आकर देखिए इंजीनियरिंग का ‘अजूबा’ : टेढ़ा प्लिंथ, खराब चाबियाँ और चाय दुकान में पड़ा है पानी टंकी का ढक्कन!
सरकारी पैसे की डकैती! छुटभैया नेता को रतौंधी , 4 महीने से खुली पड़ी है टंकी, साफ पानी के नाम पर मौत परोस रहा ठेकेदार!
रिपोर्ट : एस. एस. कुमार ‘पंकज’
सकरा (मुजफ्फरपुर): सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भ्रष्टाचारियों की भेंट चढ़ चुकी है। इसका सबसे जीता-जागता और शर्मनाक नमूना देखना हो तो सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 में चले आइए। यहाँ नवनिर्मित नल-जल योजना विकास का नहीं, बल्कि आकंठ भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका है। लाखों की लागत से बनी पानी टंकी आज सफेद हाथी बनकर खड़ी है, जबकि आम जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है।

इस वार्ड में पिछले 4 महीनों से नल-जल योजना की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। दर्जनों ऐसे परिवार हैं जिनके दरवाजों तक पाइप लाइन पहुँचाकर कनेक्शन तो दे दिया गया, लेकिन पिछले 4 महीनों से उन्हें पानी की एक बूंद भी मयस्सर नहीं हुई है। विडंबना देखिए कि जिन नलों से स्वच्छ पेयजल बहना चाहिए था, आज लोग उन नलकों में अपनी बकरियाँ बांधने को मजबूर हैं। ठेकेदार, भ्रष्ट अधिकारियों और क्षेत्र के छुटभैये जनप्रतिनिधियों की तिकड़ी ने मिलकर सारा माल समेट लिया और अपना उल्लू सीधा कर जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया।
घरों के नलके बने बकरी बांधने का खूंटा! : डिजिटल इंडिया का नया ‘खूंटा मॉडल’, इंसानों के हिस्से का पानी तो गायब, अब बकरियाँ चबा रही हैं सुशासन का नलका!
अगर आपको ‘हर घर नल-जल योजना’ की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक सफलता देखनी है, तो सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 में प्रगति कार्यालय के पीछे स्वर्गीय अरुण सहनी के घर के सामने चले आइए। सरकार ने यहाँ पानी तो नहीं पहुँचाया, लेकिन पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए एक अद्भुत ‘खूंटा’ जरूर गाड़ दिया है। पिछले 4 महीनों से इस पाइप में पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है, जिसके बाद समझदार स्थानीय नागरिकों ने इसका सबसे बेहतरीन उपयोग ढूंढ निकाला है। जैसा कि तस्वीर में साफ दिख रहा है, लाखों रुपये के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का नलका आज बकरियाँ बांधने के काम आ रहा है। अधिकारी और ठेकेदार फाइलों में पानी बहाकर अपनी जेबें भर चुके हैं, और यहाँ धरातल पर बेजुबान जानवर इस सूखे पाइप से बंधी रस्सी के सहारे सुशासन के दावों को चबा रहे हैं। इंजीनियरिंग का ऐसा ‘मल्टीपर्पज’ इस्तेमाल शायद ही पूरे देश में कहीं और देखने को मिले, जहाँ इंसान प्यासा है और सरकारी नलका खूंटे का धर्म निभा रहा है!

खुली टंकी से आ रहा दूषित पानी, कौवे और हड्डियों का खतरा!
वार्ड संख्या 6 की जनता पिछले 4 महीनों से एक बड़े खतरे के साए में जी रही है। पानी की टंकी ऊपर से पूरी तरह खुली हुई है। ठेकेदार की लापरवाही का आलम यह है कि टंकी का ढक्कन पास की ही एक चाय दुकान में लावारिस हालत में पड़ा हुआ है। खुली टंकी के ऊपर दिनभर चिड़ियाँ, कौवे और अन्य पक्षी बैठते हैं। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है कि कोई भी पक्षी उसमें हड्डी या कोई अन्य अनर्गल व जहरीला पदार्थ गिरा सकता है, जिससे पूरे मोहल्ले में महामारी फैल सकती है। इस खुली टंकी के कारण लोगों को दूषित पानी की सप्लाई हो रही है, जो न तो खाना बनाने के योग्य है और न ही पूजा-पाठ के लायक।

घटिया निर्माण: रातभर टपकता है पानी, कभी भी गिर सकता है लोहे का टावर!
इस पूरी योजना में निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किया गया है। लोहे का जो भारी-भरकम टावर खड़ा किया गया है, उसकी प्लेटों को भी ठीक से नहीं कसा गया है। यह कमजोर टावर कभी भी गिर सकता है और जान-माल की बड़ी क्षति हो सकती है। यही नहीं, घटिया निर्माण के कारण रातभर टंकी से पानी टपकता रहता है, जिसकी ‘टप-टप’ की आवाज सीधे नीचे बनी टीन की छत पर गिरती है। इस शोर के कारण टंकी के आस पास के लोग रातभर सो नहीं पाते हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ ही महीनों में टीन का यह शेड जंग लगकर पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

अफसरशाही का शर्मनाक चेहरा: ठेकेदार के बचाव में उतरे पीएचडी अभियंता राहुल तिवारी, बिना एस्टिमेट देखे ही बांट दिया क्लीन चिट!
इस महाघोटाले को लेकर जब जनस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के अभियंता राहुल तिवारी से इसके निर्माण और घटिया गुणवत्ता के संबंध में शिकायत के लहजे में बात की गई, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना और चौंकाने वाला रहा। जनता की तकलीफें सुनने के बजाय अभियंता राहुल तिवारी सीधे तौर पर दागी ठेकेदार के बचाव में उतर आए। जब उनसे पाइप लाइन में चाबियाँ (वाल्व) न होने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि इसमें चाबी लगाने की जानकारी इसके एस्टिमेट (प्राक्कलन) में दर्शाई गई होगी। हद तो तब हो गई जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने खुद कभी इस निर्माण से जुड़ी एस्टिमेट की कॉपी देखी है? इस पर उन्होंने साफ इनकार कर दिया। बिना प्लास्टर का टेढ़ा-मेढ़ा सीमेंटेड प्लिंथ, महीनों से खराब पड़ी एकमात्र चाबी और पंप पर संचालक व समय-सीमा की जानकारी न होने जैसे गंभीर सवालों को वे पूरी तरह टाल गए। बिना कागजात देखे और बिना स्थलीय हकीकत जाने ठेकेदार की पैरवी करना यह साफ बयां करता है कि भ्रष्टाचार के इस खेल में इंजीनियर से लेकर ठेकेदार तक का मजबूत गठजोड़ काम कर रहा है।

नीमतल्ला रोड बना खंडहर , 15 दिनों से खुदा पड़ा है गड्ढा!
घटिया और तीन नंबर के पाइपों के इस्तेमाल के कारण पूरे मोहल्ले में करीब आधा दर्जन जगहों पर पाइप लीकेज की गंभीर समस्या है। वार्ड 6 के ही नीमतल्ला रोड में गंगा इलेक्ट्रॉनिक के सामने पिछले 3 महीनों से लगातार पानी रिसकर सड़क पर बह रहा है। हद तो तब हो गई जब लगभग 15 दिन पहले गंगा इलेक्ट्रॉनिक के सामने मुख्य सड़क को मरम्मत के नाम पर खोद दिया गया और फिर उसे वैसे ही लावारिस छोड़ दिया गया। अब स्थिति यह है कि आते-जाते असावधान राहगीर और स्थानीय लोग इस गहरे गड्ढे में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।

चुनाव जीतने के बाद गायब हुईं पार्षद रीता कुमारी, पार्षद पति बोले- ‘मैं पार्षद थोड़े ही हूँ‘
जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं है। वार्ड संख्या 6 की निर्वाचित पार्षद रीता कुमारी नगर पंचायत चुनाव में जीत हासिल करने के बाद आज तक कभी मोहल्ले में शक्ल दिखाने भी नहीं आईं। उनके पार्षद पति को काम की कोई समझ नहीं है; वे बस चौबीसों घंटे अपनी पार्टी का झंडा ढोने और राजनीति चमकाने में व्यस्त रहते हैं। मोहल्ले और जनता के विकास से उनका कोई सरोकार नहीं है। जब कोई जागरूक नागरिक उनसे वार्ड की बदहाली के बारे में सवाल करता है, तो पार्षद पति झल्लाकर सीधे कह देते हैं— “हम पार्षद थोड़े ही हैं, जाकर पार्षद महोदया से समझिए।” जनप्रतिनिधियों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ दिखाता है कि उन्हें जनता की तकलीफों से कोई मतलब नहीं है।

15 हजार रुपये डकारने के लिए लगा दी एक ही चाबी(वाल्व) ! वह भी खराब ,
इस पूरी योजना में तकनीकी स्तर पर भी भारी हेराफेरी की गई है। जल वितरण क्षेत्र के पाइप लाइन में चारों ओर कहीं भी ‘चाबी’ (वाल्व) नहीं दी गई है। जानकार बताते हैं कि बाजार में एक अच्छी चाबी की कीमत 3 हजार से 4 हजार रुपये के आसपास होती है। नियमानुसार यहाँ कम से कम 5 चाबियाँ लगनी चाहिए थीं, जिसका कुल खर्च करीब 15 हजार रुपये आता। अगर रूट के हिसाब से चाबियाँ लगी होतीं, तो जिस क्षेत्र में लीकेज होता केवल वहीं का पानी बंद किया जाता। लेकिन ठेकेदार ने पैसे गटकने के चक्कर में पूरे वार्ड में सिर्फ 1 ही चाबी लगाई और वह चाबी भी पिछले कई महीने से खराब पड़ी है। इसके कारण एक जगह की खराबी ठीक करने के लिए पूरे वार्ड का पानी बंद करना पड़ता है। इस पूरी हेराफेरी में जांच दल की सहभागिता साफ उजागर होती है, जो आँखें मूंदे बैठी है।

न क्षमता का पता, न ऑपरेटर का नाम; बिना प्लास्टर के ढांचा खड़ा!
गड़बड़ी की शुरुआत शुरुआत से ही हो गई थी। पंप का निर्माण करने वाले अभिकर्ता (एजेंसी), मेंटेनेंस करने वाले अधिकारी या कर्मचारी का कोई नाम-पता और शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर तक कहीं भी प्रदर्शित नहीं किया गया है। यहाँ तक कि पंप ऑपरेटर कौन है और पंप चलाने की समय-सीमा क्या है, इसकी कोई सूचना बोर्ड पर अंकित नहीं है।
इंजीनियरिंग का ऐसा घटिया और नायाब नमूना शायद ही कहीं और देखने को मिले। पानी टंकी के नीचे का सीमेंटेड प्लिंथ (आधार) पूरी तरह से टेढ़ा है और उस पर प्लास्टर तक नहीं किया गया है। अपनी चोरी छिपाने के लिए ठेकेदार ने उसे दोबारा ढालकर सीधा करने की नाकाम कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो सिर्फ मिट्टी गिराकर उस बदहाली को ढक दिया गया। भ्रष्टाचार की दलदल में डूबे जांच अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं देता, जो इस बात का पक्का सबूत है कि इस दो नम्बरी काम में ऊपर से नीचे तक सभी लिप्त हैं।
अबकी बार जनता कराएगी ‘उठक-बैठक’!
पाइपलाइन बिछाने के नाम पर मुख्य सड़कों और गलियों में घटिया स्तर का तीन नंबर पाइप दौड़ाकर सरकारी बजट को ठिकाने लगा दिया गया है। ठेकेदार, भ्रष्ट अधिकारियों और क्षेत्र के छुटभैया जनप्रतिनिधियों की तिकड़ी ने मिलकर जनता की गाढ़ी कमाई का माल समेट लिया है। चुनाव के समय हाथ जोड़ने वाले छुटभैया नेताओं को मानो दिन में ही ‘रतौंधी’ हो गई है, जिन्हें वार्ड की यह दुर्दशा दिखाई ही नहीं दे रही। चार महीनों से टंकी खुली होने के कारण उस पर कौवे, चील और अन्य पक्षी बैठते हैं। टंकी में कोई हड्डी या अनर्गल जहरीला पदार्थ गिर जाने का डर हर वक्त बना रहता है। इस दूषित और असुरक्षित पानी का सेवन करने को लोग मजबूर हैं, जो न तो खाना बनाने के लायक है और न ही पूजा-पाठ के योग्य। साफ पानी के नाम पर ठेकेदार सीधे तौर पर लोगों को मौत परोस रहा है।
मोहल्ले के लोगों ने इस गड़बड़ी और बदहाली की शिकायत कई बार बड़े अधिकारियों से की, लेकिन भ्रष्ट तंत्र के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। स्थानीय छुटभैये नेताओं को केवल चुनाव के समय ही वार्ड संख्या 6 की जनता याद आती है। लेकिन इस बार जनता का आक्रोश सातवें आसमान पर है। मोहल्ले के लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि ऐसे धोखेबाज़ जनप्रतिनिधियों और नेताओं को आगामी नगर पंचायत चुनाव में मोहल्ले के लोग बीच चौराहे पर ‘उठक-बैठक’ करवाएंगे और उनकी राजनीतिक जमीन को हमेशा के लिए बंजर कर देंगे।
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