Sunday, November 1, 2026

बिहार में बड़े औद्योगिक निवेश की शुरुआत: 51,600 करोड़ रुपये के समझौतों पर हस्ताक्षर, स्टील और एनर्जी सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा

पटना, 06 अगस्त 2026: बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। राज्य सरकार ने देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों के साथ लगभग 51,600 करोड़ रुपये के निवेश के लिए एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस निवेश से राज्य में स्टील, टेक्सटाइल, न्यूक्लियर एनर्जी, फार्मास्युटिकल्स और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में रोजगार और उद्योग के नए अवसर पैदा होंगे।

पटना स्थित लोकसेवक आवास के संकल्प सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में उद्योग विभाग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के बीच इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।

पटना में आयोजित एमओयू हस्ताक्षर समारोह के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह एवं अन्य अधिकारी तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि।

निवेश करने वाली प्रमुख कंपनियां और उनका बजट:

कार्यक्रम में जिन कंपनियों के साथ एमओयू पर दस्तखत किए गए, उनका विवरण इस प्रकार है:

  1. ग्लोबल रिन्यूएबल एडवांस्ड क्लीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (ग्रेस): न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में 22,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
  2. नक्षित आयरन एंड स्टील प्राइवेट लिमिटेड: स्टील सेक्टर में 6,836 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
  3. अंकुर स्टील प्राइवेट लिमिटेड: स्टील सेक्टर में 6,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
  4. लंगटा बाबा मेटल्स एंड पावर लिमिटेड: स्टील सेक्टर में 5,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
  5. श्याम स्टील मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड: स्टील सेक्टर में 5,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
  6. शाकंभरी इस्पात एंड पावर लिमिटेड: स्टील सेक्टर में 5,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
  7. समृद्धि स्टील प्राइवेट लिमिटेड: स्टील सेक्टर में 290 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।
  8. क्रिएटिव ग्रुप: टेक्सटाइल सेक्टर में 250 करोड़ रुपये का निवेश करेगा।
  9. भारत साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड: 200 करोड़ रुपये का निवेश करेगा।
  10. अनुभव एपरेल्स प्राइवेट लिमिटेड: टेक्सटाइल सेक्टर में 50 करोड़ रुपये का निवेश करेगा।

“बिल्ड एंड बिलीव इन बिहार” का मंत्र

बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य इन निवेश प्रस्तावों को तेजी से जमीन पर उतारना है। उन्होंने कहा कि बिहार को देश के प्रमुख स्टील हब के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य में स्टील और मेटल आधारित उद्योगों के विकास की काफी संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि टेक्सटाइल उद्योग में अधिक लोगों को रोजगार मिलता है, इसलिए इस सेक्टर को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए क्लीन एनर्जी और न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कृषि उत्पादकता को देखते हुए फूड प्रोसेसिंग और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए फार्मा सेक्टर में भी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।

बिहार बिजनेस कनेक्ट 2026 की समीक्षा बैठक के दौरान उपस्थित प्रशासनिक अधिकारी एवं औद्योगिक समूहों के प्रतिनिधि।

बिहार बिजनेस कनेक्ट 2026 की समीक्षा

कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने बिहार बिजनेस कनेक्ट 2026 की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि  “बिल्ड एंड बिलीव इन बिहार” राज्य के औद्योगिक विकास का मूल मंत्र होगा। इसके तहत राज्य के बाहर रहने वाले बिहारियों को भी अपनी जन्मभूमि के विकास से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एमओयू केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि सभी परियोजनाओं को समय पर पूरा किया जाए।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोग

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव उपस्थित थे।

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बिहार के सरकारी स्कूलों की समय-सारणी में बड़ा बदलाव: अब शनिवार को 1 बजे होगी छुट्टी, मिला हाफ डे का तोहफा

पटना। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग (माध्यमिक शिक्षा कार्यालय) ने राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों के संचालन समय में एक बड़ा और महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नए विभागीय आदेश के तहत अब शनिवार के दिन स्कूलों में ‘हाफ डे’ रहेगा और दोपहर 1:00 बजे ही विद्यार्थियों की छुट्टी हो जाएगी। शिक्षा विभाग के माध्यमिक शिक्षा निदेशक सज्जन आर द्वारा 06 अगस्त 2026 को जारी इस आधिकारिक पत्र से छात्रों और शिक्षकों दोनों को बड़ी राहत मिली है।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

सोमवार से शुक्रवार और शनिवार की नई समय-सारणी विभागीय आदेश (ज्ञापांक 1409) के अनुसार, पूर्व में निर्गत आदेश में आंशिक संशोधन किया गया है:

  • सोमवार से शुक्रवार: विद्यालय सुबह 9:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक पूर्ववत संचालित होंगे।
  • शनिवार (हाफ डे): विद्यालय सुबह 9:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक खुलेंगे।
शिक्षा विभाग, बिहार द्वारा जारी नया आदेश, जिसमें शनिवार को हाफ डे एवं विद्यालयों के संचालन समय में संशोधन की जानकारी दी गई है।

वर्ग 1 से 8 तक के लिए मध्याह्न भोजन और समय व्यवस्था प्राथमिक और मध्य विद्यालयों (वर्ग 1 से 8) में शनिवार को दोपहर 12:00 बजे तक कक्षाएं एवं पूर्व निर्धारित गतिविधियां संचालित होंगी। इसके बाद 12:00 बजे से 12:40 बजे तक मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) दिया जाएगा। भोजन के उपरांत दोपहर 1:00 बजे छात्र-छात्राओं को छुट्टी दे दी जाएगी।

माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के नियम माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शनिवार को दोपहर 1:00 बजे तक अध्यापन कार्य तथा पूर्व निर्धारित अन्य गतिविधियां संपन्न कराई जाएंगी, जिसके तुरंत बाद विद्यार्थियों को छुट्टी मिलेगी।

शिक्षकों के लिए प्रतिदिन का विशेष निर्देश विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रतिदिन कक्षा अवधि के क्रम में 01 घंटा शिक्षक एवं शिक्षिका द्वारा अगले दिन व सप्ताह की पाठ्य योजना (लेसन प्लान), मूल्यांकन कार्य, शिक्षक डायरी अद्यतन, छात्रों के गृह कार्य की जाँच, प्रयोगशाला प्रबंधन एवं रिमेडियल क्लासेस (उपचारात्मक शिक्षण) जैसे कार्य किए जाएंगे। इन आवश्यक कार्यों को पूर्ण करने के बाद ही शिक्षक विद्यालय परिसर से प्रस्थान करेंगे।

विभाग के अनुसार शेष अन्य सभी शर्तें यथावत् रहेंगी तथा इस नए आदेश को सक्षम प्राधिकार का अनुमोदन प्राप्त है।

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नल-जल योजना के बकाया भुगतान के एवज में 15 हजार रिश्वत लेते पंचायत सचिव गिरफ्तार, निगरानी की टीम ने सहयोग शिविर से दबोचा

पश्चिम चम्पारण / नरकटियागंज: भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज करते हुए बिहार के निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। पश्चिमी चम्पारण जिले के नरकटियागंज प्रखण्ड अंतर्गत डुमरिया पंचायत में पदस्थापित पंचायत सचिव शंकर प्रसाद को 15,000 (पन्द्रह हजार) रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया है। यह कार्रवाई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना की मुख्यालय टीम द्वारा की गई।

नल-जल मरम्मत कार्य के भुगतान के लिए मांग रहा था घूस

प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिवादी परवेज कौसर (पिता- नसुरुद्दीन अहमद, साकिन- मलदहिया, पोस्ट- नरकटियागंज, थाना- शिकारपुर, जिला- पश्चिम चम्पारण) ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पटना स्थित कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी की एजेंसी ‘रेटिक्स एंटरप्राइजेज’  द्वारा क्षेत्र में नल-जल योजना के तहत मरम्मत का कार्य किया गया था। इस कार्य की शेष बची राशि का भुगतान करने के एवज में आरोपी पंचायत सचिव शंकर प्रसाद द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी।

तस्वीर: 15,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया डुमरिया पंचायत का पंचायत सचिव शंकर प्रसाद (लाल घेरे में), निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम की गिरफ्त में।

बिछाया गया जाल, सत्यापन में सही पाई गई शिकायत

शिकायत मिलने के पश्चात निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा मामले का प्राथमिक सत्यापन कराया गया। सत्यापन के क्रम में आरोपी पंचायत सचिव द्वारा रिश्वत मांगे जाने का प्रमाण सही पाया गया। प्रथम दृष्टया आरोप की पुष्टि होने के बाद, कांड अंकित कर अनुसंधानकर्ता आदित्य अंशु (पुलिस निरीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना) के अनुरोध पर एक धावादल का गठन किया गया। इस धावादल का नेतृत्व कृपाल चन्द्र जायसवाल (पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना) कर रहे थे।

सहयोग शिविर कैम्प में ही धर दबोचा

निगरानी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए नरकटियागंज प्रखण्ड के मलदहिया मदरसे में चल रहे ‘सहयोग शिविर कैम्प’ की घेराबंदी की। जैसे ही परिवादी से आरोपी शंकर प्रसाद ने रिश्वत के 15,000 रुपये स्वीकार किए, निगरानी के धावादल ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। सार्वजनिक स्थान और शिविर के बीच हुई इस अचानक कार्रवाई से मौके पर हड़कंप मच गया।

मुजफ्फरपुर स्थित विशेष अदालत में होगी पेशी

गिरफ्तारी के बाद आरोपी पंचायत सचिव को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। आवश्यक पूछताछ एवं कागजी प्रक्रियाओं के पूरा होने के उपरांत आरोपी को मुजफ्फरपुर स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में उपस्थापित किया जाएगा। पुलिस मामले में आगे की अग्रतर अनुसंधान की कार्रवाई कर रही है।

इस वर्ष निगरानी का 85वां ट्रैप मामला

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना द्वारा वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध की गई यह 92वीं प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई है। इसमें रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने (ट्रैप) से संबंधित यह 85वां कांड है। इस वर्ष अब तक दर्ज मामलों में कुल 87 अभियुक्तों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है तथा कुल 31,66,800 (इकत्तीस लाख छाछठ हजार आठ सौ) रुपये की रिश्वत राशि बरामद की जा चुकी है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 2025 में निगरानी द्वारा कुल 101 ट्रैप कांड दर्ज किए गए थे और 37,80,300 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की गई थी।

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बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला: एमएसएमई पुनर्गठन, हेली-टूरिज्म, स्पोर्ट्स साइंस सेंटर और दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण सहित 17 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर लगी मुहर

पटना। बिहार सरकार की मंत्रिपरिषद की एक अति महत्वपूर्ण बैठक 5 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास, स्वास्थ्य, उद्योग, खेल, पर्यटन, न्याय, समाज कल्याण और कला-संस्कृति से जुड़े कुल 17 बड़े एजेंडों पर प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई।

उद्योग एवं रोजगार: एमएसएमई निदेशालय का पुनर्गठन

उद्योग विभाग के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) निदेशालय के संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है। मुख्यालय स्तर पर स्वीकृत 82 पदों में से 26 पद तथा क्षेत्रीय स्तर पर स्वीकृत 31 पदों (कुल 57 पद) को प्रत्यर्पित करते हुए मुख्यालय स्तर पर 106 नए पदों को चिह्नित करने की स्वीकृति दी गई है।

कला, संस्कृति एवं विरासत: दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण

कला एवं संस्कृति विभाग के तहत भारत सरकार की फ्लैगशिप योजना ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत राज्य की दुर्लभ पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और डेटाबेस निर्माण के लिए 6,23,68,718 (6 करोड़ 23 लाख 68 हजार 718) रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा, पुरातत्व निदेशालय में 16 स्वीकृत तकनीकी पदों के विरुद्ध 12 पदों पर 11 माह की संविदा अथवा नियमित नियुक्ति होने तक नियोजन का निर्णय लिया गया है। वहीं, ‘हर घर तिरंगा अभियान 2026’ के सफल आयोजन हेतु 6,12,00,000 (6 करोड़ 12 लाख) रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

खेल क्षेत्र: राजगीर में स्पोर्ट्स साइंस सेंटर

राज्य खेल अकादमी, राजगीर के परिसर में आधुनिक ‘स्पोर्ट्स साइंस सेंटर’ (उच्च प्रदर्शन खेल प्रशिक्षण एवं इंजुरी सेंटर) की स्थापना, संचालन और उपकरणों के अधिष्ठापन के लिए लगभग 25,00,00,000 (25 करोड़) रुपये के व्यय को स्वीकृति दी गई है। इसका चयन क्यूसीबीएस (क्वालिटी-कम-कॉस्ट बेस्ड सिलेक्शन) माध्यम से किया जाएगा।

पर्यटन एवं सिविल विमानन: हेली-टूरिज्म और एयर टूरिज्म

राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना-2026’ को मंजूरी दी गई है। इसके तहत पर्यटकों को हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराने के लिए प्रति माह 60,00,000 (60 लाख) रुपये (प्लस जीएसटी) तथा अधिकतम 3,30,00,000 (3 करोड़ 30 लाख) रुपये (प्लस जीएसटी) की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।

स्वास्थ्य एवं मेडिकल शिक्षा: पीडब्ल्यूसी का चयन और नए पद

सात निश्चय-3 (‘सुलभ स्वास्थ्य-सुरक्षित जीवन’) के तहत पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर 16 ब्राउनफील्ड चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों (डेंटल कॉलेज सहित) के संचालन हेतु ट्रांजैक्शन एडवाइजर के रूप में प्राइसवाटरहाउसकूपर्स प्राइवेट लिमिटेड (पीडब्ल्यूसी) को चयनित कर एलओए निर्गत करने तथा 8,27,00,300 (8 करोड़ 27 लाख 300) रुपये की योजना की स्वीकृति दी गई है।

साथ ही ‘बिहार जिला आयुष चिकित्सा / राज्य आयुष चिकित्सा सेवा नियमावली-2026’ को मंजूरी मिली है। बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में प्रशासनिक कार्यों के लिए उप कुलसचिव, सहायक कुलसचिव, उप परीक्षा नियंत्रक और सहायक परीक्षा नियंत्रक के कुल 6 नए पदों का सृजन किया गया है। राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, पटना के द्रव्यगुण विभाग में अधिसंख्य पदों के सृजन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई।

नगर विकास एवं जलापूर्ति परियोजनाएं

अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) के तहत:

  1. जमालपुर जलापूर्ति परियोजना: 102,22,91,107 (102 करोड़ 22 लाख 91 हजार 107) रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति।
  2. मुंगेर जलापूर्ति परियोजना (फेज-1): 177,72,47,949 (177 करोड़ 72 लाख 47 हजार 949) रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति।

न्याय व्यवस्था और नए न्यायालय

  • एनडीपीएस एक्ट: पूर्णिया, भागलपुर और गया न्यायमंडल में एनडीपीएस कानून के मुकदमों की सुनवाई के लिए अनन्य विशेष न्यायालयों की स्थापना हेतु 27 अराजपत्रित पदों के सृजन की स्वीकृति।
  • एससी/एसटी एक्ट: बेतिया, मधुबनी, आरा, सिवान, अररिया, सुपौल, खगड़िया, जहानाबाद, बक्सर, जमुई, भभुआ, कटिहार, सीतामढ़ी, मुंगेर, मधेपुरा, बांका, शेखपुरा, औरंगाबाद और लखीसराय जिलों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के मामलों के त्वरित निष्पादन हेतु 19 अतिरिक्त विशेष न्यायालयों की स्थापना और 171 अराजपत्रित पदों के सृजन को मंजूरी दी गई।

सुरक्षा एवं समाज कल्याण

समाज कल्याण निदेशालय के तहत 23 पर्यवेक्षण गृह (बालक), 1 पर्यवेक्षण गृह (बालिका), 1 विशेष गृह और 9 सुरक्षित स्थानों की सुरक्षा के लिए 330 गृह रक्षकों (होम गार्ड) की तैनाती हेतु वार्षिक 14,53,35,960 (14 करोड़ 53 लाख 35 हजार 960) रुपये के व्यय की स्वीकृति दी गई है।

भूमि हस्तांतरण एवं शिक्षा

  • बीआईएसएफ की स्थापना: नवादा जिले के रजौली अंचल (मौजा-रजौली) में कुल 43.98 एकड़ सरकारी भूमि बिहार औद्योगिक सुरक्षा बल (बीआईएसएफ) की स्थापना हेतु गृह विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की गई है।
  • केंद्रीय विद्यालय: पूर्वी चंपारण जिले के पीपराकोठी अंचल (मौजा-पीपराकोठी) में 5 एकड़ भूमि पर नए केंद्रीय विद्यालय की स्थापना हेतु केंद्रीय विद्यालय संगठन (शिक्षा मंत्रालय) को 30 वर्षों के लिए लीज बंदोबस्त करने की स्वीकृति दी गई है।

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तिमुल परिसर पहुंचे जिलाधिकारी: दूध की गुणवत्ता को परखा , टेस्टिंग यूनिट का किया  निरीक्षण

मुजफ्फरपुर। जिला प्रशासन ने दूध की शुद्धता और आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर अपनी कमान कस ली है। इसी कड़ी में जिलाधिकारी कुमार गौरव ने तिरहुत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (तिमुल), मुजफ्फरपुर के डेयरी प्लांट का औचक निरीक्षण किया।

फोटो: तिरहुत दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (तिमुल) मुजफ्फरपुर में डेयरी प्लांट का औचक निरीक्षण करते और लैब में दूध की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था का जायजा लेते जिलाधिकारी कुमार गौरव एवं अन्य अधिकारी।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने डेयरी प्लांट के भीतर दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने प्लांट के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण करते हुए लैब और टेस्टिंग यूनिट का भी निरीक्षण किया, जहाँ दूध की शुद्धता की जाँच की जाती है।

जिलाधिकारी कुमार गौरव ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कड़े निर्देश देते हुए कहा कि आम उपभोक्ताओं तक पहुँचने वाले दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दूध के संग्रहण से लेकर पैकिंग और वितरण तक की पूरी प्रक्रिया में स्वच्छता और मानकों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने का आदेश दिया। साथ ही, मिलावटखोरी या लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी।

इस औचक निरीक्षण के बाद यह साफ हो गया है कि जिला प्रशासन अब डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है।

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कांटी के मानिकपुर नरोत्तम में सहयोग शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे जिलाधिकारी, लापरवाह अफसरों पर कसेगी नकेल, 30 दिनों में आवेदनों के निपटारे का सख्त फरमान!

मुजफ्फरपुर (विशेष संवाददाता): मुजफ्फरपुर जिले में पारदर्शी शासन, जनकल्याण और त्वरित न्याय की दिशा में जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कांटी प्रखंड के ग्राम पंचायत राज मानिकपुर नरोत्तम स्थित मध्य विद्यालय श्रीसियाँ के प्रांगण में विशाल ‘सहयोग शिविर‘ का भव्य आयोजन किया गया। शिविर का जायजा लेने और धरातल पर सरकारी योजनाओं की वास्तविक स्थिति परखने के लिए स्वयं मुजफ्फरपुर जिलाधिकारी कुमार गौरव दलबल के साथ मौके पर पहुंचे।

सीधा संवाद और व्यवस्थाओं का जायजा: सहयोग शिविर में स्वास्थ्य एवं अन्य स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए फरियादियों एवं कर्मचारियों से सीधी बात करते मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी कुमार गौरव।

जिलाधिकारी के अचानक पहुंचे ही पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। उन्होंने न केवल शिविर की सभी व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया, बल्कि वहां मौजूद आम नागरिकों और फरियादियों से सीधा संवाद कर धरातली फीडबैक लिया।

अधिकारियों को अल्टीमेटम: 30 दिनों के भीतर हर हाल में होगा समाधान

शिविर के दौरान आम लोगों की समस्याओं और आवेदनों को सुनते हुए जिलाधिकारी कुमार गौरव ने कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने मौके पर मौजूद सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए:

  1. 30 दिनों की समय-सीमा: शिविर में प्राप्त प्रत्येक आवेदन और शिकायत का निष्पादन हर हाल में 30 दिनों के भीतर गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा किया जाना चाहिए।
  2. आवेदक को अपडेट: फरियादी को अपने आवेदन की अद्यतन स्थिति (प्रगति और निष्पादन) के बारे में समय-समय पर सूचित किया जाना अनिवार्य होगा।
  3. लापरवाही पर कार्रवाई: काम में किसी भी प्रकार की हीला-हवाली या ढिलाई बरतने वाले अफसरों और कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश

सरकारी कार्यप्रणाली में तेजी लाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए जिलाधिकारी कुमार गौरव ने विद्यालय परिसर में पौधरोपण किया। उन्होंने कहा कि सुशासन केवल कागजी फाइलों के निपटारे तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हरित और स्वस्थ भविष्य के निर्माण में भी प्रशासन की अहम भूमिका है। उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों और अधिकारियों को अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया।

दीप प्रज्वलन कर सहयोग शिविर की शुरुआत: कांटी प्रखंड के मध्य विद्यालय श्रीसियाँ में आयोजित ‘सहयोग शिविर’ का दीप प्रज्वलित कर विधिवत शुभारंभ करते जिलाधिकारी कुमार गौरव एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण।

जनहित और सुशासन की नई मिसाल

कांटी के मानिकपुर नरोत्तम में आयोजित इस सहयोग शिविर से स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा गया। राशन कार्ड, आवास योजना, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधा एवं राजस्व से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए यह शिविर अत्यंत प्रभावकारी साबित हो रहा है। मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन की इस सक्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनकल्याण, पारदर्शिता और सुशासन ही उसकी पहली प्राथमिकता है।

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हड़ताल के 7वें दिन समस्तीपुर में प्रदर्शन जारी : ताजपुर से भी मिला समर्थन, सफाईकर्मियों की मांग: 26 हजार वेतन और नियमितीकरण, बोले- हक मिलने तक जारी रहेगा संग्राम

समस्तीपुर, 5 अगस्त 2026: अपनी विभिन्न ज्वलंत और बुनियादी मांगों को लेकर पिछले 6 दिनों से हड़ताल पर चल रहे नगर निगम के सफाईकर्मियों का आक्रोश बुधवार को 7वें दिन चरम पर पहुंच गया। आक्रोशित सफाईकर्मियों ने एकजुट होकर पूरे शहर में जुलूस निकाला और समाहरणालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। नगर भवन से निकला यह जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए समाहरणालय परिसर पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने एक सभा आयोजित की और प्रशासन व सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

अपनी मांगों के समर्थन में जुलूस निकालते और हाथों में लाल झंडा व ऐक्टू का बैनर थामे हड़ताली सफाईकर्मी।

नियमितीकरण और 26 हजार रुपए न्यूनतम वेतन की मांग

समाहरणालय के समक्ष आयोजित सभा को संबोधित करते हुए श्रमिक नेताओं ने कहा कि नगर निगम के सफाईकर्मी लंबे समय से अपने नियमितीकरण, कम से कम 26,000 रुपए प्रतिमाह वेतन और सेवा सुरक्षा जैसी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले इन कर्मियों की समस्याओं के प्रति सरकार और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से उदासीन बना हुआ है।

3 सूत्री मांगपत्र सौंपा, आर-पार की लड़ाई की चेतावनी

प्रदर्शन के उपरांत सफाईकर्मियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को 3 सूत्री मांगपत्र सौंपा और मांगों पर अविलंब सकारात्मक पहल करने की अपील की। नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सफाईकर्मियों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि शीघ्र ही प्रशासन ने वार्ता का रास्ता साफ करते हुए समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जवाबदेही शासन व प्रशासन की होगी।

ताजपुर नगर परिषद से भी मिला समर्थन

इस विशाल प्रदर्शन में ताजपुर नगर परिषद के 50 सफाईकर्मी भी लखींद्र राम, अशोक राम, ओमप्रकाश मल्लिक, सुनील मल्लिक, मुकेश राम और रामनरेश राम के नेतृत्व में शामिल हुए। उन्होंने समाहरणालय पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए घोषणा की कि जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं, तब तक वे भी इस हड़ताल पर डटे रहेंगे।

समस्तीपुर समाहरणालय मुख्य द्वार पर प्रदर्शन करते ऐक्टू एवं नगर निगम कर्मचारी महासंघ के नेता व सफाईकर्मी।

प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल लोग

प्रदर्शन और जुलूस का नेतृत्व ऐक्टू नेता जीबछ पासवान, ऐक्टू नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह, अजय कुमार, अशोक राय, प्रभात रंजन गुप्ता, पूर्व पार्षद अर्जुन कुमार और राजकुमार राम आदि ने किया।

इसके अलावा इस व्यापक विरोध प्रदर्शन में ऐक्टू राज्य परिषद सदस्य सह नगर निगम कर्मचारी महासंघ के जीबछ पासवान, ऐक्टू नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह, बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिलामंत्री अजय कुमार, नगर निगम कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष राजकुमार राम, अनुरक्षक बंद के जिलाध्यक्ष जीतेंद्र कुशवाहा, पूर्व पार्षद अर्जुन कुमार, प्रभात रंजन गुप्ता, पवन राऊत, सूरज कुमार, अनील कुमार, दिनेश दास, पंकज राम, बिरजू राम, रॉबिन कुमार, मीरा देवी, संगीता देवी, कामिनी देवी, गुड़िया देवी, ममता देवी, किरण देवी, गीता देवी सहित सैकड़ों की संख्या में सफाईकर्मी एवं उनके समर्थक उपस्थित रहे।

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बाबा गरीबनाथ के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, मुजफ्फरपुर में श्रावणी मेला 2026 का ऐतिहासिक आगाज

विशेष संवाददाता, मुजफ्फरपुर: उत्तर बिहार के देवघर कहे जाने वाले प्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ धाम में श्रावणी मेला 2026 का दिव्य, भव्य और अलौकिक शुभारंभ हो गया है। पवित्र श्रावण मास की पहली सोमवारी के पावन अवसर पर समूचा मुजफ्फरपुर शहर हर-हर महादेव और बोल बम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। देश-दुनिया के विभिन्न कोनों से पहुंचे लाखों कांवरियों ने बाबा गरीबनाथ के पवित्र शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सुख, समृद्धि एवं शांति की कामना की। भक्ति, आस्था और अभूतपूर्व उत्साह के अद्भुत संगम ने पूरे वातावरण को शिवमय बना दिया है।

सड़कों पर उतरा प्रशासनिक अमला, स्वयं संभाली कमान

तस्वीर में: मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ धाम मेला क्षेत्र में प्रथम सोमवारी के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था, विधि-व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लेने के लिए कांवरिया पथ पर अधिकारियों के साथ फ्लैग मार्च एवं निरीक्षण करते जिला पदाधिकारी कुमार गौरव, वरीय पुलिस अधीक्षक, नगर पुलिस अधीक्षक एवं अन्य अधिकारी।

प्रथम सोमवारी के अति-संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले माहौल को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। जिला पदाधिकारी कुमार गौरव ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए पूरे मेला क्षेत्र और कांवरिया पथ की सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने वरीय पुलिस अधीक्षक, नगर पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ पूरे रूट लाइन का पैदल भ्रमण किया।

निरीक्षण के दौरान जिला पदाधिकारी कुमार गौरव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांवरियों की सुरक्षा और सुगमता जिला प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सुरक्षा का अभेद्य घेरा, हर कोने पर पैनी नजर

कांवरिया मार्ग और मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। मेला क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही:

  • सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी: पूरे रूट लाइन और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों तथा ड्रोन के माध्यम से कड़ी नजर रखी जा रही है।
  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा केंद्र: आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए जगह-जगह मेडिकल कैम्प, एम्बुलेंस और त्वरित चिकित्सा टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।
  • पेयजल एवं स्वच्छता: भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए कांवरिया पथ पर शीतल पेयजल, वाटर स्प्रिंकलर और बेहतर साफ-सफाई के व्यापक प्रबंध किए गए हैं।
  • रोशनी और विश्राम की व्यवस्था: रात के समय पूरे मार्ग में दूधिया रोशनी (हाई-मास्ट लाइट) और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए वाटरप्रूफ विश्रामालय बनाए गए हैं।

मौके पर तैनात सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को श्रद्धालुओं के साथ अत्यंत शालीन, विनम्र और सहयोगात्मक व्यवहार करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। बाबा के भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है और पूरा जिला शिव भक्ति के रंग में सराबोर है।

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बिहार की ज़मीन तले दबे हैं हज़ारों साल पुराने रहस्य! सीएम का निर्देश : माँ मुंडेश्वरी, बोधगया और केसरिया स्तूप का होगा लेजर तकनीक से सर्वे, दुनिया देखेगी प्राचीन बिहार का वैभव!

पटना, 04 अगस्त 2026: बिहार की हज़ारों साल पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने और उसे पर्यटन के नए केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार एक विशाल अभियान शुरू करने जा रही है । मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों—बोधगया, सुल्तानगंज, मंदार और विश्व प्रसिद्ध केसरिया स्तूप के संरक्षण, वैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्खनन और समग्र विकास के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का कड़ा निर्देश दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन ऐतिहासिक धरोहरों के ऐतिहासिक महत्व को नए सिरे से स्थापित करते हुए इन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बनाना है।

मुख्यमंत्री से देश के वरिष्ठ पुरातत्वविदों एवं विशेषज्ञों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर कैमूर जिले में स्थित मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर तथा आसपास के विशाल क्षेत्रों के विस्तृत सर्वेक्षण की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट सौंपी । प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मंदिर परिसर में फैले हज़ारों प्राचीन भग्नावशेषों का वैज्ञानिक पद्धति से पुनरुत्स्थापन, संरक्षण और प्रलेखन (डॉक्यूमेंटेशन) किया जा सकता है, जिससे यह संपूर्ण क्षेत्र भारतीय पुरातात्विक धरोहर के एक बेहद महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विश्व पटल पर उभरेगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि मां मुंडेश्वरी मंदिर के भग्नावशेषों के संरक्षण और पुनरुत्स्थापन के लिए विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुसार चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए । इसके साथ ही पूरे क्षेत्र की पर्यटन क्षमता का समग्र विकास किया जाए ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को एक समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अनुभव मिल सके।

 कैमूर जिले में स्थित प्राचीन एवं सुप्रसिद्ध मां मुंडेश्वरी देवी की भव्य प्रतिमा, जिनके मंदिर परिसर और आसपास बिखरे हजारों भग्नावशेषों का अब अत्याधुनिक तकनीक से वैज्ञानिक पुनरुत्स्थापन व संरक्षण किया जाएगा।

बैठक में मौजूद दिग्गज विशेषज्ञ और अधिकारी:

मुख्यमंत्री से मिलने वाले उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख हस्तियाँ:

  • पद्मश्री डॉक्टर के के मोहम्मद (विश्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद एवं राम जन्मभूमि उत्खनन दल के सदस्य)
  • प्रोफेसर डॉक्टर रजत सान्याल (कोलकाता इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर)
  • प्रोफेसर अनिल कुमार (मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, बिहार विरासत विकास समिति तथा शांतिनिकेतन के यूनेस्को विश्व धरोहर परियोजना से जुड़े विशेषज्ञ)
  • डॉक्टर हरिओम शर्मा (अधीक्षण पुरातत्वविद, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण – एएसआई पटना)
  • मिहिर कुमार सिंह (विकास आयुक्त)
  • प्रणव कुमार (सचिव, कला संस्कृति एवं भवन निर्माण विभाग)

बनेगा नया हेरिटेज एवं इको-टूरिज्म सर्किट:

बैठक में कैमूर क्षेत्र के तिलहाड़ कुंड, करकटगढ़ तथा अन्य प्राकृतिक एवं प्रागैतिहासिक महत्व के स्थलों को एकीकृत रूप से विकसित करने की योजना पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ये सभी दर्शनीय स्थल बनारस-कोलकाता एक्सप्रेसवे से मात्र 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, जिससे भविष्य में यहाँ पर्यटकों की पहुँच और भी आसान हो जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक सौंदर्य, प्रागैतिहासिक महत्व और पुरातात्विक संभावनाओं से समृद्ध यह क्षेत्र बिहार के नए हेरिटेज एवं इको-टूरिज्म सर्किट के रूप में उभरेगा । इन स्थलों के वैज्ञानिक संरक्षण और व्यवस्थित विकास के बाद इन्हें भविष्य में यूनेस्को की विश्व धरोहर की सम्भावित सूची में शामिल कराने के लिए भी पुरजोर प्रयास किए जाएंगे।

बिना खुदाई ज़मीन के नीचे के रहस्य खोलेगी लिडार और जीपीआर तकनीक:

मुख्यमंत्री ने बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीक लिडार (लाइट डिटैक्शन एंड रेंजिंग – LiDAR) तथा जीपीआर (ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार – GPR) से वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। इन अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से बिना ज़मीन की खुदाई किए ही ज़मीन के भीतर मौजूद सम्भावित पुरातात्विक संरचनाओं और अवशेषों की सटीक वैज्ञानिक पहचान की जा सकेगी। इससे भविष्य में किए जाने वाले उत्खनन कार्य बेहद सटीक और प्रभावी होंगे।

सुल्तानगंज, मंदार और केसरिया स्तूप का होगा महा-उत्खनन:

बैठक में सुल्तानगंज और मंदार क्षेत्र के ऐतिहासिक व पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण, समेकन और समग्र विकास पर विशेष बल दिया गया। इसके साथ ही विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के शेष बचे हिस्सों का भी पूर्ण वैज्ञानिक उत्खनन कराने का बड़ा निर्देश दिया गया है। अब तक इस विशाल स्तूप का केवल आंशिक उत्खनन ही हुआ है, जबकि इसके एक बड़े हिस्से में अभी भी बेहद महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष छिपे होने की प्रबल संभावना है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में केसरिया स्तूप के उत्खनन और संरक्षण कार्य में पद्मश्री डॉक्टर के के मोहम्मद की मुख्य भूमिका रही है।

मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि बिहार की धरती के नीचे आज भी अनेक महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरें सुरक्षित छिपी हैं। इनकी वैज्ञानिक पहचान, उत्खनन और संरक्षण से राज्य के इतिहास के अनेक नए स्वर्णिम अध्याय सामने आएंगे। इससे न केवल सांस्कृतिक पर्यटन को नई रफ़्तार मिलेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोज़गार के ढेरों अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी भारी मजबूती मिलेगी।

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दियारा वासियों की बल्ले-बल्ले! गंगा की लहरों पर अब बिल्कुल फ्री चलेगा स्टीमर: 66 हजार आबादी को मिली बड़ी राहत, मॉनसून के खौफनाक सफर से मुक्ति!

पटना: गंगा नदी की उफनती धाराओं के बीच जीवन और जोखिम उठाकर सफर करने वाले दानापुर दियारा क्षेत्र के निवासियों के लिए बेहद राहत भरी और बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के दानापुर स्थित नासरीगंज घाट से पानापुर घाट के बीच निःशुल्क स्टीमर (फेरी) परिचालन सेवा का हरी झंडी दिखाकर धमाकेदार शुभारंभ किया। सरकार के इस कदम से दानापुर दियारा क्षेत्र की 6 ग्राम पंचायतों की लगभग 66 हजार से अधिक की विशाल आबादी को सीधा फायदा पहुंचेगा। अब मॉनसून के दौरान उफनती गंगा को पार करना न केवल सुरक्षित होगा, बल्कि पूरी तरह मुफ़्त भी होगा।

अब नहीं थमेगी दियारा की रफ्तार: पीपा पुल हटने का डर खत्म

स्टीमर फेरी सेवा के शुभारंभ के अवसर पर जिलाधिकारी कुंदन कुमार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और अन्य गणमान्य जनों को डिस्प्ले बोर्ड के माध्यम से प्रोजेक्ट की विस्तृत जानकारी देते हुए।

दानापुर प्रखंड के दियारा क्षेत्र से पटना आने-जाने के लिए गंगा नदी पर सामान्यतः नवंबर से 15 जून तक ही पीपा पुल का संचालन किया जाता है। मॉनसून आते ही 15 जून के बाद पीपा पुल को हटा लिया जाता था, जिसके बाद दियारा की 6 ग्राम पंचायतों — पुरानी पानापुर, मानस, कासिमचक, हेतनपुर, गंगहारा और पतलापुर के लोगों के सामने आवागमन का भयंकर संकट खड़ा हो जाता था।

स्थानीय निवासियों को मजबूरी में असुरक्षित नावों का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन अब यह निःशुल्क स्टीमर फेरी सेवा मॉनसून के दौरान इन 66 हजार लोगों के लिए वरदान साबित होगी।

किसानों, दूध उत्पादकों और कर्मचारियों को मिलेगा सीधा फायदा

इस सेवा से केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि दियारा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी जबरदस्त गति मिलेगी:

  1. व्यापार और कृषि को संजीवनी: दियारा के किसानों, सब्जी और फल उत्पादकों तथा दुग्ध विक्रेताओं को अपनी उपज और कृषि उत्पादों को पटना के बड़े बाजारों तक पहुंचाना काफी आसान हो जाएगा। इससे स्थानीय व्यापार को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
  2. कर्मचारियों और शिक्षकों की राह हुई आसान: दियारा क्षेत्र में वर्तमान में 58 विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 553 शिक्षक एवं कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके अलावा 95 आंगनबाड़ी केंद्रों की 190 सेविका-सहायिकाएं, 3 स्वास्थ्य उपकेंद्रों के स्वास्थ्य कर्मी और पंचायत कार्यालयों के कर्मी रोज गंगा पार करते हैं। अब ये सभी बिना किसी आर्थिक बोझ और बिना किसी खतरे के अपने कार्यस्थल तक पहुंच सकेंगे।
नासरीगंज घाट से पानापुर घाट के बीच शुरू की गई अत्याधुनिक निःशुल्क स्टीमर (फेरी) सेवा, जिसे गुब्बारों और फूलों से सजाकर गंगा नदी में परिचालन के लिए उतारा गया।

निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने जाना यात्रियों का हाल

शुभारंभ समारोह के दौरान जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने स्टीमर फेरी परिचालन सेवा की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री को दी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने स्वयं स्टीमर में सवार होकर उसका सूक्ष्म निरीक्षण किया और यात्रियों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। दियारा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम जनता ने फूल-मालाओं तथा पुष्पगुच्छ से सभी अतिथियों का जोरदार स्वागत किया।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव, विधान पार्षद अनामिका सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जिलाधिकारी कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक और भारी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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