त्योहारों से ठीक पहले कड़वी हुई चीनी की मिठास: 9 साल के निचले स्तर पर पहुँचा स्टॉक, आयात की नौबत पर मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार को घेरा

(विशेष रिपोर्ट / नई दिल्ली

त्योहारों के मौसम की शुरुआत से ठीक पहले देश में चीनी के दामों में आई भारी उछाल और घटते स्टॉक को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की आर्थिक व कृषि नीतियों पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में खरगे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की गलत और अदूरदर्शी नीतियों के कारण त्योहारों से ठीक पहले आम जनता के जीवन में चीनी की मिठास कड़वाहट में बदल गई है।

एक्स (ट्विटर) पर जारी ग्राफिकल संदेश के माध्यम से केंद्र सरकार पर हमला बोलते कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे। फोटो में चीनी की कमी, 40 प्रतिशत मूल्य वृद्धि और एथेनॉल नीति पर उठाए गए सवालों को रेखांकित किया गया है।

तीन महीने में 40 प्रतिशत महंगी हुई चीनी

मल्लिकार्जुन खरगे ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बीते तीन महीनों के भीतर देश में चीनी की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भारत विश्व का एक बड़ा चीनी उत्पादक और निर्यातक देश रहा है, तब आज घरेलू बाजार में चीनी का स्टॉक पिछले 9 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर कैसे पहुँच गया? उन्होंने कहा कि हालात इतने विकट हो चुके हैं कि सरकार को चीनी का निर्यात रोकने के साथ-साथ 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री (कर मुक्त) आयात करने की दिशा में कदम उठाना पड़ रहा है।

एथेनॉल नीति पर उठाए गंभीर सवाल

विपक्ष के नेता ने सरकार की ई20 एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि एक तरफ जब देश में चीनी की किल्लत पैदा हो रही है और सरकार विदेशों से चीनी मंगाने पर मजबूर है, वहीं दूसरी तरफ गन्ने और अनाज को एथेनॉल बनाने में झोंका जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब देश में ही मुख्य खाद्य सामग्री की किल्लत गहरा रही है, तब इस नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है? खरगे ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या यही केंद्र सरकार का ‘आत्मनिर्भर भारत’ है, जहाँ पहले उत्पादन घटता है, फिर स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर जाता है और अंत में विदेशों से आयात करने की नौबत आ जाती है?

विपक्ष के 3 सीधे सवाल:

  1. स्टॉक में गिरावट: दुनिया का प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देश होने के बावजूद भारत में आज चीनी का भंडार 9 साल के न्यूनतम स्तर पर क्यों चला गया? 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की स्थिति क्यों बनी?
  2. महंगाई की मार: बीते तीन महीनों में चीनी की कीमतों में 40 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। त्योहारों के ठीक पहले जनता पर थोपी गई इस महंगाई का जिम्मेदार कौन है?
  3. नीतिगत चूक: जब देश के भीतर चीनी की कमी है और विदेश से चीनी आयात की जा रही है, तो गन्ने व अनाज को ई20 एथेनॉल निर्माण में लगाने की नीति की पुनः समीक्षा क्यों नहीं की जा रही?

जनता पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ

आने वाले दिनों में रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, दुर्गा पूजा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार हैं। इन अवसरों पर मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की खपत काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में चीनी के दामों में 40 फीसदी की वृद्धि ने आम परिवारों के बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है। आर्थिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि आयात प्रक्रिया में देरी हुई या सप्लाई चेन सुचारू नहीं रही, तो खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें और अधिक ऊपर जा सकती हैं।

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