समस्तीपुर, 26 अप्रैल 2026 , हरियाणा के मानेसर में ‘हक की आवाज’ उठाने की सजा समस्तीपुर के एक गरीब मजदूर को सलाखों के पीछे जाकर चुकानी पड़ी है। मानेसर के चर्चित मजदूर आंदोलन में समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र के मोहनपुर वार्ड-39 के निवासी मो० शाहीद (23 वर्ष) की गिरफ्तारी ने न केवल उनके परिवार को सड़क पर ला दिया है, बल्कि पूरे इलाके में आक्रोश है। बेटे की गिरफ्तारी के बाद घर में पसरे सन्नाटे और चूल्हा न जलने की मजबूरी को देखते हुए अब खेग्रामस-माले की टीम ने मोर्चा संभाल लिया है।

अन्याय के खिलाफ आवाज बनी ‘गुनाह‘ खेग्रामस जिला सचिव जीबछ पासवान के नेतृत्व में भाकपा माले की टीम जब मोहनपुर स्थित पीड़ित मजदूर के घर पहुंची, तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था। स्थानीय लोगों ने टीम को बताया कि शाहीद किसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल नहीं है, बल्कि वह तो अपनी बड़ी बहन की शादी और परिवार का आशियाना बनाने के सपने लेकर मानेसर गया था। वहां वह स्पोर्ट्स कंपनी में सिलाई का काम करता था। कंपनी में 12 घंटे जबरन ओवरटाइम और तय मजदूरी से कम पैसे देने के खिलाफ जब उसने अन्य मजदूरों के साथ मिलकर आवाज उठाई, तो सरकारी शह पर पुलिस ने उसे जेल की कालकोठरी में डाल दिया।
बेटे के इंतजार में बिलखती मां शाहीद की गिरफ्तारी से घर में दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बूढ़ी मां रिजवाना खातुन और पिता मो० यूसुफ का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का इकलौता सहारा जेल में है, जिससे पूरे घर के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। खेग्रामस जिला अध्यक्ष उपेंद्र राय ने कहा कि शाहीद जैसे मेहनतकश युवाओं का जेल में होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
रिहाई के बाद होगा सम्मान, कानूनी लड़ाई जारी खेग्रामस-माले की टीम ने शाहीद के परिजनों को भरोसा दिलाया है कि वे दिल्ली और गुरुग्राम स्थित खेग्रामस-माले-ऐक्टू की टीम के साथ मिलकर हरसंभव कानूनी और आर्थिक मदद पहुंचाएंगे। टीम ने घोषणा की है कि जिस दिन शाहीद जेल से रिहा होकर समस्तीपुर लौटेगा, उसे एक ‘मजदूर योद्धा’ की तरह सम्मानित किया जाएगा। माले ने जिला प्रशासन और तमाम राजनीतिक दलों से इस संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार को मदद करने की अपील की है।





