Wednesday, July 29, 2026

प्रिंस राज बने रालोजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, पशुपति पारस ने की घोषणा

पटना। राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के कुनबे में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल हुआ है। पूर्व सांसद प्रिंस राज पासवान को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान आधिकारिक रूप से इस निर्णय की घोषणा की। बैठक में पार्टी की मजबूती और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई, जिसके बाद प्रिंस राज को यह अहम जिम्मेदारी सौंपने का फैसला लिया गया।

विदित हो कि प्रिंस राज दलित राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक रहे हैं और इस नई जिम्मेदारी के साथ उन पर पार्टी के सांगठनिक विस्तार और युवाओं को जोड़ने का बड़ा दारोमदार होगा। घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं में हर्ष का माहौल है।

राज्यसभा चुनाव: भाजपा ने कसी कमर, बिहार-हरियाणा समेत तीन राज्यों के लिए ‘पर्यवेक्षक’ नियुक्त

नई दिल्ली | आगामी राज्यसभा चुनावों को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संपन्न कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी संगठनात्मक तैयारियों को तेज कर दिया है। इसी क्रम में, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन  ने विभिन्न राज्यों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं।

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं मुख्यालय प्रभारी  अरुण सिंह द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन नियुक्तियों का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में बेहतर समन्वय स्थापित करना और पार्टी की रणनीति को धरातल पर उतारना है।

प्रमुख नियुक्तियां और जिम्मेदारियां

पार्टी ने अनुभवी नेताओं को इन राज्यों की कमान सौंपी है:

राज्यनियुक्त केंद्रीय पर्यवेक्षकवर्तमान पद
बिहार विजय शर्मा

 हर्ष मल्होत्रा
उप मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ सरकार

केंद्रीय राज्य मंत्री, भारत सरकार
हरियाणा हर्ष सांघवीउप मुख्यमंत्री, गुजरात सरकार
ओडिशाचन्द्रशेखर बावनकुलेमंत्री, महाराष्ट्र सरकार

रणनीतिक कदम

पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन भारी-भरकम नामों को पर्यवेक्षक बनाकर भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह राज्यसभा चुनाव की हर एक सीट पर सूक्ष्मता से नजर रख रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष  नितिन नवीन  का यह कदम संगठनात्मक ढांचे को मजबूती प्रदान करने और अंतर्कलह जैसी संभावनाओं को खत्म कर पूरी पारदर्शिता के साथ चुनाव संचालित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

यह नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं, और संबंधित नेता जल्द ही अपने आवंटित राज्यों का दौरा कर स्थानीय विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठकें शुरू करेंगे।


बिहार में गन्ना क्रांति: ज्ञान भवन में ‘गन्ना प्रौद्योगिकी सेमिनार-2026’ का भव्य आगाज

नई चीनी मिलों की स्थापना और बंद मिलों को पुनर्जीवित करने पर सरकार का जोर; किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक पर मंथन।

पटना। बिहार में गन्ना खेती को आधुनिक स्वरूप देने और चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से सोमवार को पटना के ज्ञान भवन में “गन्ना प्रौद्योगिकी सेमिनार–2026” का शुभारंभ हुआ। इस दो दिवसीय सेमिनार का उद्घाटन राज्य के उपमुख्यमंत्री  सम्राट चौधरी एवं विजय कुमार सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल और गन्ना उद्योग मंत्री  संजय कुमार भी उपस्थित रहे।

नवाचार से समृद्धि की ओर बिहार

सेमिनार का मुख्य विषय आधुनिक तकनीक: नवाचार से समृद्धि रखा गया है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार की एनडीए सरकार गन्ना किसानों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रही है। उन्होंने राज्य में नई चीनी मिलों की स्थापना और वर्षों से बंद पड़ी मिलों को पुनः चालू करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का महामंथन

इस सेमिनार में देशभर से आए नामचीन वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, निवेशकों और चीनी मिल प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा के मुख्य बिंदु रहे:

  • कम लागत, अधिक उत्पादन: कैसे उन्नत किस्मों के बीजों के प्रयोग से किसानों का खर्च कम किया जाए।
  • आधुनिक तकनीक: खेती में नई मशीनों और नवाचारों का समावेश।
  • औद्योगिकीकरण: चीनी मिलों के माध्यम से राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करना।

“हमारी सरकार गन्ना क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देकर न केवल कृषि क्षेत्र को सशक्त बना रही है, बल्कि राज्य में औद्योगिकीकरण को गति देकर युवाओं के लिए रोजगार और किसानों के लिए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रही है।” — विजय कुमार सिन्हा, उपमुख्यमंत्री

किसानों के लिए नई राह

विशेषज्ञों ने सेमिनार में गन्ने की उन किस्मों पर प्रकाश डाला जो कम पानी और कम समय में बेहतर पैदावार देती हैं। इससे बिहार के गन्ना बेल्ट (विशेषकर उत्तर बिहार) के किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि गन्ने की खेती को केवल फसल तक सीमित न रखकर इसे एक लाभदायक उद्योग के रूप में विकसित किया जाए।

गरीबों को उजाड़ने के खिलाफ 12 मार्च से समाहर्ता के समक्ष ‘डेरा डालो-घेरा डालो’ आंदोलन

हसनपुर के मंगलगढ़ में 907 घरों को बुल्डोजर से ढहाने और हमले के विरोध में भाकपा (माले) व खेग्रामस ने भरी हुंकार

समस्तीपुर | 9 मार्च, 2026 शहर के लेनिन आश्रम मालगोदाम चौक परिसर में सोमवार को अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। शहरी मजदूर महेंद्र साह की अध्यक्षता और मनोज पोद्दार के संचालन में हुई इस बैठक में जिले के विभिन्न अंचलों में गरीबों और भूमिहीनों को उजाड़ने की कार्रवाई पर गहरा रोष व्यक्त किया गया।

मंगलगढ़ कांड पर फूटा गुस्सा

बैठक को संबोधित करते हुए खेग्रामस के जिला प्रभारी सह राज्य उपाध्यक्ष जीवछ पासवान और मनरेगा संघ के जिला प्रभारी उपेंद्र राय ने कहा कि हसनपुर अंचल के मंगलगढ़ में सामंतों, पुलिस और गुंडों के गठजोड़ ने 907 गरीब परिवारों के घरों को बुल्डोजर से ध्वस्त कर दिया। इस दौरान जानलेवा हमले में दर्जनों लोग घायल हुए। वक्ताओं ने मांग की कि उजाड़े गए इन सभी परिवारों का तुरंत पुनर्वास किया जाए और उन्हें बासगीत पर्चा दिया जाए।

कुष्ठ कॉलोनी के निवासियों को मिले मालिकाना हक

नेताओं ने शहर के मालगोदाम चौक से पूर्व स्थित कुष्ठ कॉलोनी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1999-2000 में तत्कालीन डीएम और रेल प्रबंधक द्वारा बसाए गए इन शहरी गरीबों और भिक्षुकों को अब तक बासगीत पर्चा नहीं मिला है, जो उनके अधिकारों का हनन है। प्रशासन को अविलंब इन्हें स्थाई स्वामित्व देना चाहिए।

12 मार्च से अनिश्चितकालीन प्रदर्शन

भाकपा (माले) जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि:

  • ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से बसे गरीबों को अंचलाधिकारी द्वारा दिए गए बेदखली के नोटिस वापस लिए जाएं।
  • सरकारी जमीन, मालिकाना जमीन और पोखरों के भिंडा पर बसे भूमिहीनों को बासगीत पर्चा देकर नियमित किया जाए।

इन मांगों के समर्थन में 12 मार्च से जिला समाहर्ता के समक्ष सरकारी बस स्टैंड परिसर में भाकपा (माले) और खेग्रामस के संयुक्त बैनर तले डेरा डालो-घेरा डालो कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जो अनिश्चितकालीन चलेगा।

बैठक में ये रहे मौजूद

बैठक को मोस्मात ज्ञांति देवी, चिंता देवी, पवन देवी, वीरेंद्र शर्मा, राहुल कुमार, विजेंद्र नट, संगीता देवी और सोमनी देवी सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया और आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।

सकरा के विजन वैली हॉल में गूँजी नारी शक्ति की हुंकार: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अधिकारों और इतिहास पर हुआ मंथन

सकरा, मुजफ्फरपुर सकरा हाई स्कूल रोड स्थित ‘विजन वैली हॉल’ के प्रांगण में रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक भव्य और विचारोत्तेजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रखंड के विभिन्न गांवों से आई सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना और वर्तमान समय में उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।


इतिहास के पन्नों से: शिकागो की वह क्रांति और जाराका बलिदान

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता नमिता सिंह ने अपने संबोधन की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उस रक्तरंजित और गौरवशाली इतिहास से की, जिससे आज की पीढ़ी का बड़ा हिस्सा अनभिज्ञ है। उन्होंने विस्तार से बताया कि महिला दिवस महज एक औपचारिकता या उत्सव नहीं है, बल्कि यह दशकों लंबे दमन के खिलाफ उठी क्रांति की उपज है।

नमिता सिंह ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसकी शुरुआत साल 1908 में अमेरिका के शिकागो शहर से हुई थी। वहां एक कपड़ा मिल में काम करने वाली जारा नाम की महिला और उनके साथ काम करने वाली अन्य महिला कामगारों ने बंधुआ मजदूरी जैसी अमानवीय स्थितियों के खिलाफ बिगुल फूंका था। उस समय महिलाओं से 15-15 घंटे काम लिया जाता था, न उन्हें आराम का समय मिलता था और न ही अपने परिवार के साथ बिताने का वक्त।

जारा के नेतृत्व में महिलाओं ने दुनिया के सामने एक क्रांतिकारी मांग रखी थी: “8 घंटा काम, 8 घंटा आराम और 8 घंटा निजी काम”। 24 घंटे के इस न्यायपूर्ण बंटवारे की मांग को दबाने के लिए मिल मालिकों ने बर्बरता का सहारा लिया। मिल में आग लगवा दी गई और पुलिस द्वारा गोलियां चलवाई गईं, जिसमें जारा और उनके साथ कई जांबाज महिलाएं शहीद हो गईं। उन्हीं के इस महान बलिदान की याद में बाद में 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी।

नमिता सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा, “आज हम फिर उसी दिशा में जा रहे हैं। निजी कंपनियों और क्षेत्रों में काम के घंटे 8 से बढ़कर 10-12 हो रहे हैं। यह आधुनिक गुलामी की आहट है, जिसके खिलाफ हमें अपनी एकजुटता बनाए रखनी होगी।”


शिक्षा: स्वाभिमान और सुरक्षा का एकमात्र शस्त्र

विशिष्ट वक्ता कामिनी कुमारी ने महिलाओं की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आज भी महिलाएं घर, बाहर और समाज में खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर पाती हैं। इसका समाधान केवल कानून में नहीं, बल्कि ‘शिक्षा’ में छिपा है।

कामिनी कुमारी ने जोर देकर कहा, “शिक्षा वह हथियार है जिससे समाज की हर बेड़ी को काटा जा सकता है। बिना शिक्षित हुए हम अपने अधिकारों—जैसे समान काम के लिए समान वेतन और सामाजिक सम्मान—की लड़ाई नहीं लड़ सकते।” उन्होंने उपस्थित माताओं से अपील की कि चाहे कितनी भी कठिनाई आए, वे अपने बच्चों, विशेषकर बेटियों को जरूर पढ़ाएं। जब महिलाएं शिक्षित होंगी, तभी समाज में उनके साथ होने वाला भेदभाव समाप्त होगा।


जीवन दर्शन, स्वास्थ्य और मानसिक शांति का संदेश

कार्यक्रम में केवल अधिकारों की ही नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता और नैतिकता पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने जीवन दर्शन के महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि आज के स्वार्थपूर्ण युग में किसी की मजबूरी का लाभ उठाना सबसे बड़ा अधर्म है। अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है, इसलिए हमें प्रेम और भाईचारे के साथ जीवन जीना चाहिए।

सफलता के सूत्र बताते हुए कहा गया कि केवल सपने देखने से मंजिल नहीं मिलती, उसके लिए कठिन परिश्रम और कड़े अनुशासन की आवश्यकता होती है। यदि संघर्ष में हार मिले, तो उसे एक ‘सीख’ मानकर निरंतर प्रयास करना चाहिए।

स्वास्थ्य पर विशेष सत्र में यह संदेश दिया गया कि “स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी पूंजी है।” धन-दौलत का कोई मूल्य नहीं रह जाता यदि शरीर स्वस्थ न हो। महिलाओं को अपनी व्यस्त दिनचर्या में से खुद के लिए समय निकालने, योग, प्राणायाम और सकारात्मक सोच को अपनाने की सलाह दी गई।


विजन वैली हॉल की सराहनीय पहल: मातृशक्ति को समर्पित मंच

इस कार्यक्रम की एक और विशेषता विजन वैली हॉल के संचालक राजेश कुमार की संवेदनशीलता रही। उन्होंने न केवल इस पूरे कार्यक्रम के लिए अपना हॉल निशुल्क उपलब्ध कराया, बल्कि स्वयं मंच संचालन की जिम्मेदारी भी निभाई।

राजेश कुमार ने मंच से भावुक होते हुए कहा, “मैं आज जो कुछ भी हूं, अपनी माता के आशीर्वाद से हूं। उन्होंने मुझे जन्म दिया और संस्कार दिए। आज का यह आयोजन उन सभी माताओं और बहनों के सम्मान में मेरी ओर से एक छोटी सी सेवा है। महिला शक्ति के इस कार्यक्रम के लिए मेरा मंच हमेशा उपलब्ध रहेगा।” उनके इस कदम की कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने सराहना की।


सम्मान और एकजुटता का संकल्प

कार्यक्रम के अंतिम चरण में क्षेत्र की सक्रिय महिलाओं और उपस्थित अतिथियों को मंच पर बुलाकर माला पहनाकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली महिलाओं में ममता कुमारी, प्रतिभा कुमारी, चंद्रकला देवी, मिनती देवी, महेश्वरी देवी, बीना कुमारी, संगीता कुमारी, तारा देवी और अन्य शामिल थीं।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख लोगों में राजेश कुमार, नमिता सिंह, कामिनी कुमारी, शोभा देवी, रंजीता, लक्ष्मी कुमारी, प्रेमा कुमारी, विमल कुमारी, सुधा देवी, पिंकी कुमारी, रेखा देवी, उर्मिला, सौदा खातून, अनुराधा देवी, सुनील कुमार और  रमई राम सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल रहे।

सकरा के इस कार्यक्रम ने यह संदेश साफ कर दिया कि जब तक महिलाएं जाति, धर्म और आर्थिक भेदभाव को भुलाकर एक सूत्र में नहीं बंधेंगी, तब तक पूर्ण परिवर्तन संभव नहीं है। महिलाओं को घर की ‘नींव’ बताते हुए वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब नींव मजबूत होगी, तभी समाज और राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल होगा।

बिहार की सियासत में ‘नीतीश युग’ का नया अध्याय, चारों सदनों की सदस्यता का स्वप्न हुआ साकार

“बिहार की सेवा और विकास का संकल्प रहेगा पूर्ववत” – नामांकन के बाद बोले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

पटना | बिहार की समकालीन राजनीति में 5 मार्च 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्होंने पिछले दो दशकों से बिहार की विकास यात्रा का नेतृत्व किया है, उन्होंने आज बिहार विधानसभा कार्यालय प्रकोष्ठ में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। यह केवल एक चुनावी प्रक्रिया भर नहीं थी, बल्कि एक अनुभवी राजनेता के उस व्यक्तिगत और संसदीय संकल्प की पूर्णता थी, जो उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन के शुरुआती दिनों में देखा था।

राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करते नीतीश कुमार

सत्ता के शीर्ष दिग्गजों का जमावड़ा: NDA की एकजुटता का संदेश

नामांकन के अवसर पर उमड़ी भीड़ और उपस्थित चेहरों ने स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पूरी तरह एकजुट है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने इस नामांकन को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा की मौजूदगी बिहार में भाजपा और जदयू के मजबूत समन्वय को रेखांकित कर रही थी।

इसके अतिरिक्त, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा, वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह गांधी जी जैसे दिग्गजों ने नीतीश कुमार के इस नए सफर में उनके साथ खड़े होकर अपनी शुभकामनाएं दीं।

चार सदनों का दुर्लभ कीर्तिमान: एक ऐतिहासिक उपलब्धि

नीतीश कुमार ने नामांकन के बाद अपने संबोधन में एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यक्तिगत तथ्य साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके मन में शुरू से ही एक इच्छा थी कि वे अपने संसदीय जीवन के दौरान लोकसभा, राज्यसभा, बिहार विधानसभा और बिहार विधान परिषद—इन चारों गौरवशाली सदनों के सदस्य बनें। आज राज्यसभा के लिए नामांकन के साथ ही उनका यह दुर्लभ कीर्तिमान स्थापित होने जा रहा है। भारतीय राजनीति में बहुत कम ऐसे नेता हुए हैं जिन्हें इन चारों प्रतिष्ठित सदनों में जनता का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

जनता के प्रति आभार और भविष्य का रोडमैप

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए बिहार की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास और समर्थन मेरे साथ बनाए रखा है। आपके इसी भरोसे की ताकत है कि आज बिहार विकास और सम्मान के नए आयाम स्थापित कर रहा है।”

नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया कि भले ही वे अब उच्च सदन (राज्यसभा) की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, लेकिन बिहार के विकास के प्रति उनका संकल्प और प्रदेश की जनता से उनका जुड़ाव भविष्य में भी वैसा ही बना रहेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य में आने वाली नई सरकार को उनका निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त होता रहेगा, जिससे ‘विकसित बिहार’ का सपना अधूरा न रहे।

NDA के अन्य दिग्गजों का नामांकन और शक्ति प्रदर्शन

राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए आज का दिन नामांकन के लिहाज से काफी गहमागहमी वाला रहा। मुख्यमंत्री के साथ-साथ एनडीए के अन्य प्रमुख घटक दलों के प्रत्याशियों ने भी अपनी दावेदारी पेश की:

राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करते उपेन्द्र कुशवाहा
  1. उपेन्द्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा): एनडीए समर्थित उम्मीदवार के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने अपना पर्चा दाखिल किया। उनकी उम्मीदवारी बिहार के सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
  2. नितिन नवीन (भाजपा): भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नमन करते हुए इसे अपना सौभाग्य बताया।

सम्मान और शिष्टाचार की परंपरा

राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करते नितिन नवीन

नामांकन के पश्चात बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से विशेष भेंट की। विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। यह दृश्य बिहार की उस स्वस्थ राजनीतिक परंपरा का परिचायक था, जहाँ वैचारिक मतभेदों के बावजूद वरिष्ठता और उपलब्धियों का सम्मान सर्वोपरि रखा जाता है।

नामांकन के पश्चात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को  अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित करते बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार  

राजनीतिक विश्लेषण: क्या बदलेंगे बिहार के समीकरण?

नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति में एक बड़े परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका राज्यसभा जाना केंद्र की राजनीति में उनकी भूमिका को और अधिक प्रभावी बना सकता है, जबकि राज्य की कमान और आगामी ‘नई सरकार’ के स्वरूप पर अब सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। उनके द्वारा ‘मार्गदर्शन’ की बात कहना इस ओर इशारा करता है कि वे सक्रिय राजनीति से ओझल नहीं होंगे, बल्कि एक ‘संरक्षक’ की भूमिका में बिहार की प्रगति की निगरानी करते रहेंगे।

कुल मिलाकर, आज का घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक युग के परिवर्तन जैसा है। नीतीश कुमार ने अपने दो दशकों के कार्यकाल में जिस तरह से शासन की संरचना को बदला, अब वे उसी अनुभव को देश के उच्च सदन में ले जाने की तैयारी में हैं। एनडीए के लिए यह नामांकन न केवल संख्या बल का प्रदर्शन है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले एक मनोवैज्ञानिक बढ़त भी है।

खाड़ी देशों में युद्ध के संकट के बीच नीतीश सरकार अलर्ट, प्रवासी बिहारियों के लिए जारी किया विशेष हेल्पलाइन नंबर

पटना। पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों (Gulf Countries) में गहराते युद्ध के संकट को देखते हुए बिहार सरकार पूरी तरह सतर्क मोड में आ गई है। वहां रह रहे हजारों प्रवासी बिहारियों की सुरक्षा और उनके परिजनों की चिंता को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार के श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने एक विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।

परिजनों की बढ़ी चिंता, सरकार ने संभाला मोर्चा

विदेशी धरती पर युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच प्रवासी बिहारियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विभाग ने हेल्पलाइन नंबर: 721 778 8114 सार्वजनिक किया है। सरकार का उद्देश्य है कि संकट की इस घड़ी में हर बिहारी तक मदद पहुँचाई जा सके।

इस नंबर पर क्या मिलेगी सुविधा?

विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस नंबर का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जा सकता है:

  • सूचना का आदान-प्रदान: खाड़ी देशों में फंसे प्रवासी अपनी स्थिति की जानकारी दे सकते हैं।
  • सहायता: किसी भी प्रकार की आपातकालीन सहायता की आवश्यकता होने पर संपर्क किया जा सकता है।
  • परिजनों के लिए राहत: बिहार में रह रहे परिवार के सदस्य अपने सगे-संबंधियों की कुशलता जानने या उनसे संपर्क साधने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।

नोट: सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रवासी बिहारी और उनके परिजन किसी भी प्रकार की जानकारी, सहायता या समस्या के समाधान के लिए इस नंबर पर बेझिझक संपर्क कर सकते हैं।

विभाग की अपील

श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने सोशल मीडिया हैंडल  के माध्यम से भी लोगों को जागरूक रहने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। सरकार केंद्र सरकार और संबंधित दूतावासों के साथ भी निरंतर संपर्क बनाए हुए है ताकि जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

फाग के गीतों से गूंजा माधुरी चौक, रेल विकास मंच ने मनाया पारंपरिक होली मिलन समारोह

समस्तीपुर। रंगों के त्योहार होली की पूर्व संध्या पर सोमवार को शहर के माधुरी चौक पर उत्साह और उमंग का माहौल रहा। रेल विकास-विस्तार मंच एवं समस्तीपुर जिला विकास संघर्ष मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य ‘होली मिलन समारोह’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की खास बात इसका पारंपरिक स्वरूप रहा, जहाँ आधुनिक शोर-शराबे के बजाय मिथिला की पारंपरिक फगुआ गायकी ने लोगों का मन मोह लिया।

पारंपरिक होली गायन का आकर्षण

समारोह के दौरान स्थानीय कलाकारों और कार्यकर्ताओं ने ढोल-मजीरों की थाप पर होली है, बरजखोरी है रे रसिया…” और आज बिरज में होली है रसिया…” जैसे सुप्रसिद्ध फाग गीतों की प्रस्तुति दी। माधुरी चौक पर गूंजते इन गीतों ने पूरे वातावरण को भक्ति और हर्षोल्लास से भर दिया। कृष्ण और राधा के प्रेम और ब्रज की होली के प्रसंगों वाले इन गीतों ने राहगीरों को भी रुकने पर मजबूर कर दिया।

सामाजिक सौहार्द का संदेश

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी कटुता को मिटाकर प्रेम और भाईचारे को गले लगाने का पर्व है। रेल विकास-विस्तार मंच ने इस माध्यम से शहर के विकास के संकल्प के साथ-साथ अपनी लोक संस्कृति को जीवित रखने का संदेश भी दिया।

मुख्य रूप से उपस्थित गणमान्य

कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने शिरकत की। उपस्थित रहने वाले मुख्य व्यक्तियों में शामिल थे:

  • राम विनोद
  • जीबछ पासवान
  • अरुण कुमार राय एवं राजेंद्र राय
  • पिंकू पासवान एवं रामलाल राम
  • संतोष कुमार निराला, डोमन राय एवं विश्वनाथ सिंह हजारी
  • रंभू राय, नंदू महतो, शाहीद हुसैन
  • मनोज कुमार राय, सुधीर प्रसाद गुप्ता और रामदयालू महतो

कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र के विकास के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प दोहराया।

पूर्व मुख्य सचेतक स्व. फकीरचंद राम की 83वीं जयंती: सकरा के शैक्षणिक व सर्वांगीण विकास के नायक को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

सकरा (मुजफ्फरपुर)। सकरा बाजिद स्थित स्मारक स्थल कार्यालय पर सोमवार को पूर्व विधायक व बिहार विधानसभा के पूर्व मुख्य सचेतक स्व० फकीरचंद राम की 83वीं जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर अखिल भारत अनुसूचित जाति परिषद के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी (AICC) के सदस्य उमेश कुमार राम सहित दर्जनों गणमान्य व्यक्तियों ने उनके स्मारक और चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

नौकरी छोड़ समाज सेवा को चुना: एक प्रेरणादायी सफर

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए उमेश कुमार राम ने स्व. फकीरचंद राम के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे त्याग और सादगी की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने कहा, फकीरचंद जी छात्र जीवन से ही राजनीति और समाज के प्रति सजग थे। जनसेवा के प्रति उनका जुनून इतना प्रबल था कि उन्होंने अपनी सुरक्षित सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और सकरा (सु.) विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनकर जनता की सेवा की।”

शिक्षा और विकास के लिए आजीवन संघर्ष

वक्ताओं ने याद किया कि सकरा कॉलेज के सरकारीकरण का श्रेय फकीरचंद राम जी को ही जाता है। उन्होंने ढोली फिशरी कॉलेज की स्थापना और पूरे सकरा व मुरौल प्रखंड के चौतरफा विकास के लिए जो बुनियादी ढांचा तैयार किया, वह आज भी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर है। वे ताउम्र गरीबों और पिछड़ों के हक के लिए संघर्षरत रहे।

सामाजिक सरोकार: बच्चों के बीच बांटी गई पठन सामग्री

जयंती के पावन अवसर पर उमेश कुमार राम ने उपस्थित लोगों और कार्यकर्ताओं के बीच मिठाई वितरण किया। शिक्षा के प्रति उनके लगाव को देखते हुए बड़ी संख्या में आए स्कूली बच्चों के बीच कॉपी और कलम का वितरण किया गया, ताकि नई पीढ़ी उनके पदचिह्नों पर चल सके।

इनकी रही गरिमामय उपस्थिति

कार्यक्रम में मुख्य रूप से सकरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम, कांग्रेस नेता व प्रखर अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी की प्रदेश प्रतिनिधि अनीता देवी, राजद मीडिया के चेयरमैन प्रशांत राज, युवा कांग्रेस अध्यक्ष मो० गुलाम मैनुद्दीन, कांग्रेस नेता डा० मनीष यादव, मो० हैदर रजक, शशी भूषण राय, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव, राहुल कुमार, राजू राम, पॄथवी पासवान, और नुनू राय उपस्थित थे।

इनके साथ ही शिवम कुमार, श्रद्धा खुशी, सिद्धार्थ कुमार सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

क्‍या हम स्वयं के प्रोग्रामर हैं? : क्या एक नन्हे बीज की ‘कोडिंग’ में छिपा है ब्रह्मांड का स्व-संचालन?

एक नन्हा सा बीज, जो हफ्तों तक मिट्टी के अंधकार में मौन पड़ा रहता है, अचानक कैसे जान जाता है कि उसे एक विशाल वटवृक्ष की यात्रा शुरू करनी है? क्या यह केवल एक जैविक प्रक्रिया है या किसी ‘कॉस्मिक सुपर-कंप्यूटर’ द्वारा लिखा गया कोई अनंत ‘सॉफ्टवेयर कोड’? आधुनिक विज्ञान और प्राचीन दर्शन अब एक ऐसे क्रांतिकारी मोड़ पर खड़े हैं, जहाँ यह माना जा रहा है कि बीज के भीतर छिपा डी.एन.ए. (DNA) वास्तव में पूरे ब्रह्मांड के स्व-संचालन का एक सूक्ष्म डिजिटल ब्लूप्रिंट है। जहाँ एक ओर निकोला टेस्ला की ‘3-6-9’ की गणितीय आवृत्ति और ब्रूस लिप्टन के ‘एपिजेनेटिक्स’ ने यह सिद्ध किया है कि हमारी चेतना हमारी कोडिंग बदल सकती है, वहीं दूसरी ओर ‘जीन एडिटिंग’ जैसी तकनीकें अब प्रकृति के उस ‘सोर्स कोड’ को सीधे हैक करने का साहस दिखा रही हैं। यह खबर केवल खेती या विज्ञान की नहीं है; यह उस अदृश्य तार की पड़ताल है जो एक नन्हे अंकुर को सितारों की धूल से जोड़ता है।

“जीन एडिटिंग: क्‍या प्रकृति के ‘सोर्स कोड’ को हैक कर रहा है आधुनिक विज्ञान”

शून्य से अनंत की यात्रा : प्रकृति के रहस्यों को यदि एक बिंदु पर समेटना हो, तो वह बिंदु एक ‘बीज’ होगा। एक नन्हा सा, निर्जीव सा दिखने वाला बीज जब मिट्टी के अंधकार में जाता है, तो वहां एक ऐसी ‘अलौकिक प्रक्रिया’ शुरू होती है जिसे आधुनिक विज्ञान आज भी पूरी तरह समझने का प्रयास कर रहा है। प्रश्न यह नहीं है कि बीज कैसे उगता है, प्रश्न यह है कि बीज को यह ‘पता’ कैसे है कि उसे क्या बनना है?

एक आम के बीज को यह निर्देश किसने दिया कि उसे नीम नहीं बनना है? कोशिका विभाजन (सेल डिवीजन) की प्रक्रिया इतनी सटीक कैसे है कि पत्तों का आकार, फूलों की सुगंध और फलों का स्वाद पीढ़ी-दर-पीढ़ी वही बना रहता है? यह केवल रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) नहीं है, बल्कि यह सूचना (इंफॉर्मेशन) और ऊर्जा (एनर्जी) का वह सटीक मिलन है, जिसे हम ‘सृष्टि का ब्लूप्रिंट’ कह सकते हैं।


बीज की कोडिंगब्रह्मांड का अदृश्य सॉफ्टवेयर

जिस प्रकार एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर को चलाने के लिए पीछे हजारों लाइनों का कोड होता है, जिसे यूजर देख नहीं सकता पर उसके परिणाम स्क्रीन पर देखता है; ठीक उसी तरह प्रकृति का भी अपना एक ‘सॉफ्टवेयर’ है।

1. आधुनिक विज्ञान का दृष्टिकोण: डी.एन.ए. और डिजिटल भाषा

विज्ञान के लिए यह कोडिंग डी.एन.ए. (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) है।

  • सूचना का भंडार: डी.एन.ए. वास्तव में एक ‘डिजिटल भाषा’ है। इसमें केवल चार अक्षर होते हैं— , टी, जी, सी (एडेनिन, थाइमिन, गुआनिन, साइटोसिन)। इन चार अक्षरों के क्रम (सीक्वेंस) में ही यह तय होता है कि एक जीव कैसा दिखेगा।
  • एन्ट्रॉपी और नेगेंट्रॉपी: भौतिक विज्ञान का नियम कहता है कि ब्रह्मांड अव्यवस्था (एन्ट्रॉपी) की ओर बढ़ता है, लेकिन जीवन इस नियम को चुनौती देता है। जीवन ‘नेगेंट्रॉपी’ का उपयोग कर व्यवस्था बनाता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ब्रह्मांड के भौतिक नियम (जैसे गुरुत्वाकर्षण और क्वांटम फील्ड्स) स्वयं में एक कोडिंग हैं।
  • फ्रैक्टल ज्यामिति : प्रकृति में ‘सेल्फ-सिमिलैरिटी’ का गुण है। जिस फिबोनाची सीक्वेंस के गणितीय पैटर्न पर एक बीज की पंखुड़ियां विकसित होती हैं, उसी पैटर्न पर अंतरिक्ष की आकाशगंगाएं (गैलेक्सी) और समुद्र के चक्रवात भी घूमते हैं। यह सिद्ध करता है कि कोडिंग का ‘सोर्स कोड’ एक ही है।

वैश्विक धर्मों का मतअंश में पूर्ण का वास

दुनिया के प्रमुख धर्मों ने इस जैविक कोडिंग को ‘ईश्वरीय विधान’ या ‘प्राकृतिक न्याय’ के रूप में देखा है।

धर्ममूल विचार (विस्तार)
हिंदू धर्मयथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे: जो सूक्ष्म (पिण्ड/बीज) में है, वही विशाल (ब्रह्मांड) में है। बीज को ‘ब्रह्म’ का सूक्ष्म रूप माना गया है, जिसमें संपूर्ण संसार सुप्त अवस्था में है।
बौद्ध धर्मप्रतीत्यसमुत्पाद: यह ‘कारण और प्रभाव’ (कॉज एंड इफेक्ट) का सिद्धांत है। बुद्ध कहते थे कि कोई बाहरी प्रोग्रामर नहीं है, बल्कि कर्म और प्रकृति की एक अनंत कोडिंग ही संसार को चला रही है।
ईसाई धर्ममस्टर्ड सीड‘ (राई का दाना): जीसस ने कहा था कि ईश्वर का राज्य एक छोटे बीज जैसा है। यह कोडिंग के उस गुण को दर्शाता है जहाँ एक छोटी सी सूचना विशाल साम्राज्य खड़ा कर सकती है।
इस्लामकुदरतका डिजाइन: कुरान के अनुसार, अल्लाह ही वह शक्ति है जो दाने को फाड़कर जीवन निकालता है। यह इस बात का प्रमाण है कि हर बीज के भीतर एक ‘डिवाइन सिग्नेचर’ है।
सिख धर्महुकमका सिद्धांत: गुरु नानक देव जी ने कहा “हुकमै अंदरि सभु को”। यानी कण-कण उस परमात्मा के ‘आदेश’ (कोडिंग) में बंधा है। उसी के हुकम में बीज अंकुरित होता है।

महान दार्शनिकों की दृष्टिचेतना का विज्ञान

दर्शनशास्त्र ने बीज और ब्रह्मांड के संबंध को ‘चेतना’ (कॉन्शियसनेस) के चश्मे से देखा है।

  1. अद्वैत वेदांत (भारत): शंकराचार्य के अनुसार, बीज और वृक्ष में कोई भेद नहीं है। कारण (बीज) ही कार्य (वृक्ष) के रूप में प्रकट होता है। यह ‘अन्तर्यामी’ शक्ति है जो भीतर से संचालित करती है।
  2. स्टोइकवाद (यूनान): इनका मानना था कि ब्रह्मांड में एक लोगोस  है। यह ‘लोगोस’ ही वह तर्क या गणितीय कोडिंग है जो सितारों से लेकर बीजों तक सबको अनुशासन में रखती है।
  3. ताओवाद (चीन): ‘ताओ’ वह मार्ग है जो बिना कुछ किए सब कुछ कर देता है। जैसे बीज ‘प्रयास’ (Effort) नहीं करता, वह बस ‘होता’ है। अस्तित्व स्वतः स्फूर्त (स्पोंटेनियस) है।
  4. सर्वेश्वरवाद : स्पिनोजा के अनुसार, ईश्वर कोई व्यक्ति नहीं जो बादलों पर बैठा है, बल्कि प्रकृति के नियम ही ईश्वर हैं। ब्रह्मांड की कोडिंग ही स्वयं ईश्वर है।

महान वैज्ञानिकों के क्रांतिकारी शोध

विज्ञान अब ‘मैटर’ (पदार्थ) से आगे बढ़कर ‘एनर्जी’ (ऊर्जा) की बात कर रहा है।

 डॉ. पीटर गरजाएव: फैंटम डी.एन.ए. प्रभाव : रूसी वैज्ञानिक डॉ. पीटर गरजाएव ने एक विस्मयकारी प्रयोग किया। उन्होंने एक निर्वात (वैक्यूम) में डी.एन.ए. का नमूना रखा और उस पर लेजर लाइट डाली। जब डी.एन.ए. को वहां से हटा दिया गया, तब भी प्रकाश के फोटोन उसी आकार में घूमते रहे।

  • तात्पर्य: यह सिद्ध करता है कि डी.एन.ए. केवल रासायनिक अणु नहीं है, बल्कि वह अंतरिक्ष के ताने-बाने (फैब्रिक ऑफ स्पेस) में अपनी छाप छोड़ता है। वह ‘शून्य ऊर्जा क्षेत्र’ (जीरो पॉइंट फील्ड) से जुड़ा है।

डी.एन.ए. एक बायोलॉजिकल इंटरनेटके रूप में : क्वांटम बायोलॉजी के अनुसार, डी.एन.ए. एक हारमोनिक एंटीना की तरह काम करता है। यह ब्रह्मांडीय विकिरण (कॉस्मिक रेडिएशन) और चुंबकीय क्षेत्रों से सूचनाएं प्राप्त करता है। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा को ‘जैविक भाषा’ में अनुवादित करता है, जिससे शरीर की खरबों कोशिकाएं एक साथ तालमेल में काम करती हैं।

डॉ. ब्रूस लिप्टन: एपिजेनेटिक्स का चमत्कार : डॉ. लिप्टन ने सिद्ध किया कि जीन ही हमारा भाग्य नहीं हैं। उनकी पुस्तक द बायोलॉजी ऑफ बिलीफ बताती है कि कोशिका के बाहर का वातावरण (विचार, भावनाएं, भोजन) यह तय करता है कि कौन सा जीन ‘ऑन’ होगा और कौन सा ‘ऑफ’।

  • इसका अर्थ है कि बीज की कोडिंग ‘फिक्स’ नहीं है, बल्कि वह ब्रह्मांड के ‘एनर्जी सिग्नल’ के प्रति संवेदनशील है।

निकोला टेस्ला और ब्रह्मांडीय फ्रीक्वेंसी

निकोला टेस्ला ने कहा था, “यदि आप 3, 6, और 9 की भव्यता को जानते, तो आपके पास ब्रह्मांड की कुंजी होती।”

  • कंपन और आवृत्ति : बीज के भीतर की कोडिंग वास्तव में एक विशिष्ट फ्रीक्वेंसी है। जब बीज मिट्टी में दबता है, तो वह पृथ्वी की आवृत्ति (शूमैन रेजोनेंस) के साथ तालमेल (सिंक्रोनाइज़) करता है।
  • ईथर ऊर्जा: टेस्ला का मानना था कि अंतरिक्ष ऊर्जा से भरा है। बीज एक ‘रिसीवर’ की तरह इस शून्य-बिंदु ऊर्जा को खींचता है और उसे भौतिक पदार्थ (वृक्ष) में बदल देता है।

कैसे बदलें अपनी कोडिंग‘?

यदि बीज की कोडिंग को पर्यावरण प्रभावित कर सकता है, तो हम भी अपने जीवन की ‘री-प्रोग्रामिंग’ कर सकते हैं।

 स्वास्थ्य और विचार (थॉट केमिस्ट्री) : डॉ. लिप्टन के अनुसार, हमारे विचार रसायनों में बदल जाते हैं।

  • सकारात्मक प्रतिज्ञान (Affirmations): जब हम विश्वास के साथ सकारात्मक शब्द बोलते हैं, तो हम अपने डी.एन.ए. को नए निर्देश (इंस्ट्रक्शंस) देते हैं। इससे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

ध्वनि और 528 हर्ट्ज (Hz) की शक्ति: 528 हर्ट्ज को ‘सृजन की आवृत्ति’ या डी.एन.ए. रिपेयर फ्रीक्वेंसी कहा जाता है।

  • ध्वनि चिकित्सा: संगीत और मंत्रों का उच्चारण (जैसे ) हमारे शरीर के जल अणुओं को एक ज्यामितीय क्रम में व्यवस्थित करता है। यह हमारे आंतरिक ‘सॉफ्टवेयर’ को ‘अपडेट’ करने जैसा है।

टेस्ला की 3-6-9 तकनीक : अपने किसी लक्ष्य को सुबह 3 बार, दोपहर 6 बार और रात को 9 बार लिखना केवल एक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह अपने अवचेतन मन (सबकॉन्शियस माइंड) की कोडिंग को ब्रह्मांडीय गणित के साथ जोड़ने का तरीका है।

प्रकृति और ग्राउंडिंग : नंगे पैर जमीन पर चलने (Earthing) से पृथ्वी के इलेक्ट्रॉन हमारे डी.एन.ए. के साथ संवाद करते हैं, जिससे शरीर की सूजन (इन्फ्लेमेशन) कम होती है और हमारी जैविक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) संतुलित होती है।


क्‍या हम स्वयं के प्रोग्रामर हैं

इस पूरी चर्चा का सार यह है कि बीज की कोडिंग वास्तव में उस कॉस्मिक इंटेलिजेंस का हिस्सा है, जहाँ बनाने वाला और बनी हुई वस्तु अलग-अलग नहीं हैं। ईश्वर कोई ‘बाहरी प्रोग्रामर’ नहीं है जो बटन दबाकर दुनिया चला रहा है, बल्कि वह स्वयं उस ‘प्रोग्राम’ की भाषा है जो हर कोशिका में स्पंदित हो रही है।

विज्ञान अब इस बात को स्वीकार कर रहा है कि बीज की कोडिंग कोई ‘स्थिर’ वस्तु नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ निरंतर संवाद करने वाला एक लाइव सॉफ्टवेयर है। हम अपने विचारों, भोजन, ध्यान और वातावरण को बदलकर अपने जीवन की कोडिंग को बदल सकते हैं।

जैसे एक किसान बीज को सही वातावरण देकर उसका भविष्य बदल देता है, वैसे ही हम भी अपनी ‘चेतना’ को जागृत कर अपने जीवन के ‘वृक्ष’ को मनचाहा आकार दे सकते हैं।


जब हम बीज की कोडिंग को देखते हैं, तो हमें समझ आता है कि प्रकृति ने हमें केवल एक ‘बना-बनाया उत्पाद’  नहीं बनाया है, बल्कि एक ओपन सोर्स कोड दिया है।

यहाँ इसका गहरा अर्थ और व्यावहारिक महत्व दिया गया है:

 डी.एन.ए.  भाग्य नहीं, केवल एक हार्डवेयरहै

पहले माना जाता था कि हमारे जीन ही हमारा भविष्य तय करते हैं। लेकिन एपिजेनेटिक्स  ने यह साबित कर दिया कि हमारे विचार, भावनाएं और हमारा पर्यावरण उस ‘हार्डवेयर’ को चलाने वाले सॉफ्टवेयर हैं।

  • आप जैसा सोचते हैं, आपका मस्तिष्क वैसा ही ‘केमिकल सिग्नल’ भेजता है।
  • यह सिग्नल डी.एन.ए. की कुछ कोडिंग को ‘ऑन’ (सक्रिय) करता है और कुछ को ‘ऑफ’।
  • निष्कर्ष: अपनी सोच बदलकर आप अपनी जैविक कोडिंग  बदल सकते हैं।

 विश्वास की शक्ति

डॉ. ब्रूस लिप्टन के अनुसार, हमारी कोशिकाएं हमारे ‘विश्वास’  के प्रति प्रतिक्रिया देती हैं। यदि आप खुद को बीमार या असफल ‘प्रोग्राम’ करते हैं, तो आपकी कोशिकाएं उसी निर्देश का पालन करती हैं। इसके विपरीत, पॉजिटिव अफर्मेशंस  के जरिए आप अपने अवचेतन मन  में नया डेटा फीड कर सकते हैं।

 टेस्ला की फ्रीक्वेंसी और वाइब्रेशन

जैसे एक प्रोग्रामर सही ‘की-बोर्ड’ का इस्तेमाल करता है, वैसे ही आपके लिए कंपन  वह की-बोर्ड है। निकोला टेस्ला के अनुसार, यदि आप अपनी ऊर्जा की फ्रीक्वेंसी को ब्रह्मांड की फ्रीक्वेंसी (जैसे 528 Hz या ‘ॐ’ का नाद) के साथ मिला दें, तो आप अपने जीवन की घटनाओं को ‘री-प्रोग्राम’ करना शुरू कर देते हैं।

ध्यान: कोडिंग मोडमें प्रवेश करना

ध्यान (Meditation) वह स्थिति है जहाँ आप सक्रिय रूप से ‘प्रोग्रामिंग मोड’ में होते हैं। बाहरी दुनिया के शोर को शांत करके, आप अपने ‘सोर्स कोड’ तक पहुँचते हैं और वहां पुराने, हानिकारक पैटर्न को हटाकर नए, रचनात्मक संकल्प डाल सकते हैं।

संक्षेप में: एक बीज के भीतर जैसे एक विशाल वृक्ष बनने की पूरी क्षमता छिपी होती है, वैसे ही आपके भीतर वह कॉस्मिक इंटेलिजेंस मौजूद है। आप केवल एक मशीन नहीं हैं जो नियमों से बंधी है; आप वह प्रोग्रामर हैं जो अपनी जागरूकता और संकल्प के माध्यम से अपने जीवन का नया संस्करण लिख सकते हैं।


आज का विज्ञान न केवल बीज के कोड को समझ चुका है, बल्कि उसे री-प्रोग्राम  करने की क्षमता भी हासिल कर चुका है। इसे आधुनिक विज्ञान की भाषा में जेनेटिक इंजीनियरिंग या जीन एडिटिंगकहा जाता है।

विज्ञान यह कोडिंगकैसे बदल रहा है:

1. क्रिस्पर -Cas9: आणविक कैंची: यह आज के समय की सबसे क्रांतिकारी तकनीक है। जैसे एक प्रोग्रामर कंप्यूटर कोड की किसी लाइन को ‘कट’ (Cut) करके वहां नई लाइन ‘पेस्ट’ (Paste) कर देता है, वैसे ही CRISPR तकनीक वैज्ञानिकों को डी.एन.ए. के किसी खास हिस्से को काटकर उसे बदलने की अनुमति देती है।

  • उपयोग: इसके माध्यम से बीज की ऐसी कोडिंग की जा रही है कि पौधा कम पानी में भी जीवित रहे या उसमें कीड़े न लगें।

2. जी.एम.ओ. (Genetically Modified Organisms):वैज्ञानिक एक प्रजाति के बीज की कोडिंग में दूसरी प्रजाति के ‘गुण’ (Genes) डाल देते हैं।

  • उदाहरण: ‘गोल्डन राइस’ (Golden Rice) एक ऐसा चावल है जिसकी कोडिंग को विटामिन-A बनाने के लिए री-प्रोग्राम किया गया है। इसी तरह ‘बी.टी. कॉटन’ (BT Cotton) की कोडिंग में ऐसे बैक्टीरिया के जीन डाले गए हैं जो कीड़ों को मार देते हैं।

3. एपिजेनेटिक री-प्रोग्रामिंग (Epigenetic Reprogramming):बिना डी.एन.ए. की मूल संरचना बदले, वैज्ञानिक अब यह सीख रहे हैं कि बाहरी वातावरण (तापमान, प्रकाश, रसायन) के जरिए बीज की कोडिंग को कैसे ‘ट्रिगर’ किया जाए। इसे प्राइमिंग‘ (Priming) कहते हैं।

  • इसमें बीज को एक विशेष ‘तनाव’ (Stress) से गुजारा जाता है ताकि उसका ‘इम्यून सिस्टम’ पहले से ही मजबूत हो जाए। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी सॉफ्टवेयर को ‘अपडेट’ करना ताकि वह वायरस से लड़ सके।

4. सिंथेटिक बायोलॉजी: यह विज्ञान का वह स्तर है जहाँ वैज्ञानिक केवल मौजूदा कोड को सुधारते नहीं, बल्कि नया कोड लिख रहे हैं। वे प्रयोगशाला में कृत्रिम डी.एन.ए. (Synthetic DNA) तैयार कर रहे हैं जो प्रकृति में पहले कभी मौजूद नहीं था। इसका उद्देश्य ऐसे पौधे बनाना है जो हवा से अधिक कार्बन सोख सकें या बायो-फ्यूल (Bio-fuel) बना सकें।


चुनौतियां और नैतिकता : हालांकि विज्ञान बीज को री-प्रोग्राम कर सकता है, लेकिन इसके कुछ बड़े सवाल भी हैं:

  • प्राकृतिक संतुलन: क्या कृत्रिम कोडिंग प्रकृति के करोड़ों वर्षों के ‘स्व-संचालन’ के नियम को बिगाड़ सकती है?
  • अनपेक्षित परिणाम: एक जीन बदलने से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर क्या असर होगा, इसका सटीक अंदाजा लगाना अभी भी कठिन है।

आज का वैज्ञानिक एक बायोलॉजिकल प्रोग्रामर बन चुका है। वह बीज की उस पुरानी कोडिंग को ‘हैक’ कर रहा है जो विकासवाद (Evolution) ने बनाई थी। विज्ञान का मानना है कि यदि हम बीज की कोडिंग को पूरी तरह नियंत्रित कर लें, तो हम दुनिया से भूख और बीमारियों को मिटा सकते हैं।

जीन एडिटिंग: प्रकृति के सोर्स कोडको हैक कर रहा है आधुनिक विज्ञान

जिस तरह एक कंप्यूटर प्रोग्राम की किसी गलत लाइन को सुधारने के लिए प्रोग्रामर ‘बैकस्पेस’ दबाता है और नया कोड लिख देता है, ठीक वैसा ही करिश्मा आज का विज्ञान बीजों के साथ कर रहा है। इसे जीन एडिटिंग कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो, यह जीवन की उस ‘पटकथा’ को फिर से लिखने की तकनीक है, जिसे प्रकृति ने करोड़ों साल पहले डी.एन.ए. (DNA) के रूप में तैयार किया था।

आणविक कैंची: क्रिस्पर (CRISPR) इस तकनीक का सबसे बड़ा हथियार है क्रिस्पर-कैस9′ । यह एक ऐसी ‘आणविक कैंची’ है जो कोशिका के भीतर जाकर डी.एन.ए. के उस खास हिस्से को सटीकता से काट सकती है, जो बीज की किसी कमजोरी (जैसे बीमारी या कम उपज) के लिए जिम्मेदार है। एक बार वह हिस्सा कट जाए, तो वैज्ञानिक वहां नया और मजबूत ‘जेनेटिक कोड’ डाल देते हैं।

क्यों पड़ रही है इसकी जरूरत?

  1. जलवायु परिवर्तन: ऐसे बीज तैयार करना जो भीषण गर्मी या सूखे में भी न सूखें।
  2. कुपोषण का अंत: चावल या गेहूं की कोडिंग बदलकर उनमें आयरन और विटामिन की मात्रा बढ़ाना।
  3. कीटनाशकों से मुक्ति: ऐसे पौधे विकसित करना जिनमें अपनी सुरक्षा करने की ‘इन-बिल्ट’ क्षमता हो।

हैक या विकास?:  हालांकि इसे ‘प्रकृति के कोड को हैक करना’ कहा जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिक इसे सृजनात्मक हस्तक्षेप मानते हैं। जहाँ प्रकृति को एक छोटा सा बदलाव करने में हजारों साल लगते थे, जीन एडिटिंग वही काम कुछ हफ्तों में कर देती है। विज्ञान अब केवल बीजों का अध्ययन नहीं कर रहा, बल्कि वह खुद एक ‘बायोलॉजिकल प्रोग्रामर’ की भूमिका में आ गया है, जो भविष्य की खेती का नया सॉफ्टवेयर लिख रहा है।

विशेषतापारंपरिक खेती (Traditional)जीन-एडिटेड खेती (Gene-Edited)
प्रक्रिया (Process)बीजों के प्राकृतिक चयन और संकरण (Cross-breeding) पर आधारित।डी.एन.ए. के ‘सॉफ्टवेयर’ को प्रयोगशाला में सीधे बदलने पर आधारित।
समय (Time)एक नया गुण (जैसे मिठास या मजबूती) विकसित करने में 10 से 15 साल लग सकते हैं।वांछित बदलाव मात्र कुछ हफ्तों या महीनों में किया जा सकता है।
सटीकता (Precision)इसमें हजारों जीन अनियंत्रित रूप से मिल जाते हैं, जिससे परिणाम अनिश्चित हो सकते हैं।इसमें आणविक कैंची‘ (CRISPR) का उपयोग कर केवल एक विशिष्ट जीन को ही बदला जाता है।
बाहरी हस्तक्षेपप्रकृति और मौसम पर पूरी तरह निर्भर।वैज्ञानिक हस्तक्षेप के माध्यम से प्रतिकूल मौसम (सूखा/बाढ़) के लिए ‘इन-बिल्ट’ सुरक्षा।
कीटनाशक का प्रयोगकीटों से बचाने के लिए भारी मात्रा में बाहरी रसायनों का छिड़काव आवश्यक है।पौधे की कोडिंग ऐसी की जाती है कि वह स्वयं जहरीले कीटों के प्रति प्रतिरोधक बन जाए।
पोषण (Nutrition)अनाज में मौजूद प्राकृतिक पोषण तक ही सीमित।कोडिंग बदलकर विटामिन, प्रोटीन और मिनरल्स की मात्रा को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

बीज की कोडिंग वास्तव में उस ‘कॉस्मिक इंटेलिजेंस’ का प्रमाण है, जहाँ सृजनकर्ता और सृजन अलग-अलग नहीं हैं। ईश्वर कोई ‘बाहरी प्रोग्रामर’ नहीं है, बल्कि वह स्वयं उस ‘प्रोग्राम’ की भाषा है जो हर परमाणु और कोशिका में स्पंदित हो रही है। हम अपने विचारों, भोजन और वातावरण को बदलकर अपने जीवन की ‘कोडिंग’ को स्वयं लिख सकते हैं।