सामूहिक ज़कात व्यवस्था से मिटेगा अभाव; सिलाई मशीन और साइकिल ठेला पाकर खिले ज़रूरतमंदों के चेहरे
विशेष संवाददाता, मुज़फ़्फ़रपुर : शहर के चंदवारा स्थित रॉयल ग्रैंड मैरिज हॉल में ज़कात सेंटर इंडिया, मुज़फ़्फ़रपुर यूनिट के तत्वावधान में एक प्रभावकारी एवं प्रेरणादायक ज़कात तक़सीम (वितरण) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य केवल तात्कालिक आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि समाज के कमज़ोर वर्ग को आत्मनिर्भर बनाकर गरीबी के चक्र से बाहर निकालना रहा।

पवित्र कुरआन की पाठ से आग़ाज़, सेक्रेटरी ने पेश की प्रगति रिपोर्ट
कार्यक्रम की शुरुआत सगीर क़ासमी की तिलावते कलाम-ए-पाक (पवित्र कुरआन के पाठ) से हुई। इसके उपरांत ज़कात सेंटर इंडिया, मुज़फ़्फ़रपुर यूनिट के सेक्रेटरी सैयद अहमद ने संस्था की पिछले वर्ष की कार्य-प्रगति रिपोर्ट सभा के समक्ष रखी। उन्होंने ज़कात सेंटर द्वारा चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी गतिविधियों और भावी योजनाओं का पूरा ब्योरा पेश किया।

सामूहिक व्यवस्था से ही संभव है गरीबी का उन्मूलन: ज़बीउल्लाह नदवी
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ज़बीउल्लाह नदवी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में ज़कात की अहमियत और उसके सामूहिक निज़ाम की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “हम जिनके उम्मत हैं, उन हज़रत मुहम्मद ने नमाज़ के साथ-साथ ज़कात अदा करने की बार-बार ताकीद फ़रमाई है। ज़कात सिर्फ़ व्यक्तिगत स्तर पर देने की चीज़ नहीं है, बल्कि एक सुव्यवस्थित और पारदर्शी सामूहिक व्यवस्था के ज़रिए इसे सही हक़दारों तक पहुँचाना बेहद ज़रूरी है।”

उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि समाज से सामूहिक ज़कात का निज़ाम धीरे-धीरे लुप्त हो रहा है। इसे पुनः स्थापित करने में उलेमा-ए-किराम की भूमिका निर्णायक है। जिस प्रकार इमाम और ख़तीब मिम्बर व मेहराब से नमाज़ की ताकीद करते हैं, उसी प्रकार ज़कात के सामूहिक निज़ाम की भी जागरूकता फैलाएँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि हज़रत मुहम्मद के दौर-ए-मुबारक की तर्ज़ पर ज़कात की व्यवस्था कायम की जाए, तो समाज से लाचारी और गरीबी को जड़ से मिटाया जा सकता है।

55 परिवारों को मिला खुद के रोज़गार का अवसर
समारोह के दौरान 55 ज़रूरतमंद लोगों को स्वावलंबन और सम्मानजनक रोज़गार से जोड़ने के लिए ज़कात की राशि और साधन वितरित किए गए:
- 10 ज़रूरतमंदों को सिलाई मशीनें प्रदान की गईं, ताकि वे घर या छोटे स्तर पर सिलाई के ज़रिए स्थायी आमदनी का साधन बना सकें।
- 9 लोगों को साइकिल रिक्शा (ठेला) सौंपा गया, ताकि वे अपनी मेहनत से रोज़ी-रोटी अर्जित कर सकें।
- 36 अन्य लाभार्थियों को उनकी व्यावसायिक योजनाओं के अनुसार वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया गया।

गणमान्य नागरिकों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में महिलाओं और पुरुषों को मिलाकर लगभग 110 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर शहर के सम्मानित बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और मिल्ली हस्तियाँ मौजूद रहीं। कार्यक्रम को सफल बनाने में हामिद हुसैन, सरफ़राज़ आलम, इजाज़ अहमद, हैदर अली, जुनैदुल्लाह सहित कई कार्यकर्ताओं और ज़िम्मेदार लोगों का विशेष योगदान रहा। अंत में संस्था ने सभी का आभार प्रकट करते हुए इस अभियान को और व्यापक बनाने का संकल्प लिया।
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