पटना | विशेष संवाददाता बिहार की राजधानी पटना आज एक बार फिर बड़े आंदोलन की गवाह बनी। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के आह्वान पर आयोजित ‘विराट महारैली’ ने आज पटना की सड़कों पर ऐसा सैलाब लाया कि प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। गांधी मैदान के गेट नंबर 1 से शुरू हुआ यह जनसैलाब जब डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ा, तो पूरा सड़क ‘आरक्षण हमारा हक है’ के नारों से गूंज उठा।

राजभवन की ओर बढ़ते राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्र कुमार सिंह चंद्रपुरी एवं डाकबंगला चौराहे पर पुलिस के घेरे को चुनौती देते अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के कार्यकर्ता।

पुलिसिया घेराबंदी और तीखी झड़प

महारैली जैसे ही डाकबंगला चौराहे पर पहुँची, पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। देखते ही देखते शांतिपूर्ण प्रदर्शन रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों ने जब राजभवन कूच के लिए बैरिकेडिंग लांघने का प्रयास किया, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प और धक्का-मुक्की हुई। घंटों तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा, जिसके बाद प्रशासन ने पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राज्यपाल से मिलने की अनुमति दी।

डाकबंगला चौराहे पर पुलिस के घेरे को चुनौती देते अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के कार्यकर्ता।

वही राज करेगा, जो 90% आरक्षण की बात करेगा

संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्र कुमार सिंह चंद्रपुरी ने मीडिया को संबोधित करते हुए दो-टूक शब्दों में कहा, अब याचक बनकर नहीं, बल्कि हकदार बनकर लड़ाई लड़ी जाएगी। जो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में 90% आरक्षण की बात करेगा, वही अब बिहार और भारत पर राज करेगा।” उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को सीधी चेतावनी दी कि बहुसंख्यक आबादी की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

डाकबंगला चौराहे पर पुलिस के द्वारा की गई बैरेकेडिंग को धकेल कर आगे बढतें अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के कार्यकर्ता।

आंदोलन की 4 मुख्य धुरी:

  1. न्यायपालिका में आरक्षण: संघ ने मांग की है कि उच्च न्यायपालिका (SC/HC) में जजों की नियुक्ति में SC, ST और OBC को प्राथमिकता दी जाए।
  2. 65% से 90% का सफर: बिहार में लागू 65% आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 90% करने की मांग बुलंद की गई।
  3. महिला आरक्षण में कोटा के भीतर कोटा‘: वक्ताओं ने कहा कि 33% महिला आरक्षण में केवल पिछड़ी, दलित और अल्पसंख्यक महिलाओं को जगह मिले, क्योंकि सवर्ण महिलाएं पहले से ही सशक्त हैं।
  4. UGC बिल: यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में वंचित वर्ग के छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी बिल को अविलंब लागू करने की मांग की गई।
आरक्षण की सीमा को बढ़ाने को लेकर पटना की सड़को पर प्रदर्शन करती महिलायें  

मुजफ्फरपुर से लेकर पटना तक एकजुटता

इस महारैली में सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि मुजफ्फरपुर, गया और दरभंगा जैसे जिलों से हजारों की संख्या में छात्र, युवा, महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। मुजफ्फरपुर से आए संतोष कुमार कुशवाहा के नेतृत्व में हजारों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आंदोलन में अनिमेष कुमार मलिक, शशि गुप्ता और आनंद सिंह जैसे नेताओं ने साफ किया कि यह लड़ाई तब तक थमेगी नहीं, जब तक संवैधानिक अधिकारों को पूरी तरह से लागू नहीं कर दिया जाता।

“जुझारू नेतृत्व” – तपती धूप में भी अपने अधिकारों के लिए डटे हुए विभिन्न जिलों से आए युवा और महिलाएं।

राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन जाकर महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि यदि इन मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले चुनाव में बहुजन समाज अपनी ताकत का अहसास करा देगा। देर शाम तक पटना की सड़कों पर आंदोलनकारियों की भीड़ जमी रही, जिससे यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई।

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