15 दिनों में ₹38 से ₹56 तक कृत्रिम किल्लत बनाकर कीमतें बढ़ाने का सनसनीखेज भांडाफोड़; केंद्र सरकार ने जारी किया कड़ा आदेश
नई दिल्ली: त्योहारों के मौसम से ठीक पहले देश भर में चीनी की कृत्रिम किल्लत पैदा कर आम जनता की जेब काटने वाले मुनाफाखोरों, जमाखोरों और सट्टेबाजों पर केंद्र सरकार ने सीधी सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है। महज 15 दिनों के भीतर ₹38 से उछलकर ₹56 प्रति किलोग्राम तक पहुंची चीनी की कीमतों पर सख्त रुख अपनाते हुए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने साफ कर दिया है कि हालिया मूल्य वृद्धि का कोई भी बुनियादी या ठोस आधार नहीं है। देश में चीनी का पर्याप्त और भरपूर स्टॉक उपलब्ध है जो घरेलू जरूरतों से कहीं ज्यादा है।

महज 15 दिनों में कैसे रचा गया किल्लत का षड्यंत्र?
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने खुलासा किया कि महज 15 दिन पहले चीनी की एक्स-मिल कीमतें ₹37 से ₹38 प्रति किलोग्राम के स्तर पर थीं, जो बिना किसी जायज वजह के उछलकर ₹52 से ₹56 प्रति किलोग्राम तक पहुंचा दी गईं। खुदरा बाजार में 20 जुलाई 2026 को चीनी ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी, जो 20 अगस्त 2026 को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम हो गई।
संजीव चोपड़ा ने कहा, “फंडामेंटल्स के आधार पर इस बढ़ोतरी का कोई औचित्य नहीं है। भौतिक सत्यापन में हमने पाया कि केवल कृत्रिम किल्लत पैदा करने के लिए कुछ चीनी मिलें कागजों पर तो स्टॉक बेच रही हैं, लेकिन वास्तव में बाजार में आपूर्ति नहीं दे रही हैं। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।”

सरकार का बड़ा एक्शन: 10 लाख MT ड्यूटी-मुक्त आयात की मंजूरी
बाजार में सट्टेबाजी और अफवाहों के गुब्बारे को तुरंत फोड़ने के लिए सरकार ने 31.10.2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन ‘कच्चे चीनी’ के ड्यूटी-मुक्त आयात की मंजूरी दे दी है। यह सक्रिय कदम तुरंत जमाखोरों के इरादों पर पानी फेरेगा और उपभोक्ताओं को उचित दरों पर चीनी की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, ‘Advance Authorization Scheme’ के तहत काम करने वाली रिफाइनरियों को भी छूट दी गई है कि वे अपने आयातित स्टॉक को प्रोसेस करके तुरंत घरेलू बाजार में बेच सकें।

बल्क उपभोक्ताओं पर लगाम: 1 Sept से 30 Nov तक नया कानून लागू
सरकार ने मुनाफाखोरी को रोकने के लिए ‘शुगर (बल्क उपभोक्ताओं के स्टॉकहोल्डिंग सीमा) आदेश, 2026’ अधिसूचित किया है।
- 15 दिनों की सीमा: प्रति माह 10 मीट्रिक टन या अधिक खपत वाले बड़े उपभोक्ता जैसे मिष्ठान विक्रेता, पेय पदार्थ और बेकरी उद्योग) अब केवल 15 दिनों की खपत के बराबर ही चीनी का स्टॉक रख सकेंगे।
- समय अवधि: यह नियम 1 सितम्बर से 30 नवम्बर 2026 तक प्रभावी रहेगा।
- कड़ा सत्यापन: बिक्री और खपत का सत्यापन सीधे GST रिटर्न और संबंधित HSN कोड के आधार पर किया जाएगा।
- डीलरों पर सीमा: देश भर में चीनी डीलरों पर 1 अगस्त से 30 नवम्बर 2026 तक 400 टन की स्टॉक लिमिट लागू है।

त्योहारों में नहीं होगी कोई कमी, 15 अक्टूबर से शुरू होगी पेराई
संजीव चोपड़ा ने देशवासियों को आश्वस्त करते हुए आंकड़ों का ब्योरा दिया:
- 30 सितम्बर तक स्टॉक: सीजन के अंत में देश के पास 33 से 35 लाख टन चीनी का मजबूत रिजर्व स्टॉक मौजूद रहेगा।
- अक्टूबर में भारी सप्लाई: त्योहारी महीने अक्टूबर में सरकार 24 से 25 लाख टन चीनी बाजार में जारी करेगी।
- समय से पहले क्रशिंग: चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से ही नई पेराई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे अक्टूबर में ही 10 से 12 लाख टन नई चीनी बाजार में आ जाएगी।

इथेनॉल को दोष देना गलत, जमाखोरों पर होगी जेल-जब्ती की कार्रवाई
सरकार ने उन दावों को खारिज कर दिया जिसमें चीनी के दामों में तेजी के लिए इथेनॉल को जिम्मेदार ठहराया जा रहा था। प्रेस विज्ञप्ति (PIB) के अनुसार, इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 के 12% से घटकर 2025-26 में मात्र 9% रह गया है, और इथेनॉल का 3/4 हिस्सा अब मक्के व अनाज से बन रहा है।
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों के साथ बैठक कर साफ निर्देश दिया है कि कालाबाजारी करने वालों, सट्टेबाजों और जमाखोरों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। सरकार स्टॉक लिमिट को 500 टन से और कम करने पर भी विचार कर रही है।
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