जींद-सोनीपत रूट पर सफल ट्रायल के साथ भारत बना दुनिया का छठा बाहुबली; जर्मनी और चीन के क्लब में मारी एंट्री
पटना | विशेष संवाददाता |: नए भारत की नई शक्ति ने आज पूरी दुनिया को चौंका दिया है। हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल खंड पर जब देश की पहली ‘हाइड्रोजन पावर’ ट्रेन का सफल परीक्षण हुआ, तो यह सिर्फ एक ट्रायल नहीं बल्कि भविष्य के परिवहन की एक नई क्रांति का आगाज़ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ संकल्प को धरातल पर उतारते हुए भारतीय इंजीनियरों ने वह कर दिखाया है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन थी।

डॉ. दिलीप जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस उपलब्धि को साझा करते हुए इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल खंड पर देश की पहली ‘हाइड्रोजन पावर’ ट्रेन का सफल परीक्षण नए भारत की तकनीक और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। जायसवाल के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘मेक इन इंडिया’ का संकल्प अब धरातल पर उतर रहा है और शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली यह तकनीक भविष्य के स्वच्छ परिवहन की मजबूत नींव रखेगी।
प्रदूषण का काल: न धुआं, न शोर यह ट्रेन पूरी तरह से ‘जीरो कार्बन एमिशन’ पर आधारित है। पारंपरिक डीजल इंजनों की तरह जहरीला धुआं उगलने के बजाय, यह तकनीक केवल भाप और पानी उत्सर्जित करती है। यानी अब सफर में रफ्तार भी होगी और पर्यावरण की सुरक्षा भी।
दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हुआ भारत इस ऐतिहासिक कदम के साथ ही भारत अब जर्मनी, चीन और यूके जैसे उन गिने-चुने देशों की फेहरिस्त में शामिल हो गया है, जिनके पास हाइड्रोजन तकनीक से ट्रेन चलाने की महारत हासिल है। यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी श्रेष्ठता का डंका बजा रही है।
अमृत काल की बड़ी सौगात रेलवे विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेन का यह सफल ट्रायल देश के परिवहन ढांचे की नींव बदल देगा। आने वाले समय में यह तकनीक न केवल डीजल के आयात पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ जंग में भारत का सबसे बड़ा हथियार साबित होगी। जींद-सोनीपत रूट पर मिली यह सफलता नए भारत का एक ऐसा ऐलान है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित करेगा।
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