रात भर भारी दबाव झेलने की चुनौती, 2.5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी आने का अनुमान, तटबंधों पर रात भर पहरा, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात
विशेष रिपोर्ट, पटना
नेपाल के तिब्बत से सटे चीन सीमावर्ती क्षेत्र में एक विशाल ग्लेशियर फटने से उत्पन्न संकट का सीधा असर बिहार पर पड़ने वाला है। ग्लेशियर पिघलने और फटने के बाद नेपाल की त्रिशूली नदी में आए जलसैलाब ने नारायणी (बिहार में गंडक) नदी का जलस्तर प्रचंड गति से बढ़ा दिया है। इस नेपाल फ्लैश फ्लड के बाद बिहार सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने आपातकालीन उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर स्थिति का जायजा लिया और प्रशासनिक अमले को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

गंडक में अचानक बढ़ेगा जलस्तर, इन 6 संवेदनशील जिलों में विशेष निगरानी
नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बनी इस भीषण स्थिति के बाद गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह तेजी से बढ़ने की प्रबल आशंका है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने छह अति संवेदनशील जिलों: पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली में विशेष निगरानी के कड़े आदेश दिए हैं। तटबंधों की सुरक्षा के लिए दिन-रात गश्ती (नाइट पेट्रोलिंग) सुनिश्चित करने और बाढ़ संघार्षात्मक सामग्रियों के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, “नेपाल के ऊपरी इलाकों में फ्लैश फ्लड की स्थिति को देखते हुए संबंधित जिलों के अधिकारियों को पूरी मुस्तैदी बरतने को कहा गया है। तटबंधों की 24 घंटे निगरानी होगी। एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को संवेदनशील स्थलों पर तैनात कर दिया गया है। राज्य के हर नागरिक की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च और पहली प्राथमिकता है।”
नेपाल के देवघाट पर टिकी नजरें, 3 मीटर तक बढ़ेगा पानी: विजय कुमार चौधरी
उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्थिति की गंभीरता पर विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि नेपाल सरकार से लगातार पल-पल की जानकारी मिल रही है।

उन्होंने बताया कि जल प्रवाह को मापने का पहला और मुख्य केंद्र नेपाल का देवघाट गेज स्टेशन है। वर्तमान में देवघाट पर जलस्तर 4.7 मीटर दर्ज है। नेपाल सरकार के आकलन के मुताबिक अगले 2 से 3 घंटों में जलस्तर में 3 मीटर तक की भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे यह आंकड़ा करीब पौने आठ (7.75) से 8 मीटर तक पहुँच सकता है।
विजय कुमार चौधरी के अनुसार, “देवघाट पर खतरा का निशान 8.5 से 9 मीटर के ऊपर होता है। फिलहाल स्थिति कठिन और संवेदनशील जरूर है, लेकिन यह नियंत्रण से बाहर नहीं है। अभी गंडक बराज में डिस्चार्ज 1 लाख क्यूसेक से भी कम है और लगभग 1.5 लाख क्यूसेक अतिरिक्त पानी आने का अनुमान है। यानी गंडक बराज से कुल मिलाकर ढाई से पौने तीन लाख क्यूसेक तक पानी गुजरने की संभावना है। इस दबाव को झेलने के लिए आज की रात बेहद महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने यह भी बताया कि दोपहर में ही बाढ़ प्रबंधन विशेषज्ञों का एक विशेष दल रवाना कर दिया गया है जो शाम तक स्थल पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्यों का मोर्चा संभाल लेगा।
घबराएं नहीं, सतर्क रहें: सरकार की अपील
जल संसाधन मंत्री ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद सरकार हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उन्होंने कहा, “सरकार की ओर से नागरिकों से अपील है कि घबराने या हड़बड़ाने की जरूरत नहीं है, बस सतर्क और सावधान रहें। बाढ़ नियंत्रण की सभी जरूरी सामग्री और उपकरण स्थल पर मौजूद हैं। स्थिति पर पल-पल की नजर रखी जा रही है और समय-समय पर आम लोगों को सूचनाएं दी जाती रहेंगी।”

एनडीआरएफ की 9 टीमें मुस्तैद, भागलपुर हादसे में भी रेस्क्यू जारी
बिहार में मंडराते बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) पूरी तरह अलर्ट मोड में है।
9वीं बटालियन एनडीआरएफ के कमांडेंट हितेंद्र पाल सिंह कंडारी ने जानकारी दी कि बिहार में एनडीआरएफ की 9 टीमें विभिन्न संवेदनशील जिलों में तैनात कर दी गई हैं, जबकि बाकी बची टीमों को स्टैंडबाय और अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा, भागलपुर में हुए नाव हादसे वाले स्थल पर भी एनडीआरएफ की एक समर्पित टीम लगातार सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई है।

क्या होता है फ्लैश फ्लड जाने –
फ्लैश फ्लड अचानक और बहुत तेज़ गति से आने वाली बाढ़ को कहते हैं। साधारण शब्दों में कहें तो, बिना किसी पूर्व चेतावनी के जब भारी मात्रा में पानी चंद मिनटों या कुछ घंटों (आमतौर पर 6 घंटे से कम) में किसी इलाके को जलमग्न कर देता है, तो उसे फ्लैश फ्लड कहा जाता है।
यह आम बाढ़ से अलग होती है, क्योंकि आम बाढ़ धीरे-धीरे जलस्तर बढ़ने से आती है, जबकि फ्लैश फ्लड में संभलने का समय नहीं मिलता।

फ्लैश फ्लड आने के मुख्य कारण:
- बादल फटना : किसी छोटे इलाके में अचानक बहुत तेज़ बारिश होना।
- ग्लेशियर या प्राकृतिक झील का टूटना: पहाड़ी या बर्फीले इलाकों में ग्लेशियर की झील फटने से बड़ी मात्रा में पानी का अचानक नीचे आना।
- बाँध या बैराज का टूटना: जलजमाव अधिक होने के कारण अचानक बाँध टूटने या एक साथ सारा पानी छोड़ने से।
- नेपाल या ऊपरी पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश: नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में अचानक पानी का बहाव बढ़ना।

फ्लैश फ्लड क्यों खतरनाक है?
- समय की कमी: पानी इतनी तेज़ गति से आता है कि लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने या सामान हटाने का मौका नहीं मिलता।
- पानी का प्रचंड वेग: इसका बहाव अपने साथ पेड़, गाड़ियाँ, मकान और मिट्टी सब कुछ बहा ले जाता है।
- लैंडस्लाइड (भूस्खलन): पहाड़ी इलाकों में फ्लैश फ्लड के साथ मिट्टी और चट्टानें गिरती हैं, जिससे नुकसान कई गुना बढ़ जाता है।
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