मुजफ्फरपुर | 18 फरवरी, 2026 बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की मुहिम में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर जिला शिक्षा विभाग ने शिकंजा कस दिया है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान), सुजीत कुमार दास ने एक आधिकारिक आदेश जारी कर सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (BEO) को कड़े निर्देश दिए हैं कि छात्रों की उपस्थिति अब अनिवार्य रूप से ‘ई-शिक्षाकोष’ पोर्टल पर दर्ज की जाए।
समीक्षा में खुली पोल: आदेश के बाद भी नहीं बदला ढर्रा
विभागीय पत्र (पत्रांक-404) के अनुसार, इससे पूर्व 5 फरवरी 2026 को ज्ञापांक-292 के माध्यम से जिले के सभी सरकारी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि वे विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए टैब (Tab) का उपयोग कर ई-शिक्षाकोष पर छात्र-छात्राओं की उपस्थिति दर्ज करें। हालांकि, हाल ही में जब विभाग ने इसकी समीक्षा की, तो पाया गया कि अधिकांश विद्यालयों में इस डिजिटल प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और पोर्टल पर उपस्थिति शून्य या नगण्य है।
72 घंटे के भीतर सुधारने होंगे हालात
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने इस स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से सभी छात्रों की हाजिरी टैब के माध्यम से सुनिश्चित कराई जाए। विभाग ने साफ कर दिया है कि टैब उपलब्ध होने के बावजूद डिजिटल पोर्टल का उपयोग न करना विभागीय दिशा-निर्देशों की अवहेलना है।
इन अधिकारियों और कर्मियों को दी गई जिम्मेदारी
व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए इस आदेश की प्रतिलिपि निम्नलिखित स्तरों पर भेजी गई है:
प्रखंड संसाधन केंद्र (BRC): सभी लेखा सहायक और डेटा एंट्री ऑपरेटरों को निगरानी के लिए सूचित किया गया है।
विद्यालय स्तर: जिले के सभी प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों (HM) और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।
वरिष्ठ अधिकारी: जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को भी इस कार्यवाही की सूचना साझा की गई है।
शिक्षा विभाग के इस सख्त रुख से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में मुजफ्फरपुर के सरकारी स्कूलों में उपस्थिति की निगरानी पूरी तरह डिजिटल होगी। यदि अगले तीन दिनों में पोर्टल पर सुधार नहीं दिखता है, तो संबंधित विद्यालयों के प्रधानों पर विभागीय गाज गिरनी तय मानी जा रही है।
पटना (बिहार): इबादत और बरकतों का पवित्र महीना ‘रमजान’ कल से शुरू होने जा रहा है। ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल, बिहार ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि देश के विभिन्न हिस्सों में रमजान-उल-मुबारक 1447 हिजरी का चाँद नजर आ गया है। इसके साथ ही कल, 19 फरवरी 2026 (गुरुवार) को रमजान की पहली तारीख होगी और पहला रोजा रखा जाएगा।
चाँद की तस्दीक और आधिकारिक घोषणा ऑल इंडिया मिल्ली काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष और रुइयत-ए-हिलाल कमेटी के संयोजक हजरत मौलाना डॉ. मोहम्मद आलम कासमी ने बताया कि बुधवार शाम को पटना के फुलवारी शरीफ स्थित राज्य कार्यालय और राज्य की विभिन्न शाखाओं में चाँद देखने का विशेष इंतजाम किया गया था। यद्यपि पटना और आसपास के आसमान में बादलों या अन्य कारणों से चाँद स्पष्ट रूप से नहीं दिखा, लेकिन देश के अन्य राज्यों और शहरों से चाँद दिखने की पुख्ता और विश्वसनीय गवाही (खबर) प्राप्त हुई है।
सांप्रदायिक सौहार्द की अपील मिल्ली काउंसिल के सचिव फैजान रजी कासमी द्वारा जारी इस विज्ञप्ति के बाद मुस्लिम समुदाय में खुशी की लहर है। मस्जिदों में आज रात से ही विशेष नमाज ‘तरावीह’ शुरू हो जाएगी। काउंसिल ने इस पाक महीने के अवसर पर मुल्क में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ करने की अपील की है।
बाल विवाह के खिलाफ एकजुट हुआ समाज; ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ‘ के तहत हांसा में लगा स्वास्थ्य शिविर
समस्तीपुर | 18 फरवरी, 2026 राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिले के विकास खंडों में बेटियों के सशक्तिकरण की गूँज सुनाई दी। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास निगम, समस्तीपुर द्वारा उच्च माध्यमिक विद्यालय, हांसा एवं राजकीय बुनियादी विद्यालय, हांसा में संयुक्त रूप से स्वास्थ्य जांच शिविर और जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।
बाल विवाह कुप्रथा पर प्रहार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र की कार्यक्रम समन्वयक दीप्ति कुमारी ने छात्राओं को बाल विवाह के गंभीर दुष्परिणामों के प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा, “बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह एक बालिका के शारीरिक और मानसिक विकास को पूरी तरह बाधित कर देता है।” उन्होंने इसके सामाजिक प्रभाव और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जोर
लेखापाल पप्पू यादव ने किशोरियों के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (Health & Hygiene) के महत्व को साझा किया। उन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन, संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी।
विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य जांच
स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉ. प्रशांत कुमार एवं डॉ. संजुक्ता आनंद के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने छात्राओं की स्वास्थ्य जांच की। इसमें एएनएम वीणा कुमारी, सीएचओ नेहा कुमारी और फार्मासिस्ट ब्रजेश कुमार ने छात्राओं को आवश्यक चिकित्सीय परामर्श और दवाएं उपलब्ध कराईं।
प्रशासनिक और स्वयंसेवी संस्थाओं की उपस्थिति
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से गौरव कुमार (DMC), रवि प्रकाश सिंह (DPM), डॉली कुमारी (जेंडर स्पेशलिस्ट) सहित कुणाल, राजेश और दीपशिखा कुमारी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं ‘प्रयास’ संस्था से नीतू जोशेफ, सोनेलाल ठाकुर और प्रभात कुमार ने भी अपने अनुभवों और विभागीय योजनाओं को साझा किया।
विद्यालय प्रशासन का सहयोग
कार्यक्रम को सफल बनाने में उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय कुमार एवं राजकीय बुनियादी विद्यालय के प्रधानाचार्य अजय कुमार की अहम भूमिका रही। शिक्षक किरण कुमारी एवं गुंजेश कुमार ‘गुंजन’ ने छात्राओं को प्रेरित किया। छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हुए शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े अपनी शंकाओं का समाधान किया।
समस्तीपुर, शहर के घोषलेन स्थित परीक्षा केंद्र पर प्रशासन और नगर निगम की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। केंद्र के मुख्य निकास द्वार के ठीक सामने नाले पर रखा स्लैब पूरी तरह जर्जर होकर टूट चुका है। परीक्षा खत्म होते ही जब सैकड़ों छात्र एक साथ बाहर निकलते हैं, तो यहाँ जान जोखिम में डालने वाली स्थिति पैदा हो जाती है।
780 परीक्षार्थी, एक टूटा स्लैब और गहरा नाला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस केंद्र पर प्रतिदिन लगभग 780 परीक्षार्थी परीक्षा देने पहुँच रहे हैं। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब छात्र-छात्राओं की भीड़ बाहर निकलती है, तो उन्हें इसी टूटे हुए स्लैब के संकरे हिस्से से होकर गुजरना पड़ता है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि छात्र संतुलन बनाकर इस गड्ढे को पार कर रहे हैं। जरा सी चूक या पीछे से आने वाले धक्का-मुक्की के कारण कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है।
भगदड़ और बड़े हादसे की आशंका
निकास द्वार पर जगह कम होने के कारण अक्सर छात्रों के बीच आपाधापी मच जाती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि:
“अगर भीड़ के दबाव में किसी का पैर फिसला, तो वह सीधे गहरे नाले में जा गिरेगा। भगदड़ की स्थिति में यहाँ बड़ी जनहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।”
मुख्य समस्याएं जो प्रशासन को नहीं दिख रहीं:
संकरा रास्ता: निकास द्वार के ठीक सामने नाला होने से रास्ता बेहद संकरा हो गया है।
जर्जर स्लैब: स्लैब का आधा हिस्सा टूटकर नाले में गिर चुका है, जिससे केवल एक पतली पट्टी बची है।
सुरक्षा का अभाव: इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी के बावजूद वहां सुरक्षा के लिए कोई बैरिकेडिंग या वैकल्पिक रास्ता नहीं बनाया गया है।
हमारी मांग: अभिभावकों और छात्रों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि परीक्षा की गंभीरता को देखते हुए इस स्लैब की तत्काल मरम्मत कराई जाए या वहां लोहे की प्लेट डालकर रास्ता सुरक्षित किया जाए ताकि भविष्य में किसी अनहोनी को टाला जा सके।
शहर की ऐतिहासिक समस्तीपुर चीनी मिल को पुनः चालू करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। मंगलवार की शाम रेल विकास-विस्तार मंच एवं जिला विकास मंच के संयुक्त तत्वावधान में कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। माधुरी चौक से जोरदार नारों के साथ जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
हुंकार: “रोजी-रोटी का आधार थी यह मिल”
जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण करने के पश्चात पुनः माधुरी चौक पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया। सभा की अध्यक्षता मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने की।
सभा को संबोधित करते हुए सेवानिवृत्त शिक्षक और मंच के वरीय सदस्य शंकर साह ने भावुक होते हुए कहा:
“अंग्रेजों के जमाने की यह मिल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों के भरण-पोषण का साधन थी। मिल के पास आज भी पर्याप्त जमीन और आवागमन के बेहतर साधन उपलब्ध हैं। अगर सरकार की इच्छाशक्ति हो, तो इसे आसानी से शुरू कर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदला जा सकता है।”
राजनीतिक दलों ने दिया समर्थन
आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। राजद नेता राकेश ठाकुर और भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने साझा बयान में कहा कि अब समय आ गया है जब सभी राजनीतिक दलों, बुद्धिजीवियों, छात्रों और किसानों को एक मंच पर आकर संघर्ष तेज करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मिल चालू नहीं होती, यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
1995 से बंद है ‘समस्तीपुर की लाइफलाइन‘
विदित हो कि इस चीनी मिल की स्थापना 1917 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी। दशकों तक यह मिल जिले की आर्थिक रीढ़ बनी रही, लेकिन 1995 में अचानक आई रुकावटों के कारण इसे बंद कर दिया गया। तब से लेकर आज तक कई चुनाव हुए और कई वादे किए गए, लेकिन मिल की चिमनियों से धुआं नहीं निकला।
सभा में ये रहे मौजूद: कार्यक्रम में मुख्य रूप से राम विनोद ,जीबछ पासवान, अरुण कुमार राय, राजेंद्र राय, पिंकू पासवान, रामलाल राम, संतोष कुमार निराला, डोमन राय, विश्वनाथ सिंह हजारी, रंभू राय, नंदू महतो, शाहीद हुसैन, मनोज कुमार राय, सुधीर प्रसाद गुप्ता और रामदयालू महतो सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
मुजफ्फरपुर : महिला सशक्तिकरण और सहकारी समितियों की भूमिका पर चर्चा करने के लिए आगामी शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। ‘जब महिला श्रमिक कमान संभालती हैं: महिला सहकारी समितियों की आवाज़ें’ विषय पर आधारित यह ऑनलाइन सत्र शाम 6:00 बजे से 8:00 बजे तक चलेगा।
यह वेबिनार 24 अक्टूबर 2025 को श्रमिक सहकारी समितियों और लोकतांत्रिक आर्थिक व्यवस्था पर आयोजित सफल सत्र की अगली कड़ी है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम कर रही महिला कामगारों के अनुभवों और चुनौतियों को साझा करना है।
प्रमुख वक्ता और विशेषज्ञ
सत्र में देश के विभिन्न हिस्सों से महिला नेतृत्व भाग लेंगी:
गीता खाँट: पनम महिला क्रेडिट सहकारी समिति (गुजरात)
एम. नूकम्मा: एसएसएफ फिश प्रोड्यूसर को-ऑप लिमिटेड (आंध्र प्रदेश)
कोनिका धनवार: मधु चाय बागान (पश्चिम बंगाल)
शीबा संजेश: करी पाउडर कंसोर्टियम (केरल)
कार्यक्रम का संचालन कृष्णा प्रिया चोरागुड़ी द्वारा किया जाएगा। चर्चा को समृद्ध बनाने के लिए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़, शोधकर्ता शुभश्री घटक और एम.के. श्रवण, आनंदी इंडिया से तारुलता सोलंकी और फिशकॉन से अर्जिली दासू भी शामिल होंगे।
आयोजन का उद्देश्य
जन स्वास्थ्य अभियान (JSA) और ‘रिसर्च फॉर एक्शन’ के सहयोग से आयोजित इस चर्चा का केंद्र यह है कि कैसे सहकारी समितियां महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक नेतृत्व प्रदान कर रही हैं। यह सत्र स्वास्थ्य समानता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विजन वैली हॉल में गूंजे ‘नमो बुद्धाय‘ के जयकारे, भंते मणिकीर्ति पासवान ने कराया विवाह संपन्न
सकरा (मुजफ्फरपुर): समाज में फैली कुरीतियों और फिजूलखर्ची पर प्रहार करते हुए, सकरा प्रखंड के विजन वैली हॉल में एक आदर्श विवाह का आयोजन किया गया। यह विवाह पूरी तरह से बौद्ध रीति-रिवाज (बौद्ध विधि) से संपन्न हुआ, जिसमें न तो दहेज की मांग थी और न ही कोई दिखावा या आडंबर। राजीव कुमार बौद्ध और नंदिनी कुमारी बौद्ध के परिणय सूत्र में बंधने के इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने सैकड़ों मेहमानों ने इस अनूठी पहल की जमकर सराहना की।
आडंबरमुक्त और सादगीपूर्ण समारोह : शादी का माहौल पारंपरिक शोर-शराबे से कोसों दूर था। आमतौर पर शादियों में होने वाला डीजे का शोर, फिजूलखर्ची और दिखावा यहाँ पूरी तरह नदारद था। कार्यक्रम की शुरुआत तथागत बुद्ध की वंदना के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने बुद्ध और डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों का पालन करते हुए सादगी के साथ वर-वधू को आशीर्वाद दिया।
भंते मणिकीर्ति पासवान ने दिलाई शपथ : इस विवाह को संपन्न कराने के लिए विशेष रूप से भंते मणिकीर्ति पासवान एवं पवन शर्मा उपस्थित थे। उन्होंने बौद्ध विधियों का पालन करते हुए वर-वधू को अष्टशील और पंचशील का पाठ पढ़ाया। भंते जी ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्ध विवाह का उद्देश्य केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों को बुद्ध के धम्म और तर्कसंगत विचारधारा से जोड़ना है। उन्होंने वर-वधू को जीवन भर एक-दूसरे का सम्मान करने और विपत्ति में भी धम्म के मार्ग पर चलने की शपथ दिलाई।
दहेजमुक्त समाज का संदेश : आयोजकों का मुख्य उद्देश्य समाज को दहेजमुक्त बनाना था। इस विवाह में वर पक्ष ने कन्या पक्ष से किसी भी प्रकार के लेनदेन से साफ इनकार कर दिया, जो आज के समय में एक मिसाल है। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि एवं भन्ते पवन शर्मा ने कहा कि “यह शादी सामाजिक बदलाव का एक बड़ा प्रतीक है। युवा पीढ़ी को ऐसी सादी शादियों से प्रेरणा लेनी चाहिए।”
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति : कार्यक्रम में वर-वधू को आशीर्वाद देने के लिए क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। बैनर पर महात्मा बुद्ध, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, संत रविदास सहित अन्य महापुरुषों की तस्वीरें इस बात की गवाह थीं कि यह विवाह सामाजिक समानता और तर्कवादी सोच पर आधारित था।
‘मिशन सिंगर‘ ने बिखेरा धम्म का रंग : कार्यक्रम को संगीतमय बनाने के लिए प्रसिद्ध ‘मिशन सिंगर’ राजेश कुमार बौद्ध, संगीता बौद्ध, महेश्वरी बौद्ध और निम्ति बौद्ध ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने बुद्ध और अंबेडकर के गीतों के माध्यम से माहौल को भक्तिमय और बौद्धमय बना दिया।
परिजनों और स्वागतकर्ता का सहयोग : शादी के आयोजन में स्वागतकर्ता जलेंद्र राम (ग्राम: चंदपुर फतेह, पोस्ट: राजापाकर, थाना: पातेपुर, जिला: वैशाली) और वर-वधू के परिजनों ने मेहमानों के स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ी। कार्यक्रम को सफल बनाने में ऋषि कुमार, सोनू कुमार, वकील कुमार और समस्त बौद्ध परिवार ने अहम भूमिका निभाई। यह विवाह न केवल राजीव और नंदिनी के जीवन की नई शुरुआत है, बल्कि यह सकरा क्षेत्र में एक नए, शिक्षित और आडंबरमुक्त समाज की दिशा में एक बड़ा कदम है।
डीआरएम और डीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन; होली के बाद समस्तीपुर में बड़े जनांदोलन का शंखनाद
समस्तीपुर, 17 फरवरी 2026
बिहार के समस्तीपुर जिले में विकास की सुस्त रफ्तार और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ जन-आक्रोश उबलने लगा है। जिले की लाइफलाइन मानी जाने वाली मुक्तापुर रेल गुमटी पर ओवरब्रिज निर्माण कार्य में हो रही देरी ने स्थानीय नागरिकों के धैर्य की परीक्षा ले ली है। मंगलवार को माधुरी चौक स्थित ऐतिहासिक राधे-कृष्ण मंदिर के प्रांगण में रेल विकास-विस्तार मंच एवं जिला विकास मंच की एक अति-महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार और रेल प्रशासन ने अपनी कुंभकर्णी नींद नहीं त्यागी, तो समस्तीपुर की सड़कों पर एक ऐसा आंदोलन खड़ा होगा जिसे रोकना प्रशासन के वश में नहीं होगा।
शिलान्यास की औपचारिकता और धरातल की कड़वी सच्चाई
बैठक के दौरान सबसे तीखा प्रहार मुक्तापुर रेल गुमटी पर बन रहे ओवरब्रिज को लेकर किया गया। मंच के सदस्यों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण पुल का शिलान्यास स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। शिलान्यास के समय समस्तीपुर और दरभंगा को जोड़ने वाली इस मुख्य सड़क पर यात्रा करने वाले लाखों लोगों में एक उम्मीद जगी थी कि अब घंटों लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति मिलेगी।
परंतु, विडंबना यह है कि शिलान्यास के महीनों बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। रेल विकास-विस्तार मंच के सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कार्य शुरू न होने से जनता में भारी निराशा है। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि उन हजारों दैनिक यात्रियों के साथ विश्वासघात भी है जो प्रतिदिन इस गुमटी पर अपना कीमती समय और ईंधन बर्बाद करते हैं।
अटेरन चौक और हवाई अड्डे की उपेक्षा पर गहरा रोष
बैठक में केवल मुक्तापुर ही नहीं, बल्कि समस्तीपुर शहर की अन्य ज्वलंत समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अटेरन चौक स्थित रेल गुमटी शहर का एक और ‘डेथ ट्रैप’ और ‘ट्रैफिक चोक पॉइंट’ बन चुका है। यहाँ हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आपातकालीन सेवाओं और स्कूली बच्चों को भारी कठिनाई होती है। मंच ने मांग की है कि इस गुमटी पर भी ओवरब्रिज निर्माण को तत्काल मंजूरी दी जाए।
इसके अतिरिक्त, दूधपूरा स्थित हवाई अड्डा और माधुरी चौक का चिल्ड्रेन पार्क भी चर्चा के केंद्र में रहे। वक्ताओं ने कहा कि दूधपूरा हवाई अड्डे का जीर्णोद्धार कर इसे चालू करना जिले के व्यावसायिक और सामरिक विकास के लिए अनिवार्य है। वहीं, अंग्रेजों के जमाने से स्थापित ऐतिहासिक चिल्ड्रेन पार्क, जो कभी बच्चों के मनोरंजन का केंद्र था, आज उपेक्षा के कारण अपनी पहचान खो रहा है। मंच ने इसके जीर्णोद्धार और इसे पुनः जनता के लिए खोलने की पुरजोर मांग की है।
संघर्ष की बनी रणनीति: पहले संवाद, फिर संघर्ष
बैठक की अध्यक्षता मंच के वरीय सदस्य शंकर प्रसाद साह ने की और संचालन संयोजक शत्रुघ्न राय ‘पंजी‘ ने किया। शत्रुघ्न पंजी ने अपने संबोधन में मंच के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि रेल विकास-विस्तार मंच और जिला विकास मंच हमेशा से जिला हित में संघर्षरत रहा हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंच ने पहले भी अपने आंदोलनों के माध्यम से सरकार और अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कर कई विकास कार्य संपन्न करवाए हैं।
आगामी कार्ययोजना:
प्रशासनिक दस्तक: इसी सप्ताह के अंत में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंडल रेल प्रबंधक (DRM) और जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात करेगा। उन्हें एक विस्तृत ‘स्मारक पत्र’ (ज्ञापन) सौंपा जाएगा, जिसमें सभी लंबित मांगों का समयबद्ध समाधान करने का आग्रह होगा।
निर्णायक आंदोलन: यदि ज्ञापन सौंपने के बाद भी प्रशासन का रवैया ढुलमुल रहता है, तो होली के त्यौहार के तुरंत बाद एक निर्णायक और उग्र आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि मुक्तापुर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य भौतिक रूप से शुरू नहीं हो जाता।
एकजुट हुए जिले के प्रबुद्ध नागरिक
इस बैठक में जिले के कोने-कोने से आए प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इनमें अरूण कुमार राय, जीबछ पासवान, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राजेंद्र राय, पिंकू पासवान, रामलाल राम, रामदयालू महतो, राम विनोद पासवान, राकेश कुमार ठाकुर, शाहीद हुसैन, मनोज कुमार राय, सुधीर प्रसाद गुप्ता, विश्वनाथ सिंह हजारी, नंदू महतो, रंभू राय, डोमन राय और संतोष कुमार निराला प्रमुख थे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अपनी मिट्टी और अपने जिले के हक के लिए किसी भी बड़ी कुर्बानी को तैयार हैं।
समस्तीपुर आज विकास की दोहरी मार झेल रहा है—एक तरफ परियोजनाओं की फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं, तो दूसरी तरफ जनता जाम और अव्यवस्था के बोझ तले दब रही है। रेल विकास-विस्तार मंच की यह बैठक महज एक औपचारिक सभा नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए आखिरी चेतावनी है। मुक्तापुर से लेकर दूधपूरा तक की समस्याओं पर अब जनता चुप बैठने वाली नहीं है।
झूठे मुकदमे में फंसाने के खिलाफ समस्तीपुर में प्रदर्शन
समस्तीपुर, 16 फरवरी 2026 बिहार के गोपालगंज (भोरे) से भाकपा माले के जुझारू नेता और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) के बिहार राज्य अध्यक्ष, कॉ. जितेंद्र पासवान को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के खिलाफ आज समस्तीपुर की सड़कों पर प्रतिरोध मार्च निकाला गया । भाकपा माले और RYA के कार्यकर्ताओं ने इस अदालती फैसले को ‘अन्यायपूर्ण’ और ‘राजनीतिक साजिश’ करार देते हुए “प्रतिरोध दिवस” के रूप में मनाया।
मालगोदाम चौक से गूंजा इंकलाब का नारा
प्रतिरोध मार्च की शुरुआत समस्तीपुर शहर के व्यस्त मालगोदाम चौक से हुई। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में लाल झंडे और बड़े बैनर थामे हुए थे, जिन पर साफ तौर पर लिखा था— “कॉ. जितेंद्र पासवान और अन्य साथियों को उम्रकैद की सजा के अन्यायपूर्ण फैसले के खिलाफ प्रतिरोध दिवस।” मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “इंकलाब जिंदाबाद”, “कॉ. जितेंद्र पासवान को रिहा करो” और “नितीश कुमार जवाब दो” जैसे नारों से पूरा सड़क गूंज उठा।
साजिश के तहत फंसाने का आरोप
प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जितेंद्र पासवान गरीबों, दलितों और शोषितों की आवाज रहे हैं। उन्हें एक पुराने और झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजना लोकतंत्र की हत्या है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार जन-नेताओं को जेल भेजकर जनता के आंदोलनों को कुचलना चाहती है। प्रदर्शनकारी बार-बार “जेल का फाटक टूटेगा, जितेंद्र पासवान छूटेगा” के संकल्प को दोहरा रहे थे।
प्रमुख नेताओं की उपस्थिति और नेतृत्व: इस व्यापक आंदोलन का नेतृत्व भाकपा माले के जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल सड़क तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूती से लड़ा जाएगा। सभा में रौशन कुमार, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, ललन कुमार, महावीर पोद्दार, फूल बाबू सिंह, दीपक यदुवंशी,अमित कुमार, अजय कुमार सहित भारी संख्या में युवा और वरिष्ठ नेता शामिल हुए,
भाकपा माले के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जितेंद्र पासवान के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस नहीं लिया गया और उन्हें न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन गोपालगंज और समस्तीपुर से निकलकर पूरे बिहार में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेगा।
‘साहब! क्या हमारे बच्चों को हक नहीं कि वे अपने आँगन में पढ़ सकें?’
मुजफ्फरपुर (विशेष संवाददाता): बिहार के शैक्षिक मानचित्र पर विकास की लंबी-चौड़ी लकीरें खींची जा रही हैं, ‘पढ़ेगा बिहार, बढ़ेगा बिहार’ के नारे गूँज रहे हैं, लेकिन मुजफ्फरपुर जिले का बन्दरा प्रखंड आज भी एक बुनियादी हक के लिए छटपटा रहा है। यह हक है—उच्च शिक्षा का। आजादी के अमृत काल में भी यहाँ के मेधावी छात्रों के सपने मिलों दूर तक फैली धूल भरी सड़कों और असुरक्षित सफर की भेंट चढ़ रहे हैं। आलम यह है कि सरकार की ‘हर प्रखंड, एक डिग्री कॉलेज’ की घोषणा के बाद भी बन्दरा का नाम सरकारी फाइलों से गायब है, जिसने यहाँ के हजारों परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।
तीन शक्ति केंद्रों से एक ही गुहार
अपनी इस मार्मिक पीड़ा को लेकर बन्दरा प्रखंड के जागरूक नागरिकों और अभिभावकों ने एक साथ तीन महत्वपूर्ण शक्ति केंद्रों का दरवाजा खटखटाया है। श्याम किशोर सिंह के नेतृत्व में प्रखंड के छात्र-छात्राओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने माननीय शिक्षा मंत्री (बिहार सरकार), माननीय विधान पार्षद (तिरहुत स्नातक क्षेत्र) और माननीया विधायक (गायघाट विधानसभा) के नाम एक विनम्र किंतु बेहद भावुक आवेदन प्रेषित किया है।
इस त्रिकोणीय मांग पत्र में क्षेत्र की जनता ने अपनी वर्षों की उपेक्षा का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जहाँ एक ओर सरकार हर प्रखंड में कॉलेज खोलने का श्रेय ले रही है, वहीं बन्दरा जैसे पिछड़े क्षेत्र को इस सूची से बाहर रखना यहाँ के भविष्य के साथ अन्याय है।
दूरी और मजबूरी: शिक्षा के पथ पर कांटे
बन्दरा प्रखंड आज भी जिले के अन्य प्रखंडों की तुलना में विकास के पायदान पर सबसे पीछे खड़ा है। यहाँ के विद्यार्थियों के लिए इंटरमीडिएट के बाद की पढ़ाई एक ‘जंग’ लड़ने के समान है। गाँव की कच्ची पगडंडियों से निकलकर मुजफ्फरपुर शहर या अन्य दूरस्थ कॉलेजों तक पहुँचने में छात्रों का आधा दिन सफर की थकान में ही गुजर जाता है।
अभिभावकों का कहना है कि सबसे बुरा हाल छात्राओं का है। उच्च शिक्षा के लिए सुरक्षित परिवहन की कमी और स्थानीय स्तर पर कॉलेज न होने के कारण कई मेधावी बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वाने के लिए माता-पिता मजबूर हैं। यह केवल एक कॉलेज की मांग नहीं है, बल्कि उन हजारों आँखों के काजल की रक्षा की गुहार है जो पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।
सरकारी घोषणा और बन्दरा की ‘शून्य‘ उपलब्धि
बिहार सरकार की वह घोषणा अत्यंत सराहनीय और दूरदर्शी थी जिसमें प्रत्येक प्रखंड में एक डिग्री कॉलेज की स्थापना का संकल्प लिया गया था। इस घोषणा से बन्दरा के लोगों में एक उम्मीद जागी थी कि अब उनके बच्चों को मुजफ्फरपुर या दरभंगा के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। लेकिन जब हाल ही में जारी हुई सूची में बन्दरा प्रखंड का नाम नदारद पाया गया, तो यहाँ के विद्यार्थियों और अभिभावकों में निराशा और गहरी चिंता व्याप्त हो गई।
बंदरा प्रखंड के जागरूक नागरिकों का कहना है कि बन्दरा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ से मुख्य शहरों की दूरी काफी अधिक है। ऐसे में यहाँ डिग्री कॉलेज का न होना इस क्षेत्र के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।
ज्ञापन के 4 मुख्य बिंदु: क्यों जरूरी है यहाँ कॉलेज?
शैक्षणिक पिछड़ापन: बन्दरा की साक्षरता और उच्च शिक्षा के अनुपात को सुधारने का एकमात्र रास्ता स्थानीय डिग्री कॉलेज है।
सुरक्षा और बेटियाँ: घर के पास कॉलेज होने से छात्राओं का ‘ड्रॉप-आउट’ रेट शून्य होगा और वे बिना किसी डर के स्नातक की डिग्री ले सकेंगी।
आर्थिक मार: दूर जाकर पढ़ने में लगने वाला भारी बस किराया और हॉस्टल का खर्च यहाँ के गरीब किसानों और मजदूरों की कमर तोड़ रहा है।
क्षेत्रीय असंतुलन: जब अन्य प्रखंडों को कॉलेज मिल रहा है, तो विकास की दृष्टि से पिछड़े बन्दरा को वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।
एक विनम्र ‘आर्त पुकार‘
प्रेषक श्याम किशोर सिंह और बन्दरा के नागरिकों ने अपने पत्र में किसी विरोध या आक्रोश के बजाय एक ‘विनम्र निवेदन’ किया है। उन्होंने माननीय शिक्षा मंत्री की दूरदर्शिता, तिरहुत स्नातक MLC के शैक्षणिक प्रेम और क्षेत्रीय विधायक की कर्तव्यनिष्ठा पर भरोसा जताते हुए आग्रह किया है कि बन्दरा की भौगोलिक और सामाजिक आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए।
क्या सुनेगी सरकार? :क्या बन्दरा के मेधावी छात्रों को अपनी ही मिट्टी पर स्नातक की टोपी पहनने का मौका मिलेगा? क्या सरकारी फाइलों में दबा यह प्रखंड कभी विकास की मुख्यधारा से जुड़ पाएगा? ये सवाल आज बन्दरा की सड़कों पर तैर रहे हैं। अब देखना यह है कि शिक्षा मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस ‘शैक्षणिक रेगिस्तान’ में उम्मीद की कितनी जल्दी बारिश करते हैं। बन्दरा की जनता को पूर्ण विश्वास है कि उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।