Wednesday, July 29, 2026

बिहार: वित्त विभाग ने वेतन-पेंशन से जुड़ा पिछला आदेश किया रद्द, अब पुराने दिशा-निर्देशों पर ही होगी निकासी

पटना। मुख्य संवाददाता

बिहार सरकार के वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति से ठीक पहले एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। विभाग ने 27 फरवरी 2026 को जारी अपने उस आदेश (पत्रांक-2182) को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) कर दिया है, जिसमें वेतन और पेंशन के बिलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए थे।

विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल द्वारा हस्ताक्षरित इस नए पत्र के अनुसार, अब राज्य के सभी कोषागारों (Treasuries) में निकासी के लिए 6 फरवरी 2026 को जारी मूल दिशा-निर्देश ही प्रभावी रहेंगे।

क्यों वापस लेना पड़ा फैसला?

सरकारी पत्र के अनुसार, होली के त्योहार को देखते हुए फरवरी माह का वेतन 24 फरवरी से ही बांटने का निर्णय लिया गया था। इस दौरान बिलों की भारी संख्या को देखते हुए विभाग ने 27 फरवरी को एक नया आदेश जारी किया था ताकि वेतन और पेंशन बिलों का भुगतान सुगम हो सके।

हालांकि, इस आदेश के बाद विभिन्न विभागों और कोषागारों में अन्य प्रकार के बिलों के भुगतान को लेकर भ्रम और संशय की स्थिति पैदा हो गई थी। इसी तकनीकी उलझन और वित्तीय अनुशासन को बनाए रखने के लिए सरकार ने 24 घंटे के भीतर ही इस आदेश को रद्द करने का फैसला लिया।

अब क्या होगा असर?

  • पुराना नियम लागू: अब वित्तीय अनुशासन और फंड निकासी के लिए पत्रांक-1354 (दिनांक 06.02.2026) का ही कड़ाई से पालन किया जाएगा।
  • बिलों की जाँच: वित्तीय वर्ष (Financial Year) के अंतिम माह में आकस्मिक बिलों और अन्य स्कीमों के बिलों की भीड़ बढ़ जाती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी निकासी नियमों के दायरे में रहकर ही की जाएंगी।
  • अधिकारियों को निर्देश: राज्य के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पुराने दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही निकासी एवं व्यय नियंत्रण सुनिश्चित करें। वित्त विभाग ने साफ किया है कि यह कदम केवल भ्रम की स्थिति को दूर करने और वित्तीय अनुशासन को अधिक मजबूती से लागू करने के लिए उठाया गया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को दी भावभीनी श्रद्धांजलि; बाँस घाट और मंदिरी नाला परियोजना का किया निरीक्षण

पटना। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज भारत के प्रथम राष्ट्रपति, ‘देशरत्न’ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के 63वें निर्वाण दिवस के अवसर पर महाप्रयाण घाट स्थित उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने देश के निर्माण में डॉ. प्रसाद के अतुलनीय योगदान को याद किया।

श्रद्धांजलि सभा के उपरांत मुख्यमंत्री ने शहर की महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं और जनसुविधाओं का जायजा लेने के लिए क्षेत्र का सघन दौरा किया।

बाँस घाट: अत्याधुनिक शवदाह गृह का निरीक्षण

मुख्यमंत्री बाँस घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह पहुँचे, जहाँ उन्होंने वर्तमान व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने वहां निर्माणाधीन अत्याधुनिक शवदाह परिसर के कार्यों का भी निरीक्षण किया।

  • समय-सीमा का निर्देश: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि शवदाह गृह परिसर का निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए।
  • गुणवत्ता पर जोर: उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए ताकि आमजनों को भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मंदिरी नाला परियोजना: यातायात होगा सुगम

बाँस घाट के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिरी नाला परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन दो-लेन संपर्क सड़क (Link Road) के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस परियोजना को शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सीधा संपर्क: मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सड़क के बन जाने से नेहरू पथ (बेली रोड) और जे.पी. गंगा पथ के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा।
  • जनता को राहत: इस नए मार्ग से शहरवासियों को आवागमन में काफी सहूलियत होगी और मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

इस निरीक्षण के दौरान राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित विभागों के अभियंता भी उपस्थित रहे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने कार्यों में तेजी लाने के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

सरायरंजन: बाल विवाह मुक्त समाज के लिए ‘मुक्ति रथ’ रवाना, सामाजिक बुराई के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

“सावधान! बाल विवाह में गए तो होगी जेल; सरायरंजन में जागरूकता रथ के जरिए दी गई कड़ी चेतावनी”

सरायरंजन | 28 फरवरी, 2026 प्रखंड क्षेत्र में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से मिटाने के लिए शनिवार को एक प्रभावी पहल की गई। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र (अख्तियारपुर) और क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

शिक्षा और विकास में बाधक है बाल विवाह: प्रमुख

रथ को रवाना करते हुए प्रमुख वीणा कुमारी ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जिसे खत्म करने के लिए सामूहिक सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा, “समुदाय में जागरूकता की कमी के कारण आज भी कई बालिकाएं शिक्षा से वंचित रह जाती हैं, जिससे उनका सर्वांगीण विकास बाधित होता है।”

विशेषज्ञों और शिक्षकों ने साझा किए विचार

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला:

  • राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय (नरघोघी) के प्राचार्य दीपक कुमार मंडल ने कहा कि बाल विवाह सामाजिक विकास की सबसे बड़ी चुनौती है। इसे मिटाए बिना विकसित राष्ट्र की कल्पना संभव नहीं है।
  • शिक्षक शकील अहमद ने स्वास्थ्य संबंधी चिंता जताते हुए कहा कि कम उम्र में विवाह के कारण कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है।
  • शिक्षक मनोज कुमार साह एवं पंकज कुमार झा ने सुझाव दिया कि दलित समुदायों के बीच विशेष जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि वहां व्याप्त इस समस्या को कम किया जा सके।

कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

अधिवक्ता रामलाल पासवान ने इस अवसर पर बाल विवाह से जुड़े कड़े कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह में शामिल होने वाले केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि नाई, कुम्हार, माली, पंडित, टेंट और बाजा वाले सहित बारात जाने वाले सभी लोगों पर सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर 2 साल की जेल और 1 लाख रुपये के दंड का कानून है।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस अभियान को सफल बनाने में बलराम चौरसिया, ललिता कुमारी, दिनेश प्रसाद चौरसिया, रविन्द्र पासवान, किरण कुमारी, मयंक कुमार सिन्हा, विभा कुमारी सहित दर्जनों लोगों ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक तेज नारायण महतो ने किया।

भोजन की व्यवस्था और आगे का सफर: मेयारी गांव के समाजसेवी सह समाजवादी नेता अजय राय ने रथ के यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था की, जिसके बाद जत्थे को गंगापुर झखड़ा के लिए रवाना किया गया। मौके पर भारी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

एमडीडीएम कॉलेज में उल्लास के साथ मना ‘रंगोत्सव’, गीतों और कविताओं से सजी होली मिलन की महफिल

मुजफ्फरपुर | 28 फरवरी, 2026 महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के परिसर में शनिवार को होली मिलन समारोहका शानदार आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. अलका जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में कॉलेज की शिक्षिकाओं और छात्राओं ने रंगों के इस पावन त्योहार को आपसी भाईचारे और सौहार्द के प्रतीक के रूप में मनाया।

भाईचारे का रंग है होली: प्राचार्य

समारोह का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य डॉ. अलका जायसवाल ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि यह समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर एक-दूसरे को गले लगाने का पर्व है। उन्होंने कहा, “होली के रंग भाईचारे के रंग हैं, जिसकी मस्ती और सकारात्मकता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है।”

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. प्रियम फ्रांसिस ने किया। समारोह में संगीत और साहित्य की त्रिवेणी देखने को मिली:

  • गायन: डॉ. सुधांशु और डॉ. सुनीता ने अपनी मधुर गीतमय प्रस्तुतियों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं संगीत विभाग की छात्राएं अंकिता, शिवांशी और तनीषा के गीतों ने उत्सव के जोश को दोगुना कर दिया।
  • नृत्य: अंग्रेजी विभाग की छात्राएं अनन्या और कशिश के साथ संगीत विभाग की छात्रा चंचल ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

कविताओं में झलका सामाजिक संदेश

साहित्यिक सत्र में डॉ. सुरबाला वर्मा ने अपनी कविता नदियां चुप रहने लगी हैं आजकल” के माध्यम से गंभीर संवेदनाओं को उकेरा। वहीं, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. मुबशरा सदफ ने क्या कहती है होली?” शीर्षक वाली अपनी रचना से सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया:

सब रंगों को एक बनाकर, ऊंच नीच का भेद मिटाकर , लाल हरा भगवा या नीला, सब मिल जाते हैं होली में”

खास आकर्षण: गंगा-जमुनी तहजीब की झलक समारोह का मुख्य आकर्षण उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. एम. सदफ की पंक्तियाँ रहीं, जिन्होंने लाल, हरे, भगवा और नीले रंगों के एक हो जाने की बात कहकर समाज में एकता का संदेश दिया। वहीं डॉ. सुरबाला की पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित कविता ने सभी को सोचने पर मजबूर किया।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर महाविद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका डॉ. कुमारी सरोज, डॉ. अनुराधा सिंह, डॉ. प्रांजलि, डॉ. देवश्रुति घोष, डॉ. वर्षा तिवारी, डॉ. अर्चना गुप्ता सहित कॉलेज के अन्य कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं। पूरे परिसर में गुलाल और खुशियों की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

आलू की बेकद्री: लागत 15 रुपये, बिक्री मात्र 5-6 रुपये; बर्बादी की कगार पर बिहार के किसान

“सरकार मौन, किसान परेशान: क्या बंगाल की तर्ज पर बिहार में भी होगी आलू की सरकारी खरीद?”

ताजपुर/समस्तीपुर | 28 फरवरी 2026

आलू उत्पादन का गढ़ माने जाने वाले समस्तीपुर जिले के ताजपुर, पूसा, मोरबा और सरायरंजन प्रखंडों के किसानों के चेहरे पर इन दिनों मायूसी छाई है। कभी ‘सफेद सोना’ कहा जाने वाला आलू आज किसानों के लिए गले की फांस बन गया है। मंडियों में आलू की कीमत गिरकर महज 5 से 6 रुपये प्रति किलो रह गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक चोट पहुँच रही है।

लागत भी नहीं निकल पा रही

अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता सह आलू उत्पादक किसान ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने बताया कि बीज, खाद, जुताई, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर आलू की उत्पादन लागत करीब 15 रुपये प्रति किलो आती है। ऐसे में 5-6 रुपये में फसल बेचना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। 25 वर्षों से खेती कर रहे किसान दिनेश प्रसाद सिंह कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में आलू की इतनी कम कीमत कभी नहीं देखी।

कम पैदावार के बावजूद कीमतों में गिरावट ने चौंकाया

हैरानी की बात यह है कि इस बार जिले में आलू की पैदावार भी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई है। कम उत्पादन के बावजूद कीमतों का इतना गिरना कृषि विशेषज्ञों और व्यापारियों की समझ से परे है। मंडी के गद्दीदार मंजीत कुमार सिंह और श्यामबाबू सिंह के अनुसार, बाजार में मांग की कमी और बाहरी राज्यों से आलू की भारी आवक कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण है।

कोल्ड स्टोरेज की समस्या और मजबूरी की बिक्री

किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज की क्षमता सीमित है और भंडारण शुल्क का अतिरिक्त बोझ वहन करना उनके बस की बात नहीं है। मोतीपुर, फतेहपुर और रहीमाबाद के किसानों ने बताया कि नकदी की तत्काल जरूरत के कारण छोटे और सीमांत किसान औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं।

किसानों की प्रमुख मांगें:

आंदोलन की चेतावनी

भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई, तो किसान भविष्य में आलू की खेती से मुंह मोड़ लेंगे। किसान महासभा और भाकपा माले ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

एमडीडीएम कॉलेज में विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन: मानसी ऋतु ने मारी बाजी

मुजफ्फरपुर | 28 फरवरी, 2026

महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के शिक्षाशास्त्र विभाग (B.Ed.) में शनिवार को ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ के अवसर पर भव्य विज्ञान मेला सह प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य विषय वूमेन इन साइंस: कैटेलाइजिंग विकसित भारत रखा गया, जिसके माध्यम से छात्राओं ने विज्ञान के क्षेत्र में नारी शक्ति और उनके योगदान को प्रदर्शित किया।

नवाचार और प्रतिभा का संगम

प्रदर्शनी का उद्घाटन महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने किया। छात्राओं ने विभिन्न वैज्ञानिक मॉडलों और पोस्टरों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया। कार्यक्रम में बर्सर डॉ. अनुराधा सिंह, विभागाध्यक्ष डॉ. हरि शंकर कुमार सहित जूलॉजी, होम साइंस और अन्य विभागों के शिक्षक मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके मॉडलों का सूक्ष्म अवलोकन किया।

विजेता प्रतिभागी

प्रदर्शनी में छात्राओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिसमें सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों को चयनित किया गया:

  • प्रथम स्थान: मानसी ऋतु (विषय: लाइट टू लीडरशिप: वूमेन पावरिंग विकसित भारत)
  • द्वितीय स्थान: सुरभि कुमारी (विषय: साइंस एंड जेंडर रोल)
  • तृतीय स्थान: सोनाक्षी कुमारी एवं मनीषा कुमारी (विषय: चाइल्ड टू रिड्यूस फोन यूसेज)

इसके अलावा सगुन भारती, पूजा, सोनी, शाहीन नाज़, संध्या और नाज़नीन उमर सहित कई अन्य छात्राओं ने भी सक्रिय रूप से अपने प्रोजेक्ट्स साझा किए।

वैज्ञानिक चेतना पर जोर

प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने कहा कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य छात्राओं में साइंटिफिक टेम्परामेंट (वैज्ञानिक चेतना), इन्नोवेशन (नवाचार) और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। निर्णायक मंडल में डॉ. रंजीत कुमार, डॉ. स्मिता गौतम, डॉ. रवि कुमार, डॉ. सुमन्त कुमार सहित कई वरिष्ठ शिक्षक शामिल थे। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के उत्साहवर्धन और बधाई संदेश के साथ हुआ।

मुजफ्फरपुर: कतैया, गौरैया और ढोली कृषि महाविद्यालय सहित तीन उप डाकघरों के लिए किराए पर चाहिए भवन, 20 मार्च तक करें आवेदन

मुजफ्फरपुर। भारतीय डाक विभाग के मुजफ्फरपुर प्रमंडल के अंतर्गत तीन उप डाकघरों को नए और बेहतर भवनों में स्थानांतरित करने की योजना है। इसके लिए डाक विभाग ने कतैया, गौरैया और ढोली कृषि महाविद्यालय उप डाकघर के लिए निजी मकान मालिकों से आवेदन आमंत्रित किए हैं।

डाकघर का काल्‍पनिक चित्र

वरिष्ठ डाक अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, विभाग को इन क्षेत्रों में पक्के छतदार मकानों की आवश्यकता है। इच्छुक मकान मालिक अपना आवेदन 20 मार्च 2026 की शाम 5:00 बजे तक स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेज सकते हैं।

इन स्थानों के लिए चाहिए भवन:

विभाग ने मुख्य सड़क पर स्थित निम्नलिखित क्षेत्रों में मकानों की मांग की है:

क्रम संख्याउप डाकघर का नामप्रस्तावित क्षेत्रआवश्यक क्षेत्रफल (वर्ग फीट)
1.ढोली कृषि महाविद्यालयमहाविद्यालय के मुख्य द्वार के आसपास690
2.कतैया उप डाकघरवर्तमान भवन के आसपास690
3.गौरैया उप डाकघरगौरैया चौक के आसपास690

भवन में अनिवार्य सुविधाएं:

डाक विभाग ने स्पष्ट किया है कि किराए पर लिए जाने वाले भवन में निम्नलिखित सुविधाएं होना आवश्यक है:

  • शौचालय एवं स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था।
  • चार पहिया वाहन के आने-जाने की सुगम सुविधा।
  • कर्मचारियों और ग्राहकों के वाहन पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह।

आवेदन की प्रक्रिया:

इच्छुक मकान मालिक अपने आवेदन के साथ मालिकाना हक का प्रमाण पत्र  संलग्न करें। आवेदन “वरिष्ठ अधीक्षक डाकघर, मुजफ्फरपुर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर-842002” के पते पर भेजना होगा। किराए का निर्धारण विभाग के नियमों के अनुसार किया जाएगा।

नोट: आवेदन का प्रारूप और विस्तृत जानकारी के लिए किसी भी कार्यदिवस में प्रमंडलीय कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। निर्धारित समय (20 मार्च) के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान: प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं ने मिलकर रोकी एक मासूम की ‘बलि’

समस्तीपुर | 26 फरवरी, 2026 विभूतिपुर प्रखंड में बाल विवाह मुक्ति रथ के संदेश और जिला प्रशासन की मुस्तैदी ने एक बार फिर मानवता की जीत सुनिश्चित की है। चाइल्ड हेल्पलाइन और जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के साझा प्रयासों से एक नाबालिग किशोरी को ‘बालिका वधू’ बनने से बचा लिया गया।

त्वरित कार्रवाई से रुका विवाह

जानकारी के अनुसार, चाइल्ड हेल्पलाइन समस्तीपुर को सूचना मिली थी कि विभूतिपुर प्रखंड के आलमपुर कोदरिया पंचायत (वार्ड 14, आलमपुर मुसहरी) में श्‍वेता कुमारी,  पिता: गौरव दास (दोनों काल्‍पनिक नाम ) का बाल विवाह होने वाला है। सूचना मिलते ही प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) सह सहायक बाल विवाह निषेध पदाधिकारी, विभूतिपुर, सुनील कुमार के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया।

मौके पर दी गई कानूनी चेतावनी

प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़िता के घर पहुँचकर गृह भ्रमण किया। मौके पर उपस्थित मुखिया, वार्ड सदस्य और पंचायत सचिव के साथ एक सामूहिक बैठक की गई, जिसमें परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम की कठोर कानूनी धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया। काफी समझाने-बुझाने के बाद बालिका के माता-पिता ने अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में बाल विवाह न करने का लिखित वचन पत्र सौंपा।

इनकी रही मुख्य भूमिका

इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में मुख्य रूप से निम्नलिखित सदस्यों का योगदान रहा:

  • प्रशासनिक नेतृत्व: सुनील कुमार (BDO, विभूतिपुर)
  • जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र: रवि कुमार एवं दीप्ति कुमारी (परियोजना समन्वयक)
  • चाइल्ड हेल्पलाइन: मुन्ना कुमार (पर्यवेक्षक)
  • प्रयास संस्था: कमलेश कुमार (सामाजिक कार्यकर्ता)

जागरूकता का प्रसार

घटना के बाद गांव में बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया गया। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के ‘एक्सेस टू जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों को संकल्प दिलाया गया कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी बच्चे का भविष्य अंधकार में नहीं झोंकने देंगे।

अधिकारी का संदेश: “बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप और कानूनी अपराध है। हम सजग हैं और किसी भी सूरत में प्रखंड में नाबालिगों का विवाह नहीं होने देंगे।” — प्रखंड विकास पदाधिकारी, विभूतिपुर

‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ से पहले ‘वन नेशन-वन एजुकेशन’ हो लागू: बिहार विधान परिषद में गूँजी समान शिक्षा की माँग

पटना। बिहार विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान सामाजिक और शैक्षणिक असमानता का मुद्दा पूरी प्रखरता के साथ गरमाया। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आने वाले माननीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी ने सदन में एक संकल्प पेश करते हुए राज्य में समान शिक्षा और समान परवरिश की नीति लागू करने की जोरदार वकालत की। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक देश में ‘नमक-रोटी’ और ‘हलवा-पूरी’ खाने वाले बच्चों के बीच की खाई नहीं भरेगी, तब तक वास्तविक विकास की कल्पना बेमानी है।

गरीबी संयोग है, चुनाव नहीं”: ब्रजवासी का भावुक संबोधन

सदन को संबोधित करते हुए श्री ब्रजवासी ने अपने जीवन के संघर्षों का हवाला देते हुए कहा, “मैं गरीब के घर पैदा हुआ और आज संघर्षों की बदौलत यहाँ खड़ा हूँ। किसी का गरीब के घर जन्म लेना बाय चांस होता है, बाय चॉइस नहीं। यह प्रकृति का संयोग है।”

उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की सुप्रसिद्ध पंक्तियों—श्वानों को मिलते दूध-भात, भूखे बालक अकुलाते हैं—के जरिए कुपोषण और अभाव की मार झेल रहे बच्चों की मर्मस्पर्शी तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के रूप में जब वह स्कूल में भूखे और बासी रोटी खाकर आने वाले बच्चों को देखते हैं, तो उनका ‘लर्निंग आउटकम’ (सीखने की क्षमता) संपन्न बच्चों के बराबर कभी नहीं हो सकता।

सामाजिक समरसता केवल समान शिक्षा प्रणाली से ही संभव

शिक्षा सुधार और सामाजिक समानता की मांग को लेकर सदन में एक अत्यंत भावुक और वैचारिक पक्ष रखते हुए माननीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी ने सुदामा चरित का मार्मिक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जब सांदीपनि मुनि के आश्रम में एक राजकुमार कृष्ण और एक निर्धन सुदामा साथ बैठकर शिक्षा ग्रहण करते हैं, तभी वह आत्मीयता जन्म लेती है जो बाद में द्वारकाधीश कृष्ण को अपने सखा की दीन दशा देख अश्रुधारा से पैर धोने को विवश कर देती है। सदस्य ने जोर देकर कहा कि ऐसी संवेदनशीलता और सामाजिक समरसता केवल समान शिक्षा प्रणाली से ही संभव है।

बहुरंगीशिक्षा व्यवस्था पर तीखा प्रहार

ब्रजवासी ने देश में व्याप्त दोहरी शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा:

“आज अमीरों के बच्चे सीबीएसई (CBSE) में पढ़ते हैं और गरीबों के बच्चे राज्य बोर्ड में। यह शैक्षणिक असमानता केवल बौद्धिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक दूरी भी बढ़ा रही है। मेरी माँग है कि पूरे देश में एक बोर्ड, एक सिलेबस, एक किताब और एक परीक्षा की नीति लागू हो। ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ की चर्चा तो बहुत है, लेकिन उससे पहले वन नेशन-वन एजुकेशन लागू होना चाहिए।” ताकि गरीब और अमीर के बीच की शैक्षणिक खाई को पाटा जा सके।

उन्होंने वर्ष 2006 में गठित मुचकुंद दुबे आयोग की ‘समान स्कूल प्रणाली’ रिपोर्ट का जिक्र करते हुए सरकार को याद दिलाया कि 2007 में रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद आज तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।


शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का पक्ष: बजट और योजनाओं का दिया हवाला

सदस्य के संकल्प और उनके द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि बिहार सरकार शिक्षा को सर्वांगीण विकास का आधार मानती है और इसी प्रतिबद्धता के कारण राज्य के वार्षिक बजट का 20% हिस्सा अकेले शिक्षा क्षेत्र को आवंटित किया गया है, जो पूरे देश में एक मिसाल है।

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन के समक्ष निम्नलिखित तथ्य रखे:

  • RTE के तहत आरक्षण: ‘निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ के तहत निजी स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग लगातार निजी स्कूलों के साथ बैठकें कर रहा है।
  • आवेदन के आँकड़े: मंत्री ने बताया कि अब तक 84,806 आवेदन प्राप्त हुए हैं और अधिकांश बच्चों को स्कूल आवंटित कर दिए गए हैं।
  • कल्याणकारी योजनाओं का जाल: राज्य के 1 करोड़ 9 लाख बच्चों को ‘मिड-डे मील’ दिया जा रहा है। इसके अलावा साइकिल, पोशाक, छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से ड्रॉप-आउट रेट कम किया गया है।
  • बुनियादी ढांचा: हर पंचायत में प्लस-टू स्कूल खोल दिए गए हैं और वर्तमान में शिक्षकों की संख्या 5 लाख 87 हजार से अधिक हो चुकी है।

महत्वपूर्ण अवलोकन: सदन में  माननीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी की असंतुष्टि का मुख्य कारण यही था कि सरकार 20% बजट तो खर्च कर रही है, लेकिन वह पैसा ‘समान स्कूल प्रणाली’ के ढांचे को खड़ा करने के बजाय ‘कल्याणकारी योजनाओं’ (साइकिल, भोजन आदि) में अधिक जा रहा है.

वो सिफारिशें जो अभी भी चुनौती बनी हुई हैं

  • समान स्कूल प्रणाली (CSS): मुचकुंद दुबे आयोग  की मुख्य सिफारिश थी कि ‘पड़ोस के स्कूल’ की ऐसी व्यवस्था हो जहाँ अमीर और गरीब का बच्चा एक ही छत के नीचे पढ़े।  शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि कक्षा 9 से 12 तक अभी समान परिवेश की नीति लागू नहीं है।
  • मुचकुंद दुबे आयोग की रिपोर्ट पर सीधा क्रियान्वयन: सदन में माननीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी की मुख्य शिकायत यही थी कि सरकार अपनी मौजूदा योजनाओं को तो गिना रही है, लेकिन आयोग द्वारा सुझाए गए बुनियादी ढांचागत बदलावों और विशिष्ट रिपोर्ट पर कोई नया आश्वासन नहीं मिला है।

आश्वासन के बाद संकल्प वापसी

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि कक्षा 1 से 8 तक समान शिक्षा नीति लागू है, हालांकि उच्च माध्यमिक (9वीं से 12वीं) के लिए ‘समान परवरिश’ जैसी कोई विशिष्ट नीति वर्तमान में सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।

विपक्ष और प्रस्तावक सदस्य ने सरकार के जवाब को ‘पुरानी योजनाओं का दोहराव’ बताया और मुचकुंद दुबे आयोग की रिपोर्ट पर ठोस आश्वासन न मिलने पर असंतोष जताया। हालांकि, शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के विनम्र अनुरोध और सभापति के निर्देश के बाद, सदन की सहमति से माननीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी ने अपना संकल्प वापस ले लिया।

सकरा में उमंग के साथ मना होली मिलन समारोह: महागठबंधन के नेताओं ने एकजुटता का दिया संदेश

सकरा, मुजफ्फरपुर। रंगों के महापर्व होली के शुभ अवसर पर सकरा सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र में आपसी प्रेम, भाईचारे और राजनीतिक एकजुटता की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली। सकरा सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य उमेश कुमार राम के सौजन्य से एक भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महागठबंधन के विभिन्न घटकों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिरकत कर आगामी चुनौतियों के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया।

रंग-गुलाल के साथ हुआ स्वागत

समारोह की शुरुआत उपस्थित अतिथियों को अबीर-गुलाल लगाकर और गले मिलकर होली की बधाई देने के साथ हुई। कार्यक्रम के आयोजक उमेश कुमार राम ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोने और गिले-शिकवे मिटाकर आगे बढ़ने का प्रतीक है।

स्‍थानीय दिग्गज नेताओं की रही मौजूदगी

इस मिलन समारोह में महागठबंधन की मजबूती साफ तौर पर नजर आई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित होने वालों में शामिल थे:

  • अनीता देवी: बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश प्रतिनिधि।
  • राजेश रंजन: सी.पी.आई. माले के  नेता।
  • प्रशांत राज: राजद  नेता।
  • शशि भूषण राय, शत्रुघ्न राय और चन्दन राय, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव और नुनू राय: क्षेत्र के वरिष्ठ सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता।
  • विनोद पाण्डेय सहित महागठबंधन के अन्य सक्रिय सदस्य।

एकजुटता और विकास पर चर्चा

समारोह के दौरान नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत में क्षेत्र की समस्याओं और विकास की गति पर भी चर्चा की। उमेश कुमार राम ने कहा, “सकरा की जनता का प्रेम और महागठबंधन के साथियों का सहयोग ही हमारी असली शक्ति है। हम होली के इन रंगों की तरह ही समाज के हर तबके को एक साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

वहीं, सी.पी.आई. माले के नेता राजेश रंजन और राजद नेता प्रशांत राज ने संयुक्त रूप से कहा कि इस तरह के आयोजनों से न केवल आपसी संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। नेताओं ने जोर देकर कहा कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है और जनता के हक की लड़ाई मिलकर लड़ेगा।


सकरा में आयोजित यह होली मिलन समारोह न केवल रंगों का उत्सव रहा, बल्कि इसने क्षेत्र में महागठबंधन की जमीनी पकड़ और आपसी सामंजस्य को भी मजबूती से प्रदर्शित करने का बहाना सिद्ध हुआ ।