Monday, November 2, 2026

मुरौल नगर पंचायत में रात 9 बजे झाड़ू चलने का सच: कमीशन पर लगाम का असर या एक साल बाद होने वाले चुनाव का डर?

सशक्त समिति के गठन से थमा कमीशन का खेल! रात में सफाई शुरू होने पर मुख्य पार्षद, उप-मुख्य पार्षद और पार्षदों में तकरार, 4 साल तक मलाई छनने के बाद रात की पाली में सफाई का जानिए पूरा सच

यह वाक्‍या बिहार के उन तमाम नवगठित नगर पंचायतों के लिए एक नजीर और आईना है

विशेष रिपोर्ट –  एस. एस. कुमार ‘पंकज’ |

मुजफ्फरपुर (बिहार)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का नवगठित मुरौल नगर पंचायत इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वजह है रात के सन्नाटे में जगमगाती स्ट्रीट लाइटों के नीचे और वीरान पड़ी सड़कों पर गूंजती झाड़ू की आवाज। अमूमन रात के 9:15 बजे के बाद जब दुकानें बंद हो जाती हैं और आम लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं, तब नगर पंचायत मुरौल के ढोली बाजार, जहांगीरपुर चौक और सादिकपुर की सड़कों पर सफाई कर्मी मुस्तैदी से सफाई करते नजर आ रहे हैं।

यह दृश्य किसी बड़े महानगर या नगर निगम का नहीं, बल्कि हाल ही में गठित एक छोटे से नगर पंचायत का है। जहां कुछ महीने पहले तक दिन के उजाले में भी कचरे का अंबार लगा रहता था और आम लोग गंदगी तथा बदबू से कराहते थे, वहां अचानक रात की पाली (नाइट स्वीपिंग) में सफाई होना किसी अजूबे से कम नहीं है। लेकिन इस ‘चमत्कार’ के पीछे की कहानी उतनी सरल नहीं है जितनी यह तस्वीरों में दिखाई देती है।

इस रात की सफाई के पीछे प्रशासनिक फेरबदल, कमीशन का बंद होना, जनप्रतिनिधियों का आपसी टकराव और सबसे बढ़कर एक साल बाद होने वाले नगर निकाय चुनावों का डर छिपा हुआ है। न्यूज भारत टीवी ने जब इस पूरी व्यवस्था की पड़ताल की और इससे जुड़े तमाम ओहदेदारों से बातचीत की, तो नगर पंचायत के भीतर जारी भ्रष्टाचार, बंदरबांट और सियासत की परतें एक-एक कर उधड़ती चली गईं।

तस्वीर का सच और जमीनी हकीकत

स्थानीय स्तर पर सोशल मीडिया और आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप्स में जब रात 9:15 बजे के आसपास ली गई तस्वीरें वायरल हुईं, तो आम जनता के साथ-साथ पड़ोसी नगर पंचायतों के लोग भी हैरान रह गए। तस्वीरों में देखा जा सकता है कि सफाई कर्मी हाथ में झाड़ू लिए मुजफ्फरपुर-पुसा-समस्तीपुर मार्ग और ढोली बाजार की मुख्य सड़कों की सफाई कर रहे हैं।

इस व्यवस्था के संबंध में जब सफाई एजेंसी के सुपरवाइजर उदय से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मुख्य बाजारों में रात के समय सफाई कराई जा रही है ताकि दिन में दुकानदारों और राहगीरों को किसी तरह की असुविधा न हो और सुबह बाजार पूरी तरह साफ-सुथरा मिले। लेकिन जब पत्रकार कुमार पंकज ने नगर पंचायत के शीर्ष जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछे, तो रात में हो रही इस सफाई का असली राजनीतिक और वित्तीय गणित सामने आ गया।

जनप्रतिनिधियों का आमने-सामने का पक्ष

1. मुख्य पार्षद राम नरेश प्रसाद मेहता का पक्ष: “बजट बढ़ा है, पर मैं काम से संतुष्ट नहीं”

नगर पंचायत अध्यक्ष (मुख्य पार्षद) राम नरेश प्रसाद मेहता से जब रात की सफाई को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे पूरी तरह नियम और अनुबंध के तहत बताया। हालांकि, बातचीत के दौरान उनके बयानों में भारी असंतोष और झल्लाहट साफ झलकी।

  • अनुबंध और बजट का गणित: मुख्य पार्षद ने बताया कि सफाई एजेंसी के वर्क एग्रीमेंट में शुरू से ही प्रमुख चौक-चौराहों पर नाइट स्वीपिंग (रात्रि सफाई) का नियम था। जब नगर पंचायत का गठन हुआ था, तब सफाई का मासिक टेंडर महज 4 लाख रुपये का था। बाद में यह बढ़कर 8 से 9 लाख रुपये हुआ और 15 जून से लागू नए 2 साल के एग्रीमेंट में यह बजट बढ़कर 15 से 16 लाख रुपये महीना हो चुका है।
  • काम पर असंतोष: मुख्य पार्षद का कहना था, “जब एजेंसी को 4 लाख के बदले 15-16 लाख रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं, तो स्वाभाविक है कि काम का दायरा बढ़ेगा। लेकिन जो सफाई दिख रही है और जिसकी वाहवाही हो रही है, उससे मैं पूरी तरह असंतुष्ट हूं। यह कुल काम का महज 35 से 40 प्रतिशत ही है। सिर्फ दो-चार जगह झाड़ू मार देने और फोटो खिंचवा लेने से सफाई नहीं हो जाती।”
  • पार्षदों पर पलटवार: जब उनसे पूछा गया कि पार्षद उन पर उंगली उठा रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि वह किसी भी पार्षद या प्रतिनिधि के साथ सफाई के मुद्दे पर ‘लाइव डिबेट’ करने को तैयार हैं।

2. उप-मुख्य पार्षद अजय कुमार यादव का पक्ष: “कमीशन का खेल बंद, सशक्त समिति हुई टाइट”

उप-मुख्य पार्षद अजय कुमार यादव का रुख मुख्य पार्षद के बिल्कुल विपरीत रहा। उन्होंने इस पूरी तब्दीली का श्रेय प्रशासनिक व्यवस्था में हुए सुधार और मुख्य पार्षद के एकाधिकार के खत्म होने को दिया।

  • हाईजैक खत्म, सशक्त समिति का गठन: अजय कुमार यादव का कहना है कि पहले बिहार सरकार के पुराने नियमानुसार सशक्त स्थायी समिति के तीन सदस्यों को मुख्य पार्षद अपनी पसंद से मनोनीत करते थे, जिससे पूरे तंत्र को ‘हाईजैक’ कर लिया गया था। लेकिन सरकार के नए आदेश के बाद अब पार्षदों ने वोटिंग के जरिए अपनी सशक्त स्थायी समिति चुनी है।
  • कमीशन बंद होने से सुधार: उप-मुख्य पार्षद ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा, “पहले अध्यक्ष को सफाई एजेंसी से ढाई लाख रुपये महीना मिलता था। अब नई सशक्त समिति ने कमीशन का यह खेल पूरी तरह बंद करा दिया है। जब अध्यक्ष का कमीशन बंद हो गया, तो एजेंसी पर काम करने का दबाव बना है।”
  • सफाई कर्मियों के खाते में सीधा भुगतान: उन्होंने कहा कि पहले एनजीओ/एजेंसी सफाई कर्मियों का 5,000 रुपये खा जाती थी और मजदूरों को शोषण का शिकार होना पड़ता था। अब सशक्त समिति ने फैसला लिया है कि मजदूरों का भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाए ताकि काम करने वाले खुश रहें।

3. वार्ड 3 के पार्षद आनंद कंद साह का दावा: “यह महज कागजी और चुनावी चमत्कार है”

वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कंद साह ने रात की सफाई को पूरी तरह से जनता की आंखों में धूल झोंकने वाला कदम बताया। उन्होंने नगर पंचायत के भ्रष्टाचार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए अपनी बात रखी।

  • कागजी दावे और बंदरबांट: पार्षद आनंद कंद साह ने कहा, “तुम्हारे गांव का मौसम गुलाबी है, ये वादे झूठे हैं, ये दावे किताबी हैं। जो चमत्कार दिख रहा है, वह सिर्फ कागजों और तस्वीरों में है।” उन्होंने आरोप लगाया कि फरवरी 2024 में 9 लाख का टेंडर था जो अब 14 लाख से अधिक हो गया है। इस दौरान टेंडर दिलाने के नाम पर अधिकारियों और कार्यपालक पदाधिकारियों को 15-15 लाख रुपये तक की मोटी रकम दी गई।
  • हिस्सा न मिलने का विवाद: पार्षद ने कहा कि जब तक मुख्य पार्षद को उनका तय हिस्सा और कमीशन मिल रहा था, तब तक उन्हें एजेंसी में कोई ऐब नजर नहीं आता था। जैसे ही पैसे का तालमेल बिगड़ा और कमीशन रुका, वैसे ही मुख्य पार्षद को काम में कमियां दिखने लगीं।

4. वार्ड 4 के पार्षद दिलीप कुमार (बबलू कुमार) की दलील: “मजदूरों का शोषण रुका, सुधार जारी है”

सशक्त स्थायी समिति के नवनिर्वाचित सदस्य और वार्ड 4 के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार ने स्वीकार किया कि बीते 4 वर्षों में व्यवस्था बेहद खराब थी, लेकिन अब उसमें सुधार की कोशिश की जा रही है।

  • मनोनयन से निर्वाचन का सफर: उन्होंने बताया कि पहले मुख्य पार्षद अपने चहेते मनोनीत सदस्यों के दम पर मनमाने फैसले लेते थे। वार्ड पार्षदों की बिना सहमति के हाई मास्ट लाइटें और कैमरे लगा दिए गए। अब चुनाव जीतकर आई समिति पारदर्शिता ला रही है।
  • मजदूरी में बढ़ोतरी और आईडी कार्ड: दिलीप कुमार ने कहा कि पहले सफाई कर्मियों को महज 300 रुपये देकर उनका शोषण किया जाता था। अब नई समिति उन्हें 436 रुपये प्रतिदिन मजदूरी दिलाने के लिए प्रयासरत है। इसके अलावा, सफाई कर्मियों को भयमुक्त माहौल देने और उन्हें पहचान पत्र (आईडी कार्ड) जारी कराने के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।

4 साल की मलाई बनाम 1 साल की सेवा

मुरौल नगर पंचायत का यह पूरा मामला बिहार के नवगठित स्थानीय निकायों की जमीनी कार्यशैली का एक जीवंत दस्तावेज है। इस पूरे घटनाक्रम का यदि गहराई से विश्लेषण किया जाए तो तीन प्रमुख बिंदु उभरकर सामने आते हैं:

बजट चार गुना बढ़ा, पर व्यवस्था अब क्यों जागी?

नगर पंचायत बनने के बाद सफाई का बजट जो शुरुआत में 3.5 से 4 लाख रुपये प्रति माह था, वह आज बढ़कर 14 से 16 लाख रुपये प्रति माह (यानी लगभग 1.80 करोड़ रुपये सालाना) पहुंच चुका है। सवाल यह उठता है कि जब जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा था, तो 4 वर्षों तक रात की सफाई तो दूर, दिन की सफाई भी सही तरीके से क्यों नहीं हो रही थी? क्या इतने वर्षों तक जनता के टैक्स के पैसे पर सिर्फ मलाई छानी जा रही थी?

 कमीशनखोरी का मकड़जाल

उप-मुख्य पार्षद और पार्षदों के खुले बयानों से यह साफ है कि निकाय के भीतर निचले स्तर पर करप्शन का तगड़ा जाल फैला हुआ था। टेंडर आवंटित करने से लेकर एजेंसी के बिल पास करने तक लाखों रुपये के कमीशन का खेल चल रहा था। जब तक यह ‘कमीशन तंत्र’ सुचारू रूप से चल रहा था, तब तक किसी को न तो जनता की गंदगी दिखी और न ही एग्रीमेंट की शर्तें याद आईं। जैसे ही सशक्त समिति के पुनर्गठन से शक्ति का संतुलन बदला और कमीशन का प्रवाह रुका, वैसे ही अचानक नियमों की किताबें खुल गईं और रातों-रात झाड़ू चलने लगी।

चुनाव का डर और जनता का हिसाब

नगर पंचायत के गठन को 4 साल बीत चुके हैं और अब महज 1 साल का कार्यकाल शेष बचा है। 12 महीने बाद चुनाव की तारीखें सामने होंगी और जनप्रतिनिधियों को उसी जनता के पास वोट मांगने जाना पड़ेगा, जिसे पिछले चार सालों तक बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसाया गया। जनप्रतिनिधियों में इस बात का डर साफ दिख रहा है कि जनता भोली जरूर है, लेकिन 4 साल की उपेक्षा का हिसाब चुनाव में मांग सकती है। यही कारण है कि अंतिम 1 साल में जनता को लुभाने और ‘चमत्कार’ दिखाने की होड़ मची है।

बड़े सवाल : मुजफ्फरपुर के मुरौल नगर पंचायत से आई यह तस्वीर सिर्फ ढोली बाजार या सादिकपुर की नहीं है, बल्कि यह बिहार के उन तमाम नवगठित नगर पंचायतों के लिए एक नजीर और आईना है, जहां के निवासी आज भी विकास और नागरिक सुविधाओं के नाम पर ठगे जा रहे हैं।

यदि मुरौल में सशक्त समिति के कड़े रुख और जनप्रतिनिधियों की आपसी तकरार के कारण ही सही, लेकिन रात 9 बजे सफाई शुरू हो सकती है, तो बिहार के बाकी नगर पंचायतों में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? क्या दूसरे नगर निकायों में अफसर, अध्यक्ष और एजेंसियां मिलकर जनता के पैसे पर डाका डाल रहे हैं और डकार भी नहीं ले रहे हैं?

मुरौल की जनता के लिए यह राह थोड़ी राहत भरी जरूर है कि सड़कों पर रात में झाड़ू लग रही है और मजदूरों को हक मिलने की उम्मीद जगी है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी कायम है कि क्या यह बदलाव स्थायी है या फिर चुनावी साल बीतते ही और नया टेंडर होते ही यह झाड़ू फिर से थम जाएगी? अब देखना दिलचस्प होगा कि मुख्य पार्षद द्वारा चाही जा रही ‘लाइव डिबेट’ से भ्रष्टाचार के और कितने जिन्न बाहर निकलते हैं।

पुर की नहीं है, बल्कि यह बिहार के उन तमाम नवगठित नगर पंचायतों के लिए एक नजीर और आईना है, जहां के निवासी आज भी विकास और नागरिक सुविधाओं के नाम पर ठगे जा रहे हैं।

यदि मुरौल में सशक्त समिति के कड़े रुख और जनप्रतिनिधियों की आपसी तकरार के कारण ही सही, लेकिन रात 9 बजे सफाई शुरू हो सकती है, तो बिहार के बाकी नगर पंचायतों में ऐसा क्यों नहीं हो सकता? क्या दूसरे नगर निकायों में अफसर, अध्यक्ष और एजेंसियां मिलकर जनता के पैसे पर डाका डाल रहे हैं और डकार भी नहीं ले रहे हैं?

मुरौल की जनता के लिए यह राह थोड़ी राहत भरी जरूर है कि सड़कों पर रात में झाड़ू लग रही है और मजदूरों को हक मिलने की उम्मीद जगी है। लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी कायम है कि क्या यह बदलाव स्थायी है या फिर चुनावी साल बीतते ही और नया टेंडर होते ही यह झाड़ू फिर से थम जाएगी? अब देखना दिलचस्प होगा कि मुख्य पार्षद द्वारा चाही जा रही ‘लाइव डिबेट’ से भ्रष्टाचार के और कितने जिन्न बाहर निकलते हैं।

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मुजफ्फरपुर पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 24 घंटे में 5 अलग-अलग कांडों की अपहृत युवतियां सकुशल बरामद, मचा हड़कंप

मुजफ्फरपुर। जिले में अपराध नियंत्रण और गायब व अपहृत व्यक्तियों की सकुशल बरामदगी को लेकर वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत मुजफ्फरपुर पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए महज 24 घंटे के भीतर अलग-अलग थाना क्षेत्रों से दर्ज 5 मामलों में कुल 05 अपहृत युवतियों को सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस की इस तत्परता और त्वरित कार्रवाई से जिले में हड़कंप मच गया है।

: मुजफ्फरपुर पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के तहत 24 घंटे में बरामद की गई 05 अपहृत युवतियों के साथ मुस्तैद महिला पुलिस अधिकारी एवं पुलिस बल के जवान।

इन थाना क्षेत्रों से हुई बरामदगी

वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस की विशेष टीमों ने अलग-अलग इलाकों में छापेमारी कर युवतियों को सकुशल ढूंढ़ निकाला:

  1. सकरा थाना (मुरौल ओपी): यहाँ दर्ज एक अपहरण के कांड में त्वरित कार्रवाई करते हुए अपहृता को सकुशल बरामद किया गया।
  2. औराई थाना: औराई पुलिस ने दो अलग-अलग कांडों में कार्रवाई करते हुए कुल 02 अपहृत युवतियों को बरामद करने में सफलता पाई।
  3. बरियारपुर थाना: यहाँ दर्ज अपहरण के एक मामले में पुलिस टीम ने सफलता हासिल की और अपहृता को बरामद किया।
  4. मिठनपुरा थाना: मिठनपुरा थाना क्षेत्र से संबंधित एक मामले में भी पुलिस ने अपहृत युवती को सुरक्षित खोज निकाला।

पुलिस की मानवीय पहल और त्वरित कार्रवाई

इस अभियान के दौरान पुलिस बल की महिला अधिकारियों एवं कर्मियों ने मुस्तैदी से अपनी भूमिका निभाई। बरामद की गई सभी युवतियों को सुरक्षित थाने लाकर आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वरीय पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिले में आपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाने और अपहृतों की सकुशल बरामदगी के लिए विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस आगे की कानूनी और अग्रतर कार्रवाई में जुटी हुई है।

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बांकीपुर के रणसंग्राम का महाफैसला EVM में बंद, 3 अगस्त को खुलेगा किस्मत का पिटारा!

त्रिकोणीय मुकाबले में फंसा गढ़, बीजेपी के दावों पर राजद और जन सुराज का तीखा वार, आरोप-प्रत्यारोप के बीच मतदान संपन्न

पटना: बिहार की राजनीति के सबसे हाई-प्रोफाइल अखाड़े बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनता ने अपना फैसला ईवीएम (EVM) में बंद कर दिया है। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी के बीच मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। अब सभी राजनीतिक दलों की सांसें थम चुकी हैं और हर किसी की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं। क्या बीजेपी अपना अभेद्य किला बचाने में सफल रहेगी, क्या जन सुराज राजनीतिक उलटफेर करेगा या फिर राजद लालटेन जलाकर नया इतिहास लिखेगा?

बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव 2025 के दौरान बनाए गए एक मॉडल मतदान केंद्र पर ईवीएम (EVM) के जरिए अपने मताधिकार का प्रयोग करती महिला मतदाता। पास में तैनात मतदान अधिकारी एवं पोलिंग एजेंट प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।

मतदान का आंकड़ा:

निर्वाचन आयोग के अनुसार मतदान की शुरुआत धीमी रही, लेकिन दिन ढलने के साथ गति पकड़ी:

  • सुबह 9 बजे तक: 4.61 प्रतिशत मतदान
  • सुबह 11 बजे तक: 11.50 प्रतिशत मतदान
  • दोपहर 1 बजे तक: 20.01 प्रतिशत मतदान
  • यहां शाम 6 बजे तक 34.30 फीसदी मतदान हुआ और इसका फाइनल आंकड़ा थोड़ा बढ़ सकता है। पटना में सुबह कुछ इलाकों में बारिश और दोपहर में मौसम साफ होने के बावजूद मतदान की रफ्तार धीमी ही रही, वैसे भी बांकीपुर बिहार की उन सीटों में शामिल है जहां हमेशा मतदान का प्रतिशत कम रहता है (2025 के चुनाव में भी 41 फीसदी वोटिंग हुई थी)।

प्रतिष्ठा की जंग: त्रिकोणीय हुआ मुकाबला

बांकीपुर विधानसभा सीट को लंबे समय से बीजेपी का पारंपरिक गढ़ माना जाता रहा है। हालांकि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प हो गया है। बीजेपी की ओर से नीरज कुमार सिन्हा मैदान में हैं, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने रेखा गुप्ता को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं दूसरी तरफ, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर स्वयं चुनाव मैदान में उतरकर इस मुकाबले को बेहद कठिन बना चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव जहां बीजेपी के लिए अपनी साख बचाने की चुनौती है, वहीं प्रशांत किशोर के लिए उनके राजनीतिक वजूद और प्रतिष्ठा की सबसे बड़ी परीक्षा है।

दिग्गजों ने डाला वोट, नेताओं ने किए जीत के दावे

चुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर मतदाताओं में भारी उत्साह देखा गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

  • रामकृपाल यादव (बिहार सरकार के मंत्री): मतदान के बाद जीत का दावा करते हुए उन्होंने कहा, “बांकीपुर में बीजेपी की जीत पूरी तरह तय है। कौन हैं प्रशांत किशोर? उनकी राजनीति का बांकीपुर में कोई असर नहीं होने वाला।”
  • प्रशांत किशोर (संस्थापक व प्रत्याशी, जन सुराज): बीजेपी के दावों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, “यह हार की बौखलाहट है। जिस इलाके में वे 85 से 90 प्रतिशत वोट पाने का दावा करते थे, वहां वे बुरी तरह हार रहे हैं। इसी हताशा में बाहर से असामाजिक तत्वों को बुलाकर लोगों को डराया-धमकाया गया। दो-तीन वार्डों में प्रशासन भी उनकी मदद कर रहा था। लेकिन अब ईवीएम में उनका भविष्य बंद हो चुका है और बीजेपी का काम खत्म हो गया है।”
  • तेजस्वी यादव (नेता प्रतिपक्ष): राजद की ओर से बड़ा दावा करते हुए उन्होंने कहा, “बांकीपुर की जनता ने बदलाव का मन बना लिया है। बीजेपी की करारी हार तय है। 3 अगस्त को जब मतगणना के नतीजे आएंगे, तब बांकीपुर में लालटेन जलना तय है।”

रोहिणी आचार्या का तीखा हमला: बीजेपी पर लगाए गंभीर आरोप

मतदान के दौरान राजद नेता रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बीजेपी पर धांधली और अराजकता फैलाने का बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने के लिए बीजेपी हर गलत हथकंडा अपनाती है। विरोधी दल के कार्यकर्ताओं और पोलिंग एजेंट्स के साथ मारपीट करना, गुंडों की मदद से मतदाताओं को रोकना, सरकारी मशीनरी और पुलिस का दुरुपयोग करना तथा ईवीएम में खराबी के बहाने मतदान की प्रक्रिया को धीमा करना बीजेपी का पुराना तरीका रहा है।

कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुई प्रक्रिया

निर्वाचन आयोग द्वारा मतदान को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण कराने के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और बिहार पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों और वेबकास्टिंग के जरिए राज्य स्तर से पल-पल की निगरानी की जा रही थी। अब 3 अगस्त को मतगणना के बाद ही साफ हो पाएगा कि बांकीपुर की जनता ने किस पर अपना विश्वास जताया है।

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गया जी में लगेगा 6000 करोड़ का एकीकृत इस्पात प्लांट, हजारों युवाओं को मिलेगा रोजगार

गया जी बनेगा नया औद्योगिक केंद्र, महाशक्ति ग्रुप और उद्योग विभाग के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर

पटना, 30 जुलाई 2026: बिहार में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से गया जी जिले में 6000 करोड़ रुपये का एकीकृत इस्पात (लार्ज इंटीग्रेटेड स्टील) प्रोजेक्ट स्थापित होने जा रहा है। इस संबंध में पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में उद्योग विभाग और महाशक्ति ग्रुप के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए और उनका आदान-प्रदान किया गया।

हर साल 1.5 मिलियन टन इस्पात उत्पादन का लक्ष्य

प्रस्तावित परियोजना के तहत न्यूनतम 6000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस एकीकृत इस्पात संयंत्र की तैयार इस्पात उत्पादन क्षमता 1.0 से 1.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) होगी। इस संयंत्र के चालू होने से राज्य में इस्पात उत्पादन बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा।

पटना के संकल्प सभागार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में गया जी में 6000 करोड़ रुपये के बड़े एकीकृत इस्पात प्रोजेक्ट की स्थापना के लिए उद्योग विभाग और महाशक्ति ग्रुप के बीच एमओयू का आदान-प्रदान करते अधिकारी।

रोजगार के अवसर और छोटे उद्योगों को बढ़ावा

इस परियोजना से गया जी सहित आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर तैयार होंगे। इसके साथ ही राज्य में सहायक और लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण दे रही बिहार सरकार: सम्राट चौधरी

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में उद्योग लगाने के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है। निवेशकों को अच्छी आधारभूत संरचना, पारदर्शी नीतियां और त्वरित प्रशासनिक सहयोग दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि बिहार इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (बिआडा), उद्योग विभाग और निवेशक संस्थाओं के मिले-जुले प्रयासों से यह परियोजना तय समय सीमा के भीतर पूरी होगी।

कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

एमओयू हस्ताक्षर के दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह और उद्योग विभाग के निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता उपस्थित थे। इसके अलावा महाशक्ति ग्रुप की ओर से अनमोल लोढ़ा और विष्णु नाथ सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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परीक्षा में हाईटेक धांधली का पर्दाफाश! चप्पल में ब्लूटूथ लगाकर नकल करते 3 शातिर गिरफ्तार, पुलिस ने दबोचा

मोतिहारी। पूर्वी चम्पारण जिले के मोतिहारी में गृह रक्षा वाहिनी (होम गार्ड) सेवा संवर्ग अधिनायक अनुदेशक परीक्षा के दौरान धांधली और हाईटेक चीटिंग का एक बड़ा मामला सामने आया है। एलएनडी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर ब्लूटूथ और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए चोरी-छिपे परीक्षा दे रहे परीक्षार्थी और उसके दो सहयोगियों को नगर थाना पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है।

वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार मोतिहारी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया। पकड़े गए मुन्नाभाइयों ने नकल करने के लिए चप्पल और अन्य कपड़ों में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और ब्लूटूथ सेट कर रखा था।

नगर थाना पुलिस की हिरासत में पकड़े गए तीनों अभियुक्त अविनाश कुमार, अभिनव राज और दीपक कुमार।

पकड़े गए अभियुक्तों का विवरण:

  1. अविनाश कुमार (परीक्षार्थी), पिता: नन्दु महतो, निवासी: पिपरहिया, थाना: नवलपुर, जिला: पश्चिमी चम्पारण।
  2. अभिनव राज (सहयोगी), पिता: नन्दु महतो, निवासी: पिपरहिया, थाना: नवलपुर, जिला: पश्चिमी चम्पारण।
  3. दीपक कुमार (सहयोगी), पिता: राजदेव राम, निवासी: पिपरहिया, थाना: नवलपुर, जिला: पश्चिमी चम्पारण।

बरामद सामान: पुलिस ने अभियुक्तों के पास से 1 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (ब्लूटूथ युक्त) और 3 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

छापेमारी दल में शामिल पुलिस अधिकारी: इस त्वरित कार्रवाई में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर-01 दिलीप कुमार के नेतृत्व में नगर थाना के पुलिस अवर निरीक्षक सतीश कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक प्रमोद कुमार, पुलिस अवर निरीक्षक गौतम कुमार, महिला सहायक उप निरीक्षक 1033 अंजली कुमारी, मोतिहारी की तकनीकी शाखा और नगर थाना के सशस्त्र बल की सराहनीय भूमिका रही।

नगर थाना पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और गिरोह के अन्य कड़ियों को खंगालने के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

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सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में 1 से 2 किमी लंबी बनेगी ‘सिग्नेचर रोड’, नगर विकास विभाग का महाप्लान तैयार!

पटना। बिहार के शहरी क्षेत्रों का स्वरूप बदलने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना का खाका तैयार किया है। प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों के संपूर्ण कायाकल्प के लिए अल्पकालिक (शॉर्ट टर्म) और दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने का निर्णय लिया गया है। इस महाप्लान का मुख्य आकर्षण राज्य के हर शहर में 1 से 2 किलोमीटर लंबी मॉडल “सिग्नेचर रोड” का निर्माण करना होगा, जो शहर की एक नई और विशिष्ट पहचान बनेगी।

नगर विकास एवं आवास विभाग में विभिन्न विकास योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते मंत्री नीतीश मिश्रा। बैठक में उपस्थित प्रधान सचिव विनय कुमार, अपर सचिव मनोज कुमार, विशेष सचिव शाहिद परवेज एवं अन्य विभागीय अधिकारी।

नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों को इन हाई इम्पैक्ट शहरी विकास योजनाओं को जल्द से जल्द क्रियान्वित करने के सख्त निर्देश दिए गए। यह पूरी कार्ययोजना उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस विज़न का हिस्सा है, जिसके तहत बिहार के शहरों को आधुनिक, स्वच्छ, हरित (ग्रीन) और पूरी तरह से नागरिक-अनुकूल बनाया जाना है।

दो चरणों में पूरा होगा शहरी कायाकल्प का मिशन

सरकार ने विकास कार्यों को समयबद्ध और परिणामोन्मुखी बनाने के लिए इसे दो स्पष्ट समय-सीमाओं (डेडलाइन) में विभाजित किया है:

  1. अल्पकालिक योजनाएं (अक्टूबर 2026 तक): ऐसे सभी प्रोजेक्ट्स जिन्हें कम समय में पूरा किया जा सकता है, उन्हें अक्टूबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने की प्राथमिकता तय की गई है। इसके तहत नागरिकों को तत्काल राहत देने वाली और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हाई इम्पैक्ट योजनाओं पर तेजी से काम शुरू होगा।
  2. दीर्घकालिक योजनाएं (दिसंबर 2028 तक): बड़े और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) में व्यापक बदलाव वाले लॉन्ग टर्म डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

बैठक में शीर्ष अधिकारियों की उपस्थिति

समीक्षा बैठक के दौरान विभाग के वरीय पदाधिकारियों के साथ विभिन्न योजनाओं की प्रगति और उनकी रूपरेखा पर गहन विचार-विमर्श किया गया। बैठक में विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, अपर सचिव मनोज कुमार, विशेष सचिव शाहिद परवेज तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मंत्री नीतीश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी तय लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही पूरे करने होंगे।

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बिहार में शिक्षक भर्ती का बड़ा फैसला: TRE-4 के तहत 32,388 पदों पर होगी बहाली, शिक्षा विभाग ने BPSC को भेजी अधियाचना

पटना। बिहार के युवाओं और रोजगार की तलाश कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने टीआरई-4 (TRE-4) के तहत कुल 32,388 शिक्षकों की नई नियुक्ति को लेकर आधिकारिक घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि शिक्षा विभाग की ओर से इन सभी पदों पर भर्ती के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को अधियाचना भेज दी गई है। उन्होंने इसे राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर बताया है।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

इस घोषणा के साथ ही बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी एक्स (X) पर पोस्ट करके नियुक्ति प्रक्रिया और वर्गवार पदों का विवरण साझा किया। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सरकार ने युवाओं से किया अपना वादा पूरा कर दिया है और योग्य उम्मीदवारों को रोजगार देने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।

वर्गवार पदों का विवरण

शिक्षा विभाग द्वारा बिहार लोक सेवा आयोग को भेजी गई अधियाचना के अनुसार, प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक कुल 32,388 पदों पर शिक्षकों की सीधी नियुक्ति की जाएगी। पदों का श्रेणीवार ब्योरा इस प्रकार है:

  • कक्षा 1 से 5 (प्राथमिक शिक्षक): 3,847 पद
  • कक्षा 6 से 8 (मध्य विद्यालय शिक्षक): 8,563 पद
  • कक्षा 9 से 10 (माध्यमिक शिक्षक): 3,877 पद
  • कक्षा 11 से 12 (उच्च माध्यमिक शिक्षक): 16,101 पद
  • कुल पदों की संख्या: 32,388 पद

उच्च माध्यमिक में सबसे ज्यादा अवसर

जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक बहाली उच्च माध्यमिक विद्यालयों (कक्षा 11 से 12) में होने जा रही है, जहां 16,101 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इसके अलावा कक्षा 6 से 8 के लिए 8,563 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इस फैसले के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों में उत्साह देखा जा रहा है। बीपीएससी जल्द ही इस भर्ती परीक्षा का आधिकारिक विज्ञापन और आवेदन से जुड़ी तिथियों की घोषणा करेगा।

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बिहार के शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी खबर: प्रोबेशन पीरियड वाले टीआरई-3 शिक्षकों के तबादले पर लगा बैन हटा, अब ऑनलाईन कर सकेंगे आवेदन

पटना। बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने राज्य के लाखों शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और प्रधान शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए तबादले की नीति में ऐतिहासिक बदलाव किया है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के कड़े और स्पष्ट निर्देशों के बाद विभाग ने टीआरई-3 के परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) में कार्यरत शिक्षकों के स्थानांतरण पर लगी रोक को हटा दिया है। इस फैसले से अब परिवीक्षा अवधि में कार्य कर रहे शिक्षक, प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षक भी तबादले के लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

पटना में शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी विभागीय अधिकारियों के साथ प्रोबेशन पीरियड में कार्यरत शिक्षकों एवं टीआरई-3 तबादला नीति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करते हुए।

21 जुलाई के आदेश में संशोधन, नियम-11 का हुआ प्रयोग

उल्लेखनीय है कि शिक्षा विभाग द्वारा 21 जुलाई 2026 को जारी विस्तृत दिशा-निर्देशों में परिवीक्षा अवधि (प्रोबेशन पीरियड) में कार्यरत शिक्षकों को स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था। इस फैसले से टीआरई-3 के हजारों शिक्षकों के बीच गहरी मायूसी और असमंजस की स्थिति बन गई थी।

शिक्षकों से प्राप्त सुझावों और व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस पर तत्काल संज्ञान लिया। इसके बाद बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली, 2026 के नियम-11 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए पहली स्थानांतरण प्रक्रिया के लिए इस कड़े प्रावधान में ढील दी गई है।

सामान्य शिक्षकों की तरह मिलेगा समायोजन और पारस्पारिक तबादले का मौका

विभाग द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, टीआरई-3 के शिक्षक अब सामान्य शिक्षकों की तरह ही:

  1. समायोजन (समानुपातीकरण/रैशनलाइजेशन)
  2. पारस्परिक स्थानांतरण (म्यूचुअल ट्रांसफर)

के लिए ऑनलाइन आवेदन करने हेतु पूरी तरह पात्र होंगे। स्थानांतरण की यह पूरी प्रक्रिया शिक्षा विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बेहद पारदर्शी तरीके से संचालित की जाएगी। संशोधन के अतिरिक्त अधिसूचना के अन्य सभी नियम एवं शर्तें पूर्ववत लागू रहेंगी।

शिक्षक हित में राज्य सरकार संवेदनशील: शिक्षा मंत्री

इस महत्वपूर्ण निर्णय पर विचार रखते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षकों के हितों और उनकी व्यावहारिक समस्याओं को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। शिक्षकों द्वारा मिली प्रतिक्रियाओं और व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। उन्होंने दोहराया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और शिक्षक-हितैषी बनाना है।

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एमडीडीएम कॉलेज में गूंजा चुनावी हुंकार: छात्राएं बनेंगी देश की तकदीर, अधिकारियों संग छात्राओं का बड़ा ऐलान!

मुजफ्फरपुर, 28/07/2026: महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (एमडीडीएम कॉलेज), मुजफ्फरपुर के परिसर में आज निर्वाचन साक्षरता क्लब के तत्वावधान में एक विशाल एवं प्रभावकारी निर्वाचक साक्षरता व जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष आयोजन में प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों और छात्राओं ने एक स्वर में लोकतंत्र को मजबूत करने और शत-प्रतिशत मतदान का संकल्प लिया।

मतदाता ही राष्ट्र का सच्चा निर्माता: जिला जन संपर्क अधिकारी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद मुजफ्फरपुर के जिला सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी लोकेश कुमार झा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया। छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मतदाता ही राष्ट्र का सच्चा निर्माता होता है। यदि मतदाता सही और योग्य नेता का चुनाव करेगा, तो देश का सर्वांगीण और सही विकास सुनिश्चित होगा।

एमडीडीएम कॉलेज, मुजफ्फरपुर में आयोजित निर्वाचन साक्षरता एवं मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों एवं शिक्षिकाओं के साथ छात्राएं।

जागरूकता ही लोकतंत्र की आधारशिला उपनिर्वाचन अधिकारी सत्यप्रिय कुमार ने कहा कि मतदाताओं की जागरूकता ही किसी भी समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला तय करती है। आम जनता और युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करना हम सभी का परम कर्तव्य है। वहीं, अवर निर्वाचन अधिकारी (पूर्वी मुजफ्फरपुर) ने मतदाताओं के परिचय और उनके संवैधानिक कर्तव्यों पर प्रकाश डालते हुए ‘स्वयं मतदाता बनें और दूसरों को भी बनाएं’ का प्रेरक संदेश दिया।

रोमांचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में छात्राओं ने दिखाया दम : अवर निर्वाचन अधिकारी (पश्चिमी मुजफ्फरपुर) ने कार्यक्रम के दौरान एक ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आगाज किया। इस प्रतियोगिता में महाविद्यालय की छात्राओं और शिक्षकों ने भारी उत्साह के साथ हिस्सा लिया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं में दिव्यलता, निकिता, अक्षिता, अंशु, निशि, निधि, मुस्कान और अरिजीता प्रमुख रहीं।

पोस्टर प्रदर्शनी और ‘मतदाता का महत्व‘ नाटक ने मोहा मन : राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) की छात्राओं द्वारा लोकतंत्र और मतदान पर आधारित एक से बढ़कर एक आकर्षक पोस्टर प्रस्तुत किए गए। पोस्टर निर्माण में खुशी साक्षी राज, नीतू कुमारी, नम्रता और आलीशा समसी की भूमिका उल्लेखनीय रही।

इसके साथ ही एनसीसी की छात्राओं ने “मतदाता का महत्त्व” विषय पर एक जीवंत और प्रभावकारी नाटक का मंचन किया, जिसने सभागार में मौजूद सभी लोगों को भावविभोर कर दिया। इस नाटक में हिस्सा लेने वाली प्रमुख छात्राओं में आकांक्षा, अनामिका, मृणाल, प्रिया, निकिता, निधि, लक्ष्मी, सलोनी, गुंजा, संगीता, दीप ज्योति, जिया, सोनम, रितु, सौम्या, कनकलता, परिधि, निकिता सिंह, प्रिया, अरिजीता, नेहा, श्रेया और अंजलि शामिल थीं।

एमडीडीएम कॉलेज, मुजफ्फरपुर में आयोजित निर्वाचन साक्षरता एवं मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों एवं शिक्षिकाओं के साथ विक्ट्री साइन (जीत का निशान) बनाकर उत्साह दर्शातीं छात्राएं।

निर्वाचन साक्षरता क्लब की कार्यकारिणी गठित : महाविद्यालय में निर्वाचन साक्षरता क्लब, एमडीडीएम कॉलेज की गणित विभागाध्यक्ष डॉक्टर माला को नोडल अधिकारी बनाया गया। इसके अलावा क्लब की नई कार्यकारिणी समिति में डॉक्टर रिंकु कुमारी और डॉक्टर प्रियम फ्रांसिस को शामिल किया गया।

भव्य स्वागत एवं धन्यवाद ज्ञापन : कार्यक्रम की शुरुआत में आगत अतिथियों का स्वागत पारंपरिक रूप से पुष्पगुच्छ, शॉल और हरित पौधा प्रदान कर किया गया। संगीत विभाग की छात्राओं ने सुमधुर स्वागत गान प्रस्तुत किया। पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर कुमारी सरोज ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन डॉक्टर रिंकु कुमारी द्वारा किया गया। अंत में डॉक्टर माला ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

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अफसरों को अल्टीमेटम — ‘काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं!’: 100 करोड़ की महापरियोजनाओं पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का कड़ा चाबुक,

सड़क, सिंचाई और स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी योजनाओं में तेजी लाने के सख्त निर्देश; 2,000 करोड़ का सीएसआर फंड जुटाने का विशाल लक्ष्य निर्धारित

पटना, 28 जुलाई 2026 : बिहार के विकास की रफ्तार को दोगुनी ताकत देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में चल रही महापरियोजनाओं की कमान खुद संभाल ली है। लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘बिहार गति’ के तहत चिन्हित 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विकास परियोजनाओं तथा केंद्र प्रायोजित योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार विस्तृत समीक्षा की।

बैठक में कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता किए बिना सभी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा, “बिहार ने विकास की जो रफ्तार पकड़ी है, अब उसे और आगे बढ़ाना है। काम में आने वाली हर बाधा का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।”

पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में ‘बिहार गति’ के तहत 100 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत एवं अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी।

1. सिंचाई व जल प्रबंधन: मानसून खत्म होते ही युद्ध स्तर पर शुरू होगा काम

जल संसाधन विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने का रोडमैप तय किया:

  • कोसी-मेची इंटर स्टेट लिंक परियोजना: मानसून समाप्त होते ही इसके निर्माण कार्य में पूरी ताकत के साथ तेजी लाने का निर्देश दिया गया। सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ अड़चनों को दूर करने को कहा गया।
  • नॉर्थ कोयल जलाशय परियोजना: इसके कार्यों में तेजी लाकर राज्य की सिंचाई क्षमता बढ़ाने और किसानों तक जल्द से जल्द पानी पहुँचाने पर विशेष बल दिया गया।
  • मंडाई वीयर परियोजना: इसकी नियमित निगरानी करते हुए तय समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया गया ताकि जल प्रबंधन ढाँचा और मजबूत हो सके।

2. सड़क बुनियादी ढाँचा: 6-लेन और 4-लेन कॉरिडोर से बदलेगी राज्य की तस्वीर

पथ निर्माण विभाग की समीक्षा करते हुए सम्राट चौधरी ने राज्य के विशाल रोड नेटवर्क प्रोजेक्ट्स को गति देने का निर्देश दिया:

  • वाराणसी-रांची-कोलकाता 6 लेन कॉरिडोर
  • आमस-दरभंगा 4 लेन परियोजना
  • कन्हौली-शेरपुर (एनएच-131जी) 6 लेन परियोजना

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि भूमि अधिग्रहण, वन विभाग की स्वीकृति तथा अन्य प्रशासनिक अड़चनों का तत्काल निपटारा किया जाए। इन सड़कों के बनने से राज्य में आवागमन सुगम होगा और औद्योगिक व आर्थिक गतिविधियों को भारी बढ़ावा मिलेगा।

3. स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा फैसला: 14 अगस्त तक ‘टीबी मुक्त बिहार‘ का महाअभियान

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ को और अधिक प्रभावी बनाने का निर्देश दिया:

  • 2 जुलाई 2026 से 14 अगस्त 2026 तक चलाए जा रहे विशेष टीबी मुक्त बिहार अभियान को जनभागीदारी के साथ सफल बनाने का आह्वान किया।
  • राज्य के सभी बंद पड़े टीबी केंद्रों को तुरंत पूर्णतः कार्यशील बनाने का आदेश दिया गया।
  • हर प्रखंड, पंचायत और गाँव तक मोबाइल स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से संभावित मरीजों की पहचान की जाएगी।
  • मरीजों को समय पर इलाज, मुफ्त दवाएं और पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

4. 2,000 करोड़ रुपये का विशाल सीएसआर फंड जुटाने का लक्ष्य

राज्य के समग्र विकास के लिए कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के जरिए 2,000 करोड़ रुपये का फंड जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने उद्योगों और कॉर्पोरेट संस्थाओं के साथ बेहतर समन्वय बनाकर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। इस फंड का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, खेल, महिला सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जाएगा।

बैठक में मौजूद प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी:

इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में राज्य प्रशासन के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जयकुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव चंद्रशेखर सिंह, खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अवनीश कुमार सिंह तथा राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय सहित अन्य सभी संबंधित विभागों के वरीय अधिकारी मौजूद रहे।

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