‘एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम‘ योजना के तहत केंद्र सरकार ने लागू की व्यवस्था, अब देश भर में पढ़ाई का होगा एक ही पैटर्न
नई दिल्ली: देश की स्वास्थ्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई पहल की है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (एनसीएएचपी) के नियामक ढांचे के अंतर्गत 33 नई अवर स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) डिग्रियों को अधिसूचित किया है, साथ ही 21 पुरानी डिग्रियों के ढांचे का पुनर्गठन किया है। इस निर्णय से देश भर में स्वास्थ्य शिक्षा की गुणवत्ता और संरचना में सुधार देखने को मिलेगा।

यूजीसी का 5वां संशोधन लागू
यूजीसी ने 27 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना संख्या एफ.21-12/2026 (सीपीपी-I) (यूआईएन: 3/2026) के माध्यम से यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 22 (3) में 5वां संशोधन किया है, जो 31 अगस्त 2026 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया जा चुका है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य देश भर में संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा शिक्षा में अधिक एकरूपता और स्पष्टता लाना है।

‘एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम‘ से आएगी एकरूपता
इस विषय में जानकारी देते हुए एनसीएएचपी अध्यक्ष यज्ञ उन्मेश शुक्ला ने बताया कि यह कदम ‘एक राष्ट्र, एक पाठ्यक्रम’ के तहत उठाया गया है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय, यूजीसी और एनसीएएचपी टीम के इस संयुक्त प्रयास की सराहना की। यज्ञ उन्मेश शुक्ला के अनुसार, अब पूरे देश में पाठ्यक्रमों की अवधि, डिग्री का नामकरण और प्रवेश योग्यताएं एक समान रहेंगी, जिससे छात्रों को अपने करियर में स्पष्टता मिलेगी।

इन प्रमुख क्षेत्रों में होगा बदलाव
अधिसूचित पाठ्यक्रमों में मुख्य रूप से फिजियोथेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, ऑप्टोमेट्री, मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी, एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी, न्यूट्रिशन और डायटेटिक्स, साइकोलॉजी, मेडिकल और सोशल साइकियाट्रिक सोशल वर्क, मेडिकल रेडियोलॉजी, इमेजिंग और थेरेप्यूटिक टेक्नोलॉजी, फिजिशियन एसोसिएट, रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी, डायलिसिस थेरेपी टेक्नोलॉजी और हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट जैसे विषय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त स्नातकोत्तर स्तर पर विशेषज्ञता के लिए भी प्रावधान किए गए हैं, जिनमें:

- मास्टर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी: 9 विशेषज्ञताएं
- मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी: 8 विशेषज्ञताएं
- मास्टर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंसेज: 4 विशेषज्ञताएं
- मास्टर ऑफ मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी: 3 विशेषज्ञताएं
- मास्टर ऑफ रेस्पिरेटरी टेक्नोलॉजी: 2 विशेषज्ञताएं
शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू करने का निर्देश
एनसीएएचपी ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित शिक्षण संस्थानों को शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से इन पाठ्यक्रमों को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसमें डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (डीएमएलटी) का विकल्प भी शामिल है। नए ढांचे में प्रैक्टिकल और क्लिनिकल ट्रेनिंग पर विशेष बल दिया गया है, ताकि छात्रों को अस्पतालों में पर्याप्त व्यावहारिक अनुभव मिल सके।
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