- राष्ट्रीय सेमिनार में जुटे देशभर के दिग्गज: सीसीआरएच और एनएचआरआईएमएच ने तैयार किया एआई का रोडमैप।
- 9 बड़े मेडिकल कॉलेजों के साथ हुआ समझौता: मानसिक स्वास्थ्य और शोध को मिलेगी नई रफ्तार।
कोट्टायम / नई दिल्ली: पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में जब अत्याधुनिक तकनीक का समावेश होता है, तो स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात होता है। ऐसा ही एक क्रांतिकारी बदलाव भारत की सदियों पुरानी और विश्वसनीय होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में देखने को मिल रहा है। केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच), आयुष मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान (एनएचआरआईएमएच), कोट्टायम ने 31 अगस्त 2026 को “नैदानिक अभ्यास और होम्योपैथी में कृत्रिम मेधा (एआई) का अनुप्रयोग” विषय पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आयोजन किया। “बुद्धि और जुनून का संगम” थीम के तहत आयोजित इस ऐतिहासिक सेमिनार में स्वास्थ्य देखभाल और होम्योपैथिक अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उभरते अनुप्रयोगों पर देश के नामचीन विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों और छात्रों ने हिस्सा लिया और विस्तृत मंथन किया।

केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री ने बताया भविष्य का रोडमैप
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने इस राष्ट्रीय सेमिनार को डिजिटल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की बढ़ती प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए कहा कि होम्योपैथी के क्षेत्र में इसके जिम्मेदार और सटीक अनुप्रयोग पर व्यापक चर्चा समय की मांग है। उन्होंने जोर दिया कि तकनीक का सही उपयोग मरीजों की व्यक्तिगत देखभाल और सटीक दवा चयन में मील का पत्थर साबित होगा।

मानवीय देखरेख और कड़े नैतिक सुरक्षा उपाय अनिवार्य
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सीसीआरएच के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान में एआई का लाभ उठाने के लिए इसकी विशाल क्षमताओं और नैतिक आयामों को गहराई से समझना होगा। सेमिनार में सर्वसम्मति से इस बात पर बल दिया गया कि होम्योपैथी में एआई के उपयोग के दौरान मानवीय देखरेख ,वैज्ञानिक पुष्टि , डेटा की विश्वसनीयता और कड़े नैतिक सुरक्षा उपाय सर्वोपरि होने चाहिए। एआई डॉक्टर का स्थान नहीं लेगा, बल्कि चिकित्सक के लिए एक बेहद सटीक ‘डिसीजन सपोर्ट सिस्टम’ के रूप में कार्य करेगा।
मानसिक स्वास्थ्य व शोध को बढ़ावा देने के लिए 9 बड़े एमओयू पर हस्ताक्षर
इस राष्ट्रीय सेमिनार की सबसे बड़ी उपलब्धि अनुसंधान और शैक्षणिक सहयोग का विस्तार रही। मनोरोग और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में रिसर्च को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए देश के 9 प्रमुख होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के साथ ऐतिहासिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही, अंतर-विषयक अनुसंधान और संस्थागत तालमेल को मजबूती देने के लिए सेवाभारती, एट्टुमानूर के साथ भी एक विशेष एमओयू किया गया।

देशभर के 12 से अधिक मेडिकल कॉलेजों की सहभागिता
एनएचआरआईएमएच के सहायक निदेशक (होम्योपैथी) एवं प्रभारी अधिकारी डॉ. देबदत्त नायक ने बताया कि इस सेमिनार में भारत भर के लगभग 12 होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेजों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ केरल के अग्रणी डॉक्टरों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को सीसीआरएच के उप महानिदेशक डॉ. के. सी. मुरलीधरन, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जनार्दनन नायर और एनएचआरआईएमएच की क्षेत्रीय वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ईश्वर दास ने भी संबोधित किया। तकनीकी सत्रों के दौरान एआई-संचालित क्लीनिकल निर्णय, शोध की नैतिक सीमाओं और तकनीकी अनुप्रयोगों पर वैज्ञानिकों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।

होम्योपैथी में एआई का क्या पड़ेगा प्रभाव?
- सटीक दवा चयन : होम्योपैथी में हर मरीज के शारीरिक और मानसिक लक्षणों के आधार पर दवा तय होती है। एआई लाखों मरीजों के डेटा का विश्लेषण कर चिकित्सक को मिनटों में सबसे सटीक होम्योपैथिक दवा चुनने में मदद करेगा।
- मानसिक रोगों का त्वरित निदान: एनएचआरआईएमएच द्वारा किए जा रहे प्रयासों से न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य विकारों के पैटर्न को शुरुआती स्तर पर पकड़ना आसान होगा।
- वैज्ञानिक पुष्टि और वैश्विक मान्यता: एआई की मदद से होम्योपैथिक दवाओं के प्रभाव, क्लीनिकल ट्रायल्स और मौलिक अनुसंधान का डेटा पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा।

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