नई दिल्ली, 29 जून 2026 केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने आज शिक्षा जगत में ‘त्रिभाषा नीति’ (थ्री-लैंग्वेज पॉलिसी) पर नए और कड़े दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने वाले इस फैसले से कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि अब स्कूलों में तीन भाषाओं का अध्ययन पूरी तरह अनिवार्य होगा, जिसमें से कम से कम दो भारतीय भाषाओं (भारतीय भाषा) का होना जरूरी है। हालांकि, छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए अलग-अलग कक्षाओं को बड़ी राहत और रियायतें भी दी गई हैं।
कक्षा 10वीं के छात्रों की बल्ले-बल्ले, पुराने नियम से ही होगी परीक्षा
इस नए नियम के आने के बाद वर्तमान शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 10वीं में पढ़ रहे छात्रों ने राहत की सांस ली है। इस बैच को नई भाषा नीति से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इन्हें किसी भी तीसरी भाषा को लेने की जरूरत नहीं है, वे अपनी पुरानी व्यवस्था के तहत केवल दो भाषाओं के साथ ही बोर्ड परीक्षा देंगे।
कक्षा 7वीं, 8वीं और 9वीं के छात्रों के लिए ‘इंटरनल असेसमेंट‘ का खेल, नहीं होगी बोर्ड परीक्षा!
सीबीएसई ने साफ किया है कि वर्तमान में कक्षा 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा पढ़नी तो होगी, लेकिन जब वे कक्षा 10वीं में पहुंचेंगे, तो उन्हें तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। उनका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर केवल ‘इंटरनल असेसमेंट’ (आंतरिक मूल्यांकन) के जरिए किया जाएगा।
कक्षा 9वीं (सत्र 2026-27) के छात्रों के लिए तीन अलग-अलग स्थितियां बनाई गई हैं:
स्थिति 1: यदि छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं (जैसे हिंदी और तमिल) पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी, फ्रेंच या कोई अन्य भारतीय भाषा चुन सकता है।
स्थिति 2: यदि छात्र एक भारतीय और एक विदेशी भाषा (जैसे तमिल और अंग्रेजी) पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा चुननी होगी।
स्थिति 3: यदि कोई छात्र पहले से दो विदेशी भाषाएं (जैसे अंग्रेजी और फ्रेंच) पढ़ रहा है, तो बोर्ड की विशेष एकमुश्त छूट के तहत वह इन्हें जारी रख सकता है, लेकिन उसे तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा को अनिवार्य रूप से जोड़ना होगा। यही नियम कक्षा 7वीं और 8वीं के उन छात्रों पर भी लागू होगा जो दो विदेशी भाषाएं पढ़ रहे हैं।
कक्षा 6वीं के छात्रों पर गिरेगा गाज, बोर्ड परीक्षा देना होगा अनिवार्य!
सबसे बड़ा झटका शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 6वीं में प्रवेश करने वाले और इसके बाद आने वाले सभी नए बैच के छात्रों को लगा है। इन छात्रों के लिए यह नियम पूरी तरह कड़ा और अनिवार्य होगा। इन्हें तीन भाषाएं (दो भारतीय भाषाओं के साथ) पढ़नी ही होंगी, और जब यह बैच आगे चलकर कक्षा 10वीं में पहुंचेगा, तो इन्हें तीसरी भाषा (आर3) की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी। बोर्ड इसके लिए संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल सभी 22 निर्धारित भारतीय भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराएगा।
इन छात्रों को मिलेगी ‘महा-छूट‘
सीबीएसई ने कुछ विशेष श्रेणियों को इस नीति से पूरी तरह मुक्त रखा है:
दिव्यांग (सीडब्ल्यूएसएन) छात्रों को आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 के तहत आवश्यक राहत मिलेगी।
विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों के छात्रों और विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को तीसरी भारतीय भाषा पढ़ने से छूट दी जाएगी।
यदि किसी छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में स्थानांतरण (माइग्रेशन) होता है, तो छात्र कक्षा 9वीं में भी अपनी पुरानी भाषा व्यवस्था जारी रख सकेगा।
शिक्षकों की कमी से निपटने के लिए सीबीएसई का ‘हाइब्रिड प्लान‘
स्कूलों में नए नियम लागू होने के बाद भाषा शिक्षकों की कमी न हो, इसके लिए सीबीएसई ने स्कूलों को लचीला रुख अपनाने की छूट दी है। स्कूल प्रशासन मौजूदा योग्य शिक्षकों के अलावा, रिटायर्ड (सेवानिवृत्त) शिक्षकों, पोस्टग्रेजुएट टीचर्स, ‘सहोदय क्लस्टर्स’ (स्कूलों के आपसी सहयोग समूह) और ऑनलाइन या हाइब्रिड मॉडल के जरिए छात्रों को पढ़ा सकेंगे। सीबीएसई और एनसीईआरटी मिलकर छात्रों के लिए डिजिटल इंडिया स्कीम के तहत ग्रेड-अनुरूप पाठ्यसामग्री समय पर उपलब्ध कराएंगे ताकि रट्टा मारकर सीखने (रोट लर्निंग) की जगह छात्र खुशी-खुशी भाषा सीख सकें।
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नई दिल्ली: बिहार के बुनियादी ढांचे और सड़क नेटवर्क को एक नया और ऐतिहासिक आयाम देने के लिए राजधानी नई दिल्ली में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मिलने पहुंचा। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में बिहार की सड़क कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवेज) तथा निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं की प्रगति को लेकर बेहद विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार में चल रहे विकास कार्यों में अभूतपूर्व तेजी लाना और जनसुविधाओं का विस्तार करना है।
इस महामंथन में बिहार के पथ निर्माण मंत्री ई शैलेंद्र और विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारीगण भी मुख्य रूप से मौजूद रहे। बैठक के दौरान राज्य की वर्तमान में चल रही और भविष्य के लिए प्रस्तावित बड़ी परियोजनाओं की एक-एक कर प्रगति जांची गई। सड़कों के इस जाल को और सशक्त बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर एक ठोस रोडमैप तैयार किया है, जिससे आने वाले समय में बिहार के कोने-कोने तक निर्बाध आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।
नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (केंद्र में), बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (दाएं) और बिहार के पथ निर्माण मंत्री ई शैलेंद्र (बाएं) बिहार की सड़क अवसंरचना और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति पर गहन चर्चा करते हुए। बैठक में विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारीगण भी उपस्थित हैं।
बैठक के मुख्य बिंदु और बड़े फैसले:
बिहार की सड़क अवसंरचना और नेशनल हाईवे नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया जाएगा।
निर्माणाधीन परियोजनाओं की समय-सीमा तय कर काम की रफ्तार दोगुनी करने के निर्देश दिए गए।
प्रस्तावित नए एक्सप्रेसवे और आर्थिक गलियारों (इकोनॉमिक कॉरिडोर्स) की बाधाओं को तुरंत दूर करने पर सहमति बनी।
बैठक के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क (रोड कनेक्टिविटी) ही विकसित बिहार की सबसे मजबूत आधारशिला है। इसी मजबूत संकल्प के साथ सरकार निरंतर और बिना थके कार्य कर रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई सड़कों और राजमार्गों के निर्माण से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि राज्य में उद्योगों, व्यापार और रोजगार के नए अवसरों की बाढ़ आ जाएगी।
पथ निर्माण मंत्री ई शैलेंद्र ने भी इस बैठक को बिहार के लिए गेम चेंजर बताया और कहा कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सहयोग से बिहार की सभी लंबित परियोजनाओं को रिकॉर्ड समय में पूरा किया जाएगा। इस ऐतिहासिक बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में बिहार का सड़क नेटवर्क पूरी तरह से बदलने वाला है, जिससे आम जनता को जाम और खराब रास्तों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।
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बदल जाएगी राजधानी की सूरत: मलाही पकड़ी रूट का होने जा रहा है महा-लोकार्पण, सैटेलाइट टाउनशिप पर भी लग गया मुहर!
पटना, 29 जून 2026
राजधानी पटना के निवासियों के लिए अब तक की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है! पटना की सूरत अब पूरी तरह से बदलने वाली है। आगामी 02 जुलाई 2026 को पटना मेट्रो रेल परियोजना के विस्तारित खंड का भव्य लोकार्पण होने जा रहा है, जिससे शहर के यातायात में एक अभूतपूर्व क्रांति आएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद इस तैयार हुए मलाही पकड़ी तक के मेट्रो रेल खंड का उद्घाटन करेंगे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को युद्ध स्तर पर काम पूरा करने का अल्टीमेटम दे दिया है।
समीक्षा बैठक के दौरान बड़ी स्क्रीन पर प्रदर्शित पटना मेट्रो रेल परियोजना का विस्तृत रूट मैप, जिसमें कॉरिडोर-1 और कॉरिडोर-2 के प्रस्तावित स्टेशनों और रूट की पूरी रूपरेखा दिखाई गई है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में पटना मेट्रो रेल परियोजना की प्रगति की एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि पटना मेट्रो शहर की परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और बेहद सुविधाजनक बनाने वाली एक गेम-चेंजर परियोजना है, इसलिए इसके काम में किसी भी तरह की लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जाम से मिलेगी मुक्ति, वैज्ञानिक ट्रैफिक प्लान तैयार करने का सख्त आदेश
मेट्रो निर्माण के दौरान पटना की सड़कों पर लगने वाले महाजाम को लेकर मुख्यमंत्री बेहद गंभीर दिखे। उन्होंने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि निर्माण कार्य के दौरान आम जनता को कम से कम परेशानी होनी चाहिए। इसके लिए पूरे पटना शहर की यातायात व्यवस्था का वैज्ञानिक और व्यापक अध्ययन कर एक समग्र ‘ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान’ लागू करने का आदेश दिया गया है, ताकि जाम की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ‘संकल्प’ सभागार में नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पटना मेट्रो और सैटेलाइट टाउनशिप के मास्टर प्लान की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए।
क्वालिटी से कोई समझौता नहीं, समानांतर रूप से तेज होगा काम
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ तौर पर कहा कि मेट्रो निर्माण की गुणवत्ता (क्वालिटी) से किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि परियोजना के अलग-अलग साइट्स पर एक साथ समानांतर रूप से काम की रफ्तार बढ़ाई जाए, ताकि तय समयसीमा के भीतर ही हर चरण का काम पूरा हो सके।
सज-धजकर तैयार हो रही है पटना मेट्रो रेल और मलाही पकड़ी स्टेशन का शानदार नजारा, जिसका लोकार्पण 02 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा।
सैटेलाइट टाउनशिप को लेकर भी हुआ बड़ा फैसला
इस बैठक में केवल मेट्रो ही नहीं, बल्कि पटना के भविष्य को लेकर एक और बहुत बड़ा फैसला हुआ। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना के प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप के मास्टर प्लान को भी निर्धारित समयसीमा के भीतर तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राजधानी के सुनियोजित विस्तार और भविष्य की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सैटेलाइट टाउनशिप का समयबद्ध विकास बेहद जरूरी है।
बैठक में मौजूद रहे ये तमाम अधिकारी और नेता
इस अति-महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह शामिल थे। इसके अलावा पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप कुमार आर पुडुकलकट्टी, भवन निर्माण विभाग के सचिव प्रणव कुमार, पटना प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक जितेन्द्र राणा, जिलाधिकारी कुंदन कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के शर्मा सहित पटना मेट्रो रेल परियोजना के कई अन्य सीनियर अधिकारी भी मौजूद रहे।
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30 हजार से ऊपर वाले कर्जदारों के नाम उजागर, समिति ने जारी की बकायेदारों की ‘ब्लैक लिस्ट!
सकरा (मुजफ्फरपुर)। प्रगति स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड, नीमतल्ला रोड, सकरा के 26वें स्थापना दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस प्रेस वार्ता में संस्था के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कुछ बेहद कड़े और चौंकाने वाले फैसलों की घोषणा की है। पिछले 26 वर्षों से क्षेत्र के पशुपालकों, किसानों और छोटे उत्पादकों के बीच मसाले, अगरबत्ती, शहद जैसे उत्पादों के उत्पादन और मार्केटिंग के जरिए बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाली इस समिति को अब कुछ हठी और दबंग प्रवृत्ति के सदस्यों के कारण भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि समिति के कुछ हठी और दबंग प्रवृत्ति के सदस्यों द्वारा ऋण राशि वापस करने में लगातार आनाकानी की जा रही है। बार-बार सूचना देने के बावजूद ये बकायेदार अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। इस हठधर्मिता के कारण समिति के नए और पुराने ईमानदार सदस्यों को वित्तीय सेवाएं प्रदान करने में भारी रुकावट आ रही है। संस्था के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने प्रेस वार्ता के दौरान साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि कर्ज डकार कर बैठे इन बकायेदारों के खिलाफ अब नरमी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कराकर कानूनी हंटर चलाया जाएगा।
प्रगति स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड के नीमतल्ला रोड, सकरा (मुजफ्फरपुर) कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान 31 मई 2026 तक के बड़े ऋण डिफाल्टरों की सूची को मीडिया के सामने जारी करते संस्था के अध्यक्ष राजीव गुप्ता (मध्य में), निदेशक संजय चौधरी (बाएं) और निदेशक जितेंद्र प्रसाद सिंह (दाएं)।
दबंगई और हठधर्मिता के कारण नए सदस्यों की सेवाएं ठप, संस्था का फूटा गुस्सा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाली सहकारी समितियां पूरी तरह से आपसी सहयोग और समय पर ऋण की वापसी (रोटेशन) पर टिकी होती हैं। वहीं समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन डिफाल्टरों को पूर्व में वकालतन नोटिस (लीगल नोटिस) भी भेजा जा चुका है, लेकिन दबंगई के नशे में चूर इन बकायेदारों ने समिति की कानूनी चेतावनियों को भी पूरी तरह ठेंगा दिखा दिया। इस वित्तीय संकट का सीधा असर समिति से जुड़ने वाले नए और गरीब किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि पूंजी ब्लॉक होने के कारण समिति नए सदस्यों को समय पर लोन और अन्य जरूरी वित्तीय सेवाएं प्रदान नहीं कर पा रही है।
प्रेस वार्ता के दौरान 31 मई 2026 तक के बड़े ऋण डिफाल्टरों की सूची
70 डिफाल्टरों की सूची तैयार, अंतिम 15 दिनों का अल्टीमेटम: प्रेस वार्ता के दौरान संस्था के अध्यक्ष ने बताया कि समिति ने अब तक कुल 70 ऐसे सदस्यों को चिन्हित किया है जो पूरी तरह डिफाल्टर हो चुके हैं। इन सभी को वकालतन नोटिस भी भेजा जा चुका है। समिति ने 31 मई 2026 तक सूद समेत 30,000 (तीस हजार) रुपये से ज्यादा का बकाया रखने वाले सकरा ,बरियारपुर, और पातेपुर थाना क्षेत्र के प्रमुख बकायेदारों (70 में से 40 डिफाल्टरों) की एक विस्तृत सूची सार्वजनिक की है।
01 जुलाई से 15 जुलाई 2026 के बीच ऋण वसूली का विशेष अभियान: अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि 01 जुलाई से 15 जुलाई 2026 के बीच ऋण वसूली का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यदि इन 15 दिनों के भीतर ये डिफाल्टर सदस्य आकर अपना भुगतान नहीं करते हैं या आंशिक राशि भी जमा नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध विभिन्न धाराओं के तहत सीधे आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाएगा, जिसके बाद उनकी मुश्किलें बेहद बढ़ सकती हैं।
पारदर्शी, डिजिटल और आधुनिक बनाने के लिए जल्द ही सॉफ्टवेयर अपडेशन का काम: प्रगति स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड अपने कामकाज को और अधिक पारदर्शी, डिजिटल और आधुनिक बनाने के लिए जल्द ही सॉफ्टवेयर अपडेशन का काम कराने जा रही है। इस नए तकनीकी बदलाव के बाद समिति के सभी पुराने ग्राहकों और ऋणियों के खातों को उनके आधार नंबर से लिंक (अपडेट) करना पूरी तरह से अनिवार्य हो जाएगा। खातों के इस प्रमाणीकरण और डिजिटलीकरण का सीधा असर ऋणियों के सिबिल स्कोर (क्रेडिट स्कोर) पर दिखेगा। जो सदस्य समय पर अपने ऋण की किस्तों का भुगतान करेंगे, उनका सिबिल स्कोर मजबूत होगा जिससे उन्हें भविष्य में अन्य वित्तीय संस्थानों और बैंकों से भी आसानी से लोन मिल सकेगा। इसके विपरीत, जानबूझकर ऋण दबाकर बैठने वाले डिफाल्टर सदस्यों की वित्तीय लापरवाही सीधे उनके सिबिल ट्रैक रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगी, जिससे उनका सिबिल स्कोर खराब होगा और भविष्य में उनके लिए किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था से ऋण या वित्तीय लाभ पाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
प्रेस वार्ता के दौरान 31 मई 2026 तक के बड़े ऋण डिफाल्टरों की सूची
स्थापना दिवस पर बकायेदारों को ब्याज में भारी छूट का मौका: समिति ने अपने 26 वर्ष पूरे होने और 27वें वर्ष में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में ऋणियों को एक अंतिम सुनहरा मौका भी दिया है। यदि बकायेदार सदस्य 1 जुलाई से 15 जुलाई 2026 के बीच आकर संस्था से संपर्क करते हैं, तो समिति के निर्णय के अनुसार उन्हें ब्याज राशि में अधिकतम छूट प्रदान की जाएगी।
ऋण निपटाने के लिए इन पदाधिकारियों से करें संपर्क: ऋण वसूली अभियान के तहत किसी भी प्रकार की जानकारी, पेंडिंग राशि का पता लगाने या भुगतान के लिए सदस्य सीधे इन स्थानों और पदाधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं:
प्रगति का निबंधित कार्यालय, नीमतल्ला रोड, सकरा
नीमतल्ला चौक पर संस्था के निदेशक संजय चौधरी
सकरा नया हाट के पास संस्था के निदेशक जितेंद्र कुमार
प्रगति मोड़ मझौलिया स्थित ‘बेब वर्ल्ड स्कूल’ में संस्था के अध्यक्ष राजीव गुप्ता से संपर्क किया जा सकता है।
इसके अलावा, सदस्य अपनी लंबित राशि और ब्याज की सटीक गणना की जानकारी के लिए समिति के आधिकारिक मोबाइल नंबर पर कभी भी फोन कर सकते हैं।प्रेस वार्ता के दौरान मुख्य रूप से संस्था के अध्यक्ष राजीव गुप्ता, निदेशक संजय चौधरी और निदेशक जितेंद्र प्रसाद सिंह मौजूद रहे।
प्रमुख बकायेदारों की सूची (31 मई 2026 तक की स्थिति):
समिति द्वारा जारी सूची के अनुसार, यह वो बकायेदार हैं जिनके ऊपर 31 मई 2026 तक सूद समेत 30 हजार रुपये से अधिक का ऋण बकाया है:
(नोट: समिति के अनुसार यह सूची 31मई 2026 तक की स्थिति के आधार पर तैयार की गई है, जिसमें कुल 40बकायेदार शामिल हैं। शेष नाम भी संस्था के निबंधित कार्यालय के सूचना पट पर देखे जा सकते हैं।)
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जांच मेंसरकारी गाड़ी निजी क्लिनिक के बाहर खड़ी, छद्म मरीज भेजकर स्वास्थ्य विभाग ने पकड़ा रंगे हाथ!
पटना, 27 जून 2026। स्वास्थ्य विभाग ने 26 जून 2026 को डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयानों की धज्जियां उड़ाते हुए एक विस्तृत और बेहद चौंकाने वाला तथ्यात्मक प्रतिवेदन जारी किया है। इस सरकारी रिपोर्ट ने पूरे चिकित्सा जगत में खलबली मचा दी है। विभाग ने डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के झूठ का पर्दाफाश करते हुए बताया है कि किस तरह कर्तव्यहीनता, लापरवाही और सरकारी संसाधनों का खुला दुरुपयोग किया जा रहा था।
अधीक्षक के फोन को किया नजरअंदाज, मंत्री के स्वागत की थी पूरी जानकारी प्रतिवेदन के अनुसार, डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि 23 जून 2026 को माननीय स्वास्थ्य मंत्री के पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, पटना में निर्धारित कार्यक्रम की उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं थी। लेकिन जांच में यह दावा पूरी तरह झूठा निकला। रिकॉर्ड के मुताबिक, पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के अधीक्षक द्वारा 22 जून 2026 को लगभग 07:00 बजे अपराह्न में ही डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह को मोबाइल पर बातचीत कर इस कार्यक्रम की पूरी सूचना दे दी गई थी। इतना ही नहीं, मोबाइल पर बातचीत के दौरान यह भी तय हुआ था कि माननीय स्वास्थ्य मंत्री का स्वागत अधीक्षक करेंगे और धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य द्वारा किया जाएगा, जिस पर प्राचार्य ने अपनी सहमति भी दी थी।
व्हाट्सएप पर छुट्टी का बहाना, मीडिया के डर से भेजी सूचना! विभाग ने स्पष्ट किया है कि डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के पुत्र द्वारा विभागीय सचिव, अधीक्षक एवं अन्य पदाधिकारियों को व्हाट्सएप पर सूचना दी गई थी। लेकिन जलने से संबंधित सूचना कार्यक्रम समाप्त होने के कई घंटों बाद दी गई, जिससे साफ है कि मीडिया में खबर आने के बाद केवल अपने बचाव के लिए व्हाट्सएप पर यह सूचना सभी को दी गई थी।
सरकारी गाड़ी के साथ निजी क्लिनिक में चल रहा था मरीजों का धंधा! सबसे बड़ा और सनसनीखेज खुलासा डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह की अनुपस्थिति और उनके निजी क्लिनिक को लेकर हुआ है। कार्यालय अवधि के दौरान उनके गायब रहने की गोपनीय सूचना मिलने पर प्रशासन ने एक जाल बिछाया। विभाग और जिला पदाधिकारी, पटना के स्तर से छद्म मरीज (फर्जी मरीज) बनाकर डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के निजी क्लिनिक में भेजा गया। जब जांच टीम वहां पहुंची, तो नजारा देखकर दंग रह गई। पटना चिकित्सा महाविद्यालय, पटना की सरकारी वाहन डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के निजी क्लिनिक के बाहर खड़ी तमाशा देख रही थी। क्लिनिक से बाहर निकल रहे मरीजों ने पुष्टि की कि वे अभी-अभी डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह से इलाज कराकर बाहर आए हैं।
कंपाउंडर ने खोला समय का राज वहीं दूसरी ओर, डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह का दावा था कि वे जल गए थे और मोबाइल पर बातचीत करने में असमर्थ थे। लेकिन जब जांच टीम क्लिनिक के अंदर दाखिल हुई, तो वहां उपस्थित कंपाउंडर ने डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह के क्लिनिक का पूरा समय सारणी ही खोलकर रख दिया। कंपाउंडर ने बताया कि डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह शाम को 07:00 बजे से मरीज देखेंगे। यदि किसी मरीज को अगले दिन दिखाना हो, तो सुबह 09:00 बजे से 10:00 बजे, दोपहर में 02:00 बजे से 03:00 बजे एवं शाम को 07:00 बजे से 09:00 बजे तक का समय तय था। इससे साफ हो गया कि डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह सरकारी ड्यूटी के घंटों में भी अपने निजी क्लिनिक में मरीजों को देखने का काम धड़ल्ले से करते हैं।
गठन हुई उच्चस्तरीय जांच कमेटी, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं प्रथम दृष्टया अपने कार्यों के प्रति घोर लापरवाही, कर्तव्यहीनता, सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग और अनाधिकृत रूप से गायब रहने का दोषी पाते हुए डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह को प्राचार्य के पद के अतिरिक्त प्रभार से तत्काल मुक्त कर दिया गया है। उन्हें प्राध्यापक, मनोरोग विभाग, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया में पदस्थापित किया गया है। विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अपनी अनाधिकृत अनुपस्थिति के संबंध में विभाग को कोई स्पष्टीकरण या अभ्यावेदन देने के बजाय सीधे प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करना बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रावधानों के पूरी तरह प्रतिकूल है। अब इस पूरे मामले में सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन से एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो डॉक्टर नरेंद्र प्रताप सिंह का पक्ष प्राप्त करते हुए विहित प्रक्रिया के तहत आगे की सख्त कार्रवाई करेगी।
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89.40 करोड़ की लागत से बने अत्याधुनिक मोक्ष धाम के निजीकरण पर मचा बवाल, ‘आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग‘ को लेकर विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर दागे तीखे सवाल
पटना: राजधानी पटना के ऐतिहासिक बांस घाट श्मशान घाट का कायाकल्प हो चुका है, लेकिन इसके साथ ही बिहार की राजनीति में एक नया और बेहद सनसनीखेज विवाद खड़ा हो गया है। बिहार सरकार ने स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लगभग 89.40 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से गंगा किनारे इस अत्याधुनिक शवदाह गृह का निर्माण पूरा कराया है। करीब 4.5 एकड़ के विशाल भूभाग में फैले इस परिसर में एक साथ 18 शवों के अंतिम संस्कार की विश्वस्तरीय व्यवस्था की गई है। यहाँ इलेक्ट्रिक क्रेमेटोरियम, लकड़ी आधारित शवदाह स्थल, पारंपरिक चिताएं, वातानुकूलित प्रतीक्षालय, पेयजल और आधुनिक शौचालय जैसी तमाम हाई-टेक सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं।
पटना के ऐतिहासिक बांस घाट के अत्याधुनिक परिसर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने के बाद कार्यक्रम के दौरान मंच पर मौजूद आध्यात्मिक संगठन के प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी।
विवाद तब शुरू हुआ जब इस नवनिर्मित हाई-टेक परिसर के संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी सीधे ईशा फाउंडेशन को सौंप दी गई। इस फैसले के सामने आते ही विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रीय जनता दल की नेता रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बेहद तीखा और हमलावर पोस्ट साझा करते हुए इसे ‘श्मशान घाट का निजीकरण’ करार दिया है।
श्मशान घाट का निजीकरण : सरकारी जवाबदेही से मुक्ति का अंतिम संस्कार ..
अब अपने बिहार की राजधानी पटना के श्मशान घाट भी 'आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग' के दौर में हैं। लगता है सरकार को अपने और अपने विभागों से ज़्यादा भरोसा बाहरी सरकारी – कारोबारी बाबाओं पर है !!
रोहिणी आचार्य ने सरकार की इस नीति को ‘सरकारी जवाबदेही से मुक्ति का अंतिम संस्कार’ बताते हुए कहा कि अब अपने बिहार की राजधानी पटना के श्मशान घाट भी ‘आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग’ के दौर में चले गए हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे सरकार को अपने और अपने विभागों से ज़्यादा भरोसा बाहरी सरकारी-कारोबारी बाबाओं पर हो गया है।
विपक्ष ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि जनता के पैसों से बनाई गई जन-सुविधाएं अब सिर्फ निजी हाथों में ट्रांसफर करने के लिए ही बची हैं। रोहिणी आचार्य ने मांग की है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक ‘हाफिडिफिट’ के माध्यम से जनता को साफ-साफ बताना चाहिए कि यह शासन का कैसा मॉडल है जिसमें श्मशान घाट का मैनेजमेंट भी एक ‘ब्रांडेड बाबा’ के भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं सरकार अपनी जिम्मेदारियों का अंतिम संस्कार भी धीरे-धीरे दूसरों के हवाले तो नहीं कर रही है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बेहतर तो यह होता कि सम्राट सरकार आधिकारिक तौर पर सरकार का यह नया मंत्र ही घोषित कर देती: “जिम्मेदारी कम करो, हस्तांतरण ज़्यादा करो।”
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शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की दोटूक- अब पोर्टल से ऑटोमेटिक होगा पारदर्शी तबादला, महिलाओं और पुरुषों के लिए बना विशेष ब्लूप्रिंट, एनसीईआरटी की सभी किताबें होंगी लागू
विशेष संवाददाता, पटना:
बिहार के शिक्षा महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राज्य के लाखों शिक्षकों के हित में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी फैसला लेते हुए बड़ा ऐलान किया है। शिक्षा मंत्री ने साफ कर दिया है कि अब शिक्षकों को अपने ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए दफ्तरों और बाबुओं के चक्कर काटने की कतई जरूरत नहीं होगी। विभाग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बना दिया है। अब शिक्षा विभाग के विशेष पोर्टल पर केवल एक आवेदन करने के बाद पूरी तरह से पारदर्शी और ऑटोमेटिक तरीके से ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जिससे भ्रष्टाचार और पैरवी राज पर हमेशा के लिए ताला लग जाएगा।
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि हमारे शिक्षक ही हमारी व्यवस्था का असली आधार हैं। शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही इस मांग को सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। कैबिनेट से इस नई और बेहद सरल स्थानांतरण नीति को बाकायदा पास करा दिया गया है। इस नीति के लागू होने से अब ट्रांसफर की राह देख रहे शिक्षकों को दर-दर भटकने से मुक्ति मिल जाएगी। सरकार ने इसे शिक्षकों के लिए एक बहुत बड़ा तोहफा करार दिया है, जिससे पूरी व्यवस्था भ्रष्टाचार मुक्त और जवाबदेह बनेगी।
महिलाओं और पुरुषों के लिए विशेष ब्लूप्रिंट
मंत्रालय द्वारा तैयार ब्लूप्रिंट के अनुसार, महिला और पुरुष शिक्षकों के लिए खास तौर पर राहत देने वाली योजना बनाई गई है। नई नीति के तहत महिला शिक्षकों को उनकी अपनी पंचायत के ठीक बगल वाली पंचायत में ही तैनाती दी जाएगी। वहीं दूसरी ओर, पुरुष शिक्षकों को उनके वर्तमान ब्लॉक के बगल वाले ब्लॉक में ट्रांसफर करने की योजना तैयार की गई है। इस नियम से शिक्षकों को अपने घर के नजदीक काम करने का अवसर मिलेगा और उनका मानसिक तनाव दूर होगा। शिक्षा मंत्री ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस नई व्यवस्था में लापरवाही बरतेगा या किसी भी प्रकार की अनियमितता करने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सरकार बेहद सख्त एक्शन लेगी।
कोचिंग संस्थानों के लिए आ रही नई नियमावली
राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह खुल रहे कोचिंग संस्थानों पर भी सरकार पूरी तरह से नकेल कसने की तैयारी में है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बताया कि बिहार में कोचिंग संस्थानों के लिए सुरक्षा मानकों को लेकर एक बेहद सख्त और नई नियमावली लाई जा रही है। इस गाइडलाइन के आने के बाद जो भी कोचिंग संस्थान तय सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करेंगे, उन पर बड़ी कार्रवाई होना तय है। छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई के माहौल से खिलवाड़ करने वाले संस्थानों को बग्श नहीं जाएगा।
इसके साथ ही, शिक्षा क्षेत्र में गुणवत्ता सुधारने के लिए बिहार सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति को राज्य में बेहद प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने घोषणा की कि नई शिक्षा नीति का पूरा आधार एनसीईआरटी ही है, इसलिए अब एनसीईआरटी की हर एक पुस्तक को पूरे बिहार के विद्यालयों में सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने कक्षा नाइंथ की नई पुस्तक में चुनाव आयोग की पारदर्शी भूमिका और चुनावी प्रक्रिया की प्रशंसा को शामिल किए जाने के फैसले का पुरजोर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह बदलाव हमारे बच्चों के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक और मील का पत्थर साबित होगा।
संवाददाता के साथ हुई सीधी बातचीत में नियोजित शिक्षकों के भविष्य और उनके तबादलों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि नियोजित शिक्षकों की नियमावली बिल्कुल अलग है और उनकी नियोजन इकाई को ही उनके ट्रांसफर का पूरा अधिकार है, जिसके लिए आगे चलकर एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की जाएगी। इसके साथ ही, कक्षा नाइंथ की नई पुस्तक में चुनाव आयोग की पारदर्शी भूमिका को शामिल करने के एनसीईआरटी के फैसले का पुरजोर स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का पूरा बेस एनसीईआरटी ही है और बिहार में इसकी हर बुक लागू की जाएगी, जो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। वहीं, राज्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले कोचिंग संस्थानों पर सीधे ऐक्शन के सवाल पर उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि सरकार बहुत जल्द एक नई कोचिंग नियमावली लेकर आ रही है, जिसके आते ही ऐसी संस्थाओं पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो जाएगा और उन्हें सरकार द्वारा तय की गई सख्त गाइडलाइन का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।
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नई दिल्ली: अगर आप भी विदेश घूमने का सपना देख रहे हैं या नौकरी के सिलसिले में बाहर जाने की तैयारी में हैं, तो यह खबर आपके होश उड़ा देगी। सरकार ने पासपोर्ट आवेदन शुल्क में भारी वृद्धि कर आम जनता को एक बड़ा झटका दिया है। विदेश मंत्रालय की नई अधिसूचना के अनुसार, ‘पासपोर्ट संशोधन नियम 2026’ आगामी 1 जुलाई से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू होने जा रहे हैं। इसके बाद नया पासपोर्ट बनवाना या पुराने को री-इश्यू कराना आपकी जेब पर काफी भारी पड़ने वाला है।
साधारण श्रेणी में नई दरें: जेब होगी ढीली
सरकार द्वारा जारी नए नियमों के मुताबिक, साधारण श्रेणी के तहत मिलने वाली सुविधाओं की कीमतों में सीधे तौर पर इजाफा किया गया है:
36 पृष्ठों वाला पासपोर्ट: 36 पृष्ठों वाले नए पासपोर्ट या इसे फिर से जारी (री-इश्यू) कराने के लिए अब आवेदकों को 2,500 रुपये का भारी-भरकम शुल्क चुकाना होगा।
60 पृष्ठों वाला पासपोर्ट: जिन लोगों को ज्यादा यात्रा करनी होती है और वे 60 पृष्ठों वाले साधारण पासपोर्ट या इसके री-इश्यू के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें अब इसके लिए 3,500 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा।
तत्काल श्रेणी: इमरजेंसी में सफर करना पड़ेगा बहुत महंगा
यदि आपको किसी आपातकालीन स्थिति में तुरंत विदेश जाना है और आप तत्काल श्रेणी में आवेदन करते हैं, तो नई दरें आपको और भी ज्यादा चौंकाएंगी:
तत्काल श्रेणी: इमरजेंसी में सफर करना पड़ेगा बहुत महंगा
यदि आपको किसी आपातकालीन स्थिति में तुरंत विदेश जाना है और आप तत्काल श्रेणी में आवेदन करते हैं, तो नई दरें आपको और भी ज्यादा चौंकाएंगी:
36 पृष्ठों का तत्काल पासपोर्ट: तत्काल श्रेणी के अंतर्गत 36 पृष्ठों वाले नए पासपोर्ट या री-इश्यू की लागत अब सीधे बढ़कर 5,000 रुपये तय की गई है।
60 पृष्ठों का तत्काल पासपोर्ट: इस श्रेणी में सबसे बड़ा झटका 60 पृष्ठों वाले पासपोर्ट के लिए लगा है, जहां आवेदकों को अब पूरे 6,000 रुपये खर्च करने होंगे।
विदेश मंत्रालय के इस अचानक फैसले से उन लोगों में खलबली मच गई है जो आने वाले महीनों में विदेश यात्रा की योजना बना रहे थे। 1 जुलाई से पहले आवेदन न करने वालों को अब इस नई और बढ़ी हुई शुल्क संरचना के अनुसार ही भुगतान करना होगा।
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पटना। बिहार के चिकित्सा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) के प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को सरकार ने तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया है। स्वास्थ्य विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से पूरे चिकित्सा महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकार ने डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को हटाकर डॉ. गीता सिन्हा को अगले आदेश तक PMCH के प्राचार्य पद का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया है।
मंत्री के दौरे से ‘गायब‘ होना पड़ा भारी
इस पूरी कार्रवाई की पटकथा 23 जून को ही लिख दी गई थी। स्वास्थ्य मंत्री निशांत का PMCH में एक पूर्व निर्धारित आधिकारिक कार्यक्रम और निरीक्षण था। पूरे अस्पताल का स्टाफ मंत्री के स्वागत और मुस्तैदी में लगा था, लेकिन अस्पताल के मुखिया डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित जानकारी के इस बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम से गायब रहे।
विभागीय जांच में हुआ बड़ा भंडाफोड़: सरकारी गाड़ी से पहुंचे थे निजी क्लीनिक
जब स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने प्राचार्य की इस घोर लापरवाही का संज्ञान लिया, तो तुरंत एक गुप्त विभागीय जांच बैठाई गई। इस जांच में जो खुलासे हुए, उसने स्वास्थ्य विभाग के होश उड़ा दिए। जांच रिपोर्ट में यह साफ हुआ कि:
डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अपने कार्यालय समय (ड्यूटी ऑवर्स) के दौरान अस्पताल में होने के बजाय अपने निजी क्लीनिक में मरीजों को देख रहे थे।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि वे अपने निजी क्लीनिक तक जाने और अपनी निजी ‘कमाई’ के लिए बकायदा सरकारी वाहन (गवर्नमेंट वीकल) और ईंधन का दुरुपयोग कर रहे थे।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत का कड़ा बयान: “राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में अनुशासन, जवाबदेही और सुशासन से कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। सरकारी पद पर बैठकर निजी स्वार्थ साधने वाले और जनता के पैसों का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के लिए इस सरकार में कोई जगह नहीं है। यह कार्रवाई तो बस एक शुरुआत है।”
डॉ. गीता सिन्हा संभालेंगी कमान
पीएमसीएच जैसी बड़ी चिकित्सा संस्था में अव्यवस्था न फैले, इसके लिए सरकार ने त्वरित फैसला लेते हुए डॉ. गीता सिन्हा को नया प्रभार सौंप दिया है। विभाग ने उन्हें तत्काल रूप से अस्पताल की व्यवस्था को पटरी पर लाने और अनुशासन कायम करने का निर्देश दिया है। अब देखना यह है कि डॉ. गीता सिन्हा इस बड़ी जिम्मेदारी को कैसे संभालती हैं और दागी हो चुकी PMCH की छवि को कितना सुधार पाती हैं।
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तनाव भरे परिवेश में योग ही जीवन का असली तारणहार, मुख्य वक्ता निशिकांति ने दिया महामंत्र!
मुजफ्फरपुर (25/06/2026): आज के इस दौर में जहां आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां और महंगी रासायनिक दवाएं इंसानी बीमारियों में केवल अस्थाई राहत तो देती हैं, परंतु मानसिक और शारीरिक विकारों को जड़ से खत्म करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं, वहां भारत का प्राचीन सनातन विज्ञान यानी योग ही एकमात्र सच्चा तारणहार बनकर उभरा है। इसी ज्वलंत विषय पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के साप्ताहिक कार्यक्रम के पावन अवसर पर महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग के तत्त्वावधान में एक वृहद योग परिचर्चा और पोस्टर प्रस्तुतीकरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन 25 जून को किया गया। इस दौरान कॉलेज की छात्राओं ने अपने तीखे, कलात्मक और वैचारिक पोस्टरों के जरिए यह पुरजोर तरीके से साबित कर दिया कि आधुनिक जीवनशैली की सभी जटिल बीमारियों का असली और स्थाई इलाज सिर्फ योग में ही छुपा है।
महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस सप्ताह के समापन अवसर पर “दवाएं फेल, योग पास” का नारा बुलंद करते हुए अपने बेहतरीन और रचनात्मक पोस्टरों को प्रदर्शित करतीं स्नातक द्वितीय सेमेस्टर की विजेता छात्राएं। साथ में खड़ीं कॉलेज की प्राचार्या अलका जायसवाल, विभागाध्यक्ष नेहा रानी, मुख्य वक्ता निशिकांति और अन्य गौरवमयी शिक्षक गण।
इस बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रतिष्ठित प्राचार्या अलका जायसवाल ने सत्र का विधिवत उद्घाटन किया और सभी ऊर्जावान प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रमाण पत्र सौंपे। अपने विशेष संबोधन में अलका जायसवाल ने आज की युवा पीढ़ी को सचेत करते हुए कहा कि योग मानव जीवन को बिना किसी साइड इफेक्ट (दुष्प्रभाव) के पूर्ण आरोग्य और सच्ची मानसिक खुशी प्रदान करता है। उन्होंने रेखांकित किया कि छात्राओं के भीतर की यह स्वास्थ्य चेतना कल के एक सशक्त राष्ट्र का आधार बनेगी, क्योंकि योग केवल शारीरिक कसरत नहीं बल्कि कार्यकुशलता बढ़ाने का अचूक फॉर्मूला है।
कार्यक्रम के मुख्य मंच से अपनी बात रखते हुए मुख्य वक्ता निशिकांति ने योग की वैज्ञानिकता को बेहद तार्किक रूप से स्थापित किया। उन्होंने वर्तमान समय की सबसे गंभीर वैश्विक महामारी यानी मानसिक तनाव पर गहरा प्रहार करते हुए बतलाया कि योग आज के इस भागदौड़ भरे, प्रतिस्पर्धात्मक और डिस्टर्बिंग (विचलित करने वाले) परिवेश में मानव जीवन की सबसे बड़ी और अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। हमें इसे केवल साल में एक दिन का सिंबल (प्रतीक) न मानकर अपने प्रतिदिन के 24 घंटे के रूटीन (दिनचर्या) में पूरी तरह से शामिल करना चाहिए, तभी चिकित्सा पर होने वाले भारी-भरकम खर्चों से बचा जा सकता है।
आयोजन की मुख्य धुरी रहीं दर्शन शास्त्र की विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम आयोजक नेहा रानी ने अपने व्याख्यान में पाश्चात्य फिटनेस कल्चर और भारतीय विचारधारा की गहरी तुलना करते हुए स्पष्ट किया कि योग कोई साधारण फिटनेस टूल (शारीरिक कसरत का साधन) नहीं है, बल्कि यह मानव चेतना को जागृत करने वाला एक शाश्वत जीवन दर्शन है। इसे अपनाकर ही हम अपने तन और मन को नियंत्रित कर सकते हैं।
वहीं, डिजिटल माध्यम का बेहतरीन उपयोग करते हुए नवीन कुमार ने एक अत्यंत प्रभावशाली पावर प्लांट प्रेजेंटेशन (डिजिटल प्रस्तुतीकरण) के जरिए योग के विभिन्न व्यावहारिक और प्रायोगिक पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ दिखाया कि किस प्रकार नियमित आसन और प्राणायाम करने से मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) शीर्ष पर पहुंच जाती है और रक्तचाप जैसी जानलेवा बीमारियां बिना किसी दवा के स्वतः नियंत्रित हो जाती हैं।
इस पूरे सफल और गरिमामयी आयोजन का कुशल मंच संचालन और धन्यवाद ज्ञापन सुरबाला वर्मा के द्वारा अत्यंत प्रभावी ढंग से किया गया, जिसमें कॉलेज के कई वरिष्ठ शिक्षक और शिक्षिकाओं की सक्रिय उपस्थिति रही। कड़े मुकाबले के बीच पारदर्शी परिणाम तैयार करने वाली निष्पक्ष निर्णायक मंडली में मुख्य रूप से राकेश रंजन, रामदुलार और प्रियम फ्रांसिस जैसे प्रबुद्ध शिक्षाविद् शामिल थे, जिन्होंने कला और वैचारिक ज्ञान का बारीकी से मूल्यांकन किया।
योग सप्ताह के समापन अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रस्तुतीकरण और भाषण प्रतियोगिता में छात्राओं के बीच कड़ा मुकाबला हुआ, जिसके अंतिम परिणाम इस प्रकार रहे:
प्रथम स्थान (I): इलशा आलिया (स्नातक द्वितीय सेमेस्टर)
द्वितीय स्थान (II): संयुक्त रूप से ममता कुमारी एवं गीतांजलि कुमारी (स्नातक द्वितीय सेमेस्टर)
तृतीय स्थान (III): रूपांतरित कुमारी (स्नातक द्वितीय सेमेस्टर)
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