पटना में बनेगा वर्ल्ड ट्रेड सेंटर: ग्लोबल बिजनेस लेगा आकार , 4,000 करोड़ का निवेश और 8,000 करोड़ का राजस्व!

पटना : 13 अगस्त 2026  : बिहार की राजधानी पटना को अंतरराष्ट्रीय स्तर का व्यापारिक और इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। राजधानी पटना में अब ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ का निर्माण होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक के दौरान नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) की ओर से पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की स्थापना समेत शहर के विभिन्न प्रमुख इलाकों के पुनर्विकास का विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया।

इन प्रमुख इलाकों की बदलेगी सूरत

बैठक में राजधानी के पुराने और जर्जर सरकारी भवनों एवं भूखंडों के बेहतर इस्तेमाल पर गहन मंथन हुआ। एनबीसीसी द्वारा प्रस्तुत कार्ययोजना के तहत निम्नलिखित प्रमुख भूखंडों का पुनर्विकास किया जाएगा:

  1. बिहार म्यूजियम – नेहरू पथ के सामने स्थित भूखंड
  2. गर्दनीबाग स्थित भूखंड
  3. भूतनाथ सेक्टर-6 स्थित भूखंड
  4. बोरिंग कैनाल रोड स्थित भूखंड

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि पुराने और जर्जर सरकारी भवनों के स्थान पर आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार पुनर्निर्माण का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जाए।

लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में पटना के पुनर्विकास एवं वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के निर्माण प्रस्ताव पर समीक्षा बैठक करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, साथ में मौजूद नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी।

टाउनशिप प्रोजेक्ट्स और अन्य शहरों का विकास

पटना के समग्र और सुनियोजित विकास के लिए ‘पाटलिपुत्र टाउनशिप’ में लगभग 2,000 एकड़ जमीन और अन्य टाउनशिप क्षेत्रों में लगभग 1,000 एकड़ जमीन पर अत्याधुनिक विकास व पुनर्विकास की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

केवल पटना ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य प्रमुख शहरों को भी इस विकास मॉडल से जोड़ने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने गया, भागलपुर, बेगूसराय और दरभंगा जैसे प्रमुख शहरों में भी उपयुक्त सरकारी जमीनों को चिह्नित कर उनके समेकित एवं एकीकृत विकास की योजना तैयार करने पर विशेष जोर दिया।

4,000 करोड़ का निवेश और 8,000 करोड़ का राजस्व

एनबीसीसी द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों के अनुसार, इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं से पटना और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 4,000 करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है। इसके साथ ही, इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से राज्य सरकार को लगभग 8,000 करोड़ रुपये का राजस्व (रेवेन्यू) प्राप्त होने का अनुमान जताया गया है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में आधुनिक तकनीक और उच्च पर्यावरणीय मानकों का अनिवार्य रूप से पालन किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से जीरो वेस्ट मॉडल अपनाने का निर्देश दिया, ताकि निर्माण के दौरान पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुँचे और अपशिष्ट का शत-प्रतिशत पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) हो सके।

बैठक में ये वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

जीरो वेस्ट मॉडलऔर आधुनिक तकनीक पर जोर

समीक्षा बैठक में राज्य सरकार और एनबीसीसी के कई शीर्ष अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें प्रमुख हैं:

  • नगर विकास एवं आवास सह सूचना प्रावैधिकी मंत्री नीतीश मिश्रा
  • मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार
  • मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत
  • ग्रामीण कार्य सह सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह
  • मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह
  • भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार
  • नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव अनिमेष पराशर
  • नगर विकास एवं आवास विभाग के विशेष सचिव नीलेश रामचंद्र देवरे
  • पटना के नगर आयुक्त यशपाल मीणा
  • एनबीसीसी के चेयरमैन डॉक्टर के पी महादेव स्वामी

तथा एनबीसीसी के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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