Monday, November 2, 2026

आसमान से जमीन तक चमकेगा बिहार, कैबिनेट बैठक में 29 बड़े फैसलों पर लगी ऐतिहासिक मुहर!

हेलीकॉप्टर से सैर करेंगे पर्यटक, सड़कों पर दौड़ेंगे डिजिटल कैमरे, और 5 बड़ी नदियों का होगा कायाकल्प – करोड़ों के बजट से बदलेगी राज्य की सूरत

विशेष ब्यूरो, पटना: बिहार में विकास, सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों के मोर्चे पर एक नया अध्याय शुरू हो गया है। राजधानी पटना में आयोजित राज्य मंत्रिपरिषद की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में  सरकार ने कुल 29 एजेंडों पर अपनी ऐतिहासिक स्वीकृति दे दी है। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने की। बैठक में लिए गए फैसले साफ तौर पर यह संकेत देते हैं कि राज्य सरकार अब पारंपरिक ढर्रे से अलग हटकर आधुनिक तकनीक, पर्यटन और वैज्ञानिक संसाधनों के उचित दोहन पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है। बैठक समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने मीडियाकर्मियों को फैसलों की बारीकियों और बजटीय आवंटन से अवगत कराया।

यह केवल सरकारी प्रस्तावों की मंजूरी नहीं है, बल्कि बिहार को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक बड़ा खाका है।

पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बिहार कैबिनेट की उच्चस्तरीय बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी।

 सड़क सुरक्षा में डिजिटल क्रांति: 622.04 करोड़ का आईटीएमएस प्रोजेक्ट

कैबिनेट का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला फैसला परिवहन विभाग की ओर से आया है। राज्य की सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं और दम तोड़ती यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने 622.04 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्‍टम  (आईटीएमएस) की स्थापना को हरी झंडी दी है।

  • पीपीपी मॉडल पर काम: यह पूरा प्रोजेक्ट पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर संचालित होगा, जिससे इसके क्रियान्वयन में निजी क्षेत्र की दक्षता का लाभ मिल सके।
  • क्या होगा असर: इसके तहत राज्य के प्रमुख राजमार्गों और शहरी चौराहों पर स्वचालित कैमरे, स्पीड डिटेक्टर और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन उपकरण लगाए जाएंगे। इसका सीधा उद्देश्य मानवीय हस्तक्षेप को कम करके यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सीधे डिजिटल नकेल कसना और दुर्घटनाओं की दर में भारी कमी लाना है।

पर्यटन को लगे पंख: आसमान से दिखेगा बदलता बिहार

बिहार के पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कैबिनेट ने एक साथ तीन नई दूरगामी योजनाओं को मंजूरी दी है, जो राज्य में विदेशी और घरेलू पर्यटकों की आमद को कई गुना बढ़ा सकती हैं:

  • मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना 2026: इसके तहत राज्य के प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों (जैसे बोधगया, राजगीर, वैशाली और भागलपुर) को आपस में जोड़ने के लिए हेलीकॉप्टर और छोटे विमानों की सेवाएं शुरू की जाएंगी। इससे पर्यटकों का समय बचेगा और वीआईपी टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।
  • मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना 2026: ग्रामीण और स्थानीय इलाकों में पर्यटकों को ठहरने के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं देने और स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार पैदा करने के लिए इस योजना के नीतिगत दिशा-निर्देशों को मंजूरी दी गई है।
  • सिंधु दर्शन तीर्थ यात्रा वित्तीय सहायता योजना 2026: इसके जरिए राज्य के उन श्रद्धालुओं को वित्तीय मदद दी जाएगी जो सिंधु दर्शन जैसी पवित्र और कठिन यात्राओं पर जाना चाहते हैं।

नदियों का वैज्ञानिक अध्ययन: अवैध खनन पर लगेगी अंतिम रोक

खान एवं भूतत्व विभाग के अंतर्गत राज्य की 5 जीवनदायिनी नदियों – सोन, किऊल, फल्गु, मोरहर और चानन नदी का पुनर्भरण अध्ययन (रेप्लेनिशमेंट स्टडी) कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया है।

  • करोड़ों का बजट: इस वैज्ञानिक शोध के लिए सरकार ने 2.32 करोड़ रुपये (2,32,69,600 रुपये) स्वीकृत किए हैं।
  • रणनीति का विश्लेषण: यह काम नामांकन के आधार पर सेंट्रल माइन प्लानिंग एण्ड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमडीपीआई) को सौंपा गया है। इस अध्ययन से यह पता चलेगा कि मानसून के बाद इन नदियों में कितनी मात्रा में बालू का प्राकृतिक रूप से पुनर्भरण होता है। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि बालू माफियाओं द्वारा किए जाने वाले अवैध और अंधाधुंध खनन पर भी पूरी तरह से रोक लगाई जा सकेगी।

 बंपर भूमि अधिग्रहण: उद्योगों के लिए बिछेगा कालीन

राज्य में कल-कारखानों की स्थापना और निवेश को आकर्षित करने के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से तीन महत्वपूर्ण जिलों में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है:

  • कैमूर जिला: वाराणसी-राँची-कोलकाता एक्सप्रेसवे के नजदीक अंचल-चाँद एवं चैनपुर के विभिन्न मौजों में कुल 781.18 एकड़ भूमि के अधिग्रहण और बुनियादी ढांचा विकास प्राधिकरण (बियाडा) के माध्यम से विकास के लिए 2,30,64,97,009 रुपये की विशाल राशि मंजूर की गई है।
  • पूर्णिया जिला: अंचल-कृत्यानन्द नगर के विभिन्न मौजों में कुल 687 एकड़ रैयती भूमि के अधिग्रहण हेतु 1,25,32,38,925 रुपये स्वीकृत हुए हैं।
  • सहरसा जिला: अंचल-कहरा, मौजा-वनगाँव, देवनागोपाल तथा बलहर अराजी में कुल 420.62 एकड़ भूमि के लिए 88,01,13,847 रुपये के व्यय को हरी झंडी मिली है।

 प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधार: खत्म हुआ इंटरव्यू का दौर

कैबिनेट ने सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। पथ निर्माण विभाग के तहत बिहार तकनीकी सेवा नियमावली 1999 में संशोधन करते हुए शोध सहायक के पद पर चयन के लिए पूर्व से चली आ रही अंतर्वीक्षा (इंटरव्यू) की व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। अब यह चयन पूरी तरह से प्रतियोगिता परीक्षा और शैक्षणिक मेधा के आधार पर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से होगा।

इसके साथ ही, भवन निर्माण विभाग के अंतर्गत राज्य के तमाम कार्य विभागों के सामान्य लिपिकीय संवर्ग के पदों पर भर्ती प्रक्रिया और सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए ‘कार्य विभाग क्षेत्रीय सामान्य लिपिकीय संवर्ग नियमावली 2026’ के गठन को भी स्वीकृति दी गई है।

संक्षिप्त : अन्य महत्वपूर्ण फैसले

  • एससी-एसटी कल्याण: बिहार राज्य अनुसूचित जाति सहकारिता विकास निगम लिमिटेड को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी), नई दिल्ली के पुराने बकाये टर्म लोन के एकमुश्त भुगतान के लिए 21,95,00,000 रुपये जारी करने की मंजूरी दी गई।
  • संस्कृति का संरक्षण: कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के अधीन “बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्मृति स्तूप समिति” के गठन और इसके सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत निबंधन के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई।
  • न्यायिक सुदृढ़ीकरण: पटना उच्च न्यायालय में सिविल जज (वरीय कोटि) के समकक्ष विशेष कार्य पदाधिकारी का 1 पद और मधुबनी न्यायमंडल के बेनीपट्टी में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय की स्थापना के लिए 1 पद के सृजन को स्वीकृति मिली।

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बिहार में जमीन विवादों का होगा परमानेंट खात्मा! राजस्व महा-अभियान की अवधि 21 जून तक बढ़ी; 46 लाख फाइलों को खंगालने में जुटी सरकार, सुस्त अफसरों पर गिरेगी गाज!

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल का कड़ा फैसला: 17 जून तक 95.73% स्कैनिंग और 60.27% पोर्टल अपलोडिंग पूरी, लापरवाही बरतने वाले अंचल और राजस्व अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय!

पटना, 17 जून 2026: बिहार में भूमि सुधार और जमीन संबंधी समस्याओं से आम जनता को बड़ी राहत देने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा दांव खेल दिया है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाए जा रहे ‘राजस्व महा-अभियान’ को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्राप्त 46 लाख से अधिक लंबित आवेदनों के त्वरित निष्पादन के लिए चलाया जा रहा विशेष अभियान अब 21 जून 2026 तक जारी रहेगा। सरकार का मुख्य लक्ष्य सभी 46 लाख आवेदनों की स्कैनिंग और डिजिटल पोर्टल पर अपलोडिंग के कार्य को शत-प्रतिशत पूरा करना है, ताकि रैयतों को सीधे और पारदर्शी तरीके से लाभ मिल सके।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि इस अवधि में सभी लंबित आवेदनों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग और संबंधित ऑनलाइन पोर्टलों पर अपलोडिंग सुनिश्चित की जाए। इस डिजिटल क्रांति का सीधा उद्देश्य भूमि अभिलेख सुधार, उत्तराधिकार नामांतरण (म्यूटेशन) और पारिवारिक बंटवारा आधारित नामांतरण से जुड़े मामलों का बहुत ही तेजी और पारदर्शिता के साथ निष्पादन करना है।

एक सप्ताह में दर्ज हुई ऐतिहासिक प्रगति (मुख्य आंकड़े):

विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 11 जून से 17 जून तक चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान राज्यभर में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

  • महा-अभियान के तहत प्राप्त कुल 46,25,957 आवेदनों में से 95.73 प्रतिशत आवेदनों की स्कैनिंग पूरी कर ली गई है, जबकि अभियान शुरू होने से पहले यह आंकड़ा मात्र 81.91 प्रतिशत था।
  • इसके अलावा, 60.27 प्रतिशत आवेदन संबंधित ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं, जो अभियान से पहले सिर्फ 26.43 प्रतिशत पर सिमटा हुआ था। एक सप्ताह के भीतर स्कैनिंग और अपलोडिंग दोनों में यह एक बड़ी छलांग है।

शानदार प्रदर्शन करने वाले अग्रणी जिले:

दिलीप कुमार जायसवाल ने बेहतरीन काम करने वाले जिलों की सराहना करते हुए कहा कि कई जिलों ने इस महा-अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। स्कैनिंग के मामले में खगड़िया जिला 99.92 प्रतिशत कार्य पूरा करके सबसे आगे चल रहा है। इसके ठीक पीछे दरभंगा में 99.72 प्रतिशत, पूर्णिया और वैशाली में 99.67 प्रतिशत, रोहतास में 99.53 प्रतिशत तथा समस्तीपुर और सुपौल में 99 प्रतिशत से अधिक स्कैनिंग का कार्य पूरा हो चुका है।

वहीं, पोर्टल अपलोडिंग के मामले में शिवहर जिला 89.92 प्रतिशत के साथ शीर्ष पायदान पर बना हुआ है। इसके अलावा किशनगंज (86.47 प्रतिशत), खगड़िया (84.83 प्रतिशत), दरभंगा (80.61 प्रतिशत), पूर्णिया (77.82 प्रतिशत) और वैशाली (75.17 प्रतिशत) भी अग्रणी जिलों में शामिल हैं।

सुस्त अफसरों को मंत्री की दो टूक चेतावनी:

हालांकि, मंत्री ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि अभी भी कुछ जिलों में अपलोडिंग और मामलों के निष्पादन की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। उन्होंने ऐसे जिलों के अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने और अतिरिक्त मानव संसाधन (मैनपावर) लगाकर कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता के लिए अंचल अधिकारियों (सीओ), राजस्व अधिकारियों और अन्य संबंधित कर्मियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की गई है तथा विभागीय मुख्यालय स्तर पर प्रतिदिन प्रगति की कड़ाई से निगरानी (मॉनिटरिंग) की जा रही है।

सचिव जय सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को दिए कड़े निर्देश:

विभाग के सचिव जय सिंह ने भी राज्य के सभी जिलाधिकारियों (डीएम), अपर समाहर्ताओं (एडीएम), भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (डीसीएलआर), बंदोबस्त पदाधिकारियों, अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को इस अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा निर्धारित लक्ष्य हर हाल में पूरा करने का निर्देश दिया है। विभागीय मुख्यालय से इसकी लगातार समीक्षा और अनुश्रवण का काम मॉनिटरिंग टीम द्वारा जारी है।

दिलीप कुमार जायसवाल ने भरोसा जताया है कि माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार भूमि प्रशासन को पूरी तरह से पारदर्शी, डिजिटल और जनोन्मुखी बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। 21 जून तक सभी लंबित आवेदनों की स्कैनिंग एवं पोर्टल अपलोडिंग का लक्ष्य प्राप्त कर लिया जाएगा, जिससे निष्पादन प्रक्रिया और तेज होगी तथा बिहार के लाखों रैयतों को सीधे तौर पर इसका बड़ा लाभ मिलेगा।

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भू-अर्जन में सुस्ती दिखाई तो नपेंगे अधिकारी: मंत्री दिलीप जायसवाल का अल्टीमेटम, एमआईएस पोर्टल पर दर्ज होगी एक-एक इंच जमीन की कुंडली!

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री की राज्यव्यापी हाई-लेवल समीक्षा बैठक; राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और पथ निर्माण की परियोजनाओं में बाधा बनने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

विशेष ब्यूरो, पटना | दिनांक: 17 जून 2026

पटना, 17 जून। बिहार में विकास योजनाओं की कछुआ चाल पर नीतीश सरकार ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य में चल रही विभिन्न बुनियादी ढांचा और विकासात्मक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण (भू-अर्जन) की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है। बुधवार को विभाग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण राज्यव्यापी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि भू-अर्जन कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस मैराथन बैठक में राज्य के सभी जिलों के जिला भू-अर्जन अधिकारियों (डीएलएओ) को लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा करने का सख्त निर्देश दिया गया है।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), रेलवे, पथ निर्माण विभाग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्ट) तथा अन्य प्रमुख तकनीकी विभागों से जुड़ी महात्वाकांक्षी परियोजनाओं की जिलावार वर्तमान स्थिति पर बेहद विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि बिहार की तरक्की के लिए बुनियादी ढांचे का मजबूत होना अनिवार्य है, और इसमें भूमि की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि विकास परियोजनाओं के रास्ते में आने वाली किसी भी प्रकार की कानूनी, प्रशासनिक या प्रक्रियात्मक बाधा को पूरी तरह से प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दूर किया जाए, ताकि करोड़ों-अरबों रुपये की ये योजनाएं अपने निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो सकें और जनता को इनका लाभ मिल सके।

पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए मंत्री ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी जिला भू-अर्जन अधिकारियों को आदेश दिया कि वे अपने-अपने कार्यालयों के बाहर अनिवार्य रूप से एक बड़ा सूचना बोर्ड (डिस्प्ले बोर्ड) स्थापित करें। इस बोर्ड पर जिले में संचालित होने वाली सभी भू-अर्जन परियोजनाओं की सूची, अधिग्रहित की जाने वाली जमीन का रकबा और उसकी अद्यतन (करंट) स्थिति साफ-साफ अक्षरों में लिखी होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि इस कदम से न केवल कार्यों को अभूतपूर्व गति मिलेगी, बल्कि आम जनता और जमीन मालिकों को भी यह पता रहेगा कि उनकी फाइलों की स्थिति क्या है। इसके साथ ही, उन्होंने सभी परियोजनाओं की नवीनतम और सटीक जानकारी को अनिवार्य रूप से विभाग के एमआईएस (प्रबंधन सूचना प्रणाली) पोर्टल पर दर्ज करने का हुक्म दिया, ताकि मुख्यालय स्तर पर इसकी हर दिन प्रभावी मॉनिटरिंग की जा सके।

तस्वीर: पटना स्थित मुख्य सचिवालय में बुधवार 17 जून 2026 को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते माननीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल। बैठक में विभाग के सचिव जय सिंह, सचिव सीमा त्रिपाठी, अपर सचिव प्रशांत सीएच, निदेशक भू-अर्जन कमलेश कुमार सिंह समेत अन्य आला अधिकारी उपस्थित हैं, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी जुड़े हुए हैं।

इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासनिक अमले के कई दिग्गज मौजूद रहे। मुख्य रूप से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह, सचिव सीमा त्रिपाठी, अपर सचिव प्रशांत सीएच, निदेशक भू-अर्जन कमलेश कुमार सिंह, सहायक निदेशक सह अपर सचिव आजीव वत्सराज, सहायक निदेशक सह जनसंपर्क पदाधिकारी जूही कुमारी, सहायक भू-अर्जन पदाधिकारी कमल नयन कश्यप, पंकज कुमार झा, मनोज गुप्ता, और अवर सचिव शिव जी सहित अन्य विभागीय उच्चाधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े रेलवे, एनएचएआई और पथ निर्माण विभाग के शीर्ष इंजीनियरों एवं वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया और अपनी-अपनी परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को साझा किया, जिसके आपसी समन्वय से तत्काल निष्पादन का रास्ता निकाला गया।

मंत्री के कड़े निर्देश: बैठक के मुख्य बिंदु

  • समय सीमा का कड़ाई से पालन: भू-अर्जन के सभी लंबित मामलों, मुआवजा भुगतान और अवार्ड घोषणा की प्रक्रिया को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
  • टीम भावना से होगा काम: जहां कहीं भी जिला प्रशासन या अन्य तकनीकी एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी है, वहां टीम भावना के साथ समन्वय स्थापित कर समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई है।
  • गति और पारदर्शिता दोनों जरूरी: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया में रफ्तार के साथ-साथ पूरी पारदर्शिता का होना अत्यंत आवश्यक है।
  • मुनावजा वितरण में तेजी: रैयतों (जमीन मालिकों) के मुआवजे से जुड़े विवादों को त्वरित गति से सुलझाने और सही हकदार को अविलंब भुगतान करने का निर्देश दिया गया।

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बिहार में 1 जुलाई से वी बी जी आर ए एम जी योजना पूरी तरह लागू, मखानों और फलों को मिलेगा इंटरनेशनल मार्केट, जीविका दीदियां बनेंगी लखपति!

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की हाई-लेवल बैठक में तगड़ा फैसला; 30 जून से पहले मनरेगा का सारा बकाया होगा साफ, बक्सर और लखीसराय में खुलेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस!

विशेष संवाददाता, पटना 17 जून 2026

पटना: बिहार के चौतरफा विकास को एक नई और अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाने के लिए केंद्र और राज्य की डबल-इंजन सरकार ने पूरी तरह से कमर कस ली है । पटना के लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया । इस महाबैठक में बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सह ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संयुक्त रूप से राज्य के कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े हुए अत्यंत संवेदनशील और गंभीर विषयों पर विस्तृत विमर्श किया । बैठक में दोनों नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि केंद्र और राज्य का यह मजबूत नीतिगत सहयोग बिहार को प्रगति के एक ऐसे नए शिखर पर स्थापित करेगा, जिसकी कल्पना पहले कभी नहीं की गई थी ।

पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में नीतिगत चर्चा करते केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण सह ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी । बैठक में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास की योजनाओं को रफ्तार देने के लिए गंभीर विमर्श में शामिल हैं ।

मनरेगा बकाए का होगा पूर्ण भुगतान, 1 जुलाई से मचेगी धूम

इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान ग्रामीण श्रमिकों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए एक अत्यंत साहसिक और बड़ा निर्णय लिया गया है । केंद्र सरकार के पूर्ण सहयोग से मनरेगा की तमाम लंबित और बकाया राशियों का भुगतान आगामी 30 जून से पहले हर हाल में सुनिश्चित कर दिया जाएगा । इसके साथ ही, राज्य के ग्रामीण विकास को बिल्कुल नई और आधुनिक दिशा देने वाली महत्वाकांक्षी वी बी जी आर ए एम जी योजना को आगामी 1 जुलाई से पूरे बिहार में पूरी तरह से धरातल पर लागू कर दिया जाएगा ।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 की प्रगति की समीक्षा करते हुए बताया कि बिहार में कुल 1 करोड़ 4 लाख लोगों को चिन्हित किया गया था, जिनमें से गहन जांच के बाद 60 लाख लोग पूरी तरह से योग्य पाए गए हैं । उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि इन सभी 60 लाख गरीब परिवारों को जल्द से जल्द पक्का मकान मुहैया कराया जाए । नए वित्तीय वर्ष में इस योजना के अंतर्गत देश का पहला मकान बिहार को मिलना पूरी तरह से तय हो चुका है, जो राज्य के लिए गौरव की बात है ।

लखपति दीदी अभियान में बिहार देश में नंबर 1

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की आजीविका योजना के तहत जीविका दीदी को लखपति दीदी बनाने की योजना पर बिहार सरकार तेजी से काम कर रही है । इस अभियान में बिहार पूरे देश में नंबर 1 स्थान पर कायम है । राज्य सरकार इस गति को और आगे बढ़ाएगी । बिहार में आयोजित होने वाले सरस मेलों में ग्रामीण क्षेत्र की बहनें अपना उत्पाद बेचती हैं । इसमें ग्रामीण बहनों की आजीविका को प्रोत्साहित करने और सरस मेलों के सफल आयोजन में केंद्र सरकार पूरा सहयोग देगी ।

बक्सर और लखीसराय में टमाटर-प्याज के ‘आदर्श केंद्र‘

कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्य में विशेष रूप से प्याज, टमाटर, और आम जैसे महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों के लिए अत्याधुनिक ‘आदर्श केंद्रों’ की स्थापना की जाएगी । मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष विशेष तौर पर बक्सर एवं लखीसराय में टमाटर तथा प्याज के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना का मजबूत प्रस्ताव रखा, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने सहर्ष सहमति जताई । इसके अतिरिक्त, बिहार के मेहनती किसानों को उनकी फसलों और उपज का वैश्विक स्तर पर सही और लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए राज्य के विशिष्ट फलों को सीधे अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाएगा । वैश्विक स्तर पर मखाना की लगातार बढ़ती हुई भारी मांग को देखते हुए राज्य में एक स्वतंत्र मखाना बोर्ड के निर्माण की प्रक्रिया को भी बहुत जल्द पूरा करने पर बल दिया गया ।

एकीकृत खेती का मॉडल बनेगा बिहार

बिहार देश का वह पहला गौरवशाली राज्य रहा है जिसने सबसे पहले कृषि रोड मैप को पूरी तत्परता से अपनाया था । इसी शानदार ऐतिहासिक गौरव को आगे बढ़ाते हुए अब राज्य सरकार द्वारा एकीकृत खेती पर विशेष रूप से जोर दिया जाएगा, ताकि बिहार को पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल राज्य के रूप में विकसित किया जा सके । पर्यावरण के संतुलन को अक्षुण्ण रखने और कृषि भूमि की लगातार घटती उर्वरता को दोबारा बहाल करने के लिए विभिन्न वॉटरशेड परियोजनाओं तथा मिट्टी संरक्षण कार्यक्रमों को प्रशासनिक स्तर पर पूरी तेजी के साथ धरातल पर उतारा जाएगा ।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी सरकार सुशासन और ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल संकल्प के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है । समय की महत्ता को समझते हुए पूरी प्रशासनिक टीम बिना किसी समझौते के और पूर्ण पारदर्शिता के साथ इन जनकल्याणकारी योजनाओं को सीधे आम जनता तक पहुंचाएगी ।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पटना आगमन पर हवाईअड्डे पर उनका भव्य और आत्मीय अभिनंदन करते संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, सांसद रामकृपाल यादव, विधायक संजीव चौरसिया, नितिन अभिषेक, सरोज रंजन पटेल, प्रीति शेखर एवं अन्य वरिष्ठ नेतागण।

हवाईअड्डे पर हुआ केंद्रीय मंत्री का भव्य स्वागत

इससे पूर्व, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पटना हवाईअड्डे पर आगमन पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उनका बेहद आत्मीय और गर्मजोशी से स्वागत किया। हवाईअड्डे पर केंद्रीय मंत्री के भव्य अभिनंदन के लिए संगठन महामंत्री भीखूभाई दलसानिया, उपमुख्यमंत्री सह मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री रामकृपाल यादव, विधायक संजीव चौरसिया, विधायक रत्नेश कुशवाहा, महामंत्री नितिन अभिषेक, सरोज रंजन पटेल, प्रीति शेखर सहित कई अन्य वरिष्ठ और सम्मानित पदाधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में ये दिग्गज रहे मौजूद

संकल्प सभागार में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, कृषि विभाग के प्रधान सचिव नर्मदेश्वर लाल, ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग तथा ग्रामीण विकास विभाग के कई वरीय और उच्चाधिकारी भी मुख्य रूप से उपस्थित थे ।

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खौफ में माफिया! बिहार की नदियों में बालू खनन पर 15 अक्टूबर तक लगा पूर्ण लॉकडाउन, अवैध कदम रखा तो सीधे जेल और भारी जुर्माना!

विकास कार्य नहीं होंगे प्रभावित: पर्याप्त भंडारण का दावा, खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार की अवैध खनन पर शून्य सहनशीलता नीति लागू

पटना/संवाददाता। बिहार सरकार ने पर्यावरण संरक्षण, नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने और जनसुरक्षा के मद्देनजर एक बड़ा और बेहद सख्त फैसला लिया है। राज्य में मानसून की अवधि को देखते हुए 15 जून से 15 अक्टूबर 2026 तक सभी नदियों से बालू एवं मिट्टी के खनन, लोडिंग, परिवहन तथा भंडारण पर पूरी तरह से प्रतिबंध लागू कर दिया गया है। राज्य सरकार ने दो टूक चेतावनी दी है कि इस अवधि के दौरान यदि किसी भी प्रकार का खनन या परिवहन किया गया, तो उसे पूरी तरह अवैध माना जाएगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फाइल फोटो: खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार।

खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने इस संबंध में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। वर्षा ऋतु के दौरान नदियों की जलधारा और उनके प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए यह रोक एक अनिवार्य पर्यावरणीय आवश्यकता है। उन्होंने जनता और निर्माण एजेंसियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस चार महीने के प्रतिबंध के दौरान राज्य में चल रही विकास योजनाओं या आम लोगों के निजी गृह निर्माण कार्यों पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। सरकार के पास बालू का पर्याप्त स्टॉक और भंडारण पहले से उपलब्ध है।

मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया कि विभाग ने पहले ही स्टॉकिस्ट लाइसेंसधारियों और बालू घाटों के सेकेंडरी लोडिंग पॉइंट्स के माध्यम से भारी मात्रा में बालू का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित कर लिया है। आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक प्रबंधन का सहारा लिया जा रहा है। इसी कड़ी में सोन, किऊल, फल्गु,

मोरहर और चानन जैसी प्रमुख नदियों में सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) के माध्यम से बालू पुनर्भरण का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। इस व्यापक अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में खनन प्रबंधन को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी तथा पर्यावरण-अनुकूल बनाया जाएगा।

अवैध खनन पर सख्ती जारी: तस्‍वीर में पटना जिला में खान एवं भूतत्व विभाग की टीम द्वारा छापेमारी के दौरान बालू से लदे 03 ट्रैक्टर जप्‍त ,  

कानून तोड़ने वालों पर गिरेगी गाज: नियम उल्लंघन पर सख्त एक्शन

जिला प्रशासन ने अवैध खनन के विरुद्ध शून्य सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) नीति अपनाई है। इस प्रतिबंध अवधि में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निम्नलिखित सख्त कदम उठाए जाएंगे:

  • प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज: प्रतिबंधित अवधि में अवैध खनन या परिवहन करने वालों पर तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
  • वाहन और मशीनें होंगी जब्त: अवैध कार्य में शामिल सभी गाड़ियों, नावों और पोकलेन मशीनों को तुरंत जब्त कर लिया जाएगा।
  • भारी शमन शुल्क: दोषियों से भारी आर्थिक जुर्माना (शमन शुल्क) वसूला जाएगा और कठोर कानूनी कार्रवाई के तहत उन्हें जेल भेजा जाएगा।

प्रशासन की चौबीसों घंटे पैनी नजर

अवैध खनन को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। पूरे राज्य में नियमित गश्ती, औचक छापेमारी और सघन संयुक्त जांच अभियान चलाए जाएंगे। सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को हर छोटे-बड़े बालू घाट पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सतर्क नागरिक बनें: यहाँ दें सूचना, नाम रहेगा गुप्त

विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अवैध खनन या खनिज परिवहन से जुड़ी किसी भी शिकायत या संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साझा करें। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं:

  • हेल्पलाइन नंबर: 9472238821 या 112 (नोट: सूचना देने वाले सभी नागरिकों की पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।)

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बेतिया में बड़ी कार्रवाई: 15,000 की घूस लेते रंगे हाथ धराया डेटा एंट्री ऑपरेटर  राज कुमार मिश्र  

जमाबंदी का लॉक खोलने के एवज में मांग रहा था रिश्वत, पटना से पहुंची टीम ने बिछाया जाल

बेतिया/पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार के ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार, 16 जून 2026 को पटना से आई निगरानी ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने बेतिया अंचल कार्यालय में छापेमारी कर डेटा एंट्री ऑपरेटर राज कुमार मिश्र को 15,000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। इस अचानक हुई कार्रवाई से अंचल कार्यालय और पूरे जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

निगरानी के शिकंजे में घूसखोर: बेतिया अंचल कार्यालय से 15,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार डेटा एंट्री ऑपरेटर राज कुमार मिश्र (लाल घेरे में) निगरानी ब्यूरो के पुलिसकर्मियों की गिरफ्त में।

ताला खोलने के नाम पर मांग रहा था मोटी रकम

मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई एक पीड़ित की शिकायत पर की गई है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बरवत पससाईन (बेतिया, पश्चिम चम्पारण) के रहने वाले बालेश्वर कुमार (पिता: कृपा नारायण महतो) ने पटना स्थित निगरानी ब्यूरो के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। बालेश्वर कुमार का आरोप था कि उनकी जमीन की जमाबंदी लॉक थी, जिसे खोलने के एवज में डेटा एंट्री ऑपरेटर राज कुमार मिश्र द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही थी। बिना पैसे दिए काम करने से साफ मना किया जा रहा था।

निगरानी ने बिछाया जाल, रंगे हाथों दबोचा

शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले को गंभीरता से लिया और गुप्त रूप से इसका सत्यापन कराया। जांच में ऑपरेटर द्वारा रिश्वत मांगे जाने का प्रमाण सही पाया गया। इसके बाद 15 जून 2026 को निगरानी थाना कांड संख्या 073/26 के तहत मामला दर्ज किया गया।

मामले की कमान पुलिस उपाधीक्षक श्याम बाबू प्रसाद को सौंपी गई। उनके नेतृत्व में एक विशेष धावा दल (रेडिंग टीम) का गठन किया गया। मंगलवार को जैसे ही परिवादी बालेश्वर कुमार ने अंचल कार्यालय बेतिया में राज कुमार मिश्र को केमिकल लगे 15,000 रुपये थमाए, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठी निगरानी की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। टीम ने उसके पास से घूस की रकम बरामद कर ली है।

मुजफ्फरपुर कोर्ट में होगी पेशी

निगरानी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी डेटा एंट्री ऑपरेटर राज कुमार मिश्र से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपी को मुजफ्फरपुर स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में पेश किया जाएगा। विभाग ने साफ किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान आगे भी इसी तरह जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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15 अगस्‍त के बाद जिला अस्‍पतालों से मरीज रेफर किए तो खैर नहीं! सी एम सम्राट चौधरी की डॉक्‍टरों को दो-टूक, सीवान में चीनी मिल का भी एलान!

30 दिन में फाइल क्‍लीयर वरना 31वें दिन नपेंगे अफसर! सी एम सम्राट चौधरी का बड़ा एलान, कहा- अपराधियों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं!

सीवान/कैमूर: बिहार की प्रशासनिक और कानून व्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर लाने के लिए सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। कैमूर और सीवान में आयोजित विशाल जनकल्याण सहयोग शिविरों को संबोधित करते हुए सी एम सम्राट चौधरी ने राज्य के स्वास्थ्य ढांचे, नौकरशाही (ब्यूरोक्रेसी) और अपराधियों को लेकर बेहद कड़े और सीधे निर्देश जारी किए हैं। सरकार का यह नया तेवर साफ संकेत देता है कि बिहार में अब ढुलमुल रवैये और अकर्मण्यता के दिन खत्म हो चुके हैं।

 कैमूर  में आयोजित जन कल्याण सहयोग शिविर में सी एम सम्राट चौधरी।

स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था पर सख्‍त हंटर: रेफरल खेल पर लगेगी पूरी रोक

बिहार के सरकारी जिला अस्पतालों से मरीजों को मामूली वजहों या संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर बाहर (पटना या अन्य बड़े शहरों में) रेफर करने की प्रवृत्ति पर सी एम सम्राट चौधरी ने गहरी नाराजगी जताई है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और विधायक मंगल पांडे की मौजूदगी में उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधकों को चेतावनी देते हुए कहा:

“जब सरकार अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयां पहुंचा रही है, नई और आधुनिक बिल्डिंगें खड़ी कर दी गई हैं, तो फिर मरीजों को बाहर क्यों रेफर किया जा रहा है? डॉक्टरों को अब थोड़ी और मेहनत और ईमानदारी दिखानी होगी।”

 सीवान में आयोजित जन कल्याण सहयोग शिविर में  सी एम सम्राट चौधरी।

सी एम ने इसके लिए 15 अगस्त की अंतिम समय-सीमा (डेडलाइन) तय की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 15 अगस्त के बाद जिला और अनुमंडल अस्पतालों से मरीजों को बिना किसी बेहद गंभीर और अपरिहार्य कारण के रेफर किया गया, तो संबंधित डॉक्टरों और सिविल सर्जनों की खैर नहीं होगी। इस व्यवस्था की सीधी मॉनिटरिंग खुद मुख्य सचिव और जिलाधिकारियों को सौंप दी गई है। इसके साथ ही 31 दिसंबर तक राज्य के सभी अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (एडिशनल PHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) की सूरत बदलने का भी लक्ष्य रखा गया है।

सुशासन का नया फॉर्मूला: ’30 दिन में काम नहीं तो 31वें दिन सीधे सस्‍पेंशन‘

बिहार की अफसरशाही को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने के लिए सरकार ने एक क्रांतिकारी प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है। सहयोग शिविरों की सफलता का जिक्र करते हुए सी एम ने बताया कि अब तक प्राप्त 3.03 लाख आवेदनों में से 2.61 लाख से अधिक आवेदनों का निष्पादन कर लगभग 90% सफलता हासिल की गई है। इस प्रक्रिया को और पारदर्शी और तेज बनाने के लिए नया नियम तय किया गया है:

  • 11वां दिन: आवेदन के बाद 10 दिन तक आदेश न निकलने पर अफसर को पहला नोटिस।
  • 21वां दिन: 20 दिन पूरे होने पर दूसरा नोटिस और जवाब-तलब।
  • 26वां दिन: 25 दिनों तक काम न होने पर अंतिम चेतावनी के साथ आखिरी नोटिस।
  • 31वां दिन: अगर 30 दिनों के भीतर जनता की फाइल पर दस्तखत नहीं हुए, तो 31वें दिन संबंधित कर्मचारी या अधिकारी को सीधे निलंबित (सस्पेंड) कर दिया जाएगा।

सी एम ने अधिकारियों को काम करने की अपनी शैली बदलने को कहा है और नारा दिया कि अब 10 या 12 घंटे नहीं, बल्कि 20 घंटे काम करना होगा; ना खुद सोना है और ना अफसरों को सोने देना है, सिर्फ जनता का काम करना है।

अपराधियों को खुली चुनौती: “बिहार छोड़ो या श्‍मशान जाओ”

राज्य में उद्योग-धंधों को बढ़ावा देने और निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए सुशासन को पहली शर्त बताते हुए सम्राट चौधरी ने अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अपराध करने वाला किसी भी जाति या धर्म का हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। बिहार के बगल में उत्तर प्रदेश में ‘बाबा’ और दूसरी तरफ सुवेंदु अधिकारी के होने का जिक्र करते हुए उन्होंने मजाकिया लेकिन सख्त लहजे में कहा कि अपराधियों के पास अब सिर्फ नेपाल भागने का रास्ता बचा है, नहीं तो उनका सीधा ठिकाना श्‍मशान होगा।

सीवान में चीनी मिल और 25 लाख घरों को मुफ्त सोलर बिजली की सौगात

सीवान की आर्थिक प्रगति को रफ्तार देने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर सी एम ने मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और स्थानीय प्रशासन को तुरंत जमीन चिन्हित कर सीवान में नई चीनी मिल खोलने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।

इसके साथ ही, राज्य सरकार के बड़े आर्थिक संकल्पों की घोषणा करते हुए उन्होंने बताया कि:

  • मुफ्त सोलर बिजली: अगले दो वर्षों के भीतर बिहार के 25 लाख गरीब और बीपीएल परिवारों के घरों पर मुफ्त सोलर प्लांट लगाए जाएंगे। इससे जनता को बिजली तो मुफ्त मिलेगी ही, साथ ही 125 यूनिट से अधिक उत्पादित बिजली का पैसा सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाएगा।
  • 1 करोड़ रोजगार: विकसित भारत और समृद्ध बिहार के संकल्प के तहत वर्ष 2030 तक राज्य के 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा।
  • प्रखंडों में डिग्री और मॉडल स्कूल: इसी जुलाई महीने से उन सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज शुरू किए जाएंगे जहां कॉलेज नहीं हैं। साथ ही, हर प्रखंड में मॉडल स्कूल बनेंगे जहां नीट,जेईई और आईआईटी  की उच्च स्तरीय कोचिंग मुफ्त मिलेगी।
कैमूर  में माँ मुंडेश्वरी धाम से पूजा अर्चना कर निकलते सी एम सम्राट चौधरी।

कैमूर के विकास और मुंडेश्‍वरी धाम का कायाकल्‍प

इस महा-अभियान के तहत कैमूर की धरती को 196.06 करोड़ रुपये की 60 विकास योजनाओं की सौगात मिली, जबकि सीवान को 180 करोड़ रुपये की 38 योजनाओं का तोहफा मिला। कैमूर के प्रसिद्ध और ऐतिहासिक माँ मुंडेश्वरी धाम का जीर्णोद्धार कर वहां श्रद्धालुओं के लिए रोपवे का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्र में एयरपोर्ट के विकास और हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की महत्वपूर्ण पहल की जाएगी।

गरिमामयी उपस्थिति

सीवान में इस ऐतिहासिक आयोजन के गवाह सीवान की सांसद विजय लक्ष्मी, महाराजगंज के सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, पूर्व मंत्री व विधायक मंगल पांडे, विधायक इंद्रदेव सिंह पटेल, अमरनाथ शाह, देवेश कांत सिंह, कर्णजीत सिंह व्यास, भीष्म प्रताप सिंह, विष्णुदेव पासवान, विधान परिषद सदस्य वीरेंद्र नारायण यादव, पूर्व सांसद ओमप्रकाश यादव, पूर्व सांसद कविता सिंह, पूर्व विधान परिषद सदस्य मनोज सिंह बने। प्रशासनिक स्तर पर सी एम के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, डीजीपी विनय कुमार, सचिव संजय सिंह, राहुल तिवारी, विकास कुमार, महादेव पासवान, अभय सिंह, रिज़वान, चंद्रकेतु सिंह और संजय पांडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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500 साल पहले तुलसी के साहित्य में रचे गए 23 जातियों के संदर्भ क्या आज भी वही हैं: 2026 की राष्ट्रीय डिजिटल जनगणना से खुलेगा नया अध्याय!

विशेष रिपोर्ट : एस. एस. कुमार ‘पंकज’

वर्ष 2026 भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ है। देश की पहली पूर्णतः ‘राष्ट्रीय डिजिटल जनगणना‘ धरातल पर उतर चुकी है। हाथ में टैबलेट और मोबाइल ऐप लिए प्रगणक देश के कोने-कोने में जातियों और उप-जातियों का मुकम्मल आंकड़ा जुटा रहे हैं। सत्ता के गलियारों से लेकर चाय की दुकानों तक बहस गर्म है कि इस नए डेटा से राजनीति, आरक्षण और विकास का क्या खाका तैयार होगा।

500 साल पहले गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य (जैसे रामचरितमानस और कवितावली) में जिन लगभग 23 जातियों और सामाजिक वर्गीकरणों का उल्लेख मिलता है, उनका संदर्भ आज के बदलते भारत में पूरी तरह बदल चुका है। तुलसीदास के समय में जातियों का उल्लेख तत्कालीन सामंतवादी व्यवस्था, श्रम-विभाजन और सामाजिक सोपानक्रम को दर्शाने के लिए हुआ था, जहाँ पहचान जन्म और पारंपरिक पेशों से बंधी थी। लेकिन आज, लोकतांत्रिक मूल्यों, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों ने उस रूढ़िवादिता को काफी हद तक तोड़ा है।

वर्ष 2026 की राष्ट्रीय डिजिटल जनगणना इस संदर्भ में एक युगांतकारी और नया अध्याय लिखने जा रही है। पारंपरिक और केवल कागजी अनुमानों से इतर, यह डिजिटल जनगणना देश के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने का एक सटीक, वास्तविक और वैज्ञानिक डेटा सामने लाएगी। यह डेटा सदियों पुरानी जातियों को केवल एक ‘पहचान’ या ‘भेदभाव’ के चश्मे से देखने के बजाय, उनकी वर्तमान आर्थिक स्थिति, साक्षरता और संसाधनों तक उनकी पहुँच का सटीक मूल्यांकन करेगा। इसके परिणामस्वरूप, नीतियां किसी मध्यकालीन सामाजिक ढांचे के आधार पर नहीं, बल्कि 21वीं सदी की व्यावहारिक जरूरतों और डिजिटल पारदर्शिता के आधार पर बनेंगी, जो तुलसीकालीन संदर्भों को पूरी तरह से आधुनिक विकास की मुख्यधारा में पुनर्परिभाषित कर देगा।

लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आज से ठीक 500 साल पहले, मध्यकाल के अवध और ब्रज में एक कवि ने बिना किसी आधुनिक तकनीक या सरकारी बजट के, अपने दौर के समाज का एक ऐसा ही सटीक ‘साहित्यिक सेंसस’ तैयार कर दिया था?

जी हां, हम बात कर रहे हैं महाकवि गोस्वामी तुलसीदास और उनकी अमर कृतियों की। अक्सर धार्मिक और आध्यात्मिक चश्मे से देखे जाने वाले तुलसी-साहित्य में सामाजिक बुनावट का एक ऐसा प्रामाणिक डेटा छिपा है, जिसे आज के दौर में ‘खबरों की सोने की खान’ (गोल्ड माइन) कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

तुलसीदास का ‘काल्पनिक सेंसस‘: कोई भी हिस्सा अछूता नहीं

अकादमिक रिसर्च और भाषाई विश्लेषण से यह साफ होता है कि तुलसीदास जी ने अपने महाकाव्य श्रीरामचरितमानस, कवितावली, विनयपत्रिका और रामलला नहछू जैसी रचनाओं में पारंपरिक चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) सहित कुल 23 सामाजिक समूहों और विशिष्ट जातियों का स्पष्ट उल्लेख किया है।

यह संख्या कोई सामान्य संयोग नहीं है। यह इस बात का साहित्यिक प्रमाण है कि मध्यकालीन भारत की सामाजिक-आर्थिक रीढ़ कौन सी जातियां थीं। तुलसीदास ने राजा-महाराजाओं के वैभव के साथ-साथ जंगलों में रहने वाले आदिवासियों, नदियों के जलपुत्रों, और गांवों के गली-कूचों में पसीना बहाने वाले शिल्पकारों को अपने काव्य में मुख्यधारा का स्थान दिया।

जल, जंगल से लेकर सत्ता की धुरी तक: इन 23 समूहों की बानगी

इस विशेष सीरीज में हम उन सभी 23 सामाजिक समूहों की पड़ताल करेंगे, जिनका जिक्र तुलसीदास ने अलग-अलग संदर्भों में किया है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • वन के राजा और सीमांत समाज: कोल, किरात, भील, सबर (शबरी) और ‘खस’ (हिमालयी क्षेत्र की जनजाति)।
  • नदियों के जलपुत्र: निषाद और केवट, जो आज उत्तर भारत की राजनीति का रुख तय कर रहे हैं।
  • गोपालक वर्ग : अहीर (यादव/गोप) जो मध्यकाल में पूरी तरह पारंपरिक आजीविका से जुड़े थे, लेकिन 2026 की राजनीतिक मैपिंग में सत्ता के एक बड़े स्तंभ बन चुके हैं।
  • व्यावसायिक धुरी : तेली और कलवार समाज—जो मध्यकाल में पूरी तरह पारंपरिक आजीविका से जुड़े थे,आज विभिन्‍न अलग अलग व्‍यवसायों में हिस्‍सेदारी रखते हैं,  
  • लोक-शिल्पी और कामगार महिलाएं: रामलला नहछू की वो 5 कर्मठ महिलाएं—नाइन, अहिरिन, तम्बोलिन, दरजिन, मालीन और पटुआरिन, जिनकी आजीविका पर आज मशीनीकरण और कॉर्पोरेट ब्रांड्स का साया है।
  • कारीगर और बुनकर वर्ग: कुम्हार (प्रजापति) और जुलाहा (बुनकर) समाज, जो आज के प्लास्टिक और पावरलूम के दौर में वजूद की लड़ाई लड़ रहे हैं।
  • हाशिए का मनोरंजन और सांस्कृतिक समाज: नट, भाट, यवन और श्वपच (चांडाल/सफाई कर्मी समाज)।

दो विरोधाभासी संदर्भ: भक्ति की समरसता बनाम कलयुग का यथार्थ

तुलसीदास के साहित्य में इन जातियों को लेकर दो बेहद दिलचस्प और विरोधाभासी पहलू देखने को मिलते हैं, जो आज के लिए सबसे बड़ा रिसर्च पॉइंट हैं:

1. अध्यात्म में परम समरसता (बालकाण्ड, दोहा 194)

“स्वपच सबर खस जमन जड़ पामर कोल किरात। रामु कहत पावन परम होत भुवन बिख्यात॥”

अर्थात्: समाज में जिन्हें सबसे पिछड़ा या प्रतिष्ठा-विहीन माना गया, वे भी राम का नाम लेकर परम पवित्र और पूजनीय हो जाते हैं। यहाँ तुलसीदास एक प्रगतिशील समाज सुधारक के रूप में उभरते हैं।

2. उत्तरकाण्ड का कड़वा यथार्थ (दोहा 98 क के बाद)

वही तुलसीदास जब उत्तरकाण्ड में कलयुग की विसंगतियों का वर्णन करते हैं, तो तत्कालीन सामाजिक उथल-पुथल को दर्ज करते हुए लिखते हैं:

“जे बरनाधम तेलि कुम्हारा। स्वपच किरात कोल कलवारा॥”

मध्यकाल का यह सामंती यथार्थ आज 2026 में पूरी तरह बदल चुका है। जिन व्यावसायिक जातियों के उभार को तब कलयुग का लक्षण माना गया था, आज लोकतंत्र और आरक्षण के संवैधानिक अधिकारों की बदौलत वही जातियां उत्तर भारत की राजनीति और अर्थशास्त्र का एजेंडा तय कर रही हैं।

तुलसी-साहित्य में वर्णित 23 जातियों का प्रामाणिक संदर्भ

क्र. सं.जाति / वर्ण का नामपारंपरिक जीविका / कार्यसंबंधित पुस्तक का नामकिस पंक्ति / दोहा / पद में चर्चा (सटीक संदर्भ)
1ब्राह्मण / विप्र / भूसुरवेदाध्ययन, यज्ञ-अनुष्ठान कराना, शिक्षा देना, समाज का आध्यात्मिक मार्गदर्शन• श्रीरामचरितमानस

• दोहावली

• विनयपत्रिका
• मानस में सर्वत्र (जैसे- बालकाण्ड में भृगुनाथ प्रसंग, उत्तरकाण्ड में विप्र-महिमा)

• दोहावली में ब्राह्मण के कर्तव्यों का वर्णन
2क्षत्रिय / राजपूतराजकाज संभालना, प्रजा की रक्षा करना, युद्ध और सीमा सुरक्षा• श्रीरामचरितमानस

• कवितावली
• बालकाण्ड (राम-लक्ष्मण का क्षत्रिय रूप)

• कवितावली (उत्तरकाण्ड, छंद 106 – “राजपूत कहौ जोलहा कहौ कोऊ”)
3वैश्य / बनिकव्यापार, वाणिज्य, कृषि प्रबंधन और अन्न-धन का लेन-देन• श्रीरामचरितमानस

• कवितावली
• उत्तरकाण्ड (कलयुग में वैश्य स्थिति)

• कवितावली (छंद 84 – “किसबी, किसान-कुल, बनिक”)
4कोलवनोपज संग्रह (लकड़ी, फल, शहद आदि एकत्र करना)• श्रीरामचरितमानस

• विनयपत्रिका

• गीतावली
• बालकाण्ड (दोहा 194), अयोध्याकाण्ड (दोहा 134, दोहा 249), उत्तरकाण्ड (दोहा 98 क)

• विनयपत्रिका (पद 165), गीतावली
5किरातवनों में तीर-कमान से आखेट (शिकार) करना• श्रीरामचरितमानस

• बरवै रामायण

• विनयपत्रिका
• बालकाण्ड (दोहा 194), अयोध्याकाण्ड (दोहा 134, दोहा 98 क), अरण्यकाण्ड (अंत)

• बरवै रामायण (बरवै 23), विनयपत्रिका (पद 165)
6भील / भीलनीपर्वतीय क्षेत्रों में आखेट व वन-उत्पादों का संग्रह• श्रीरामचरितमानस

• गीतावली
• अयोध्याकाण्ड (दोहा 134 के बाद की चौपाई)

• गीतावली (अयोध्याकाण्ड के पद)
7सबर / शबरीकंद-मूल, फल और जंगली औषधियाँ एकत्र करना• श्रीरामचरितमानस

• विनयपत्रिका
• बालकाण्ड (दोहा 194), अरण्यकाण्ड (शबरी प्रसंग)

• विनयपत्रिका (पद 160)
8निषाद / केवटनाव चलाना (मल्लाह), नदी पार कराना, मछली पकड़ना• श्रीरामचरितमानस

• विनयपत्रिका

• रामाज्ञा प्रश्न
• अयोध्याकाण्ड (दोहा 101, दोहा 194)

• विनयपत्रिका (पद 165 – “नीच निषाद समाजू”)
9तेलीतिलहन (सरसों, तिल आदि) से तेल निकालना और बेचना• श्रीरामचरितमानस• उत्तरकाण्ड (दोहा 98 क के बाद – “जे बरनाधम तेलि कुम्हारा”)
10कुम्हारमिट्टी के बर्तन, घड़े, दीये और खपरैल बनाना• श्रीरामचरितमानस• उत्तरकाण्ड (दोहा 98 क के बाद – कलयुग वर्णन)
11कलवारराजसैनिको के लिए भोजन(कलेउ) की व्‍यवस्‍था करना,  पारंपरिक रूप से मदिरा (शराब) बनाना और उसका व्यापार• श्रीरामचरितमानस• उत्तरकाण्ड (दोहा 98 क के बाद – कलयुग वर्णन)
12अहीर / अहिरिन / गोपपशुपालन, दुग्ध उत्पादन (दूध, दही, माखन बेचना)• श्रीरामचरितमानस

• रामलला नहछू

• श्रीकृष्ण गीतावली
• अरण्यकाण्ड (अंत का सोरठा)

• रामलला नहछू (पद 6 – “गोरस लै आइ अहीरिनि”)

• श्रीकृष्ण गीतावली (बाललीला व भ्रमरगीत)
13नाइन (नाई)मांगलिक उत्सवों में नाखून काटना, पैर धोना, महावर लगाना• रामलला नहछू• रामलला नहछू (पद 5 – “गौरी सुंदर नाइन हाथ कँकन”)
14तम्बोलिन (तमोली)पान की खेती करना और उत्सवों में पान के बीड़े परोसना• रामलला नहछू• रामलला नहछू (पद 7 – “ताँबुल कें पान तँबोलिनि”)
15दरजिन (दर्जी)समाज के लिए वस्त्रों और पोशाकों की सिलाई करना• रामलला नहछू• रामलला नहछू (पद 8 – “रेशम कै बागो दरिजिनि”)
16मालीन (माली)बाग-बगीचों की देखभाल, फूल चुनना और माला/सेहरा गूंथना• रामलला नहछू• रामलला नहछू (पद 9 – “कनक कँवल कर मालीन”)
17पटुआरिन (पटवा)रेशम/सूत के धागे गूंथना, सेहरे की गोट या डोरी बनाना• रामलला नहछू• रामलला नहछू (पद 10 के आसपास के पद)
18जुलाहाहथकरघे पर सूत से कपड़ा बुनने का कार्य• कवितावली• उत्तरकाण्ड (छंद 106 – “राजपूत कहौ jolha कहौ कोऊ”)
19नटकलाबाज़ी, शारीरिक करतब और गायन ग्रामीण क्षेत्र में रहकर से मनोरंजन करना• श्रीरामचरितमानस

• कवितावली
• रामचरितमानस (सांकेतिक उल्लेख)

• कवितावली (छंद 84 – “चपल नट, चोर, चार”)
20भाटवंशावली रखना, राजाओं/उत्सवों में कीर्ति-गान करना• कवितावली• उत्तरकाण्ड (छंद 84 – “भिखारी, भाट, चाकर”)
21खसहिमालयी क्षेत्रों में पशुपालन और सीमांत सुरक्षा/लड़ाके• श्रीरामचरितमानस• बालकाण्ड (दोहा 194), अरण्यकाण्ड (अंत का सोरठा)
22श्वपच (चांडाल)श्मशान व्यवस्था, अंत्येष्टि और साफ-सफाई का कार्य• श्रीरामचरितमानस

• विनयपत्रिका
• बालकाण्ड (दोहा 194), उत्तरकाण्ड (दोहा 98 क)

• विनयपत्रिका (पद 160)
23यवन / जमनमध्यकाल में सैनिक, प्रशासनिक या बाहरी समूहों के रूप में• श्रीरामचरितमानस• बालकाण्ड (दोहा 194), अरण्यकाण्ड (अंत का सोरठा)

भौगोलिक विस्तार: ये जातियाँ आज भारत के किन क्षेत्रों में रहती हैं?

गोस्वामी तुलसीदास रचित कृतियाँ केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं, बल्कि वे मध्यकालीन भारतीय समाज का एक सजीव सामाजिक दस्तावेज़ भी हैं। इतिहासकार और समाजशास्त्री मानते हैं कि तुलसीदास जी ने अपने समय के समाज में रची-बसी जिन कड़ियों का उल्लेख किया था, वे सभी आज भी भारत में पूरी तरह अस्तित्व में हैं। हालाँकि, समय के चक्र, आधुनिक अर्थव्यवस्था और लोकतान्त्रिक व्यवस्था के कारण इन जातियों के भौगोलिक विस्तार, सामाजिक स्थिति और आजीविका के साधनों में व्यापक बदलाव आया है।

तुलसीदास जी की रचनाओं की पृष्ठभूमि मुख्य रूप से अवध (मध्य उत्तर प्रदेश), ब्रज (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) और चित्रकूट-बुंदेलखंड क्षेत्र रही है। लेकिन आज इन जातियों का विस्तार पूरे भारत में है:

  • गंगा-यमुना का मैदानी क्षेत्र (उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश): अहिर (यादव), तेली, कुम्हार, निषाद/केवट/मल्लाह, कलवार, नाई, तमोली, दर्जी, माली, पटवा, नट, जुलाहा, भाट और श्वपच (वाल्मीकि/डोम/सफ़ाई कर्मी समाज) मुख्य रूप से इन राज्यों के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में घनी आबादी में निवास करते हैं।
  • मध्य भारत और दक्कन के वन क्षेत्र (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा, राजस्थान, महाराष्ट्र): कोल, भील, किरात और सबर (शबरी की जाति) जैसी वनवासी और आदिवासी जनजातियाँ मुख्य रूप से विंध्याचल, सतपुड़ा, अरावली और छोटानागपुर के पठारी व जंगली अंचलों में पाई जाती हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश में ‘भील’ जनजाति की बहुत बड़ी आबादी है।
  • हिमालयी और सीमांत क्षेत्र: ‘खस’ जाति मुख्य रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है।
  • यवन / जमन: मध्यकाल का यह संदर्भ आज भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों के रूप में पूरे देश के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में समाहित है।

समकालीन स्थिति: आज इनके क्या हालात हैं?

आधुनिक भारत में इन जातियों की स्थिति को एक ही चश्मे से नहीं देखा जा सकता। आज इनके हालात में शहरीकरण, शिक्षा, आरक्षण नीति और राजनीतिक चेतना के कारण भारी विविधता आई है। इन्हें मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में समझा जा सकता है:

1. राजनीतिक और सामाजिक रूप से सशक्त वर्ग

  • अहीर (यादव): आज यह समाज केवल पशुपालन या दुग्ध उत्पादन तक सीमित नहीं है। हरित क्रांति और उत्तर भारत की राजनीति (विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार) में इस समाज ने बहुत बड़ी राजनीतिक शक्ति हासिल की है। शिक्षा, कृषि, व्यापार, सेना और सरकारी नौकरियों में इस वर्ग की स्थिति बेहद मजबूत हुई है।
  • कलवार और तेली: पारंपरिक रूप से तेल पेराई और अन्य व्यवसाय से जुड़े ये समाज आज ‘वैश्य’ वर्ग के अंतर्गत बड़े व्यापारिक और व्यावसायिक समूहों के रूप में स्थापित हो चुके हैं। शहरी क्षेत्रों में इनका झुकाव आधुनिक व्यापार, किराना, रियल एस्टेट और राजनीति की ओर हुआ है, जिससे इनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ है, वहीं ग्रामीण क्षेत्र में रहकर व्‍यापार करने  वाले ये समूह कुछ हद तक  ठीक हैं ।व्‍यापार में अन्‍य जातियों के शामिल होने से अब इन वर्गों को कड़े संघर्ष का सामना करना पर रहा है।  

2. आधुनिक तकनीक और मशीनीकरण से जूझता कामगार वर्ग

  • कुम्हार (प्रजापति), दर्जी, माली, नाई (सेंथवार/ठाकुर) और पटवा: इन जातियों के पारंपरिक कार्यों का आज “मशीनीकरण” और “कॉर्पोरेटाइजेशन” हो गया है।
    • मिट्टी के बर्तनों की जगह प्लास्टिक और स्टील ने ले ली है, जिससे कुम्हारों को अब केवल दीवाली या त्योहारों पर बाज़ार मिलता है, लेकिन यह बाजार चाइनीज लडियों के कारण खत्‍म हो रहा है।     
    • नाई समाज अब आधुनिक ‘सैलून और पार्लर’ उद्योग में बदल चुका है; जिन्होंने तकनीक अपनाई वे आर्थिक रूप से समृद्ध हुए, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक कामगार अब भी संघर्ष कर रहे हैं।
    • दर्जी समाज आज रेडीमेड कपड़ों के बड़े उद्योगों और बुटीक संस्कृति से प्रतिस्पर्धा कर रहा है।
    • तमोली और पटवा समाज भी पारंपरिक खेती से हटकर अन्य छोटे-मोटे व्यवसायों या नौकरियों की तरफ रुख कर चुका है।

3. जल और जंगल पर निर्भर समाज (चुनौतियों का सामना करता वर्ग)

  • निषाद / केवट / मल्लाह: नदियों पर पुल बन जाने, मशीनी नावों के आ जाने और जल निकायों के ठेके बड़े ठेकेदारों के पास चले जाने के कारण इस समाज की पारंपरिक आजीविका संकट में आई है। हालाँकि, हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश और बिहार में इस समाज के भीतर बहुत तीव्र ‘राजनीतिक लामबंदी’ देखी गई है, जिससे शासन-प्रशासन में इनका प्रतिनिधित्व बढ़ा है।
  • कोल, भील और सबर: ये वनवासी समाज आज सरकार की ‘अधिसूचित जनजातियों’ (ST) की सूची में शामिल हैं। जंगलों के कट ऑफ  होने और कड़े वन कानूनों के कारण इनका पारंपरिक आखेट और वनोपज संग्रह का काम लगभग बंद हो चुका है। आज ये मुख्य रूप से कृषि मजदूरी, खनन और निर्माण कार्यों में श्रम करते हैं। शिक्षा के प्रसार के बावजूद, दूरदराज के क्षेत्रों में रहने के कारण विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए इन्हें आज भी कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है।

4. कला, सीमांत और अन्य श्रमिक वर्ग

  • नट और भाट: मनोरंजन के आधुनिक साधनों (टेलीविजन, मोबाइल, इंटरनेट) ने नटों की पारंपरिक रस्सी की कलाबाज़ी और भाटों की गायन विधा को हाशिए पर धकेल दिया है। यह समाज अब लोक-कलाकार के रूप में या फिर दिहाड़ी मजदूरी अपनाकर अपनी जीविका चला रहा है।
  • जुलाहा: हथकरघा उद्योग के धीमे होने और पावरलूम के आ जाने से इस बुनकर समाज को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा है, लेकिन बनारसी और अन्य पारंपरिक साड़ियों के वैश्विक बाज़ार के कारण इसका एक हिस्सा आज भी अपनी कला को जीवित रखे हुए है।
  • श्वपच (दलित/सफ़ाई कर्मी समाज): कलयुग वर्णन में जिस समाज का उल्लेख है, वह आज कानूनी और संवैधानिक संरक्षण (SC वर्ग) के दायरे में है। बाबासाहेब अंबेडकर के आंदोलन और शिक्षा के प्रसार से इस समाज के युवाओं ने प्रशासनिक सेवाओं और राजनीति में अपनी जगह बनाई है। हालाँकि, मैला ढोने जैसी कुप्रथाओं के खात्मे के बाद भी शहरी स्वच्छता व्यवस्था में इस वर्ग की बहुलता है और इनके सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

डिजिटल पारदर्शिता से पुनर्परिभाषित होता ‘न्यू इंडिया‘

गोस्वामी तुलसीदास जी के साहित्य में वर्णित ये 23 जातियाँ आज के बदलते भारत (New India) का एक जीवंत हिस्सा हैं। मध्यकाल में जो जातियाँ केवल अपने ‘जन्म आधारित’ पारंपरिक कार्यों से बंधी हुई थीं, आज लोकतान्त्रिक अधिकारों, शिक्षा और संवैधानिक आरक्षण के कारण वे अपनी पारंपरिक सीमाओं को तोड़ रही हैं।

आज का ‘तेली’ या ‘अहीर’ केवल तेल या दूध तक सीमित नहीं है, और न ही ‘केवट’ केवल नाव तक। वे डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी और देश के नीति-निर्माता बन रहे हैं। यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि भारत का सामाजिक ताना-बाना स्थिर नहीं, बल्कि प्रगतिशील और गतिशील है।

आज जब 1931 के बाद पहली बार देश में इस स्तर पर जातियों और उप-जातियों का डिजिटल डेटा एकत्र किया जा रहा है, तब अतीत के इन पन्नों को पलटना अनिवार्य हो जाता है।

  • क्या 500 साल पहले जिन जातियों की आजीविका ‘जल-जंगल-जमीन’ और हस्तशिल्प पर टिकी थी, आज के कॉर्पोरेट और डिजिटल युग में उन्हें उनका हक मिल पाया?
  • राम को कंद-मूल खिलाने वाले भील-किरात आज की आर्थिक मैपिंग में कहां खड़े हैं?
  • विवाह उत्सवों में ‘नेग’ पाने वाली कामगार महिलाओं की कला क्या मॉल और ब्यूटी पार्लर्स के शोर में खो गई है?

“महागाथा सेंसस” की इस सीरीज में हम केवल साहित्यिक दोहों का विश्लेषण नहीं करेंगे, बल्कि मुजफ्फरपुर से लेकर देश के ग्रामीण अंचलों तक की ग्राउंड रियलिटी, इन्फोग्राफिक्स और 2026 के नए जनसांख्यिकीय आंकड़ों के साथ हर जाति की विकास यात्रा की मुकम्मल पड़ताल करेंगे।

बने रहिए हमारे साथ… अगली कड़ी में हम रुख करेंगे “वनवासी, सीमांत और आदिवासी समाज (जल-जंगल की विरासत)” की ओर, और जानेंगे कि राम को वन पार कराने वाले कोल-भीलों की स्थिति आज की डिजिटल मैपिंग में क्या है।

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ट्रेन यात्रा के दौरान आधार कार्ड साथ रखना हुआ आसान, अब मोबाइल ऐप का डिजिटल स्वरूप भी पूरी तरह मान्य

यूआईडीएआई ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर दी जानकारी, एक ही मोबाइल फोन में परिवार के कुल पांच  सदस्यों का आधार रख सकेंगे यात्री

मुजफ्फरपुर : ट्रेन से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने एक महत्वपूर्ण और राहत भरी जानकारी साझा की है। प्राधिकरण ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक वीडियो जारी कर बताया है कि अब यात्रा के दौरान यदि आपका फिजिकल (कागज या प्लास्टिक का) आधार कार्ड घर पर छूट जाता है, तो परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। यात्री अपने मोबाइल फोन में आधार ऐप के माध्यम से अपना डिजिटल आधार कार्ड दिखा सकते हैं, जो पूरी तरह से वैध है।

प्राधिकरण के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल एटदरेट यूआईडीएआई द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब यात्रियों को पहचान पत्र के रूप में आधार की फोटोकॉपी साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं है। विभाग ने नागरिकों से पेपरलेस (बिना कागज के) व्यवस्था को अपनाने की अपील की है ताकि पर्यावरण और समय दोनों की बचत हो सके।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

टीटीई को दिखा सकते हैं ऐप का आधार

इस नई व्यवस्था के तहत यदि आप ट्रेन में सफर कर रहे हैं और रेल चेकिंग स्टाफ (टीटीई) आपसे पहचान पत्र की मांग करता है, तो आप अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड किए गए आधार ऐप को खोलकर अपनी डिजिटल पहचान दिखा सकते हैं। यूआईडीएआई ने स्पष्ट किया है कि मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने वाला यह डिजिटल आधार पूरी तरह से वैध है और इसे असली आधार कार्ड की तरह ही स्वीकार किया जाएगा।

एक ही फोन में पांच सदस्यों का विवरण

इस व्यवस्था की एक और बड़ी विशेषता यह है कि यात्रियों को अपने परिवार के अलग-अलग सदस्यों के लिए अलग-अलग दस्तावेज या मोबाइल फोन रखने की आवश्यकता नहीं होगी। इस ऐप की मदद से कोई भी व्यक्ति एक ही मोबाइल फोन के भीतर अपने और अपने परिवार के कुल 05 (पांच) सदस्यों का आधार कार्ड सुरक्षित रख सकता है। यात्रा के दौरान आवश्यकता पड़ने पर इसे दिखाकर सुगमता से सफर पूरा किया जा सकता है।

इस ऐप को डाउनलोड करने के लिए विभाग ने पहचान डॉट यूआईडीएआई डॉट जीओवी डॉट इन स्लैश ऐप स्लैश डाउनलोड प्रश्नचिह्न एसआरसी बराबर एक्स नामक आधिकारिक लिंक भी जारी किया है। सरकार के इस कदम से रेलवे स्टेशनों पर पहचान पत्र भूल जाने के कारण होने वाली असुविधाओं और जुर्मानों से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

यूआईडीएआई द्वारा एक्स अकाउंट पर जारी किए गए वीडियो का एक दृश्य, जिसमें ट्रेन यात्रा के दौरान फिजिकल कार्ड के स्थान पर डिजिटल आधार ऐप के इस्तेमाल की प्रक्रिया को समझाया गया है।

मुख्य बिंदु (हाइलाइट्स):

  • यात्रा के दौरान पहचान पत्र भूलने पर परेशान होने की जरूरत नहीं, मोबाइल ऐप से होगा काम।
  • एक ही मोबाइल फोन के अंदर परिवार के कुल V सदस्यों का आधार डेटा रखा जा सकेगा।
  • ट्रेन यात्रा के दौरान रेल स्टाफ को ऐप का आधार दिखाना पूरी तरह से कानूनी रूप से मान्य।
  • विभाग ने नागरिकों से फोटोकॉपी का उपयोग बंद कर पेपरलेस व्यवस्था अपनाने का आग्रह किया।
  • ऐप को डाउनलोड करने के लिए आधिकारिक लिंक पहचान डॉट यूआईडीएआई डॉट जीओवी डॉट इन स्लैश ऐप स्लैश डाउनलोड का उपयोग करें।

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खेतों में डिजिटल क्रांति! खाद के लिए नहीं लगानी होगी लंबी कतारें, वैशाली में लागू हुई देश की सबसे अनूठी क्यूआर कोड व्यवस्था!

बिहार सरकार के कृषि विभाग का पाइलट प्रोजेक्‍ट : एफएसएएस पोर्टल से घर बैठे बुक होगी खाद, कालाबाजारी पर लगेगा पूर्ण विराम

वैशाली, 15 जून: बिहार के कृषि क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो गई है। वैशाली जिले में 15 जून 2026 से क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन उर्वरक बुकिंग एवं वितरण प्रणाली को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। कृषि विभाग, बिहार सरकार की इस अभिनव और अति-आधुनिक पहल से अब किसानों को खाद की किल्लत और दुकानों पर लगने वाली लंबी-लंबी कतारों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। इस नई पारदर्शी व्यवस्था के तहत किसान अब अपने घर पर आराम से बैठकर ही एफएसएएस (फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन System) के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे और एक साधारण क्यूआर कोड दिखाकर अपने नजदीकी रिटेलर से बेहद सुगमता से खाद प्राप्त कर सकेंगे।

कृषि विभाग, बिहार सरकार द्वारा जारी किसानों के लिए 4-चरण वाली आसान ऑनलाइन उर्वरक बुकिंग मार्गदर्शिका। इसमें आधार सत्यापन, फसल चयन, रिटेलर मैपिंग और क्यूआर कोड/टोकन जनरेशन के साथ T+2 समय-सारणी के नियमों को विस्तार से समझाया गया है।

इस अत्यधिक महत्वाकांक्षी पायलट परियोजना के लिए पूरे बिहार में केवल दो जिलों का चयन किया गया है, जिसमें वैशाली और शेखपुरा शामिल हैं। वैशाली जिले में इस महा-अभियान की कमान खुद जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने संभाली है। वर्षा सिंह के कुशल नेतृत्व में पूरे जिले के ग्रामीण इलाकों में किसानों को इस डिजिटल और आधुनिक व्यवस्था के प्रति जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली के लागू होने से खाद के वितरण में शत-प्रतिशत पारदर्शिता आएगी, समय पर उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और सबसे बड़ी बात यह है कि बिचौलियों तथा कालाबाजारी करने वालों का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा। अब किसानों को उनकी फसल और भूमि की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक का आवंटन किया जाएगा।

उर्वरक डीलरों और रिटेलरों के लिए तैयार किया गया नया पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन प्रक्रिया चार्ट, जिसके माध्यम से क्यूआर कोड को स्कैन कर और बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा कर किसानों को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल रसीद के साथ खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

बुकिंग की आसान 4-चरण प्रक्रिया:

कृषि विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नई व्यवस्था को बेहद सरल और किसान-अनुकूल बनाया गया है। इसमें 4 आसान चरणों की प्रक्रिया निर्धारित की गई है:

  1. आधार से सत्यापन: पहले चरण में किसान को अपने आधार कार्ड के माध्यम से ओटीपी या ई-केवाईसी द्वारा सत्यापन करना होगा।
  2. फसल और खाद का चयन: दूसरे चरण में किसान को अपनी फसल (जैसे धान, गेहूं, मक्का या गन्ना) का चयन करना होगा और फिर भूमि के अनुसार उचित खाद जैसे यूरिया (46 प्रतिशत नाइट्रोजन) या डीएपी (18-46-0 एनपीके) की मात्रा चुननी होगी।
  3. रिटेलर का चयन: तीसरे चरण में किसान को अपने क्षेत्र के उन रिटेलरों या कृषि सेवा केंद्रों की सूची दिखाई देगी जहां स्टॉक उपलब्ध है, जिसमें से वे अपनी पसंद के रिटेलर का चयन कर सकते हैं।
  4. क्यूआर कोड और खाद प्राप्ति: चौथे और अंतिम चरण में सिस्टम द्वारा एक विशिष्ट क्यूआर कोड और टोकन नंबर जनरेट किया जाएगा, जिसे दिखाकर किसान रिटेलर के पास जाकर अपनी खाद प्राप्त कर सकते हैं।
वैशाली जिला मुख्यालय में डिजिटल उर्वरक वितरण प्रणाली की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करतीं जिलाधिकारी वर्षा सिंह। वर्षा सिंह के नेतृत्व में 15 जून 2026 से जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन खाद बुकिंग व्यवस्था को पूरी तरह अनिवार्य और प्रभावी बना दिया गया है।

नया पीओएस सिस्टम और खरीद समय-सारणी (T+2 नियम):

रिटेलरों के लिए भी अब नया पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन प्रोसेस लागू किया गया है। रिटेलर मशीन में लॉगिन, क्यूआर कोड स्कैन, आधार सत्यापन (बायोमेट्रिक या ओटीपी), स्टॉक ट्रैकिंग, उत्पाद चयन और बिक्री की पुष्टि के बाद सीधे रसीद प्रिंट होगी तथा आधार-लिंक मोबाइल नंबर पर एसएमएस रसीद भेजी जाएगी।

इस व्यवस्था में T+2 दिनों की समय-सीमा तय की गई है। बुकिंग के दिन (T0) खाद खरीदने की अनुमति नहीं होगी। बुकिंग के अगले दिन (T1) और उसके अगले दिन (T2) ही खाद खरीदी जा सकती है। यदि किसान ने बुकिंग के 2 दिनों के भीतर खाद नहीं उठाई, तो बुकिंग स्वतः रद्द हो जाएगी।

यह सुविधा व्यक्तिगत किसान, परिवार के प्रतिनिधि या किसी भी जरूरतमंद किसान के लिए पारदर्शी रूप से उपलब्ध है। कृषि विभाग का मुख्य उद्देश्य है: “खाद हर किसान के लिए है – गति, सरलता, पारदर्शिता और निष्पक्षता।” स्मार्ट और डिजिटल खेती की दिशा में यह बिहार सरकार का अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक कदम माना जा रहा है।

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