समस्तीपुर के मालगोदाम चौक स्थित भाकपा माले जिला कार्यालय में बुधवार को ‘लोकतंत्र’ का एक अलग ही चेहरा देखने को मिला। मौका था दरभंगा में होने वाले आगामी राज्य सम्मेलन के लिए डेलीगेट (प्रतिनिधि) चुनाव का। जहाँ अक्सर राजनीतिक दलों पर ‘हाईकमान’ के फैसले थोपने के आरोप लगते हैं, वहीं भाकपा माले ने मतदान के जरिए अपने प्रतिनिधि चुनकर एक कड़ा संदेश दिया है।
अनुशासन और अधिकार: भीषण गर्मी के बावजूद कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते निचले स्तर के कमिटी पदाधिकारी।
33 सूरमा और 444 निर्णायक: रात भर चली वोटों की गिनती
जिला सचिव प्रो० उमेश कुमार की देखरेख में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि महज 14 पदों के लिए 33 दिग्गज उम्मीदवार मैदान में उतरे। मतदाताओं की सूची में जिला कमिटी से लेकर पंचायत और शाखा स्तर के 444 सचिव व सदस्य शामिल थे। देर रात तक चली वोटिंग के बाद अब परिणाम घोषित किए जा रहे हैं, जो पार्टी के भीतर की नई शक्ति संरचना को तय करेंगे।
राज्य कमिटी सदस्य सह चुनाव पर्यवेक्षक कॉ० ध्रुव नारायण कर्ण
पर्यवेक्षक का दोटूक बयान: “यह महज चुनाव नहीं, जागरूकता का प्रमाण है”
राज्य कमिटी सदस्य सह चुनाव पर्यवेक्षक कॉ० ध्रुव नारायण कर्ण ने बयान जारी कर इस पूरी प्रक्रिया को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा:
“निर्वाचक मंडल के 444 लोग मिलकर 33 में से 14 सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवारों को चुन रहे हैं। यह भाकपा माले के भीतर के अटूट आंतरिक लोकतंत्र को दर्शाता है। एक-एक कार्यकर्ता अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक है और यह चुनाव उसी जागरूकता की जीत है।”
लोकतंत्र की बुनियादी मजबूती: भाकपा माले कार्यालय में मतपेटी में अपना भविष्य और विश्वास डालते पार्टी कार्यकर्ता।
बिहार को ‘भाजपा की प्रयोगशाला‘ बनने से रोकने की रणनीति
इस चुनाव का महत्व सिर्फ पदों तक सीमित नहीं है। जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि यहाँ से जीते हुए 14 डेलीगेट 16 से 18 मई तक दरभंगा में होने वाले राज्य सम्मेलन में समस्तीपुर की आवाज बनेंगे। इस सम्मेलन का मुख्य एजेंडा बिहार में बढ़ती बेरोजगारी, बदहाल स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा में भ्रष्टाचार और राज्य को सांप्रदायिक राजनीति की ‘प्रयोगशाला’ बनाने की कोशिशों के खिलाफ एक निर्णायक संघर्ष का बिगुल फूंकना है।
मुख्य हाइलाइट्स:
स्थान: जिला कार्यालय, मालगोदाम चौक, समस्तीपुर।
मुकाबला: 33 उम्मीदवार बनाम 14 पद।
वोटर: 444 (पंचायत से लेकर जिला स्तर के पदाधिकारी)।
कमीशनखोरी का खेल: किताब, ड्रेस और जूते-मोजों पर भारी कमीशन का विरोध।
शुल्कों की भरमार: री-एडमिशन और विकास शुल्क के नाम पर ‘अवैध वसूली’ का आरोप।
प्रशासन को अल्टीमेटम: जिलाधिकारी से जांच और ठोस कार्रवाई की मांग।
“लूटतंत्र के खिलाफ एकजुट समस्तीपुर: निजी स्कूलों की मनमानी और कमीशनखोरी के विरोध में ‘नागरिक समाज’ का जोरदार प्रदर्शन।”
विस्तृत रिपोर्ट
समस्तीपुर: शिक्षा के मंदिर अब व्यापार के केंद्र बनते जा रहे हैं। निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों की जेब पर सरेआम डाले जा रहे डाके के खिलाफ आज ‘नागरिक समाज‘ ने जिला मुख्यालय में हुंकार भरी। शहर की सड़कों पर उतरे आक्रोशित नागरिकों ने निजी स्कूलों की कमीशनखोरी और अवैध वसूली के खिलाफ एक विशाल प्रतिरोध मार्च निकाला।
कमीशन के मकड़जाल में फंसे अभिभावक मार्च के दौरान समाहरणालय पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने निजी स्कूलों के काले कारनामों की परतें खोलीं। संयोजक रामबली सिंह ने कहा, “निजी विद्यालय अब शिक्षा नहीं, बल्कि टाई, बेल्ट, डायरी और किताबों का धंधा कर रहे हैं। हर साल जानबूझकर किताबें बदल दी जाती हैं ताकि अभिभावक पुरानी किताबों का उपयोग न कर सकें और स्कूल द्वारा निर्धारित दुकानों से महंगी सामग्री खरीदने को मजबूर हों।”
री-एडमिशन और विकास शुल्क पर तीखा प्रहार सभा का संचालन करते हुए भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि स्कूलों ने ‘विकास शुल्क’ और ‘री-एडमिशन’ जैसे शब्दों को उगाही का जरिया बना लिया है। उन्होंने मांग की कि सभी निजी विद्यालयों में एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें अनिवार्य की जाएं और स्कूलों के भीतर पठन सामग्री की बिक्री पर तत्काल रोक लगे।
प्रशासन को चेतावनी मार्च में आइसा, आरवाईए, राजद और कांग्रेस सहित विभिन्न संगठनों के नेताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों की शुल्क संरचना और बुनियादी सुविधाओं की जांच कर इस लूट को नहीं रोका, तो यह आंदोलन उग्र रूप लेगा। सभा के अंत में एक मांग पत्र जिला प्रशासन को सौंपा गया, जिसमें अवैध वसूली करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
मौके पर मौजूद प्रमुख चेहरे
इस प्रतिरोध मार्च में सुनील कुमार, लोकेश राज, रौशन कुमार, राम विनोद पासवान, अमित जायसवाल, रेल ट्रेड यूनियन नेता संतोष कुमार निराला और अधिवक्ता संजय कुमार बबलू सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और अभिभावक उपस्थित थे।
मुजफ्फरपुर (सकरा)। विभाजनकारी ताकतों को कड़ा संदेश देने और हिंदू समाज के भीतर की दूरियों को मिटाने के लिए बुधवार को सकरा खंड में एक बड़ी वैचारिक क्रांति का आगाज हुआ। विष्णुपुर बघनगरी स्थित शिवालय सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के प्रांगण में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित ‘सामाजिक सद्भाव बैठक’ में एकता का ऐसा सैलाब उमड़ा जिसने स्पष्ट कर दिया कि अब समाज को जातियों में बांटने वाली राजनीति सफल नहीं होगी।
“एकता का संकल्प: सकरा के विष्णुपुर बघनगरी में सामाजिक सद्भाव बैठक के बाद एकजुटता प्रदर्शित करते समाज के विभिन्न वर्गों के लोग और संघ के पदाधिकारी।”
समरसता से ही सशक्त होगा राष्ट्र
बैठक को मुख्य मार्गदर्शक के रूप में संबोधित करते हुए मुजफ्फरपुर विभाग निरीक्षक राजेश रंजन जी ने कहा कि हिंदू समाज का संगठित होना किसी के विरोध में नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा और सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि जब समाज का हर वर्ग कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होगा, तभी विघटनकारी शक्तियां परास्त होंगी।
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित बैठक के दौरान सामाजिक समरसता के विषयों पर चर्चा सुनते क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक एवं मातृशक्ति।”
एक जाजम पर बैठे सभी वर्ग
विभाग कार्यवाह अरविंद जी के कुशल संचालन में आयोजित इस बैठक की सबसे खास बात यह रही कि इसमें समाज के हर तबके के गार्जियन, युवाओं और महिलाओं ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। खुले सत्र में चर्चा की गई कि कैसे आपसी भाईचारे और रोटी-बेटी के संबंधों को मजबूत कर सामाजिक समरसता को गांव-गांव तक ले जाया जाए।
सामाजिक समरसता की शपथ
बैठक के अंत में उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि वे छुआछूत और भेदभाव जैसी कुरीतियों को जड़ से मिटाएंगे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजनों से समाज के अंतिम व्यक्ति तक अपनत्व का भाव पहुँचता है।
समस्तीपुर | 15 अप्रैल 2026 अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त अब बाल विवाह जैसी कुरीति के लिए काल बनेगा। सरायरंजन प्रखंड के उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय, अख्तियारपुर में बुधवार को जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र द्वारा एक ऐसा बिगुल फूंका गया, जिसने समाज की रूढ़ियों की नींव हिला दी। महिला एवं बाल विकास निगम और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम ने स्पष्ट कर दिया कि अब बचपन को चूल्हे की आग में झोंकने वालों की खैर नहीं।
“मंच से हुंकार: छात्राओं को उनके अधिकारों और ‘सखी वार्ता’ के तहत बाल विवाह रोकने का मंत्र देतीं पदाधिकारी।”
‘सखी वार्ता‘ से बेटियों को मिला अधिकारों का कवच
कार्यक्रम के दौरान जिला मिशन समन्वयक गौरव कुमार और जेंडर स्पेशलिस्ट राजेश कुमार ने “सखी वार्ता” के जरिए छात्राओं को सीधे तौर पर उनकी सुरक्षा और सरकारी अधिकारों के बारे में बताया। सभागार में बैठी सैकड़ों छात्राओं ने जब अपनी मुट्ठियाँ भींचकर बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया, तो पूरे विद्यालय परिसर में एक नई ऊर्जा का संचार हो गया।
अक्षय तृतीया पर पैनी नजर, चुप्पी तोड़ना ही समाधान
विद्यालय की प्राध्यापिका डॉ. सीमा कुमारी और जवाहर ज्योति की जिला कार्यक्रम प्रबंधक दीप्ति कुमारी ने चेतावनी दी कि अक्षय तृतीया पर होने वाले गुप्त विवाहों पर प्रशासन की पैनी नजर है। उन्होंने साफ कहा, “चुप रहना भी अपराध है।” यदि कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिले, तो तुरंत 1800-102-7222 पर कॉल करें।
“जागरूक बचपन, सुरक्षित कल: अख्तियारपुर विद्यालय में बाल विवाह के खिलाफ आयोजितसत्र को एकाग्रता से सुनतीं छात्राएं।”
पोषण और स्वास्थ्य का भी मिला साथ
सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए स्वास्थ्य और पोषण सामग्री का वितरण भी किया गया। स्टेम लैब शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बच्चों को बाल श्रम और दुर्व्यापार के खतरों से आगाह किया।
मुजफ्फरपुर | मुजफ्फरपुर समेत उत्तर बिहार के आसमान पर आज जो मंजर दिखा, उसने विज्ञान और परंपरा दोनों को झकझोर कर रख दिया है। वैशाख का महीना, जिसमें आसमान से आग बरसती है और लू के थपेड़े चलते हैं, वहां आज सुबह की शुरुआत घने कुहासे और धुंध के साथ हुई। सकरा कृषि फॉर्म से आई तस्वीरें गवाह हैं कि प्रकृति ने अपना रास्ता बदल लिया है। लेकिन यह ‘ठंडी सुबह’ सुकून देने वाली नहीं, बल्कि आने वाले भीषण अकाल और ‘आग’ की आहट है।
खतरे की दस्तक: मुजफ्फरपुर के सकरा कृषि फॉर्म में बुधवार की सुबह कुछ इस कदर कोहरे की चादर में लिपटी रही। वैशाख के महीने में ऐसादृश्य दशकों बाद देखा गया है, जो आने वाले कृषि संकट की ओर इशारा कर रहा है।
कहावतों में छिपा है भविष्य का सच
ग्रामीण इलाकों के बुजुर्गों ने जैसे ही यह कोहरा देखा, उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। लोक-कवि घाघ और भड्डरी, जिनकी गणनाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार माना जाता है, उनके अनुसार यह संकेत बेहद शुभ नहीं हैं।
1. आग की निशानी है यह धुंध: बुजुर्ग कहते हैं—
“माघ का कोहरा सावन में पानी, वैशाख का कोहरा आग की निशानी।”
इसका सीधा अर्थ है कि यदि माघ (जनवरी-फरवरी) में कोहरा पड़े तो सावन में झमाझम बारिश होती है, लेकिन यदि यही कोहरा वैशाख (अप्रैल-मई) में दिख जाए, तो यह ‘आग’ यानी भीषण सूखे और लू का प्रतीक है। यह संकेत है कि आने वाले समय में जल स्रोत सूख जाएंगे और फसलें जलकर राख हो जाएंगी।
2. मानसून की कमर टूटने का संकेत: घाघ की एक और प्रसिद्ध कहावत इस स्थिति पर सटीक बैठती है:
“सावन मास चले पुरवैया, बेचि डारु धेनु अरु गैया।वैशाख मास जो जाड़ा पड़े, तौ सावन में कोहरा लगे॥”
वैज्ञानिक और पारंपरिक दोनों ही दृष्टिकोण मानते हैं कि वैशाख में ‘तपन’ का होना अनिवार्य है। यदि इस समय ठंडक या कोहरा बढ़ता है, तो वायुमंडल में वह ‘लो प्रेशर एरिया’ (निम्न दबाव) नहीं बन पाता, जो हिंद महासागर से मानसूनी बादलों को खींचकर लाता है। यानी, आज का कोहरा कल की प्यासी धरती का गवाह है।
किसान और पलायन का डर
सकरा के स्थानीय किसानों का कहना है कि अगर मौसम का यही मिजाज रहा, तो खेती की लागत निकालना भी मुश्किल होगा। कहावत है:
“चौत सुक्ला अष्टमी, जो गरजै आधी रात। तुम जाओगे पिया मालवा, हम जाबैं गुजरात॥”
अर्थात, यदि इस संधि काल में मौसम असामान्य व्यवहार करे, तो किसान को अपनी जमीन छोड़कर मजदूरी के लिए पलायन करना पड़ता है। वैशाख का यह कोहरा संकेत दे रहा है कि इस वर्ष ‘अन्नदाता’ के माथे पर चिंता के बल पड़ने वाले हैं।
विज्ञान और परंपरा का मेल
मौसम वैज्ञानिक भी दबी जुबान में घाघ की इन बातों का समर्थन कर रहे हैं। वर्तमान में इसे ‘एल नीनो‘ (El Niño) के प्रभाव से जोड़कर देखा जा रहा है। जब प्री-मानसून के दौरान तापमान बढ़ना चाहिए, तब कोहरा छाने का मतलब है कि समुद्री हवाओं का रुख बदल रहा है। नमी जो मानसून के लिए संचित होनी चाहिए थी, वह असमय ही जमीन पर गिर रही है।
प्रकृति के नियमों के विरुद्ध वैशाख में कोहरे का दिखना एक गंभीर चेतावनी है। शासन और प्रशासन को अभी से जल संचयन और संभावित सूखे से निपटने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।
बंदरा में ‘समरसता दिवस’ के रूप में मनाई गई जयंती, एनडीए सरकार द्वारा विकसित ‘पंचतीर्थ’ पर हुई चर्चा
बंदरा (मुजफ्फरपुर): संविधान शिल्पी और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती रविवार को प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने बाबा साहेब के पदचिन्हों पर चलने और उनके द्वारा दिखाए गए समानता के मार्ग को अपनाने का संकल्प लिया।
नमन: बंदरा के महेशपुर में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते मंडल महामंत्री श्याम किशोर कुशवाहा, वार्ड सदस्य प्रेमलाल पासवान व अन्य ग्रामीण।
महेशपुर में भाजपा का ‘समरसता समागम‘
बंदरा मंडल पूर्वी के तेपरी पंचायत अंतर्गत महेशपुर (वार्ड संख्या 01, बूथ संख्या 406) में स्थानीय वार्ड सदस्य व भाजपा कार्यकर्ता प्रेमलाल पासवान के नेतृत्व में ‘समरसता दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मंडल महामंत्री श्याम किशोर कुशवाहा ने केंद्र की एनडीए सरकार द्वारा बाबा साहेब को दिए गए सम्मान का उल्लेख किया।
कुशवाहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बाबा साहेब की याद में स्थापित ‘पंचतीर्थ‘ के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि सरकार ने उनके जीवन से जुड़े पाँच महत्वपूर्ण स्थलों को राष्ट्रीय प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित किया है:
जन्मभूमि (महू): जिसे अब आधिकारिक तौर पर ‘डॉ. अंबेडकर नगर’ का नाम दिया गया है।
शिक्षा भूमि (लंदन): वह ऐतिहासिक घर जहाँ बाबा साहेब रहकर पढ़ाई की, उसे भारत सरकार ने खरीद कर भव्य स्मारक बनाया।
दीक्षा भूमि (नागपुर): जहाँ उन्होंने मानवता का संदेश फैलाने के लिए बौद्ध धर्म अपनाया।
परिनिर्वाण भूमि (दिल्ली): 26 अलीपुर रोड स्थित निवास, जिसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया।
चैत्य भूमि (मुंबई): अंतिम संस्कार स्थल, जहाँ आज लाखों लोग श्रद्धा अर्पित करने पहुँचते हैं।
उमेश कुमार रामबाबा साहेब के चित्र पर किया पुष्पांजलि अर्पित
दूसरी ओर, अखिल भारतीय रविदास जागरण महासभा के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य उमेश कुमार राम ने सकरा सु० विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के साथ बाबा साहेब की 126वीं जयंती मनाई। उन्होंने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके मूल मंत्र— “शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो” को जीवन में उतारने की अपील की।
श्री राम ने जोश भरते हुए कहा, “बाबा साहेब कहते थे कि शिक्षा शेरनी की वह दूध है, जो इसे पियेगा वो दहाड़ेगा। आज समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को जागरूक और शिक्षित होने की सबसे अधिक आवश्यकता है।”
कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी
इस पावन अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में अधिवक्ता मनोज कु० सिंह, मो० गुलाम मैनुद्दीन, अनीता देवी, श्रद्धा खुशी, शिवम कुमार, सिद्धार्थ कुमार, डॉ० मनीष यादव, मो० हैदर रजक, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव, दिनेश पासवान, गीता देवी, साधना देवी, उर्मिला देवी, उचित पासवान, चुनचुन कुमार और संजय चौधरी सहित भारी संख्या में ग्रामीण व कार्यकर्ता उपस्थित थे।
ब्रह्म स्थान पर लगती है इनकी क्लास,क्या आईएएस बनेंगे? मुरौल में ‘बंक मार’ छात्र,
मुरौल, मुजफ्फरपुर। क्या आपने कभी सोचा है कि जिस बच्चे को आप माथे पर तिलक लगाकर या दुआएं देकर स्कूल भेजते हैं, वह रास्ते के मोड़ से ही अपने भविष्य की दिशा बदल लेता है? मुरौल प्रखंड कार्यालय से महज पांच सौ मीटर उत्तर, ब्रह्म स्थान के चबूतरे पर जो तस्वीर दिखी, वह केवल पांच बच्चों के क्लास बंक करने की खबर नहीं है, बल्कि हमारे दम तोड़ते सामाजिक उत्तरदायित्व का ‘पोस्टमार्टम’ है।
भविष्य के साथ ‘सिप’: स्कूल ड्रेस में चबूतरे पर मौज करते बच्चे, जो शिक्षा की जगह लापरवाही की घूंट पी रहे हैं।
सुबह घर से ,नौ बजे मंदिर का चबूतरा, बारह बजे घर की राह
रिपोर्टर की नजर जब ब्रह्म स्थान पर पड़ी, तो वहां पांच छात्र स्कूल ड्रेस में ठहाके लगाते मिले। कोई हाथ में सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल थामे मजे ले रहा था, तो कोई गप्पों में मशगूल था। ये बच्चे सुबह घर से तो स्कूल के लिए निकले थे, लेकिन उनकी राहें क्लासरूम के बजाय इस चबूतरे की ओर मुड़ गईं। ताज्जुब की बात यह है कि राह चलते राहगीर भी इन्हें देखकर अनदेखा कर देते हैं। क्या हमारा समाज इतना संवेदनहीन हो गया है कि अपने ही बच्चों को बर्बाद होते देख मूकदर्शक बना रहेगा?
चबूतरे पर सॉफ्ट ड्रिंक पीते बच्चों से मुरौल का नाम रोशन होगा?
सवाल सीधा है और बेहद कड़वा। हाथ में सॉफ्ट ड्रिंक की बोतलें थामे ये बच्चे जब ठहाके लगाकर समय काटते हैं, तब वे केवल स्कूल का समय नहीं, बल्कि अपने मां-बाप के पसीने की कमाई और उम्मीदों का गला घोंट रहे होते हैं। क्या इन चबूतरे वाल क्लास से देश को अगला आईएएस या आईपीएस मिलेगा? यह सवाल या इस तरह का बंक मार छात्रों का दृश्य अमूमन हर स्कूल के आस पास दिख जा रहा है, जिस पर अभिभावकों को विचार करना होगा,
स्कूल के बाहर खाने-पीने के ठेलों पर जुटती बच्चों की भीड़, जो विद्यालय के अनुशासन को दे रही चुनौती एवं दीवार लांघकर भागता बचपन या कहे कि प्रशासन की ढिलाई का फायदा उठा रहे बच्चे।
समाज, अभिभावक और व्यवस्था का गिरता स्तर
स्कूली बच्चों का ‘कोल्ड ड्रिंक‘ ब्रेक! क्या यही है भविष्य? नौ बजे जब इन बच्चों को स्कूल के क्लास रुम में होना चाहिए, तब ये बच्चे चबूतरे पर ‘पार्टी’ कर रहे होते हैं। बारह बजे तक चलने वाला यह ‘कोल्ड ड्रिंक ब्रेक’ उस मानसिक खोखलेपन को दर्शाता है, जहाँ बच्चों को पढ़ाई से ज्यादा आनंद अनुशासन तोड़ने में आ रहा है। यह मौज-मस्ती आने वाले समय में एक ऐसी पीढ़ी तैयार करेगी, जिसके पास डिग्रियां तो शायद हों, पर योग्यता शून्य होगी।
नीचे की तस्वीर में देखें बच्चे कैसे खतरनाक ढ़ंग से दिवाल फांद रहे हैं,
मुरौल में शिक्षा का हाल बेहाल! यूनिफॉर्म में सजे बच्चों का इस तरह सड़कों पर आवारागर्दी करना मुरौल की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक निगरानी पर सबसे बड़ा तंज है। यह तस्वीर चीख-चीख कर कह रही है कि शिक्षा का ढांचा केवल इमारतों तक सिमट गया है, संस्कारों और अनुशासन की जड़ें सूख चुकी हैं।
बाउंड्री पार, भविष्य बर्बाद! नया ‘एडवेंचर स्पोर्ट’ : मध्य विद्यालय मुरौल के छात्रों के लिए स्कूल की बाउंड्री अब सुरक्षा नहीं, बल्कि एक चुनौती है जिसे वे हर रोज पार करते हैं। जब अनुशासन की सीमा (बाउंड्री) टूटती है, तो भविष्य की मर्यादा भी तार-तार होने लगती है।
खतरनाक लापरवाही: खेत में भागते बच्चे, जिम्मेदार कौन? जैसे ही इन बच्चों ने कैमरा देखा, वे अपनी पहचान छिपाने के लिए मकई के खेत की ओर भाग खड़े हुए। यह भागना उनके ‘अपराध बोध’ को दर्शाता है। लेकिन क्या केवल बच्चे जिम्मेदार हैं? वह समाज कहाँ है जो पहले मोहल्ले के हर बच्चे को अपना समझकर टोकता था? आज हम इतने संवेदनहीन हो गए हैं कि भविष्य को बर्बाद होते देख भी आंखें मूंद लेते हैं।
अभिभावकों के लिए ‘वेक-अप कॉल‘
सावधान! अगर आप भी केवल बच्चे को स्कूल भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझते हैं, तो आप अपने बच्चे के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं। आपकी थोड़ी सी लापरवाही और निगरानी की कमी बच्चे को अंधेरी गलियों में धकेल सकती है। समय रहते हकीकत मालूम करें, वरना पछतावे के अलावा कुछ हाथ नहीं आएगा।
प्रधानाध्यापक का पक्ष: “अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता”
मध्य विद्यालय मुरौल के प्रधानाध्यापक शशि भूषण कुमार ने स्पष्ट किया कि विद्यालय के अंदर की जिम्मेदारी शिक्षकों की है, लेकिन बाहर की बागडोर समाज और अभिभावकों के हाथ में है। उन्होंने कहा—
“हम प्रतिमाह बैठक करते हैं, लेकिन अभिभावकों की कम उपस्थिति चिंताजनक है। बाउंड्री की ऊँचाई कम होना भी एक समस्या है, लेकिन जब तक गार्जियन और जनप्रतिनिधि साथ नहीं आएंगे, अनुशासन संभव नहीं है।”
एचएम साहब ने बताया कि हर महीने के आखिरी शनिवार को अभिभावकों के साथ मीटिंग होती है, लेकिन अभिभावकों की उपस्थिति आधी भी नहीं रहती है ।
मुरौल के ये वही बच्चे हैं जिनसे कल को डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस बनने की उम्मीद की जाती है। लेकिन अगर बचपन ‘ब्रह्म स्थान’ पर सॉफ्ट ड्रिंक पीकर और क्लास बंक करके बीतेगा, तो भविष्य अंधकारमय ही होगा। अभिभावकों की यह मजबूरी है या लापरवाही कि वे यह भी नहीं देखते कि बच्चा स्कूल के गेट के अंदर गया या नहीं?यह खबर केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यदि आज समाज ने इन बच्चों को सही रास्ता नहीं दिखाया, तो कल यही ‘बंक मार’ संस्कृति हमारे समाज की पहचान बन जाएगी।
समस्तीपुर (13 अप्रैल 2026): बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश सोमवार को समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड अंतर्गत मुरादपुर बंगरा पंचायत पहुंचे। अवसर था राष्ट्रीय लोक मोर्चा द्वारा आयोजित ‘सम्मान सह अभिनंदन समारोह’ एवं ‘सदस्यता अभियान’ का। इस दौरान मंत्री जी का न केवल भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया, बल्कि जन समस्याओं और भ्रष्टाचार के मामलों पर उन्होंने कड़ा रुख भी अख्तियार किया।
सम्मान की परंपरा: राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता निशांत द्वारा मंत्री दीपक प्रकाश को पौधा भेंट कर स्वागत किया गया।
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस‘: सकरा प्रखंड के गबन मामले में कार्रवाई का आश्वासन
कार्यक्रम के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए मंत्री दीपक प्रकाश ने एक गंभीर भ्रष्टाचार के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जब उनसे सकरा प्रखंड में सड़क निर्माण के नाम पर लाखों रुपये के गबन का सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“यह मामला मेरे संज्ञान में आया है और इसके लिए लिखित आवेदन भी प्राप्त हुआ है। विभाग इसकी गहन जांच कराएगा और जो भी दोषी होंगे, उन पर विधि सम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
मंत्री दीपक प्रकाश ने आगे कहा कि पंचायती राज विभाग की योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचे, यह उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नि:संकोच अपनी समस्याएं और सुझाव उन्हें दे सकते हैं।
शाही स्वागत: कार्यकर्ताओं ने उत्साह में आकर मंत्री दीपक प्रकाश को लड्डूओं से तौला, क्षेत्र में चर्चा का विषय बना।
तराजू पर तौले गए पंचायती राज विभाग के मंत्री जी ,लड्डूओं से हुआ स्वागत
अभिनंदन समारोह का मुख्य आकर्षण वह पल रहा जब कार्यकर्ताओं ने उत्साह और प्रेम के वशीभूत होकरपंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश को तराजू के एक पलड़े पर बैठाया और दूसरे पलड़े को लड्डूओं से भरकर उन्हें तौला। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह इस क्षेत्र की पुरानी परंपरा है जिसे ‘तुलादान’ के रूप में देखा जाता है। लड्डूओं को बाद में प्रसाद के रूप में ग्रामीणों के बीच वितरित किया गया।
स्थानीय बुजुर्गों और अभिभावकों का आशीर्वाद लेते पंचायती राज मंत्री।
परंपरा और जोश का संगम
कार्यक्रम की शुरुआत भव्य तरीके से हुई, जिसकी अध्यक्षता डॉ. ज्ञानशंकर कौशल ने की। मंच का संचालन डॉ. सत्येंद्र नाथ झा ने किया। ताजपुर प्रखंड जदयू अध्यक्ष कुमार समर्पण और प्रशांत पंकज सहित एनडीए के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री जी को पुष्पगुच्छ, माला, पाग और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। स्थानीय वक्ताओं ने भावुक होते हुए कहा, “आप आए श्रीमान जी, यूं लगा जैसे तकलीफ को दवा मिल गई।”
क्षेत्र से है गहरा लगाव
मंत्री दीपक प्रकाश ने अपने संबोधन में भावुक होते हुए कहा कि इस क्षेत्र से उनके पिता आदरणीय उपेंद्र कुशवाहा जी का पुराना और गहरा लगाव रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे इस क्षेत्र के विकास के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। एनडीए के तमाम घटक दलों (जदयू, हम, रालोमो) के नेताओं ने एक स्वर में मंत्री जी का अभिनंदन किया और इसे ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर की धरती’ पर एक ऐतिहासिक दिन बताया।
सदस्यता अभियान समारोह को संबोधित करते पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश
पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश का भरोसा: “आपका छोटा भाई आपके लिए हमेशा हाजिर”
जनता को संबोधित करते हुए मंत्री दीपक प्रकाश ने भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “पंचायती राज विभाग के मंत्री के रूप में आपके पास कोई भी समस्या, सुझाव या शिकायत हो, तो नि:संकोच अपने छोटे भाई दीपक के पास आएं। मुझे जो जवाबदेही मिली है, मैं उससे दो कदम आगे बढ़कर आपकी सेवा करूँगा।” उन्होंने इस क्षेत्र से अपने पिता उपेंद्र कुशवाहा के पुराने जुड़ाव को भी याद किया।
सदस्यता अभियान का आगाज: मंत्री जी की उपस्थिति में नए सदस्यों को पार्टी से जोड़ने की प्रक्रिया।
मंत्री जी ने खुद सौंपी सदस्यता की पर्ची, सैंकड़ों युवाओं ने थामा दामन
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूती प्रदान करना था, जिसके तहत मंत्री दीपक प्रकाश ने स्वयं सदस्यता अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने मंच से कई युवाओं और स्थानीय गणमान्य लोगों को विधिवत रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई और उन्हें सदस्यता रसीद सौंपी। सदस्यता दिलाते हुए मंत्री जी ने कहा कि संगठन की असली ताकत जमीनी कार्यकर्ता हैं। उनके हाथों से सदस्यता ग्रहण करने के बाद कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया और सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा की नीतियों में विश्वास जताते हुए पार्टी का दामन थामा।
मंच की मजबूती और कार्यकर्ताओं की भीड़
भीड़ इतनी अधिक थी कि उद्घोषक को बार-बार चेतावनी देनी पड़ी कि “मंच कमजोर है, कृपया नीचे उतर जाएं।” सदस्यता अभियान के दौरान सैकड़ों लोगों ने पार्टी की सदस्यता ली, जिससे आगामी चुनावों से पहले राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने जिले में अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया है।
सदस्यता अभियान के दौरान उपस्थित एनडीए के नेतागण एवं उमड़ी समर्थकों की भीड़।
समारोह में मुख्य रूप से उपस्थित रहने वाले गणमान्य :
समारोह में मुख्य रूप से कुमार समर्पण जी (प्रखंड अध्यक्ष, जदयू, ताजपुर),प्रशांत पंकज (प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष, रालोमो),विनोद पासवान (पूर्व जदयू अध्यक्ष),रामप्रीत पासवान (पूर्व सरपंच, बंगड़ा),राम प्रीत कुशवाहा(पूर्व मुखिया, मझौलिया),राजनारायण सिंह (पैक्स अध्यक्ष),डॉ. राजकुमार सिंह, राम गणेश ठाकुर (शिक्षक), डॉ. शाकीर अहमद, डॉ. अमरेंद्र कुमार,अरुण कुमार सिंह, बालकृष्ण साह, रामबरन साह (अंकेक्षक),सतीश कुमार झा, जयनारायण साह, भोला सिंह,सनोज कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, रंजीत कुमार सिंह,विनय कुमार सिंह, महेश सिंह,अनिमेश कुमार सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे,
समस्तीपुर | 12 अप्रैल, 2026 दुनिया आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहाँ एक तरफ प्रगति के बड़े-बड़े दावे हैं, तो दूसरी तरफ महाविनाशकारी महायुद्ध की जलती हुई आग। सामरिक शक्ति के प्रदर्शन और वर्चस्व की इस अंधी दौड़ में मानवता कराह रही है। इसी वैश्विक संकट के बीच समस्तीपुर के सामाजिक कार्यकर्ता और राष्ट्र सेवा दल (बिहार) के प्रतिनिधि सुरेन्द्र कुमार ने एक अपील जारी कर दुनिया के वर्तमान हालातों और सत्ताधीशों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रतीकात्मक तस्वीर
बाजारवाद और निरंकुश सत्ता का घातक गठजोड़
सुरेन्द्र कुमार ने अपने वक्तव्य में वैश्विक राजनीति के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि आज दुनिया की लोकतांत्रिक सरकारें ‘बाजारवादी मानसिकता वाले स्वार्थी नीति-निर्धारकों‘ की कठपुतली बन चुकी हैं। उन्होंने इसके कारण पर इशारा करते हुए कहा कि सत्ता जब जनसेवा के बजाय व्यापारिक मुनाफे और साम्राज्यवादी विस्तार की सोच से ग्रस्त हो जाती है, तो वह ‘निरंकुश’ हो जाती है। आज की सरकारें हथियारों की नुमाइश को ही राष्ट्रवाद समझ बैठी हैं, जबकि हकीकत में यह महाविनाश का आमंत्रण है।
महामारी पर जीत तो तानाशाहों पर क्यों नहीं?
सुरेन्द्र कुमार ने एक तार्किक सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विज्ञान और मानव संकल्प ने पोलियो, चेचक, हैजा और हाल ही में कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, तो फिर हम इन ‘बेकाबू तानाशाहों’ और युद्धोन्मादी शासकों से मुक्ति पाने में अक्षम क्यों हैं? सुरेन्द्र कुमार के अनुसार, तानाशाही किसी वायरस से कम खतरनाक नहीं है, जो पूरी दुनिया की शांति और समृद्धि को लील रही है।
युवा ऊर्जा: सृजन या विध्वंस?
खबर का सबसे मर्मस्पर्शी पहलू युवाओं और बच्चों की अनदेखी है। सुरेन्द्र कुमार ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की आधी आबादी युवाओं की है, लेकिन उनकी आकांक्षाएं किसी भी सरकार के एजेंडे में नहीं हैं।
रोजगार बनाम हथियार: सरकारों ने कभी यह नहीं पूछा कि नौजवानों को किस तरह के रोजगार की जरूरत है। उनकी असीम ऊर्जा को नवीनतम तकनीक और सृजन में लगाने के बजाय युद्ध की भट्टी में झोंका जा रहा है।
शोषित बचपन: जब तक दुनिया में शांति की ‘गारंटी’ नहीं होगी, तब तक हम बाल मजदूरी, बाल विवाह और बाल यौन शोषण जैसे जघन्य अपराधों को समाप्त नहीं कर पाएंगे।
वैकल्पिक मार्ग: शांति, सद्भाव और गांधीवाद
सुरेन्द्र कुमार ने विश्व के तमाम समतावादी, समाजवादी और गांधीवादी विचारधारा के लोगों से अपील की है कि वे युद्ध के उन्माद के खिलाफ एकजुट हों। उन्होंने जोर दिया कि असली ‘सामरिक प्रदर्शन’ हथियारों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षा और संरक्षण के साधन जुटाना होना चाहिए। युवाओं के लिए वैकल्पिक रोजगार की संभावनाएं तलाशना ही वह प्रार्थना है जो विश्व को महाविनाश से बचा सकती है।
सम्मेलन की तैयारियों को लेकर गांधी चौक पर जुटी प्रखंड कमिटी, मिशन 2026 के लिए कसी कमर
12 अप्रैल 2026|ताजपुर (समस्तीपुर): ताजपुर प्रखंड के गांधी चौक पर रविवार को भाकपा माले प्रखंड कमिटी की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पार्टी ने सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बैठक में न केवल संगठन की मजबूती पर चर्चा हुई, बल्कि भविष्य के बड़े आंदोलनों की रूपरेखा भी तैयार की गई।
ताजपुर के गांधी चौक पर आयोजित भाकपा माले की बैठक में उपस्थित सदस्य संगठन की मजबूती एवं आगामी आंदोलनों का संकल्प लेते हुए।
जनता की समस्याओं पर सरकार को घेरने की तैयारी
बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज आम जनता महंगाई और बेरोजगारी की दोहरी मार झेल रही है। किसान और मजदूर बेहाल हैं, लेकिन प्रशासन मौन है। प्रखंड कमिटी ने निर्णय लिया है कि:
बिजली और राशन में धांधली: बिजली आपूर्ति की अनियमितता और राशन वितरण में हो रही व्यापक गड़बड़ी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य: बदहाल सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए गांव-गांव में जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा।
पंचायत स्तर पर घेराबंदी: हर पंचायत में शाखा कमिटी को सक्रिय कर नए सदस्यों को जोड़ा जाएगा और जल्द ही प्रखंड मुख्यालय पर एक विशाल ‘हल्ला बोल‘ धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
चुनावी और सांगठनिक एजेंडा तय
आगामी राज्य और जिला सम्मेलनों को सफल बनाने के लिए पार्टी ने समय-सारणी निर्धारित की है:
15 अप्रैल: समस्तीपुर शहर के मालगोदाम चौक स्थित जिला कार्यालय में राज्य सम्मेलन के डेलीगेट चुनाव हेतु निर्वाचक मंडल के सदस्य मतदान करेंगे।
18-19 अप्रैल: कल्याणपुर के वीरसिंगपुर में आयोजित होने वाले जिला सम्मेलन में ताजपुर से बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
16-18 मई: दरभंगा में होने वाले ऐतिहासिक राज्य सम्मेलन की सफलता के लिए घर-घर जाकर कोष संग्रह और पर्चा वितरण किया जाएगा।
इनकी रही मौजूदगी
रणनीतिक बैठक में प्रखंड के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य रूप से ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, संजीव राय, राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, प्रभात रंजन गुप्ता, आसिफ होदा, मनोज कुमार सिंह, मो० एजाज, रंजू कुमारी, जीतेंद्र सहनी, और ललन दास शामिल थे। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि पार्टी का अगला लक्ष्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय दिलाना है।