Monday, November 2, 2026

सीएम सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 47 बड़े प्रस्तावों पर लगी मुहर, बिहार में खुलेंगे 5 नए प्राइवेट यूनिवर्सिटी, कोर्ट भवनों और सीवरेज नेटवर्क के लिए बहेगा पैसा!

पटना: बिहार सरकार ने राज्य के विकास और शिक्षा व्यवस्था में एक अभूतपूर्व और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए कैबिनेट की बैठक में कुल 47 महत्वपूर्ण एजेंडों को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार, 24 जून 2026 को आयोजित मंत्रिपरिषद की इस बेहद अहम बैठक में कई ऐसे फैसले लिए गए, जो राज्य की सूरत बदल देंगे। उच्च शिक्षा को नए पंख देने से लेकर न्यायिक और शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार ने खजाना खोल दिया है।

बैठक समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने मीडियाकर्मियों को इन सभी फैसलों की बिंदुवार और विस्तृत जानकारी दी।

शिक्षा के क्षेत्र में महाक्रांति: बिहार में खुलेंगे 5 नए निजी विश्वविद्यालय

सरकार ने राज्य के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने से रोकने और बिहार में ही विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करने के लिए 5 नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन को हरी झंडी दे दी है। यह उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा विस्तार माना जा रहा है:

  1. शांजा विश्वविद्यालय, मधुबनी: मिली ट्रस्ट (आरामनगर, नई दिल्ली की शाखा कार्यालय स्टेडियम रोड, मधुबनी) द्वारा प्रायोजित इस विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गई है।
  2. वी.बी. गिरी विश्वविद्यालय, दरौंधा (सीवान): आंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा संचालित होने वाले इस नए विश्वविद्यालय का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
  3. एस.ए. विश्वविद्यालय, अशोक नगर (नवादा): एस.ए. फाउंडेशन द्वारा नवादा में इस शानदार शिक्षा केंद्र को स्वीकृति दी गई है।
  4. हिमालय विश्वविद्यालय, पालीगंज (पटना): हिमालय एजुकेशनल ट्रस्ट द्वारा पटना के ग्रामीण इलाके में इस बड़े विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी।
  5. सीतयोग विश्वविद्यालय, जसोइया मोड़ (औरंगाबाद): सीतयोग एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा औरंगाबाद में उच्च शिक्षा के इस नए मंदिर को खोलने की मंजूरी मिल गई है।

अदालतों की सूरत बदलने के लिए करोड़ों की प्रशासनिक स्वीकृति

राज्य के न्यायिक ढांचे को हाई-टेक और सुदृढ़ बनाने के लिए विधि विभाग के तहत करोड़ों रुपये के प्रस्ताव पास किए गए हैं:

  • सीवान (महाराजगंज): नए अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय भवन (G+5), एमेनिटी भवन और हाजत भवन निर्माण के लिए 34.33 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
  • मोतिहारी (पूर्वी चंपारण): कोर्ट परिसर में 20 नए कोर्ट भवनों (G+5) के निर्माण के लिए 53.02 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर की गई है।
  • बेगूसराय: परित्यक्त एस.डी.जे.एम. कोर्ट के भू-खण्ड पर 15 नए शानदार कोर्ट भवनों (G+7) के निर्माण के लिए 39.04 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
  • रजौली (नवादा): अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय में 10 कोर्ट भवन (G+5), एमेनिटी भवन (G+4) और हाजत भवन (G+1) निर्माण के लिए 38.38 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

छपरा में सीवरेज नेटवर्क और शहरी विकास पर जोर

बिहार के शहरों को आधुनिक और साफ-सुथरा बनाने के लिए अमृत 2.0 (AMRUT 2.0) योजना के तहत नगर विकास एवं आवास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। छपरा सीवरेज नेटवर्क परियोजना के लिए 76 करोड़ 48 लाख रुपये की बड़ी प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे छपरा शहर की जल निकासी और स्वच्छता व्यवस्था को नया जीवन मिलेगा।

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घूसखोर कर्मचारी पर निगरानी का ऐक्शन: गड़हनी अंचल कार्यालय में 3,500 रुपये की घूस लेते रंगे हाथ दबोचा गया राजस्व कर्मचारी जितेन्द्र कुमार!

जमीन दाखिल-खारिज के नाम पर मांग रहा था रिश्वत, रामदेव राम की शिकायत पर पटना से आई विंग ने की बड़ी कार्रवाई

आरा/पटना : भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है। भोजपुर जिला अंतर्गत गड़हनी अंचल कार्यालय में तैनात राजस्व कर्मचारी जितेन्द्र कुमार को निगरानी की मुख्यालय टीम ने 3,500 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरी कार्रवाई इतनी गोपनीय और त्वरित गति से की गई कि आरोपी कर्मचारी को भनक तक नहीं लगी और वह मौके पर ही धरा गया।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की गिरफ्त में खड़ा घूसखोर राजस्व कर्मचारी जितेन्द्र कुमार, जिसे पुलिस उपाधीक्षक गौतम कृष्ण के नेतृत्व वाले धावा दल ने गड़हनी अंचल कार्यालय परिसर से 3,500 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

दाखिल-खारिज के नाम पर मांगी थी घूस: मिली जानकारी के अनुसार, एड़ौरा ग्राम (थाना उदवंतनगर, जिला भोजपुर) के निवासी रामदेव राम, जिनके पिता का नाम स्वर्गीय राम गोविन्द राम है, ने पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के कार्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी रामदेव राम ने आरोप लगाया था कि उनकी जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) करने के एवज में राजस्व कर्मचारी जितेन्द्र कुमार द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी और बिना पैसे दिए काम करने से मना किया जा रहा था।

जांच में सही पाया गया आरोप, बना धावा दल: ब्यूरो द्वारा प्राप्त शिकायत का गुप्त रूप से सत्यापन कराया गया। सत्यापन के क्रम में आरोपी कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने का पुख्ता प्रमाण मिला। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के पश्चात तत्काल प्रभाव से निगरानी थाना कांड संख्या 0-074/26 दिनांक 22.06.2026 दर्ज किया गया। इसके बाद अनुसंधानकर्त्ता सह पुलिस उपाधीक्षक गौतम कृष्ण के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल (रेडिंग टीम) का गठन किया गया।

अंचल कार्यालय परिसर में बिछाया जाल: तय रणनीति के तहत  निगरानी का धावा दल गड़हनी अंचल कार्यालय परिसर में सादे लिबास में तैनात हो गया। जैसे ही परिवादी रामदेव राम से राजस्व कर्मचारी जितेन्द्र कुमार ने रिश्वत के 3,500 (तीन हजार पाँच सौ) रुपये अपने हाथ में लिए, वैसे ही घात लगाए बैठी निगरानी की टीम ने उसे दबोच लिया। घूस के रूप में लिए गए रुपए उसके पास से बरामद कर लिए गए हैं। इस अचानक हुई कार्रवाई से अंचल कार्यालय में हड़कंप मच गया।

विशेष न्यायालय में किया जाएगा पेश: निगरानी की टीम आरोपी जितेन्द्र कुमार को हिरासत में लेकर तुरंत पटना मुख्यालय आ गई। ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार, अभियुक्त से गहन पूछताछ की जा रही है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी के समक्ष उपस्थापित किया जाएगा। मामले में आगे की अग्रतर अनुसंधान की कार्रवाई जारी है।

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खानपुर के 24 अवतार चकोटी धाम में महाकाल के रंग में रंगे सम्राट चौधरी! बिहार के स्वर्णिम भविष्य के लिए लिया महासंकल्प!

 चकोटी मठ पहुंचे मुख्यमंत्री का पाग और मखाना माला से ऐतिहासिक स्वागत, देश का बड़ा आध्यात्मिक केंद्र बनेगा यह पावन धाम

पटना, 24 जून: बिहार के समस्तीपुर जिले के खानपुर प्रखंड स्थित चकोटी मठ में आज एक ऐतिहासिक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। प्रसिद्ध ’24 अवतार धाम’ में आयोजित भव्य प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव-सह-विष्णु महायज्ञ एवं संत महाकुंभ कार्यक्रम में सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान पूरा क्षेत्र वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों से गुंजायमान हो उठा। मुख्यमंत्री ने देश और राज्य की सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण के लिए विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने चकोटी मठ परिसर में नवनिर्मित और भव्य ’24 अवतार धाम’ का शिलापट्ट अनावरण कर विधिवत लोकार्पण किया। इस ऐतिहासिक पल के गवाह हजारों श्रद्धालु और देश भर से आए संत-महात्मा बने।

दिव्य पूजा-अर्चना के उपरांत 24 अवतार चकोटी धाम के मुख्य पुजारी द्वारा सम्राट चौधरी के माथे पर विजय और जन-कल्याण का पवित्र तिलक लगाकर महाआशीर्वाद दिए जाने का अलौकिक क्षण।

चकोटी मठ परिसर पहुंचने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बेहद पारंपरिक और भव्य स्वागत किया गया। मठ के मुख्य सेवादार और धार्मिक गुरु 1008 महामंडलेश्वर राम सेवक दास शास्त्री जी महाराज ने मुख्यमंत्री को फूलों की विशाल माला और मिथिला की शान ‘पाग’ पहनाकर उनका जोरदार अभिनंदन किया। इसके साथ ही समस्तीपुर की सांसद शांभवी चौधरी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सेवादारों ने मुख्यमंत्री को मखाना माला, अंगवस्त्र तथा पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित सभी संतों, धार्मिक गुरुओं और श्रद्धालुओं का हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया।

समस्तीपुर के खानपुर स्थित पावन 24 अवतार चकोटी धाम में आयोजित भव्य धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हाथों में श्रद्धा के पुष्प लेकर गहरे ध्यान और भक्ति भाव से पुष्पांजलि अर्पित करते  सम्राट चौधरी एवं अन्य विशिष्ट जन।

लोकार्पण  के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि चकोटी मठ का यह ’24 अवतार धाम’ आने वाले समय में केवल बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आध्यात्मिक चेतना का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे विशाल धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं के संरक्षण तथा संवर्धन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार के आयोजनों से पूरे समाज में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जो सामाजिक समरसता, अच्छे संस्कार और राष्ट्र निर्माण की नींव को और अधिक मजबूत बनाता है।

इस महायज्ञ और संत महाकुंभ में सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री और दिग्गज नेता भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत, परिवहन मंत्री दामोदर रावत, सांसद शांभवी चौधरी, पूर्व मंत्री सह विधायक महेश्वर हजारी, विधायक राजेश कुमार सिंह और विधायक अश्वमेघ देवी शामिल हुए। सभी नेताओं ने भगवान महाविष्णु के 24 अवतारों और अन्य विग्रहों के सामने माथा टेका और आशीर्वाद लिया।

प्रशासनिक स्तर पर भी कार्यक्रम को लेकर व्यापक तैयारियां की गई थीं। इस ऐतिहासिक अवसर पर दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त हिमांशु कुमार राय, दरभंगा प्रक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक मनोज तिवारी और समस्तीपुर के जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षा और व्यवस्था का जायजा लेने के लिए खुद मुस्तैद रहे। महाकुंभ में उमड़ी लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने और यज्ञ की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। संतों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से चकोटी मठ का पूरा इलाका भक्तिमय हो गया है।

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नल-जल का नलका बकरी बांधने का बना खूटा ! सकरा नगर पंचायत में भ्रष्टाचार की खुली पोल, जनता प्यासी और अधिकारी-ठेकेदार मालामाल!

आकर देखिए इंजीनियरिंग का ‘अजूबा’ : टेढ़ा प्लिंथ, खराब चाबियाँ और चाय दुकान में पड़ा है पानी टंकी का ढक्कन!

 सरकारी पैसे की डकैती!  छुटभैया नेता को रतौंधी ,  4 महीने से खुली पड़ी है टंकी, साफ पानी के नाम पर मौत परोस रहा ठेकेदार!

रिपोर्ट : एस. एस. कुमार ‘पंकज’

सकरा (मुजफ्फरपुर): सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना भ्रष्टाचारियों की भेंट चढ़ चुकी है। इसका सबसे जीता-जागता और शर्मनाक नमूना देखना हो तो सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 में चले आइए। यहाँ नवनिर्मित नल-जल योजना विकास का नहीं, बल्कि आकंठ भ्रष्टाचार का प्रतीक बन चुका  है। लाखों की लागत से बनी पानी टंकी आज सफेद हाथी बनकर खड़ी है, जबकि आम जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है।

नल-जल योजना की असली हकीकत! वार्ड 6 में प्रगति कार्यालय के पीछे स्‍व. अरूण सहनी के घर के सामने  पिछले 4 महीनों से पानी न आने के कारण दरवाजों पर लगे सरकारी नलके अब बकरियाँ बांधने के खूंटे बन चुके हैं।

इस वार्ड में पिछले 4 महीनों से नल-जल योजना की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। दर्जनों ऐसे परिवार हैं जिनके दरवाजों तक पाइप लाइन पहुँचाकर कनेक्शन तो दे दिया गया, लेकिन पिछले 4 महीनों से उन्हें पानी की एक बूंद भी मयस्सर नहीं हुई है। विडंबना देखिए कि जिन नलों से स्वच्छ पेयजल बहना चाहिए था, आज लोग उन नलकों में अपनी बकरियाँ बांधने को मजबूर हैं। ठेकेदार, भ्रष्ट अधिकारियों और क्षेत्र के छुटभैये जनप्रतिनिधियों की तिकड़ी ने मिलकर सारा माल समेट लिया और अपना उल्लू सीधा कर जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया।

घरों के नलके बने बकरी बांधने का खूंटा! : डिजिटल इंडिया का नया ‘खूंटा मॉडल’, इंसानों के हिस्से का पानी तो गायब, अब बकरियाँ चबा रही हैं सुशासन का नलका!

अगर आपको ‘हर घर नल-जल योजना’ की सबसे अनूठी और ऐतिहासिक सफलता देखनी है, तो सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 6 में प्रगति कार्यालय के पीछे स्वर्गीय अरुण सहनी के घर के सामने चले आइए। सरकार ने यहाँ पानी तो नहीं पहुँचाया, लेकिन पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए एक अद्भुत ‘खूंटा’ जरूर गाड़ दिया है। पिछले 4 महीनों से इस पाइप में पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है, जिसके बाद समझदार स्थानीय नागरिकों ने इसका सबसे बेहतरीन उपयोग ढूंढ निकाला है। जैसा कि तस्वीर  में साफ दिख रहा है, लाखों रुपये के इस ड्रीम प्रोजेक्ट का नलका आज बकरियाँ बांधने के काम आ रहा है। अधिकारी और ठेकेदार फाइलों में पानी बहाकर अपनी जेबें भर चुके हैं, और यहाँ धरातल पर बेजुबान जानवर इस सूखे पाइप से बंधी रस्सी के सहारे सुशासन के दावों को चबा रहे हैं। इंजीनियरिंग का ऐसा ‘मल्टीपर्पज’ इस्तेमाल शायद ही पूरे देश में कहीं और देखने को मिले, जहाँ इंसान प्यासा है और सरकारी नलका खूंटे का धर्म निभा रहा है!

नीमतल्‍ला रोड में पानी टंकी के सटे दक्षिण चाय दुकानदार के द्वारा सम्‍भाल कर रखा  गया टंकी का ढक्‍कन

खुली टंकी से आ रहा दूषित पानी, कौवे और हड्डियों का खतरा!

वार्ड संख्या 6 की जनता पिछले 4 महीनों से एक बड़े खतरे के साए में जी रही है। पानी की टंकी ऊपर से पूरी तरह खुली हुई है। ठेकेदार की लापरवाही का आलम यह है कि टंकी का ढक्कन पास की ही एक चाय दुकान में लावारिस हालत में पड़ा हुआ है। खुली टंकी के ऊपर दिनभर चिड़ियाँ, कौवे और अन्य पक्षी बैठते हैं। स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है कि कोई भी पक्षी उसमें हड्डी या कोई अन्य अनर्गल व जहरीला पदार्थ गिरा सकता है, जिससे पूरे मोहल्ले में महामारी फैल सकती है। इस खुली टंकी के कारण लोगों को दूषित पानी की सप्लाई हो रही है, जो न तो खाना बनाने के योग्य है और न ही पूजा-पाठ के लायक।

सकरा नगर पंचायत के वार्ड 6 में नल-जल योजना के लोहे के टावर एवं  टेढ़ा-मेढ़ा और बिना प्लास्टर का सीमेंटेड प्लिंथ, (दायें)  जिसे मिट्टी डालकर छिपाने की कोशिश की गई है। (बायें) ढीले नट-बोल्ट साफ बयां कर रहे हैं कि यह टावर कभी भी गिर सकता है।

घटिया निर्माण: रातभर टपकता है पानी, कभी भी गिर सकता है लोहे का टावर!

इस पूरी योजना में निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किया गया है। लोहे का जो भारी-भरकम टावर खड़ा किया गया है, उसकी प्लेटों को भी ठीक से नहीं कसा गया है। यह कमजोर टावर कभी भी गिर सकता है और जान-माल की बड़ी क्षति हो सकती है। यही नहीं, घटिया निर्माण के कारण रातभर टंकी से पानी टपकता रहता है, जिसकी ‘टप-टप’ की आवाज सीधे नीचे बनी टीन की छत पर गिरती है। इस शोर के कारण टंकी के आस पास के लोग रातभर सो नहीं पाते हैं। आशंका जताई जा रही है कि कुछ ही महीनों में टीन का यह शेड जंग लगकर पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा।

वार्ड संख्‍या  6 में  नल जल योजना की गुणवत्‍ता (नवनिर्मित) जांच करते अधिकारी एवं आपत्ति रखते स्‍थानीय लोगों की फाइल फोटो,  

अफसरशाही का शर्मनाक चेहरा: ठेकेदार के बचाव में उतरे पीएचडी अभियंता राहुल तिवारी, बिना एस्टिमेट देखे ही बांट दिया क्लीन चिट!

इस महाघोटाले को लेकर जब जनस्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) के अभियंता राहुल तिवारी से इसके निर्माण और घटिया गुणवत्ता के संबंध में शिकायत के लहजे में बात की गई, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना और चौंकाने वाला रहा। जनता की तकलीफें सुनने के बजाय अभियंता राहुल तिवारी सीधे तौर पर दागी ठेकेदार के बचाव में उतर आए। जब उनसे पाइप लाइन में चाबियाँ (वाल्व) न होने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि इसमें चाबी लगाने की जानकारी इसके एस्टिमेट (प्राक्कलन) में दर्शाई गई होगी। हद तो तब हो गई जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने खुद कभी इस निर्माण से जुड़ी एस्टिमेट की कॉपी देखी है? इस पर उन्होंने साफ इनकार कर दिया। बिना प्लास्टर का टेढ़ा-मेढ़ा सीमेंटेड प्लिंथ, महीनों से खराब पड़ी एकमात्र चाबी और पंप पर संचालक व समय-सीमा की जानकारी न होने जैसे गंभीर सवालों को वे पूरी तरह टाल गए। बिना कागजात देखे और बिना स्थलीय हकीकत जाने ठेकेदार की पैरवी करना यह साफ बयां करता है कि भ्रष्टाचार के इस खेल में इंजीनियर से लेकर ठेकेदार तक का मजबूत गठजोड़ काम कर रहा है।

वार्ड 6  के नीमतल्ला रोड में गंगा इलेक्ट्रॉनिक के सामने पिछले 15 दिनों से खुदा पड़ा लावारिस गड्ढा और सड़क पर बहता लीकेज का पानी, जो आए दिन हादसों को दावत दे रहा है।

नीमतल्ला रोड बना खंडहर , 15 दिनों से खुदा पड़ा है गड्ढा!

घटिया और तीन नंबर के पाइपों के इस्तेमाल के कारण पूरे मोहल्ले में करीब आधा दर्जन जगहों पर पाइप लीकेज की गंभीर समस्या है। वार्ड 6 के ही नीमतल्ला रोड में गंगा इलेक्ट्रॉनिक के सामने पिछले 3 महीनों से लगातार पानी रिसकर सड़क पर बह रहा है। हद तो तब हो गई जब लगभग 15 दिन पहले गंगा इलेक्ट्रॉनिक के सामने मुख्य सड़क को मरम्मत के नाम पर खोद दिया गया और फिर उसे वैसे ही लावारिस छोड़ दिया गया। अब स्थिति यह है कि आते-जाते असावधान राहगीर और स्थानीय लोग इस गहरे गड्ढे में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।

सिर्फ बोर्ड पर वार्ड पार्षद महोदया का नाम,धरातल पर नहीं दिखता काम

चुनाव जीतने के बाद गायब हुईं पार्षद रीता कुमारी, पार्षद पति बोले- ‘मैं पार्षद थोड़े ही हूँ‘

जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं है। वार्ड संख्या 6 की निर्वाचित पार्षद रीता कुमारी नगर पंचायत चुनाव में जीत हासिल करने के बाद आज तक कभी मोहल्ले में शक्ल दिखाने भी नहीं आईं। उनके पार्षद पति को काम की कोई समझ नहीं है; वे बस चौबीसों घंटे अपनी पार्टी का झंडा ढोने और राजनीति चमकाने में व्यस्त रहते हैं। मोहल्ले और जनता के विकास से उनका कोई सरोकार नहीं है। जब कोई जागरूक नागरिक उनसे वार्ड की  बदहाली के बारे में सवाल करता है, तो पार्षद पति झल्लाकर सीधे कह देते हैं— “हम पार्षद थोड़े ही हैं, जाकर पार्षद महोदया से समझिए।” जनप्रतिनिधियों का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ दिखाता है कि उन्हें जनता की तकलीफों से कोई मतलब नहीं है।

वार्ड संख्‍या  6 में  नल जल  के सप्‍लाई पाइप पर  लगा एक  मात्र  खराब चाबी(वाल्व), एवं जल शुद्धि के लिए शोपीस में रखा उपकरण  

15 हजार रुपये डकारने के लिए लगा दी एक ही चाबी(वाल्व) ! वह भी खराब ,

इस पूरी योजना में तकनीकी स्तर पर भी भारी हेराफेरी की गई है। जल वितरण क्षेत्र के पाइप लाइन में चारों ओर कहीं भी ‘चाबी’ (वाल्व) नहीं दी गई है। जानकार बताते हैं कि बाजार में एक अच्छी चाबी की कीमत 3 हजार से 4 हजार रुपये के आसपास होती है। नियमानुसार यहाँ कम से कम 5 चाबियाँ लगनी चाहिए थीं, जिसका कुल खर्च करीब 15 हजार रुपये आता। अगर रूट के हिसाब से चाबियाँ लगी होतीं, तो जिस क्षेत्र में लीकेज होता केवल वहीं का पानी बंद किया जाता। लेकिन ठेकेदार ने पैसे गटकने के चक्कर में पूरे वार्ड में सिर्फ 1 ही चाबी लगाई और वह चाबी भी पिछले कई महीने से खराब पड़ी है। इसके कारण एक जगह की खराबी ठीक करने के लिए पूरे वार्ड का पानी बंद करना पड़ता है। इस पूरी हेराफेरी में जांच दल की सहभागिता साफ उजागर होती है, जो आँखें मूंदे बैठी है।

तस्‍वीर में पानी टंकी के नीचे का सीमेंटेड प्लिंथ (आधार)  टेढ़ा एवं  प्लास्टर विहिन  

न क्षमता का पता, न ऑपरेटर का नाम; बिना प्लास्टर के ढांचा खड़ा!

गड़बड़ी की शुरुआत शुरुआत से ही हो गई थी। पंप का निर्माण करने वाले अभिकर्ता (एजेंसी), मेंटेनेंस करने वाले अधिकारी या कर्मचारी का कोई नाम-पता और शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर तक कहीं भी प्रदर्शित नहीं किया गया है। यहाँ तक कि पंप ऑपरेटर कौन है और पंप चलाने की समय-सीमा क्या है, इसकी कोई सूचना बोर्ड पर अंकित नहीं है।

इंजीनियरिंग का ऐसा घटिया और नायाब नमूना शायद ही कहीं और देखने को मिले। पानी टंकी के नीचे का सीमेंटेड प्लिंथ (आधार) पूरी तरह से टेढ़ा है और उस पर प्लास्टर तक नहीं किया गया है। अपनी चोरी छिपाने के लिए ठेकेदार ने उसे दोबारा ढालकर सीधा करने की नाकाम कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो सिर्फ मिट्टी गिराकर उस बदहाली को ढक दिया गया। भ्रष्टाचार की दलदल में डूबे जांच अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं देता, जो इस बात का पक्का सबूत है कि इस दो नम्बरी काम में ऊपर से नीचे तक सभी लिप्त हैं।

अबकी बार जनता कराएगी ‘उठक-बैठक’!

पाइपलाइन बिछाने के नाम पर मुख्य सड़कों और गलियों में घटिया स्तर का तीन नंबर पाइप दौड़ाकर सरकारी बजट को ठिकाने लगा दिया गया है। ठेकेदार, भ्रष्ट अधिकारियों और क्षेत्र के छुटभैया जनप्रतिनिधियों की तिकड़ी ने मिलकर जनता की गाढ़ी कमाई का माल समेट लिया है। चुनाव के समय हाथ जोड़ने वाले छुटभैया नेताओं को मानो दिन में ही ‘रतौंधी’ हो गई है, जिन्हें वार्ड की यह दुर्दशा दिखाई ही नहीं दे रही। चार महीनों से टंकी खुली होने के कारण उस पर कौवे, चील और अन्य पक्षी बैठते हैं। टंकी में कोई हड्डी या अनर्गल जहरीला पदार्थ गिर जाने का डर हर वक्त बना रहता है। इस दूषित और असुरक्षित पानी का सेवन करने को लोग मजबूर हैं, जो न तो खाना बनाने के लायक है और न ही पूजा-पाठ के योग्य। साफ पानी के नाम पर ठेकेदार सीधे तौर पर लोगों को मौत परोस रहा है।

मोहल्ले के लोगों ने इस गड़बड़ी  और बदहाली की शिकायत कई बार बड़े अधिकारियों से की, लेकिन भ्रष्ट तंत्र के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। स्थानीय छुटभैये नेताओं को केवल चुनाव के समय ही वार्ड संख्या 6 की जनता याद आती है। लेकिन इस बार जनता का आक्रोश सातवें आसमान पर है। मोहल्ले के लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि ऐसे धोखेबाज़ जनप्रतिनिधियों और नेताओं को आगामी नगर पंचायत चुनाव में मोहल्ले के लोग बीच चौराहे पर ‘उठक-बैठक’ करवाएंगे और उनकी राजनीतिक जमीन को हमेशा के लिए बंजर कर देंगे।

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समस्तीपुर आगमन से पहले सम्राट चौधरी पर विपक्ष का सीधा वार: 11 तीखे सवालों से थर्राया सियासी गलियारा, संजीव सहनी हत्याकांड के अपराधियों पर मांगा जवाब!

खानपुर दौरे से पहले भाकपा माले का बड़ा सवाल, मनरेगा में करोड़ों के बंदरबांट और 60000 रद्द राशन कार्डों को लेकर सरकार को पूरी तरह घेरा, जिले के बंद पड़े कल-कारखानों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग

समस्तीपुर : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के समस्तीपुर जिला अंतर्गत खानपुर में होने वाले संभावित आगमन को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। उनके कदम रखने से पहले ही समस्तीपुर के राजनीतिक गलियारे में जबरदस्त भूचाल आ गया है। विपक्षी दल भाकपा माले ने मुख्यमंत्री के आगमन की भनक लगते ही मीडिया के माध्यम से चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है। भाकपा माले के जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने 11 सुलगते और तीखे सवालों का एक ऐसा मांग-पत्र जारी किया है, जिसने प्रशासनिक महकमे से लेकर सत्ता पक्ष के नेताओं तक के पसीने छुड़ा दिए हैं। भाकपा माले ने साफ लहजे में कहा है कि मुख्यमंत्री समस्तीपुर में विकास के थोथे दावे करने से पहले इन 11 बुनियादी जनसरोकारों का हिसाब दें।

अपराध और खौफ के साए में समस्तीपुर: संजीव सहनी हत्याकांड पर उबाल

इस पूरे मांग-पत्र में सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा समस्तीपुर की चरमराती कानून व्यवस्था का है। भाकपा माले ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि पूरे बिहार सहित समस्तीपुर जिला इस समय हत्या, लूट, डकैती, छिनतई और बलात्कार जैसी जघन्य वारदातों का गढ़ बन चुका है। सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने ताजपुर थाना अंतर्गत हुए बहुचर्चित संजीव सहनी हत्याकांड (कांड संख्या 98/26) का मामला उठाकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसके साथ ही महिला थाना में दर्ज फतेहपुर नाबालिग दुष्कर्म कांड (कांड संख्या 61/26) का हवाला देते हुए पूछा है कि आखिर इन संगीन मामलों के दरिंदे और अपराधी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं? विपक्ष ने अल्टीमेटम दिया है कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले अपराधियों की गिरफ्तारी और जिले में अमन-चैन की लिखित गारंटी दी जाए।

मनरेगा में करोड़ों की लूट और 60000 राशन कार्डों का कत्लेआम

विकास योजनाओं के नाम पर प्रशासनिक स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार को लेकर भी बड़ा विस्फोट किया गया है। भाकपा माले का आरोप है कि आवास योजना, मनरेगा और प्रखंड स्तर की तमाम कल्याणकारी योजनाओं में बिना भारी कमीशनखोरी और अफसरशाही के पत्ता तक नहीं हिल रहा है। सबसे चौंकाने वाला दावा जिले के भीतर करीब 60000 गरीब परिवारों के राशन कार्ड रद्द किए जाने को लेकर किया गया है। विपक्ष ने इसे खाद्य सुरक्षा पर सीधा हमला बताते हुए इसे तुरंत पुनर्बहाल करने की मांग की है। साथ ही मनरेगा में करोड़ों रुपए के बंदरबांट की उच्च स्तरीय जांच कराने और मजदूरों को साल में 200 दिनों का रोजगार सुनिश्चित करने की बात कही है।

बंद पड़े उद्योग और खंडहर बनता समस्तीपुर का गौरव

आर्थिक और औद्योगिक मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए भाकपा माले ने समस्तीपुर के उन जख्मों को फिर हरा कर दिया है, जिससे यहाँ का नौजवान आज भी बेरोजगार घूम रहा है। मांग-पत्र में वर्षों से बंद पड़ी समस्तीपुर चीनी मिल, ठाकुर पेपर मिल और मुक्तापुर स्थित रामेश्वर जूट मिल के विकास एवं विस्तार की सरकारी गारंटी मांगी गई है। इसके अलावा लंबे समय से खंडहर में तब्दील हो चुके दूधपुरा हवाई अड्डे को चालू करने के लिए इस बार के बजट में विशेष प्रावधान करने की कड़क मांग उठाई गई है।

भाकपा माले द्वारा मुख्यमंत्री के सामने खड़े किए गए 11 यक्ष प्रश्न:

  1. अपराध राज पर कब लगेगा लगाम? ताजपुर के संजीव सहनी हत्याकांड (कांड संख्या 98/26) और फतेहपुर नाबालिग दुष्कर्म (कांड संख्या 61/26) के अपराधी अब तक आजाद क्यों घूम रहे हैं?
  2. अफसरशाही और कमीशनखोरी पर रोक कब? आवास योजना और प्रखंड स्तर के कामों में खुलेआम चल रही लूट पर सरकार की चुप्पी का राज क्या है?
  3. 60000 गरीबों का निवाला क्यों छीना? समस्तीपुर सहित पूरे बिहार में रद्द किए गए राशन कार्डों को वापस कब बहाल किया जाएगा?
  4. मनरेगा में करोड़ों का बंदरबांट क्यों? मनरेगा की उच्च स्तरीय जांच कराकर साल में 200 दिन का रोजगार और समय पर मजदूरी भुगतान की गारंटी कब मिलेगी?
  5. दूधपुरा हवाई अड्डा खंडहर क्यों? इस ऐतिहासिक हवाई अड्डे को चालू करने के लिए बजटीय प्रावधान क्यों नहीं किया गया?
  6. चीनी मिल और ठाकुर पेपर मिल कब खुलेंगे? स्थानीय युवाओं को पलायन के लिए मजबूर करने के बजाय इन उद्योगों को ताले से कब आजाद किया जाएगा?
  7. रामेश्वर जूट मिल का भविष्य क्या है? मुक्तापुर स्थित इस मिल के विस्तार और निरंतर संचालन की सरकारी गारंटी दी जाए।
  8. किसानों के साथ वादाखिलाफी क्यों? खाद, बीज, बिजली और कृषि यंत्रों पर रियायत तथा फसलों का लाभकारी समर्थन मूल्य कब मिलेगा?
  9. बदहाल शिक्षा-स्वास्थ्य का जिम्मेदार कौन? जनवितरण प्रणाली, स्कूलों और अस्पतालों में खाली पड़े पदों पर कर्मियों की नियुक्ति कब होगी?
  10. जननायक की कर्मभूमि की उपेक्षा क्यों? जननायक कर्पूरी ठाकुर की कर्मभूमि ताजपुर को पुनः विधानसभा और अनुमंडल का दर्जा वापस कब मिलेगा?
  11. रेल परियोजनाओं पर फाइलों की धूल कब हटेगी? कर्पूरी ग्राम-ताजपुर-पातेपुर-महुआ-भगवानपुर, केबल स्थान-कर्पूरीग्राम, मुक्तापुर-कुशेश्वरस्थान नई रेल लाइन और मुक्तापुर रेल गुमटी व अटेरन चौक पर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य कब शुरू होगा?

सुरेंद्र प्रसाद सिंह (जिला स्थायी समिति सदस्य, भाकपा माले) का सीधा और कड़ा बयान:

“मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के समस्तीपुर के खानपुर आगमन की सुगबुगाहट पर भाकपा माले ने पहले ही 11 सवालों का जाल बिछा दिया है। समस्तीपुर का हवाई अड्डा, चीनी मिल और ठाकुर पेपर मिल बंद पड़े हैं, मनरेगा में करोड़ों रुपए की खुली लूट मची हुई है, जिसकी संपूर्ण जिला स्तर पर उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। संजीव सहनी के हत्यारों और नाबालिग से रेप के आरोपियों को अविलंब जेल भेजा जाए। अभी हमने मीडिया के जरिए यह सवाल दागे हैं, इसके बाद जैसे ही मुख्यमंत्री यहाँ पहुँचेंगे, हमारी एक उच्च स्तरीय टीम उनसे मुलाकात करने की कोशिश करेगी और उन्हें यह स्मार पत्र सौंपकर मांग पूरी करने का आग्रह करेगी। अगर इन पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो समस्तीपुर की धरती पर एक बड़ा जन-आंदोलन भड़केगा।”

इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम से मुख्यमंत्री के आने से पहले ही खानपुर का माहौल पूरी तरह गरमा गया है। अब देखना यह है कि समस्तीपुर की सीमा में दाखिल होने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भाकपा माले के इन तीखे और सीधे सवालों का सामना कैसे करते हैं या फिर जनता को एक बार फिर केवल आश्वासनों का झुनझुना थमाकर लौट जाते हैं।

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कागजों पर ‘जर्जर’ लेकिन हकीकत में आलीशान: मुरौल का महाघोटाला: चमचमाते सरकारी भवन को बताया ‘जर्जर’, किराए की इमारत में चल रहा 30,000 का गुप्त खेल ?

नगर पंचायत या ‘नरक पंचायत’! तीन वर्षों से सरकारी तिजोरी में सेंधमारी, अधिकारियों की जेब में जा रहा क्या जनता का पैसा

रिपोर्ट: एस. एस. कुमार ‘पंकज’

नवगठित नगर पंचायत मुरौल (मुजफ्फरपुर) इन दिनों स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के बीच तीव्र आक्रोश का केंद्र बन चुका है। ग्राम पंचायत से नगर निकाय के रूप में अपग्रेड हुए इस क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि शहरीकरण के साथ यहाँ विकास की नई गंगा बहेगी, नागरिक सुविधाएं सुदृढ़ होंगी और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी। परंतु, हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आज मुरौल नगर पंचायत विकास के बजाय प्रशासनिक भ्रष्टाचार, वित्तीय विलासिता और बंदरबांट का एक ऐसा मॉडल बन चुका है, जिसे स्थानीय उप मुख्य पार्षद ने खुले तौर पर ‘नरक पंचायत’ की संज्ञा दे दी है।

इस महाघोटाले की जड़ें नगर पंचायत कार्यालय को संचालित करने के नाम पर किए जा रहे वित्तीय अपराध से जुड़ी हैं। पिछले 36 महीनों (3 वर्षों) से अधिक समय से नगर पंचायत मुरौल का प्रशासनिक कार्यालय एक निजी भवन की पहली मंजिल पर चलाया जा रहा है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इस निजी भवन के किराए के नाम पर सरकारी तिजोरी में हर महीने सीधी सेंधमारी की जा रही है। जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा, जिसे क्षेत्र की सड़कों, नालियों, लाइटिंग और स्वच्छता पर खर्च होना चाहिए था, वह हर महीने अधिकारियों और रसूखदारों की मिलीभगत से निजी जेबों में जा रहा है।

इस खेल का गणित समझाते हुए स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र रॉय बताते हैं कि इस निजी मकान का किराया कागजों पर मोटी राशि के रूप में दिखाया जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि इसमें से एक बड़ा हिस्सा कमीशन के तौर पर कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) और मुख्य पार्षद के बीच गुप्त रूप से बंट जाता है। यह सीधे तौर पर राजकीय कोष के दुरुपयोग और ‘आर्थिक अपराध’ का मामला है। 3 साल से चल रहे इस किराए के खेल ने मुरौल के विकास को 30 साल पीछे धकेल दिया है। जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, और अधिकारी एसी कमरों में बैठकर किराए की रसीदों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं।

 पाखंड का लाइव मॉडल: कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) मैडम की कलम से लोक शिकायत निवारण में ‘असुरक्षित’ घोषित किए जा चुके इसी तथाकथित ‘जर्जर’ भवन की मजबूत छत के नीचे वीआईपी कुर्सियां लगाकर इत्मीनान से आयोजित किया गया सरकारी ‘सहयोग शिविर’।

मुरौल की प्रशासनिक जादूगरी और “पाखंड का लाइव मॉडल” देखना हो, तो बीते दिनों आयोजित वार्ड स्तरीय सहयोग शिविर की इन तस्वीरों और दस्तावेजों को देख लीजिए। सरकारी फाइलों और लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के टेबल पर जो सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) मैडम की कलम से “जर्जर और जानलेवा” घोषित हो चुका है, उसी तथाकथित ‘जर्जर’ भवन की मजबूत छत के नीचे उपर के दृृृश्‍य में मैडम खुद अपनी वीआईपी कुर्सी लगाए बेहद इत्मीनान से मुस्कुराते हुए बैठी हैं। गजब का हौसला है मैडम आपका! जो छत किसी भी पल गिर सकती है (कम से कम आपकी लोक शिकायत निवारण में दी गई सरकारी रिपोर्ट तो यही कहती है), उसी छत के नीचे आप खुद बैठी हैं, आपके बगल में पूरा प्रशासनिक अमला बैठा है, सामने नगर पंचायत की भोली-भाली जनता बैठी है और दीवारों पर बड़े-बड़े अक्षरों में “समाधान शिविर” का बैनर टंगा है। अब जनता यह नहीं समझ पा रही है कि मैडम वहाँ जनता की समस्याओं का ‘समाधान’ करने आई थीं या साक्षात ‘काल’ के साए में अपनी बहादुरी का प्रदर्शन करने? अगर यह भवन वाकई जर्जर है, तो क्या मैडम ने अपनी और वहाँ जुटे सैकड़ों ग्रामीणों की जान दांव पर लगाकर कोई सुसाइड मिशन प्लान किया था? और अगर मैडम की जान इतनी सस्ती नहीं है, तो फिर फाइलों में इस खूबसूरत आलीशान भवन को ‘जर्जर’ लिखकर  किराये पर हजारो रुपये खर्च करके  कौन सा वित्तीय अलादीन का चिराग जलाया जा रहा है? साफ है मैडम, जनता सब देख रही है—जब खुद बैठना हो तो भवन ‘आलीशान’ और ‘सुरक्षित’ है, और जब जनता के हित में दफ्तर शिफ्ट करना हो तो भवन ‘जर्जर’ है; इस अद्भुत और पाखंड से भरे विरोधाभास पर तो मुजफ्फरपुर प्रशासन को आपको ‘विशेष प्रशासनिक अभिनय पुरस्कार’ देना चाहिए!

 प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार: दाता परिवार द्वारा दान की गई मुख्य सड़क की कीमती 50 डिसमिल जमीन पर बना भव्य दो मंजिला मॉडल ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन’। इसी आलीशान इमारत को फाइलों में ‘जर्जर और जानलेवा’ बताकर बंद रखा गया है।

 IAS अफसरों की ट्रेनिंग का केंद्र रहा भवन दो दिन में कैसे हुआ जर्जर? मुरौल के प्रशासनिक पाखंड की खुली पोल!

इस पूरे मामले का सबसे सनसनीखेज और हैरान करने वाला पहलू सादिकपुर मुरौल के वार्ड संख्या 2 में स्थित ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन’ से जुड़ा है। करोड़ों रुपये की सरकारी लागत से निर्मित यह भव्य और सुसज्जित 2  मंजिला इमारत आज प्रशासनिक पाखंड का जीता-जागता सबूत बनी हुई है। वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा पूर्व में जारी पत्र संख्या 452 के माध्यम से इस शानदार भवन को महज 12 वर्षों के भीतर ही ‘जर्जर और असुरक्षित’ घोषित कर दिया गया, ताकि निजी भवन में कार्यालय चलाने के खेल को जारी रखा जा सके।

प्रशासन के इस दावे की हवा तब पूरी तरह निकल जाती है, जब इसके गौरवशाली इतिहास और हालिया प्रशासनिक गतिविधियों पर नजर डाली जाती है। जमीनदाता परिवार के सदस्य सोनू कुशवाहा बताते हैं कि यह भवन कोई साधारण निर्माण नहीं है। जब इस क्षेत्र में 7 आईएएस (IAS) अधिकारी अपनी विलेज ट्रेनिंग के लिए मुजफ्फरपुर आए थे, तब उनके रहने, सहने और खाने-पीने की पूरी व्यवस्था इसी पंचायत सरकार भवन में की गई थी। इन अधिकारियों में मुजफ्फरपुर के पूर्व जिला पदाधिकारी सुब्रत सेन भी शामिल थे, जिन्होंने यहाँ रहकर ग्रामीण परिवेश का अध्ययन किया था। यह जिला का पहला ऐसा मॉडल पंचायत भवन था, जिसकी सुदृढ़ बनावट और बेहतरीन स्पेस को देखने दूसरे जिलों से प्रशासनिक अधिकारी और मुखिया आते थे।

विरोधाभास और पाखंड की पराकाष्ठा देखिए कि जिस भवन को अधिकारी कागजों पर ‘जर्जर’ बताकर आम जनता के प्रवेश के लिए असुरक्षित कह रहे हैं, उसी भवन में अभी हाल ही में, 2 जून 2026 को सरकार के निर्देश पर आधिकारिक ‘सहयोग शिविर’ का सफल आयोजन किया गया था। इतना ही नहीं, इस शिविर से करीब दो माह  पहले तक स्थानीय थाना (ओपी) को यहाँ शिफ्ट करने के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरे भवन का रंग-रोगन और पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया था। वार्ड पार्षद आनंद कन्द साह और अन्‍य पार्षदगण  सवाल उठाते हैं कि जो भवन 2  जून 2026 को सरकारी सहयोग शिविर के लिए सुरक्षित था, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ जुटी, और जो भवन थाना खोलने के लिए पूरी तरह मुफीद है , वह नगर पंचायत कार्यालय के लिए ‘जर्जर’ कैसे हो गया? किस इंजीनियर ने बिना किसी वैज्ञानिक जांच के इसे असुरक्षित घोषित करने का सर्टिफिकेट दे दिया? यह विरोधाभास साफ तौर पर दर्शाता है कि जर्जर भवन नहीं, बल्कि इस व्यवस्था को चलाने वाले अधिकारियों की नीयत हो चुकी है।

नियमों की धज्जियां: (बीच में) नगर विकास एवं आवास विभाग के संयुक्त सचिव मनोज कुमार का वह सख्त आदेश (पत्रांक 1284), जिसके तहत दुरुस्त पंचायत भवन में तत्काल दफ्तर शिफ्ट करना था। इसके दोनों तरफ वे आलीशान सरकारी और निजी भवन हैं, जिन्हें लेकर अधिकारियों की नीयत पर सवाल उठ रहे हैं।

सरकारी आदेश की उड़ी धज्जियाँ: संयुक्त सचिव की चिट्ठी को दबाकर निजी भवन को फायदा पहुँचाने का खेल!

मुरौल नगर पंचायत में चल रहा यह खेल सिर्फ स्थानीय स्तर की मनमानी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राज्य सरकार के शीर्ष सचिवालय के आदेशों की खुली अवहेलना और प्रशासनिक विद्रोह है। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा नवगठित नगर निकायों में प्रशासनिक भवनों के सुचारू संचालन और अनावश्यक राजस्व व्यय को रोकने के लिए समय-समय पर कड़े और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

इस संबंध में सबसे महत्वपूर्ण पत्राचार 3 अप्रैल 2025 को हुआ था। नगर विकास एवं आवास विभाग के संयुक्त सचिव मनोज कुमार द्वारा पत्र संख्या 15/अभि० (को०) प्र० भवन-10-01/2025/1284 के माध्यम से राज्य के सभी नवगठित नगर परिषदों और नगर पंचायतों के कार्यपालक पदाधिकारियों को एक अत्यंत स्पष्ट मार्गदर्शिका भेजी गई थी। इस विभागीय पत्र के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:

प्रतिनिधि भी अंधेरे में: वार्ड संख्या 4 के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधि ‘न्यूज भारत टीवी’ से बातचीत में यह स्वीकार करते हुए कि नगर पंचायत के पार्षदों  से भी दफ्तर का असली किराया और नेमोपुर की फाइलें छुपा कर रखी गई हैं।

 अनिवार्य स्थानांतरण (शिफ्टिंग): पत्र के पहले ही बिंदु में साफ तौर पर निर्देश दिया गया था कि यदि नवगठित नगर निकाय क्षेत्र के अंतर्गत पूर्व का कोई ‘पंचायत सरकार भवन’ दुरुस्त अवस्था में उपलब्ध है, तो नगर पंचायत के कार्यालय को तत्काल प्रभाव से उसी पंचायत सरकार भवन में शिफ्ट किया जाए, ताकि निजी भवनों पर होने वाले अनावश्यक किराए के खर्च को रोका जा सके।

मरम्मत और विस्तार: पत्र के दूसरे बिंदु में स्पष्ट था कि यदि पंचायत सरकार भवन में कमरों की संख्या 2 से अधिक है और उसका ढांचा ठीक है, तो मामूली मरम्मती कराकर उसी का विस्तार किया जाए और नए प्रशासनिक कार्यों को वहीं से संचालित किया जाए।

नई भूमि का चयन: नई भूमि का चयन और अंचलाधिकारी (सीओ) से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया केवल और केवल उसी परिस्थिति में की जानी है, जब निकाय क्षेत्र में कोई भी सरकारी भवन या पंचायत सरकार भवन उपलब्ध न हो।

मुरौल के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) और मुख्य पार्षद की जुगलबंदी ने संयुक्त सचिव मनोज कुमार के इस महत्वपूर्ण आदेश (पत्र संख्या 1284) को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस चिट्ठी को दबाकर, नियमों को ताक पर रखते हुए निजी भवन के मालिक को फायदा पहुँचाने का खेल बदस्तूर जारी रखा गया। इस आदेश के खिलाफ जाकर, वर्तमान में ईओ द्वारा क्षेत्र के एक सुदूर कोने (नेमोपुर में, जो भौगोलिक रूप से नगर पंचायत का एकतरफा किनारा है) में एक दलदली और जलजमाव वाली भूमि (खेसरा नंबर 1426) पर नया प्रशासनिक भवन बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस साजिश का एकमात्र उद्देश्य यह है कि नए भवन के निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये का ठेका निकाला जा सके, जिसमें से भारी-भरकम कमीशन डकारा जा सके और तब तक वर्तमान किराए के खेल को अनवरत जारी रखा जा सके।

 भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा: वार्ड पार्षद आनंद कन्द साह द्वारा लिखा गया पत्र (पत्रांक 20) और उप मुख्य पार्षद अजय कुमार राय सहित अन्य पार्षदों के हस्ताक्षर युक्त वह मांग पत्र, जिसमें  पूर्व मुखिया कीर्तिनारायण प्रसाद द्वारा सत्‍यनारायण प्रसाद पंचायत सरकार भवन में नगर पंचायत कार्यालय को संचालित किए जाने  की मांग की गई है ,

तू डाल-डाल, मैं पात-पात: ईओ मैडम का नया ‘कागजी घोड़ा’ और अंतहीन बहानेबाजी!

मुरौल नगर पंचायत में ‘किराए के खेल’ को अनवरत जारी रखने के लिए प्रशासनिक पाखंड किस कदर “तू डाल-डाल, मैं पात-पात” की तर्ज पर आगे बढ़ रहा है, इसका नया सुबूत ईओ मैडम की ताजातरीन चिट्ठी बयां करती है। जब मामला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पाले में पहुंचा, तो मैडम ने आनन-फानन में कुछ दिन पहले पत्रांक 732, दिनांक 17/06/2026 को एक पत्र लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को भेज दिया । इस पत्र में ईओ मैडम अचानक ‘पंचायती राज विभाग’ के नियमों और आदेशों की खोज में लग गई हैं, ताकि यह साबित किया जा सके कि जब तक वहां से हस्तांतरण का कोई विशेष फरमान नहीं आता, तब तक वे कुछ नहीं कर सकतीं। गजब का विरोधाभास है! कभी भवन को ‘जर्जर’ बताकर पल्ला झाड़ा जाता है, कभी ‘पुलिस  और सुरक्षा बल’ का बहाना बनाया जाता है, और अब तीन साल बीत जाने के बाद पंचायती राज विभाग का आदेश ढूंढा जा रहा है। लोक शिकायत में गर्दन फंसती देख अब दाएं-बाएं की जादुई कलाकारी दिखाई जा रही है।

कागजों का मायाजाल: लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी और जिला प्रशासन को भेजे गए कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) के वे आधिकारिक पत्र, जिनमें कभी सुरक्षा बल, कभी जर्जर भवन तो कभी तकनीकी नियमों की आड़ लेकर सरकारी भवन में दफ्तर शिफ्ट करने के फैसले को टाला गया।

कागजी चक्रव्यूह और बहानों की तिकड़ी: एक ही मुद्दे पर तीन पत्रों का लाइव पाखंड!

मुरौल नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) मैडम द्वारा लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को लिखे गए इन तीन आधिकारिक पत्रों का क्रमवार विश्लेषण व्यवस्था के उस शातिर खेल को बेनकाब करता है, जहाँ जनहित के एक सीधे सवाल को कागजी भूलभुलैया में दफन करने की हरसंभव कोशिश की गई है। इस सिलसिलेवार पाखंड की कड़ियाँ कुछ इस प्रकार खुलती हैं:

  • पहला दांव—सुरक्षा और जर्जरता का ढोंग (पत्रांक 543, दिनांक 13/05/2026): इस पहले पत्र में ईओ मैडम ने शिकायत को खारिज करने के लिए अपने पुराने पत्रांक 452 (दिनांक 16.04.2026) का हवाला देते हुए लिखा कि उक्त पंचायत सरकार भवन में पुलिस बल का पड़ाव होने और जर्जरता के कारण कार्यालय का संचालन संभव नहीं है। साथ ही, पहली मंजिल पर स्थित निजी दफ्तर की लोहे की सीढ़ियों से वृद्धों और विकलांगों को होने वाली परेशानी वाले आरोप पर गोलमोल जवाब देते हुए इसे आगामी बोर्ड बैठक का विषय बताकर पल्ला झाड़ लिया।
  • दूसरा दांव—खुद के बुने जाल में फंसी प्रशासनिक व्यवस्था (पत्रांक 654, दिनांक 05/06/2026): ठीक 23 दिन बाद लिखे गए इस दूसरे पत्र में मैडम ने खुद ही अपने ‘जर्जर और जानलेवा’ वाले दांव की हवा निकाल दी। इसमें वे बड़े गर्व से स्वीकार करती हैं कि विभाग के पत्रांक 1284 (दिनांक 03.04.2025) के आलोक में उसी ‘जर्जर’ सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन के भीतर 2 जून 2026 को बकायदा एक भव्य “अस्थायी सहयोग शिविर” का सफल आयोजन किया गया था! यानी जब अपनी सुविधा के लिए वीआईपी कुर्सी लगानी हो, तब वह भवन पूरी तरह महफूज हो जाता है।
  • तीसरा दांव—पंचायती राज विभाग की आड़ में नई बहानेबाजी (पत्रांक 732, दिनांक 17/06/2026): जब दोनों पत्रों के विरोधाभास से लोक शिकायत निवारण में गर्दन फंसती दिखी, तो मैडम ने “तू डाल-डाल, मैं पात-पात” की तर्ज पर यह तीसरा पत्र दाग दिया। इसमें प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी के पत्र (पत्रांक 119, दिनांक 17.06.2026) का नया बहाना खोजा गया है कि पंचायती राज विभाग की तरफ से ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित भवनों को नगर विकास विभाग को हस्तांतरित करने का कोई स्पष्ट आदेश ही नहीं है, और वर्तमान में वहां पंचायत एवं ग्राम कचहरी चल रही है यह पत्र में साफ साफ लिखा , अब यह तो वे ही जाने कि यहां कौन सी ग्राम कचहरी चल रही है ।

 कभी जर्जरता का खौफ, कभी पुलिस बल की मजबूरी, और जब दोनों बहानों की पोल खुली तो पंचायती राज विभाग के नियमों की आड़! जो प्रशासनिक सक्रियता 3 साल पहले दिखानी चाहिए थी, वह आज लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी की टेबल पर परिवाद की कार्रवाई को किसी भी तरह बंद कराने (नस्तीबद्ध करने) की छटपटाहट में बदल चुकी है। साफ है कि इन पत्रों का मकसद समस्या का समाधान करना नहीं, बल्कि निजी भवन के मालिक को फायदा पहुँचाने वाले उस ‘गुप्त किराए’ के खेल को कानूनी दांव-पेचों के जरिए अनवरत जिंदा रखना है।

सबसे बड़ा झोल तो इस खेल के ‘सीक्रेट बजट’ में है। इस तथाकथित नगर पंचायत में गोपनीयता का आलम यह है कि खुद वार्ड पार्षदों तक को यह नहीं पता कि जनता की गाढ़ी कमाई से निजी भवन का असली किराया कितना भरा जा रहा है। वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कन्द साह ने बहुत पहले पत्रांक 20, दिनांक 15/06/2024 को लिखे अपने पत्र में अंदाज़ से ‘लगभग तीस हजार रुपया’ अंकित किया था। यानी जनता का पैसा पानी की तरह बह रहा है, लेकिन उसका सटीक हिसाब पार्षदों तक से छुपा कर रखा गया है।

मामला सिर्फ यहीं नहीं थमता; कागजी घोड़ों की दौड़ इससे भी एक कदम आगे निकल चुकी है। नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार के स्पष्ट निर्देश पत्रांक 1284, दिनांक 03/04/2025 की खुली अवहेलना करते हुए, जिसमें साफ कहा गया था कि दुरुस्त पंचायत सरकार भवन होने पर तत्काल शिफ्टिंग की जाए, ईओ मैडम ने जिलाधिकारी को पत्रांक 184, दिनांक 11/07/2025 को एक पत्र प्रेषित कर दिया। इस पत्र में नेमोपुर/920 मौजा के खाता संख्या 342, खेसरा संख्या 1426 और रकबा 28.78 डी० की एक सुदूर, जलजमाव वाली विवादित भूमि को प्रशासनिक भवन के लिए प्रस्तावित कर पूरा ब्योरा अंकित कर दिया गया है। अपने ही मूल विभाग (नगर विकास एवं आवास विभाग) के जनहित वाले सख्त आदेश को ठंडे बस्ते में दबाकर, सुदूर कोने में नए निर्माण का एस्टीमेट बनाने की यह हड़बड़ी साफ दर्शाती है कि अधिकारियों की नजर विकास पर नहीं, बल्कि उस भारी-भरकम बजट और कमीशन के खेल पर है जो नए टेंडर से पैदा होगा। जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं को तरस रही है, और दफ्तर के नाम पर कागजों की यह बाजीगरी बदस्तूर जारी है।

जनता पूछे सवाल: ‘न्यूज भारत टीवी’ के माइक पर मुरौल नगर पंचायत की साख मिट्टी में मिलने और विकास का पैसा अधिकारियों की जेबों में जाने का सनसनीखेज आरोप लगाते स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और मुखर जनप्रतिनिधि बायें से उपमुखिया मुरौल बसंत कुमार , तिमूल के पूर्व चेयरमैन एवं स्‍थानीय सामाजिक कार्यकर्त्‍ता वीरेन्‍द्र राय एवं मुरौल में पंचायत सरकार भवन के लिए जमीन दान करने वाले पूर्व मुखिया कीर्तिनारायण प्रसाद के पुत्र सोनू कुशवाहा  ।

कमीशन का ‘किराया’ या विकास का जनाजा? मुरौल नगर पंचायत के अधिकारियों पर फूटा जनप्रतिनिधियों का गुस्सा!

प्रशासन की इस हठधर्मिता, नियम-विरुद्ध कार्यों और लूट-खसोट की नीति के खिलाफ अब मुरौल नगर पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया है। वार्ड पार्षदों से लेकर उप मुख्य पार्षद तक ने अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह कमीशन का ‘किराया’ दरअसल मुरौल के विकास का जनाजा है।

उप मुख्य पार्षद अजय कुमार राय ने सीधे तौर पर व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा कि नगर पंचायत में लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या की जा रही है। कुछ जनप्रतिनिधि और अधिकारी खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। वे वार्ड पार्षदों को सामूहिक बैठकों में बुलाने के बजाय अकेले-अकेले बुलाकर ‘डील’ करने की कोशिश करते हैं। इसी ‘अकेले-अकेले’ समझाने के चक्कर में आज पूरे जिले में मुरौल की साख मिट्टी में मिल चुकी है।

वहीं, वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कन्द साह ने इस प्रशासनिक तानाशाही के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। उन्होंने 15 जून 2026 को पत्र संख्या 465  के माध्यम से बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव और मुजफ्फरपुर के जिला पदाधिकारी (डीएम) को एक अंतिम वैधानिक कानूनी नोटिस तामील कराया है। इस वैधानिक नोटिस में उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि नगर पंचायत कार्यालय को अविलंब सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन में स्थानांतरित नहीं किया गया, तो वे पटना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका/रिट याचिका  दायर करेंगे।

इस आक्रोश में सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र रॉय ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए अधिकारियों के भ्रष्टाचार की फेहरिस्त जनता के सामने रख दी है। उन्होंने कहा  कि ‘’ नगर पंचायत में सिर्फ किराए का ही घोटाला नहीं है, बल्कि कबाड़ और तेल का भी एक बहुत बड़ा सिंडिकेट चल रहा है। लगभग 35 लाख रुपये की सरकारी लागत से खरीदी गई पैखाना साफ करने वाली वैक्यूम मशीन और ट्रैक्टर पिछले 3 साल से जंग खा रहे हैं। आज तक वह मशीन किसी गरीब जनता के दरवाजे पर सेवा देने नहीं गई, बल्कि उस ट्रैक्टर का उपयोग अधिकारियों के निजी खेतों को जोतने के लिए किया जा रहा है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उस खड़ी गाड़ी और निजी कार्यों में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर के नाम पर पेट्रोल पंपों से लाखों रुपये के बोगस वाउचर बनवाकर तेल का खेल खेला जा रहा है। इसी सरकारी तेल की चोरी के पैसे से अधिकारी अपनी निजी स्कॉर्पियो गाड़ियों में घूम रहे हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पिछले ६ महीनों से तेल की खरीद और लॉग-बुक की पर्चियां मांगने पर भी कार्यालय द्वारा टालमटोल किया जा रहा है, जो यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि परदे के पीछे बहुत कुछ काला है।‘’

मुरौल नगर पंचायत के उप मुख्‍य पार्षद अजय कुमार राय बायें से , एवं मध्‍य में पार्षद आनंद कंद साह , दायें से  वार्ड संख्या 4 के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार  ‘न्यूज भारत टीवी’ के कैमरे पर अपनी बात रखते हुए

गुप्त खेल पर पार्षदों की मुहर: जनता का पैसा स्वाहा, जनप्रतिनिधि खुद अंधेरे में!

प्रशासनिक तानाशाही और वित्तीय गोपनीयता का तमाशा देखिए कि जिस नगर पंचायत को चलाने की जिम्मेदारी जनता ने अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को सौंपी है, उन्हें ही व्यवस्था के इस “गुप्त खेल” से कोसों दूर रखा गया है। वार्ड संख्या चार के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार का बयान इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि मुरौल नगर पंचायत में पारदर्शिता का जनाजा निकल चुका है। पत्रकार से बातचीत में उन्होंने यह सनसनीखेज स्वीकारोक्ति की है कि आज तक जितने भी सम्मानित पार्षद जीत कर आए हैं, उनमें से कुछ ने जब दफ्तर के इस गुप्त किराए का सच जानने का प्रयास किया, तो उन्हें साफ तौर पर टका सा जवाब दे दिया गया और जानकारी छुपा ली गई। पार्षद खुद अंदाजे से किराया 18 या 19 हजार रुपये होने का अनुमान लगा रहे हैं, जिससे यह साफ है कि कागजों पर चल रहे इस असली खेल का वित्तीय ब्योरा बोर्ड के सदस्यों तक के लिए एक अभेद्य ‘गुप्त भेद’ बना हुआ है। इतना ही नहीं, नेमोपुर में दफ्तर ले जाने की ईओ मैडम की एकतरफा प्रशासनिक जिद पर भी पार्षद के बयान ने सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि इस विषय पर सभी सदस्यों का मतैक्य होना और सामूहिक रूप से बैठकर निर्णय लेना जरूरी था, लेकिन यहाँ बोर्ड के सदस्यों की मानसिकता और राय को ताक पर रखकर प्रक्रिया को “अंतिम चरण” में पहुंचा दिया गया है। जब ब्लॉक परिसर के मुख्य भवन में बीडीओ साहब के चेंबर के ठीक ऊपर मीटिंग हॉल और ऑफिशियल कार्य के लिए पर्याप्त सरकारी जगह (स्पेस) उपलब्ध थी, तो फिर सामूहिक बैठकों में उस पर चर्चा करने के बजाय सुदूर कोने में करोड़ों की नई योजना चमकाने की यह जल्दबाजी किस ‘खास’ नीयत का इशारा कर रही है, यह अब किसी से छुपा नहीं है।

मुरौल नगर पंचायत का यह पूरा घटनाक्रम बिहार के नवगठित नगर निकायों में पनप रहे नौकरशाही के भ्रष्टाचार का एक क्लासिक उदाहरण है। करोड़ों रुपये की लागत से बने, 12-13 कमरों वाले, हवादार, वाटर हार्वेस्टिंग और सोलर जैसी उन्नत तकनीकों से सुसज्जित सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन को महज इसलिए छोड़ दिया गया है क्योंकि वह सरकारी है और वहाँ रहने से अधिकारियों को कोई व्यक्तिगत वित्तीय लाभ या कमीशन नहीं मिलेगा।

भूदाता सत्यनारायण बाबू (अधिवक्ता) ने 2010  में अपनी लाखों रुपये मूल्य की 50 डिसमिल कीमती मुख्य सड़क की जमीन इस उद्देश्य से दान की थी कि यहाँ से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का कल्याण होगा। आज उनकी आत्मा भी इस प्रशासनिक लूट को देखकर कराह रही होगी। जनप्रतिनिधियों द्वारा पूर्व में डीएम, एसडीओ और कार्यपालक पदाधिकारी को दर्जनों आवेदन दिए गए, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

अब जब पानी सिर से ऊपर गुजर चुका है, तो वार्ड पार्षद आनंद कन्द साह द्वारा 15 जून 2026 को दिए गए वैधानिक नोटिस ने प्रशासनिक खेमे में हड़कंप मचा दिया है। इस नोटिस में स्पष्ट मांग की गई है कि:

1. कार्यालय को तुरंत सरकारी भवन में शिफ्ट किया जाए। 2. पिछले ३ वर्षों में गलत तरीके से बहाए गए किराए की पाई-पाई की राशि बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 के तहत दोषी अधिकारियों और मुख्य पार्षद के वेतन/निजी संपत्ति से वसूल की जाए। 3. दलदली भूमि पर नए भवन के प्रस्ताव को रद्द कर ब्लॉक परिसर की सुरक्षित भूमि पर पारदर्शी सर्वे कराया जाए।

यदि मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन और नगर विकास विभाग ने इस अंतिम नोटिस के बाद भी कार्यपालक पदाधिकारी की मनमानी पर लगाम नहीं लगाई, तो यह मामला पटना हाई कोर्ट की चौखट पर गूंजेगा। मुरौल की जनता अब जाग चुकी है और वह अपने हक के पैसों से अधिकारियों की विलासिता का अंत करने के लिए सड़कों से लेकर न्यायालय तक संघर्ष करने को तैयार है।

दाता परिवार द्वारा दान की गई मुख्य सड़क की कीमती 50 डिसमिल जमीन पर बना भव्य दो मंजिला मॉडल ‘सत्यनारायण पंचायत सरकार भवन’। इसी आलीशान इमारत को फाइलों में ‘जर्जर और जानलेवा’ बताकर बंद रखा गया है। पर हकीकत कुछ और है,देखें उपर के दृश्‍य में लाइव विडयो के अंश  

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बिहार में चीनी उद्योग का बिछेगा जाल ,  9 बंद मिलें होंगी जिंदा, 25 नई मिलों से बदलेगी किसानों की तकदीर;

पटना, 22 जून 2026: बिहार की नीतीश-भाजपा सरकार ने राज्य के औद्योगिक विकास और किसानों की किस्मत बदलने के लिए अब तक का सबसे बड़ा कदम उठाया है । मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज पटना के लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में गन्ना उद्योग विभाग की एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को सीधे कड़े निर्देश जारी किए । मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि बिहार सरकार किसानों की समृद्धि, औद्योगिक तरक्की और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है ।

इस महा-बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य की 9 बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से जीवित करने और रिकॉर्ड 25 नई चीनी मिलों की स्थापना की कार्ययोजना पर युद्ध स्तर पर काम करने का हुक्म दिया है । सरकार के इस फैसले से पूरे बिहार में रोजगार और औद्योगिक क्रांति की नई लहर दौड़ने वाली है ।

चंपारण बनेगा देश का नंबर 1 गन्ना हब मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विशेष हिदायत दी कि चंपारण क्षेत्र को पूरे देश के प्रमुख गन्ना उत्पादन क्षेत्रों के रूप में विकसित करने के लिए एक स्पेशल कार्ययोजना बनाई जाए । उन्होंने कहा कि गन्ने का उत्पादन बढ़ाने, इसकी उत्पादकता में सुधार करने और किसानों को बेहतरीन मार्केट उपलब्ध कराने के लिए विभाग बिना किसी देरी के तेजी से काम करे ।

फोटो कैप्‍शन (Photo Caption): पटना के ‘संकल्प सभागार’ में आयोजित गन्ना उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, साथ में उपस्थित गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ।

इन बंद पड़ी मिलों के दिन बहुरेंगे, स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ तौर पर निर्देश दिया कि रैयाम, सकरी, सासामुसा, मढ़ौरा, मोतीपुर, समस्तीपुर, चकिया, चनपटिया और मोतिहारी जैसी प्रमुख बंद पड़ी चीनी मिलों वाले क्षेत्रों में इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज को दोबारा शुरू किया जाए । इन मिलों के चालू होने से स्थानीय स्तर पर लाखों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और किसानों को उनकी फसल का सीधा लाभ मिल सकेगा ।

बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026 से आएगा भारी निवेश बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि ‘बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026’ के तहत राज्य में ज्यादा से ज्यादा निवेश आकर्षित करने, बड़े निवेशकों को प्रोत्साहित करने और पूरी चीनी इंडस्ट्री के मॉडर्नाइजेशन यानी आधुनिकीकरण पर विशेष फोकस किया जाए । सरकार इस पूरे क्षेत्र के चौमुखी विकास के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है ।

इस महत्वपूर्ण बैठक में गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह ने एक प्रजेंटेशन के माध्यम से विभाग की वर्तमान योजनाओं, चीनी मिलों की ताजा स्थिति, गन्ना उत्पादन के आंकड़ों और नई प्रोत्साहन नीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी ।

बैठक में यह सभी आलाधिकारी रहे मौजूद इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार और गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे ।

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किसानों के लिए खुशखबरी: बिहार सरकार ने 3.96 लाख किसानों के खातों में भेजे 200 करोड़!

संकल्प सभागार में बटन दबाकर सम्राट चौधरी ने किया राशि का सीधा हस्तांतरण, आपदा प्रबंधन और कृषि विभाग ने मिलकर खोला खजाना

पटना, 22 जून: बिहार की डबल इंजन सरकार ने राज्य के अन्नदाताओं को अब तक की सबसे बड़ी राहत देते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मार्च 2026 के आखिरी हफ्तों में आए विनाशकारी आंधी-तूफान, बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि की मार झेलने वाले किसानों के जख्मों पर सरकार ने मरहम लगाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में राज्य के 3.96 लाख से अधिक प्रभावित किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से 200 करोड़ रुपये से अधिक की कृषि इनपुट अनुदान राशि का ऑनलाइन हस्तांतरण कर दिया है । इस धमाकेदार फैसले से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और खेती-किसानी के लिए उन्हें एक नया संबल मिला है ।

पटना के संकल्प सभागार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डीबीटी के माध्यम से प्रभावित किसानों के खातों में 200 करोड़ रुपये से अधिक की कृषि इनपुट अनुदान राशि का डिजिटल हस्तांतरण करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। मंच पर साथ में मौजूद उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी।

आपदा से तबाह हुए थे 13 जिले, सरकार ने माना 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान

मार्च 2026 के दौरान प्रकृति के बदले मिजाज ने बिहार के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई थी । सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के 13 प्रमुख जिलों—सहरसा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, मधेपुरा, अररिया, बेगूसराय, पूर्णिया, दरभंगा, किशनगंज, खगड़िया, मधुबनी, सुपौल एवं भागलपुर में 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति दर्ज की गई थी । इस संकट की घड़ी में सरकार ने तत्परता दिखाते हुए कागजी कार्रवाई को दरकिनार कर सीधा किसानों की मदद करने का फैसला किया ।

आपदा और कृषि विभाग का संयुक्त एक्शन: कुल 260.71 करोड़ का तगड़ा प्रावधान

किसानों को त्वरित और प्रभावी राहत पहुंचाने के लिए बिहार सरकार के दो बड़े विभागों ने मिलकर काम किया । शुरुआत में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा कृषि इनपुट अनुदान के लिए 200 करोड़ रुपये की मोटी रकम उपलब्ध कराई गई थी । इसके बाद कृषि विभाग की मांग और जरूरत को देखते हुए अतिरिक्त 60.71 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को भी मंजूरी दे दी गई । इस प्रकार प्रभावित किसानों की चौतरफा सहायता के लिए सरकार द्वारा कुल 260.71 करोड़ रुपये की भारी राशि का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है ।

“यह सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, किसानों का आत्मविश्वास है” — सम्राट चौधरी

इस ऐतिहासिक अवसर पर किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में बेमौसम बरसात, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएं किसानों की कमर तोड़ देती हैं । ऐसी हर विषम परिस्थिति में सरकार अपने खजाने का मुंह खोलकर पीड़ितों के साथ मजबूती से खड़ी है । उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार सरकार की यह कृषि इनपुट अनुदान योजना महज एक वित्तीय सहायता नहीं है, बल्कि यह हमारे अन्नदाताओं के भीतर खोए हुए आत्मविश्वास और स्थिरता को दोबारा जगाने का एक सशक्त माध्यम है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार मिलकर किसानों की आय दोगुनी करने, कृषि को सुरक्षित व टिकाऊ बनाने तथा प्राकृतिक नुकसान की पूरी भरपाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है । उन्होंने बिहार के किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से बड़े पैमाने पर जुड़ने का भी आह्वान किया ।

कार्यक्रम में मौजूद रहे सरकार के ये दिग्गज चेहरे

इस हाई-प्रोफाइल और महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बिहार सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही । मंच पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा और आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा मौजूद रहे । इसके अलावा प्रशासनिक अमले से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल और मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित कृषि एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने ।

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बिहार में पाताल जाएगा पानी! अनियंत्रित दोहन पर सरकार कसेगी शिकंजा, आ रहा नया कड़ा कानून

पटना, 22 जून: बिहार में लगातार गिरते भू-जल स्तर को रोकने और पानी की बर्बादी पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि राज्य में पानी के अंधाधुंध और अनियंत्रित दोहन को रोकने के लिए ‘बिहार भू-जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम-2026’ लाने की प्रक्रिया को तेज किया जाए । सरकार की इस नई नीति से अब जमीन से पानी निकालने के नियमों में बड़े बदलाव होंगे और लापरवाही बरतने वालों पर शिकंजा कसा जा सकेगा ।

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में लघु जल संसाधन विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की । इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य के जल संसाधनों की सुरक्षा करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है । उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पानी की बढ़ती जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए एक सुदृढ़, प्रभावी संस्थागत ढांचा और व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए ।

पटना के लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में लघु जल संसाधन विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। बैठक में लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सचिव बी कार्तिकेय धनजी व अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सिर्फ नई योजनाएं नहीं, पुरानी परिसंपत्तियों का भी होगा रखरखाव बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संसाधन विभाग का काम केवल नई परियोजनाओं का निर्माण करना ही नहीं है, बल्कि पहले से बनी हुई संरचनाओं और संपत्तियों का बेहतर रखरखाव और सही प्रबंधन करना भी होना चाहिए । विभाग को अपने काम करने के तरीके में बदलाव लाना होगा, जिससे वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), ग्राउंड वाटर रिचार्ज और जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को जमीन पर बड़े पैमाने पर बढ़ावा मिल सके । इसके लिए वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया है ।

बैठक में ये सभी रहे उपस्थित बैठक की शुरुआत में लघु जल संसाधन विभाग के सचिव बी कार्तिकेय धनजी ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) के माध्यम से विभाग की वर्तमान योजनाओं और प्रस्तावित नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी । इस उच्च स्तरीय बैठक में लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित विभाग के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे ।

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लालू परिवार पर बरसे सम्राट चौधरी, बोले – ‘36% अति-पिछड़ों का अंगरक्षक हूँ, किसी अपराधी को नहीं बख्शूँगा’

श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में बीजेपी का महासम्मेलन: सम्राट चौधरी ने विपक्ष को घेरा, नित्यानंद राय और राजभूषण निषाद सहित दिग्गज नेताओं ने भरी हुंकार, नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों और विधायकों का हुआ भव्य अभिनंदन

पटना, 22 जून। बिहार की सियासत के केंद्र बिंदु अति-पिछड़ा वोट बैंक को साधने के लिए सोमवार को राजधानी पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में भारतीय जनता पार्टी की ओर से एक विशाल ‘अति-पिछड़ा सम्मान समारोह’ का आयोजन किया गया। इस महासम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष, खासकर लालू प्रसाद यादव के परिवार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। सम्राट चौधरी ने मंच से गरजते हुए साफ शब्दों में कहा, “मैं बिहार के 36 प्रतिशत अति-पिछड़ों का अंगरक्षक हूँ। इस समाज के हक और अधिकारों पर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। अपराधियों के खिलाफ बिहार में सफाई अभियान लगातार जारी रहेगा और संगीन जुर्म करने वालों को किसी भी सूरत में बक्सा नहीं जाएगा।”

भव्य समारोह के दौरान मंच पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, कला संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी और अन्य नेताओं का विशाल फूलों की माला पहनाकर अभिनंदन करते कार्यकर्ता।

सुरक्षा और बंगले के खेल पर सम्राट का बड़ा प्रहार

इन दिनों लालू परिवार द्वारा सुरक्षा में कटौती और बंगलों को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर पलटवार करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि उनके आवास के बाहर आज भी करीब 150 पुलिसकर्मी तैनात हैं। उन्हें बुलेटप्रूफ गाड़ी और जरूरत के मुताबिक पूरा पुलिस बल मिला हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “क्या अब पूरे बिहार की पुलिस को उनकी सुरक्षा में लगा दें? अगर ऐसा किया तो फिर इस अति-पिछड़ा समाज की सुरक्षा कौन करेगा?”

मुख्यमंत्री ने संपत्ति पर भी बड़ा हमला बोलते हुए कहा कि पटना से लेकर गोपालगंज और दिल्ली तक लालू परिवार के पास कितने मकान हैं, इसकी कोई गिनती ही नहीं है। इसके बावजूद परिवार के हर सदस्य को अलग-अलग बंगला चाहिए। उन्होंने साफ किया कि एनडीए सरकार में परिवारवाद नहीं, बल्कि जनता का राज चलेगा।

पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित अति-पिछड़ा सम्मान समारोह के मंच पर गदा उठाकर जनता का अभिवादन करते बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। साथ में कला संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी एवं अन्य वरिष्ठ नेतागण।

केंद्र और राज्य सरकार में अति-पिछड़ों को तवज्जो

समारोह को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और बिहार के पिछड़े एवं अति-पिछड़े समाज को असली सम्मान, अधिकार और विकास के नए अवसर मिले हैं। सरकार की नीतियों में इस समाज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ताकि हर व्यक्ति आत्मविश्वास के साथ शिक्षा और रोजी-रोजगार हासिल कर सके।

भारतीय जनता पार्टी के अति-पिछड़ा महासम्मेलन में उमड़ी भारी भीड़। गगनभेदी नारों के बीच हाथ उठाकर एकजुटता का संकल्प जताते अति-पिछड़ा समाज के हजारों लोग।

मोदी सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों का गूंजा डंका

कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में गरीब कल्याण, सुशासन और जनकल्याण के 12 गौरवशाली वर्ष पूरे हुए हैं। इन 12 वर्षों में अति-पिछड़ा समाज के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। योजनाओं का सीधा लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है।

दिग्गजों का जुटा जुटान, विधायकों और विधान पार्षदों का अभिनंदन

कला संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी द्वारा आयोजित इस भव्य अभिनंदन समारोह में नवनिर्वाचित विधान परिषद सदस्यों और अति-पिछड़ा समाज के विधायकों को सम्मानित किया गया। मंच पर केंद्रीय मंत्री राजभूषण निषाद, पूर्व मंत्री राधामोहन सिंह सहित भाजपा के तमाम शीर्ष नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे। पूरा हॉल अति-पिछड़ा समाज के हजारों लोगों की भारी भीड़ से खचाखच भरा हुआ था, जिन्होंने हाथ उठाकर एनडीए सरकार की नीतियों के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया।

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