पटना, 05 जुलाई 2026: बिहार के स्वास्थ्य सिस्टम को सुपरफास्ट और बेहद मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को पटना एम्स का तूफानी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं को बारीकी से परखा और मरीजों की सहूलियत के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर ऐलान किया कि राज्य सरकार पटना एम्स के विस्तार के लिए जल्द ही 24 एकड़ अतिरिक्त भूमि उपलब्ध कराएगी। इस नई जमीन के मिलने से एम्स में लगभग 200 नए बेड बढ़ाए जाएंगे, जिससे मरीजों को अब बेड के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और अस्पताल की रोगी सेवा क्षमता में भारी इजाफा होगा।
पटना एम्स परिसर में रेड कार्पेट पर सुरक्षाकर्मियों और एम्स के निदेशक प्रो० (ब्रिग०) डॉ० राजू अग्रवाल के साथ निरीक्षण के लिए आगे बढ़ते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।
गंभीर मरीजों के लिए बनेगी स्किन स्टोरेज व्यवस्था और मिलेगी जाम से मुक्ति
मुख्यमंत्री ने बर्न वार्ड का दौरा कर वहां इलाज करा रहे गंभीर रूप से झुलसे मरीजों से मुलाकात की, उनका हौसला बढ़ाया और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने डॉक्टरों को निर्देश दिया कि गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के समय पर और बेहतर इलाज के लिए यहां जल्द से जल्द स्किन स्टोरेज (त्वचा भंडारण) की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए। इसके साथ ही मरीजों और उनके परिजनों को यातायात में होने वाली असुविधा को देखते हुए उन्होंने एम्स से लेकर नाथूपुर तक बनने वाली 4-लेन सड़क के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा करने का सख्त निर्देश दिया ताकि लोगों को जाम से पूरी तरह मुक्ति मिल सके।
पटना एम्स के भीतर चिकित्सा व्यवस्थाओं और सुविधाओं की बेहतरी को लेकर एक महिला डॉक्टर से विस्तृत फीडबैक लेते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।
एम्स का तालाब बनेगा पर्यटन केंद्र, इन हाई-टेक विभागों का हुआ निरीक्षण
अस्पताल परिसर में मौजूद तालाब को लेकर भी मुख्यमंत्री ने एक अनोखा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस तालाब का पूरी तरह से जीर्णोद्धार कर इसे एक खूबसूरत पर्यटन और आकर्षण का केंद्र बनाया जाए, ताकि यह स्थान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों के लिए सुंदर और उपयोगी स्थल बन सके। अपने इस दौरे में मुख्यमंत्री ने न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के पेट-सिटी रूम, स्पेक्ट सिटी रूम, रेडियो फार्मेसी लैब के साथ-साथ ऑन्कोलॉजी डिविजन, एनॉटोमी विभाग और ओ०पी०डी० का भी गहन निरीक्षण किया और वहां दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली।
एम्स के वार्ड में बेड पर भर्ती एक बीमार बच्चे का हालचाल जानते, उसकी मां का ढांढस बंधाते और डॉक्टर से इलाज की जानकारी लेते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।
मौके पर मौजूद रहे ये आला अधिकारी
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि, स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव अरविंद कुमार चौधरी, बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बी०एम०एस०आई०सी०एल०) के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन, एम्स के निदेशक प्रो० (ब्रिग०) डॉ० राजू अग्रवाल समेत कई वरिष्ठ डॉक्टर और अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
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पूर्व मुखिया सतीश पासवान ने नगर पंचायत अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों से इसे ‘मुक्ति धाम‘ के रूप में विकसित किए जाने की मांग की !
विशेष रिपोर्ट : एस. एस. कुमार ‘पंकज’
सकरा (मुजफ्फरपुर) : सकरा प्रखंड मुख्यालय से महज 100 मीटर दक्षिण स्थित श्मशान घाट इन दिनों न सिर्फ भूमाफिया की गिद्ध दृष्टि का शिकार है, बल्कि अब वहां कुछ ऐसा घटित हुआ है जिसने सनसनी फैला दी है। श्मशान की जमीन की अवैध खरीद-बिक्री, बेतरतीब अतिक्रमण और वहां बहाए जा रहे गंदे नाले के कड़वे सच को उजागर करने पहुंचे पत्रकार के कैमरे में एक ऐसी मानव छायाकृति कैद हुई है, जिसे देखकर लोगों में कौतुहल हैं और चर्चा तरह तरह की हैं। लेकिन न्यूज़ भारत टीवी इस तस्वीर को न कोई तूल देती है, और न हीअंधविश्वास को बढ़ावा देने की मंशा रखती है।
शुक्रवार की शाम 4 बजे कैमरे में कैद हुआ यह मंजर
पूरा मामला बीते शुक्रवार का है, जब न्यूज भारत टीवी के पत्रकार कुमार ‘पंकज’ श्मशान की कीमती जमीन को दलालों द्वारा हेराफेरी कर बेचने, अतिक्रमण करने और श्मशान के बीचों-बीच से गंदा नाला चीर कर बहाने के गंभीर मामले की ग्राउंड रिपोर्टिंग (कवरेज) करने गए थे। संध्या के 4 बज रहे थे और पूरा श्मशान परिसर पूरी तरह सुनसान और खाली था और एक चिता जल रही थी । पत्रकार द्वारा वहां की दुर्दशा को दिखाने के लिए कुल 10 तस्वीरें ली गईं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस समय तस्वीरें खींची जा रही थीं, उस समय वहां कोई भी मौजूद नहीं था। लेकिन आज जब पत्रकार कुमार पंकज ने श्मशान की बदइंतजामी और दलालों के कारनामों पर खबर लिखने की शुरुआत की और सबूत के तौर पर तस्वीरों को खंगालना शुरू किया, तो उनके होश उड़ गए। तस्वीरों में से 1 तस्वीर में एक साफ-साफ न दिखने वाली, लेकिन स्पष्ट मानव जैसी बैठी हुई छायाकृति दिखाई दे रही है, जिसे स्थानीय लोग, अब इसका तरह तरह का मतलब निकाल रहे हैं।
रहस्यमयी आकृति: पत्रकार के कैमरे में कैद हुई एक अस्पष्ट छाया, जिसे लेकर स्थानीय लोग तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं. हालाँकि एक्सपर्ट्स इसे तकनीकी खामी मानते हैं.
क्या कहते हैं फोटो कैमरा के एक्सपर्ट :कैमरे में कैद हुई इस धुंधली आकृति को किसी अंधविश्वास, अलौकिक शक्ति या रहस्य से जोड़कर देखना पूरी तरह भ्रामक होगा। वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से, तेज धूप या शाम के ढलते समय (विशेषकर संध्या 4 बजे) खुले आसमान के नीचे तस्वीरें खींचते समय अक्सर लेंस फ्लेयर , प्रकाश के अपवर्तन या रोशनी और परछाई के खेल के कारण ऐसी आकृतियां उभर आती हैं। कैमरे के लेंस पर पड़ने वाली सीधी रोशनी या कैमरे के हिलने की वजह से भी कई बार तस्वीरों में इंसानी साये जैसी तकनीकी खामियां दर्ज हो जाती हैं। अतः इसे किसी रहस्यमयी घटना के बजाय पूरी तरह से एक सामान्य तकनीकी त्रुटि या कैमरे की खामी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
मुख्य समाचार :
सकरा में मासूमों के श्मशान पर गिद्ध दृष्टि, ढूह मिटाकर कर दी प्लॉटिंग
सकरा प्रखंड मुख्यालय के आसपास की जमीन की कीमत आसमान छू रही है। यहां लाखों रुपए प्रति कट्टा की दर से जमीन बिकने की बात लगातार सामने आती रहती है। इसी लालच में कई सफेदपोश और दलाल अब श्मशान की जमीन को अपनी पूर्वजों की संपत्ति बताकर हड़पने का दावा कर रहे हैं। श्मशान की चहारदीवारी न होने का पूरा फायदा उठाया जा रहा है, जिससे इसकी सटीक लंबाई-चौड़ाई का पता ही नहीं चल पाता है। मानक के विपरीत जाकर श्मशान के आसपास बेतरतीब ढंग से भारी मिट्टी कटाई भी की गई है।
सकरा के इस श्मशान में दो प्रकार के श्मशान की व्यवस्था रही है। छोटे बच्चों के लिए प्रखंड कार्यालय के दक्षिण पूर्व में महदेईया पोखर के पास सटा हुआ श्मशान है। यहाँ बच्चों के शवों को सीधे मिट्टी में दफनाया जाता था। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि 8 से 10 वर्ष पहले तक लोग अपने बच्चों के चिता स्थल के ढूह (मिट्टी का टीला) को देखकर पहचान जाते थे कि यहाँ उनके बच्चे की समाधि है। लेकिन दलालों की नजर पड़ते ही बच्चों के श्मशान की मिट्टी को समतल कर दिया गया ताकि कब्रों का नामोनिशान मिटाया जा सके। कुछ नेता किस्म के लोग अपने पावर और पहुंच के कारण बच्चे वाले इस श्मशान पर गिद्ध दृष्टि गड़ाए हुए हैं और वहां बकायदा रास्ता निकालकर और प्लॉटिंग कर जमीन बेचने की पूरी जुगत लगाई जा रही है।यदि समय रहते प्रशासन कारवाई नहीं करती है, तो कुछ माह में ही यहां, मकान बनते देर नहीं होगी,
श्मशान की पवित्र भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण कर नेनुआ (बाएँ), केला और अमरूद (दाएँ) उगाने की शर्मनाक तस्वीरें सामने आई हैं.
चिता स्थल उजाड़कर उगाई जा रही है सब्जी, बह रहा गंदा नाला, बना दिया सोख्ता
बच्चों के श्मशान से ठीक पश्चिम , सयाने और वयस्क लोगों के लिए श्मशान स्थित है, जहाँ चिता दहन किया जाता है। स्थिति यहां भी गंभीर है । अब जब भी यहाँ कोई दाह संस्कार करने आता है, तो अतिक्रमणकारी के साथ झड़प होने की स्थिति उत्पन्न हो जाती हैं। हद तो तब हो गई जब श्मशान से सटे एक विद्यालय संचालक द्वारा श्मशान की भूमि पर खुलेआम अतिक्रमण का मामला सामने आया। पूरब एवं उत्तर कोण पर विद्यालय संचालक ने श्मशान की पवित्र भूमि को चीरकर बीचों-बीच एक गंदा नाला बहा दिया है, जिससे हर तरफ बदबू और गंदगी पसरी है। इतना ही नहीं, चिता स्थल को उजाड़कर वहाँ केला, अमरूद और सब्जियों की खेती की जा रही है। वर्तमान में बांस का ढाट लगाकर नेनुआ की खेती करने की शर्मनाक तस्वीर भी सामने आई है। श्मशान की भूमि पर एक पक्का सोखता बनाए जाने को लेकर पूर्व में भी विवाद हुआ था, लेकिन इस टैंक को विद्यालय संचालक ने अब तक नहीं हटाया है, जो आने वाले समय में यहाँ किसी बड़े संघर्ष का कारण बन सकता है। प्रखंड प्रशासन द्वारा मापी कराए जाने पर यह अतिक्रमण पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा।
“हमारा दायित्व केवल स्कूल की बाउंड्री के भीतर तक सीमित है, बाहर की गतिविधियों से कोई सरोकार नहीं” — स्कूल संचालक सपनजीत देव
श्मशान की भूमि के एक हिस्से पर कथित उपभोग, खेती और नाला निर्माण के मामले पर स्कूल संचालक सपनजीत देव ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनके विद्यालय की बाउंड्री वॉल पूरी तरह तय है और प्रबंधन का सरोकार केवल अपनी चहारदीवारी के अंदर की व्यवस्था से है। बाउंड्री के बाहर आगे-पीछे क्या गतिविधियां चल रही हैं, इससे स्कूल का कोई लेना-देना नहीं है।
सार्वजनिक भूमि पर उगी फसलों पर प्रतिक्रिया: परिसर के पिछले हिस्से में हो रही केला, अमरूद और अन्य सब्जियों की खेती के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से एक सार्वजनिक स्थल (श्मशान) है। यदि वहां कोई पेड़-पौधे या फसलें उगी भी हैं, तो वे किसी की निजी संपत्ति नहीं हो सकतीं। श्मशान जैसी जगहों पर उगे फल-सब्जियों पर किसी एक व्यक्ति का एकाधिकार नहीं होता, बल्कि वह सार्वजनिक संपत्ति है जिसे कोई भी उपयोग में ला सकता है।”
पवित्रता पर प्रहार: दो अलग-अलग कोणों से दिखता एक लम्बा, कच्चा नाला: श्मशान की भूमि को चीरकर बीचों-बीच बहाया गया गंदा नाला, जिससे दुर्गंध और गंदगी फैल रही है.
पुराने नाले और कब्ज़े के दावों पर पक्ष: श्मशान के बीच से गुजरने वाले लंबे नाले और अन्य निर्माणों के सवाल पर सपनजीत देव ने कहा कि वह स्वयं यहां साल 2018 में आए थे। यह नाला कोई नया निर्माण नहीं है, बल्कि कम से कम 20 साल पुराना है जो उनके यहां आने के काफी पहले से मौजूद है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि किसी सार्वजनिक स्थल या व्यवस्था में कहीं कोई त्रुटि या दिक्कत है, तो उसे आपसी समझ से ठीक कर लिया जाना चाहिए।
हांलाकि कुछ माह पूर्व फरवरी 2026 में पत्रकार कुमार पंकज के द्वारा उक्त स्थल पर खबर लिखने के उद्देश्य से विडियो कैप्चर किया गया था, उसमें उक्त नाला कहीं नहीं दिख रहा है, नाला हाल का खुदा है, और इसकी मिट्टी ताजी है
उन्होंने अंत में दोहराया कि यह एक सामाजिक विषय है जिसका निदान भी सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए, क्योंकि स्कूल प्रबंधन सिर्फ अपने निर्धारित दायरे के भीतर ही जिम्मेदार है।
विवादित निर्माण: बाएँ ज़मीन में दबा कंक्रीट का हिस्सा (सर्कल में), दाएँ: एक पत्थर को उठाते लोग.श्मशान भूमि पर बनाया गया पक्का सोखता (बाएँ), जिस पर पूर्व में भी विवाद हुआ था. इसे ‘कपड़ा साफ़ करने का पत्थर’ (दाएँ) भी कहा जा रहा है.
श्मशान भूमि पर अतिक्रमण के आरोपों को केके सर ने नकारा, कहा- “वहाँ सब कुछ लावारिस, नापी के बाद ही साफ होगी स्थिति”
कृष्ण कुमार (केके सर का पक्ष): श्मशान की जमीन पर अतिक्रमण, टैंक निर्माण और पेड़-पौधे लगाने के आरोपों पर श्मशान के सटे हॉस्टल संचालक कृष्ण कुमार (के के सर) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं और श्मशान में मौजूद चीजें किसी व्यक्ति विशेष की नहीं हैं। उनके बयान के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:
अतिक्रमण की बानगी(फाइल फोटो) : एक तरफ खेत में खड़ी गोभी की फसल और दूसरी तरफ भीड़भाड़.आरोप है कि चिता स्थल को उजाड़कर वहाँ सब्जियों की खेती (बाएँ) की जा रही है. ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताई (दाएँ).
सब कुछ लावारिस है, मेरा कोई अधिकार नहीं: श्मशान भूमि पर केला, अमरूद या अन्य चीजें होने के सवाल पर केके सर ने कहा, “वहाँ सब कुछ लावारिस है। अमरूद का पेड़ किसी ने रोपा नहीं है, बल्कि बच्चों द्वारा खाकर बीज फेंकने से वह खुद उग आया है।” उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उस जमीन या वहां मौजूद चीजों पर उनका कोई व्यक्तिगत अधिकार नहीं है।
टैंक नहीं, कपड़ा साफ करने का पत्थर है: श्मशान में किसी टैंक या टंकी के होने की बात को खारिज करते हुए केके सर ने बताया कि वह कोई टैंक नहीं है। वह केवल एक सोझा पत्थर है, जिसका उपयोग लोग कपड़ा आदि साफ करने के लिए करते हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि कोई भी उसे उठाकर देख सकता है, उसमें कोई टंकी नहीं बनी है।
अतिक्रमण के आरोपों पर दी खुली छूट: अतिक्रमण के सवाल पर उन्होंने कहा, “मैंने वहाँ कोई अतिक्रमण नहीं किया है। प्रशासन या जनता वहां आ कर उसकी नापी करवा सकती है और उसे उझार (हटा) सकती है, मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।”
जमीन की स्थिति और नापी पर जोर: केके सर के अनुसार, वह श्मशान भूमि अभी भी पूरी तरह सरकारी नहीं हुई है और वह निजी संपत्ति की तरह है। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासनिक स्तर पर इसकी सही नापी नहीं होती, तब तक यह कहना मुश्किल है कि कौन सी जगह किसकी है। नापी के बाद ही पता चलेगा कि जमीन आनंद मार्ग संस्था की है, पब्लिक की है या किसी अन्य की।
सकारात्मक पत्रकारिता की अपील: उन्होंने पत्रकार से बातचीत में कहा कि श्मशान जैसी परती जगहों पर प्रकृति द्वारा पेड़-पौधे उगने को सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए ताकि समाज और बच्चों को इसका लाभ मिल सके।
श्मशान की बदहाली: एक उजाड़, सूखी ज़मीन का दृश्य जहाँ कचरा बिखरा है (सर्कल में शौचालय का नाला )एवं गन्दगी के आगोश में स्मारक, सकरा प्रखंड मुख्यालय के पास स्थित मुख्य श्मशान घाट, जहाँ सुविधाओं का घोर अभाव है और हर तरफ गंदगी पसरी है.
कृष्ण कुमार (केके सर) ने स्पष्ट किया है कि श्मशान के मामले में उनका कोई व्यक्तिगत हित या लोभ नहीं है। मामला श्मशान की प्रॉपर्टी और निजी दावों के बीच का है, जिसे उचित मापी के द्वारा ही सुलझाया जा सकता है।
महदेईया पोखर की जमीन भी दलालों ने 14 टुकड़ों में बेची, सिर्फ हवा या सच , जांच है जरूरी,
श्मशान से सटे पूरब महदेईया पोखर को भी भूमाफिया निगल चुके हैं। नाम न छापने की शर्त पर सबहा गांव के एक जमीन के धंधे से जुड़े व्यक्ति ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उसने बताया कि भूमाफिया ने इस पोखर की जमीन में जबरन रास्ता निकालकर इसे 14 टुकड़ों में बांटकर प्लॉटिंग कर दी है और इसे बेच डाला है।
भूमाफिया के निशाने पर पोखर: श्मशान से सटे महदेईया पोखर (कृषि फॉर्म का हिस्सा), जिसे लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं.
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पहले इस पोखर की देखरेख सकरा कृषि फॉर्म के द्वारा की जाती थी। लेकिन बीते वर्ष के दौरान सकरा फॉर्म ने अपनी चहारदीवारी (बाउंड्री वाल) के निर्माण के समय इसे बाउंड्री से बाहर छोड़ दिया। बाउंड्री से बाहर होते ही दलालों की नजर इस पर लग गई। पिछले 10 वर्षों के दौरान सकरा फॉर्म के द्वारा पोखर पर से अपना दावा छोड़ने और उसे माफियाओं के हवाले करने की भूमिका अत्यंत संदेहास्पद मानी जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि प्रखंड प्रशासन और उच्च अधिकारी इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तफ्तीश और मापी करवाएं, तो करोड़ों रुपए के इस महाघोटाले और श्मशान-पोखर की लूट का पर्दाफाश हो जाएगा।
श्मशान जाने का मार्ग अवरुद्ध!: छठ पूजा के समय छठ व्रती को पोखर पर जाने में अब हो रही है कठिनाई,
भूमाफिया की गिद्ध दृष्टि सिर्फ चिता स्थलों तक ही सीमित है लेकिन यहां रास्ता अवरूद्ध होने का कारण प्रशासन के द्वारा नये निर्माण में रास्ते की अनदेखी हैं, गौरतलब है कि सकरा कृषि फॉर्म की चहारदीवारी (बाउंड्री वाल)बनने से पूर्व महदेईया पोखर के बगल से एवं इस श्मशान के बिल्कुल बीचों-बीच से होकर एक मुख्य रास्ता गुजरता था, जो आज प्रशासनिक उपेक्षा के कारण सिमटकर महज एक संकरी पगडंडी के रूप में तब्दील हो गया है। यह पगडंडी कोई आम रास्ता नहीं, बल्कि दो प्रमुख गांवों— सबहा एवं सकरा फरीदपुर गांव की ऐतिहासिक सीमा रेखा (बाउंड्री लाइन) भी है। अब इस रास्ते को दोनों ओर से सोची-समझी साजिश के तहत बंद कर दिया गया है। श्मशान में पूर्व दिशा से प्रवेश करने वाले मुख्य रास्ते पर सकरा कृषि फॉर्म ने अपनी चहारदीवारी (बाउंड्री वाल) खड़ी करवाकर रास्ता पूरी तरह से अवरुद्ध (ब्लॉक) कर दिया है। वहीं दूसरी ओर, पश्चिम दिशा में ठीक बीच रास्ते पर किसान भवन का निर्माण करा दिया गया है, जिससे श्मशान का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है। वर्तमान में लोग किसी तरह किसान भवन के बगल से श्मशान में प्रवेश करते हैं।सकरा कृषि फॉर्म के द्वारा रास्ते पर ही चहारदीवारी बना दिए जाने के कारण , हाल के वर्षों में छठ पूजा के समय पोखर के पूरब एवं उत्तर की दिशा से आने वाले छठ व्रती को अर्घ्य देने के लिए पोखर पर जाने में भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है,
कृषि फॉर्म की बाउंड्री: सकरा कृषि फॉर्म द्वारा बनाई गई बाउंड्री वाल, जिसने श्मशान के ऐतिहासिक रास्ते को अवरुद्ध (ब्लॉक) कर दिया है.
इस गंभीर और संवेदनशील मामले में अब जिला और प्रखंड प्रशासन को अविलंब दखल देना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह दोनों ओर से श्मशान के इस ऐतिहासिक रास्ते को सरकारी कागजातों के अनुसार पूरी तरह से नियत (चिह्नित) करे, और अतिक्रमणकारियों को खदेड़े । दाह संस्कार के लिए आने वाले लोगों की सहूलियत के लिए यहाँ कम से कम एक पक्के सोलिंग युक्त (ईंट सोलिंग) रास्ते का निर्माण जल्द से जल्द करवाए ताकि मृत आत्माओं के अंतिम सफर में अवरोध पैदा न हो।
4 वर्षों में एक हैंडपंप तक नहीं दे सकी सकरा नगर पंचायत, श्मशान घाट पर सुविधाओं का घोर अभाव
बताते चलें कि यह बदहाल श्मशान घाट सकरा प्रखंड मुख्यालय से महज 100 मीटर दक्षिण में स्थित है। विडंबना देखिए कि जिस प्रखंड मुख्यालय के बंद कमरों में पूरे इलाके के श्मशानों और कब्रिस्तानों की चहारदीवारी (बाउंड्री वाल) निर्माण की योजनाएं बनती हैं, उसी प्रशासन की नाक के नीचे इस मुख्य श्मशान की हालत आज भी बद से बदतर बनी हुई है। पूर्व में ग्रामीण व्यवस्था के तहत स्थानीय स्तर पर इस श्मशान की देखरेख की जिम्मेदारी पंचायत के जिम्मे थी, लेकिन यहां वर्तमान नगर पंचायत प्रशासन और पूर्व मुखियाओं ने कभी इस पवित्र स्थल की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। हद तो तब हो गई जब प्रशासनिक बदलाव के बाद अब यह पूरा इलाका नगर पंचायत के गठन के साथ ही सकरा नगर पंचायत के अंतर्गत आ गया। अब इसके विकास, देखरेख और संपूर्ण प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी सीधे तौर पर नगर पंचायत प्रशासन की है। लेकिन नगर पंचायत सकरा बीते 4 वर्षों के लंबे कार्यकाल में इस अति महत्वपूर्ण श्मशान घाट में दाह संस्कार के लिए आने वाले लोगों के लिए पेयजल हेतु एक अदद हैंडपंप (चापाकल) और धूप-बारिश से बचने के लिए एक अदद शेड (छायादार शेड) तक की व्यवस्था नहीं कर सकी है। जीवित इंसानों के हक को मारने वाली व्यवस्था अब मृत आत्माओं और शोकाकुल परिजनों के बुनियादी अधिकारों पर भी डाका डाल रही है, जो कि अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय है।
भूमाफिया के निशाने पर: सकरा प्रखंड मुख्यालय के पास स्थित मुख्य श्मशान घाट का विहंगम दृश्य
सकरा नगर पंचायत में एक शव वाहन तक नसीब नहीं; गंडक घाट जाने वाले गरीबों का उड़ाया जा रहा मखौल!
नगर पंचायत प्रशासन ने कूड़ा उठाने और साफ-सफाई के लिए लाखों रुपए की लागत से बड़े-बड़े टीपर और ठेला गाड़ियों की फौज तो खड़ी कर ली, लेकिन हद दर्जे की संवेदनहीनता देखिए कि इस नगर पंचायत के पास आज तक गरीबों की सहूलियत के लिए एक अदद शव वाहन (एम्बुलेंस/डेड बॉडी वैन) तक की व्यवस्था करने की फुर्सत नहीं मिली। बताते चलें कि इस इलाके के बहुत सारे लोग अपने परिजनों के शवदाह के लिए समीप के पवित्र गंडक घाट पर जाते हैं। ऐसे में जिन संपन्न लोगों के पास अपनी गाड़ियों की व्यवस्था होती है, वे तो आसानी से चले जाते हैं; लेकिन असली मुसीबत उन बेबस और लाचार गरीबों पर टूटती है जिनके पास कोई साधन नहीं होता। संसाधन विहीन गरीब परिवार के लोग अपनों की लाश को ठेले, ऑटो या अन्य निजी साधनों पर लादकर, भारी किराया फूंककर बेहद अपमानजनक स्थिति में गंडक घाट ले जाने को मजबूर हैं, लेकिन नगर पंचायत के अधिकारियों को क्या एक अदद शव वाहन की जरूरत कभी महसूस नहीं हुई? यह पूरी व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है । नगर पंचायत सकरा के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को संज्ञान लेना चाहिए कि जिस जनता ने इन्हें मलाईदार कुर्सी पर बैठाया, आज उसी जनता के शवों को अंतिम यात्रा के लिए सम्मानजनक वाहन तक नसीब नहीं हो रहा है।
कब जागेगा सोया हुआ तंत्र?
सकरा प्रखंड मुख्यालय की नाक के नीचे चल रहा यह पूरा खेल महज़ जमीन की अवैध खरीद-बिक्री या अतिक्रमण का मामला नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था की संवेदनहीनता और नैतिक पतन की पराकाष्ठा है। जो समाज अपने नौनिहालों की समाधियों को सुरक्षित न रख सके और जो तंत्र मृत आत्माओं के अंतिम सफर को सम्मान न दे सके, उसकी तरक्की और दावों पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा होना लाज़मी है।
कैमरे में कैद हुई वह रहस्यमयी परछाई कोई अंधविश्वास हो या न हो, लेकिन वह इस श्मशान की दुर्दशा पर रोती और इंसाफ मांगती मानवीय संवेदनाओं की चीख ज़रूर है।
क्या सकरा के पूर्व मुखिया और वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष महोदय अपनी इस ऐतिहासिक विफलता की ज़िम्मेदारी लेंगे? क्या जिला प्रशासन सकरा कृषि फॉर्म की ऐतिहासिक महदेईया पोखर के 14 टुकड़ों में हुए सौदे और श्मशान की भूमि पर बहते गंदे नाले की उच्च स्तरीय जांच करवाएगा?
सवाल कई हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या गरीबों के शवों को गंडक घाट ले जाने के लिए एक अदद शव वाहन और छठ व्रतियों के लिए रास्ता नसीब होगा? न्यूज़ भारत टीवी इस पर अपनी पैनी नज़र बनाए हुए है। अब देखना यह है कि इस ग्राउंड रिपोर्ट के बाद भी प्रशासन गहरी नींद में सोया रहता है या फिर इन रसूखदार भूमाफियाओं के खिलाफ कोई सख्त और दंडात्मक कार्रवाई कर मृत आत्माओं और जीवित इंसानों को उनका हक वापस दिलाता है।
जनता की आवाज़: सकरा के पूर्व मुखिया सतीश पासवान, जिन्होंने श्मशान के विकास और रास्ते को बहाल करने की ज़ोरदार माँग की है.
पूर्व मुखिया सतीश पासवान का वक्तव्य: पूर्व मुखिया सतीश पासवान ने बताया कि 2011 से उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने मनरेगा के तहत सड़क किनारे पेड़ लगवाकर और मिट्टीकरण का कार्य शुरू कर इस मार्ग को विकसित करने का प्रयास किया था।
“यह श्मशान सकरा बाजार और आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले सभी समुदायों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। रास्ता बंद होने के कारण लोगों को शव ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।” – सतीश पासवान
प्रशासन से मांग: सतीश पासवान ने नगर पंचायत अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि:
सरकारी नक्शे के अनुसार 16 फीट चौड़ी सड़क का अविलंब निर्माण कराया जाए।
कृषि बीज गुणन केंद्र के निदेशक से बात कर बाधित मार्ग को खुलवाया जाए।
श्मशान घाट को एक आधुनिक ‘मुक्ति धाम‘ के रूप में विकसित किया जाए जहाँ पानी और बैठने की समुचित व्यवस्था हो।
— ब्यूरो रिपोर्ट, न्यूज़ भारत टीवी।
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नालंदा: बिहार की धरती एक बार फिर प्राचीन गौरव के रहस्यों से पर्दा उठा रही है। नालंदा जिला के एकंगरसराय प्रखंड के तेलहाड़ा गांव में चल रही खुदाई ने एक सनसनीखेज खोज की है – प्रथम सदी के तिलाधक विश्वविद्यालय के अवशेष! यह खोज न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश के इतिहास के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
अधिकारियों ने लिया जायजा: जिलाधिकारी उदिता सिंह ने खुद इस ऐतिहासिक खोज का संज्ञान लेते हुए तेलहाड़ा गांव स्थित उत्खनन स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने पुरातात्विक अवशेषों का बारीकी से जायजा लिया और उनकी महत्ता को समझा। उनके साथ पुरातात्विक विभाग के विशेषज्ञ और स्थानीय अधिकारी भी मौजूद थे।
तेलहाड़ा गांव में पुरातात्विक अवशेषों का जायजा लेतीं जिलाधिकारी उदिता सिंह, अधिकारी और पुरातात्विक विभाग के विशेषज्ञ।
दुर्लभ खजाना मिला: खुदाई के दौरान मिली सामग्रियों ने विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। तिलाधक विश्वविद्यालय के अवशेषों के साथ-साथ सैकड़ों दुर्लभ मूर्तियां, शिलालेख और अन्य बहुमूल्य पुरातात्विक वस्तुएं मिली हैं। ये अवशेष इस विश्वविद्यालय की भव्यता और प्राचीन काल में ज्ञान और शिक्षा के केंद्र के रूप में इसकी महत्ता को दर्शाते हैं।
दस्तावेजीकरण और संरक्षण के निर्देश: जिलाधिकारी उदिता सिंह ने इस खोज की ऐतिहासिक महत्ता को समझते हुए अधिकारियों को इस दुर्लभ खजाने के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने इन पुरातात्विक अवशेषों की एक व्यापक डाक्यूमेंट्री तैयार करने का भी आदेश दिया, ताकि इस खोज के बारे में विश्व भर में जानकारी दी जा सके।
बौद्ध सर्किट से जोड़ने की मांग: इस प्राचीन विश्वविद्यालय की खोज ने स्थानीय लोगों में उत्साह भर दिया है। उन्होंने इस स्थल को बौद्ध पर्यटन सर्किट से जोड़ने की मांग उठाई है, जिससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर के महत्व को भी मान्यता मिलेगी। स्थानीय स्तर पर एक संग्रहालय विकसित करने की भी मांग की जा रही है, जहां इन दुर्लभ अवशेषों को प्रदर्शित किया जा सके।
एक नया अध्याय: तेलहाड़ा में मिला तिलाधक विश्वविद्यालय का यह खजाना प्राचीन भारत की समृद्ध संस्कृति और शिक्षा प्रणाली के बारे में नए तथ्यों को सामने लाएगा। यह खोज इतिहास के पन्नों को एक बार फिर पलटने और प्राचीन ज्ञान के भंडार को समझने के लिए प्रेरित करेगी।
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भारत-नेपाल सीमा पर अवैध और आर्थिक अपराधों से जुड़ी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाने का सख्त निर्देश।
सभी चेकपोस्टों से 15 किलोमीटर के दायरे में होगी ताबड़तोड़ और प्रभावी निगरानी।
खाद और नशीले पदार्थों की तस्करी को कुचलने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) करेंगे मिलकर काम।
सीमावर्ती इलाकों में जिन लोगों की संपत्ति अचानक रहस्यमयी ढंग से बढ़ी है, उनका कुंडली खंगालेगी पुलिस।
किशनगंज जिले में उर्दू विद्यालयों की स्थापना के लिए 100 उपयुक्त स्थानों को चिन्हित करने का आदेश।
चप्पे-चप्पे पर होगी निगरानी, अपराधियों की खैर नहीं
पटना, 3 जुलाई: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और विकास को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री सचिवालय के ‘संवाद’ कक्ष में आयोजित इस बैठक में उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर किसी भी प्रकार का अवैध, अनैतिक या आर्थिक अपराध बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दोनों देशों के बीच के बेहतर रिश्तों को बरकरार रखते हुए सीमा क्षेत्र की हर गतिविधि पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जाए।
बिहार से सटी भारत-नेपाल सीमा की कुल लंबाई 735 किलोमीटर है, जिसके तहत राज्य के 7 जिले, 70 पुलिस थाने और एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) की 194 बीओपी (बॉर्डर आउटपोस्ट) आते हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सभी चेकपोस्टों से 15 किलोमीटर के दायरे के भीतर सुरक्षा और चौकसी का जाल इस कदर बिछाया जाए कि कोई भी अपराधी बचकर न निकल सके।
अचानक रईस बनने वालों की अब खैर नहीं, थानों में बनेगी स्पेशल टीम
इस बैठक का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला आर्थिक अपराधों और संदिग्ध कमाई को लेकर रहा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आदेश दिया है कि सीमावर्ती जिलों के सभी थानों में एक विशेष टीम (स्पेशल टीम) का गठन किया जाए। यह टीम जमीनी स्तर पर ऐसे संदिग्ध लोगों की पहचान और सत्यापन करेगी, जिनकी आय के ज्ञात स्रोतों की तुलना में अचानक बहुत ज्यादा और असामान्य बढ़ोतरी हुई है। ऐसे रडार पर आए लोगों की पूरी जानकारी इकट्ठा की जाएगी और उनके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही, उर्वरक (खाद) और मादक पदार्थों की तस्करी को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों को नियमित रूप से समन्वय बैठकें करने के लिए कहा गया है।
डिजिटल डैशबोर्ड और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े 7 जिलों के कप्तान
बैठक में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भारत-नेपाल सीमा प्रबंधन और इससे जुड़े विभिन्न संवेदनशील मुद्दों पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण (प्रेजेंटेशन) दिया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बॉर्डर एरिया के सभी 7 जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक इस बैठक से लाइव जुड़े हुए थे। किशनगंज, मधुबनी और पश्चिम चम्पारण के जिलाधिकारियों तथा पुलिस अधीक्षकों ने पहले दिए गए निर्देशों पर की गई बड़ी कार्रवाइयों की रिपोर्ट मुख्यमंत्री के सामने रखी और अपने अहम सुझाव साझा किए। इसके अलावा एसएसबी, आईबी, ईडी, एनसीबी, कस्टम्स और इनकम टैक्स के आला अधिकारियों ने भी अपनी-अपनी रिपोर्ट और सुझाव पेश किए।
बैठक में साइबर अपराध, अतिक्रमण, नागरिकता से जुड़े मामले, सीमाई इलाकों के पेंडिंग काम और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी लंबी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री के स्तर पर, मुख्यमंत्री के स्तर पर, मुख्य सचिव और डीजीपी के स्तर पर लगातार ऐसी बैठकें होती रही हैं, जिससे कई बड़े कामों को पूरा किया जा चुका है। बचे हुए कामों को भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ तेजी से पूरा करने का लक्ष्य है।
बैठक में ये रहे मौजूद
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार, योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव एन विजयलक्ष्मी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर उपस्थित थे।
इनके अलावा मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, गृह विभाग के सचिव कुंदन कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह, पुलिस महानिदेशक (अभियान) कुंदन कृष्णन, गृह विभाग के विशेष सचिव क्षत्रनील सिंह सहित कई अन्य सीनियर पुलिस अधिकारी और केंद्रीय एजेंसियों के आला अफसर मौके पर मौजूद थे। वहीं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल और सीमावर्ती जिलों के सभी डीएम और एसपी जुड़े रहे।
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हडको और नगर विकास विभाग के बीच ऐतिहासिक एमओयू पर हस्ताक्षर, 6,00,000 करोड़ का बाहरी निवेश भी आएगा, किसानों को मात्र 30 दिन में मिलेगा जमीन का पूरा मुआवजा
पटना, 03 जुलाई 2026: बिहार के शहरी विकास के इतिहास में आज तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। राज्य में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे और अत्याधुनिक नागरिक सुविधाओं से लैस 12 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने के लिए एक अभूतपूर्व महा-समझौते पर मुहर लगी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प सभागार’ में बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग तथा हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हडको) के बीच 1,00,000 करोड़ रुपये (एक लाख करोड़ रुपये) के दीर्घकालिक वित्तपोषण के लिए एक महत्वपूर्ण मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया। इस ऐतिहासिक समझौते पर नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार और हडको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय कुलश्रेष्ठ ने हस्ताक्षर किए।
इस महात्वाकांक्षी योजना की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा कि यह समझौता बिहार को आधुनिक शहरी विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में लाकर खड़ा कर देगा। इस विशाल परियोजना के तहत राज्य के लगभग 3 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में अत्याधुनिक टाउनशिप विकसित किए जाएंगे। इस योजना की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी विशेषता यह है कि इसमें किसानों को लैंड पुलिंग के माध्यम से सीधा भागीदार बनाया जाएगा। किसानों के हितों की रक्षा के लिए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है, जिसके तहत मुआवजे के लिए आवेदन करने वाले किसी भी किसान को मात्र 30 दिन के भीतर पूरा भुगतान सुनिश्चित कर दिया जाएगा।
6,00,000 करोड़ का अतिरिक्त निवेश और लाखों रोजगार
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार सरकार 12 नए टाउनशिप को लेकर हडको के माध्यम से 1,00,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश कर रही है। इसके अलावा, इस परियोजना की साख को देखते हुए 6,00,000 करोड़ रुपये का विशाल निवेश बाहरी और निजी संस्थागत स्रोतों से आकर्षित किया जाएगा। इस बड़े पैमाने पर होने वाली निर्माण गतिविधियों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बिहार के लाखों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नई और तेज गति मिलेगी। सरकार ने इस ऐतिहासिक पहल के जरिए राज्य में 35 प्रतिशत शहरीकरण के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प लिया है।
विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाओं से लैस होंगे नए शहर
इन सभी 12 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को पूरी तरह अत्याधुनिक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप प्लान किया गया है। इनमें विश्वस्तरीय आधुनिक चौड़ी सड़कें, निर्बाध 24 घंटे जलापूर्ति, उन्नत और वैज्ञानिक सीवरेज सिस्टम, विद्युत ग्रिड, विशाल हरित क्षेत्र (पार्क), शानदार शैक्षणिक संस्थान, अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं और वाणिज्यिक व सामाजिक अधोसंरचना जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि बिहारवासियों को अपनी ही धरती पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का शहरी जीवन उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक में मौजूद रहे राज्य के ये दिग्गज अधिकारी
इस उच्च स्तरीय बैठक और हस्ताक्षर समारोह में राज्य के कई शीर्ष नीति-निर्माता और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे। इस खास मौके पर उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, नगर विकास एवं आवास सह सूचना प्रावैधिकी मंत्री नीतीश मिश्रा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार मौजूद रहे।
इनके अतिरिक्त मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव संदीप कुमार आर पुडकलट्टी, नगर विकास एवं आवास विभाग के विशेष सचिव नीलेश रामचंद्र देवड़े और हडको के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक संजय कुलश्रेष्ठ सहित दोनों विभागों के कई वरीय अधिकारी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। कार्यक्रम के प्रारंभ में विनय कुमार और संजय कुलश्रेष्ठ ने मुख्यमंत्री को हरित पौधा, अंग वस्त्र एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर उनका भव्य स्वागत किया।
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चुनाव जीतने के लिए बांटे 32 लाख राशन कार्ड, अब 57 लाख नाम काटने की तैयारी घोर गरीब विरोधी: ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह
भूमिहीनों को वासभूमि देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई सरकार, अधिकारों के लिए अब सड़कों पर उतरेगा खेग्रामस
ताजपुर/समस्तीपुर, 3 जुलाई 2026 बिहार में गरीबों के राशन कार्ड पर सरकार की ओर से बड़ी कैंची चलाने की तैयारी के खिलाफ, अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) ने सरकार की इस नीति को गरीब विरोधी बताते हुए इसके खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। शुक्रवार को ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर बांसवाड़ी में खेग्रामस द्वारा एक व्यापक सदस्यता अभियान चलाया गया, जिसके तहत आयोजित बैठक में नेताओं ने सरकार की नीतियों पर जमकर भड़ास निकाली।
90 फीसदी कार्डधारक सूची से हो जाएंगे बाहर: सुरेंद्र बैठक को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने एक चौंकाने वाला और सनसनीखेज दावा किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार केवल 10 हजार रुपये प्रतिमाह कमाने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों का राशन कार्ड रद्द करने का आत्मघाती कदम उठाती है, तो इसका सीधा और घातक असर लगभग 90 प्रतिशत राशन कार्डधारकों पर पड़ेगा। महंगाई के इस दौर में 10 हजार रुपये की आय बेहद मामूली है, और ऐसे परिवारों से मुफ्त या सस्ते अनाज का अधिकार छीनना उन्हें भुखमरी की कगार पर धकेलने जैसा है।
वोट बैंक के लिए हुआ इस्तेमाल, अब गरीबों की पीठ में छुरा: ब्रह्मदेव वहीं दूसरी ओर, किसान नेता ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और चुनावी लाभ लेने के लिए सरकार ने आनन-फानन में 32 लाख परिवारों को नया राशन कार्ड उपलब्ध कराया था। चुनाव खत्म होते ही अब सरकार का असली चेहरा सामने आ गया है। अब 57 लाख से भी अधिक परिवारों का नाम राशन कार्ड की सूची से जबरन हटाने की तैयारी की जा रही है, जो गरीबों और जरूरतमंदों के साथ एक बड़ा धोखा और घोर अन्याय है।
भूमिहीनों को वासभूमि देने में पूरी तरह विफल रही सरकार नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य में भूमिहीन परिवारों को रहने के लिए वासभूमि (आवास के लिए जमीन) उपलब्ध कराने के स्पष्ट कानून मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक लापरवाही और सरकार की नाकामी के कारण आज भी हजारों गरीब परिवार बिना जमीन के जीने को मजबूर हैं। सरकार भूमिहीनों को उनका हक देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि गरीबों, खेत मजदूरों और वंचित तबकों के हक और मान-सम्मान की रक्षा के लिए खेग्रामस का यह संघर्ष अब और भी उग्र रूप लेगा।
जनसमस्याओं को लेकर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार : मोतीपुर बांसवाड़ी की इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल संगठन का विस्तार ही नहीं किया गया, बल्कि राशन कार्ड में कटौती, वासभूमि का संकट, मनरेगा में भ्रष्टाचार, और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी गंभीर जनसमस्याओं को लेकर आने वाले दिनों में एक बड़ा और निर्णायक आंदोलन खड़ा करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।
इस पूरे अभियान और बैठक का नेतृत्व मुख्य रूप से भाकपा (माले) प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रखंड कमिटी सदस्य ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह एवं शंकर महतो ने संयुक्त रूप से किया। मौके पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने एक सुर में सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए बड़ी संख्या में खेग्रामस की सदस्यता ग्रहण की और संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
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‘प्रशिक्षण ले लो वरना सरकार की नजर में हो!‘ – ग्रामीण चिकित्सक एसोसिएशन की बैठक में अध्यक्ष का बड़ा अल्टीमेटम!
सकरा (मुजफ्फरपुर): विजन वैली हॉल सकरा में ग्रामीण चिकित्सक एशोसिएशन की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक ग्रामीण चिकित्सक डॉक्टर राजेश कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में ग्रामीण डॉक्टरों की समस्याओं, उनके हक की लड़ाई और समाज में उनके सम्मान को लेकर जोरदार चर्चा हुई। बैठक में मौजूद चिकित्सकों ने एक सुर में अपने हक के लिए आवाज बुलंद की और खुद को ‘झोलाछाप’ कहे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।
कोरोना काल में जो भगवान थे, उन्हें झोलाछाप कहना बंद करें लोग
बैठक को संबोधित करते हुए ग्रामीण चिकित्सक डॉक्टर राजेश कुमार बेहद भावुक और आक्रामक नजर आए। उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि कुछ बेवकूफ लोग ग्रामीण चिकित्सकों को ‘झोलाछाप’ के नाम से पुकारते हैं। उन्होंने ललकारते हुए कहा, “उनसे मैं पूछना चाहता हूं कि कोरोना काल में झोलाछाप बोलकर देख लिए होते, तो आपकी औकात पता चल जाती। कोरोना काल में तो आप भगवान मान रहे थे कि ग्रामीण चिकित्सक ही भगवान हैं। सारे बड़े-बड़े डॉक्टर तो एसी में पैक थे, घरों से निकल नहीं रहे थे, लेकिन यही ग्रामीण चिकित्सक थे जो अपनी जान पर खेलकर लोगों की जान बचा रहे थे।”
हम ‘झोलाछाप‘ नहीं, समाज के ‘रात्री दूत‘ हैं
डॉक्टर राजेश कुमार ने कहा कि ग्रामीण चिकित्सक असल में समाज के ‘रात्री दूत’ हैं। रात के 2:00 बजे हो या 4:00 बजे, जब पूरा समाज सोया रहता है, तब कोई डॉक्टर अगर उठकर मरीज के घर जाता है, तो वह केवल ग्रामीण चिकित्सक ही है। अमीर लोगों के लिए तो शहर के बड़े अस्पताल हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब परिवारों का एकमात्र सहारा यही चिकित्सक हैं। वे बिना किसी फीस के, बिना किसी महंगी जांच के, बेहद कम पैसों में और कभी-कभी तो बिना पैसे के भी ‘लिख लो, सवेरे दे देंगे’ की बात मानकर मरीजों का इलाज शुरू कर देते हैं।
प्रशिक्षण नहीं लिया तो सरकार की नजर में आ जाओगे: अध्यक्ष का अल्टीमेटम
बैठक के दौरान अध्यक्ष ने सभी ग्रामीण चिकित्सकों को एक बड़ा और कड़ा अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने कहा कि आज का सबसे पहला और मुख्य मुद्दा प्रशिक्षण का है। जितने भी ग्रामीण चिकित्सक प्रैक्टिस कर रहे हैं, अगर उन्होंने कहीं ना कहीं से प्रशिक्षण यानी ट्रेनिंग ली है, तो यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन अगर किसी ने अभी तक प्रशिक्षण नहीं लिया है, तो वे सावधान हो जाएं क्योंकि वे सरकार की नजर में हैं। ऐसे सभी चिकित्सक तुरंत ट्रेनिंग ले लें, यही उनके हक में सबसे ज्यादा अच्छा रहेगा।
हायर सेंटर से लौटे मरीजों का सहारा भी ग्रामीण चिकित्सक ही
बैठक में यह बात भी उठाई गई कि जब मरीज शहर के बड़े अस्पतालों (हायर सेंटर) से वापस घर लौटते हैं, तो वहां के बड़े डॉक्टर सिर्फ दवाइयां, सुई और सलाइन (पानी) लिख देते हैं। लेकिन गांव में जाकर उस मरीज को सुई देने, आईवी लगाने या दवा समझाने के लिए कोई सरकारी कर्मचारी या बड़ा डॉक्टर नहीं आता। अगर ग्रामीण चिकित्सक आज अपनी प्रैक्टिस बंद कर दें, तो शहर के डॉक्टरों की पर्ची धरी की धरी रह जाएगी और मरीजों को पानी कौन चढ़ाएगा? इन्हीं ग्रामीण चिकित्सकों की बदौलत आज ग्रामीण समाज में मरीज पूरी तरह सुरक्षित हैं।
कांवरियों की सेवा के लिए तुर्की में लगेगा निस्वार्थ कैंप
बैठक का दूसरा बड़ा मुद्दा सावन मेला को लेकर था। निर्णय लिया गया कि बाबा गरीबनाथ धाम जाने वाले कांवरियों की सेवा के लिए ग्रामीण चिकित्सकों की एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा। ये सभी चिकित्सक तुर्की में एक विशाल कैंप लगाएंगे और कांवरियों की निस्वार्थ और निष्भाव से सेवा करेंगे। इस कैंप में डॉक्टर अपना समय भी देंगे और इलाज का सारा खर्चा भी खुद अपनी जेब से उठाएंगे।
हर महीने की 3 तारीख को होगी मजबूती के लिए बैठक
तीसरे मुद्दे के रूप में संगठन की मजबूती पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉक्टर राजेश कुमार ने कहा कि संगठन है तो मजबूती है और हर मजबूती के लिए एक मजबूत संगठन की जरूरत पड़ती है। इसी मजबूती को बनाए रखने के लिए तय किया गया कि आगामी बैठक 3 अगस्त को होगी। टीम के सभी सदस्यों के विचार से यह फैसला लिया गया कि हर महीने की 3 तारीख को ही संगठन की नियमित बैठक रखी जाएगी। हालांकि, यदि किसी सदस्य के साथ कोई आपातकालीन स्थिति या घटना-दुर्घटना होती है, तो आपसी विचार-विमर्श से इस तारीख को आगे-पीछे भी किया जा सकता है।
बैठक में ये मुख्य चिकित्सक रहे उपस्थित
इस गर्जनापूर्ण बैठक में मुख्य रूप से डॉक्टर अखिलेश कुमार, डॉक्टर पप्पू कुमार, डॉक्टर सुनील कुमार, डॉक्टर रंजन कुमार, डॉक्टर चुनमुन कुमार दास, डॉक्टर चुनमुन कुमार और डॉक्टर संजीव कुमार सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण चिकित्सक मौजूद रहे, जिन्होंने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अध्यक्ष की बातों का समर्थन किया।
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पटना, 02 जुलाई 2026: बिहार के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शिक्षा विभाग के वेतन सत्यापन कोषांग में तैनात अवर सचिव अमोद मिश्रा को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। यह धमाकेदार गिरफ्तारी राजधानी पटना के गर्दनीबाग थाना क्षेत्र स्थित मिनिस्टर इन्क्लेव मोड़ के पास से की गई है, जिसके बाद से ही पूरे सचिवालय गलियारे में हड़कंप मचा हुआ है।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की गिरफ्त में रिश्वतखोर अवर सचिव अमोद मिश्रा। गर्दनीबाग से 20,000 रुपये घूस लेते रंगे हाथों दबोचे जाने के बाद पुलिस अभिरक्षा में आरोपी अधिकारी।
नालंदा के पीड़ित ने की थी शिकायत
निगरानी ब्यूरो से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की शिकायत नालंदा जिले के बिहार शरीफ थाना क्षेत्र के नई सराय निवासी उमा शंकर उमरेषी (पिता अरुण प्रसाद) द्वारा दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पटना कार्यालय में आवेदन देकर यह आरोप लगाया था कि उनके बकाया एरियर का भुगतान करने के एवज में अवर सचिव अमोद मिश्रा द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी। घूस की रकम न देने पर फाइल को अटका कर रखा गया था।
डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में बिछा जाल
शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्त रूप से इसका सत्यापन कराया। ब्यूरो द्वारा कराए गए सत्यापन के क्रम में आरोपी अधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने का पुख्ता प्रमाण पाया गया। प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के पश्चात तत्काल निगरानी थाना कांड संख्या 079/26 अंकित कर अनुसंधानकर्ता श्याम बाबू प्रसाद (पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना) के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया।
रंगे हाथों दबोचा गया घूसखोर अफसर
योजना के मुताबिक, दिनांक 01.07.2026 को जैसे ही शिकायतकर्ता ने गर्दनीबाग के मिनिस्टर इन्क्लेव मोड़ के पास आरोपी अवर सचिव अमोद मिश्रा को 20,000 (बीस हजार) रुपये की केमिकल युक्त नोटों की गड्डी थमाई, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठी निगरानी की धावा दल ने उसे चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी से ब्यूरो मुख्यालय में गहन पूछताछ की गई है, जिसके बाद उसे पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में उपस्थित किया जाएगा। ब्यूरो इस मामले में आगे की कानूनी और अनुसंधान की कार्रवाई कर रहा है।
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पटना: बिहार के लाखों गन्ना किसानों के लिए राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब किसानों को प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति की सदस्यता लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। बिहार सरकार ने इसके लिए एक बेहद आधुनिक और पारदर्शी ऑनलाइन वेब पोर्टल लॉन्च कर दिया है। इस बड़ी पहल की शुरुआत बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा की गई है। इस पोर्टल के सक्रिय होने से गन्ना किसानों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है।
बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत पटना में लैपटॉप का बटन दबाकर सकरी (मधुबनी) और रैयाम (दरभंगा) के गन्ना किसानों के लिए प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति के ऑनलाइन वेब पोर्टल का शुभारंभ करते हुए। इस दौरान विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
सकरी और रैयाम के किसानों को सबसे पहले तोहफा
सरकार की इस डिजिटल क्रांति की शुरुआत मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सकरी (मधुबनी) और रैयाम (दरभंगा) की प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के लिए ऑनलाइन वेब पोर्टल का शुभारंभ करके की। अब इन क्षेत्रों के साथ-साथ राज्य के तमाम पात्र किसान अपने घर पर बैठकर मोबाइल या कंप्यूटर के माध्यम से केवल एक क्लिक में समिति की सदस्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे बिचौलियों का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
सदस्यता मिलने से होंगे यह बड़े फायदे
समिति का सदस्य बनने वाले गन्ना किसानों को सरकार की ओर से कई बेहतरीन सुविधाएं और लाभ दिए जाएंगे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
कृषि आदान की उपलब्धता: उन्नत बीज, खाद और कीटनाशक आसानी से मिलेंगे।
तकनीकी सलाह: आधुनिक खेती के लिए विशेषज्ञों द्वारा उचित मार्गदर्शन दिया जाएगा।
मिट्टी परीक्षण: खेतों की मिट्टी की जांच कराकर सही फसल चक्र की जानकारी मिलेगी।
सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ: सरकार द्वारा गन्ना किसानों के लिए चलाई जा रही सभी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं का पैसा सीधे खाते में आएगा।
पारदर्शी गन्ना भुगतान: गन्ना बेचने के बाद किसानों के भुगतान में कोई देरी या गड़बड़ी नहीं होगी, पूरा हिसाब-किताब पारदर्शी तरीके से सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा।
पटना स्थित गन्ना उद्योग विभाग के मुख्यालय में “बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस” के अवसर पर ईखायुक्त अनिल कुमार झा के नेतृत्व में भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी प्रशासन की शपथ लेते हुए विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी।
गन्ना उद्योग विभाग में गूंजी भ्रष्टाचार-मुक्ति की गूंज, अधिकारियों ने ली शपथ
इसी कड़ी में एक और बड़ा घटनाक्रम गन्ना उद्योग विभाग के पटना स्थित मुख्यालय में देखने को मिला। “बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस” के खास अवसर पर विभाग में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ईखायुक्त अनिल कुमार झा के नेतृत्व में विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों, सहायकों और कर्मियों ने एक सुर में सत्यनिष्ठा, पूर्ण पारदर्शिता तथा भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।
अनिल कुमार झा ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि किसानों की सेवा में किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बाद उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की सामूहिक शपथ ली। कार्यक्रम में विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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पटना: बिहार को पूरी तरह से भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है । ‘ट्रिपल टी’ यानी ट्रांसपेरेंसी, टेक्नोलॉजी और ट्रस्ट के मूलमंत्र पर चलते हुए सूबे में सुशासन को एक नई मजबूती दी जाएगी । यह बड़ा ऐलान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ज्ञान भवन में आयोजित बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस एवं सतर्कता जागरूकता सप्ताह के भव्य शुभारंभ के दौरान किया । इस दौरान मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मियों को पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता से काम करने की सख्त शपथ भी दिलाई गई ।
पटना के ज्ञान भवन में बिहार सतर्कता जागरूकता दिवस के अवसर पर सत्यनिष्ठा और ईमानदारी की शपथ लेते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, अन्य वरिष्ठ अधिकारी ।
नेताओं और अफसरों पर सीधा वार, जब्त संपत्तियों पर चलेंगे स्कूल
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्रियों, विधायकों से लेकर शीर्ष और निचले स्तर तक के किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सबसे सख्त कार्रवाई की जाएगी । सरकार अब भ्रष्टाचार करने वाले लोगों को चिन्हित कर उनके जब्त किए गए परिसरों और बंगलों को अपने कब्जे में लेगी और वहां बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए सरकारी विद्यालय संचालित करेगी ।
भ्रष्टाचार मुक्त बिहार के संकल्प को दोहराते हुए सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम में एक साथ खड़े होकर ईमानदारी और पारदर्शिता की सामूहिक शपथ लेते बिहार पुलिस के आला अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं विभिन्न विभागों के कर्मीगण 。
सभी 9 प्रमंडलों में विशेष कोर्ट और हर जिले में निगरानी थाना
भ्रष्टाचार के मामलों पर त्वरित एक्शन और अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजने के लिए सूबे के सभी 9 प्रमंडलों में विशेष निगरानी न्यायालय (स्पेशल विजिलेंस कोर्ट) की स्थापना की जाएगी । इसके साथ ही, जीरो टॉलरेंस की नीति को धरातल पर उतारने के लिए बिहार के प्रत्येक जिले में निगरानी थाना और सभी अनुमंडलों में निगरानी ओ.पी. स्थापित करने की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है ।
सीबीआई और ईडी को भी लेनी पड़ेगी बिहार पुलिस की मदद
मुख्यमंत्री ने आर्थिक अपराध इकाई और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को निर्देश दिया कि वे अपने साथ विशेषज्ञ व्यक्तियों को जोड़कर ऐसी आधुनिक और स्मार्ट कार्यप्रणाली तैयार करें, जिससे विशेष परिस्थितियों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जैसी बड़ी केंद्रीय एजेंसियों को भी बिहार की टीमों से सहयोग लेने की आवश्यकता महसूस हो ।
सरकारी गवाहों को मिलेगा परिवहन भत्ता
अक्सर देखा जाता है कि गवाहों के मुकर जाने या समय पर कोर्ट न पहुंचने से भ्रष्टाचारी बच निकलते हैं। इसका तोड़ निकालते हुए सरकार ने फैसला किया है कि अपराध एवं आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों में सरकारी गवाहों को गवाही के लिए आने-जाने हेतु सरकार द्वारा परिवहन भत्ता उपलब्ध कराया जाएगा । इसके अलावा, बच्चों में बचपन से ही नैतिक मूल्यों के विकास के लिए अब विद्यालयों में भी भ्रष्टाचार विरोधी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ।
समारोह में इन दिग्गजों की रही मौजूदगी
सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित ज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के नए लोगो का अनावरण किया और विभाग की उपलब्धियों पर बनी लघु फिल्म को भी देखा ।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर मंच पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी मौजूद रहे, जिन्होंने कार्यक्रम को संबोधित भी किया । इसके अलावा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मो. जमा खान, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण मंत्री संजय कुमार सिंह, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन शामिल हुए ।
प्रशासनिक महकमे से मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, गृह सचिव कुंदन कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह मौजूद थे । कार्यक्रम की रूपरेखा और स्वागत निगरानी विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंदर तथा निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार द्वारा किया गया । वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के तमाम प्रमंडलीय आयुक्त, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी इस महा-शपथ कार्यक्रम से सीधे जुड़े रहे ।
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