72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान: गुजरात के एकता नगर में लगेगा बॉलीवुड से लेकर साउथ के दिग्गजों का जमावड़ा!

कार्तिक आर्यन और ममूटी बने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, यामी गौतम को मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का ताज; ‘आर्टिकल 370′ चुनी गई बेस्ट फीचर फिल्म।

नई दिल्‍ल‍ी : भारतीय सिनेमा के 70 से अधिक वर्षों के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सांस्कृतिक विविधता और क्षेत्रीय सिनेमा को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से एक बड़ा और दूरगामी नीतिगत निर्णय लिया है। अब तक देश की राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन तक सीमित रहने वाले प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को इस बार राजधानी से बाहर ले जाया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर 2026 को गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित ऐतिहासिक एकता नगर (केवडिया) में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। यह आयोजन न केवल वर्ष 2024 में प्रदर्शित उत्कृष्ट भारतीय फिल्मों और कला साधना को सम्मानित करेगा, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की उस मूल भावना को भी मूर्तरूप देगा, जो देश के हर भाषाई और क्षेत्रीय सिनेमा को एक धागे में पिरोती है।

वर्ष 2024 के सिनेमाई महासमर का परिणाम: दमदार विषय-वस्तु और अभिनय की जीत

इस वर्ष के पुरस्कारों का बारीक विश्लेषण करें तो यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय जूरी ने व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ विषय-वस्तु की गंभीरता, सामाजिक प्रभाव और उच्चस्तरीय कलात्मक मूल्यों को प्राथमिकता दी है:

  • सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म (आर्टिकल 370′): राष्ट्र के महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय और सुरक्षा तंत्र की अंदरूनी रणनीतियों को पर्दे पर जीवंतता से उभारने वाली फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को देश की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म घोषित किया गया है। यह फिल्म सिनेमाई कसावट और पटकथा की मजबूती के बल पर जूरी की पहली पसंद बनी।
  • सर्वश्रेष्ठ मुख्य अभिनेता (ममूटी और कार्तिक आर्यन): इस बार मुख्य अभिनेता का शीर्ष सम्मान दो अलग-अलग पीढ़ियों और शैलियों के कलाकारों के बीच साझा हुआ है। दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार ममूटी को मलयालम हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘ब्रह्मयुगम’ में उनके अद्वितीय और बहुआयामी अभिनय के लिए चुना गया है। वहीं, बॉलीवुड के युवा स्टार कार्तिक आर्यन को स्पोर्ट्स-बायोपिक ‘चंदू चैंपियन’ में भारत के पहले पैरालिंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर के कठिन किरदार को पर्दे पर पूरी निष्ठा और शारीरिक बदलाव के साथ जीने के लिए यह सम्मान मिला है।
  • सर्वश्रेष्ठ मुख्य अभिनेत्री (यामी गौतम): फिल्म ‘आर्टिकल 370’ में एक एनआईए (NIA) अधिकारी की चुनौतीपूर्ण भूमिका को संयमित, दृढ़ और प्रभावशाली तरीके से निभाने के लिए यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ मुख्य अभिनेत्री के राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है।
  • सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक (रणदीप हुड्डा): ऐतिहासिक और जीवनी पर आधारित फिल्म ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ के जरिए अपने निर्देशन की शुरुआत करने वाले रणदीप हुड्डा को सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का पुरस्कार मिला है। फिल्म में उनके गहन शोध और बारीक निर्देशन शैली की काफी सराहना की गई है।

गैर-फीचर और डॉक्यूमेंट्री श्रेणी: वास्तविक जीवन के संघर्षों का दस्तावेजीकरण

सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का दर्पण भी है। गैर-फीचर फिल्म वर्ग में ‘भंगार’ ने सर्वश्रेष्ठ नॉन-फीचर फिल्म का खिताब अपने नाम किया, जबकि जूरी ने ‘राम-नामी’ को देश का सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) घोषित किया है। ये कृतियां जमीनी स्तर की वास्तविकताओं और सांस्कृतिक धाराओं को मुख्यधारा में लाने का काम करती हैं।

इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ संथाली सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं का लहराया परचम

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का सबसे ऐतिहासिक पहलू यह रहा कि गैर-फीचर फिल्म वर्ग में पहली बार किसी संथाली भाषा की फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। यह भारत की जनजातीय भाषाओं और उनकी मौखिक व दृश्य परंपराओं के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

इसके अलावा यह समारोह भारत की भाषाई बहुलता का प्रत्यक्ष प्रमाण बना। मराठी, संथाली, तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, तुलु और गढ़वाली जैसी कई भाषाओं की कृतियों ने अपनी छाप छोड़ी। बॉक्स ऑफिस पर अपार जनसमर्थन जुटाने वाली और तकनीकी रूप से उन्नत फिल्मों जैसे:

  1. ‘कल्कि 2898 ईस्वी’
  2. ‘अमरन’
  3. ‘पुष्पा: द रूल पार्ट-02’
  4. ‘भूल भुलैया 3’
  5. ‘स्त्री 2’

ने विभिन्न तकनीकी और कलात्मक श्रेणियों में पुरस्कार जीतकर यह साबित किया कि जनप्रिय सिनेमा भी राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर सकता है।

सिनेमा पर गंभीर चिंतन: आलोचना और शोध भी सम्मानित

सिनेमा को वैचारिक और दार्शनिक धरातल प्रदान करने वाले लेखकों को भी इस मंच से सम्मान मिला है:

  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक: संजीव श्रीवास्तव को सिनेमाई बारीकियों के सटीक और निष्पक्ष विश्लेषण के लिए वर्ष का सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक चुना गया है।
  • सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक: डॉ. प्रदीप केंचनुरु द्वारा रचित और मिरर बुक्स द्वारा प्रकाशित कन्नड़ सिनेमा के राजनीतिक और दार्शनिक पहलुओं का अध्ययन करने वाली कृति— नानिरुवुदे निमगागी, नादिरुवुदे ननगागीः कन्नड सिनेमाद तात्विक मत्तु राजकीय (आई स्टैंड फॉर यू, द स्टेट स्टैंड्स फॉर असः पॉलिटिकल एंड फिलॉसॉफिकल डाइमेंशन्स ऑफ कन्नड़ सिनेमा)—को सर्वश्रेष्ठ पुस्तक का पुरस्कार देने की घोषणा हुई है।

दिल्ली से एकता नगर (केवडिया) तक का सफर क्यों है खास?

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1954 में हुई थी। पिछले सात दशकों में यह पहला मौका है जब इतने बड़े स्तर पर समारोह को दिल्ली से दूर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की छाया में आयोजित किया जा रहा है। यह कदम भारत सरकार के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत देश के बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों को राज्यों की प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों तक ले जाया जा रहा है।

22 सितंबर को जब सरदार वल्लभभाई पटेल की विशाल प्रतिमा के साये में भारतीय सिनेमा के दिग्गज एकत्र होंगे, तब यह केवल एक पुरस्कार वितरण समारोह नहीं होगा, बल्कि पूरे भारत की कला, भाषा और अखंडता का एक ऐतिहासिक जश्न होगा।

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