महापुरुष अच्युतानंद दास के निर्देश और कपिलदेव प्रसाद यादव के नेतृत्व में डिहुली में भव्य आयोजन, अलौकिक संगीत पर रातभर थिरके गुरु भाई-बहन।
सकरा, (मुजफ्फरपुर ): जिला अंतर्गत सकरा प्रखंड के डिहुली स्थित त्राहि अच्युत शाखा आश्रम के प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास, श्रद्धा और भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ। महापुरुष अच्युतानंद दास के दिव्य दिशा-निर्देशों तथा आश्रम के कुशल संचालक कपिलदेव प्रसाद यादव के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस महापर्व में आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरे क्षेत्र में चारों ओर कन्हैया के आगमन की उमंग और भक्ति की अलौकिक छटा बिखरी रही।

दूर-दराज से पहुंचे हजारों गुरु भाई-बहन, भक्ति में लीन हुआ प्रांगण
समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ढलती शाम के साथ ही आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया। क्या युवा, क्या बुजुर्ग और क्या महिलाएं—सभी वर्ग के लोग भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का साक्षी बनने के लिए व्याकुल दिखे। हजारों की संख्या में पहुंचे गुरु भाई-बहनों ने न केवल कार्यक्रम में सहभागिता निभाई, बल्कि निष्काम भाव से आश्रम की व्यवस्थाओं में अपना अमूल्य सहयोग भी दिया।

भक्ति संगीत की स्वर लहरी पर रातभर थिरके श्रद्धालु
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण स्थानीय एवं आगंतुक संगीत कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए सुरीले भजन रहे। ढोलक, हारमोनियम और मंजीरे की थाप पर जब कलाकारों ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और महिमा का वर्णन किया, तो पूरा वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो गया। 12 बजने के इंतजार में बैठे श्रद्धालु संगीत की मधुर धुनों पर झूमते और थिरकते नजर आए।

पंचसखा व संचालन समिति के अथक प्रयास से कार्यक्रम हुआ ऐतिहासिक
समारोह को सुव्यवस्थित और भव्य रूप देने में आश्रम के पंचसखा सदस्यों एवं प्रबंधन समिति की सराहनीय भूमिका रही। पंचसखा सदस्य—अनिल कुमार राय, अनिल कुमार सिंह, श्याम किशोर यादव, सुरेंद्र कुमार मेहता, देवेंद्र राय तथा संचालन समिति के लाल बाबू प्रसाद एवं कमलेश प्रसाद समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने पूरे मुस्तैदी के साथ व्यवस्था का मोर्चा संभाला। सुरक्षा से लेकर आगंतुकों के बैठने तक की तमाम तैयारियों को त्रुटिरहित बनाने में सभी ने अपना अमूल्य समय व योगदान दिया।

घड़ी की सुइयों ने छुआ 12 का आंकड़ा, अलौकिक हुआ वातावरण
रात के ठीक 12 बजते ही जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के प्रादुर्भाव (जन्म) का क्षण आया, पूरा आश्रम परिसर जयकारों से गूंज उठा। “जय कन्हैया लाल की, हाथी घोड़ा पालकी” और प्रभु के भजनों की स्वर लहरियों ने उपस्थित जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया।

महाभोग व प्रसाद ग्रहण कर लिया प्रभु का आशीर्वाद
जन्मोत्सव के उपरांत आश्रम की ओर से सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए विशेष प्रसाद एवं भव्य ‘महाभोग’ की व्यवस्था की गई थी। हजारों श्रद्धालुओं ने अत्यंत अनुशासित तरीके से महाभोग ग्रहण किया। आश्रम का सुव्यवस्थित, शांत और आध्यात्मिक वातावरण हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। श्रद्धालुओं ने सफल आयोजन और प्रभु के अलौकिक दर्शन के लिए प्रबंधन की भूरि-भूरि प्रशंसा की और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर खुशी-खुशी अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया।
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