विशेष रिपोर्ट: केवल सूचना संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान की अविरल धारा है ज्ञानामृत‘; कुलपति ने पत्रिका को बताया भविष्य का मार्गदर्शक।

मुजफ्फरपुर | 16 अप्रैल, 2026 बिहार के प्रतिष्ठित महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) ने अपने 80वें स्थापना वर्ष के मुहाने पर एक नया बौद्धिक कीर्तिमान स्थापित किया है। गुरुवार को महाविद्यालय की महत्वाकांक्षी पत्रिका ज्ञानामृत : समाचार दर्शन के प्रवेशांक का भव्य लोकार्पण किया गया। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय, महंत दर्शन दास जी के भ्रातृज डॉ. विजय कुमार शर्मा और प्राचार्या प्रो. (डॉ.) अलका जायसवाल ने संयुक्त रूप से इस वैचारिक दस्तावेज को सार्वजनिक किया।

पत्रिका का समालोचनात्मक विश्लेषण: अतीत और भविष्य का सेतु

‘ज्ञानामृत’ का यह प्रवेशांक केवल एक कॉलेज मैगजीन नहीं, बल्कि एमडीडीएम कॉलेज के गौरवशाली इतिहास और आधुनिक विजन का एक जीवंत दस्तावेज नजर आता है।

  • इतिहास की गहराई: पत्रिका के शुरुआती पन्नों में 15 अगस्त 1946 को महंत दर्शन दास जी द्वारा स्थापित इस संस्थान की यात्रा को बारीकी से समेटा गया है। इसमें उन संघर्षों और संकल्पों का जिक्र है, जिसने उत्तर बिहार में स्त्री शिक्षा की नींव रखी।
  • संपादकीय दृष्टिकोण: हिंदी विभागाध्यक्ष और मीडिया प्रभारी डॉ. राकेश रंजन के संपादन में तैयार यह पत्रिका ऋग्वेद के ‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ और उपनिषदों के ‘उत्तिष्ठत जाग्रत’ जैसे गंभीर जीवन दर्शन से साक्षात्कार कराती है। संपादक ने स्पष्ट किया है कि यह पत्रिका केवल ‘सूचना का संग्रह’ नहीं, बल्कि ‘अविरल ज्ञान परंपरा’ का प्रवाह है।
  • प्राचार्या का विजन: प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने अपने संदेश में इसे सकारात्मक संवाद का एक नया मंच बताया है। पत्रिका के पन्ने महाविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, सांस्कृतिक गतिविधियों और खेलकूद के प्रतिवेदन (2025-26) से सजे हैं, जो संस्थान की सर्वांगीण विकास की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

धमाकेदार विमोचन: बौद्धिक जगत में हलचल

विमोचन समारोह के दौरान कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने पत्रिका की प्रशंसा करते हुए इसे विश्वविद्यालय के गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि “ज्ञानामृत” के पन्ने यह गवाही देते हैं कि यहाँ की बेटियाँ केवल डिग्रियाँ नहीं ले रहीं, बल्कि देश की बागडोर संभालने के लिए तैयार हो रही हैं।

इस अवसर पर गणित विभागाध्यक्ष डॉ. माला, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. एम सदफ, डॉ. प्रियम फ्रांसिस और डॉ. रिंकु कुमारी सहित पूरी संपादकीय टीम की मेहनत को सराहा गया।

समालोचना: क्या कहती है यह पत्रिका?

पत्रिका का सूक्ष्म अवलोकन करने पर पता चलता है कि इसमें मधुबनी पेंटिंग, फैशन डिजाइनिंग और ब्यूटीशियन जैसे सर्टिफिकेट कोर्स और बीबीए-बीसीए जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को प्रमुखता दी गई है। यह इस बात का संकेत है कि कॉलेज अब पारंपरिक शिक्षा से आगे निकलकर कौशल विकास (Skill Development) की ओर मजबूती से बढ़ रहा है। साथ ही, ‘ज्ञानामृत’ में प्रकाशित विविध चित्र और समाचार कतरनें यह प्रमाणित करती हैं कि मुजफ्फरपुर का यह कॉलेज डिजिटल युग में भी प्रिंट मीडिया के महत्व को बखूबी समझता है।

पत्रिका ‘ज्ञानामृत : समाचार दर्शन’ के प्रवेशांक  का कॅवर पृष्‍ठ  

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