Monday, November 2, 2026

बिहार के सरकारी अस्पतालों में ‘रेफरल राज’ का होगा अंत! 15 अगस्त से बिना ठोस वजह मरीज रेफर किए तो नपेंगे डॉक्टर, मुख्यमंत्री का अल्टीमेटम

स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार की तैयारी: रात्रिकालीन औचक निरीक्षण करेंगे कमिश्नर और डीएम, लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य केंद्रों पर गिरेगी गाज

पटना, 02 जुलाई 2026: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी, प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में स्वास्थ्य विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए साफ चेतावनी दी है कि सरकारी अस्पतालों से मरीजों को बिना किसी ठोस कारण के हायर सेंटर या मेडिकल कॉलेज रेफर करने का खेल अब बंद होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इसके लिए 15 अगस्त 2026 की समय-सीमा तय करते हुए अनुमंडलीय अस्पतालों और जिला अस्पतालों से होने वाले अनावश्यक रेफरल पर पूर्ण रोक लगाने का कड़ा आदेश जारी कर दिया है।

संकल्प सभागार में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के संबंध में कड़े निर्देश देते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी। साथ में उपस्थित स्वास्थ्य मंत्री निशांत, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी।

इस उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों की मौजूदा रेफरल व्यवस्था, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और चिकित्सा अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण की भावी कार्य योजना से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट नीति के साथ समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का एकमात्र उद्देश्य बिहार के प्रत्येक नागरिक को समय पर, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रथम चरण में इसे सभी जिला और अनुमंडल अस्पतालों में सख्ती से लागू किया जा रहा है।

कमिश्नर और डीएम करेंगे रात में औचक निरीक्षण

अस्पतालों की जमीनी हकीकत परखने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रमंडलीय आयुक्त, जिला पदाधिकारी और अन्य वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी नियमित रूप से सरकारी अस्पतालों का रात्रिकालीन औचक निरीक्षण करेंगे। इस निरीक्षण से रात के समय ड्यूटी से गायब रहने वाले डॉक्टरों और स्टाफ पर नकेल कसी जा सकेगी। इसके साथ ही जिला अस्पतालों में उपलब्ध सभी आधुनिक उपकरणों का शत-प्रतिशत नियमित उपयोग सुनिश्चित करने और मेडिकल कॉलेजों की सतत निगरानी सीधे संबंधित जिला पदाधिकारियों के माध्यम से कराने का फैसला लिया गया है।

जांच सुविधाओं का विस्तार और ट्रॉमा सेंटरों का सुदृढ़ीकरण

मरीजों की सहूलियत के लिए पैथोलॉजी सेवाओं, एनेस्थीसिया, एमआरआई और मैमोग्राफी जैसी आधुनिक जांच सुविधाओं का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाएगा ताकि आम जनता को निजी सेंटरों के चक्कर न काटने पड़ें। सड़क हादसों और गंभीर चोटों के त्वरित इलाज के लिए हड्डी रोग और न्यूरो से संबंधित बीमारियों के उपचार हेतु विशेष रूप से ट्रॉमा सेंटरों को सुदृढ़ और पूरी तरह क्रियाशील करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अस्पतालों में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से आपातकालीन सेवाओं और एम्बुलेंस सेवाओं से जुड़ी तमाम जानकारियां प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएंगी।

नर्सों को मिलेगी राहत, पीपीपी मॉडल पर भी विचार

स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने रोगी कल्याण समिति के सदस्यों का पुनर्गठन कर उसे अधिक सक्रिय बनाने और नए मेडिकल कॉलेजों के सुचारू संचालन के लिए पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के माध्यम से आवश्यक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा है। इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत नर्सों को बड़ी राहत देते हुए उनके गृह जिलों में ही पदस्थापित करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया है।

प्रत्येक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की देखरेख के लिए एक जिला स्तरीय अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण समिति बनेगी, जिसकी कमान सीधे संबंधित डीएम के हाथों में होगी। मुख्यमंत्री ने आयुष्मान भारत योजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के लिए लाभार्थियों के आयुष्मान कार्ड और आभा आईडी निर्माण कार्य में युद्ध स्तर पर तेजी लाने का आदेश दिया।

बैठक में ये सभी वरीय अधिकारी रहे उपस्थित

इस महत्वपूर्ण और नीतिगत बैठक में स्वास्थ्य मंत्री निशांत, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव डॉ० त्यागराजन एस०एम०, राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा और बिहार स्वास्थ्य सेवायें एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन सहित स्वास्थ्य विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन का हुआ भव्य उद्घाटन, अब मिनटों में तय होगा घंटों का सफर!

पटना: बिहार की राजधानी पटना के निवासियों के लिए एक बेहद खुशखबरी सामने आई है। वर्षों से जिस ऐतिहासिक पल का इंतजार पटनावासी कर रहे थे, वह आखिरकार पूरा हो गया है। पटना मेट्रो रेल परियोजना के अंतर्गत बहुप्रतीक्षित मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन का भव्य फीता काटकर आधिकारिक तौर पर उद्घाटन कर दिया गया है। इस नए रूट और स्टेशन के शुरू होने से अब पटना के लोगों को बाईपास रोड के भीषण ट्रैफिक जाम, धूल और जानलेवा प्रदूषण से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

 मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन के भव्य लोकार्पण के अवसर पर  रिबन काटकर मेट्रो सेवा का आधिकारिक शुभारंभ करते मुख्य सीएम सम्राट चौधरी ।  उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, विधायक संजीव चौरसिया, नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर, दिल्ली मेट्रो के तकनीकी विशेषज्ञ मंगू सिंह एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति।

दिग्गजों का लगा जमावड़ा, जनता में भारी उत्साह

इस ऐतिहासिक उद्घाटन के मौके पर सरकार के वरिष्ठ नेताओं, नगर विकास विभाग के शीर्ष अधिकारियों और मेट्रो के तकनीकी विशेषज्ञों का बड़ा जमावड़ा लगा रहा। उद्घाटन समारोह में मुख्य रूप से उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा, पटना के सांसद रवि शंकर प्रसाद, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव और विधायक संजीव चौरसिया उपस्थित रहे।

(बाएं) मलाही पकड़ी मेट्रो स्टेशन के स्वचालित प्रवेश द्वार (एएफसी गेट) पर स्मार्ट कार्ड को पंच कर तकनीकी व्यवस्था की जांच करते सीएम सम्राट चौधरी  (दाएं) उद्घाटन के बाद स्टेशन के आधुनिक एस्केलेटर से प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ते सीएम सम्राट चौधरी  एवं अन्य प्रशासनिक और सुरक्षा अधिकारी।

प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने वाले नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव सह पटना मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (पीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक आनंद किशोर और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) के पूर्व प्रबंध निदेशक सह मुख्य सलाहकार मंगू सिंह भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सुरक्षा और व्यवस्था संभालने के लिए पटना के जिलाधिकारी कपिल अशोक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा मुस्तैद दिखे। मेट्रो सेवा की शुरुआत होते ही आम जनता में भारी उत्साह देखा गया। लोगों का कहना है कि अब कंकड़बाग और बाईपास के दमघोंटू जाम में फंसने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

पटना मेट्रो कोच के भीतर सफर का आनंद लेते सीएम सम्राट चौधरी  , उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, वरिष्ठ मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा, विधायक संजीव चौरसिया और प्रशासनिक अधिकारी। साथ ही कोच में खड़े होकर मेट्रो की बारीकियों और रूट मैप के बारे में जानकारी देते प्रधान सचिव सह प्रबंध निदेशक आनंद किशोर।

वीआईपी नेताओं ने खुद मेट्रो में किया सफर, एस्केलेटर और गेट का किया निरीक्षण

उद्घाटन के तुरंत बाद सभी मुख्य अतिथियों ने खुद मेट्रो ट्रेन में बैठकर यात्रा की और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। नेताओं ने मलाही पकड़ी स्टेशन से भूतनाथ स्टेशन तक का सफर तय किया। इस दौरान प्रबंध निदेशक आनंद किशोर और तकनीकी विशेषज्ञ मंगू सिंह ने उपस्थित मंत्रियों को मेट्रो की सुरक्षा व्यवस्था, सिग्नलिंग प्रणाली और आधुनिक यात्री सुविधाओं के बारे में विस्तार से तकनीकी जानकारी दी। अतिथियों ने स्वचालित टिकट काउंटरों (एएफसी गेट) पर स्मार्ट कार्ड और टोकन प्रणाली का परीक्षण किया तथा स्टेशन पर लगे आधुनिक एस्केलेटर का भी निरीक्षण किया।

पटना मेट्रो से जुड़ी मुख्य बातें:

  • किराया: आम जनता की जेब को ध्यान में रखते हुए इस रूट पर यात्रा करने के लिए न्यूनतम किराया 15 रुपये और अधिकतम किराया 30 रुपये तय किया गया है।
  • दैनिक फेरे: यात्रियों की सुविधा के लिए यह मेट्रो प्रतिदिन 40 से 42 फेरे लगाएगी, जिससे यात्रियों को ट्रेन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
  • प्रमुख स्टेशन: इस प्रायोरिटी कॉरिडोर रूट पर यात्रियों को मलाही पकड़ी, भूतनाथ, जीरो माइल और न्यू आईएसबीटी (इंटरस्टेट बस टर्मिनल) स्टेशन की अत्याधुनिक सुविधा मिलेगी।
  • कला और संस्कृति: पूरे मेट्रो स्टेशन की दीवारों को बिहार की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग और गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहरों से बेहद खूबसूरत तरीके से सजाया गया है, जो यात्रियों को आकर्षित कर रही है।

इस परियोजना के पूर्ण होने से कंकड़बाग जैसी एशिया की सबसे बड़ी घनी आबादी वाली कॉलोनी और अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) आने-जाने वाले लाखों लोगों को सीधे तौर पर तेज, सुरक्षित और सुगम परिवहन का लाभ मिलेगा।

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बिहार के विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर बनना अब नहीं होगा आसान! राजभवन ने बदली पूरी व्यवस्था, लिखित परीक्षा और वीडियो रिकॉर्डिंग वाली क्लास से खुलेगा नौकरी का रास्ता!

पटना: बिहार के उच्च शिक्षा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है! राज्य के विश्वविद्यालयों और अंगीभूत कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली की पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से बदल दिया गया है । चांसलर सह राज्यपाल की मंजूरी के बाद राजभवन सचिवालय ने इसके लिए बकायदा नया परिनियम यानी ‘द स्टैट्यूट्स फॉर अपॉइंटमेंट ऑफ असिस्टेंट प्रोफेसर्स इन द यूनिवर्सिटीज ऑफ बिहार 2026’ लागू कर दिया है ।

अब केवल इंटरव्यू या एकेडमिक रिकॉर्ड के भरोसे प्रोफेसर बनने का सपना देखने वालों को बहुत बड़ा झटका लगा है । नई नियमावली के तहत अब उम्मीदवारों को पहले 175 अंकों की  लिखित परीक्षा पास करनी होगी और उसके बाद वीडियो कैमरे की निगरानी में लाइव पढ़ाकर अपनी काबिलियत साबित करनी होगी ।

लिखित परीक्षा और लाइव क्लास रूम टेस्ट: ऐसा होगा नया पैटर्न

नए नियमों के अनुसार, रेगुलर असिस्टेंट प्रोफेसरों के चयन के लिए कुल 200 अंकों की परीक्षा का खाका तैयार किया गया है:

  • 175 अंकों की लिखित परीक्षा: यह परीक्षा पूरी तरह से सब्जेक्टिव यानी विषय-आधारित होगी,जिसके लिए 3 घंटे का समय मिलेगा । इसका सिलेबस राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा यानी नेट के समान होगा ।
  • 25 अंकों का इंटरव्यू और लाइव क्लास: इंटरव्यू बोर्ड के सामने कुल 25 अंक होंगे । इसमें से 13 अंक सिर्फ उम्मीदवार के टीचिंग स्किल्स यानी पढ़ाने की कला पर मिलेंगे । सबसे बड़ी बात यह है कि जब उम्मीदवार इंटरव्यू बोर्ड के सामने पढ़ा रहा होगा, तो उसकी अनिवार्य रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी । बाकी बचे 12 अंक बोर्ड के साथ बातचीत और साक्षात्कार पर तय होंगे ।

पास होने के लिए लाने होंगे इतने प्रतिशत अंक

लिखित परीक्षा में पास होने और इंटरव्यू की रेस में बने रहने के लिए अलग-अलग श्रेणियों के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स भी तय कर दिए गए हैं:

  • अनारक्षित (जनरल): 40% अंक
  • पिछड़ा वर्ग (बीसी): 36.5% अंक
  • अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी): 34% अंक
  • अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाएं: 32% अंक

इंटरव्यू के लिए एक पद के मुकाबले 3 उम्मीदवारों (1:3 के अनुपात) को उनकी मेरिट के आधार पर बुलाया जाएगा ।

कॉन्ट्रैक्ट बहाली का भी बदला नियम, एपीआई स्कोर और 12 अंकों का इंटरव्यू

यही नहीं, विश्वविद्यालयों में जरूरत पड़ने पर होने वाली कॉन्ट्रैक्ट यानी अनुबंध आधारित नियुक्तियों के नियमों को भी कड़ा कर दिया गया है । अब कांट्रैक्ट टीचरों की बहाली एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर यानी एपीआई स्कोर और 12 अंकों के इंटरव्यू के आधार पर होगी । इस इंटरव्यू में भी 6 अंक लाइव टीचिंग डिमॉन्स्ट्रेशन के होंगे, जिसकी वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी और 6 अंक बातचीत के होंगे । अनुबंध पर बहाल शिक्षकों को शुरुआत में केवल 1 एकेडमिक सेशन के लिए रखा जाएगा और उनका प्रदर्शन संतोषजनक होने पर ही आगे बढ़ाया जाएगा ।

उम्र सीमा और योग्यता

असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 43 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना विज्ञापन के वर्ष में 1 अगस्त से की जाएगी । राज्य सरकार के नियमों के अनुसार उम्र में छूट भी दी जाएगी । इसके अलावा उम्मीदवार के पास न्यूनतम 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री और नेट, स्लेट या सेट पास होना अनिवार्य है । हालांकि, साल 2009 या 2016 के यूजीसी नियमों के तहत पीएचडी करने वालों को नेट से छूट मिल सकती है ।

राजभवन के राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी इस आदेश को अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के आदेश से अधिसूचित किया गया है । पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए बिहार स्टेट यूनिवर्सिटी सर्विस कमीशन या सरकार द्वारा अधिकृत किसी अन्य कमीशन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है ।

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बिहार में 12 आईपीएस अधिकारियों का ताबड़तोड़ तबादला,

पटना, 01 जुलाई: बिहार प्रशासनिक और पुलिस महकमे से इस वक्त की सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है।  सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के दावों के बीच पुलिस महकमे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल कर दिया है। गृह विभाग (आरक्षी शाखा) द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के तहत भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के कुल 12 वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों का तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण और अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस बड़े बदलाव से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

प्रीता वर्मा बनीं महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा 1991 बैच की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रीता वर्मा, जो अब तक महानिदेशक-सह-अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना के पद पर तैनात थीं, उन्हें अब महानिदेशक-सह-महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशाम सेवाएं, बिहार, पटना के महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया गया है।

निर्मल कुमार आजाद को मद्यनिषेध का अतिरिक्त प्रभार 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी निर्मल कुमार आजाद, जो वर्तमान में पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण), बिहार, पटना के पद पर कार्यरत हैं, उन्हें अपने मौजूदा कार्यों के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

पंकज कुमार दराद को भवन निर्माण निगम की कमान 1995 बैच के अधिकारी पंकज कुमार दराद, जो अपर पुलिस महानिदेशक, आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस), बिहार, पटना के पद पर थे और जिनके पास अपर पुलिस महानिदेशक, विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार था, उन्हें अब अपर पुलिस महानिदेशक-सह-अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम, पटना के पद पर नई जिम्मेदारी दी गई है।

सुधांशु कुमार बने यातायात विंग के नए बॉस 1996 बैच के आईपीएस सुधांशु कुमार, जो अपर पुलिस महानिदेशक, विधि-व्यवस्था, बिहार, पटना के पद पर तैनात थे और यातायात का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, उन्हें अब पूर्ण रूप से अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात, बिहार, पटना बनाया गया है। साथ ही, उन्हें अपर पुलिस महानिदेशक, विशेष निगरानी इकाई, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

अमृत राज संभालेंगे एटीएस (ATS) 1998 बैच के तेजतर्रार अधिकारी अमृत राज, जो वर्तमान में अपर पुलिस महानिदेशक, साईबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार, पटना के पद पर तैनात थे, उन्हें अब आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस), बिहार, पटना का नया अपर पुलिस महानिदेशक बनाया गया है।

कासे सुहिता अनुपम को विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी 1998 बैच की ही अधिकारी कासे सुहिता अनुपम, जो अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग), अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना के पद पर थीं, उन्हें अब अपर पुलिस महानिदेशक, विधि-व्यवस्था, बिहार, पटना के पद पर स्थानांतरित किया गया है। वे अपने इस नए पद के साथ-साथ अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग), अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना का अतिरिक्त प्रभार भी संभालती रहेंगी।

आईजी (IG) स्तर पर भी बड़ा बदलाव

  • 2003 बैच के आईपीएस राजेश कुमार, जो पुलिस महानिरीक्षक, बिहार मानवाधिकार आयोग, पटना के पद पर थे, उन्हें अब पुलिस महानिरीक्षक, एससीआरबी (SCRB), बिहार, पटना के पद पर भेजा गया है।
  • 2006 बैच के पंकज कुमार राज, जो पुलिस महानिरीक्षक, एससीआरबी (SCRB), बिहार, पटना के पद पर थे और रेलवे का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, उन्हें अब पूर्णकालिक पुलिस महानिरीक्षक, रेलवे, बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया गया है।
  • 2006 बैच की ही एस प्रेमलथा, जो पुलिस महानिरीक्षक, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार, पटना के पद पर थीं, उन्हें अब पुलिस महानिरीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस, बिहार, पटना के पद पर तैनात किया गया है।

जूनियर विंग और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (SDPO) का भी तबादला

  • 2022 बैच की युवा अधिकारी गरिमा, जो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-2, कहलगांव, भागलपुर के पद पर थीं, उन्हें समादेष्टा, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-9, जमालपुर के पद पर प्रमोट/स्थानांतरित किया गया है।
  • 2022 बैच के शिवम धाकड़, जो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1, दानापुर, पटना के पद पर तैनात थे, उन्हें पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), मधुबनी के पद पर (अपने ही वेतनमान में) भेजा गया है।
  • 2023 बैच की कोमल मीना, जो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1, मसौढ़ी, पटना के पद पर थीं, उन्हें अब अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-1, विधि-व्यवस्था, पटना के पद पर नई जिम्मेदारी दी गई है।

यह आदेश बिहार राज्यपाल के आदेश से सरकार के अवर सचिव दीपक कुमार के हस्ताक्षर से जारी किया गया है। सभी अधिकारियों को जल्द से जल्द अपने नए पदों पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है।

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बुस्टा शिक्षक संघ के नए सूरमाओं का एलान, कुमारी सरोज बनीं अध्यक्ष!

मुजफ्फरपुर, 01 जुलाई। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय शिक्षक (सेवा) संघ (बुस्टा) की महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय इकाई की आम सभा संपन्‍न  हुई । पूर्व सचिव कुमारी सरोज द्वारा आहूत इस हाई-वोल्टेज बैठक में नवगठित बुस्टा इकाई के पदाधिकारियों के नामों की जैसे ही आधिकारिक उद्घोषणा हुई, पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। नए सूरमाओं के मंच पर आते ही माला पहनाकर उनका जोरदार स्वागत किया गया।

अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई का शंखनाद : नवनियुक्त अध्यक्ष प्रो. कुमारी सरोज (राजनीतिशास्त्र विभाग) ने पद संभालते ही हुंकार भरी। उन्होंने अपने तीखे और प्रभावशाली अभिभाषण में शिक्षकों को एकजुट होने का आह्वान किया। कुमारी सरोज ने दो टूक शब्दों में कहा कि शिक्षक संघ की असली मजबूती अधिकारों और कर्तव्यों के निष्ठापूर्वक निर्वहन में है। उन्होंने साफ कर दिया कि शिक्षकों के मान-सम्मान और हक के लिए यह नई टीम किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

किसे मिली कौन सी बड़ी जिम्मेदारी? शिक्षकों की इस नई और कड़क टीम में कई दिग्गज चेहरों को शामिल किया गया है। पूरी सूची इस प्रकार है:

  • अध्यक्ष: प्रो. कुमारी सरोज (राजनीतिशास्त्र विभाग)
  • उपाध्यक्ष: डॉ.सुनीता कुमारी (सहायक प्राध्यापक, गृह विज्ञान विभाग) एवं प्रियम फ्रांसिस (सहायक प्राध्यापक, अंग्रेजी विभाग)
  • सचिव:डॉ. रिंकु कुमारी (सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग)
  • सहसचिव: डॉ.श्वेता यादव (सहायक प्राध्यापक, वनस्पति विज्ञान विभाग) एवं संगीता कुमारी (सहायक प्राध्यापक, मनोविज्ञान विभाग)
  • कोषाध्यक्ष: डॉ.सुरबाला वर्मा (सहायक प्राध्यापक, दर्शनशास्त्र विभाग)
  • इकाई सचिव: डॉ.सरिता पॉल (सहायक प्राध्यापक, गृह विज्ञान विभाग)
  • विश्वविद्यालय प्रतिनिधि: डॉ.रामदुलार साहनी (सहायक प्राध्यापक, हिंदी विभाग)

शिक्षकों ने दिखाई ताकत, संगठन को मजबूत करने की खाई कसम इस ऐतिहासिक बैठक में महाविद्यालय के शिक्षकों ने अपनी सशक्त सहभागिता दर्ज कराकर अपनी ताकत का अहसास कराया। सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों ने एक सुर में बुस्टा को और अधिक सुदृढ़, आक्रामक और मजबूत बनाने के लिए अपनी पूरी प्रतिबद्धता जताई। इस घोषणा के बाद से ही विश्वविद्यालय की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं।

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मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे में भारी उलटफेर! मुख्यालय डीएसपी का हुआ तबादला, अब इस तेजतर्रार अफसर के हाथ में होगी कमान!

मुजफ्फरपुर, 01 जुलाई 2026: बिहार  सरकार द्वारा पुलिस महकमे में किए गए बड़े प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक का असर मुजफ्फरपुर जिले में भी साफ देखने को मिला है। गृह विभाग (आरक्षी शाखा) द्वारा जारी अधिसूचना संख्या-2/पी01-20-04/2021 गृ0आ0- 8159 के तहत मुजफ्फरपुर के पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) का ट्रांसफर कर दिया गया है, वहीं उनकी जगह पर एक नए पुलिस उपाधीक्षक की पोस्टिंग की गई है।

मुजफ्फरपुर से कौन गए?

  • अशोक कुमार: मुजफ्फरपुर में अब तक पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) के पद पर तैनात थे। सरकार के नए आदेश के तहत इनका तबादला मुजफ्फरपुर से कर दिया गया है। इन्हें अब पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के महत्वपूर्ण पद पर भेजा गया है।

मुजफ्फरपुर में कौन आए?

  • प्रदीप कुमार: मुजफ्फरपुर के नए पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) होंगे। यह इससे पहले बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना में पदस्थापन की प्रतीक्षा में (वेटिंग फॉर पोस्टिंग) थे। अब सरकार ने इन्हें मुजफ्फरपुर मुख्यालय की कमान सौंपकर एक बड़ी जिम्मेदारी दी है।

मुजफ्फरपुर से जुड़े अन्य पुलिस पदाधिकारी का ट्रांसफर:

  • शिवानी श्रेष्ठा: मुजफ्फरपुर में पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान (प्रोबेशनरी डीएसपी) के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। ट्रेनिंग और शुरुआती कार्यकाल के बाद अब इन्हें मुजफ्फरपुर से स्थानांतरित कर पुलिस उपाधीक्षक, विशेष अपराध, अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी), बिहार, पटना के पद पर पदस्थापित किया गया है।

कानून व्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार: मुजफ्फरपुर में नए मुख्यालय डीएसपी के रूप में प्रदीप कुमार की तैनाती से जिले की पुलिसिंग और कानून व्यवस्था को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वहीं, अशोक कुमार द्वारा मुजफ्फरपुर में किए गए कार्यों के बाद अब वे पटना में निगरानी विभाग में अपनी नई पारी की शुरुआत करेंगे। सरकार ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को तुरंत अपने नए स्थान पर योगदान देने का निर्देश दिया है।

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बिहार पुलिस में महा-तबादला एक्सप्रेस! 53 डीएसपी और आशु उपाधीक्षकों का एक साथ पत्ता साफ, सम्राट  सरकार का बड़ा प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक!

पटना, 01 जुलाई 2026: बिहार  सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने प्रशासनिक दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार पुलिस सेवा के 53 पुलिस पदाधिकारियों और आशु उपाधीक्षकों का बड़े पैमाने पर तबादला कर दिया है। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना संख्या-2/पी01-20-04/2021 गृ0आ0- 8159 के तहत तुरंत प्रभाव से इन सभी अफसरों को नए स्थानों पर तैनात किया गया है।

अवर सचिव रत्नेश कुमार के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में साफ कहा गया है कि जिन अधिकारियों का तबादला अन्यत्र नहीं हुआ है, वे तुरंत बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना में योगदान देंगे।

तबादले की पूरी एक्सक्लूसिव लिस्ट:

  1. लालबाबू यादव (प्राचार्य, सिपाही प्रशिक्षण विद्यालय, नाथनगर) से सहायक निदेशक, बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर
  2. पारस नाथ साहू (अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-11, सदर, खगड़िया) से अपर पुलिस अधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
  3. सुमित कुमार (अपर पुलिस अधीक्षक, बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर) से अपर पुलिस अधीक्षक, बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना
  4. डॉ0 शंकर कुमार झा (पुलिस उपाधीक्षक, विशेष शाखा, बिहार, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक, विशेष अपराध, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना
  5. अभिषेक सिंह (पुलिस उपाधीक्षक, पदस्थापन की प्रतीक्षा में, बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-3, बोधगया
  6. प्रदीप कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, पदस्थापन की प्रतीक्षा में, बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), मुजफ्फरपुर
  7. गौतम शरण ओमी (पुलिस उपाधीक्षक, साइबर क्राईम, बेतिया) से पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना
  8. अशोक कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, मुख्यालय, मुजफ्फरपुर) से पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना
  9. राजेश कुमार शर्मा (अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जगदीशपुर, भोजपुर) से पुलिस उपाधीक्षक, मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, बिहार, पटना
  10. संतोष कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, यातायात, जहानाबाद) से पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना
  11. सर्वेश चंद्र (पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार, पटना
  12. अनुराधा सिंह (पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार, पटना
  13. विकास केशव (पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार, पटना
  14. स्वीटी सिंह (पुलिस उपाधीक्षक, मुख्यालय, सारण) से पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
  15. अमन (अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, महाराजगंज, सिवान) से पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना
  16. रौली कुमारी (पुलिस उपाधीक्षक, बि0वि0स0पु0 (महिला), सासाराम) से पुलिस उपाधीक्षक, बि0वि0स0पु0-3, बोधगया
  17. कुमारी सिया भारती (पुलिस उपाधीक्षक, विशेष शाखा) से पुलिस उपाधीक्षक, विशेष अपराध, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना
  18. पंकज कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार, पटना
  19. बिनोध कुमार सिंह (पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक, यातायात, जहानाबाद
  20. संजीत कुमार सिन्हा (पुलिस उपाधीक्षक, आर्थिक अपराध इकाई, बिहार, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार, पटना
  21. स्वाति (पुलिस उपाधीक्षक, बिहार पुलिस अकादमी, राजगीर) से पुलिस उपाधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (महिला), सासाराम
  22. वासुदेव राय (पुलिस उपाधीक्षक, बि0वि0स0पु0-12, भीमनगर, सुपौल) से पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना
  23. भूदेव दास (पुलिस उपाधीक्षक, विशेष शाखा, बिहार, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), जहानाबाद
  24. केशव कुमार मजुमदार (पुलिस उपाधीक्षक, विशेष शाखा, बिहार, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), भागलपुर
  25. उमेश लाल रजक (पुलिस उपाधीक्षक, रक्षित, भागलपुर) से पुलिस उपाधीक्षक, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस मुख्यालय, बिहार, पटना
  26. अविनाश कुमार सिंह (पुलिस उपाधीक्षक पद का उच्चतर प्रभार प्रदत्त) से पुलिस उपाधीक्षक, यातायात, सीतामढ़ी
  27. धर्मेंद्र कुमार (पुलिस उपाधीक्षक पद का उच्चतर प्रभार प्रदत्त) से पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित), बगहा
  28. सन्नी दयाल (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक, यातायात, पटना
  29. पीरूष अग्रवाल (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, नवादा) से पुलिस उपाधीक्षक, यातायात, पटना
  30. विनय कुमार रंजन (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, पटना) से पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राईम), भागलपुर
  31. अंकित कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, बगहा) से पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राईम), जहानाबाद
  32. देव आशीष हंस (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, सारण) से पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राईम), पटना
  33. शिवानी श्रेष्ठा (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, मुजफ्फरपुर) से पुलिस उपाधीक्षक, विशेष अपराध, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना
  34. चित्रा कुमारी (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, पूर्णिया) से पुलिस उपाधीक्षक, विशेष अपराध, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना
  35. खालिद हयात (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, सहरसा) से पुलिस उपाधीक्षक, विशेष शाखा, बिहार, पटना
  36. समीर कुमार सिंह (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, रोहतास) से पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राईम), बक्सर
  37. रौशन कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, दरभंगा) से पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राईम), भोजपुर
  38. अभिनव कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, गयाजी) से पुलिस उपाधीक्षक, विशेष सुरक्षा दल, बिहार, पटना
  39. मो0 फैसल चाँद (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, सारण) से पुलिस उपाधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना
  40. अब्दुर रहमान (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, कटिहार) से पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राईम), बेतिया
  41. ईशानी सिन्हा (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, भोजपुर) से पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राईम), शिवहर
  42. ज्योति कुमारी (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, औरंगाबाद) से पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राईम), बगहा
  43. अमरजीत तिवारी (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, बेगूसराय) से पुलिस उपाधीक्षक, विशेष सुरक्षा दल, बिहार , पटना
  44. राजन कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, नवादा) से पुलिस उपाधीक्षक, विशेष शाखा, बिहार, पटना
  45. मिथिलेश कुमार तिवारी (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, मुंगेर) से पुलिस उपाधीक्षक, विशेष शाखा, बिहार, पटना
  46. ऋषभ आनंद (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, सिवान) से पुलिस उपाधीक्षक (साइबर क्राईम), नालंदा
  47. रिषभ कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, मोतिहारी) से पुलिस उपाधीक्षक, यातायात, शेखपुरा
  48. तरुण कुमार पाण्डेय (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, खगड़िया) से पुलिस उपाधीक्षक, यातायात, अररिया
  49. अभिषेक चौबे (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, मुंगेर) से पुलिस उपाधीक्षक, यातायात, समस्तीपुर
  50. अभिषेक कुमार (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, गयाजी) से पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), सारण
  51. पिंकी कुमारी (पुलिस उपाधीक्षक, परीक्ष्यमान, गयाजी) से पुलिस उपाधीक्षक, बि0वि0स0पु0-19, बेगूसराय
  52. शत्रुघ्न पटेल (आशु उपाधीक्षक पद का उच्चतर प्रभार प्रदत्त) से आशु उपाधीक्षक, बिहार पुलिस मुख्यालय, पटना
  53. राज कुमार प्रसाद (आशु उपाधीक्षक पद का उच्चतर प्रभार प्रदत्त) से आशु उपाधीक्षक, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार, पटना

प्रशासनिक हलकों में हड़कंप: एक साथ इतने बड़े पैमाने पर ट्रांसफर-पोस्टिंग के बाद पूरे सूबे के पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। नव पदस्थापित अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से अपने नए कर्तव्यों को संभालने का निर्देश दिया गया है, ताकि कानून व्यवस्था और विभागीय कार्यप्रणाली को और ज्यादा दुरुस्त किया जा सके।

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गाँव वालों की चमकी किस्मत, केंद्र सरकार का देशव्यापी रोजगारसृजन   : अब मिलेगा 125 दिन रोजगार, मजदूरी में भी बंपर बढ़ोतरी लागू!

विशेष ब्यूरो, नई दिल्ली, 1 जुलाई: देश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले करोड़ों मजदूरों और उनके परिवारों के लिए आज का दिन एक ऐतिहासिक और जीवन बदलने वाला सवेरा लेकर आया है। केंद्र सरकार ने पूरे देश के गांवों की तकदीर बदलने के उद्देश्य से एक बहुत बड़ा फैसला लेते हुए ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025′ को आज यानी 1 जुलाई से पूरे देश में पूरी ताकत के साथ लागू कर दिया है। सरकार के इस क्रांतिकारी कदम से अब ग्रामीण भारत के कोने-कोने में खुशहाली की लहर दौड़ गई है।

अब 100 नहीं, पूरे 125 दिनों के काम की पक्की गारंटी इस ऐतिहासिक कानून के लागू होते ही अब गांवों में मिलने वाले रोजगार की पुरानी व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है। नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण रोजगार की कानूनी गारंटी को 100 दिनों से सीधे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। यानी अब गांव के हर जरूरतमंद परिवार को पूरे 25 दिन का अतिरिक्त वैधानिक रोजगार मिलना तय हो गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने साफ किया है कि इस वीबी जी राम जी (विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण) अधिनियम के तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिन के रोजगार की गारंटी सुनिश्चित की जाएगी, जो ग्रामीण भारत को सीधे तौर पर सशक्त और आत्मनिर्भर बनाएगी।

मजदूरी दरों में भारी उछाल, सीधे बैंक खातों में बरसेगा पैसा सरकार ने केवल काम के दिन ही नहीं बढ़ाए हैं, बल्कि महंगाई के इस दौर में मजदूरों की जेब को भारी-भरकम राहत देते हुए उनकी मजदूरी में भी बंपर बढ़ोतरी कर दी है। ग्रामीण मजदूरों की औसत दैनिक मजदूरी को 298.8 रुपये से बढ़ाकर अब सीधे 327.4 रुपये कर दिया गया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नई मजदूरी दरों की आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिसके बाद यह बढ़ी हुई दरें आज से ही देशभर के सभी कार्यस्थलों पर पूरी तरह प्रभावी हो गई हैं।

खजाने का मुंह खुला: 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम बजट सरकार इस मिशन को जमीन पर पूरी तरह कामयाब बनाने के लिए पानी की तरह पैसा बहाने को तैयार है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में इस महा-योजना के सफल कार्यान्वयन और ग्रामीण मजदूरों के भुगतान के लिए सरकार ने अपने बजट में 95 हजार 692 करोड़ रुपये का एक विशाल और भारी-भरकम प्रावधान किया है। इस विशाल राशि से गांवों में बड़े पैमाने पर टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण किया जाएगा और सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति मिलेगी।

यह करोड़ों भाई-बहनों के सम्मान और सुरक्षित आजीविका का नया अध्याय: शिवराज सिंह चौहान  इस ऐतिहासिक मिशन के देशव्यापी आगाज पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रेरक संदेश जारी किया है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “आज देशभर में विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) लागू हो गया है। यह केवल एक अधिनियम नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों ग्रामीण श्रमिक भाई-बहनों के सम्मान, स्वाभिमान और सुरक्षित आजीविका का एक नया सुनहरा अध्याय है।”

केंद्रीय मंत्री ने आगे विश्वास जताते हुए कहा, “अब ग्रामीण परिवारों को 100 नहीं, बल्कि 125 दिनों के रोजगार का वैधानिक अधिकार मिलेगा। मुझे पूरा विश्वास है कि सरकार की यह बड़ी पहल गांवों में आजीविका के नए और बेहतर अवसर सृजित करेगी। इससे गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण बहुत तेज होगा, हमारी मातृशक्ति को अभूतपूर्व ढंग से सशक्त बनाएगी और एक आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण के संकल्प को नई गति देगी। आइए, हम सब मिलकर इस समृद्ध, सशक्त तथा आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण के इस महा-यज्ञ में सहभागी बनें।”

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सकरा में पहली बारिश ही बनी आफत: दुकानों और स्कूलों में घुसा पानी, घुटने भर पानी में तैरती दिखी नगर पंचायत के विकास की दास्तान!

नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा दांव पर, अपनों को ही नहीं दिख रहा भ्रष्टाचार

सकरा (मुजफ्फरपुर): मानसून की पहली ही बारिश ने सुबह-सुबह सकरा प्रखण्‍ड क्षेत्र के सकरा नगर पंचायत प्रशासन के दावों की कलई खोलकर रख दी। करीब 2 घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने जहाँ भीषण गर्मी से राहत दिलाई और किसानों के चेहरों पर मुस्कान ला दी, वहीं दूसरी ओर आम जनता और व्यापारियों के लिए यह बारिश एक बड़ी मुसीबत बनकर टूटी। जलजमाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण लोग सुबह-सुबह बेहाल और हलकान नजर आए।

सकरा नगर पंचायत के सुजावलपुर स्टेशन रोड में 2 घंटे की बारिश के बाद डूबी दुकानें और कुदाल हाथ में लेकर नाला चीर कर पानी निकालते स्‍थानीय दुकानदार

सब्जी और मछली मंडी में पसरा सन्नाटा, स्टेशन रोड बना दरिया

बारिश का असर सुबह लगने वाली सुजावलपुर सब्जी मंडी और मछली मंडी पर सबसे ज्यादा पड़ा, जहाँ ग्राहकों और दुकानदारों के गायब होने से पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। सकरा नगर पंचायत क्षेत्र के सुजावलपुर स्टेशन रोड में देखते ही देखते स्थिति नारकीय हो गई। पूरी सड़क मानो किसी दरिया में तब्दील हो गई। एन एच से 50 मीटर उत्तर बिनोद पुस्तक भंडार से लेकर मझोलिया मोड़ तक कई घंटों तक घुटने भर पानी जमा रहा, जिससे पैदल चलने वाले राहगीरों और स्थानीय लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

6 माह पहले बनी सड़क ने डुबोया, बिना नाले के भुगत रहे खामियाजा

स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि करीब 6 माह पहले बनी नई सड़क को पहले के मुकाबले काफी ऊँचा कर दिया गया, लेकिन इसके साथ जल निकासी के लिए नाले का निर्माण नहीं कराया गया। इसका खामियाजा अब लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सड़क ऊँची होने के कारण बारिश का सारा पानी बैक मारकर कई दुकानों के भीतर घुस गया, जिससे व्यापारियों का हजारों का सामान बर्बाद हो गया।

सकरा नगर पंचायत के सुजावलपुर स्टेशन रोड में 2 घंटे की बारिश के बाद डूबी दुकानें और जलमग्न सड़क, जो प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है।

स्कूल के कमरों में भरा पानी, बच्चों को दी गई छुट्टी, खुद कुदाल लेकर उतरे व्यापारी

 सकरा में स्कूल के भीतर पानी घुस जाने के बाद गंदे पानी के बीच से होकर बाहर निकलते मासूम बच्चे और खुद कुदाल से पानी का रास्ता साफ करते लोग।

जलजमाव का सबसे डरावना रूप सकरा सिनेमा हॉल के पास देखने को मिला। यहाँ एक स्कूल के भीतर और कमरों के अंदर तक तेजी से पानी प्रवेश कर गया। कमरों में पानी भर जाने के बाद आनन-फानन में बच्चों को स्कूल से छुट्टी दे दी गई। मासूम बच्चे पानी में जैसे-तैसे बच-बचाकर सड़क पर बाहर निकलते हुए देखे गए। इस दौरान जल निकासी की कोई व्यवस्था न देख सकरा सिनेमा हॉल के पास के व्यापारियों ने खुद मोर्चा संभाला। व्यापारियों ने खुद कुदाल की व्यवस्था की और पानी के बीच उतरकर नाला चीरकर जल निकासी का रास्ता बनाया।

4 साल बीते, बुनियादी सुविधाओं को तरसे लोग: चुनाव में भुगतना पड़ेगा अंजाम

सकरा नगर पंचायत के सुजावलपुर, खासकर मुख्य व्यावसायिक क्षेत्र के दोनों ओर नाला निर्माण नहीं होने से यहाँ व्यवसाय करने वाले लोगों में भारी आक्रोश है। व्यापारियों का कहना है कि सुजावलपुर से ढोली स्टेशन तक नाले के निर्माण की मांग लोग बरसों से कर रहे हैं। नगर पंचायत चुनाव बीते हुए लगभग 4 वर्ष पूरा होने वाले  हैं और अब सिर्फ 1 वर्ष का समय बचा है। आक्रोशित दुकानदारों और स्थानीय जनता ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस बचे हुए 1 वर्ष में नाले का निर्माण नहीं कराया गया, तो आने वाले अगले चुनाव में यह यहाँ का सबसे प्रमुख मुद्दा बनेगा और जनप्रतिनिधियों को इसका अंजाम भुगतना होगा।

बारिश के बाद वार्ड संख्‍या छह में , ढ़ोली स्‍टेशन के सामने एवं मतवाला शिवमंदिर मुहल्‍ला के पीछे  की नारकीय स्थिति का दृश्‍य  

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी चमचमाती सड़क: मात्र 6 महीने में दर्जनों जगह से टूटी, बंद कर दिए गए  जलनिकासी के लिए बने पुल, स्थानीय पार्षद  और नेता मौन!

सकरा नगर पंचायत क्षेत्र के सुजावलपुर से ढोली स्टेशन तक बनी नई सड़क निर्माण के मात्र 6 महीने के भीतर ही पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। यह सड़क भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल बन गई है, जो दर्जनों जगहों से टूटकर बिखर चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर जल निकासी को सुचारू रखने के लिए पहले 4 पुल थे, लेकिन इन सभी पुलों पर अवैध अतिक्रमण कर लिया गया। हद तो तब हो गई जब कुछ महीने पहले सड़क निर्माण के दौरान इनमें से कई पुलों को पूरी तरह बंद कर दिया गया। पुल बंद होने की वजह से जल निकासी का पूरा तंत्र ध्वस्त हो गया है, जो आने वाले समय में यहाँ जलजमाव की समस्या को और भयानक बना देगा। इस गंभीर जन समस्या और जर्जर, नाला विहीन सड़क पर स्थानीय वार्ड पार्षद भी पूरी तरह मौन साधे हुए हैं।

सुजावलपुर चौक पर लगा, सकरा बाजार पथ का शिलान्यास पट, जिस पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी समेत कई कई दिगग्‍ज नेताओं के नाम दर्ज हैं। इसी वीआईपी सड़क का निर्माण मात्र 6 महीने में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर जमींदोज हो रहा है ।

नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी के नाम से जुड़ी प्रतिष्ठा दांव पर, अपनों को ही नहीं दिख रहा भ्रष्टाचार, भाजपा जदयू के नेतागण मौन

चौंकाने वाली बात यह है कि इस जर्जर हो चुकी सड़क का शिलान्यास खुद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (जो ग्रामीण कार्य विभाग के उस समय के उप मुख्यमंत्री अतिथि/विशिष्ट अतिथि रहे) के हाथों 12.05.2025 को संपन्न हुआ था। सड़क के शिलान्यास पट पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा और अशोक चौधरी जैसे कद्दावर नेताओं के नाम अंकित हैं। इसके बावजूद मात्र 6 महीने में ही इस सड़क का उखड़ जाना सीधे तौर पर सरकार की साख पर बट्टा लगा रहा है। सबसे बड़ा सवाल स्थानीय भाजपा नेताओं पर उठ रहा है, जिन्हें इस सड़क के नाम से जुड़े बिहार के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिष्ठा और क्षेत्र में हुआ यह खुला भ्रष्टाचार दिखाई ही नहीं दे रहा है।

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अस्पतालों की मनमानी पर लगेगा सीसीटीवी का पहरा, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की सीधी चेतावनी

दरियापुर भट्टी में नए केंद्र का उद्घाटन, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा- हर व्यक्ति को निकट ही मिलेगी सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा

पटना। बिहार की राजधानी को स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात मिली है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने दरियापुर भट्टी के पास पटना के सबसे बड़े शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का विधि-विधान से उद्घाटन किया। इस नए और आधुनिक स्वास्थ्य केंद्र के शुरू होने से स्थानीय निवासियों को अब अपने घर के नजदीक ही सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं मिल सकेंगी।

शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन के बाद भीतर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करते स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, जहां वे तैनात डॉक्टर और महिला स्वास्थ्य कर्मियों से सुविधाओं के संबंध में जानकारी ले रहे हैं।

अस्पतालों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे, मंत्री खुद करेंगे मॉनिटरिंग उद्घाटन समारोह के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि बिहार के सभी सरकारी अस्पतालों में सीसीटीवी (क्लोज्ड सर्किट टेलीविजन) कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों के जरिए अस्पतालों की व्यवस्था, डॉक्टरों की उपस्थिति और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की वे खुद सीधी निगरानी (मॉनिटरिंग) करेंगे, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।

दरियापुर भट्टी शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में अनावरण किया गया आधिकारिक शिलापट्ट।

भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा  : नव निर्मित  बिल्डिंग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने स्वास्थ्य विभाग की भविष्य की कार्ययोजना पर मिडिया से बात करते हुए , विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर व्यक्ति को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, यही सरकार का मुख्य प्रयास है। दरियापुर भट्टी का यह केंद्र एक मॉडल के रूप में काम करेगा, जहां प्राथमिक उपचार से लेकर जरूरी जांच तक की सुविधाएं सुचारू रूप से संचालित होंगी। उद्घाटन के बाद मंत्री ने केंद्र के भीतर विभिन्न वार्डों, ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) और दवाई वितरण कक्ष का निरीक्षण किया और डॉक्टरों व स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

पटना के दरियापुर भट्टी में नवनिर्मित सबसे बड़े शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का बाहरी दृश्य, जहां उद्घाटन समारोह के दौरान स्थानीय नागरिकों और अधिकारियों की भीड़ उमड़ी।

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