अब अभिनय और थिएटर की बारीकियां सीखने दिल्ली नहीं जाएंगे राज्य के होनहार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुरोध पर केंद्र ने दी मंजूरी; बिहार सरकार देगी मुफ्त जमीन और 50 प्रतिशत निर्माण लागत
पटना, 01 सितंबर 2026 : बिहार के सांस्कृतिक इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। राज्य के युवाओं और रंगकर्मियों की बरसों पुरानी मुराद पूरी करते हुए केंद्र सरकार ने बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा – NSD) के नए कैंपस की स्थापना को अपनी आधिकारिक सहमति प्रदान कर दी है। केंद्र सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले की खबर मिलते ही राज्यभर के रंगकर्मियों, नाट्य प्रेमियों और युवा कलाकारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विशेष अनुरोध पर केंद्र सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है। इस मील के पत्थर जैसे निर्णय पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति राज्य की जनता की ओर से हार्दिक आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य का यह समन्वित प्रयास बिहार की समृद्ध नाट्य और प्रदर्शन कला परंपरा को न केवल राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान देगा, बल्कि अपार नई संभावनाएं भी पैदा करेगा।
सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी संस्थागत मजबूती
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध, विविधतापूर्ण और गौरवशाली रही है। यह महान महाकवि कालिदास, साहित्यकार रामवृक्ष बेनीपुरी और लोक नाट्य के जनक भिखारी ठाकुर जैसी विभूतियों की पावन कर्मभूमि रही है। बिहार के लोक नाट्य और प्रदर्शन कलाओं की अपनी एक विशिष्ट पहचान है। ऐसे में राज्य में एनएसडी का नया कैंपस खुलने से इस सांस्कृतिक विरासत को मजबूत संस्थागत आधार और संरक्षण मिलेगा।

युवा कलाकारों का पलायन रुकेगा, राज्य में ही मिलेगा विश्वस्तरीय प्रशिक्षण
अब तक बिहार के प्रतिभाशाली युवाओं को अभिनय, स्टेजक्राफ्ट, लाइट-साउंड डिजाइनिंग, डायरेक्शन और थिएटर के विभिन्न विषयों में पेशेवर प्रशिक्षण (प्रोफेशनल ट्रेनिंग) प्राप्त करने के लिए दिल्ली या देश के अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन बिहार में एनएसडी कैंपस की स्थापना होने के बाद युवाओं का दूसरे राज्यों में जाने का पलायन काफी कम हो जाएगा। उन्हें अपने ही राज्य में अभिनय और प्रदर्शन कला के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उन्नत अनुसंधान और शोध (रिसर्च) के नए रास्ते खुलेंगे।

50 प्रतिशत खर्च और जमीन देगी बिहार सरकार
एनएसडी कैंपस की स्थापना प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए बिहार सरकार अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही है। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य सरकार संस्थान के निर्माण के लिए सर्वसुविधायुक्त उपयुक्त भूमि (जमीन) उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही, भवन निर्माण की स्वीकृत कुल लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा (राज्यांश) बिहार सरकार खुद वहन करेगी। राज्य सरकार की ओर से सभी प्रशासनिक स्वीकृतियों और कार्यों में पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है ताकि संस्थान का निर्माण कार्य अविलंब शुरू हो सके।
लोक नाट्य और आधुनिक थिएटर का ऐतिहासिक संगम
सरकार का मानना है कि एनएसडी के आगमन से बिहार की पारंपरिक लोक नाट्य कलाओं और आधुनिक थिएटर के बीच एक मजबूत समन्वय स्थापित होगा। बिहार की समृद्ध लोक कलाओं, पारंपरिक नाट्य शैलियों और आधुनिक थिएटर तकनीकों को एक साथ आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा। इससे स्थानीय परंपराएं सुरक्षित होकर नई पीढ़ी तक पहुंचेंगी और उन्हें राष्ट्रीय मंच पर स्थापित होने में मदद मिलेगी।

तैयार होगी थिएटर की नई पीढ़ी
राज्य सरकार ने नाट्य कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और समन्वय के उद्देश्य से पहले ही बिहार संगीत नाट्य अकादमी की स्थापना की है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के इस प्रतिष्ठित संस्थान (एनएसडी) की मौजूदगी राज्य के चल रहे प्रयासों को और अधिक धार देगी। इससे बिहार में थिएटर की एक पूरी नई पेशेवर पीढ़ी तैयार होगी और स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का सीधा अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री का संदेश:
“बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय का कैंपस खुलना केवल एक नए शैक्षणिक संस्थान की स्थापना नहीं है, बल्कि यह राज्य की सांस्कृतिक विरासत, युवा प्रतिभाओं और आधुनिक रंगमंच के भविष्य में एक महत्वपूर्ण निवेश है। केंद्र और बिहार सरकार के समन्वित प्रयास से यह संस्थान राज्य को राष्ट्रीय रंगमंच के मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा।” — सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री, बिहार
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