नैनीताल/मुजफ्फरपुर। ‘मेरा युवा भारत’ कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड के नैनीताल में 9 से 13 फरवरी तक आयोजित पांच दिवसीय अंतर्राज्यीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का भव्य आगाज हुआ। इस कार्यक्रम में बिहार की समृद्ध संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने के लिए राज्य भर से कुल 37 प्रतिभागियों का चयन किया गया है, जिसमें मुजफ्फरपुर जिले के 7 प्रतिभागी और 1 एस्कॉर्ट शामिल हैं।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि नैनीताल नगर पालिका की चेयरमैन सरस्वती खेतवाल, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति दीवान सिंह रावत और जिला युवा अधिकारी डॉलवी तेवतिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र में अतिथियों ने बिहार से आए युवाओं का गर्मजोशी से स्वागत किया और बताया कि कैसे ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं।
पारंपरिक ‘ऐपण‘ कला बनी आकर्षण का केंद्र
उद्घाटन के बाद आयोजित दूसरे सत्र में प्रतिभागियों ने उत्तराखंड की प्रसिद्ध पारंपरिक कला ‘ऐपण‘ (कुमाऊनी पेंटिंग) के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों ने युवाओं को ऐपण की उत्पत्ति, इसकी बारीकियों और सांस्कृतिक महत्व से रूबरू कराया। मुजफ्फरपुर सहित बिहार के अन्य जिलों से आए युवाओं ने न केवल इस कला को करीब से देखा, बल्कि कलाकारों से संवाद कर इसकी बारीकियां भी सीखीं।
सांस्कृतिक मेलजोल से बढ़ेगा अनुभव
प्रतिभागियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उत्तराखंड की कला और संस्कृति को इतने करीब से समझना उनके लिए एक प्रेरणादायक अनुभव है।
उद्देश्य: बिहार और उत्तराखंड के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
आगामी गतिविधियाँ: अगले तीन दिनों में प्रतिभागियों को उत्तराखंड के अन्य पारंपरिक कौशल, हस्तशिल्प और लोक विधाओं से परिचित कराया जाएगा।
इस कार्यक्रम के माध्यम से युवा न केवल एक-दूसरे की परंपराओं को जान रहे हैं, बल्कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को भी साकार कर रहे हैं।
सकरा नगर पंचायत में ‘अंधेर नगरी-चौपट राजा’; भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ीं स्ट्रीट लाइटें दिन में उगल रही हैं रोशनी, डस्टबिन हुए बदहाल
रिपोर्ट : एस.एस. कुमार ‘पंकज’
सकरा (मुजफ्फरपुर) : कहते हैं कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? मुजफ्फरपुर जिले की सकरा नगर पंचायत वर्तमान में इसी विडंबना से जूझ रही है। यहाँ विकास की गंगा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का गंदा नाला बह रहा है। नगर पंचायत की सत्ता के गलियारों से लेकर गलियों के मोड़ तक, हर तरफ घोटाले की गूँज है। हालत यह है कि खुद नगर पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधि (पार्षद) ही चीख-चीख कर कह रहे हैं कि यहाँ सबकुछ ‘लूट’ की भेंट चढ़ चुका है। पिछले कुछ महीनों में जारी हुए पत्रांकों ने इस नगर पंचायत की उस काली हकीकत को उजागर कर दिया है, जिसे अब तक सरकारी फाइलों के अंबार के नीचे दबा कर रखा गया था।
दिनदहाड़े उजाले का अंधेर: हाई मास्ट लाइट घोटाला
सकरा की सड़कों पर भ्रष्टाचार का सबसे जीवंत और शर्मनाक सबूत देखना हो, तो दोपहर के समय यहाँ की सड़कों पर नजर डालिए। जहाँ सूरज अपनी पूरी रोशनी बिखेर रहा होता है, वहीं लाखों की लागत से लगी हाई मास्ट लाइटें दिन के उजाले में जल रही होती हैं।पत्रांक 126 (दिनांक 26.09.2025) के अनुसार, नगर पंचायत में हाई मास्ट लाइट की खरीद और स्थापना में भारी अनियमितता बरती गई है। पार्षदों का आरोप है कि प्रति यूनिट लाइट पर 8 से 9 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया है, लेकिन धरातल पर लगी लाइटें बेहद घटिया दर्जे की हैं। तकनीकी खराबी और सेंसर की अनुपलब्धता के कारण ये लाइटें रात के बजाय दिन में जलती हैं। यह न केवल सरकारी राजस्व और बिजली की भीषण बर्बादी है, बल्कि उस सिंडिकेट की पोल खोलता है जिसने ‘कमीशन’ के चक्कर में जनता के पैसे से खिलवाड़ किया है। सकरा की जनता पूछ रही है—क्या यह विकास है या दिनदहाड़े डकैती?
दिन के उजाले में जलती हाई मास्ट लाइट: बिजली की बचत और संरक्षण के दावों के बीच, सकरा बाजार की हाई मास्ट लाइटें दिन में भी जलती पाई गईं। यह न केवल ऊर्जा की बर्बादी है, बल्कि राजस्व का भी नुकसान है। दायें की तस्वीर में डस्टबिन बना ‘खूँटा’: वार्ड संख्या 8 में वीरेंद्र राय के मकान के पास मुख्य सड़क पर स्थिति और भी चौंकाने वाली है। स्वच्छता अभियान के तहत लाखों खर्च कर लगाए गए डस्टबिन का उपयोग अब कूड़ा डालने के बजाय गायों को बांधने के लिए किया जा रहा है।
डस्टबिन का ‘कचरा‘ और कागजों पर सफाई
स्वच्छता के नाम पर सकरा नगर पंचायत ने जो ‘खेल’ खेला है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। पत्रांक 126 में ही इस बात का साक्ष्यों के साथ उल्लेख है कि स्वच्छता अभियान के तहत खरीदी गई सामग्री में बंदरबांट की गई है।
बाल्टी घोटाला: आरोप है कि जो बाल्टियाँ कागजों पर 164 रुपये प्रति नग की दर से खरीदी दिखाई गई हैं, उनकी वास्तविक बाजार कीमत महज 40 रुपये है।
बदहाल डस्टबिन: आज सकरा की गलियों में लगे डस्टबिन खुद कचरा बन चुके हैं। घटिया प्लास्टिक और कमजोर बनावट के कारण ये कुछ ही महीनों में टूटकर बिखर गए हैं।
जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये नाली की गंदगी की तरह बहा दिए गए और बदले में मिला तो सिर्फ टूटा हुआ प्लास्टिक और बजबजाते सड़को पर कूड़े का अम्बार ।
अरुण गुप्ता पार्षद (वार्ड संख्या 01) के घर के सामने लत्तर में लिपटा डस्टबीन, तस्वीर में साफ स्पष्ट है कि यहां सफाई की हालत ऐसी है की महीनों से उपयोग में नहीं आ रहा है डस्टबीन। वार्ड 1 की ज़मीनी हकीकत: पार्षद के द्वार पर ‘लावारिस’ हुआ डस्टबिन नगर पंचायत सकराके वार्ड संख्या 01 से आई यह तस्वीर प्रशासन के दावों की पोल खोलती है। हैरानी की बात यह है कि यह नज़ारा कहीं और नहीं, बल्कि खुद पार्षद अरुण गुप्ताके आवास के ठीक सामने का है। मुख्य बातें जो सवाल खड़े करती हैं: प्रकृति का कब्ज़ा:डस्टबिन का लताओं और झाड़ियों से लिपटा होना यह बताता है कि यहाँ महीनों से न तो सफाई कर्मी पहुँचे हैं और न ही किसी ने इसे खाली करने की ज़हमत उठाई है। पार्षद की उदासीनता:जब जनप्रतिनिधि के अपने घर के सामने सफाई का यह आलम है, तो आम जनता की गलियों की स्थिति क्या होगी? लाखों की बर्बादी:जनता के टैक्स के पैसों से खरीदे गए ये डस्टबिन अब केवल शो-पीस बनकर रह गए हैं। जनता का सवाल: “क्या डस्टबिन केवल फोटो खिंचवाने और कागजों पर सफाई दिखाने के लिए लगाए गए थे? अगर पार्षद के घर के सामने ही सफाई नहीं है, तो पूरे वार्ड की जिम्मेदारी किसके भरोसे है?”
अविश्वास की आग: जब अपनों ने ही दिखाया आईना
नगर पंचायत की राजनीति में ‘हमाम में सब नंगे’ होने की चर्चा तब आम हो गई, जब खुद उपाध्यक्ष और पार्षदों ने मुख्य पार्षद (अध्यक्ष) के खिलाफ बगावत कर दी। पत्रांक 104 (दिनांक 05.08.2025) के माध्यम से मुख्य पार्षद मोहम्मद हैदर अली के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।
इस पत्र में पार्षदों ने जो आरोप लगाए हैं, वे किसी भी लोकतांत्रिक संस्था के लिए शर्मनाक हैं:
तानाशाही रवैया: अध्यक्ष द्वारा निर्वाचित सदस्यों की अवहेलना और मनमानी।
भ्रष्टाचार में संलिप्तता: विकास योजनाओं में पारदर्शिता का पूर्ण अभाव।
वित्तीय गबन: सरकारी फंड का निजी लाभ के लिए बंदरबांट।
यह अविश्वास प्रस्ताव साबित करता है कि सकरा नगर पंचायत के भीतर ‘ऑल इज वेल’ नहीं है, बल्कि लूट की मलाई के बंटवारे को लेकर तलवारें खिंची हुई हैं।
बिना वर्क ऑर्डर के जेसीबी: ‘गुंडाराज‘ का ट्रेलर
प्रशासनिक अराजकता का इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा कि वार्ड संख्या 05 में बिना किसी आधिकारिक आदेश के ही सरकारी संपत्ति को तहस-नहस कर दिया गया। पत्रांक 494/2025 (दिनांक 19.08.2025) में उपाध्यक्ष रणवीर कुमार सिंह ने गंभीर शिकायत की है कि चुलाही राय के घर से बच्चू बाबू के घर तक बनी-बनाई पीसीसी सड़क को जेसीबी लगाकर उखाड़ दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि इस कार्य के लिए कोई ‘वर्क ऑर्डर‘ (कार्य आदेश) जारी नहीं किया गया था। बिना किसी टेंडर या आदेश के सड़क तोड़ना न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि यह दर्शाता है कि यहाँ कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। क्या यह केवल सड़क तोड़ना था या पुराने काम को नया दिखाकर फिर से पैसा हड़पने की साजिश?
अवैध नियुक्तियों का ‘भर्ती मेला‘ और गबन का खेल
सकरा नगर पंचायत अब ‘नौकरी की मंडी’ बन चुकी है। पत्रांक 126 और 127 (दिनांक 26.09.2025) में पार्षदों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक को सूचित किया है कि यहाँ समूह ‘ग’ और ‘घ’ के पदों पर अवैध तरीके से नियुक्तियाँ की गई हैं।
भाई-भतीजावाद: बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन या चयन प्रक्रिया के, मुख्य पार्षद और उनके करीबियों ने अपने सगे-संबंधियों को नौकरी पर रख लिया।
सांप्रदायिक समीकरण का आरोप: पत्रों में स्पष्ट आरोप है कि नियुक्तियों में एक विशेष ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण का पालन कर अन्य वर्गों की अनदेखी की गई है, जिससे सामाजिक वैमनस्य का खतरा बढ़ गया है।
फर्जी मजदूर: कागजों पर सफाई मजदूरों की एक लंबी फौज दिखाई जाती है, जिनका भुगतान हर महीने संवेदक और अधिकारियों की जेब में जाता है। धरातल पर सफाई करने वाला कोई नहीं है, लेकिन सरकारी खजाने से ‘वेतन’ नियमित रूप से निकल रहा है।
पत्रांकों के आईने में प्रशासनिक अवहेलना
सकरा नगर पंचायत में जो पत्र विगत महीनों में जारी हुए, वे भ्रष्टाचार की पूरी कहानी क्रमवार बयां करते हैं:
पत्रांक 126: भ्रष्टाचार के पांच बिंदुओं का कच्चा चिट्ठा (हाई मास्ट, डस्टबिन, अवैध बहाली, आचार संहिता उल्लंघन)।
पत्रांक 127: पार्षद अरुण गुप्ता द्वारा स्वच्छता प्रबंधक और संवेदक की मिलीभगत से लाखों के गबन का खुलासा।
पत्रांक 104: अविश्वास प्रस्ताव, जो सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति की ईमानदारी पर बड़ा सवालिया निशान है।
स्व-प्रचार और आचार संहिता की धज्जियां
विकास कार्यों के साइन बोर्ड और स्वागत द्वारों पर सरकारी राशि का उपयोग कर मुख्य पार्षद द्वारा अपनी तस्वीरें लगवाना नियमों का खुला उल्लंघन है। पार्षदों का आरोप है कि सरकारी मंचों और संपत्तियों का उपयोग निजी राजनीतिक विज्ञापन के लिए किया जा रहा है, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।
निष्कर्ष: क्या जांच होगी या फाइलों में दबेगा सच?
सकरा नगर पंचायत की वर्तमान स्थिति ‘भ्रष्टाचार के दलदल’ जैसी है, जहाँ जितना गहरा खोदा जाए, उतना ही कीचड़ निकल रहा है। जिलाधिकारी, विभागीय मंत्री और माननीय मुख्यमंत्री तक इन पत्रों का पहुँचना यह दर्शाता है कि मामला अब स्थानीय स्तर से बाहर निकल चुका है।
जनता देख रही है कि कैसे उसकी गाढ़ी कमाई के पैसे से दिन में लाइटें जलाई जा रही हैं और कैसे भ्रष्टाचार के डस्टबिन में उनके हकों को फेंका जा रहा है। अब सवाल प्रशासन से है—क्या इन पत्रांकों पर संज्ञान लेकर दोषियों को जेल भेजा जाएगा, या फिर ‘हमाम में सब नंगे’ वाली बात सच साबित होगी और जांच की फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाएंगी?
घटनाक्रम एवं प्रमुख आरोप
तिथि
पत्रांक संख्या
घटनाक्रम / प्रमुख आरोप
05 अगस्त, 2025
पत्रांक- 104
अविश्वास प्रस्ताव: मुख्य पार्षद मोहम्मद हैदर अली के खिलाफ उपाध्यक्ष और पार्षदों ने मोर्चा खोला। शक्तियों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का पहला औपचारिक दस्तावेज सामने आया।
19 अगस्त, 2025
पत्रांक- 494
प्रशासनिक अराजकता: वार्ड संख्या 05 में बिना किसी ‘वर्क ऑर्डर’ के जेसीबी चलाकर सरकारी सड़क को ध्वस्त करने का मामला। उपाध्यक्ष ने FIR दर्ज करने की मांग की।
26 सितम्बर, 2025
पत्रांक- 126
महा-खुलासा (5 आरोप): मुख्यमंत्री और डीएम को भेजी गई चिट्ठी। इसमें हाई मास्ट लाइट, ₹164 वाली बाल्टी को ₹40 में खरीदने, अवैध बहाली और विज्ञापन में फोटो चमकाने जैसे 5 गंभीर आरोप लगे।
26 सितम्बर, 2025
पत्रांक- 127
गबन का आरोप: पार्षद अरुण गुप्ता द्वारा स्वच्छता प्रबंधक और संवेदक की मिलीभगत से लाखों रुपये के वित्तीय गबन और ‘फर्जी मजदूरों’ के नाम पर पैसे निकालने का सनसनीखेज खुलासा।
सकरा की जनता जाग चुकी है : जवाब तो देना होगा
जवाब कब देंगे : सकरा नगर पंचायत की जनता जानना चाहती है इन सवालों के जवाब ?
1. कार्यपालक पदाधिकारी (EO) से तीखे सवाल
पत्रांक 126 में उल्लेखित हाई मास्ट लाइटों के दिन में जलने और तकनीकी रूप से खराब होने के बावजूद, संवेदक को पूर्ण भुगतान किस आधार पर किया गया? क्या आपने भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया था?
पार्षदों ने पत्रांक 127 में फर्जी मजदूरों के नाम पर लाखों के गबन का आरोप लगाया है। क्या कार्यालय के पास उन मजदूरों का मस्टर रोल और आधार लिंकिंग डेटा उपलब्ध है? यदि नहीं, तो भुगतान कैसे हो रहा है?
पत्रांक 494 के अनुसार, वार्ड 05 में बिना किसी ‘वर्क ऑर्डर’ के सरकारी सड़क तोड़ी गई। एक जिम्मेदार अधिकारी के नाते आपने अब तक दोषी व्यक्ति या संवेदक पर FIR दर्ज क्यों नहीं की?
पत्रों में आरोप है कि पिछले कई महीनों से बोर्ड की बैठक नहीं हुई है। नियमतः बैठक बुलाना आपकी जिम्मेदारी है; क्या आप किसी दबाव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं?
अवैध नियुक्तियों के आरोपों पर आपकी क्या सफाई है? क्या इन नियुक्तियों के लिए बिहार नगरपालिका चयन बोर्ड के नियमों का पालन किया गया या यह पूरी तरह ‘बैकडोर एंट्री’ है?
2. मुख्य पार्षद (अध्यक्ष) से तीखे सवाल
आपके विरुद्ध पत्रांक 104 के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है और आपके अपने ही साथी भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। क्या आप अब भी मानते हैं कि आपको सदन का विश्वास प्राप्त है?
सरकारी पैसे से बने स्वागत द्वारों और बोर्डों पर आपकी व्यक्तिगत तस्वीर का क्या औचित्य है? क्या यह सरकारी धन का उपयोग निजी ब्रांडिंग और राजनीतिक लाभ के लिए करना नहीं है?
₹164 वाली डस्टबिन बाल्टियों की जगह ₹40 की घटिया सामग्री बांटने के आरोपों पर आपका क्या कहना है? क्या इस खरीद में आपकी मौन सहमति शामिल थी?
नियुक्तियों में ‘MY’ समीकरण और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लग रहे हैं। क्या आप उन कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक करने की चुनौती स्वीकार करेंगे ताकि पारदर्शिता सिद्ध हो सके?
विकास कार्यों में पार्षदों की अनदेखी क्यों की जा रही है? क्या नगर पंचायत का विकास केवल आपकी पसंद के कुछ चहेते वार्डों और संवेदकों तक सीमित है?
3. उप मुख्य पार्षद (उपाध्यक्ष) से तीखे सवाल
आपने पत्रांक 494 में सड़क तोड़ने के गंभीर आरोप लगाए हैं। क्या आपके पास इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि इसमें मुख्य पार्षद या किसी विशेष अधिकारी की मिलीभगत थी?
आप स्वयं व्यवस्था का हिस्सा हैं, फिर भी आपको मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पत्र भेजने की नौबत क्यों आई? क्या नगर पंचायत के भीतर शिकायत निवारण का तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है?
अविश्वास प्रस्ताव लाने में हुई देरी क्या यह संकेत नहीं देती कि पहले ‘तालमेल’ बिठाने की कोशिश हुई और बात न बनने पर बगावत की गई? ‘हमाम में सब नंगे’ वाली चर्चा पर आपका क्या कहना है?
क्या आप उन ‘फर्जी मजदूरों’ और ‘घटिया लाइटों’ की सूची जनता के सामने लाएंगे, जिनका जिक्र आपने अपने पत्रों में किया है?
यदि प्रशासन इन पत्रों पर कार्रवाई नहीं करता है, तो आपका अगला कदम क्या होगा? क्या आप केवल पत्र तक सीमित रहेंगे या इस भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे?
शिकायतकर्ता पार्षदों से सीधे सवाल: अब तक चुप क्यों थे?
नगर पंचायत के भ्रष्टाचार के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले वार्ड पार्षदों की भूमिका पर भी जनता सवाल उठा रही है। इन 5 सवालों का जवाब शिकायतकर्ता पार्षदों को भी देना चाहिए:
भ्रष्टाचार के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले वार्ड पार्षदों का नाम
क्र.सं.
नाम
पद
मुख्य भूमिका / पत्रांक
1
रणवीर कुमार सिंह
उप मुख्य पार्षद
अविश्वास प्रस्ताव (105) और सड़क तोड़ने की शिकायत (494) के मुख्य हस्ताक्षरकर्ता।
2
अरुण गुप्ता
पार्षद, वार्ड संख्या 01
गबन (127) और सामग्री खरीद में घोटाले (126) के मुख्य शिकायतकर्ता।
3
इन्दु देवी
पार्षद, वार्ड संख्या 11
अविश्वास प्रस्ताव और सामूहिक शिकायत पत्रों पर हस्ताक्षर।
4
अमित कुमार
पार्षद, वार्ड संख्या 10
अविश्वास प्रस्ताव और भ्रष्टाचार विरोधी पत्रों पर हस्ताक्षर।
5
उदय कुमार
पार्षद, वार्ड संख्या 09
अविश्वास प्रस्ताव और बोर्ड बैठक न बुलाने संबंधी विरोध पत्र पर हस्ताक्षर।
6
मो. सेराजुद्दीन
पार्षद, वार्ड संख्या 08
अविश्वास प्रस्ताव एवं नगर पंचायत की कार्यप्रणाली के विरोध में हस्ताक्षर।
7
सुशीला देवी
पार्षद, वार्ड संख्या 07
अविश्वास प्रस्ताव और अवैध बहाली के विरोध में हस्ताक्षर।
8
रीता कुमारी
पार्षद, वार्ड संख्या 06
अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर।
देर से क्यों जागी चेतना? भ्रष्टाचार के जिन मामलों (हाई मास्ट लाइट, डस्टबिन खरीद) का जिक्र आप आज कर रहे हैं, ये प्रक्रियाएं महीनों से चल रही थीं। जब तक टेंडर पास हो रहे थे और काम शुरू हुआ, तब तक आपने बोर्ड की बैठकों में लिखित विरोध क्यों दर्ज नहीं कराया?
“हिस्सेदारी” का टकराव या जनहित? स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, यह लड़ाई तब शुरू हुई जब मलाई की बंदरबांट में “तालमेल” नहीं बैठ पाया। क्या आप यह गारंटी दे सकते हैं कि आपकी नाराजगी व्यक्तिगत हितों के बजाय पूरी तरह जनहित में है?
गबन का हिस्सा: पार्षदों का आरोप है कि सामानों की खरीद में भारी कमीशन खोरी हुई है। क्या आपके अपने वार्डों में वितरित हुए सामानों की गुणवत्ता पर आपने उसी समय सवाल उठाए थे, या आप भी उस समय “मौन सहमति” का हिस्सा थे?
अविश्वास प्रस्ताव की टाइमिंग: अविश्वास प्रस्ताव लाने का समय तब क्यों चुना गया जब भ्रष्टाचार के पत्र सार्वजनिक हुए? क्या यह केवल मुख्य पार्षद पर दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवाने की एक रणनीति है?
सबूतों की जिम्मेदारी: आपने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र तो लिख दिए, लेकिन क्या आपके पास इन घपलों के ऐसे ठोस तकनीकी सबूत (जैसे लैब टेस्ट रिपोर्ट या वित्तीय अनियमितता के पक्के दस्तावेज) हैं जो कोर्ट में टिक सकें, या ये केवल एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने की राजनीति है?
पर्दे के पीछे का ‘सियासी खेल’: जुबान खोलने पर पाबंदी और रसूखदारों का संरक्षण
सकरा नगर पंचायत में भ्रष्टाचार की आग को दबाने के लिए अब ‘डराओ और राज करो’ की नीति अपनाई जा रही है। स्थानीय गलियारों में दबी जुबान से चर्चा है कि इस पूरे खेल को एक ‘कद्दावर राजनेता’ का संरक्षण प्राप्त है, जिसके इशारे पर शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डालने का दबाव बनाया जा रहा है। आलम यह है कि जो पार्षद कल तक पत्रों पर हस्ताक्षर कर रहे थे, आज वे मीडिया के कैमरों के सामने आने से कतरा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बागी पार्षदों को परोक्ष रूप से धमकाया जा रहा है और यह संदेश दिया जा रहा है कि—“जो हुआ सो हुआ, अब आगे बढ़े तो खैर नहीं।” पत्रकारों के सवालों पर पार्षदों का बगलें झांकना या बहाने बनाना इस बात का पुख्ता संकेत है कि ‘सिस्टम’ के खिलाड़ियों ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह डरावनी खामोशी सवाल उठाती है कि क्या सकरा के इन जनप्रतिनिधियों की जुबान किसी राजनीतिक दबाव में सिली गई है या फिर वे खुद किसी बड़े समझौते के इंतजार में अपनी ही शिकायतों से कदम पीछे खींच रहे हैं? यह ‘मैनेजमेंट’ का खेल भ्रष्टाचार से भी ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है।
प्रशासनिक शिथिलता या मौन सहमति? सवालों के घेरे में कार्यपालक पदाधिकारी
सकरा नगर पंचायत में मचे इस महा-संग्राम में सबसे गंभीर उंगली कार्यपालक पदाधिकारी (EO) की कार्यशैली पर उठ रही है। एक प्रशासनिक अधिकारी का मूल दायित्व सरकारी धन की सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना होता है, लेकिन यहाँ EO अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह ‘फेल्योर’ साबित हुए हैं। हाई मास्ट लाइटों का दिन में जलना और बिना वर्क ऑर्डर के सड़कों का तोड़ा जाना जैसी घटनाएं उनके नाक के नीचे होती रहीं, लेकिन उन्होंने कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। पार्षदों का आरोप है कि EO केवल रबर स्टैंप बनकर रह गए हैं और मुख्य पार्षद की मनमानियों को रोकने के बजाय उन्हें मूक सहमति दे रहे हैं। वित्तीय गबन की शिकायतों के बाद भी संवेदकों के भुगतानों पर रोक न लगाना और भ्रष्टाचार की फाइलों पर कुंडली मारकर बैठना यह दर्शाता है कि प्रशासन की पारदर्शिता शून्य हो चुकी है। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि पद की गरिमा के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है, जिसने भ्रष्टाचार के खिलाड़ियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।
लोकतंत्र की शुचिता पर ‘अविश्वास’ का दाग
सकरा नगर पंचायत का वर्तमान परिदृश्य यह स्पष्ट करता है कि यहाँ विकास की योजनाएँ केवल कागजों और कमीशनों तक सीमित रह गई हैं। एक ओर जहाँ हाई मास्ट लाइटों का दिन में जलना और डस्टबिनों की बदहाली वित्तीय गबन का प्रत्यक्ष प्रमाण दे रही है, वहीं दूसरी ओर बिना वर्क ऑर्डर के सड़कों का ध्वस्तीकरण और अवैध बहाली के आरोप प्रशासनिक अराजकता की पराकाष्ठा है।
मुख्य पार्षद के विरुद्ध पार्षदों का एकजुट होना और ‘हमाम में सब नंगे’ जैसी चर्चाएं यह संकेत देती हैं कि संस्था के भीतर पारदर्शिता और आपसी विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका है। मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी तक पहुँचे ये पत्रांक महज शिकायतें नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक संस्था के विफल होने की चेतावनी हैं। यदि इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच नहीं की गई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई (FIR) नहीं हुई, तो सरकारी खजाने की लूट का यह ‘सकरा मॉडल’ अन्य निकायों के लिए एक गलत नजीर बन जाएगा। अंततः, इस सत्ता संघर्ष और भ्रष्टाचार के खेल में सबसे बड़ा नुकसान सकरा की आम जनता का हो रहा है, जो टैक्स देने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं और ईमानदारी के शासन के लिए तरस रही है।
प्रखंड मुख्यालय पर गूँजे नारे, 11 सूत्री मांगों का ज्ञापन बीडीओ को सौंपा; 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान
ताजपुर/समस्तीपुर (9 फरवरी, 2026): किसान रजिस्ट्री में वंशावली को शामिल करने, गंडक नहर परियोजना का उचित मुआवजा देने और कृषि संकट के समाधान जैसी 11 सूत्री मांगों को लेकर सोमवार को अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले किसानों ने ताजपुर में हुंकार भरी। सैकड़ों की संख्या में किसानों ने विशाल जुलूस निकालकर अंचल, कृषि और प्रखंड कार्यालयों का घेराव किया और घंटों प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की।
11 सूत्री मांगों का ज्ञापन बीडीओ को सौंपते किसान नेता
राजधानी चौक से शुरू हुआ जनाक्रोश
सोमवार सुबह बड़ी संख्या में किसान राजधानी चौक पर एकत्रित हुए। हाथों में झंडे, बैनर और मांगों से संबंधित तख्तियां लिए किसानों का हुजूम नारेबाजी करते हुए सबसे पहले अंचल कार्यालय पहुँचा। वहां प्रदर्शन के बाद जुलूस कृषि कार्यालय और अंत में प्रखंड कार्यालय पहुँचा। किसानों के कड़े तेवर को देखते हुए प्रशासनिक महकमे में हलचल मची रही।
प्रमुख मांगें जिन पर अड़े किसान:
भूमि व राजस्व: किसान रजिस्ट्री में वंशावली को शामिल करना और जमाबंदी पंजी में तत्काल सुधार।
मुआवजा: गंडक नहर परियोजना में अधिग्रहित जमीन और मकान का वर्तमान सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा।
ऋण व बिजली: केसीसी लोन माफी और बिजली व बीज विधेयक 2025 की वापसी।
पेंशन व खाद: वृद्ध किसानों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन और यूरिया-डीएपी की किल्लत दूर करना।
स्थानीय मुद्दे: ताजपुर को ‘मसाला उत्पादक प्रखंड’ का दर्जा देकर यहाँ कृषि आधारित उद्योग लगाना।
प्रतिनिधिमंडल ने बीडीओ को दी चेतावनी
प्रदर्शन के बाद किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में एक सभा आयोजित हुई। इस दौरान बीडीओ रवि भूषण के बुलावे पर एक 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें 11 सूत्री मांगपत्र सौंपा। किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई से अवगत नहीं कराया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
“सरकार किसानों की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। अगर गंडक नहर परियोजना के विस्थापितों को चार गुना मुआवजा और किसानों को एमएसपी की गारंटी नहीं मिली, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।” — सुरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रखंड सचिव (भाकपा माले)
12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले नेता आसिफ होदा ने कहा कि आगामी 12 फरवरी को देशव्यापी आम हड़ताल के समर्थन में गांधी चौक से सुबह 11 बजे संयुक्त जुलूस निकाला जाएगा। सभा को राजदेव प्रसाद सिंह, संजीव राय, अनीता देवी, सुनैना देवी समेत दर्जनों वक्ताओं ने संबोधित किया।
दो दिनों में सबमर्सिबल ठीक नहीं हुआ तो 12 को होगा चक्का जाम: सुरेंद्र सिंह
ताजपुर (समस्तीपुर) | 9 फरवरी 2026 ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 27, ब्रह्मस्थान में पिछले एक महीने से जलापूर्ति ठप रहने से नाराज महिलाओं का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। पानी की किल्लत से जूझ रही दर्जनों महिलाएं अपनी फरियाद लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचीं। कार्यपालक पदाधिकारी जुल्फेकार अली प्यामी के कार्यालय में मौजूद न रहने पर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कार्यालय के समक्ष खड़े होकर जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
नेताओं के हस्तक्षेप के बाद बनी बात : हंगामे की सूचना मिलते ही भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राजद नेता दीपक यादव और वार्ड पार्षद अशोक राय मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित महिलाओं की समस्याओं को सुना और कार्यालय के कर्मियों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता की। अधिकारियों ने गंभीरता दिखाते हुए आश्वासन दिया कि अगले दो दिनों के भीतर खराब सबमर्सिबल की मरम्मत करा दी जाएगी या नया सबमर्सिबल लगाकर जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
माले ने दी चक्का जाम की चेतावनी: मौके पर मौजूद भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रशासन को कड़े लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “यदि दो दिनों के अंदर जलापूर्ति शुरू नहीं की गई, तो 12 फरवरी को भाकपा माले के बैनर तले चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा।”
प्रदर्शन में ये रहीं शामिल प्रदर्शन करने वाली महिलाओं में मुख्य रूप से अनीता कुमारी, मीरा कुमारी, अनूपी कुमारी, भोली देवी, रीना देवी, पूनम देवी सहित वार्ड की कई अन्य महिलाएं उपस्थित थीं। महिलाओं का कहना है कि एक महीने से पानी के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
ताजपुर (समस्तीपुर): स्थानीय थाना क्षेत्र के दर्जीनिया चौर में बेखौफ अपराधियों ने रविवार को एक युवक की गोलियों से भूनकर बेरहमी से हत्या कर दी। मृतक की पहचान मिर्जापुर (निकसपुर) निवासी पलटन सहनी के 32 वर्षीय पुत्र गणेश कुमार के रूप में हुई है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और आक्रोशित लोगों ने नेशनल हाईवे को जाम कर दिया है।
शव को सड़क पर रखकर एन एच को जाम करते लोग
घटना का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गणेश कुमार जब दर्जीनिया चौर की ओर गया था, तभी घात लगाए अपराधियों ने उसे घेर लिया। हमलावरों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए गणेश के शरीर में गोलियां उतार दीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के बाद अपराधी हथियार लहराते हुए फरार हो गए।
सड़क पर उतरा जन-आक्रोश
हत्या की खबर मिलते ही मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने शव के साथ ताजपुर के गांधी चौक पर नेशनल हाईवे (NH) को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं। जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं।
शव को सड़क पर रखकर एन एच को जाम करते लोग
राजनीतिक प्रतिक्रिया और मांग
घटना की सूचना मिलते ही भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने मौके पर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की और कानून व्यवस्था पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
“क्षेत्र में हत्या और अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पुलिस का इकबाल खत्म होता दिख रहा है। हम मांग करते हैं कि इस हत्याकांड की उच्च स्तरीय जांच हो, हत्यारों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए और बढ़ते अपराध पर लगाम लगाई जाए।”
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही ताजपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची है और लोगों को समझाने-बुझाने का प्रयास कर रही है। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है और आसपास के इलाकों में छापेमारी की जा रही है।
ताजपुर क्षेत्र में किसानों और मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनों का दौर शुरू हो गया है। रविवार को दो अलग-अलग महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें 9 फरवरी के प्रखंड स्तरीय धरने और 12 फरवरी की देशव्यापी आम हड़ताल को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया गया।
ताजपुर प्रखंड मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किये जाने को लेकर रविवार की रात बैठक करते किसान महासभा के नेता गण
9 फरवरी: किसान रजिस्ट्री और मुआवजे की मांग पर प्रखंड मुख्यालय पर प्रदर्शन
अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले 9 फरवरी 2026 को ताजपुर प्रखंड मुख्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारी को लेकर रविवार रात मोतीपुर (वार्ड 26) में किसानों की एक अहम बैठक हुई।
मुख्य मांगें:
किसान रजिस्ट्री में वंशावली की अनिवार्यता लागू करना।
बिजली एवं बीज विधेयक 2025 को तत्काल वापस लेना।
KCC लोन को पूरी तरह माफ करना और खेतों तक सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था करना।
गंडक नदी परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि और मकानों का चार गुना मुआवजा देना।
मनरेगा में किए गए हालिया बदलावों को रद्द करना।
बैठक में शामिल प्रमुख लोग: किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, मंजीत कुमार, दिनेश प्रसाद सिंह समेत बड़ी संख्या में स्थानीय किसान मौजूद थे।
12 फरवरी: ‘आम हड़ताल’ से थमेगा चक्का, संयुक्त संगठनों ने भरी हुंकार
आगामी 12 फरवरी को होने वाली देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए रविवार को जनता मैदान में श्रम, किसान और खेत-मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक संपन्न हुई।
विवाद के मुख्य बिंदु: नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 44 श्रम कोड को बदलकर 4 कोड बनाना मजदूर विरोधी है। साथ ही, मनरेगा का नाम बदलने और बिजली-बीज विधेयक 2025 को कॉर्पोरेट घरानों के हित में बताया।
जनता मैदान में श्रम, किसान और खेत-मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक में शामिल नेता गण
नेताओं के प्रमुख बयान
बैठक के दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी:
“हमने फैसला लिया है कि 12 फरवरी को पूरे आंदोलन के माध्यम से किसान और रसोइया के हित में मोदी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।” — रामप्रीत पासवान, कार्यकारिणी सदस्य, सीपीआई समस्तीपुर।
“मजदूरों को गुलाम बनाने वाले श्रम कानूनों और बिजली विधेयक के खिलाफ 12 फरवरी को भारत को पूर्ण रूप से जाम करने का निर्णय लिया गया है।” — चंद्रशेखर राय, जिला संयोजक, एआईसीयू (AICU), समस्तीपुर।
“ताजपुर के जनता मैदान में संयुक्त बैठक कर रणनीति बनाई गई है। हम क्षेत्र में जाकर बड़ी तैयारी करेंगे ताकि इस आम हड़ताल को सफल बनाया जा सके।” — ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, प्रखंड अध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान महासभा, ताजपुर।
हड़ताल का कार्यक्रम:
समय: 12 फरवरी, सुबह 11:00 बजे।
स्थान: गांधी चौक, ताजपुर से संयुक्त जुलूस निकलेगा।
समापन: राजधानी चौक पर धरना-प्रदर्शन और सभा के साथ।
प्रमुख उपस्थिति: भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह, भाकपा के रामप्रीत पासवान, एसयूसीआई के चंद्रशेखर राय, आशा संघ की सविता सिंह, रसोइया संघ की गिरजा देवी समेत कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। किसान और मजदूर नेताओं ने ताजपुर के आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इन दोनों कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
समीक्षा प्रकाशन से प्रकाशित हो रही है लेखक की 17वीं कृति; बज्जिका भाषा के गौरव को पुनर्जीवित करने का प्रयास
पटना/मुजफ्फरपुर। साहित्य और संस्कृति के संगम से उपजी लोकगाथाएं जब महाकाव्य का रूप लेती हैं, तो वह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक जीवंत इतिहास बन जाती है। इसी कड़ी में, सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरि विलास राय की बहुप्रतीक्षित कालजयी कृति ‘बसावन-बख्तौर (बज्जिका महाकाव्य)‘ शीघ्र ही पाठकों के बीच आ रही है। समीक्षा प्रकाशन (दिल्ली/मुजफ्फरपुर) द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक न केवल बज्जिका भाषा के साहित्य को समृद्ध करेगी, बल्कि समाज के उन लोकनायकों की वीरता को भी स्वर देगी, जिन्होंने सदियों से जनमानस के हृदय में ‘लोक देवता’ के रूप में स्थान बना रखा है।
हरि विलास राय की बहुप्रतीक्षित कृति ‘बसावन-बख्तौर (बज्जिका महाकाव्य) की एक झलक
लोक देवता से महाकाव्य तक का सफर
लेखक हरि विलास राय का लोकनायकों के प्रति अनुराग किसी से छिपा नहीं है। यह उनकी 17वीं कृति है। इससे पूर्व भी उन्होंने बाबा बसावन और बाबा बख्तौर के शौर्य को अपनी लेखनी के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया है। उनकी पूर्व प्रकाशित कृतियों में बज्जिका नाटक ‘लोक देवता बाबा बसावन‘ और ‘लोक देवता बाबा बख्तौर‘ को पाठकों ने खूब सराहा था। वहीं, हिंदी में रचित ‘बसावन बख्तौर चरित मानस‘ ने तो लोकप्रियता के नए कीर्तिमान स्थापित किए थे।
हिन्दी कृति की अपार सफलता के बाद, बज्जिका क्षेत्र के पाठकों और मातृभाषा प्रेमियों की ओर से निरंतर यह मांग उठ रही थी कि इन लोक देवताओं की वीरगाथा को उनकी अपनी मिट्टी की बोली—’बज्जिका’ में महाकाव्य के रूप में पिरोया जाए। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए, हरि विलास राय ने अपनी लेखनी से इस ‘बसावन बख्तौर बज्जिका महाकाव्य’ का सृजन किया है।
कवि हरि विलास राय अपने रचना संसार के साथ एवं दायें में बाबा बसावन एवं बाबा बख्तौर पर पूर्व में प्रकाशित पुस्तक
कौन थे बसावन, बखतौर और शक्तिरूपा माता गहिल ?
बज्जिका क्षेत्र के लोक-साहित्य और जनमानस में बाबा बसावन और बाबा बखतौर का नाम केवल वीरों के रूप में नहीं, बल्कि शोषितों के रक्षक ‘लोक देवता’ के रूप में अंकित है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, बाबा बसावन का अवतार वैशाली के पानापुर लंगा ग्राम में यादव कुल की माता बहुरा की कोख से तब हुआ था, जब सामंती शक्तियों द्वारा निर्बलों का शोषण चरम पर था. वे प्राचीन इतिहास के ऐसे प्रथम पुरुष माने जाते हैं जिन्होंने हलवाहों और चरवाहों को संगठित कर एक विशाल सेना तैयार की और अत्याचारी राजा दलेल सिंह की गोगरी जेल पर चढ़ाई कर न केवल अपने भाई संतोषी को छुड़ाया, बल्कि 700 कैदियों को दासता से मुक्त कराया. उनकी वीरता का लोहा मानकर अंततः सामंतों को उनके समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा. बसावन और बख्तौर केवल योद्धा ही नहीं, बल्कि एक ‘चरवाहा संस्कृति’ के रक्षक और संगीत प्रेमी भी थे। हाथ में बांसुरी और मन में क्रांति की ज्वाला लिए इन वीरों ने ‘भुइयां संघ’ बनाकर शोषितों, दलितों, पिछड़ों और पशुपालकों को एकजुट किया।
इसी शौर्य परंपरा की दूसरी कड़ी बाबा बखतौर हैं, जिनका जन्म सहरसा जिले के गढ़िया रसलपुर (नोला पंचायत) में हुआ था. बाबा बसावन और बखतौर, दोनों ही अदम्य साहसी, स्वाभिमानी और पशुपालक संस्कृति के अनन्य उपासक थे. इन दोनों वीरों की अटूट श्रद्धा माता गहिल में थी, जो उनकी कुलदेवी थीं. माता गहिल को ‘आदिशक्ति जगदम्बा’ का रूप माना जाता है, जिन्हें लोक में ‘सहस्र चंडी’ या ‘गहिलवार’ के रूप में पूजा जाता है. आज भी पानापुर लंगा में बाबा बसावन, बाबा बखतौर और माता गहिल की प्रतिमाएं एक साथ स्थापित हैं, जहाँ भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए दुग्धाभिषेक करते हैं. यह स्थान आज भी अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और अटूट लोक-आस्था के ‘सिद्धि-पीठ’ के रूप में जीवंत है.
महाकाव्य में वर्णन है कि कैसे इन नायकों ने तत्कालीन अत्याचारी शासकों और जनपदीय सामंत दलेल सिंह के दमनकारी चक्र को चुनौती दी। यह पुस्तक उस कालखंड का सजीव चित्रण करती है जब समाज का एक बड़ा वर्ग अपनी रक्षा के लिए किसी त्राता की राह देख रहा था।
कृति की विशेषताएं: एक सांस्कृतिक दस्तावेज
डॉ. शत्रुघ्न राय ‘शशांक’ ने पुस्तक की समीक्षा में इसे “संस्कृति का दस्तावेज और बसावन-बख्तौर के चरित का दर्पण” बताया है। पुस्तक की भाषा में वह ओज और माधुर्य है जो पाठक को सीधे उस युग से जोड़ देता है।
कला और शौर्य का संगम: नायकों को तेजस्वी रूप में दिखाया गया है, जिनके साथ बाघ और धर्मध्वजा उनकी शक्ति और शुचिता के प्रतीक हैं।
विस्तृत रचना संसार: हरि विलास राय की लेखनी का विस्तार ‘सती सुलोचना’ से लेकर ‘वज्जिकामृत’ और ‘अंगार के फूल’ जैसी विधाओं तक फैला हुआ है।
प्रेरणा का स्रोत: यह महाकाव्य कबीर के सिद्धांतों की तरह ही समाज को एक नई दिशा दिखाने का सामर्थ्य रखता है।
लेखक परिचय: कलम के धनी हरि विलास राय
वैशाली जिले के हाजीपुर सदर (ग्राम-नैनहा) के मूल निवासी हरि विलास राय (जन्म: 07.05.1946) ने अपना संपूर्ण जीवन साहित्य की सेवा में समर्पित कर दिया है। पिता स्व. सीताराम राय और माता स्व. धनपति देवी के संस्कारों को आत्मसात कर उन्होंने बज्जिका और हिन्दी साहित्य को कई अनमोल रत्न दिए हैं। उनकी प्रकाशित कृतियों की सूची लंबी है, जिसमें ‘राजर्षि मोरध्वज’, ‘भक्ति-सरिता’, और ‘संस्मरण के आईने में’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें शामिल हैं।
बहुआयामी रचना संसार: सत्रह कृतियों के शिल्पी
हरि विलास राय का साहित्यिक सफर केवल लोकगाथाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने विविध विधाओं में अपनी लेखनी का लोहा मनवाया है। उनकी सत्रहवीं कृति के रूप में ‘बसावन-बख्तौर’ महाकाव्य के आगमन से पूर्व उनकी 16 अन्य पुस्तकें साहित्य जगत को समृद्ध कर चुकी हैं। उनके रचना संसार में ‘सती सुलोचना‘ (प्रबंध काव्य), ‘वज्जिकामृत‘ (काव्य संग्रह) और ‘बंजारन‘ (कहानी संग्रह) जैसी महत्वपूर्ण बज्जिका रचनाएँ शामिल हैं। वहीं हिंदी साहित्य में उन्होंने ‘राजर्षि मोरध्वज‘ (खंड काव्य), ‘अंगार के फूल‘ (काव्य संग्रह), ‘भक्ति-सरिता‘ जैसी कालजयी कृतियों का सृजन किया है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. दीप नारायण सिंह के व्यक्तित्व पर ‘संस्मरण के आईने में‘ लिखकर अपनी गद्य क्षमता का भी परिचय दिया है। उनकी कृतियों की यह विस्तृत सूची दर्शाती है कि वे समाज, संस्कृति और लोक-आस्था के एक गंभीर अध्येता और साधक हैं।
बाबा बसावन, बाबा बख्तौर एवं बाबा भूंईया के बारे में, न्यूज भारत टीवी के स्क्रीन पर विचार रखते कवि हरि विलास राय शीघ्र ही अगले खबर में –
साहित्यकारों में उत्साह
समीक्षा प्रकाशन के इस प्रयास की साहित्य जगत में चौतरफा प्रशंसा हो रही है। विद्वानों का मानना है कि क्षेत्रीय भाषाओं में ऐसे उच्च स्तरीय महाकाव्यों के आने से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सकेगी। बसावन-बख्तौर का चरित्र आज के युवाओं के लिए भी प्रासंगिक है, जो स्वाभिमान और न्याय के लिए लड़ने की प्रेरणा देता है।
यह पुस्तक जल्द ही प्रमुख पुस्तक केंद्रों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। बज्जिका भाषी समाज के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है जब उनके अपने नायकों की गाथा एक ‘महाकाव्य’ के रूप में प्रतिष्ठित होने जा रही है।
बाबा बसावन के जन्म स्थान वैशाली जिला के पानापुर लंगा ग्राम में बने भव्य मंदिर का दृश्य
ताजपुर/समस्तीपुर | 7 फरवरी 2026 शनिवार को ताजपुर के फलमंडी में भाकपा माले प्रखंड कमिटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला सचिव उमेश कुमार के पर्यवेक्षण और प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कई बड़े आंदोलनात्मक और संगठनात्मक निर्णय लिए गए।
सुरेंद्र प्रसाद सिंह का आह्वान: “जनता के हक के लिए तेज होगा संघर्ष”
बैठक को संबोधित करते हुए प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि भाकपा माले ताजपुर के विकास, खुशहाली और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के लिए संकल्पित है। उन्होंने केंद्र सरकार की मजदूर व किसान विरोधी नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए जनता से अपील की कि वे आने वाले आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
आंदोलन की रूपरेखा:
8 फरवरी: ताजपुर के जनता मैदान में श्रम, मजदूर और किसान संगठनों की संयुक्त बैठक होगी।
9 फरवरी: अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा प्रखंड मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा।
12 फरवरी: मजदूर विरोधी 4 श्रमकोड, मनरेगा में बदलाव और बिजली एवं बीज विधेयक 2025 के खिलाफ देशव्यापी आम हड़ताल के तहत ताजपुर के गांधी चौक से जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया जाएगा।
संगठन विस्तार पर चर्चा:आंदोलनात्मक फैसलों के साथ-साथ पार्टी के आंतरिक ढांचे पर भी बात हुई। 2025 की बकाया लेवी वसूली, ‘लोकयुद्ध‘ पत्रिका की सदस्यता और नए सदस्य बनाने के काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। साथ ही, छात्र संगठन आइसा, महिला संगठन एपवा, किसान महासभा और खेग्रामस को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में उपस्थित सदस्य:
बैठक में संगठन की मजबूती और आगामी प्रखंड सम्मेलन पर चर्चा की गई। इसमें निम्नलिखित सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए: उमेश कुमार (जिला सचिव), सुरेंद्र प्रसाद सिंह (प्र प्रखंड सचिव), आसिफ होदा, ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, प्रभात रंजन गुप्ता, मो० एजाज, संजीव राय, राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, मुकेश कुमार गुप्ता, मो० क्यूम, मुंशीलाल राय, नौशाद तौहीदी, शाद तौहीदी, बस्साम तौहीदी, मो० मुखलिस तौहीदी और आइसा जिला अध्यक्ष सुनील कुमार।
अंतर-राज्य युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम: सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्र-निर्माण का लेंगे संकल्प
मुजफ्फरपुर | कार्यालय संवाददाता भारत सरकार के ‘मेरा युवा भारत’ (MY Bharat) अभियान के तहत बिहार की प्रतिभा अब उत्तराखंड की वादियों में राज्य का प्रतिनिधित्व करेगी। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित अंतर-राज्य युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुजफ्फरपुर के सात प्रतिभागियों सहित एक एस्कॉर्ट दल नैनीताल (उत्तराखंड) के लिए रवाना हो गया है।
सांस्कृतिक एकता का बनेगा मंच कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल में आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराना है। इस यात्रा के दौरान युवा न केवल नेतृत्व कौशल सीखेंगे, बल्कि अनुभव आधारित शिक्षा के माध्यम से सामाजिक एकता और राष्ट्र-निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
इन जिलों के प्रतिभागी हुए शामिल इस कार्यक्रम में बिहार के कुल पांच जिलों का चयन किया गया है, जिसमें शामिल हैं: मुजफ्फरपुर ,पटना,बेगूसराय, समस्तीपुर और वैशाली,
कुल 35 प्रतिभागी और 2 एस्कॉर्ट इस दल का हिस्सा हैं, जो विभिन्न राज्यों के युवाओं के साथ अपने अनुभवों को साझा करेंगे।
मुजफ्फरपुर की टीम में ये हैं शामिल मुजफ्फरपुर जिले से सात होनहार युवाओं का चयन किया गया है, जिनमें विनीत कुमार सिंह, प्रिंस कुमार, संजीत कुमार, विवेक कुमार, शुभम रानी, गौतम कुमार झा और विकास कुमार शामिल हैं। टीम के साथ एस्कॉर्ट के रूप में चंदन कुमार नेतृत्व कर रहे हैं।
“यह कार्यक्रम युवाओं को अपने राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर देश को समझने और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित होने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।”
— उप निदेशक (माय भारत) सह जिला युवा अधिकारी, मुजफ्फरपुर
रवानगी के अवसर पर जिला युवा अधिकारी ने सभी प्रतिभागियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं और उम्मीद जताई कि ये युवा बिहार की गौरवशाली संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखेंगे।
बन्दरा(मुजफ्फरपुर): शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, वह समाज के लिए आजीवन एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। इसी भावना के साथ मध्य विद्यालय तेपरी के प्रांगण में संकुल संसाधन केंद्र, तेपरी के तत्वावधान में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक विशंभूनाथ राय के सम्मान में एक भव्य ‘विदाई सह सम्मान समारोह‘ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल एक विदाई का अवसर था, बल्कि एक कर्मठ शिक्षक के दशकों के समर्पण को नमन करने का दिन भी रहा।
विदाई सह सम्मान समारोह के अवसर पर मंचासीन शिक्षकगण
सम्मान और सत्कार का संगम
समारोह की अध्यक्षता मध्य विद्यालय तेपरी के प्रधानाध्यापक सह संकुल समन्वयक दीपक प्रसाद सिंह ने की। कार्यक्रम की शुरुआत भावपूर्ण गीतों और उपस्थित अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। विदाई की इस बेला में श्री राय के सम्मान में संकुल के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर वरिष्ठ शिक्षकों और समन्वयकों—ब्रजेश कुमार (प्रभारी प्रधानाध्यापक सह संकुल समन्वयक), विजय कुमार ठाकुर (प्रधानाध्यापक सह संकुल समन्वयक) एवं नरेश राय (प्रभारी प्रधानाध्यापक सह संकुल समन्वयक) ने संयुक्त रूप से विशंभूनाथ राय को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। विद्यालय के मुख्य सभागार को रंग-बिरंगे गुब्बारों और फूलों से किसी उत्सव की तरह सजाया गया था। मंच पर लगे आधिकारिक बैनर पर श्री राय की सेवानिवृत्ति तिथि 31 जनवरी 2026 और सम्मान समारोह की तिथि 7 फरवरी 2026 अंकित थी।
सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक विशंभूनाथ राय को भेंट प्रदान करते समाजसेवी श्याम किशोर
अनुशासन और समर्पण की मिसाल
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने श्री राय के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनका पूरा सेवाकाल निष्ठा, कठोर अनुशासन और विद्यालय के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक रहा है। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि:
श्री राय ने न केवल छात्रों के भविष्य को संवारा, बल्कि विद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूती प्रदान की।
उनके कार्यकाल में विद्यालय ने अनुशासन के नए मापदंड स्थापित किए, जिससे स्थानीय समुदाय में विद्यालय की प्रतिष्ठा बढ़ी।
मध्य विद्यालय तेपरी की प्रभारी प्रधानाध्यापिका स्मिता कुमारी सहित समस्त विद्यालय परिवार ने भी अपने प्रिय सहकर्मी को भावभीनी विदाई दी। सहकर्मियों ने उनके साथ बिताए समय को याद करते हुए उन्हें एक अभिभावक तुल्य मार्गदर्शक बताया।
विदाई समारोह के अवसर दर्शक दीर्घा में उपस्थित शिक्षकगण एवं छात्र
नवनियुक्त शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित समाजसेवी श्याम किशोर ने श्री राय के व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “विशंभूनाथ जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा की अलख जगाए रखी। उनका कार्यकाल आने वाली पीढ़ी के लिए एक खुली किताब की तरह है।” उन्होंने वहां मौजूद नवनियुक्त शिक्षकों से विशेष आह्वान किया कि वे श्री राय के कार्य-आदर्शों, उनकी समयबद्धता और उनके धैर्य से प्रेरणा लें ताकि वे भी शिक्षा जगत में अमिट छाप छोड़ सकें।
भावुक कर देने वाले पल
जैसे-जैसे कार्यक्रम अपने समापन की ओर बढ़ा, वातावरण काफी भावुक हो गया। अपने संबोधन में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक विशंभूनाथ राय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय उनके लिए केवल एक कार्यस्थल नहीं बल्कि एक परिवार रहा है। उन्होंने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और शिक्षकों से शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने का अनुरोध किया।
इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि एक शिक्षक की असली पूंजी उसके द्वारा तैयार किए गए संस्कार और उसके प्रति साथियों का सम्मान ही है। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक भोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने भी हिस्सा लिया।