जनता मैदान के पास आइसा प्रखंड समिति की बैठक में बना मास्टर प्लान, शैक्षणिक अराजकता व फीस वृद्धि के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान
1 अगस्त 2026 :ताजपुर/समस्तीपुर: एलकेवीडी कॉलेज में व्याप्त शैक्षणिक अराजकता और कथित नाजायज उगाही के खिलाफ छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की ताजपुर प्रखंड संयोजन समिति की एक अति-महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को जनता मैदान के समीप आयोजित की गई।
यह बैठक मो जावेद की अध्यक्षता, शिवानी कुमारी के कुशल संचालन तथा आइसा समस्तीपुर जिला कमिटी सदस्य जीतेंद्र सहनी के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुई। बैठक के दौरान क्षेत्र की विभिन्न शैक्षणिक समस्याओं, कॉलेजों में व्याप्त कुव्यवस्था तथा एलकेवीडी कॉलेज में चल रही कथित अवैध वसूली के गंभीर मुद्दे पर तीखी चर्चा की गई।
3 अगस्त को कॉलेज परिसर से निकलेगा प्रतिरोध मार्च: बैठक में छात्र नेताओं ने कॉलेज प्रशासन के रवैये पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए चरणबद्ध आंदोलन का शंखनाद किया। निर्णय लिया गया कि आंदोलन के प्रथम चरण के रूप में आगामी 3 अगस्त को एलकेवीडी कॉलेज परिसर से एक विशाल एवं प्रभावी प्रतिरोध मार्च निकाला जाएगा। इस प्रदर्शन के माध्यम से कॉलेज प्रशासन को नींद से जगाने और छात्रों की ज्वलंत समस्याओं व मांगों की ओर उनका ध्यान आकृष्ट कराने का प्रयास किया जाएगा।
ताजपुर में एलकेवीडी कॉलेज में कथित अवैध वसूली एवं शैक्षणिक कुव्यवस्था के खिलाफ बैठक कर 3 अगस्त को प्रतिरोध मार्च निकालने का निर्णय लेते आइसा के पदाधिकारी एवं छात्र-छात्राएं।
शिक्षा के व्यवसायीकरण और बढ़ती फीस पर साधा निशाना: बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का लगातार व्यवसायीकरण किया जा रहा है। कॉलेजों में फीस में अनुचित वृद्धि, अवैध वसूली और छात्रों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की घोर अनदेखी की जा रही है, जिसे अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संगठन विस्तार का लिया गया संकल्प: इस अवसर पर संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने हेतु व्यापक रणनीति बनाई गई। तय हुआ कि सदस्यता अभियान चलाकर अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को आइसा से जोड़ा जाएगा ताकि छात्र अधिकारों की लड़ाई को और अधिक धार दी जा सके।
बैठक में ये रहे मौजूद: इस महत्वपूर्ण बैठक में एरम परवीन, शालिनी कुमारी, जोया परवीन, स्नेहा कुमारी, इमराना परवीन, वर्षा रानी, सलमा खातून, अंकित कुमार, तौफिक आलम, मो आसिफ अंसारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। सभी उपस्थित सदस्यों ने अपने विचार साझा किए और आगामी 3 अगस्त के प्रतिरोध मार्च को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का दृढ़ संकल्प लिया।
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पटना। सड़क हादसों में घायल होने वाले पीड़ितों के लिए अब इलाज के अभाव में जान गंवाने की नौबत नहीं आएगी। बिहार पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात) सुधांशु कुमार ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री रोड एक्सीडेंट कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम (प्रधानमंत्री सड़क दुर्घटना कैशलेस इलाज योजना) के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस योजना के लागू होने से सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को तुरंत और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
पटना स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री रोड एक्सीडेंट कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम की विस्तृत जानकारी देते अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात) सुधांशु कुमार।
गोल्डन आवर में बचेगी अनमोल जिंदगी
सुधांशु कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना का सबसे मुख्य और अहम मकसद दुर्घटना के ठीक बाद के शुरुआती समय यानी ‘गोल्डन आवर’ में घायलों को बिना किसी वित्तीय बाधा या पैसे की चिंता किए तुरंत इलाज मुहैया कराना है। अक्सर यह देखा जाता है कि अस्पताल पहुंचते ही पैसों के भुगतान या कागजी कार्रवाई के चक्कर में कीमती समय बर्बाद हो जाता है, जिससे घायल व्यक्ति की स्थिति गंभीर हो जाती है या उसकी मौत हो जाती है। इस नई व्यवस्था से अस्पतालों को तुरंत इलाज शुरू करना होगा।
7 दिनों तक 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज
योजना के प्रावधानों का ब्योरा देते हुए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ने बताया कि सड़क दुर्घटना के प्रत्येक पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से अधिकतम 7 दिनों की अवधि तक के लिए 1.5 लाख रुपये (1.5 Lakh) तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। पीड़ित व्यक्ति को इलाज के दौरान अस्पताल में कोई नकद राशि जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। यह योजना सभी सूचीबद्ध अस्पतालों में प्रभावी ढंग से लागू की जाएगी ताकि आम जनता को इसका सीधा लाभ मिल सके।
जागरूकता फैलाने पर विशेष जोर
सुधांशु कुमार ने कहा कि इस जनकल्याणकारी योजना का अधिक से अधिक लाभ लोगों तक पहुंचे, इसके लिए राज्यभर में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। आम नागरिकों, एम्बुलेंस चालकों और पुलिस कर्मियों को इस योजना की प्रक्रियाओं से अवगत कराया जा रहा है ताकि वे दुर्घटनास्थल पर मौजूद पीड़ितों को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाकर योजना का लाभ दिला सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में भारी कमी आएगी।
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पटना। बिहार के शिक्षा विभाग ने राज्य के लाखों शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मदन मोहन झा सभागार, विकास भवन, पटना में आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2026 से जुड़ी कई बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षकों का स्थानांतरण किसी भी स्थिति में जबरन नहीं होगा, बल्कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऐच्छिक होगी।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने नियमावली की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में अधिशेष (सरप्लस) शिक्षकों के समायोजन और समानुपातीकरण की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से शुरू कर दिया गया है। नई नियमावली के तहत शिक्षकों को आवेदन करते समय कम से कम 1 और अधिकतम 30 विद्यालयों का विकल्प चुनने की छूट दी गई है। स्थानांतरण की प्रक्रिया केवल उन्हीं विद्यालयों में की जाएगी, जिन्हें शिक्षकों ने अपने विकल्प के रूप में स्वयं चुना होगा।
पटना के विकास भवन स्थित मदन मोहन झा सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2026 और समायोजन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देते शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी।
दो दिनों में ही उमड़ी आवेदकों की भीड़ : 29 जुलाई से ऑनलाइन पोर्टल शुरू होने के बाद मात्र दो दिनों के भीतर शिक्षकों का जबर्दस्त रिस्पांस देखने को मिला है। अब तक कुल 14,796 शिक्षकों ने सफलतापूर्वक अपने ऑनलाइन आवेदन जमा कर दिए हैं। इसके अलावा 7,795 शिक्षकों ने अपना आवेदन फॉर्म भर कर सुरक्षित (सेव) कर लिया है, जिसे वे जल्द ही सबमिट करेंगे। इस तरह अब तक कुल 22,591 अधिशेष शिक्षक इस पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया से जुड़ चुके हैं।
म्यूचुअल ट्रांसफर और हेल्पलाइन की सुविधा : शिक्षा विभाग द्वारा आपसी सहमति से स्थानांतरण की सुविधा भी दी गई है। अब तक 2,142 शिक्षकों ने म्यूचुअल ट्रांसफर (पारस्परिक स्थानांतरण) के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है।
आवेदन की प्रक्रिया के दौरान यदि किसी शिक्षक को तकनीकी समस्या या किसी प्रकार का संशय होता है, तो उसके त्वरित निवारण के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। शिक्षक सहायता के लिए 14417 तथा 18003454417 पर संपर्क कर अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।
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मुजफ्फरपुर, 31 जुलाई। जिलाधिकारी कुमार गौरव की अध्यक्षता में समाहर्नालय सभागार में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकों का दौर आयोजित किया गया। बैठकों के दौरान जिलाधिकारी ने जिले में चल रही जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की गहन समीक्षा की तथा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।
14 अगस्त तक 100 प्रतिशत राशन कार्ड बनाने की डेडलाइन
राशन कार्ड निर्माण की समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी कुमार गौरव ने स्पष्ट चेतावनी दी कि 14 अगस्त 2026 तक निर्धारित लक्ष्य को हर हाल में 100 प्रतिशत पूरा किया जाए। जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप अब तक लगभग 85 प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर ली गई है। शेष बचे 15 प्रतिशत लक्ष्य को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का सख्त निर्देश सभी संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया।
जिला समाहर्नालय में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते जिलाधिकारी कुमार गौरव और उपस्थित वरिष्ठ प्रशासनिक पदाधिकारी।
समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि प्राप्त सभी आवेदनों को प्राथमिकता के आधार पर त्वरित गति से पूरा किया जाए ताकि पात्र लाभुकों को समय पर राशन कार्ड उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि जिले का कोई भी पात्र व्यक्ति राशन कार्ड से वंचित नहीं रहना चाहिए।
प्रखंडवार योजनाओं की गहन समीक्षा
इसके बाद जिलाधिकारी कुमार गौरव की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों की प्रखंडवार समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में उप विकास आयुक्त, परियोजना पदाधिकारी सह निदेशक (लेखा, प्रशासन एवं स्वनियोजन), अनुमंडल पदाधिकारी पूर्वी एवं पश्चिमी, परीक्ष्यमान आईएएस (आईएएस), सभी वीडियो (बीडीओ), सीओ, सीडीपीओ, बीपीआरओ, पीओ (मनरेगा) सहित संबंधित विभागों के जिला एवं प्रखंड स्तरीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में ग्रामीण विकास, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचों के विकास से जुड़े कार्यों की प्रगति की बारीकी से जांच की गई।
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर मंथन
दिन की तीसरी महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की जिला स्तरीय समीक्षा की गई। बैठक में जिले के सभी डिस्काॅम (डिस्कॉम) पदाधिकारी, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एलडीएम), विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक तथा रूफटॉप सोलर के अधिकृत वेंडर मौजूद रहे।
जिलाधिकारी ने योजना की प्रगति, बैंक लोन (ऋण) स्वीकृति, लंबित एवं अस्वीकृत आवेदनों की स्थिति, रूफटॉप सोलर की स्थापना तथा विभिन्न विभागों के बीच आपसी तालमेल की समीक्षा की। उन्होंने बैंकों को निर्देश दिया कि सोलर पैनल लगाने के लिए आने वाले ऋण आवेदनों का त्वरित निपटारा किया जाए। योजना के प्रभावी और सुचारू कार्यान्वयन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों की सराहना भी की गई।
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मुजफ्फरपुर : मुजफ्फरपुर पुलिस ने अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। कांटी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अलग-अलग कांडों में शामिल कुल 10 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।
वरीय पुलिस अधीक्षक, मुजफ्फरपुर के निर्देशन में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, यातायात नियमों के अनुपालन और पूर्ण शराबबंदी हेतु संदिग्ध व्यक्तियों तथा वाहनों की सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में गंभीर कांडों में सक्रिय, वांछित और फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
कांटी थाना में गिरफ्तार 10 अभियुक्तों के साथ पुलिस पदाधिकारी और बरामद सामान।
04 अलग-अलग कांडों में हुई कार्रवाई:
कांटी थाना की टीम द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 04 कांडों में 10 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर अग्रतर कार्रवाई की जा रही है:
चोरी एवं गृहभेदन (कांड संख्या- 482/26 एवं 483/26):
चोरी के सामान और घटना में प्रयुक्त सामानों के साथ कुल 03 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार अभियुक्त:
सोनू कुमार (थाना- कांटी, जिला- मुजफ्फरपुर)
अंकित कुमार (थाना- मोतीपुर, जिला- मुजफ्फरपुर)
सोनू कुमार (थाना- सिवाईपट्टी, जिला- मुजफ्फरपुर)
बरामदगी:
01 चार पहिया वाहन (घटना में प्रयुक्त)
चोरी की पर्स, पासबुक और चेक बुक
01 चाकू
03 पेचकश
01 लोहे का रॉड
मारपीट मामला (कांड संख्या- 484/26):
मारपीट के मामले में कुल 06 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार अभियुक्त:
रितिक कुमार
उदित कुमार
गोपी कुमार
साहब मिश्र
आदित्य कुमार
राजदेव साह
(सभी थाना- कांटी, जिला- मुजफ्फरपुर)
हत्याकांड मामला (कांड संख्या- 481/26):
हत्याकांड के मामले में 01 अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार अभियुक्त:
हरि पासवान (थाना- कांटी, जिला- मुजफ्फरपुर)
अपराधिक इतिहास की जांच जारी:
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी अभियुक्तों का आपराधिक इतिहास पता किया जा रहा है। सभी के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करते हुए न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।
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पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने एक और कार्रवाई करते हुए रिश्वत लेते पुलिस अधिकारी को पकड़ा है। औरंगाबाद जिला के रिसिएप थाना में पदस्थापित पुलिस अवर निरीक्षक उमेश कुमार को 50,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है।
केस से नाम हटाने और धाराएं कम करने के नाम पर मांग रहा था रिश्वत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रिसिएप थाना क्षेत्र के गणपत तेन्दुआ गांव निवासी परिवादी लक्ष्मण राम (पिता- सरयू राम) ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी और उनके पड़ोसियों के बीच मारपीट का काउंटर केस दर्ज हुआ था। रिसिएप थाना कांड संख्या 159/26 (दिनांक 15.07.26) के अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक उमेश कुमार ने विपक्ष द्वारा दर्ज मुकदमे से परिवादी के दो बेटों का नाम हटाने, केस की कुछ धाराएं हटाने तथा रिश्वत न देने पर और धाराएं जोड़ने का भय दिखाकर 50,000 रुपये की मांग की थी।
रिसिएप थाना के पुलिस अवर निरीक्षक उमेश कुमार को 50,000 रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार करने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम।
निगरानी की टीम ने बिछाया जाल, रंगे हाथ दबोचा
शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग द्वारा मामले का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान दरोगा द्वारा रिश्वत मांगे जाने का आरोप सही पाया गया। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (निगरानी) संतोष कुमार के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया।
दिनांक 31.07.2026 को धावा दल ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की। जैसे ही परिवादी ने रिसिएप थाना के पीछे स्थित पंचायत भवन के सामने सड़क पर दरोगा उमेश कुमार को 50,000 रुपये दिए, निगरानी की टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
न्यायालय में किया जाएगा पेश
निगरानी थाना कांड संख्या 091/26 (दिनांक 30.07.2026) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी पुलिस अधिकारी उमेश कुमार से पूछताछ की जा रही है। आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
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समस्तीपुर, 30 जुलाई 2026 । अपनी जायज मांगों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन के तहत समस्तीपुर नगर निगम के सफाईकर्मियों का आक्रोश बृहस्पतिवार को सड़कों पर फूट पड़ा। हड़ताल पर बैठे सैकड़ों सफाईकर्मियों ने पूरे समस्तीपुर शहर में विशाल जुलूस निकालकर समाहरणालय पर गर्जना की और इसके बाद नगर निगम कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों के इस तीखे तेवर से निगम प्रशासन और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मचा रहा ।
इस विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व पटना नगर निगम संयुक्त कर्मचारी समन्वय समिति एवं बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के दिग्गज नेताओं द्वारा किया गया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए सफाईकर्मियों ने नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
समस्तीपुर नगर निगम कार्यालय के सामने हाथों में बैनर-तख्तियां लेकर उग्र प्रदर्शन एवं जमकर नारेबाजी करते हड़ताली सफाईकर्मी व महासंघ के नेता।
नियमितीकरण और ठेका प्रथा खत्म करने पर अड़े कर्मचारी
आंदोलनकारियों ने पुरजोर तरीके से मांग उठाई कि वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे दैनिक वेतनभोगी, संविदा एवं अन्य अस्थायी कर्मचारियों का अविलंब नियमितीकरण किया जाए तथा उनकी सेवा सुरक्षा की ठोस गारंटी दी जाए। इसके अलावा, कर्मचारियों के हितों के खिलाफ जारी किए गए सभी प्रतिकूल आदेशों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
सफाईकर्मियों ने ठेका (कॉन्ट्रैक्ट) एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर संबंधित कर्मियों को सीधे नगर निगम के अधीन समायोजित करने, ईएसआई (ESI), पीएफ (PF) का लाभ देने तथा लंबे समय से लंबित बकाया राशि का अविलंब भुगतान सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की।
नगर की रीढ़ हैं सफाईकर्मी, शोषण बर्दाश्त नहीं
समाहरणालय व निगम परिसर में आयोजित विशाल सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सफाईकर्मी पूरे नगर की स्वच्छता व्यवस्था की असली रीढ़ हैं। दिन-रात शहर को साफ-सुथरा रखने वाले इन कर्मचारियों को आज तक स्थायी सेवा, उचित मानदेय और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ही सकारात्मक और ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह आंदोलन और अधिक विकराल रूप धारण करेगा।
सभा में मौजूद रहे प्रमुख नेता एवं कार्यकर्ता
मौके पर आयोजित सभा की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष राजकुमार राम ने की, जबकि मंच संचालन का दायित्व सहायक मंत्री प्रमोद राम ने संभाला।
बतौर मुख्य वक्ता ऐक्टू (ACTU) राज्य परिषद सदस्य सह सम्मानित अध्यक्ष (बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ, नगर निगम समस्तीपुर) जीबछ पासवान, ऐक्टू नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह, बिहार राज्य अनुरक्षक संघ के जिला अध्यक्ष जीतेंद्र कुशवाहा, विनोद मल्लिक, शिवजी मल्लिक, अमर राम, मनोज कुमार, मोहम्मद अलीशेर, भूपेंद्र सिंह, रीता देवी, रेखा देवी, संगीता देवी, मीरा देवी, चंद्रकाला देवी, नरेश राम, बिरजू राम, गणेश राम, अनिल मल्लिक, संजीत कुमार पोद्दार एवं देव कुमार समेत बड़ी संख्या में सफाईकर्मियों एवं श्रमिक नेताओं ने सभा को संबोधित किया।
सभी नेताओं एवं कर्मचारियों ने एक स्वर में एलान किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी तरह मान नहीं ली जातीं, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन आंदोलन और हड़ताल पूरी एकजुटता के साथ जारी रहेगा।
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मुजफ्फरपुर, 31 जुलाई 2026। महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (एमडीडीएम कॉलेज) में शुक्रवार को महान कथाकार प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर एक भव्य एवं विचारोत्तेजक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रेमचंद की रचनाओं, उनके सामाजिक सरोकारों और साहित्य में छिपे यथार्थवाद पर विस्तार से प्रकाश डाला। समारोह की शुरुआत शिक्षकों और छात्राओं द्वारा प्रेमचंद के चित्र पर श्रद्धा-सुमन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।
आम जन की संवेदना और युगबोध के अद्वितीय साहित्यकार
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रभारी डॉ अनुराधा सिंह ने कहा कि प्रेमचंद केवल एक लेखक नहीं, बल्कि सच्चे अर्थों में जनता के कथाकार थे। उनकी हर कहानी और उपन्यास में आम आदमी की गहरी संवेदनाएं, दुख-दर्द और जीवन का यथार्थ निहित है।
मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद महाविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक डॉ निशिकांति ने अपने संबोधन में कहा कि प्रेमचंद युगबोध के बेजोड़ साहित्यकार थे। उस काल की तमाम विडंबनाओं, सामाजिक विसंगतियों और असमानता को उन्होंने अपने साहित्य में बेहद निडरता से उकेरा है।
नैतिक यथार्थवाद, दलित व नारी विमर्श की गूंज
स्नातकोत्तर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ राकेश रंजन ने प्रेमचंद के रचनात्मक एवं वैचारिक वैविध्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका यथार्थवाद केवल सामाजिक धरातल तक सीमित नहीं था, बल्कि वह गहराई से नैतिक भी था। उन्होंने सहानुभूति और नैतिक आत्मपरीक्षण के माध्यम से समाज के उपेक्षित, अनादृत, शोषित और पीड़ित वर्गों की पीड़ा को अभिव्यक्ति दी।
डॉ नूतन कुमारी ने प्रेमचंद के साहित्य में दलित विमर्श के प्रारंभिक बीजों की उपस्थिति को रेखांकित किया। वहीं डॉ रिंकु कुमारी ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य संघर्षों से भरा पड़ा है, जिसमें नारी विमर्श का प्रारंभिक और सशक्त स्वरूप साफ झलकता है।
एमडीडीएम कॉलेज मुजफ्फरपुर में शुक्रवार को आयोजित प्रेमचंद जयंती समारोह के दौरान कथा सम्राट प्रेमचंद के चित्र के समीप खड़े एवं बैठे प्राचार्य प्रभारी डॉ अनुराधा सिंह, डॉ निशिकांति, डॉ राकेश रंजन, डॉ राम दुलार सहनी, अन्य शिक्षकगण एवं छात्राएं।
डॉ राम दुलार सहनी ने प्रेमचंद का जीवन परिचय देते हुए कहा कि वे हिंदी साहित्य के ऐसे युगप्रवर्तक कथाकार हैं, जिन्होंने पूरे हिंदी कथा साहित्य को एक नई दिशा और पहचान दी।
छात्राओं ने संवाद पाठ से किया मंत्रमुग्ध
छात्राओं ने भी अपने ओजस्वी विचारों से समारोह में समां बांध दिया। स्नातकोत्तर की छात्रा दिव्य लता ने जोर देकर कहा कि प्रेमचंद के चित्रों की पूजा करने के साथ-साथ उनके चरित्र और कृतित्व को भी अपने जीवन में व्यावहारिक रूप से अपनाने की सख्त आवश्यकता है।
पंचम सेमेस्टर की छात्रा कुमारी तान्या ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों के प्रमुख एवं जीवंत संवादों का प्रभावशाली पाठ किया और बताया कि किस तरह उनकी रचनाओं में सामाजिक सच की मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। छात्रा चांदनी ने प्रेमचंद का सामान्य परिचय प्रस्तुत करते हुए उन्हें हिंदी का आदर्श कथाकार बताया। इसके अलावा अंजलि कुमारी, भूमिका चंद्रा, रीता कुमारी, निधि कुमारी, नितांजलि कुमारी, पार्वती कुमारी और कृति कुमारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
गरिमामय संचालन और उपस्थिति
कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन छात्रा कुमारी तान्या ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन स्नातकोत्तर की छात्रा अंजलि कुमारी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मी और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
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सशक्त समिति के गठन से थमा कमीशन का खेल! रात में सफाई शुरू होने पर मुख्य पार्षद, उप-मुख्य पार्षद और पार्षदों में तकरार, 4 साल तक मलाई छनने के बाद रात की पाली में सफाई का जानिए पूरा सच
यह वाक्या बिहार के उन तमाम नवगठित नगर पंचायतों के लिए एक नजीर और आईना है
विशेष रिपोर्ट – एस. एस. कुमार ‘पंकज’ |
मुजफ्फरपुर (बिहार)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का नवगठित मुरौल नगर पंचायत इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वजह है रात के सन्नाटे में जगमगाती स्ट्रीट लाइटों के नीचे और वीरान पड़ी सड़कों पर गूंजती झाड़ू की आवाज। अमूमन रात के 9:15 बजे के बाद जब दुकानें बंद हो जाती हैं और आम लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं, तब नगर पंचायत मुरौल के ढोली बाजार, जहांगीरपुर चौक और सादिकपुर की सड़कों पर सफाई कर्मी मुस्तैदी से सफाई करते नजर आ रहे हैं।
यह दृश्य किसी बड़े महानगर या नगर निगम का नहीं, बल्कि हाल ही में गठित एक छोटे से नगर पंचायत का है। जहां कुछ महीने पहले तक दिन के उजाले में भी कचरे का अंबार लगा रहता था और आम लोग गंदगी तथा बदबू से कराहते थे, वहां अचानक रात की पाली (नाइट स्वीपिंग) में सफाई होना किसी अजूबे से कम नहीं है। लेकिन इस ‘चमत्कार’ के पीछे की कहानी उतनी सरल नहीं है जितनी यह तस्वीरों में दिखाई देती है।
इस रात की सफाई के पीछे प्रशासनिक फेरबदल, कमीशन का बंद होना, जनप्रतिनिधियों का आपसी टकराव और सबसे बढ़कर एक साल बाद होने वाले नगर निकाय चुनावों का डर छिपा हुआ है। न्यूज भारत टीवी ने जब इस पूरी व्यवस्था की पड़ताल की और इससे जुड़े तमाम ओहदेदारों से बातचीत की, तो नगर पंचायत के भीतर जारी भ्रष्टाचार, बंदरबांट और सियासत की परतें एक-एक कर उधड़ती चली गईं।
तस्वीर का सच और जमीनी हकीकत
स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया और आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स में जब रात 9:15 बजे के आसपास ली गई तस्वीरें वायरल हुईं, तो आम जनता के साथ-साथ पड़ोसी नगर पंचायतों के लोग भी हैरान रह गए। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि सफाई कर्मी हाथ में झाड़ू लिए मुजफ्फरपुर-पुसा-समस्तीपुर मार्ग और ढोली बाजार की मुख्य सड़कों की सफाई कर रहे हैं।
इस व्यवस्था के संबंध में जब सफाई एजेंसी के सुपरवाइजर उदय से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मुख्य बाजारों में रात के समय सफाई कराई जा रही है ताकि दिन में दुकानदारों और राहगीरों को किसी तरह की असुविधा न हो और सुबह बाजार पूरी तरह साफ-सुथरा मिले। लेकिन जब पत्रकार कुमार पंकज ने नगर पंचायत के शीर्ष जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछे, तो रात में हो रही इस सफाई का असली राजनीतिक और वित्तीय गणित सामने आ गया।
जनप्रतिनिधियों का आमने-सामने का पक्ष
1. मुख्य पार्षद राम नरेश प्रसाद मेहता का पक्ष: “बजट बढ़ा है, पर मैं काम से संतुष्ट नहीं”
नगर पंचायत अध्यक्ष (मुख्य पार्षद) राम नरेश प्रसाद मेहता से जब रात की सफाई को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे पूरी तरह नियम और अनुबंध के तहत बताया। हालांकि, बातचीत के दौरान उनके बयानों में भारी असंतोष और झल्लाहट साफ झलकी।
अनुबंध और बजट का गणित: मुख्य पार्षद ने बताया कि सफाई एजेंसी के वर्क एग्रीमेंट में शुरू से ही प्रमुख चौक-चौराहों पर नाइट स्वीपिंग (रात्रि सफाई) का नियम था। जब नगर पंचायत का गठन हुआ था, तब सफाई का मासिक टेंडर महज 4 लाख रुपये का था। बाद में यह बढ़कर 8 से 9 लाख रुपये हुआ और 15 जून से लागू नए 2 साल के एग्रीमेंट में यह बजट बढ़कर 15 से 16 लाख रुपये महीना हो चुका है।
काम पर असंतोष: मुख्य पार्षद का कहना था, “जब एजेंसी को 4 लाख के बदले 15-16 लाख रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं, तो स्वाभाविक है कि काम का दायरा बढ़ेगा। लेकिन जो सफाई दिख रही है और जिसकी वाहवाही हो रही है, उससे मैं पूरी तरह असंतुष्ट हूं। यह कुल काम का महज 35 से 40 प्रतिशत ही है। सिर्फ दो-चार जगह झाड़ू मार देने और फोटो खिंचवा लेने से सफाई नहीं हो जाती।”
पार्षदों पर पलटवार: जब उनसे पूछा गया कि पार्षद उन पर उंगली उठा रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि वह किसी भी पार्षद या प्रतिनिधि के साथ सफाई के मुद्दे पर ‘लाइव डिबेट’ करने को तैयार हैं।
2. उप-मुख्य पार्षद अजय कुमार यादव का पक्ष: “कमीशन का खेल बंद, सशक्त समिति हुई टाइट”
उप-मुख्य पार्षद अजय कुमार यादव का रुख मुख्य पार्षद के बिल्कुल विपरीत रहा। उन्होंने इस पूरी तब्दीली का श्रेय प्रशासनिक व्यवस्था में हुए सुधार और मुख्य पार्षद के एकाधिकार के खत्म होने को दिया।
हाईजैक खत्म, सशक्त समिति का गठन: अजय कुमार यादव का कहना है कि पहले बिहार सरकार के पुराने नियमानुसार सशक्त स्थायी समिति के तीन सदस्यों को मुख्य पार्षद अपनी पसंद से मनोनीत करते थे, जिससे पूरे तंत्र को ‘हाईजैक’ कर लिया गया था। लेकिन सरकार के नए आदेश के बाद अब पार्षदों ने वोटिंग के जरिए अपनी सशक्त स्थायी समिति चुनी है।
कमीशन बंद होने से सुधार: उप-मुख्य पार्षद ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा, “पहले अध्यक्ष को सफाई एजेंसी से ढाई लाख रुपये महीना मिलता था। अब नई सशक्त समिति ने कमीशन का यह खेल पूरी तरह बंद करा दिया है। जब अध्यक्ष का कमीशन बंद हो गया, तो एजेंसी पर काम करने का दबाव बना है।”
सफाई कर्मियों के खाते में सीधा भुगतान: उन्होंने कहा कि पहले एनजीओ/एजेंसी सफाई कर्मियों का 5,000 रुपये खा जाती थी और मजदूरों को शोषण का शिकार होना पड़ता था। अब सशक्त समिति ने फैसला लिया है कि मजदूरों का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाए ताकि काम करने वाले खुश रहें।
3. वार्ड 3 के पार्षद आनंद कंद साह का दावा: “यह महज कागजी और चुनावी चमत्कार है”
वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कंद साह ने रात की सफाई को पूरी तरह से जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला कदम बताया। उन्होंने नगर पंचायत के भ्रष्टाचार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए अपनी बात रखी।
कागजी दावे और बंदरबांट: पार्षद आनंद कंद साह ने कहा, “तुम्हारे गांव का मौसम गुलाबी है, ये वादे झूठे हैं, ये दावे किताबी हैं। जो चमत्कार दिख रहा है, वह सिर्फ कागजों और तस्वीरों में है।” उन्होंने आरोप लगाया कि फरवरी 2024 में 9 लाख का टेंडर था जो अब 14 लाख से अधिक हो गया है। इस दौरान टेंडर दिलाने के नाम पर अधिकारियों और कार्यपालक पदाधिकारियों को 15-15 लाख रुपये तक की मोटी रकम दी गई।
हिस्सा न मिलने का विवाद: पार्षद ने कहा कि जब तक मुख्य पार्षद को उनका तय हिस्सा और कमीशन मिल रहा था, तब तक उन्हें एजेंसी में कोई ऐब नजर नहीं आता था। जैसे ही पैसे का तालमेल बिगड़ा और कमीशन रुका, वैसे ही मुख्य पार्षद को काम में कमियां दिखने लगीं।
4. वार्ड 4 के पार्षद दिलीप कुमार (बबलू कुमार) की दलील: “मजदूरों का शोषण रुका, सुधार जारी है”
सशक्त स्थायी समिति के नवनिर्वाचित सदस्य और वार्ड 4 के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार ने स्वीकार किया कि बीते 4 वर्षों में व्यवस्था बेहद खराब थी, लेकिन अब उसमें सुधार की कोशिश की जा रही है।
मनोनयन से निर्वाचन का सफर: उन्होंने बताया कि पहले मुख्य पार्षद अपने चहेते मनोनीत सदस्यों के दम पर मनमाने फैसले लेते थे। वार्ड पार्षदों की बिना सहमति के हाई मास्ट लाइटें और कैमरे लगा दिए गए। अब चुनाव जीतकर आई समिति पारदर्शिता ला रही है।
मजदूरी में बढ़ोतरी और आईडी कार्ड: दिलीप कुमार ने कहा कि पहले सफाई कर्मियों को महज 300 रुपये देकर उनका शोषण किया जाता था। अब नई समिति उन्हें 436 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दिलाने के लिए प्रयासरत है। इसके अलावा, सफाई कर्मियों को भयमुक्त माहौल देने और उन्हें पहचान पत्र (आईडी कार्ड) जारी कराने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।
4 साल की मलाई बनाम 1 साल की सेवा
मुरौल नगर पंचायत का यह पूरा मामला बिहार के नवगठित स्थानीय निकायों की जमीनी कार्यशैली का एक जीवंत दस्तावेज है। इस पूरे घटनाक्रम का यदि गहराई से विश्लेषण किया जाए तो तीन प्रमुख बिंदु उभरकर सामने आते हैं:
बजट चार गुना बढ़ा, पर व्यवस्था अब क्यों जागी?
नगर पंचायत बनने के बाद सफाई का बजट जो शुरुआत में 3.5 से 4 लाख रुपये प्रति माह था, वह आज बढ़कर 14 से 16 लाख रुपये प्रति माह (यानी लगभग 1.80 करोड़ रुपये सालाना) पहुंच चुका है। सवाल यह उठता है कि जब जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा था, तो 4 वर्षों तक रात की सफाई तो दूर, दिन की सफाई भी सही तरीके से क्यों नहीं हो रही थी? क्या इतने वर्षों तक जनता के टैक्स के पैसे पर सिर्फ मलाई छानी जा रही थी?
कमीशनखोरी का मकड़जाल
उप-मुख्य पार्षद और पार्षदों के खुले बयानों से यह साफ है कि निकाय के भीतर निचले स्तर पर करप्शन का तगड़ा जाल फैला हुआ था। टेंडर आवंटित करने से लेकर एजेंसी के बिल पास करने तक लाखों रुपये के कमीशन का खेल चल रहा था। जब तक यह ‘कमीशन तंत्र’ सुचारू रूप से चल रहा था, तब तक किसी को न तो जनता की गंदगी दिखी और न ही एग्रीमेंट की शर्तें याद आईं। जैसे ही सशक्त समिति के पुनर्गठन से शक्ति का संतुलन बदला और कमीशन का प्रवाह रुका, वैसे ही अचानक नियमों की किताबें खुल गईं और रातों-रात झाड़ू चलने लगी।
चुनाव का डर और जनता का हिसाब
नगर पंचायत के गठन को 4 साल बीत चुके हैं और अब महज 1 साल का कार्यकाल शेष बचा है। 12 महीने बाद चुनाव की तारीखें सामने होंगी और जनप्रतिनिधियों को उसी जनता के पास वोट मांगने जाना पड़ेगा, जिसे पिछले चार सालों तक बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसाया गया। जनप्रतिनिधियों में इस बात का डर साफ दिख रहा है कि जनता भोली जरूर है, लेकिन 4 साल की उपेक्षा का हिसाब चुनाव में मांग सकती है। यही कारण है कि अंतिम 1 साल में जनता को लुभाने और ‘चमत्कार’ दिखाने की होड़ मची है।
बड़े सवाल : मुजफ्फरपुर के मुरौल नगर पंचायत से आई यह तस्वीर सिर्फ ढोली बाजार या सादिकपुर की नहीं है, बल्कि यह बिहार के उन तमाम नवगठित नगर पंचायतों के लिए एक नजीर और आईना है, जहां के निवासी आज भी विकास और नागरिक सुविधाओं के नाम पर ठगे जा रहे हैं।
यदि मुरौल में सशक्त समिति के कड़े रुख और जनप्रतिनिधियों की आपसी तकरार के कारण ही सही, लेकिन रात 9 बजे सफाई शुरू हो सकती है, तो बिहार के बाकी नगर पंचायतों में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? क्या दूसरे नगर निकायों में अफसर, अध्यक्ष और एजेंसियां मिलकर जनता के पैसे पर डाका डाल रहे हैं और डकार भी नहीं ले रहे हैं?
मुरौल की जनता के लिए यह राह थोड़ी राहत भरी जरूर है कि सड़कों पर रात में झाड़ू लग रही है और मजदूरों को हक मिलने की उम्मीद जगी है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी कायम है कि क्या यह बदलाव स्थायी है या फिर चुनावी साल बीतते ही और नया टेंडर होते ही यह झाड़ू फिर से थम जाएगी? अब देखना दिलचस्प होगा कि मुख्य पार्षद द्वारा चाही जा रही ‘लाइव डिबेट’ से भ्रष्टाचार के और कितने जिन्न बाहर निकलते हैं।
पुर की नहीं है, बल्कि यह बिहार के उन तमाम नवगठित नगर पंचायतों के लिए एक नजीर और आईना है, जहां के निवासी आज भी विकास और नागरिक सुविधाओं के नाम पर ठगे जा रहे हैं।
यदि मुरौल में सशक्त समिति के कड़े रुख और जनप्रतिनिधियों की आपसी तकरार के कारण ही सही, लेकिन रात 9 बजे सफाई शुरू हो सकती है, तो बिहार के बाकी नगर पंचायतों में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? क्या दूसरे नगर निकायों में अफसर, अध्यक्ष और एजेंसियां मिलकर जनता के पैसे पर डाका डाल रहे हैं और डकार भी नहीं ले रहे हैं?
मुरौल की जनता के लिए यह राह थोड़ी राहत भरी जरूर है कि सड़कों पर रात में झाड़ू लग रही है और मजदूरों को हक मिलने की उम्मीद जगी है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी कायम है कि क्या यह बदलाव स्थायी है या फिर चुनावी साल बीतते ही और नया टेंडर होते ही यह झाड़ू फिर से थम जाएगी? अब देखना दिलचस्प होगा कि मुख्य पार्षद द्वारा चाही जा रही ‘लाइव डिबेट’ से भ्रष्टाचार के और कितने जिन्न बाहर निकलते हैं।
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मुजफ्फरपुर। जिले में अपराध नियंत्रण और गायब व अपहृत व्यक्तियों की सकुशल बरामदगी को लेकर वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मुजफ्फरपुर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए महज 24 घंटे के भीतर अलग-अलग थाना क्षेत्रों से दर्ज 5 मामलों में कुल 05 अपहृत युवतियों को सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस की इस तत्परता और त्वरित कार्रवाई से जिले में हड़कंप मच गया है।
:मुजफ्फरपुर पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के तहत 24 घंटे में बरामद की गई 05 अपहृत युवतियों के साथ मुस्तैद महिला पुलिस अधिकारी एवं पुलिस बल के जवान।
इन थाना क्षेत्रों से हुई बरामदगी
वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस की विशेष टीमों ने अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर युवतियों को सकुशल ढूंढ़ निकाला:
सकरा थाना (मुरौल ओपी): यहाँ दर्ज एक अपहरण के कांड में त्वरित कार्रवाई करते हुए अपहृता को सकुशल बरामद किया गया।
औराई थाना: औराई पुलिस ने दो अलग-अलग कांडों में कार्रवाई करते हुए कुल 02 अपहृत युवतियों को बरामद करने में सफलता पाई।
बरियारपुर थाना: यहाँ दर्ज अपहरण के एक मामले में पुलिस टीम ने सफलता हासिल की और अपहृता को बरामद किया।
मिठनपुरा थाना: मिठनपुरा थाना क्षेत्र से संबंधित एक मामले में भी पुलिस ने अपहृत युवती को सुरक्षित खोज निकाला।
पुलिस की मानवीय पहल और त्वरित कार्रवाई
इस अभियान के दौरान पुलिस बल की महिला अधिकारियों एवं कर्मियों ने मुस्तैदी से अपनी भूमिका निभाई। बरामद की गई सभी युवतियों को सुरक्षित थाने लाकर आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वरीय पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिले में आपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाने और अपहृतों की सकुशल बरामदगी के लिए विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस आगे की कानूनी और अग्रतर कार्रवाई में जुटी हुई है।
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