादायक नाटक से हुई। इस नाटक में “चिंकी के संघर्ष से आईएएस (IAS) बनने तक के सफर” को बहुत ही मार्मिक ढंग से दर्शाया गया। छात्राओं ने अपने अभिनय के जरिए दिखाया कि कैसे एक साधारण पृष्ठभूमि की लड़की तमाम सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों को पार कर सफलता के शिखर तक पहुँच सकती है।
इस प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति में सोनाक्षी कुमारी, सगुन भारती, शाहीन नाज़, मनीषा कुमारी, नुसरत और फातिमा नूर के साथ अन्य छात्राओं ने भी उत्कृष्ट सहभागिता निभाई। इसके तुरंत बाद छात्राओं ने “बेटी हमारी अनमोल” गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसने पूरे सभागार को भावुक और प्रेरणा से भर दिया।
शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही सफलता की कुंजी
समारोह को संबोधित करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ शिक्षा, आत्मविश्वास और आर्थिक आत्मनिर्भरता है। उन्होंने समाज के सर्वांगीण विकास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में छात्रा फातिमा नूर ने भी महिला सशक्तिकरण विषय पर अपने ओजस्वी विचार व्यक्त किए। पूरे कार्यक्रम का कुशल और प्रभावी मंच संचालन छात्रा मानसी ऋतु द्वारा किया गया।
नारी शक्ति के विभिन्न रूपों का प्रदर्शन
समारोह के अंतिम चरण में छात्राओं ने एक विशेष प्रस्तुति दी, जिसमें भारतीय नारी के विभिन्न स्वरूपों और उनकी शक्ति को प्रदर्शित किया गया। इस प्रस्तुति में संध्या कुमारी, शाहीन नाज़, मनीषा कुमारी, सगुन भारती, मानसी ऋतु, सोनाक्षी कुमारी, तनु कुमारी एवं जूही कुमारी ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में मुख्य रूप से:
प्राचार्या: डॉ. अलका जायसवाल
बर्सर: डॉ. अनुराधा सिंह
विभागाध्यक्ष (बी.एड.): डॉ. हरि शंकर कुमार
सम्माननीय शिक्षकगण: डॉ. स्मिता गौतम, डॉ. रवि कुमार, डॉ. सुमन्त कुमार, डॉ. पवन कुमार, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. राजमणि कुमार, डॉ. मणिकांत कुमार, डॉ. श्रीनिवास सुधांशु, श्रीमती ममता कुमारी एवं श्रीमती साधना कुमारी।
सभी अतिथियों और शिक्षकों ने छात्राओं की रचनात्मकता और उनके हुनर की मुक्त कंठ से सराहना की। अंत में सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का विधिवत समापन किया गया।
पटना। राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के कुनबे में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल हुआ है। पूर्व सांसद प्रिंस राज पासवान को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान आधिकारिक रूप से इस निर्णय की घोषणा की। बैठक में पार्टी की मजबूती और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई, जिसके बाद प्रिंस राज को यह अहम जिम्मेदारी सौंपने का फैसला लिया गया।
विदित हो कि प्रिंस राज दलित राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं और इस नई जिम्मेदारी के साथ उन पर पार्टी के सांगठनिक विस्तार और युवाओं को जोड़ने का बड़ा दारोमदार होगा। घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं में हर्ष का माहौल है।
नई दिल्ली | आगामी राज्यसभा चुनावों को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संपन्न कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी संगठनात्मक तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विभिन्न राज्यों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं।
पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी अरुण सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में बेहतर समन्वय स्थापित करना और पार्टी की रणनीति को धरातल पर उतारना है।
प्रमुख नियुक्तियां और जिम्मेदारियां
पार्टी ने अनुभवी नेताओं को इन राज्यों की कमान सौंपी है:
राज्य
नियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षक
वर्तमान पद
बिहार
विजय शर्मा
हर्ष मल्होत्रा
उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ सरकार
केंद्रीय राज्य मंत्री, भारत सरकार
हरियाणा
हर्ष सांघवी
उप मुख्यमंत्री, गुजरात सरकार
ओडिशा
चन्द्रशेखर बावनकुले
मंत्री, महाराष्ट्र सरकार
रणनीतिक कदम
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन भारी-भरकम नामों को पर्यवेक्षक बनाकर भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह राज्यसभा चुनाव की हर एक सीट पर सूक्ष्मता से नजर रख रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का यह कदम संगठनात्मक ढांचे को मजबूती प्रदान करने और अंतर्कलह जैसी संभावनाओं को खत्म कर पूरी पारदर्शिता के साथ चुनाव संचालित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं, और संबंधित नेता जल्द ही अपने आवंटित राज्यों का दौरा कर स्थानीय विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठकें शुरू करेंगे।
नई चीनी मिलों की स्थापना और बंद मिलों को पुनर्जीवित करने पर सरकार का जोर; किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक पर मंथन।
पटना। बिहार में गन्ना खेती को आधुनिक स्वरूप देने और चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से सोमवार को पटना के ज्ञान भवन में “गन्ना प्रौद्योगिकी सेमिनार–2026” का शुभारंभ हुआ। इस दो दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन राज्य के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल और गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार भी उपस्थित रहे।
नवाचार से समृद्धि की ओर बिहार
सेमिनार का मुख्य विषय “आधुनिक तकनीक: नवाचार से समृद्धि” रखा गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार की एनडीए सरकार गन्ना किसानों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रही है। उन्होंने राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना और वर्षों से बंद पड़ी मिलों को पुनः चालू करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का महामंथन
इस सेमिनार में देशभर से आए नामचीन वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, निवेशकों और चीनी मिल प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा के मुख्य बिंदु रहे:
कम लागत, अधिक उत्पादन: कैसे उन्नत किस्मों के बीजों के प्रयोग से किसानों का खर्च कम किया जाए।
आधुनिक तकनीक: खेती में नई मशीनों और नवाचारों का समावेश।
औद्योगिकीकरण: चीनी मिलों के माध्यम से राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करना।
“हमारी सरकार गन्ना क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देकर न केवल कृषि क्षेत्र को सशक्त बना रही है, बल्कि राज्य में औद्योगिकीकरण को गति देकर युवाओं के लिए रोजगार और किसानों के लिए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रही है।” — विजय कुमार सिन्हा, उपमुख्यमंत्री
किसानों के लिए नई राह
विशेषज्ञों ने सेमिनार में गन्ने की उन किस्मों पर प्रकाश डाला जो कम पानी और कम समय में बेहतर पैदावार देती हैं। इससे बिहार के गन्ना बेल्ट (विशेषकर उत्तर बिहार) के किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि गन्ने की खेती को केवल फसल तक सीमित न रखकर इसे एक लाभदायक उद्योग के रूप में विकसित किया जाए।
हसनपुर के मंगलगढ़ में 907 घरों को बुल्डोजर से ढहाने और हमले के विरोध में भाकपा (माले) व खेग्रामस ने भरी हुंकार
समस्तीपुर | 9 मार्च, 2026 शहर के लेनिन आश्रम मालगोदाम चौक परिसर में सोमवार को अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। शहरी मजदूर महेंद्र साह की अध्यक्षता और मनोज पोद्दार के संचालन में हुई इस बैठक में जिले के विभिन्न अंचलों में गरीबों और भूमिहीनों को उजाड़ने की कार्रवाई पर गहरा रोष व्यक्त किया गया।
मंगलगढ़ कांड पर फूटा गुस्सा
बैठक को संबोधित करते हुए खेग्रामस के जिला प्रभारी सह राज्य उपाध्यक्ष जीवछ पासवान और मनरेगा संघ के जिला प्रभारी उपेंद्र राय ने कहा कि हसनपुर अंचल के मंगलगढ़ में सामंतों, पुलिस और गुंडों के गठजोड़ ने 907 गरीब परिवारों के घरों को बुल्डोजर से ध्वस्त कर दिया। इस दौरान जानलेवा हमले में दर्जनों लोग घायल हुए। वक्ताओं ने मांग की कि उजाड़े गए इन सभी परिवारों का तुरंत पुनर्वास किया जाए और उन्हें बासगीत पर्चा दिया जाए।
कुष्ठ कॉलोनी के निवासियों को मिले मालिकाना हक
नेताओं ने शहर के मालगोदाम चौक से पूर्व स्थित कुष्ठ कॉलोनी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999-2000 में तत्कालीन डीएम और रेल प्रबंधक द्वारा बसाए गए इन शहरी गरीबों और भिक्षुकों को अब तक बासगीत पर्चा नहीं मिला है, जो उनके अधिकारों का हनन है। प्रशासन को अविलंब इन्हें स्थाई स्वामित्व देना चाहिए।
12 मार्च से अनिश्चितकालीन प्रदर्शन
भाकपा (माले) जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि:
ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से बसे गरीबों को अंचलाधिकारी द्वारा दिए गए बेदखली के नोटिस वापस लिए जाएं।
सरकारी जमीन, मालिकाना जमीन और पोखरों के भिंडा पर बसे भूमिहीनों को बासगीत पर्चा देकर नियमित किया जाए।
इन मांगों के समर्थन में 12 मार्च से जिला समाहर्ता के समक्ष सरकारी बस स्टैंड परिसर में भाकपा (माले) और खेग्रामस के संयुक्त बैनर तले ‘डेरा डालो-घेरा डालो‘ कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जो अनिश्चितकालीन चलेगा।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक को मोस्मात ज्ञांति देवी, चिंता देवी, पवन देवी, वीरेंद्र शर्मा, राहुल कुमार, विजेंद्र नट, संगीता देवी और सोमनी देवी सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया और आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।