बड़ी खबर: बिहार में बिना मान्यता दुकान खोलकर बैठे प्राइवेट स्कूलों की अब खैर नहीं, सरकार ने तय की आखिरी तारीख; सीधे सील होंगे स्कूल!
पटना, [25 मई 2026]: बिहार में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सम्राट सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य में बिना सरकारी मान्यता के धड़ल्ले से चल रहे हजारों प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ अब सीधे ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी है। शिक्षा विभाग के प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर (IAS) ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को एक बेहद सख्त फरमान जारी किया है।
इस सरकारी आदेश के बाद राज्य के उन निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है जो बिना मान्यता के धड़ल्ले से ‘शिक्षा की दुकान’ चला रहे हैं।

इस पूरी कार्रवाई और चेतावनी के पीछे शिक्षा विभाग का वह आधिकारिक आदेश है, जिसे प्राथमिक शिक्षा निदेशक, विक्रम विरकर (IAS) द्वारा 21 मई 2026 को जारी किया गया है। विभाग द्वारा जारी इस अत्यंत महत्वपूर्ण सर्कुलर (ज्ञापांक- 07/म.1-01/2025/521) के तहत राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (DPO) को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे 10 जून 2026 की अंतिम समय-सीमा तक राज्य के सभी गैर-मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों से ई-संबंध पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कराना सुनिश्चित करें। इस पत्र में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि इस तारीख के बाद भी बिना मान्यता चलते पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 की धाराओं के तहत ₹1 लाख का एकमुश्त जुर्माना और ₹10,000 प्रतिदिन का अर्थदंड लगाते हुए दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जाए, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों की होगी।
पकड़े गए तो लगेगा भारी जुर्माना: ₹1 लाख एकमुश्त और ₹10,000 रोज!
सरकारी पत्र के मुताबिक, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 की धारा 18 के तहत कोई भी प्राइवेट स्कूल बिना सक्षम प्राधिकार से मान्यता प्रमाण-पत्र लिए न तो स्थापित किया जा सकता है और न ही संचालित किया जा सकता है।
यदि कोई स्कूल इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो अधिनियम की धारा 18(5) एवं 19(5) के तहत:
- दोषी व्यक्ति या संस्था पर सीधे ₹1 लाख तक का भारी जुर्माना ठोंका जाएगा।
- इसके बावजूद अगर स्कूल बंद नहीं किया गया, तो ₹10,000 प्रति दिन के हिसाब से अलग से जुर्माना वसूल किया जाएगा।

बिहार में चल रहा है बड़ा ‘खेल‘: 19 हजार मान्यता प्राप्त, बाकी सब अवैध!
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों ने सबको चौंका दिया है। पत्र के अनुसार, वर्तमान में राज्य में केवल 19,186 निजी स्कूल ही मान्यता प्राप्त हैं, जबकि 1,012 स्कूल मान्यता लेने की प्रक्रिया में हैं। इसके अलावा राज्य में जितने भी प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं, वे सब के सब पूरी तरह से गैर-कानूनी (अवैध) हैं और RTE एक्ट की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
10 जून 2026: सरकार ने दिया ‘आखरी मौका‘
सरकार ने ऐसे सभी अवैध निजी स्कूलों को सुधरने का एक अंतिम अवसर दिया है। जिन स्कूलों ने अब तक मान्यता नहीं ली है या ऑनलाइन आवेदन नहीं किया है, उन्हें 10 जून 2026 तक हर हाल में शिक्षा विभाग के ई-संबंध पोर्टल (http://edu-online.bihar.gov.in) पर सभी दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
सिर्फ कमरों का डब्बा होने से नहीं मिलेगी मान्यता, इन कड़े मानकों को पूरा करने पर ही शिक्षा विभाग देगा ‘ग्रीन सिग्नल‘
बिहार सरकार के नियमों के मुताबिक, किसी भी निजी स्कूल को मान्यता या प्रस्वीकृति पत्र तभी जारी किया जाता है जब वह बुनियादी ढांचे और सुरक्षा के कड़े मानकों पर खरा उतरता है। शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, स्कूल के पास छात्रों की संख्या के अनुपात में पक्का और सुरक्षित भवन होना अनिवार्य है, जिसमें हवादार क्लासरूम के साथ-साथ बच्चों के खेलने के लिए पर्याप्त खेल का मैदान होना सबसे पहली शर्त है। इसके अलावा, स्कूल परिसर में छात्र और छात्राओं के लिए पूरी तरह अलग-अलग और साफ-सुथरे शौचालय , शुद्ध पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था, अग्निशमन यंत्र और प्राथमिक चिकित्सा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं का होना अनिवार्य है। केवल इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं, बल्कि बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता भी सबसे महत्वपूर्ण है; स्कूल में केवल वही शिक्षक पढ़ा सकते हैं जो आरटीई (RTE) नियमों के तहत प्रशिक्षित (जैसे- D.El.Ed, B.Ed या TET उत्तीर्ण) हों। जब शिक्षा विभाग की टीम स्कूल का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) करके इन सभी पैमानों को सही पाती है, तभी स्कूल को वैध संचालन का अधिकार मिलता है, अन्यथा उसे अवैध घोषित कर दिया जाता है।

निदेशक का सख्त आदेश: “10 जून की तय समय-सीमा बीतने के बाद यदि किसी भी स्कूल ने आवेदन नहीं किया और वह बिना मान्यता के चलता पाया गया, तो उसके खिलाफ बिना कोई रियायत बरते सीधे कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
शिक्षा विभाग ने बिना मान्यता वाले अवैध प्राइवेट स्कूलों को सुधरने का यह आखिरी मौका दिया है, जिसके तहत सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को कड़ा आदेश जारी किया गया है कि वे स्थानीय अखबारों, सोशल मीडिया और अन्य प्रचार माध्यमों से इस चेतावनी का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें ताकि समय-सीमा बीतने के बाद कोई भी स्कूल संचालक बहानेबाजी न कर सके। इसके साथ ही, विभाग ने अभिभावकों को भी विशेष रूप से सचेत रहने की अपील की है कि वे दाखिले से पहले स्कूलों की मान्यता की जांच कर लें और महज चकाचौंध के चक्कर में आकर अपने मासूम बच्चों का भविष्य दांव पर न लगाएं; क्योंकि 10 जून 2026 के बाद इन अवैध स्कूलों पर सीधे ताला लटकेगा और गाज गिरनी तय है।
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