Thursday, July 30, 2026

लुटेरे स्कूलों पर आयुक्त का ‘हंटर’: अब पाई-पाई का देना होगा हिसाब, मनमानी फीस वसूली तो खैर नहीं!

विशेष रिपोर्ट: मुजफ्फरपुर ब्यूरो

मुजफ्फरपुर। तिरहुत प्रमंडल के निजी स्कूलों में शिक्षा के नाम पर चल रहे ‘मुनाफाखोरी के धंधे’ और अभिभावकों की जेब पर पड़ने वाले डाके को रोकने के लिए प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने निर्णायक युद्ध का ऐलान कर दिया है। आयुक्त ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक पत्र जारी करते हुए प्रमंडल के सभी जिलाधिकारियों (DM) और जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब स्कूलों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन के इस ‘एक्शन मोड’ में आने से शिक्षा माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

तस्‍वीर में तिरहुत प्रमंडल प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह

15 अप्रैल की डेडलाइन‘: हर स्कूल की कुंडली खंगालेगा प्रशासन

आयुक्त ने इस लड़ाई को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसके लिए समय-सीमा (Deadline) भी तय कर दी है। उन्होंने सभी DEO को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्कूलों का औचक निरीक्षण करें और 15 अप्रैल तक विस्तृत प्रतिवेदन (Report) क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक के माध्यम से आयुक्त कार्यालय को सौंपें। इस रिपोर्ट में स्कूलों की फीस संरचना, पिछले साल हुई वृद्धि का प्रतिशत और प्राप्त शिकायतों पर की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा होगा।

अधिनियम 2019 का ब्रह्मास्त्र‘: 7% से ज्यादा बढ़ाना कानूनन जुर्म

आयुक्त ने चेतावनी दी है कि बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2019′ का पालन करना हर निजी स्कूल के लिए अनिवार्य है। अधिनियम के मुख्य प्रावधान अब स्कूलों के लिए गले की फांस बनेंगे:

  • 7% की लक्ष्मण रेखा: कोई भी विद्यालय एक शैक्षणिक सत्र में 7 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकता। यदि इससे अधिक वृद्धि करनी है, तो सत्र शुरू होने से 3 माह पूर्व आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति से अनुमति लेनी होगी।
  • वेबसाइट पर पारदर्शिता: स्कूलों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट और सूचना पट्ट (Notice Board) पर एडमिशन फीस, मासिक शुल्क, विकास शुल्क और अन्य सभी शुल्कों का विस्तृत विवरण (Breakdown) देना होगा।
  • गुप्त शुल्कों पर पाबंदी: ‘हिडन चार्जेस’ के नाम पर अभिभावकों को लूटने वाले स्कूलों पर सीधे ‘क्रिमिनल केस’ जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

किताब-यूनिफॉर्म के कमीशन के खेलपर बड़ा प्रहार

अक्सर देखा जाता है कि स्कूल किसी खास दुकान से ही किताब, कॉपी और ड्रेस खरीदने का दबाव बनाते हैं, जहाँ भारी कमीशनखोरी होती है। आयुक्त ने इस पर पूर्ण विराम लगा दिया है:

  • अभिभावकों को आजादी: अब अभिभावक अपनी पसंद की किसी भी दुकान से शैक्षिक सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं।
  • बाध्य किया तो खैर नहीं: यदि किसी स्कूल ने किसी विशेष वेंडर का दबाव बनाया, तो उसकी शिकायत मिलने पर तुरंत कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

विशेष कॉलम: सशक्त शिकायत निवारण तंत्र‘ (Grievance Redressal Mechanism)

अभिभावकों की सबसे बड़ी समस्या यह थी कि वे अपनी शिकायत लेकर कहाँ जाएं। आयुक्त ने अब एक त्रि-स्तरीय मजबूत व्यवस्था को जमीन पर उतार दिया है:

1. जिला स्तरीय शिकायत निवारण सेल‘: प्रत्येक जिले में एक विशेष ‘सेल’ का गठन किया गया है। अभिभावक अपनी लिखित शिकायत सीधे जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) के कार्यालय में दे सकते हैं। आयुक्त ने इन सेल को ‘एक्टिव’ रहने और प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई का आदेश दिया है।

2. क्षेत्रीय शुल्क विनियमन समिति (Regional Committee): यह प्रमंडल स्तर की सबसे पावरफुल बॉडी है, जिसकी अध्यक्षता स्वयं प्रमंडलीय आयुक्त करते हैं। इसके पास सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां हैं।

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर में बढती फीस और किताब का दाम से परेशान अभिभावक और विद्यालय के काउन्‍टर से किताब खरीदने को बाध्‍य  
  • जांच का अधिकार: यह समिति किसी भी स्कूल के बैंक खातों, ऑडिट रिपोर्ट और बैलेंस शीट की जांच कर सकती है।
  • सुनवाई का अवसर: निर्णय लेने से पहले यह समिति स्कूल प्रबंधन और पीड़ित अभिभावक, दोनों का पक्ष सुनती है।

3. दंडात्मक कार्रवाई और वसूली (Penalties): यदि शिकायत सही पाई गई, तो यह तंत्र निम्नलिखित सजा दे सकता है:

  • फीस रिफंड: स्कूल को आदेश दिया जाएगा कि वह वसूली गई अतिरिक्त राशि तुरंत अभिभावकों को वापस (Refund) करे या अगले महीनों की फीस में एडजस्ट (Adjust) करे।
  • मान्यता रद्द करना: बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने के लिए संबंधित बोर्ड (CBSE/ICSE/Bihar Board) को अनुशंसा भेजी जाएगी।
  • भारी आर्थिक जुर्माना: पहली बार दोषी पाए जाने पर लाखों का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

शिक्षा सेवा है, व्यापार नहीं”: आयुक्त की दो टूक

प्रमंडलीय कार्यालय से जारी पत्र में साफ कहा गया है कि बिहार में निजी विद्यालय गैर-लाभकारी संस्थाओं‘ (Non-profit entities) के रूप में संचालित होते हैं। स्कूल से होने वाली आय का उपयोग मालिक की व्यक्तिगत विलासिता के लिए नहीं किया जा सकता। इस राशि को केवल स्कूल के विकास, शिक्षकों के प्रशिक्षण और छात्रों की सुविधाओं पर ही खर्च करना होगा।

अभिभावकों में जगी उम्मीद की किरण

आयुक्त के इस कड़े रुख से मुजफ्फरपुर सहित पूरे तिरहुत प्रमंडल के लाखों अभिभावकों में खुशी की लहर है। ‘अभिभावक संघ’ का कहना है कि यह पहली बार है जब प्रशासन ने इतनी बारीकी और सख्ती के साथ स्कूलों की ‘लूट-तंत्र’ पर प्रहार किया है। यदि 15 अप्रैल तक सही मायने में निरीक्षण हो जाता है, तो मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी कम हो जाएगा।

प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने अपनी कलम से शिक्षा के बाजारीकरण के खिलाफ जो ‘हंटर’ चलाया है, उसने भ्रष्ट स्कूल प्रबंधनों की चूलें हिला दी हैं। अब समय है कि जिला स्तर के अधिकारी भ्रष्टाचार मुक्त होकर इस आदेश को लागू करें ताकि शिक्षा की पवित्रता बनी रहे और अभिभावक राहत की सांस ले सकें।


बड़ी बातें:

  • 15 अप्रैल तक सभी DEO को देनी है रिपोर्ट।
  • मनमाने ढंग से बढ़ी फीस होगी वापस।
  • किसी भी दुकान से सामान खरीदने को स्वतंत्र होंगे अभिभावक।
  • वेबसाइट पर फीस सार्वजनिक न करने वाले स्कूलों पर होगी एफआईआर (FIR)

बलिदान दिवस के रूप में मनाई गई अमर शहीद मंगल पांडे की पुण्यतिथि, वक्ताओं ने दी विनम्र श्रद्धांजलि

सकरा (मुजफ्फरपुर): स्वाधीनता संग्राम की प्रथम चिंगारी सुलगाने वाले अमर शहीद मंगल पांडे की पुण्यतिथि आज सकरा हाई स्कूल के समीप स्थित शहीद यादगार समिति के बैनर तले सोहन लाल आजाद के आवास पर ‘बलिदान दिवस’ के रूप में संकल्पबद्ध होकर मनाई गई। कार्यक्रम में स्थानीय प्रबुद्ध जनों, शिक्षकों और युवाओं ने शहीद के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर वक्ताओं ने 1857 की क्रांति के नायक मंगल पांडे के त्याग और बलिदान को याद करते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया।

स्वतंत्रता संग्राम के नायक को नमन

कार्यक्रम के संयोजक सोहन लाल आजाद ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि 8 अप्रैल, 1857 का वह दिन भारतीय इतिहास में एक अमिट अध्याय है, जब बैरकपुर (पश्चिम बंगाल) में मंगल पांडे ने मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उन्होंने कहा कि उनके बलिदान ने ही पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता की अलख जगाई थी।

वक्ताओं के विचार: राष्ट्र के प्रति समर्पण का आह्वान

विशिष्ट वक्ता राजेश कुमार का संबोधन: “अमर शहीद मंगल पांडे का बलिदान केवल एक घटना नहीं, बल्कि भारतीय स्वाभिमान की पुनर्स्थापना थी। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अदम्य साहस दिखाते हुए अंग्रेजी शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध जो बिगुल फूंका, वह आज भी करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आज के समय में देश को उन मूल्यों की अत्यंत आवश्यकता है जिनके लिए मंगल पांडे ने अपना सर्वस्व त्याग दिया। उनकी वीरता हमें सिखाती है कि अन्याय और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाना ही सच्चा धर्म है। हम सबको मिलकर राष्ट्र की सेवा में अपना योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए।”

पूर्व शिक्षक मदन बैठा ने संबोधित करते हुय कहा कि  “एक शिक्षक के तौर पर मेरा मानना है कि आज की युवा पीढ़ी को मंगल पांडे जैसे महापुरुषों की जीवनी से शिक्षा लेनी चाहिए। उन्होंने अपना जीवन देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया और फाँसी के फंदे को सहर्ष स्वीकार किया। मदन बैठा ने कहा कि शिक्षा का सही अर्थ केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि देश के गौरवशाली इतिहास को जानना और उसे आत्मसात करना है। हमें अपने बच्चों को यह बताना चाहिए कि आज हम जो खुली हवा में सांस ले रहे हैं, वह मंगल पांडे जैसे अनेकों शहीदों के लहू की देन है। उनका जीवन राष्ट्रभक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण है।”

समारोह में इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में धर्मवीर कुमार, धर्मेंद्र कुमार, आयुषी भारती, सोनम कुमारी, भावना भारती, और लक्ष्मण कुमार सहित अन्य स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में ‘भारत माता की जय’ और ‘अमर शहीद मंगल पांडे अमर रहें’ के नारों के साथ वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।

अक्षय तृतीया पर बाल विवाह के विरुद्ध  हुंकार, स्कूली बच्चों ने लिया कुरीति मिटाने का संकल्प

08 अप्रैल, 2026 |समस्तीपुर |  :अक्षय तृतीया के अवसर पर होने वाले बाल विवाह की रोकथाम के लिए बुधवार को जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के नेतृत्व में एक व्यापक जन जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बिशनपुर बांदे स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम को महिला एवं बाल विकास निगम तथा जिला प्रशासन, समस्तीपुर के साझा सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

सखी वार्ताके माध्यम से अधिकारों की जानकारी

कार्यक्रम के दौरान महिला एवं बाल विकास निगम के डी.एम.सी. गौरव कुमार, जी.एस. राजेश कुमार एवं डॉली कुमारी ने छात्र-छात्राओं के बीच सखी वार्ता” का आयोजन किया। इस विशेष सत्र में बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अक्षय तृतीया जैसे अबूझ सावे पर अक्सर बाल विवाह के मामले बढ़ जाते हैं, जिसे रोकने के लिए समाज का सतर्क होना अनिवार्य है।

विशेषज्ञों ने दी कानूनी जानकारी

जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र की टीम ने बच्चों को उनके संवैधानिक अधिकारों से रूबरू कराया।

  • दीप्ती कुमारी (जिला कार्यक्रम समन्वयक) और विभा कुमारी (सामुदायिक सामाजिक कार्यकर्ता) ने बाल विवाह के शारीरिक व मानसिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला।
  • रवि कुमार मिश्रा (प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर) एवं पप्पु यादव (अकाउंट ऑफिसर) ने पॉक्‍सो  एक्‍ट , बाल श्रम और बाल अधिकार जैसे गंभीर विषयों पर छात्रों को जागरूक किया ताकि वे किसी भी शोषण के खिलाफ आवाज उठा सकें।

“शिक्षा ही वह अस्त्र है जिससे बाल विवाह जैसी कुरीतियों को जड़ से मिटाया जा सकता है।” — पंकज कुमार, प्रधानाध्यापक

समाज में बदलाव की मुहिम

विद्यालय के शिक्षक सत्या प्रकाश ने भी बच्चों को शिक्षा के महत्व के प्रति प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने एक सुर में बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के इस प्रयास को स्थानीय ग्रामीणों और जिला प्रशासन ने समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत: अब समय पर सेवा नहीं मिली तो अधिकारियों पर लगेगा भारी जुर्माना

पटना। बिहार सरकार ने राज्य की बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में अब बिजली सेवाओं में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों पर जुर्माने का प्रावधान लागू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को समय पर सुविधाएं मुहैया कराना और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाना है।

तय समय में कनेक्शन देना अब अनिवार्य

नए नियमों के तहत अब बिजली कनेक्शन के लिए समय-सीमा निर्धारित कर दी गई है। यदि इस अवधि के भीतर कनेक्शन नहीं दिया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। समय-सीमा का विवरण इस प्रकार है:

  • महानगर/मुख्य शहर: 3 दिन के भीतर।
  • अन्य शहरी क्षेत्र: 7 दिन के भीतर।
  • ग्रामीण क्षेत्र: अधिकतम 15 दिन के भीतर।

देरी होने पर ₹1000 तक का प्रतिदिन जुर्माना

उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करते हुए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवा प्रदान नहीं की जाती है, तो दोषी अधिकारियों पर ₹1000 तक का रोजाना जुर्माना लगाया जा सकता है। यह कदम न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगा बल्कि विभाग में ‘काम टालने’ की प्रवृत्ति को भी खत्म करेगा।

जवाबदेही से बढ़ेगी पारदर्शिता

इस पहल से बिहार का बिजली क्षेत्र अब ‘जवाबदेही के साथ सुधार’ की ओर अग्रसर है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से:

  1. उपभोक्ताओं को अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
  2. सेवाओं में तेजी आएगी और काम समय पर पूरा होगा।
  3. व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे आम जनता का भरोसा विभाग पर मजबूत होगा।

गर्मी की छुट्टियों में रेल यात्रियों को बड़ी राहत: बरौनी, मुजफ्फरपुर और दानापुर से चलेंगी समर स्पेशल ट्रेनें

पटना-राजगीर के बीच नई ट्रेन सेवा शुरू, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

पटना/हाजीपुर। भीषण गर्मी और छुट्टियों के दौरान ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ को देखते हुए पूर्व मध्य रेल (ECR) ने यात्रियों के लिए विशेष सुविधाओं का ऐलान किया है। रेलवे द्वारा बरौनी, मुजफ्फरपुर और दानापुर जैसे प्रमुख स्टेशनों से कई ‘समर स्पेशल’ ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही, राजधानी पटना से पर्यटकों के पसंदीदा स्थल राजगीर के लिए एक नई ट्रेन सेवा की भी शुरुआत की गई है।

समर स्पेशल ट्रेनों का विवरण

रेलवे प्रशासन के अनुसार, यात्रियों की सुविधा के लिए निम्नलिखित विशेष गाड़ियाँ चलाई जा रही हैं:

गाड़ी संख्याकहाँ से – कहाँ तकपरिचालन अवधिदिनफेरे
04610/09अमृतसर—बरौनी—अमृतसर19.04.26 से 14.07.26रवि, मंगल13
04314/13ऋषिकेश—मुजफ्फरपुर—ऋषिकेश16.04.26 से 13.07.26गुरु, रवि, शुक्र, सोम26
04813/14भगत की कोठी—दानापुर—भगत की कोठी08.04.26 से 16.07.26बुध, गुरु15

नोट: इन ट्रेनों के चलने से पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान जाने वाले यात्रियों को बर्थ की उपलब्धता में आसानी होगी।

पटना-राजगीर नई ट्रेन: पर्यटन को लगेंगे पंख

पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेलवे ने 13354/13353 पटनाराजगीरपटना एक्सप्रेस की शुरुआत की है। यह ट्रेन प्रतिदिन चलेगी, जिससे नालंदा और राजगीर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को काफी सहूलियत होगी।

प्रमुख समय सारणी (गाड़ी संख्या 13354):

  • पटना जंक्शन प्रस्थान: सुबह 09:20 बजे
  • बिहार शरीफ आगमन: सुबह 11:17 बजे
  • राजगीर आगमन: दोपहर 12:45 बजे

वापसी में गाड़ी संख्या 13353 राजगीर से दोपहर 15:10 बजे खुलकर शाम 19:05 बजे पटना पहुँचेगी। यह ट्रेन मार्ग में राजेंद्र नगर, गुलजारबाग, पटना साहिब, फतुहा, बख्तियारपुर, और नालंदा जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकेगी।

मुख्य लाभ:

  • पर्यटन विकास: राजगीर और नालंदा के ऐतिहासिक स्थलों तक पहुँचना अब और भी आसान होगा।
  • दैनिक यात्रियों को सुविधा: पटना और बिहार शरीफ के बीच काम करने वाले लोगों के लिए यह एक बेहतर विकल्प है।
  • आसान बुकिंग: यात्री इन ट्रेनों की विस्तृत जानकारी www.enquiry.indianrail.gov.in या NTES APP के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्य यात्री परिचालन प्रबंधक (पूरे/हाजीपुर) ने बताया कि इन ट्रेनों के परिचालन से न केवल भीड़ कम होगी, बल्कि यात्रियों का सफर भी सुरक्षित और सुखद बनेगा।

मधेपुरा: 7 हजार घूस लेते दारोगा गिरफ्तार, निगरानी ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई

मधेपुरा/पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार को ब्यूरो की टीम ने मधेपुरा जिले के पुरैनी थाना में तैनात पुलिस अवर निरीक्षक (SI) अनिल कुमार सिंह को 7,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।

जांच रिपोर्ट के बदले मांगी थी रकम

जानकारी के अनुसार, परिवादी बशिष्ठ कुमार विश्वकर्मा ने निगरानी ब्यूरो के पटना कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि दारोगा अनिल कुमार सिंह, अनुमंडल दंडाधिकारी (उदकिशुनगंज) के न्यायालय में लंबित एक विविध वाद (संख्या 53/25) की जांच रिपोर्ट अदालत में समर्पित करने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे थे।

निगरानी की टीम ने बिछाया जाल

ब्यूरो द्वारा शिकायत के सत्यापन में मामला सही पाए जाने के बाद पुलिस उपाध्यक्ष आसिफ इकबाल मेहदी के नेतृत्व में एक विशेष ‘धावादल’ (ट्रैप टीम) का गठन किया गया। मंगलवार को जैसे ही दारोगा ने पुरैनी बाजार में परिवादी से 7,000 रुपये लिए, पहले से घात लगाकर बैठी निगरानी की टीम ने उन्हें दबोच लिया।

आगे की कार्रवाई

गिरफ्तारी के बाद आरोपी दारोगा को टीम अपने साथ लेकर पटना रवाना हो गई। पूछताछ के बाद आरोपी को भागलपुर स्थित निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा। इस कार्रवाई से जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

एमडीडीएम कॉलेज में लगी ‘सेहत की क्लास’, हाई-टेक जाँच शिविर में छात्राओं ने जानी अपनी फिटनेस का राज!

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर संगोष्ठी और स्वास्थ्य शिविर का हुआ आयोजन; छात्राओं ने नाटक के जरिए दी मानसिक स्वास्थ्य और एनीमिया से लड़ने की सीख

मुजफ्फरपुर, 07 अप्रैल 2026: महंत दर्शन दास महिला (एमडीडीएम) कॉलेज के परिसर में आज का दिन विज्ञान और सेहत के नाम रहा। विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य स्वास्थ्य संगोष्ठी “टुगेदर फॉर हेल्थ, स्टैंड विद साइंस”” ने छात्राओं को न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया, बल्कि उन्हें अपनी फिटनेस का राज जानने का भी अवसर दिया।

विशेषज्ञों ने खोला हेल्थ सीक्रेट्सका पिटारा

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने कहा कि स्वस्थ भविष्य के लिए विज्ञान पर आधारित जीवनशैली अपनाना अनिवार्य है। संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में पटना के CNS हॉस्पिटल की मुख्य आहार विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी श्रेष्ठ और नेस्टिवा हॉस्पिटल की सीईओ ने शिरकत की। डॉ. श्रेष्ठ ने छात्राओं को संतुलित आहार के महत्व और जंक फूड से बचने के वैज्ञानिक उपाय बताए। वहीं, एनएमसीएच पटना के सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. दीपक ने महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी आम समस्याओं पर खुलकर चर्चा की।

हाई-टेक जाँच शिविर में उमड़ी भीड़

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नेस्टिवा हॉस्पिटल के सहयोग से लगाया गया हेल्थ चेकअप कैंप रहा। यहाँ छात्राओं के लिए सामान्य जाँचों से आगे बढ़कर विटामिन B12​ और विटामिन D जैसी महत्वपूर्ण जाँचें की गईं। इसके साथ ही ब्लड शुगर, बीएमआई (BMI) मापन और ब्लड ग्रुप की जाँच के बाद विशेषज्ञों ने प्रत्येक छात्रा को उनकी शारीरिक रिपोर्ट के आधार पर ‘पर्सनलाइज्ड डाइट चार्ट’ भी प्रदान किया। छात्राओं के लिए यह शिविर अपनी सेहत की वास्तविक स्थिति जानने का एक बेहतरीन जरिया साबित हुआ।

मंच से दी सेहत की सीख

कॉलेज की छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से स्वास्थ्य के गंभीर विषयों को सरल भाषा में समझाया:

  • जागरूकता का मंच: प्रथम वर्ष की छात्राओं ने अपने प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति से मानसिक स्वास्थ्य के प्रति चुप्पी तोड़ने का आह्वान किया।
  • एनीमिया पर प्रहार: द्वितीय वर्ष की छात्राओं ने एनीमिया (खून की कमी) के कारणों और बचाव पर आधारित नाटक प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

प्रतियोगिताओं में दिखा छात्राओं का जोश

आयोजन के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया:

  • पोस्टर प्रतियोगिता: सुकन्या कुमारी (प्रथम), सर्वाधि कुमारी (द्वितीय) और नैंसी प्रिया (तृतीय) ने बाजी मारी।
  • क्विज प्रतियोगिता: अपनी बुद्धिमत्ता और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का प्रदर्शन करते हुए तृतीय वर्ष की छात्राओं ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम का सफल मंच संचालन निशि रानी द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरी संगोष्ठी को बेहद व्यवस्थित और आकर्षक बनाए रखा। इस आयोजन को सफल बनाने में सीएनडी (CND) विभाग की कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. सरिता कुमारी के साथ कॉलेज के शिक्षक-शिक्षिकाओं और शिक्षकेतर कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा।

यूूूपी-मुंबई भूल जाइए! अब बिहार बनेगा फिल्मकारों का नया अड्डा, सरकार देगी ₹4 करोड़ तक की मदद

फिल्म शूटिंग का नया हब बन रहा है बिहार: मुख्यमंत्री की नीति से 45 प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

पटना। बिहार अब देश में फिल्म निर्माण के एक उभरते हुए केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बना रहा है। राज्य सरकार की ‘बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति 2024’ का असर अब धरातल पर दिखने लगा है, जिससे प्रभावित होकर बड़े फिल्म निर्माता अब मुंबई और उत्तर प्रदेश के बजाय बिहार का रुख कर रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इस दूरदर्शी नीति के तहत राज्य में एक साथ 45 फिल्मों और प्रोजेक्ट्स की शूटिंग को मंजूरी दी गई है।

कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की बड़ी पहल

बिहार में फिल्म सिटी और फिल्म निर्माण से संबंधित कार्यों के लिए कला, संस्कृति एवं युवा विभाग मुख्य जिम्मेदारी निभा रहा है। विभाग के अंतर्गत बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम (BSFDFC) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। यह निगम फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने, शूटिंग की अनुमति देने और नई फिल्म नीति को लागू करने का कार्य देख रही है।

फिल्मकारों के लिए बड़े अवसर (वर्गीकरण और लोकेशन्स)

राज्य में फिल्म निर्माण को लेकर एक सकारात्मक माहौल तैयार हो रहा है। वर्ष 2024 से 2026 के बीच जिन 45 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है, उनमें भाषाई और क्षेत्रीय विविधता का विशेष ध्यान रखा गया है:

  • फिल्मों का गणित: इसमें 22 हिंदी, 19 भोजपुरी, 1 मगही, 1 अंग्रेजी-भोजपुरी और 1 हिंदी-मैथिली फिल्म शामिल है।
  • प्रोजेक्ट्स के प्रकार: कुल प्रोजेक्ट्स में 38 फीचर फिल्में, 6 डॉक्यूमेंट्री और 1 वेब सीरीज शामिल हैं।
  • प्रमुख शूटिंग लोकेशन्स: राजगीर, बोधगया, पटना, मुंगेर और चंपारण जैसे ऐतिहासिक स्थल फिल्मकारों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

फिल्मकारों पर बरसेंगे करोड़ों रुपये (अनुदान के मुख्य बिंदु)

नई नीति के तहत सरकार फिल्म निर्माताओं को भारी वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है:

  • फीचर फिल्म: राज्य में शूटिंग करने पर ₹4 करोड़ तक का अधिकतम अनुदान दिया जा रहा है।
  • क्षेत्रीय फिल्में: भोजपुरी, मैथिली, मगही, अंगिका और बज्जिका जैसी फिल्मों के लिए निर्माण लागत का 50% तक अनुदान मिल सकता है।
  • वेब सीरीज और टीवी शो: वेब सीरीज के लिए ₹3 करोड़ तक और टीवी धारावाहिकों के लिए ₹1 करोड़ तक की सब्सिडी का प्रावधान है।
  • वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री): बिहार की विरासत और संस्कृति पर आधारित डॉक्यूमेंट्री के लिए ₹30 लाख तक की मदद दी जा रही है।

राजगीर में ‘फिल्म सिटी’ और स्थानीय रोजगार

सरकार राजगीर में अत्याधुनिक फिल्म सिटी के निर्माण की योजना बना रही है, जिसकी देखरेख विभाग द्वारा की जा रही है। इसके साथ ही, यदि निर्माता बिहार के स्थानीय कलाकारों और तकनीशियनों को काम देते हैं, तो उन्हें ₹25 लाख तक की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।

सफलता की ओर बढ़ते कदम

इस नीति का प्रभाव इतना व्यापक है कि जुलाई 2024 से अब तक 39 फिल्मों की शूटिंग सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। इससे न केवल बिहार की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान मिल रही है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी तेजी से सृजित हो रहे हैं।

फिल्म निर्माण या शूटिंग की अनुमति से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए इच्छुक व्यक्ति बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

भाकपा माले का जिला सम्मेलन 18-19 अप्रैल को, डेलीगेट चयन के लिए नामांकन प्रक्रिया संपन्न

ताजपुर/समस्तीपुर | 6 अप्रैल 2026 |  भाकपा माले के आगामी 18-19 अप्रैल को कल्याणपुर के वीरसिंहपुर स्थित चंदा विवाह भवन में आहूत होने वाले जिला सम्मेलन को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सम्मेलन की तैयारियों के तहत डेलीगेट चयन प्रक्रिया के लिए रविवार को नामांकन का कार्य संपन्न हुआ, जिसमें पार्टी के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं समेत कुल 21 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

प्रमुख उम्मीदवारों ने पेश की दावेदारी नामांकन करने वालों में किसान नेता ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, मनोज कुमार सिंह, संजीव राय, ललन दास, मुंशीलाल राय; मजदूर नेता प्रभात रंजन गुप्ता, शंकर महतो; छात्र नेता जीतेंद्र सहनी; युवा नेता मो० एजाज, मो० शाद, मो० क्यूम; फुटपाथी दुकानदार नेता मो० अबुबकर, मनोज साह, मो० गुलाब, मुकेश कुमार गुप्ता; तथा आशा एवं रसोईया संघ की रंजू कुमारी, रेखा कुमारी, सविता सिंह एवं ऐपवा नेत्री सुलेखा कुमारी और नीलम देवी आदि शामिल हैं। ताजपुर स्थित शंकर टॉकीज रोड के फलमंडी स्थित अस्थायी चुनाव कार्यालय में नामांकन के दौरान कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखा गया।

संगठन को मजबूती देने और आंदोलन की रूपरेखा पर होगा मंथन प्रखंड निर्वाचन पदाधिकारी सह प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि यह जिला सम्मेलन संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर गहन विचार-विमर्श करने और आगामी आंदोलनों की रूपरेखा तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में किसान, मजदूर, छात्र और आम जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

शांतिपूर्ण रही नामांकन प्रक्रिया नामांकन प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। जिला पर्यवेक्षक लोकेश राज की उपस्थिति में अब नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जिसके बाद तय प्रक्रिया के तहत डेलीगेट का चुनाव कराया जाएगा। सम्मेलन को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए पार्टी की ओर से विभिन्न स्तरों पर बैठकों का दौर जारी है और कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।

परोरिया में बच्चों के बीच हुआ पोषण सामग्री का वितरण; जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र ने समाज को दिया शिक्षा का संदेश

उजियारपुर (समस्तीपुर): जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, अख्तियारपुर की ओर से उजियारपुर प्रखंड के परोरिया गांव में बच्चों के बीच पोषण सामग्री (ग्लूकोज) का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से संस्था ने बच्चों के पोषण और उनके बेहतर भविष्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

समान समाज के निर्माण का संकल्प संस्था के प्रतिनिधि बलराम चौरसिया ने बताया कि जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र एक समर्पित सामाजिक संस्था है, जो बच्चों की शिक्षा और उनके संरक्षण के लिए निरंतर कार्यरत है। उन्होंने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ सभी को समान अवसर मिलें और हर बच्चा खुशहाल बचपन जी सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्था आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों तक पोषण पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहती है।

शिक्षा से ही संभव है विकास कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए अवकाश प्राप्त पंचायत सचिव रामचंद्र पासवान ने संस्था के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “काफी समय से मेरा आग्रह था कि उजियारपुर क्षेत्र में भी संस्था का सहयोग मिले, जो आज फलीभूत हुआ है।” उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए शिक्षा को विकास की मुख्य कुंजी बताया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुरीतियों से बच्चों को बचाएं और उन्हें स्कूल भेजें, ताकि संस्था का सपना साकार हो सके।

बाल अधिकारों के प्रति किया जागरूक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सह आरपीएफ जवान जितेंद्र कुमार पासवान ने संस्था के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल अधिकार तभी सुरक्षित हो सकते हैं जब बच्चे शिक्षित हों। उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों को बेहतर संस्कार देने और उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन रविन्द्र पासवान ने किया। इस अवसर पर शम्भू पासवान, उत्तम पासवान, लखिन्दर पासवान, राजा कुमार, राहुल रौशन, कामिनी कुमारी, महिन्द्र पासवान, सुबोध कुमार साह, निधि कुमारी और राधा कुमारी सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे।