Sunday, June 7, 2026

विशेष विश्लेषण: बाल बजट 2026-27 में 16,164 करोड़ की बढ़ोतरी, लेकिन विशेषज्ञों ने ‘सीमित’ निवेश पर जताई चिंता

जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र और क्राईने बजट का किया त्वरित विश्लेषण; जीडीपी में बाल बजट की हिस्सेदारी अभी भी 0.34 प्रतिशत पर सिमटी

समस्तीपुर/पटना | 02 फरवरी, 2026 केंद्रीय वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए आम बजट 2026-27 पर बच्चों के अधिकारों के लिए समर्पित संस्थाओं ने अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी है। समस्तीपुर में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए पिछले 30 वर्षों से सक्रिय संस्था जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र और राष्ट्रीय संस्था चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) ने बजट को एक ‘सकारात्मक संकेत’ तो बताया है, लेकिन साथ ही निवेश की गति पर सवाल भी उठाए हैं।

आंकड़ों की जुबानी: बढ़ोतरी तो हुई पर क्या है पर्याप्त?

संस्था द्वारा किए गए बजट विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2026-27 के लिए बच्चों से संबंधित कुल आवंटन 1,32,296.85 करोड़ रुपये रहा है। यदि इसकी तुलना पिछले वित्त वर्ष (2025-26) के 1,16,132.5 करोड़ रुपये से की जाए, तो इसमें 16,164.35 करोड़ रुपये की सीधी वृद्धि देखी गई है।

जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के सचिव सुरेंद्र कुमार ने बजट पर चर्चा करते हुए कहा, “आंकड़ों में बढ़ोतरी स्पष्ट है, लेकिन यह विकास के बड़े बदलाव के बजाय क्रमिक प्रगति (Incremental Progress) का संकेत देती है। कुल केंद्रीय बजट में बच्चों की हिस्सेदारी अब भी मात्र 2.47 प्रतिशत है, जबकि देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा बच्चे हैं। भारत सरकार की स्पष्ट दृष्टि सराहनीय है, लेकिन प्राथमिकताएं अभी भी सीमित दायरे में हैं।”

स्वास्थ्य और पोषण: जल जीवनकी वापसी और पोषण 2.0 का सहारा

इस बजट में बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को लेकर कुछ ठोस कदम उठाए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जल जीवन मिशन को फिर से बाल बजट का हिस्सा बनाया गया है, जिसके लिए 6,736.36 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ पेयजल सीधे तौर पर बच्चों की मृत्यु दर को कम करने और उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होगा।

वहीं, सरकार की प्रमुख योजना सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0′ के बजट में 5.19 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 19,635 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पीएम पोषण शक्ति निर्माण योजना (मिड-डे मील) को भी 2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12,749.99 करोड़ रुपये मिले हैं। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों में कुपोषण की समस्या को जड़ से मिटाना है।

शिक्षा और नवाचार: आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान

शिक्षा के क्षेत्र में इस बार मिश्रित रुझान देखने को मिला है। समग्र शिक्षा अभियान को 42,100 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है, जो पिछले वर्ष से 2.06 प्रतिशत अधिक है। सबसे बड़ी राहत आदिवासी बच्चों के लिए आई है, जहां एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के बजट में 20 प्रतिशत से अधिक की भारी बढ़ोतरी कर इसे 7,200 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

नवाचार के क्षेत्र में अटल टिंकरिंग लैब्स के लिए 3,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो सरकारी स्कूलों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। साथ ही, ‘स्किल इंडिया’ कार्यक्रम को बाल बजट में शामिल करना ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (NEP) के लक्ष्यों के अनुरूप है।

हाशिए पर खड़े समुदायों की अनदेखी?

क्राई की सीईओ पूजा मारवाहा ने अपनी प्रतिक्रिया में संतुलित निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य और शिक्षा में बढ़ोतरी स्वागत योग्य है, लेकिन समावेशी विकास के लिए बच्चों को और अधिक स्पष्ट प्राथमिकता देनी होगी।”

बजट विश्लेषण में यह चिंता भी जताई गई है कि अनुसूचित जाति (SC) के बच्चों के लिए प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्तियों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। इसी तरह ओबीसी, ईबीसी और दिव्यांग बच्चों की छात्रवृत्तियों में भी नाममात्र का इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक समानता पर केंद्रित योजनाओं को पर्याप्त संसाधन नहीं मिलेंगे, तब तक हाशिए पर रहने वाले बच्चों का मुख्यधारा में आना कठिन होगा।

दीर्घकालिक सोच की जरूरत : कुल मिलाकर, बाल बजट 2026-27 यह दर्शाता है कि सरकार बच्चों के प्रति संवेदनशील तो है, लेकिन निवेश के मामले में अभी भी “सुरक्षित” रास्ता अपना रही है। यदि भारत को अपनी ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ (Demographic Dividend) का लाभ उठाना है, तो आने वाले वर्षों में बाल बजट को जीडीपी के 1 प्रतिशत तक ले जाने और वित्तीय योजनाओं के केंद्र में बच्चों को मजबूती से रखने की आवश्यकता होगी।

बाल बजट 2026-27: मुख्य आंकड़ों का तुलनात्मक विवरण

नीचे दी गई तालिका स्पष्ट करती है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष बच्चों के कल्याण के लिए आवंटित बजट में किस तरह का बदलाव आया है:

योजना/क्षेत्रबजट 2025-26 (अनुमान)बजट 2026-27 (अनुमान)वृद्धि (प्रतिशत/राशि)
कुल बाल बजट (Total Child Budget)₹1,16,132.50 करोड़₹1,32,296.85 करोड़₹16,164.35 करोड़ (↑)
बजट में कुल हिस्सेदारी2.29%2.47%0.18% की वृद्धि
सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0₹18,666 करोड़₹19,635 करोड़5.19% की वृद्धि
समग्र शिक्षा अभियान₹41,250 करोड़₹42,100 करोड़2.06% की वृद्धि
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय₹6,000 करोड़₹7,200 करोड़20% की वृद्धि
पीएम पोषण (मिड-डे मील)₹12,500 करोड़₹12,749.99 करोड़2% की वृद्धि
अटल टिंकरिंग लैब्स₹3,200 करोड़नया बड़ा आवंटन
मिशन वात्सल्य₹1,500 करोड़₹1,550 करोड़3.33% की वृद्धि

विशेषज्ञों की राय: विकास की सुस्त रफ्तार

जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के अनुसार, बजट के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर कुछ महत्वपूर्ण बिंदु उभर कर सामने आते हैं:

  1. जीडीपी में मामूली बढ़त: बच्चों के लिए जीडीपी का आवंटन पिछले साल के 0.33% से बढ़कर इस साल 0.34% हुआ है। यह 0.01% की बढ़ोतरी दर्शाती है कि बच्चों पर निवेश अभी भी राष्ट्रीय प्राथमिकता की सूची में बहुत नीचे है।
  2. सुरक्षित पेयजल पर ध्यान: ‘जल जीवन मिशन’ के लिए ₹6,736.36 करोड़ का प्रावधान यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि बच्चों को पानी से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके।
  3. समानता का अभाव: विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि जहाँ एकलव्य विद्यालयों के लिए बजट बढ़ा है, वहीं अनुसूचित जाति और दिव्यांग बच्चों की छात्रवृत्ति योजनाओं में कोई खास हलचल नहीं हुई है।

अंतिम संदेश: सरकार ने कदम तो आगे बढ़ाए हैं, लेकिन बच्चों की वास्तविक जरूरतों को देखते हुए ये कदम अभी भी ‘छोटे’ हैं। टिकाऊ भविष्य के लिए ‘बाल बजट’ में बड़े और साहसी निवेश की आवश्यकता है।

सकरा: मदरसतुल इस्लामिया में वार्षिक उत्सव का आयोजन, मेधावी छात्रों पर हुई इनामों की बारिश

सकरा, मुजफ्फरपुर: शिक्षा केवल किताबी ज्ञान का नाम नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास का माध्यम है। इसी उद्देश्य को सार्थक करते हुए , सकरा फरीदपुर स्थित मदरसतुल इस्लामिया के प्रांगण में एक भव्य वार्षिक कार्यक्रम और पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर न केवल मदरसे के शैक्षणिक परिणामों की घोषणा की गई, बल्कि छात्रों ने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सालाना इम्तिहान के परिणामों की घोषणा

कार्यक्रम की शुरुआत मदरसे के वार्षिक शैक्षणिक प्रतिवेदन के साथ हुई। बताया गया कि हाल ही में मदरसतुल इस्लामिया और क्षेत्र के एक अन्य मकतब के बच्चों का सालाना इम्तिहान लिया गया था। इस परीक्षा में बच्चों ने कड़ी मेहनत की थी, जिसका सुखद परिणाम कल सबके सामने आया। परीक्षा में अव्वल आने वाले छात्रों के नामों की घोषणा होते ही पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

सांस्कृतिक और शैक्षणिक प्रदर्शन

पुरस्कार वितरण से पूर्व एक रंगारंग शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छात्रों ने अपनी कला और ज्ञान का मुजाहिरा पेश किया:

  • धार्मिक प्रस्तुति: छात्रों ने अत्यंत सुरीले अंदाज में नात-ए-पाक पढ़ी और कुरान व हदीस की रोशनी में जीवन के मूल्यों को साझा किया।
  • भाषाई कौशल: जहाँ एक ओर छात्रों ने उर्दू में प्रभावशाली तकरीरें (भाषण) दीं, वहीं दूसरी ओर अंग्रेजी भाषा में ‘स्पीच’ देकर यह साबित कर दिया कि वे आधुनिक शिक्षा की दौड़ में भी पीछे नहीं हैं।

सम्मानित हुए भविष्य के सितारे

समारोह का मुख्य आकर्षण पुरस्कार वितरण रहा। कक्षा में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों को मंच पर बुलाकर इनामात और विशिष्ट मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा, सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों को भी पुरस्कृत किया गया।

अतिथियों का संदेश

मंच पर क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सकरा मदरसा के उस्ताद जनाब कमर आलम साहब और मौलाना वसीम साहब ने बच्चों की हौसला अफजाई की। मदरसा कमेटी के सदर (अध्यक्ष) जसीम अहमद, सेक्रेटरी अनवर साहब, खजांची इम्तियाज साहब और सदस्य शमशाद साहब ने सफल आयोजन के लिए प्रबंधन की सराहना की।

विशिष्ट अतिथियों में बलिराम हाई स्कूल के सेवानिवृत्त क्लर्क जनाब मुस्तकीम साहब और जनाब नसीम अहमद साहब ने शिरकत की। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युग में शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है और बच्चों को दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी शिक्षा में भी महारत हासिल करनी चाहिए ताकि वे समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

समापन

कार्यक्रम के अंत में मदरसे के शिक्षकों और कमेटी के सदस्यों ने सभी अभिभावकों का आभार व्यक्त किया। आयोजन का समापन सामूहिक दुआ के साथ हुआ, जिसमें देश में शांति, प्रगति और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। यह कार्यक्रम क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ।

“वोटिंग के लिए बढ़ सकता है समय, तो परीक्षा के लिए क्यों नहीं? समस्तीपुर में जाम और मौसम की मार झेल रहे छात्रों को गेट से लौटाना अन्याय: सुरेंद्र प्रसाद सिंह”

नियमों की बेड़ियाँ या भविष्य से खिलवाड़? चंद मिनटों की देरी पर परीक्षार्थियों के सपने चकनाचूर, आइसा ने की दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

समस्तीपुर: बिहार में चल रही बोर्ड परीक्षाओं के दौरान समस्तीपुर सहित विभिन्न जिलों से शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनहीनता की विचलित करने वाली खबरें सामने आ रही हैं। ताजा घटनाक्रम में, मात्र 2 से 5 मिनट की देरी से परीक्षा केंद्र पहुँचने वाले छात्र-छात्राओं को प्रवेश से वंचित कर दिया गया, जिसके बाद परीक्षा केंद्रों के बाहर अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल देखा गया।

समस्तीपुर में पैदल पथ ब्रिज पर जाम की तस्‍वीर

इस गंभीर मुद्दे पर छात्र संगठन आइसा (AISA) के जिला प्रभारी एवं भाकपा माले जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इसे परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ क्रूर खिलवाड़ करार दिया है।


मानवता और व्यवहारिकता को ताक पर रख रहा प्रशासन

सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि समस्तीपुर जिले में जाम की समस्या विकराल है। भोला टॉकीज, मुक्तापुर, अटेनरा चौक जैसे रेलवे गुमती और समस्तीपुर ओवरब्रिज पर अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके साथ ही अचानक खराब हुए मौसम ने परीक्षार्थियों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। सिंह ने तर्क दिया कि यदि 5 बजे समाप्त होने वाली वोटिंग को विशेष परिस्थितियों में रात 7-8 बजे तक कराया जा सकता है, तो परीक्षार्थियों के लिए नियमों में थोड़ी लचीलापन क्यों नहीं दिखाई जा सकती?

सिंह ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा:

“नियम-कानून अपनी जगह हैं, लेकिन मानवता और व्यवहारिकता भी कोई चीज होती है। जब पुलिस और न्यायालय भी जरूरत पड़ने पर नियमों को शिथिल करते हैं, तो शिक्षा विभाग बच्चों के प्रति इतना कठोर कैसे हो सकता है?”


सड़कों पर सिसकियां: ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के नारे पर सवाल

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि छात्राएं परीक्षा केंद्र के गेट पर तैनात मजिस्ट्रेट और सुरक्षाकर्मियों के पैर पकड़कर गिड़गिड़ा रही हैं, लेकिन उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। कई परीक्षार्थी रोते-बिलखते केंद्र से वापस लौटे। आइसा नेता ने कहा कि सरकार एक ओर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की इस तानाशाही से बच्चों के वर्षों के परिश्रम पर पल भर में पानी फेर दिया गया। यह स्थिति परीक्षार्थियों के लिए मानसिक रूप से घातक और मरणासन्न कर देने वाली है।

मजबूरी में गेट फांदकर प्रवेश करती छात्रा

आइसा की प्रमुख मांगें:

छात्र संगठन ने इस मामले में राज्य सरकार और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे हैं:

  • दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई: उन मजिस्ट्रेटों और सेंटर सुपरिटेंडेंटों की जांच की जाए जिन्होंने अड़ियल रुख अपनाते हुए बच्चों को प्रवेश से रोका।
  • पुनर्परीक्षा का आयोजन: जिन छात्रों की परीक्षा मात्र चंद मिनटों की देरी के कारण छूट गई है, उनके भविष्य को देखते हुए विशेष पुनर्परीक्षा आयोजित की जाए।
  • नियमों में ढील: भविष्य में जाम या खराब मौसम जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र पर पहुँचने के समय को थोड़ा लचीला बनाया जाए।

साथ ही, सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अभिभावकों और छात्रों से भी अपील की है कि वे प्रशासन की संवेदनहीनता को देखते हुए समय से काफी पहले केंद्रों पर पहुँचने का प्रयास करें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

शोषितों की आवाज थे ‘बिहार के लेनिन’ बाबू जगदेव प्रसाद, केशोपुर में जयंती पर उमड़ा जनसैलाब

सकरा (मुजफ्फरपुर)। मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड अंतर्गत केशोपुर स्थित मिथिला आनंद जागरण धाम के पावन प्रांगण में अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा की जयंती समारोह का अत्यंत गरिमामय और भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर सामाजिक चेतना, समानता और शोषित-वंचित समाज के अधिकारों के लिए उनके द्वारा किए गए संघर्षों को याद किया गया। समारोह में उपस्थित प्रबुद्ध जनों और भारी संख्या में आए ग्रामीणों ने उन्हें ‘बिहार के लेनिन’ की उपाधि से विभूषित करते हुए उनके पदचिन्हों पर चलने का संकल्‍प दोहराया।

वैचारिक क्रांति के जनक को भावभीनी श्रद्धांजलि

समारोह का विधिवत शुभारंभ बाबू जगदेव प्रसाद के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान पूरा परिसर “बाबू जगदेव प्रसाद अमर रहें” के गगनभेदी नारों से गुंजायमान रहा। वक्ताओं ने उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जगदेव बाबू महज एक नेता नहीं, बल्कि एक युगपुरुष और वैचारिक क्रांति के जनक थे। उन्होंने उस दौर में दबे-कुचले वर्गों को सत्ता और सम्मान में हिस्सेदारी दिलाने की बात की, जब पिछड़ों और वंचितों की आवाज को दबाया जाता था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।

‘सौ में नब्बे शोषित हैं’ के नारे की गूँज

विद्वान वक्ताओं ने वैचारिक विमर्श के दौरान जोर दिया कि जगदेव बाबू किसी जाति विशेष के नेता नहीं थे। वे हर उस व्यक्ति की आवाज थे जो व्यवस्था द्वारा शोषित था। उनके द्वारा दिया गया ऐतिहासिक नारा— सौ में नब्बे शोषित हैं, नब्बे भाग हमारा है” —आज भी सामाजिक न्याय की लड़ाई का सबसे बड़ा घोषणापत्र बना हुआ है। वक्ताओं ने कहा कि उनके द्वारा जगाई गई सामाजिक न्याय की अलख आज भी करोड़ों लोगों का मार्ग प्रशस्त कर रही है और वर्तमान राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में उनके विचारों की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।

सत्ता और संसाधनों में भागीदारी पर प्रमुख संबोधन

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ग्राम केशोपुर के मुखिया सह मुखिया संघ के अध्यक्ष दिनेश पुष्पम ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद का बलिदान हमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकार पहुँचाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने पंचायत स्तर पर भी उनके सिद्धांतों को लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सकरा जदयू प्रखंड अध्यक्ष साधु शरण कुशवाहा ने अपने संबोधन में कहा कि बाबू जगदेव जी ने सत्ता और संसाधनों में पिछड़ों और दलितों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक समाज में संसाधनों का समान वितरण नहीं होगा, तब तक जगदेव बाबू का सपना अधूरा रहेगा। वहीं, ऑल इंडिया कांग्रेस सोशल ऑर्गनाइजेशन के जिला प्रभारी अनिल मल्लिक ने युवा पीढ़ी से संवाद करते हुए कहा कि आज के युवाओं को सोशल मीडिया के दौर में जगदेव बाबू के साहित्य और उनके संघर्षों को गहराई से पढ़ना चाहिए ताकि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकें।

महिलाओं की भागीदारी और गणमान्य अतिथियों की गरिमा

समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला परिषद सदस्य अनिल कुशवाहा और शशि गुप्ता ने भी अपने विचार साझा किए। ऑल इंडिया कांग्रेस सोशल ऑर्गनाइजेशन की महिला जिला अध्यक्ष ममता जायसवाल ने महिलाओं के दृष्टिकोण से जगदेव बाबू के विचारों की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि शोषित समाज का विकास तब तक संभव नहीं है जब तक महिलाओं की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित न हो। कार्यक्रम का सफल संचालन संतोष कुशवाहा द्वारा किया गया, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से दर्शकों में उत्साह भरे रखा।

समरसता और संकल्प के साथ समापन

आयोजन के अंत में एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें समाज से जातिगत भेदभाव मिटाने और एक समतामूलक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक राष्ट्रगान और शहीद जगदेव बाबू के सम्मान में नारों के साथ हुआ। इस अवसर पर स्थानीय प्रबुद्ध जनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया। यह आयोजन न केवल एक जयंती समारोह था, बल्कि सामाजिक न्याय की विरासत को आगे बढ़ाने का एक जीवंत संकल्प पत्र भी साबित हुआ।

मुजफ्फरपुर: “स्वस्थ युवा – समृद्ध राष्ट्र” के संकल्प के साथ संपन्न हुई दो दिवसीय जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता

मुजफ्फरपुर। युवाओं में खेल भावना को जागृत करने और ग्रामीण प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करने के उद्देश्य से मेरा युवा भारत‘ (युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार) द्वारा आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का भव्य समापन रविवार को हुआ। मुजफ्फरपुर के झपहां स्थित तिरहुत शारीरिक शिक्षण महाविद्यालय के परिसर में आयोजित इस प्रतियोगिता का विषय स्वस्थ युवा समृद्ध राष्ट्र रखा गया था।

31 जनवरी से 1 फरवरी 2026 तक चले इस आयोजन ने जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए खिलाड़ियों के भीतर नए उत्साह का संचार किया। समापन समारोह के अवसर पर विजेताओं को सम्मानित किया गया और खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के संकल्प को दोहराया गया।

क्लस्टर विजेताओं के बीच दिखा कड़ा मुकाबला

इस जिला स्तरीय प्रतियोगिता में सीधे प्रवेश नहीं था, बल्कि जिले के विभिन्न क्लस्टरों— मोतीपुर, सकरा, कुढ़नी, कटरा एवं मीनापुर में आयोजित प्रारंभिक खेल स्पर्धाओं में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों और टीमों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। आयोजन के दौरान फुटबॉल (पुरुष), कबड्डी (महिला), एथलेटिक्स 4×100 मीटर रिले (पुरुष एवं महिला) तथा बैडमिंटन (पुरुष एवं महिला) जैसी प्रमुख स्पर्धाएं आकर्षण का केंद्र रहीं।

प्रतियोगिता के पहले दिन फुटबॉल के प्रारंभिक दौर के मैच खेले गए, जबकि दूसरे दिन यानी 1 फरवरी को फाइनल मुकाबलों की धूम रही। कड़ाके की ठंड के बावजूद खिलाड़ियों के जोश में कोई कमी नहीं दिखी।

माननीय अतिथियों ने बढ़ाया उत्साह

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार सरकार की पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्रीमती रमा निषाद उपस्थित रहीं। उनके साथ मीनापुर विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक अजय कुमार और तिरहुत शारीरिक शिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य  शक्तिवान सिंह ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई।

समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री श्रीमती रमा निषाद ने कहा, खेल केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह युवाओं को अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना सिखाता है। स्वस्थ युवा समृद्ध राष्ट्रकेवल एक नारा नहीं, बल्कि एक जीवन पद्धति है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर जिला स्तर पर अपनी पहचान बनाना एक बड़ी उपलब्धि है।” उन्होंने ‘मेरा युवा भारत’ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर युवाओं को जोड़ने का यह अभियान भविष्य में राष्ट्र निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।

वहीं, विधायक अजय कुमार ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को तराशने का काम करते हैं। उन्होंने युवाओं से नशामुक्त समाज बनाने और नियमित खेल अभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

खेल किट का वितरण और युवाओं का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान खेल संस्कृति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए सक्रिय युवा मंडलों को स्पोर्ट्स किट प्रदान की गई। इनमें मीनापुर युवा मंडल, स्वामी विवेकानंद युवती मंडल (मुशहरी), गोरैया युवा मंडल (कुढ़नी), चंद्रशेखर आजाद युवा मंडल (कुढ़नी), स्वामी विवेकानंद युवा मंडल (मुरौल) और स्वामी विवेकानंद युवा मंडल (मीनापुर) शामिल रहे। अतिथियों ने उम्मीद जताई कि इन सामग्रियों के माध्यम से गांवों में खेल सुविधाओं का विस्तार होगा।

प्रतियोगिता के परिणाम: किसने मारी बाजी?

विभिन्न स्पर्धाओं के परिणाम काफी रोमांचक रहे, जहाँ अंतिम क्षणों तक जीत-हार का संघर्ष देखने को मिला:

  • कबड्डी (महिला): हनुमान नगर, कटरा की टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए विजेता का खिताब अपने नाम किया। प्रोजेक्ट राम जानकी गर्ल्स टीम, मीनापुर उपविजेता रही।
  • फुटबॉल (पुरुष): एक रोमांचक फाइनल मुकाबले में बाबू एफसी, सकरा ने मीनापुर वॉरियर्स को हराकर ट्रॉफी पर कब्जा किया।
  • बैडमिंटन: पुरुष वर्ग में चंदन कुमार विजेता और अविनाश कुमार उपविजेता रहे। महिला वर्ग में कटरा की नंदिनी कुमारी ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि मीनापुर की सनोवर खातून उपविजेता रहीं।
  • एथलेटिक्स (4×100 मीटर रिले – पुरुष): कुढ़नी की टीम (गौरव, हर्षित, साकिब और तहसीन) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। आई रिले टीम द्वितीय और मीनापुर की टीम तृतीय स्थान पर रही।
  • एथलेटिक्स (4×100 मीटर रिले – महिला): मीनापुर की टीम (रंजु, सिखा, अंचला और प्रीति) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मोतीपुर की टीम दूसरे स्थान पर रही।

सफलता के पीछे की टीम

इस सफल आयोजन के पीछे मेरा युवा भारत, पटना के सहायक प्रशासनिक अधिकारी  चंदेश्वर पाण्डेय और रंजन कुमार (टीसीपीई झपहां) का विशेष मार्गदर्शन रहा। खेल के ऑफिशियल्स और जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए ‘मेरा युवा भारत’ के स्वयंसेवकों ने अपनी कड़ी मेहनत से कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित किया। सभी विजेताओं और उपविजेताओं को विधायक अजय कुमार द्वारा मेडल, ट्रॉफी और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

बलिराम भगत महाविद्यालय में गूँजी विदाई की सुरीली और भावुक स्वरलहरियाँ

समस्तीपुर, 31 जनवरी 2026: शिक्षा की नगरी समस्तीपुर स्थित बलिराम भगत महाविद्यालय के सभागांर में आज एक ऐतिहासिक विदाई समारोह संपन्न हुआ। अवसर था संस्थान के दो अति-महत्वपूर्ण स्तंभों, विनोद कुमार दास (प्रधान लिपिक) और राम प्रकाश प्रसाद (आशुलिपिक/स्टेनो) के सेवा निवृत्ति का। 30 वर्षों की लंबी और निष्कलंक सेवा के बाद, आज महाविद्यालय परिवार ने उन्हें पूरे मान-सम्मान के साथ विदाई दी।

विदाई समारोह को संबोधित करती हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेहलता कुमारी

भव्य मंच और गरिमामय आयोजन

कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए बैनर पर विदाई सह सम्मान समारोह” अंकित था, जो आयोजन की महत्ता को दर्शा रहा था। मंच पर प्रधानाचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद वैश्यन्त्री के साथ सेवानिवृत्त होने वाले दोनों कर्मी फूलों की बड़ी मालाओं और पारंपरिक टोपी से सुसज्जित होकर बैठे थे।

समारोह की प्रमुख झलकियाँ:

  • कुशल संचालन: हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेहलता कुमारी ने पोडियम से अपनी ओजस्वी वाणी में कार्यक्रम का संचालन किया, जिससे पूरा माहौल भावुक और गरिमापूर्ण बना रहा।
  • अनुभवी दिग्गजों का साथ: मंच पर पूर्व प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. रमेश झा एवं डॉ. रामनारायण राय की उपस्थिति ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। उन्होंने अपने संबोधन में विनोद बाबू (प्रधान लिपिक) और राम प्रकाश जी (स्टेनो) के प्रशासनिक कौशल की जमकर सराहना की।
  • सम्मान का प्रतीक: महाविद्यालय की ओर से सचिव आशुतोष चंद्रमौलि और प्रो. विकास कुमार पटेल ने दोनों कर्मियों को अंग वस्त्र भेंट किए। प्रधानाचार्य ने उन्हें माला पहनाकर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।

सहकर्मियों की शुभकामनाएँ

इस अवसर पर प्रो. अनिल कुमार गुप्ता, प्रो. राजेश कुमार रंजन, और डॉ. स्वीटी कुमारी सहित अन्य प्राध्यापकों ने अपने उद्गार व्यक्त किए। सभी ने एक स्वर में कहा कि प्रधान लिपिक और स्टेनो के रूप में इन दोनों ने महाविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को जो मजबूती दी है, उसे हमेशा याद रखा जाएगा।

विदाई की बेला

समारोह के अंतिम चरण में गोपाल प्रसाद भगत (बड़ा बाबू) ने उपस्थित सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में कल्याण सिंह, अभिषेक आनंद, और सुदामा देवी सहित महाविद्यालय के समस्त कर्मचारी उपस्थित थे। समस्तीपुर के इस प्रतिष्ठित महाविद्यालय के इतिहास में यह दिन इन दोनों समर्पित कर्मियों की कर्तव्यनिष्ठा के लिए सदैव अंकित रहेगा।

बलिराम भगत महाविद्यालय में गूँजे संत रविदास के विचार: ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ के संदेश के साथ मनाई गई जयंती

समस्तीपुर। स्थानीय बलिराम भगत महाविद्यालय के हिंदी स्नात्तकोत्तर विभाग के तत्वावधान में आज संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की जयंती की पूर्व संध्या पर एक भव्य श्रद्धांज़लि सभा एवं विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने सामाजिक समरसता के अग्रदूत संत रविदास को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

पुष्पांजलि से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद वैश्यन्त्री ने की। समारोह का विधिवत शुभारंभ संत रविदास जी महाराज के तैल चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर किया गया। इस दौरान उपस्थित प्राध्यापकों और छात्रों ने बारी-बारी से श्रद्धासुमन अर्पित किए, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय और वैचारिक ऊर्जा से भर उठा।

आज भी प्रासंगिक हैं रविदास के विचार: डॉ. वैश्यन्त्री

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रभारी प्रधानाचार्य डॉ. जगदीश प्रसाद वैश्यन्त्री ने संत रविदास के दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके विचार किसी एक कालखंड के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए हैं। उन्होंने प्रसिद्ध कहावत मन चंगा तो कठौती में गंगा” का संदर्भ देते हुए कहा कि संत रविदास ने कर्म की शुद्धता और मन की पवित्रता को ही सबसे बड़ा धर्म माना था। डॉ. वैश्यन्त्री ने जोर देकर कहा कि आज के दौर में जब समाज विभिन्न विसंगतियों से जूझ रहा है, तब रविदास जी के समतावादी विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।

विद्वान वक्ताओं ने साझा किए विचार

हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. स्नेह लता कुमारी एवं डॉ. संजय प्रसाद के कुशल निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्वानों ने शिरकत की। मौके पर उपस्थित प्रो. राजेश कुमार रंजन, डॉ. हरिनारायण, डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. स्वीटी, डॉ. विंध्याचल साह, प्रो. शकील अहमद, प्रो. विकास पटेल, डॉ. उल्लास टी, डॉ. रेखा, डॉ. सीरिन, डॉ. ज्योति और डॉ. आर. के. मौर्या ने संत रविदास के जीवन संघर्ष और उनकी साखियों पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि रविदास जी ने समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर एक ‘बेगमपुरा’ (दुःख रहित समाज) की कल्पना की थी।

छात्रों ने प्रस्तुत किए समतामूलक समाज पर विचार

कार्यक्रम की खास विशेषता हिंदी विभाग के छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही। ‘समता मूलक समाज के निर्माण में संत रविदास का योगदान’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में ज्योति, अनु, आयुष्मान, सौम्या, रितेश, अभिषेक, रोहित और काजल आदि विद्यार्थियों ने अपने ओजपूर्ण विचार व्यक्त किए। छात्रों ने आधुनिक समाज में जातिगत भेदभाव को मिटाने के लिए रविदास जी की शिक्षाओं को अपनाने पर बल दिया।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर केवल शैक्षणिक जगत ही नहीं, बल्कि शिक्षकेतर कर्मचारियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में आशुतोष, राजा, संजय, राहुल और संजीव देशबंधु सहित अन्य कर्मचारियों ने व्यवस्था संचालन में सहयोग किया और श्रद्धांज़लि अर्पित की।

अंत में, हिंदी विभाग द्वारा सभी उपस्थित अतिथियों और छात्रों का आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और संत रविदास के जयघोष के साथ हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह में सामाजिक एकता का नया संचार किया।

किसान रजिस्ट्री के नाम पर 90% किसानों की छंटनी की साजिश, आंदोलन की सुगबुगाहट: ताजपुर में गरजा किसान महासभा

ताजपुर/समस्तीपुर | 1 फरवरी 2026

बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड अंतर्गत मोतीपुर में किसानों का आक्रोश फूट पड़ा है। किसान रजिस्ट्री की पेचीदगियों, वंशावली की अनिवार्यता, खाद की किल्लत और सरकार की कथित ‘किसान विरोधी’ नीतियों के खिलाफ अखिल भारतीय किसान महासभा ने शंखनाद कर दिया है। रविवार को मोतीपुर वार्ड संख्या 26 में आयोजित जुलूस और सभा ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिन सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।


पंजीकरण नहीं, यह तो किसानों को बेदखल करने का डिजिटल जालहै

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव ललन कुमार ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसान रजिस्ट्रेशन के नाम पर जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वह वास्तव में किसानों को सरकारी लाभों से वंचित करने की एक गहरी साजिश है।

ललन कुमार ने  दावा करते हुए कहा कि, “आज किसान पंजीकरण के नाम पर जो धांधली हो रही है, उसमें 90 प्रतिशत किसान छंटनी की कगार पर हैं“। उन्होंने विस्तार से बताया कि जो किसान पीढ़ियों से अपनी भूमि जोत रहे हैं और जिनके पास पुस्तैनी जमीन है, उन्हें भी तकनीकी आधार पर रजिस्ट्रेशन से बाहर किया जा रहा है। यदि यह पंजीकरण सफल नहीं होता है, तो किसानों को भविष्य में न तो उचित दर पर खाद मिलेगी, न ही बीज और न ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ। उन्होंने इसे केंद्र और राज्य सरकार की मिलीजुली साजिश करार दिया।


खाद की कीमतों पर चोरी और सीनाजोरीका आरोप

महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में आर्थिक आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों की आंखों में धूल झोंक रही है। उन्होंने कहा, “पहले 45 किलो यूरिया की बोरी 266.50 रुपये में मिलती थी, लेकिन अब मोदी सरकार ने चालाकी से वजन घटाकर इसे 40 किलो कर दिया है और कीमत 254 रुपये तय की है”। यह सीधे तौर पर किसानों की जेब पर डाका डालने जैसा है।

इसके साथ ही, वक्ताओं ने क्षेत्र में खाद की भारी कालाबाजारी पर भी चिंता व्यक्त की और इसे तत्काल बंद करने की मांग की,


तकनीकी खामियां और जमाबंदी का पेच

भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रशासन के समक्ष व्यावहारिक सुझाव और मांग रखते हुए कहा कि किसान रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू करने से पहले सरकार को अपने बुनियादी रिकॉर्ड दुरुस्त करने चाहिए। उन्होंने मांग की कि राजस्व महाअभियान के तहत सबसे पहले जमाबंदी पंजी में सुधार किया जाए और प्रत्येक भूखंड का खाता-खेसरा स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए। जब तक राजस्व रिकॉर्ड अपडेट नहीं होंगे, तब तक वास्तविक किसानों का पंजीकरण होना असंभव है और वे बिचौलियों के हत्थे चढ़ते रहेंगे।


आंदोलन की प्रमुख मांगें एक नजर में:

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने एक स्वर में निम्नलिखित मांगों को बुलंद किया:

  • वंशावली का समावेश: किसान रजिस्ट्री में वंशावली को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए ताकि पुश्तैनी किसानों को दिक्कत न हो।
  • MSP की गारंटी: सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा देकर लागू किया जाए।
  • कर्ज मुक्ति: किसानों का केसीसी (KCC) लोन पूर्णतः माफ किया जाए।
  • संस्थानों की बहाली: मनरेगा को कृषि कार्य से जोड़ते हुए पुनर्बहाल किया जाए और बंद पड़ी बाजार समितियों को फिर से चालू किया जाए।
  • अधिग्रहण पर रोक: कृषि योग्य भूमि का गैर-जरूरी अधिग्रहण तत्काल बंद हो।

अगला पड़ाव: प्रखंड से विधानसभा तक घेराव

मोतीपुर की गलियों से निकले इस जुलूस ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दे दी है। सभा के अंत में आंदोलन की आगामी रूपरेखा की घोषणा की गई:

  1. 9 फरवरी 2026: मांगों के समर्थन में ताजपुर प्रखंड मुख्यालय का ऐतिहासिक घेराव किया जाएगा।
  2. 23 फरवरी 2026: आंदोलन का रुख राजधानी की ओर होगा, जहाँ किसान अपनी मांगों को लेकर बिहार विधानसभा का घेराव करेंगे।

सभा में राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर सिंह, ललन दास, अनील सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, मोती लाल सिंह, दिनेश प्रसाद सिंह, संजीव राय, मुंशीलाल राय और धर्मेंद्र राय सहित सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया और संकल्प लिया कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, संघर्ष जारी रहेगा।

UGC गाइडलाइंस पर रोक के खिलाफ समस्तीपुर में छात्र-युवाओं का महासंग्राम; ‘रोहित एक्ट’ लागू करने की उठी मांग

समस्तीपुर। उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता सुनिश्चित करने और भेदभाव को मिटाने के उद्देश्य से प्रस्तावित UGC गाइडलाइंस 2026 पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद पूरे देश में विरोध की लहर दौड़ पड़ी है। इसी कड़ी में आइसा (AISA) और आरवाईए (RYA) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शनिवार को समस्तीपुर की सड़कों पर छात्र-युवाओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। भारी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और न्यायपालिका के इस रुख को सामाजिक न्याय पर हमला करार दिया。

पटेल मैदान से शुरू हुआ आक्रोश मार्च

दोपहर करीब 12:30 बजे समस्तीपुर के ऐतिहासिक पटेल मैदान गोलंबर पर छात्र और युवा कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ा。 हाथों में लाल झंडे और विरोध की तख्तियां लिए यह ‘अखिल भारतीय प्रतिवाद मार्च’ शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ अनुमंडल कार्यालय तक पहुँचा। कार्यकर्ताओं ने जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा के समक्ष अपनी मांगों को बुलंद किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की。

संस्थानों में बढ़ता भेदभाव और सरकार की मंशा

प्रदर्शन के दौरान मुख्य बैनर पर डॉ. बी.आर. अंबेडकर और शहीद छात्र रोहित वेमुला के चित्र अंकित थे。 बैनर पर लिखे संदेश— “अत्याचार अधिकार नहीं है! समानता की मांग करना प्रतिशोध नहीं है!”—ने स्पष्ट कर दिया कि छात्र अब परिसरों में बढ़ते जातीय और मानसिक उत्पीड़न को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं。 उनकी मांग है कि रोहित एक्ट की तर्ज पर ही यूजीसी की गाइडलाइंस को सख्ती से लागू किया जाए ताकि किसी और छात्र को भेदभाव के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े。

“चोर दरवाजे से अधिकार छीन रही है भाजपा” : गौतम

सभा को संबोधित करते हुए आइसा जिला कमेटी के नेता गौतम ने बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “यूजीसी एक्ट 1956 के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने (Promotion of Equity) के लिए जो बिल लाया गया था, वह वंचित वर्गों के छात्रों के लिए सुरक्षा कवच था。 इसमें एक ‘असमानता समिति’ (Inequality Committee) के गठन का प्रावधान था, जो जाति, धर्म या लिंग के आधार पर होने वाले किसी भी भेदभाव की निष्पक्ष जांच करती और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करती”。

गौतम ने आगे कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा नीत एनडीए सरकार ने इस महत्वपूर्ण कानून पर संसद में खुली बहस करने के बजाय, चोर दरवाजे से याचिकाएं दायर करवाकर इस पर रोक लगवा दी है। सरकार का ‘सबका साथ-सबका विकास’ का नारा केवल एक चुनावी ढकोसला है। असल में यह सरकार धार्मिक उन्माद फैलाकर केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहती है और युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रही है”

आर-पार की लड़ाई का एलान

प्रतिवाद मार्च के समापन पर वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यह केवल एक शुरुआत है। यदि यूजीसी की उन गाइडलाइंस को बहाल नहीं किया गया जो दलित, पिछड़ो और अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करती हैं, तो यह आंदोलन केवल समस्तीपुर तक सीमित नहीं रहेगा。 आइसा, आरवाईए, भाकपा माले और तमाम बहुजन संगठन एकजुट होकर दिल्ली की सत्ता को चुनौती देंगे。

प्रदर्शन में छात्र नेताओं ने साफ़ कहा कि परिसरों का “भगवाकरण” और शिक्षा का “निजीकरण” करके सरकार गरीबों के बच्चों को उच्च शिक्षा से बाहर करना चाहती है। मार्च में बड़ी संख्या में छात्र प्रतिनिधि, स्थानीय युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे, जिन्होंने एक सुर में सामाजिक समानता के कानून को लागू करने की मांग की。

एमडीडीएम कॉलेज में पोस्टर प्रतियोगिता: छात्राओं ने सूक्ष्मजीवों की अद्भुत दुनिया को कैनवास पर उतारा

मुजफ्फरपुर | निज प्रतिनिधि एमडीडीएम कॉलेज के इंडस्ट्रियल माइक्रोबायोलॉजी विभाग (व्यावसायिक पाठ्यक्रम) में शनिवार को ‘सूक्ष्मजीवों का दैनिक जीवन में महत्व’ विषय पर एक भव्य पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने किया।

तकनीक और विज्ञान का संगम

प्रतियोगिता के दौरान छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता के जरिए यह दिखाया कि कैसे सूक्ष्मजीव हमारे जीवन को बेहतर बना रहे हैं। छात्राओं ने पर्सनलाइज्ड मेडिसिन, बायोसेंसर, बायोफ्यूल, डीएनए वैक्सीन, जीन थेरेपी और जीएमओ (GMO) जैसे जटिल विषयों को पोस्टरों के माध्यम से बेहद सरलता से समझाया। उन्होंने इन क्षेत्रों में हो रही नई खोजों और सूक्ष्मजीवों के अपरिहार्य योगदान पर भी प्रकाश डाला।

विजेता प्रतिभागी

प्रतियोगिता में छात्राओं के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। परिणामों का विवरण इस प्रकार है:

  • प्रथम स्थान: सिमरन, तनवीशा और रक्षंदा।
  • द्वितीय स्थान: करिश्मा और प्रेरणा।
  • तृतीय स्थान: माहविस, वजह और अलका।

इन्होंने बढ़ाया छात्राओं का उत्साह

प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने छात्राओं के नवाचार की प्रशंसा करते हुए उनका मार्गदर्शन किया। इससे पूर्व, वनस्पति विभागाध्यक्ष सह पाठ्यक्रम समन्वयिका डॉ. श्वेता यादव ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन विभागीय शिक्षक रौशन कुमार और आशीष कुमार के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर डॉ. स्मिता, डॉ. अर्चना गुप्ता, डॉ. माला, डॉ. सरिता पॉल, डॉ. नवनीता कुमारी, हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र और मीडिया प्रभारी डॉ. राकेश रंजन सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे। प्रतियोगिता में जानवी, हबीबा, शुभी, गीतांजलि, तबिंदा, सोहना, आयुषी, पुष्पा, शिल्पा, अमृता, काजल, सलोनी, जोया, सौम्या, फरहत, निकिता और अंकिता जैसी छात्राओं ने भी सराहनीय प्रदर्शन किया।