Monday, November 2, 2026

खेतों में डिजिटल क्रांति! खाद के लिए नहीं लगानी होगी लंबी कतारें, वैशाली में लागू हुई देश की सबसे अनूठी क्यूआर कोड व्यवस्था!

बिहार सरकार के कृषि विभाग का पाइलट प्रोजेक्‍ट : एफएसएएस पोर्टल से घर बैठे बुक होगी खाद, कालाबाजारी पर लगेगा पूर्ण विराम

वैशाली, 15 जून: बिहार के कृषि क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो गई है। वैशाली जिले में 15 जून 2026 से क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन उर्वरक बुकिंग एवं वितरण प्रणाली को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। कृषि विभाग, बिहार सरकार की इस अभिनव और अति-आधुनिक पहल से अब किसानों को खाद की किल्लत और दुकानों पर लगने वाली लंबी-लंबी कतारों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। इस नई पारदर्शी व्यवस्था के तहत किसान अब अपने घर पर आराम से बैठकर ही एफएसएएस (फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन System) के माध्यम से अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे और एक साधारण क्यूआर कोड दिखाकर अपने नजदीकी रिटेलर से बेहद सुगमता से खाद प्राप्त कर सकेंगे।

कृषि विभाग, बिहार सरकार द्वारा जारी किसानों के लिए 4-चरण वाली आसान ऑनलाइन उर्वरक बुकिंग मार्गदर्शिका। इसमें आधार सत्यापन, फसल चयन, रिटेलर मैपिंग और क्यूआर कोड/टोकन जनरेशन के साथ T+2 समय-सारणी के नियमों को विस्तार से समझाया गया है।

इस अत्यधिक महत्वाकांक्षी पायलट परियोजना के लिए पूरे बिहार में केवल दो जिलों का चयन किया गया है, जिसमें वैशाली और शेखपुरा शामिल हैं। वैशाली जिले में इस महा-अभियान की कमान खुद जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने संभाली है। वर्षा सिंह के कुशल नेतृत्व में पूरे जिले के ग्रामीण इलाकों में किसानों को इस डिजिटल और आधुनिक व्यवस्था के प्रति जागरूक करने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस प्रणाली के लागू होने से खाद के वितरण में शत-प्रतिशत पारदर्शिता आएगी, समय पर उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और सबसे बड़ी बात यह है कि बिचौलियों तथा कालाबाजारी करने वालों का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा। अब किसानों को उनकी फसल और भूमि की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक का आवंटन किया जाएगा।

उर्वरक डीलरों और रिटेलरों के लिए तैयार किया गया नया पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन प्रक्रिया चार्ट, जिसके माध्यम से क्यूआर कोड को स्कैन कर और बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा कर किसानों को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल रसीद के साथ खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा।

बुकिंग की आसान 4-चरण प्रक्रिया:

कृषि विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नई व्यवस्था को बेहद सरल और किसान-अनुकूल बनाया गया है। इसमें 4 आसान चरणों की प्रक्रिया निर्धारित की गई है:

  1. आधार से सत्यापन: पहले चरण में किसान को अपने आधार कार्ड के माध्यम से ओटीपी या ई-केवाईसी द्वारा सत्यापन करना होगा।
  2. फसल और खाद का चयन: दूसरे चरण में किसान को अपनी फसल (जैसे धान, गेहूं, मक्का या गन्ना) का चयन करना होगा और फिर भूमि के अनुसार उचित खाद जैसे यूरिया (46 प्रतिशत नाइट्रोजन) या डीएपी (18-46-0 एनपीके) की मात्रा चुननी होगी।
  3. रिटेलर का चयन: तीसरे चरण में किसान को अपने क्षेत्र के उन रिटेलरों या कृषि सेवा केंद्रों की सूची दिखाई देगी जहां स्टॉक उपलब्ध है, जिसमें से वे अपनी पसंद के रिटेलर का चयन कर सकते हैं।
  4. क्यूआर कोड और खाद प्राप्ति: चौथे और अंतिम चरण में सिस्टम द्वारा एक विशिष्ट क्यूआर कोड और टोकन नंबर जनरेट किया जाएगा, जिसे दिखाकर किसान रिटेलर के पास जाकर अपनी खाद प्राप्त कर सकते हैं।
वैशाली जिला मुख्यालय में डिजिटल उर्वरक वितरण प्रणाली की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करतीं जिलाधिकारी वर्षा सिंह। वर्षा सिंह के नेतृत्व में 15 जून 2026 से जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन खाद बुकिंग व्यवस्था को पूरी तरह अनिवार्य और प्रभावी बना दिया गया है।

नया पीओएस सिस्टम और खरीद समय-सारणी (T+2 नियम):

रिटेलरों के लिए भी अब नया पीओएस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन प्रोसेस लागू किया गया है। रिटेलर मशीन में लॉगिन, क्यूआर कोड स्कैन, आधार सत्यापन (बायोमेट्रिक या ओटीपी), स्टॉक ट्रैकिंग, उत्पाद चयन और बिक्री की पुष्टि के बाद सीधे रसीद प्रिंट होगी तथा आधार-लिंक मोबाइल नंबर पर एसएमएस रसीद भेजी जाएगी।

इस व्यवस्था में T+2 दिनों की समय-सीमा तय की गई है। बुकिंग के दिन (T0) खाद खरीदने की अनुमति नहीं होगी। बुकिंग के अगले दिन (T1) और उसके अगले दिन (T2) ही खाद खरीदी जा सकती है। यदि किसान ने बुकिंग के 2 दिनों के भीतर खाद नहीं उठाई, तो बुकिंग स्वतः रद्द हो जाएगी।

यह सुविधा व्यक्तिगत किसान, परिवार के प्रतिनिधि या किसी भी जरूरतमंद किसान के लिए पारदर्शी रूप से उपलब्ध है। कृषि विभाग का मुख्य उद्देश्य है: “खाद हर किसान के लिए है – गति, सरलता, पारदर्शिता और निष्पक्षता।” स्मार्ट और डिजिटल खेती की दिशा में यह बिहार सरकार का अब तक का सबसे बड़ा और साहसिक कदम माना जा रहा है।

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गयाजी में गरजे सम्राट चौधरी: ‘या तो अपराधियों का पिंडदान होगा या फिर जेल के भीतर होंगे’, ₹170 करोड़ की MSME सौगात से युवाओं को लगेंगे पंख!

गयाजी: बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। गयाजी की पावन धरती से अपराधियों को ललकारते हुए उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बिहार को हर हाल में अपराधमुक्त बनाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “या तो अपराधियों का पिंडदान गयाजी में होगा या फिर वे जेल के भीतर होंगे।” अपराधियों के खिलाफ इस महा-संकल्प के बीच गयाजी के खिजरसराय में विकास का एक नया अध्याय भी लिखा गया, जहां अत्याधुनिक एमएसएमई (MSME) प्रौद्योगिकी केंद्र का भव्य भूमि पूजन और शिलान्यास संपन्न हुआ।

गयाजी में एमएसएमई प्रौद्योगिकी केंद्र के शिलान्यास समारोह के दौरान मंच पर उपस्थित मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री श्रेयसी सिंह व अन्य नेतागण।

₹170 करोड़ की महा-परियोजना, 20 एकड़ में फैलेगा खुशहाली का साम्राज्य

बिहार सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई 20 एकड़ भूमि पर लगभग 170 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से इस अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी केंद्र (टीसी) को विकसित किया जा रहा है। यह केंद्र केवल एक कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि बिहार के युवाओं के सपनों, आकांक्षाओं और आत्मनिर्भरता की एक मजबूत नींव है।

इस अवसर पर गया-इस्लामपुर-खिजरसराय पथ से लेकर इस प्रौद्योगिकी केंद्र तक जाने वाली सड़क के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य का भी जोरदार शुभारंभ किया गया, जिससे इलाके में कनेक्टिविटी और बेहतर होगी।

हर साल 7,000 युवाओं को ट्रेनिंग, 1,000 फैक्ट्रियों को मिलेगी मॉडर्न टेक सपोर्ट

यह केंद्र गयाजी सहित पूरे बिहार में औद्योगिक क्रांति का सूत्रपात करेगा। आधुनिक मशीनों और विश्वस्तरीय तकनीकों से सुसज्जित इस केंद्र के जरिए प्रतिवर्ष 7,000 से अधिक युवाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा, 1,000 से अधिक एमएसएमई इकाइयों को आधुनिक तकनीकी सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे बिहार के लोकल प्रोडक्ट्स को ग्लोबल पहचान मिल सके।

खिजरसराय में आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और डबल इंजन सरकार की विकास नीतियों को सुनने पहुंचे हजारों स्थानीय नागरिकों और महिलाओं की भारी भीड़।

6 लाख से 46 लाख तक पहुंची एमएसएमई इकाइयां, डबल इंजन का कमाल

कार्यक्रम में आंकड़ों को साझा करते हुए बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार के भीतर एमएसएमई क्षेत्र में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक प्रगति हुई है। राज्य में एमएसएमई इकाइयों की संख्या लगभग 6 लाख से बढ़कर अब 46 लाख से अधिक हो चुकी है। इसके चलते करोड़ों लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। यह केंद्र युवाओं के हाथों में कौशल और मन में आत्मविश्वास भरकर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को पूरा करेगा।

दिग्गजों का महाजुटान: मंच पर दिखी विकास की एकजुटता

इस ऐतिहासिक भूमि पूजन कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकार के कई दिग्गज चेहरे एक साथ नजर आए। समारोह में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतनराम मांझी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री श्रेयसी सिंह, और मंत्री संतोष मांझी सहित भारी संख्या में जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ पदाधिकारीगण और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने एक सुर में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार बिहार में विकास, रोजगार और कौशल संवर्धन के नए आयाम स्थापित कर रही है।

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समस्तीपुर में बंद उद्योग एवं दूधपूरा हवाई अड्डे के लिए सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारी, समाहरणालय के सामने गूंजे विरोध के सुर

समस्तीपुर, 15 जून 2026

समस्तीपुर की धरती सोमवार को सरकार के खिलाफ विरोध की हुंकार से गूंज उठी। जिला विकास संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जुटे प्रदर्शनकारियों ने न केवल सड़कों पर कब्जा किया, बल्कि जिले की बदहाल औद्योगिक स्थिति को लेकर प्रशासन की नींद उड़ा दी। दूधपूरा हवाई अड्डे के जीर्णोद्धार से लेकर बंद पड़ी चीनी मिल और पेपर मिल को चालू करने की मांग को लेकर समाहरणालय के सामने प्रदर्शनकारियों ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया।

बंद उद्योगों को चालू करने और दूधपूरा हवाई अड्डे के जीर्णोद्धार की मांग को लेकर  नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी।

जुलूस से समाहरणालय तक मचा हड़कंप आंदोलनकारी सरकार बस स्टैंड से सुबह ही इकट्ठा हो गए थे। वहां से एक विशाल जुलूस निकाला गया, जो शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब 1 घंटे तक समाहरणालय परिसर के बाहर प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर डटे रहकर प्रशासन पर दबाव बनाया। जिले के विकास की ठप पड़ी रफ्तार को लेकर आम लोगों में काफी आक्रोश दिखा।

प्रमुख मांगें: उद्योगों का पुनरुद्धार या आंदोलन का विस्तार  

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि समस्तीपुर के प्रमुख उद्योगों के बंद होने से हजारों परिवारों का चूल्हा जलना बंद हो गया है। मोर्चा ने अपनी 5 सूत्री मांगों को लेकर प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है।

  1. दूधपूरा हवाई अड्डा का जीर्णोद्धार कर उसे अविलंब चालू किया जाए।
  2. समस्तीपुर चीनी मिल को पुनः संचालित किया जाए।
  3. ठाकुर पेपर मिल को दोबारा चालू कर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं।
  4. मुक्तापुर स्थित रामेश्वर जूट मिल का विकास-विस्तार
  5. एवं उसके नियमित संचालन की गारंटी दी जाए।
समस्तीपुर समाहरणालय के समक्ष अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करते जिला विकास संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ता एवं नेता।

समाहरणालय द्वार पर आयोजित सभा की अध्यक्षता शंकर प्रसाद साह ने की। सभा के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने अपर समाहर्ता को ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र और व्यापक बनाया जाएगा।

इस आंदोलन में विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई:

  • सुरेंद्र प्रसाद सिंह (भाकपा माले) ने कहा कि बंद पड़े दूधपूरा हवाई अड्डे का जीर्णोद्धार करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
  • राकेश ठाकुर ने बिहार के प्रसिद्ध ठाकुर पेपर मिल को पुनः चालू करने की मांग उठाई।
  • शत्रुघ्न पंजी ने कहा कि 23 एकड़ में फैला समस्तीपुर चीनी मिल अगर चालू हो जाए, तो जिले की अर्थव्यवस्था बदल जाएगी।

आंदोलन में इनकी रही भागीदारी प्रदर्शन में शामिल प्रमुख लोगों में दीनबंधु प्रसाद, जीतेंद्र कुमार, रामलाल राम, अर्जुन राय, विश्वनाथ गुप्ता, सोनेलाल राय, सत्यनारायण सिंह (माकपा), सुधीर कुमार देव (भाकपा), परमानंद मिश्र (कांग्रेस), विश्वनाथ सिंह हजारी, सुशील कुमार, एख्लाकुर रहमान सिद्दीकी, राकेश ठाकुर (राजद), शाहीद हुसैन, अकबर अली, राम विनोद पासवान, शंभू राय, सूरत राम, संतोष कुमार निराला (ट्रेड यूनियन नेता), अशोक कुमार राय, सुरेंद्र राम, मनोज कुमार, विश्वनाथ कुमार पासवान, अविनाश कुमार, मिथिलेश कुमार राय, मो० सोनू, रंजीत कुमार सिंह, अनील कुमार राय, राजकुमार महतो, राजेंद्र राम, राजेश कुमार समेत बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आम नागरिक उपस्थित थे।

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बड़ी खबर: नए डिग्री कॉलेजों में तबादला चाहने वाले प्रिंसिपलों और बर्सरों को लगा तगड़ा झटका, राजभवन ने कड़ाई से लगाई रोक!

बिहार के 211 नए डिग्री कॉलेजों में नहीं होगा कोई ट्रांसफर, एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार सिंह का सख्त आदेश

पटना: बिहार के नव-निर्मित डिग्री कॉलेजों में मलाईदार पोस्टिंग या पसंदीदा जगहों पर तबादले की उम्मीद लगाए बैठे प्रिंसिपलों और बर्सरों को राजभवन ने बड़ा झटका दिया है । राजभवन सचिवालय से जारी एक बेहद सख्त आदेश के अनुसार, नए स्थापित किए गए 211 डिग्री कॉलेजों में हाल ही में तैनात किए गए प्रिंसिपलों और बर्सरों के तबादले या स्थान परिवर्तन के किसी भी आवेदन (रिप्रेजेंटेशन) पर किसी भी स्तर पर विचार नहीं किया जाएगा । यह रोक अगले आदेश तक पूरी तरह से प्रभावी रहेगी ।

राजभवन बिहार की ओर से एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार सिंह के हस्ताक्षरसे  वाइस-चांसलरों को जारी किया गया आधिकारिक पत्र (लेटर नंबर 78/एसीएस), जिसमें तबादलों पर पूर्ण रोक लगाने का आदेश दिया गया है ।

1 जुलाई से शुरू हो रहा है सत्र, लापरवाही बर्दाश्त नहीं

राज्यपाल के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक कुमार सिंह ने बिहार के सभी विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलरों को पत्र लिखकर इस फैसले से अवगत कराया है । पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन 211 नए डिग्री कॉलेजों का शैक्षणिक सत्र 01 जुलाई 2026 से शुरू होने जा रहा है । इस तय समय-सीमा के भीतर सत्र को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता और संस्थागत देखभाल की अत्यंत आवश्यकता है ।

तबादले की अर्जी लगाने पर जताई गहरी नाराजगी

दीपक कुमार सिंह ने तबादले के लिए पैरवी और अर्जी लगाने वाले अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है । उन्होंने पत्र में कहा कि यह वास्तव में बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जैसे ही इन कॉलेजों में पोस्टिंग की गई, वैसे ही अधिकारियों द्वारा तबादले या स्थान बदलने के लिए आवेदन मिलने शुरू हो गए । राजभवन ने इसे अनुशासन और समय-सीमा के उल्लंघन के रूप में देखा है ।

सभी वाइस-चांसलरों को सख्त निर्देश

राजभवन ने सभी विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलरों को यह निर्देश दिया है कि वे अपने अंतर्गत आने वाले कॉलेजों के इन नवनियुक्त प्रिंसिपलों और बर्सरों को यह कड़ा संदेश तुरंत कम्युनिकेट कर दें ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम न रहे ।

इस आदेश की प्रतिलिपियां (कॉपी) आवश्यक जानकारी और आगे की कार्रवाई के लिए हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी, हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर और चांसलर के ओएसडी को भी भेज दी गई हैं । इस फैसले से यह साफ हो गया है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई या पैरवी को राजभवन अब कतई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

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बिहार में कृषि क्रांति का बिगुल: मुख्यमंत्री ने रवाना किया ‘कृषि ज्ञान रथ’, अब किसानों के खेत तक पहुंचेगी आधुनिक तकनीक

पटना | बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को एक नई उड़ान देने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 14 जून 2026 को 01 अणे मार्ग, पटना से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘शारदीय (खरीफ) महाभियान-2026’ का भव्य शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एलईडी युक्त ‘किसान जागरूकता वाहनों’ को हरी झंडी दिखाकर प्रखंडों और जिलों के लिए रवाना किया। यह पहल राज्य में कृषि विकास की एक नई इबारत लिखने के लिए तैयार है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा संयुक्त रूप से ‘कृषि ज्ञान वाहन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए।

किसानों के द्वार तक पहुंचेगा ज्ञान कृषि विभाग द्वारा संचालित यह महाभियान महज एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों के सशक्तिकरण का एक महायज्ञ है। इन हाई-टेक एलईडी वाहनों के जरिए किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों के चयन, फसल प्रबंधन और सरकारी योजनाओं की सटीक जानकारी उनके गांव और खेतों तक पहुंचाई जाएगी।

मंच पर दिग्गजों की रही मौजूदगी इस कार्यक्रम में विकास और प्रगति का संकल्प दोहराया गया। मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी और उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कृषि विभाग की बागडोर संभाल रहे कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस दौरान पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता की और इस महाभियान की रूपरेखा को स्पष्ट किया।

01 अणे मार्ग पर कतारबद्ध तरीके से खड़े एलईडी युक्त किसान जागरूकता वाहन, जो राज्य के सुदूर प्रखंडों और जिलों में कृषि तकनीक का संदेश फैलाने के लिए तैयार हैं।

क्या बोले कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा? कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट लहजे में कहा कि इस महाभियान का एकमात्र उद्देश्य किसानों तक सरकारी योजनाओं और वैज्ञानिक खेती की जानकारी को सीधे पहुंचाना है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा लक्ष्य है कि कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी हो, खेती की लागत में कमी आए और किसानों की आय में गुणात्मक वृद्धि हो। हम तकनीक को सीधे खेत से जोड़ रहे हैं।”

महाभियान-2026 के मुख्य आकर्षण: यह महाभियान खेती के हर पहलू को कवर करेगा। इसकी प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • डीबीटी (DBT) सुविधा: लाभुक किसानों के बीच अनुदान का सीधा वितरण।
  • आधुनिक तकनीक: जीरो टिलेज से धान की सीधी बुआई और कृषि में ड्रोन तकनीक का सफल प्रयोग।
  • फसल विविधीकरण: मक्का, बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की उन्नत खेती को बढ़ावा।
  • जागरूकता प्रसार: किसान मेला, किसान पाठशाला, प्रशिक्षण, परिभ्रमण, प्रक्षेत्र दिवस और कृषि गोष्ठियों का आयोजन।
  • स्थायी खेती: संतुलित उर्वरकों के प्रयोग, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता।
  • मिट्टी और कल्याण: मिट्टी जांच कार्यकम और कृषि जनकल्याण चौपाल के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना।

यह अभियान निश्चित रूप से राज्य के लाखों किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा और बिहार को कृषि के क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाएगा।

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बिना फायर एनओसी और पास नक्शे के चल रहे प्राइवेट स्कूल-कोचिंग सेंटरों पर गिरेगी गाज, प्रशासन हुआ सख्त, 3 दिनों में मांगी गई जांच रिपोर्ट!

प्राइवेट स्कूलों की चालाकी पर कसा शिकंजा, इन 16 कड़े बिंदुओं पर देना होगा जवाब! बच्चों की जान जोखिम में, सेक्शनों के फेरबदल से लेकर सुरक्षा तक में अब नहीं चलेगा फर्जीवाड़ा!

 विशेष संवाददाता, मुजफ्फरपुर।  मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में 04/06/2026 को लगी भीषण आग में कई मरीजों की दर्दनाक मौत के बाद प्रमंडलीय प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। इस भयावह हादसे से सबक लेते हुए आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल गिरिवर दयाल सिंह ने एक अत्यंत कड़ा और गोपनीय पत्र (ज्ञापांक-गो0-01/2026-296, दिनांक 09/06/2026) जारी कर शिक्षा विभाग को हिलाकर रख दिया है। आयुक्त ने साफ शब्दों में कहा है कि अस्पताल जैसी घटना की पुनरावृत्ति किसी भी सूरत में स्कूलों या कोचिंग संस्थानों में नहीं होनी चाहिए।

इस प्रमंडलीय हंटर के तुरंत बाद मुजफ्फरपुर के जिला शिक्षा पदाधिकारी कुमार अरविन्द सिन्हा ने कड़ा रुख अपनाते हुए पत्र संख्या एमजीटी/1339 (दिनांक 12/06/2026) जारी कर दिया है। उन्होंने जिले के सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित सभी निजी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों की भौतिक जांच करने का अल्टीमेटम दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मात्र तीन दिनों के भीतर 16 कड़े बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी, ऐसा न करने वाले संस्थानों पर सीधे तालाबंदी की जाएगी। इस आदेश के बाद पूरे जिले के निजी स्कूल और कोचिंग माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

संचालकों को सहयोग करने का सख्त निर्देश, लापरवाही पर होगी सीधी कार्रवाई जिला शिक्षा पदाधिकारी ने मुजफ्फरपुर के सभी निजी विद्यालय और कोचिंग संचालकों तथा प्राचार्यों को सख्त निर्देश दिया है कि वे जांच अधिकारी को आवश्यक अभिलेख (दस्तावेज) उपलब्ध कराएं और परिसर भ्रमण एवं अवलोकन में पूरा सहयोग दें। यदि कोई संचालक इसमें बाधा डालता है या दस्तावेज छुपाता है, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा।

प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संलग्न विहित प्रपत्र में जांच कर, पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट जिला कार्यालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। इस आदेश के बाद मुजफ्फरपुर के शिक्षा जगत में खलबली मची हुई है, क्योंकि कई नामी-गिरामी संस्थान भी बिना उचित सुरक्षा मानकों और बिना पास नक्शे के धड़ल्ले से चल रहे हैं।

इन 16 कड़े बिंदुओं पर तीन दिनों में देना होगा जवाब:

प्रशासन द्वारा जारी किए गए विशेष जांच प्रपत्र में कुल 16 अत्यंत संवेदनशील बिंदुओं को शामिल किया गया है, जिस पर भौतिक सत्यापन होना अनिवार्य है:

  1. मान्यता और निबंधन: क्या संस्थान को सक्षम बोर्ड या प्राधिकार से मान्यता प्राप्त है और उसका निबंधन संख्या साक्ष्य के साथ उपलब्ध है या नहीं?
  2. भवन का स्वीकृत नक्शा: क्या भवन का निर्माण सक्षम प्राधिकार द्वारा स्वीकृत नक्शे और प्राक्कलन के अनुरूप ही किया गया है?
  3. प्रवेश एवं निकास: विद्यालय या कोचिंग में प्रवेश और निकास की समुचित व्यवस्था की स्थिति।
  4. अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी): क्या संस्थान में अग्निशामक मानक के अनुरूप व्यवस्था है और सक्षम प्राधिकार से फायर एनओसी (प्रमाण पत्र) प्राप्त है?
  5. बच्चों की कुल संख्या: संस्थान की विगत वर्ष की वर्गवार नामांकित बच्चों की कुल संख्या (सेक्शनों के फेरबदल की सघन जांच)।
  6. इलेक्ट्रिक वायरिंग: संस्थान की विद्युत वायरिंग की भौतिक स्थिति (खुले और खतरनाक तारों की जांच)।
  7. शौचालय सुरक्षा: शौचालयों की सुरक्षात्मक अद्यतन भौतिक स्थिति।
  8. शौचालय में लाइट-पानी: शौचालयों में लाइट एवं पानी की समुचित व्यवस्था।
  9. शुद्ध पेयजल: बच्चों के लिए पीने योग्य पानी अथवा आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) की उपलब्धता की स्थिति।
  10. आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट): आपातकालीन स्थिति में बच्चों के निकास हेतु मुख्य द्वार के अलावा अन्य वैकल्पिक द्वार की संख्या और स्थिति।
  11. बचाव की जानकारी: आपात काल की स्थिति में बच्चों के बचाव हेतु निकास द्वार की जानकारी की स्थिति।
  12. वाहन सुरक्षा और जीपीएस: संस्थान के पंजीकृत वाहनों की संख्या, फिटनेस प्रमाण पत्र, स्पीड गवर्नर, जीपीएस की सुविधा, ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन और वाहन पर ड्राइवर का मोबाइल नंबर लिखा है या नहीं?
  13. वाहनों में फायर सेफ्टी: पंजीकृत वाहनों में अग्निशामक यंत्रों की संख्या एवं उनकी भौतिक स्थिति क्या है?
  14. प्रतिकूल स्थितियां: विद्यालय के अवलोकन में किसी प्रकार की वैसी स्थिति जो बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा या प्रतिकूल हो।
  15. इमरजेंसी नंबरों का प्रदर्शन: क्या परिसर में बड़े-बड़े अक्षरों में फायर ब्रिगेड, पुलिस स्टेशन और सिविल सर्जन के इमरजेंसी नंबर लिखे गए हैं?
  16. जाँच पदाधिकारी का मन्तव्य: जांच करने वाले अधिकारी की अंतिम ठोस टिप्पणी।

जांच टीम के आते ही गाड़ियाँ हो जाती है गायब, खेल के मैदान पर अवैध कब्जा

प्राइवेट स्कूलों की एक ऐसी चालाकी सामने आई है जो बच्चों के शारीरिक विकास और आपातकालीन सुरक्षा के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ करते  है। अक्सर देखा जा रहा है कि जब भी शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन की टीम स्कूल का वेरिफिकेशन करने पहुँचती है, तो स्कूल संचालक बेहद शातिर दिमाग का परिचय देते हैं। वे अपनी बसों, वैनों और ऑटो को आनन-फानन में स्कूल कैंपस से बाहर सड़कों या सुदूर गलियों में खड़ा करवा देते हैं। यह नाटक सिर्फ इसलिए रचा जाता है ताकि जांच अधिकारियों को स्कूल कैंपस ‘बड़ा’ और ‘सुरक्षित’ दिखाई दे।

हकीकत यह है कि इन गाड़ियों को कैंपस के अंदर पार्क करने के बाद बच्चों के खेलने के लिए बने मैदान का वजूद ही खत्म हो जाता है। बच्चों का पूरा प्ले ग्राउंड कबाड़खाने और बस डिपो में तब्दील हो जाता है। यदि स्कूल अवधि के दौरान कोई भूकंप या आग जैसी आपातकालीन स्थिति पैदा हो जाए, तो कैंपस में खड़ी इन गाड़ियों के कारण बच्चों को भागने तक की जगह नहीं मिलेगी। प्रशासन इस बार इस ‘गाड़ी हटाओ खेल’ पर भी नजर रख रहा है।

कागजों पर एक क्लास, जमीन पर चार सेक्शन: संख्या छिपाने का बड़ा खेल

मुजफ्फरपुर के इन निजी संस्थानों में कमाई को दोगुना करने और सरकारी टैक्स व नियमों से बचने के लिए ‘सेक्शन’ का एक बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। संस्थान की विगत वर्ष की वर्गवार नामांकित बच्चों की कुल संख्या के मामले में यह कड़वा सच उजागर हुआ है कि स्कूल संचालक धड़ल्ले से एक ही क्लास के कई सेक्शन (जैसे- सेक्शन ए, बी, सी और डी) चलाते हैं। एक-एक सेक्शन में क्षमता से अधिक बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बिठाया जाता है।

परंतु, जब सरकारी रिपोर्ट या जांच की बारी आती है, तो ये संचालक रिकॉर्ड बुक में सिर्फ एक ही वर्ग और सीमित बच्चों की संख्या दिखाते हैं। इस तरह बच्चों की असली संख्या को सरकारी कागजों में दबा दिया जाता है। इस भीड़भाड़ के कारण कमरों में वेंटिलेशन खत्म हो जाता है, जिससे बच्चों का दम घुटता है। कमिश्नर और जिला शिक्षा पदाधिकारी के इस साझा आदेश ने अब इस  घोटाले की जड़ पर प्रहार किया है।

सड़कों पर दौड़ता ‘बारूद’: ड्राइवरों की मनमानी और बिना सीट बेल्ट का सफर

इस पूरे मामले का सबसे डरावना और जानलेवा पहलू स्कूली वाहनों की लापरवाही है। मुजफ्फरपुर की सड़कों पर रोज हजारों बच्चों की जिंदगी को दांव पर लगाकर दौड़ने वाली इन गाड़ियों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। सबसे पहली बड़ी लापरवाही यह देखी गई है कि इन गाड़ियों के ड्राइवर कभी भी ‘सीट बेल्ट’ नहीं लगाते हैं। ट्रैफिक नियमों को ठेंगा दिखाने वाले ये ड्राइवर बच्चों को लेकर तेज रफ्तार में गाड़ियाँ दौड़ाते हैं, जिससे किसी भी अचानक ब्रेक या दुर्घटना की स्थिति में बड़ा जानी नुकसान हो सकता है।

इसके अलावा, गाड़ियों के भीतर सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ी हुई हैं। संस्थान के भीतर भले ही दिखावे के लिए कुछ अग्निशामक (फायर सेफ्टी) सिलेंडर टांग दिए गए हों, लेकिन बच्चों को ढोने वाली इन बसों और वैनों के भीतर अग्निशामक की कोई व्यवस्था नहीं रहती। यदि गाड़ी के इंजन में शॉर्ट सर्किट से आग लग जाए, तो बच्चों को बचाने का कोई साधन मौजूद नहीं है।

बदलेगी सूरत या फिर ठंडे बस्ते में जाएगी फाइल?

अस्पताल हादसे के बाद जागा प्रशासन इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने मुजफ्फरपुर के सभी निजी विद्यालय और कोचिंग संचालकों तथा प्राचार्यों को सख्त हिदायत दी है कि वे जांच अधिकारी के निरीक्षण के दौरान आवश्यक अभिलेख (दस्तावेज) उपलब्ध कराएं और परिसर भ्रमण में पूरा सहयोग दें। यदि जांच में किसी भी प्रकार की प्रतिकूल स्थिति पाई जाती है जो बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा हो, तो उस संस्थान के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

मुजफ्फरपुर के अभिभावकों का कहना है कि अब समय आ गया है कि शिक्षा के नाम पर व्यापार करने वाले और बच्चों की जान को जोखिम में डालने वाले इन रसूखदार स्कूल संचालकों की दादागिरी खत्म की जाए। देखना यह है कि तीन दिनों के भीतर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कितनी ईमानदारी से अपनी रिपोर्ट सौंपते हैं या फिर हमेशा की तरह कागजी कोरम पूरा कर इस गंभीर मामले को भी रफा-दफा कर दिया जाता है। मुजफ्फरपुर की जनता की नजरें अब इस जांच रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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ग्लोबल संकट के बीच भारत की सरजमीं पर ब्लॉकबस्टर बैठक: आधी आबादी के पेट और किसान की जेब को लेकर ब्रिक्स देशों का अब तक का सबसे बड़ा एलान!

आधी दुनिया, एक फैसला: इंदौर डिक्लेरेशन से बदलेगा वैश्विक कृषि का भूगोल, बीज विरासत और छोटे किसानों को मिला ‘ग्लोबल‘ सुरक्षा कवच!

विशेष रिपोर्ट (एस. एस. कुमार ‘पंकज’) : वैश्विक अशांति, भू-राजनीतिक तनाव, ईरान-इराक क्षेत्र में बढ़ते सैन्य संकट और अल नीनो के खतरनाक साये के बीच भारत की पावन सरजमीं ने एक बार फिर दुनिया को नई राह दिखाई है। भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में ब्रिक्स (BRICS) समूह के कृषि मंत्रियों की 16वीं बैठक किसी ब्लॉकबस्टर घटनाक्रम से कम नहीं रही। इस महा-मंथन के समापन पर जो ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ (संयुक्त घोषणा पत्र) सर्वसम्मति से पारित हुआ है, उसने न केवल वैश्विक कृषि का भूगोल बदल दिया है, बल्कि दुनिया की आधी आबादी के पेट (खाद्य सुरक्षा) और अन्नदाता की जेब (आजीविका) को सुरक्षित करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक ढांचा तैयार कर दिया है।

इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की 16वीं ऐतिहासिक बैठक के सफल समापन के बाद एक बेहद गरिमामयी और आक्रामक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान। मंच पर उनके साथ केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव अतीश चंद्रा और आईसीआर के महानिदेशक एवं सचिव डेयर एम एल जाट सहित अन्य वरिष्ठ नीति-निर्माता और शीर्ष अधिकारी ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के जरिए दुनिया की खाद्य सुरक्षा और अन्नदाता की तकदीर बदलने का शंखनाद करते हुए।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया खाद्यान्न संकट, उर्वरकों की आसमान छूती कीमतों और जलवायु परिवर्तन की मार से कराह रही है। इस वैश्विक हाहाकार के बीच, ब्रिक्स देशों—जो दुनिया की 50% आबादी, 42% कृषि भू-भाग, 68% कृषि जोत और 42% वैश्विक खाद्यान्न उत्पादन का प्रतिनिधित्व करते हैं—ने भारत के नेतृत्व में एकजुट होकर एक ऐसा चक्रव्यूह रचा है, जो सीधे तौर पर छोटे किसानों और पारंपरिक कृषि व्यवस्था को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के एकाधिकार से बचाएगा।

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बेहद आक्रामक और विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस महा-सफलता का ऐलान किया। मंच पर उनके साथ कृषि और किसान कल्याण विभाग के दोनों सहयोगी मंत्री रामनाथ ठाकुर, भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव अतीश चंद्रा, आईसीआर के महानिदेशक एवं सचिव डेयर एम एल जाट सहित वरिष्ठ नीति निर्माता प्रमोद और अजीत मौजूद थे। शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि जब चारों तरफ अनिश्चितता का माहौल है, तब भारत की अध्यक्षता में हुए इस इंदौर डिक्लेरेशन के परिणाम पूरी दुनिया को एक नई उम्मीद और अटूट विश्वास का संदेश देंगे।

इंदौर डिक्लेरेशन का महा-स्तंभ: केंद्र में सिर्फ और सिर्फ किसान

इस जॉइंट डिक्लेरेशन की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) यह है कि इसके केंद्र में किसी कॉर्पोरेट एजेंडे को जगह नहीं दी गई है, बल्कि इसका केंद्र बिंदु शुद्ध रूप से ‘किसान’ है। सदस्य देशों ने यह माना है कि जब तक खेत को संभालने वाले हाथ आर्थिक रूप से सुदृढ़ नहीं होंगे, तब तक वैश्विक खाद्य सुरक्षा की बात करना बेमानी है।

इस बैठक में सदस्य देशों और सहयोगी देशों के लगभग 60 विदेशी प्रतिनिधियों सहित 100 शीर्ष रणनीतिकारों ने भाग लिया। इस महा-बैठक में मुख्य रूप से चार प्राथमिकताओं पर रणनीतिक मुहर लगाई गई:

इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की 16वीं ऐतिहासिक बैठक का विहंगम दृश्‍य
  1. वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पोषण युक्त आहार सुनिश्चित करना।
  2. कृषि व्यापार में पारदर्शिता और आपसी सहयोग को आक्रामक बढ़ावा देना।
  3. जलवायु परिवर्तन के खतरों के बीच ‘रीजेनरेटिव फार्मिंग‘ (पुनर्योजी खेती) को मुख्यधारा में लाना।
  4. कृषि तंत्र में आधुनिक नवाचार, एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और युवाओं की भागीदारी को संस्थागत रूप देना।

डिजिटल और प्राकृतिक खेती का ग्लोबल हब बना भारत: आईआईटी दिल्ली और मोदीपुरम को कमान

भारत के प्राचीन पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकी कौशल का लोहा अब पूरी दुनिया ने मान लिया है। ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के तहत दो ऐसे विशाल और अभूतपूर्व नेटवर्कों की स्थापना का खाका तैयार किया गया है, जो आने वाले समय में वैश्विक कृषि की दिशा तय करेंगे:

1. ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रोइकोलॉजी एंड रीजेनरेटिव एग्रीकल्‍चर

रसायनों और फर्टिलाइजर के अंधाधुंध इस्तेमाल से दुनिया भर की भूमि बंजर हो रही है। इस बंजर धरती को पुनर्जीवित करने के लिए यह नेटवर्क प्राकृतिक, जैविक और जलवायु सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देगा। भारत के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि इस पूरे नेटवर्क के तहत ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन नेचुरल फार्मिंग’ के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की जिम्मेदारी भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मिंग सिस्टम रिसर्च), मोदीपुरम को सौंपी गई है। यह संस्थान अब संयुक्त अनुसंधान, क्षमता निर्माण और एक देश से दूसरे देश में प्राकृतिक खेती की सर्वोत्तम प्रथाओं को ट्रांसफर करने का वैश्विक हेडक्वार्टर बनेगा।

इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के साथ वार्त्‍ता करते भारत के  केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान व अन्‍य देश के डेलीगेट पर्सन

2. ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्‍चर

कृषि को चौथी औद्योगिक क्रांति से जोड़ने के लिए इस नेटवर्क का गठन किया गया है। यह नेटवर्क एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी (जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा आधारित कृषि समाधानों के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम करेगा। इस महा-नेटवर्क के समन्वय (कोऑर्डिनेशन) की पूरी जवाबदारी आईआईटी दिल्ली को मिली है। यह संस्थान आधुनिक अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और एग्रीकल्चर इनोवेशन के बीच एक ऐसा सशक्त सेतु स्थापित करेगा, जो वैश्विक स्तर पर होने वाले बड़े अनुसंधानों को सीधे छोटे किसानों के मोबाइल और खेतों तक पहुंचाएगा।

देशी बीजों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का कब्जा रोकने के लिए ‘ग्लोबल फोरम‘ का गठन

इस सम्मेलन का सबसे संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला पारंपरिक बीज विरासत और जैव-विविधता की सुरक्षा से जुड़ा है। भारत जैसे देशों में हजारों सालों से खेती की जा रही है और हमारे पास पारंपरिक बीजों का एक असीमित खजाना है, जो आज बहुराष्ट्रीय बीजों के बाजारवाद के कारण विलुप्त होने की कगार पर है।

इसे रोकने के लिए ब्रिक्स देशों ने ‘Global Forum on Farmers’ Rights in Seed Systems’ (सीड सिस्टम्स में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच) की स्थापना पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बेहद गंभीरता से कहा कि नई किस्मों के बीजों की जरूरत तो है, लेकिन हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत और जैव-विविधता के प्रतीक देसी बीजों को हर हाल में बचाना होगा। ऐसा न हो कि भविष्य में हमारे पास ‘शरबती’ गेहूं जैसी महान किस्में बचे ही ना। यह फोरम देसी बीजों की विविधता बनाए रखने, किसानों के पारंपरिक ज्ञान को सुरक्षित रखने और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ फसलों को प्रतिरोधी बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

इसके साथ ही, ‘BRICS Agrin’ (एग्रो इनपुट जेनेटिक रिसोर्सेज एंड Information Network) की स्थापना की गई है। यह नेटवर्क सदस्य देशों के बीच कृषि आदानों, बीजों और आनुवंशिक संसाधनों के क्षेत्र में सूचनाओं का आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और तकनीकी साझेदारी को सुदृढ़ करेगा।

ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के साथ मांडू का भ्रमण करते केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान

लैब से लैंड का फॉर्मूला: ब्राजील से इंदौर तक का सफर

अनुसंधान अक्सर प्रयोगशालाओं (लैब) में बंद रह जाते हैं और उन्हें खेतों (लैंड) तक पहुंचने में सालों लग जाते हैं। इस दूरी को मिटाने के लिए ब्राजील में बने ‘ब्रिक्स एग्रीकल्चरल रिसर्च प्लेटफॉर्म’ को और अधिक सुदृढ़ करते हुए उसे एक सशक्त ‘Knowledge to Action Hub’ के रूप में विकसित करने पर सहमति बनी है। इसके तहत कोई भी नई कृषि तकनीक या नवाचार किसी एक देश या कुछ अमीर कॉर्पोरेट्स के पास सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसका तेजी से प्रसार कर व्यावहारिक समाधान सीधे किसानों को दिए जाएंगे।

कटाई से लेकर बाजार तक जाने के बीच होने वाले ‘फूड लॉस’ (खाद्य हानि) और खाद्यान्न की बर्बादी को रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं। खाद्यान्न की बर्बादी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि इसके सड़ने से भारी मात्रा में कार्बन गैसों का उत्सर्जन होता है जो पर्यावरण को तबाह कर रहा है। ब्रिक्स देश अब इस बर्बादी को शून्य पर लाने के लिए संयुक्त तकनीकी मिशन चलाएंगे।

आर्थिक युद्ध के बीच ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज‘ और पारदर्शी व्यापार की नींव

वैश्विक व्यापार में जारी खींचतान और प्रतिबंधों की राजनीति के बीच ब्रिक्स समूह ने एक निष्पक्ष, समतामूलक, समावेशी और पारदर्शी बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। व्यापार को सरल बनाने, कस्टम की अड़चनों को दूर करने और एक-दूसरे के बाजारों तक आसान पहुंच बनाने के लिए सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय (वन-टू-वन) बैठकें हुईं।

इसी क्रम में, भारत द्वारा आयोजित विशेष संवाद ने ‘ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज‘ (अनाज विनिमय) की पहल पर विचार-विमर्श को एक नई और निर्णायक गति दी है। यह एक्सचेंज आने वाले समय में डॉलर के प्रभुत्व और पश्चिमी देशों के बाजार नियंत्रण को सीधी चुनौती देने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, दक्षिण-दक्षिण सहयोग, तकनीकी साझेदारी, कौशल विकास और कृषि क्षेत्र में अनुभवों के आदान-प्रदान को इस डिक्लेरेशन में स्पष्ट रूप से परिलक्षित किया गया है।

पशुधन प्रबंधन, मत्स्य पालन और अल नीनो का रक्षा कवच

जलवायु परिवर्तन के कारण जब प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ का खतरा मंडरा रहा है और एशिया-पैसिफिक देशों की फसलें सूखने की कगार पर हैं, तब इंदौर बैठक में इससे निपटने के लिए एक संयुक्त आपदा प्रबंधन प्रणाली और सूचना तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी है।

इसके साथ ही, पशुधन प्रबंधन के क्षेत्र में नए टीकों का विकास, संक्रामक बीमारियों से मुकाबले की तैयारी और पशुओं के लिए उन्नत चारे (फीड) की व्यवस्था पर तकनीकी सहयोग बढ़ाया जाएगा। एडवांस्ड फिशरीज और एक्वा कल्चर डेवलपमेंट (मत्स्य पालन और झींगा पालन) के क्षेत्र में भी आधुनिक तकनीकों को साझा करने की प्रतिबद्धता जताई गई है।

खाद की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भारत सरकार का महा-ऐलान

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब एक पत्रकार ने यूक्रेन-रूस संकट और ईरान-इराक क्षेत्र के तनाव के कारण सल्फ्यूरिक एसिड, पेस्टिसाइड और फर्टिलाइजर की डेढ़ से दो गुना बढ़ती कीमतों और किसानों की बढ़ती लागत पर सवाल उठाया, तो कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बेहद कड़ा और लोक-कल्याणकारी रुख अपनाया।

उन्होंने देश के करोड़ों किसानों को आश्वस्त करते हुए बड़ा एलान किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें चाहे जो भी हों, भारत सरकार अपनी जेब से अतिरिक्त भार उठाएगी, लेकिन किसानों को महंगी खाद नहीं बिकने देगी। भारत में यूरिया की बोरी 266 रुपये में और डीएपी (DAP) की बोरी 1350 रुपये में ही मिलती रहेगी। इस संकट की स्थिति में अपने किसानों के साथ मजबूती से खड़ा रहना सरकार का धर्म है और इसके लिए हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार भारत सरकार पूरी तरह खुद वहन कर रही है। देश में खरीफ की फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में फर्टिलाइजर स्टॉक मौजूद है और रबी के लिए भी पुख्ता व्यवस्था की जा रही है।

कम रकबे में बंपर पैदावार और 3000 से ज्यादा एग्री स्टार्टअप्स का कमाल

बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण लगातार कम हो रहे कृषि के रकबे और कॉलोनियां कटने से सिकुड़ते खेतों पर चिंता जताते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि अब कम रकबे पर ज्यादा और पोषण युक्त उत्पादन कैसे हो, इसके लिए ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग’ और आधुनिक वर्टिकल व डिजिटल कृषि नवाचारों पर काम किया जा रहा है।

खेती को युवाओं के लिए आकर्षक और मुनाफे का सौदा बनाने के लिए भारत सरकार ‘रफ्तार’ जैसी अनेक प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। इसी का परिणाम है कि आज भारत में 3000 से ज्यादा कृषि स्टार्टअप्स काम कर रहे हैं, जिन्हें देश के युवा वैज्ञानिक और उद्यमी चला रहे हैं। छोटे किसानों तक ड्रोन, रोबोटिक्स और महंगी कंबाइन मशीनें पहुंचाने के लिए देश भर में 64,000 कस्टम हायरिंग सेंटर्स और सहकारी समितियां सफलतापूर्वक काम कर रही हैं, जिससे छोटा किसान भी बहुत कम किराए पर आधुनिकतम तकनीक का लाभ उठाकर अपनी लागत कम कर रहा है।

इंदौर के मेघदूत गार्डन में स्थापित हुई ‘ब्रिक्स वाटिका‘

ग्लोबल पार्क और यूरो-रशियन पार्क की ऐतिहासिक कड़ियों में एक और नया अध्याय जोड़ते हुए, इंदौर के प्रसिद्ध मेघदूत गार्डन में सुबह 09:00 बजे सभी सदस्य देशों के कृषि मंत्रियों और विदेशी डेलीगेट्स ने मिलकर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक आह्वान “एक पेड़ मां के नाम” की पावन भावना को आगे बढ़ाते हुए यहां एक भव्य ‘ब्रिक्स वाटिका‘ की स्थापना की गई, जो इस ऐतिहासिक बैठक की स्मृतियों को हमेशा जीवंत रखेगी।

शिवराज सिंह चौहान ने मालवा की समृद्ध और आत्मीय परंपरा के अनुरूप मेहमानों का सत्कार करने के लिए इंदौर की जनता, मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश सरकार की पूरी टीम को हृदय से धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इंदौर की ‘छप्पन दुकान’ का स्वाद, ‘राजवाड़ा’ की भव्यता और ‘मांडू’ का ऐतिहासिक भ्रमण विदेशी मेहमानों के दिलों में हमेशा के लिए अंकित हो गया है। यह पूरा आयोजन भारत सरकार के विदेश विभाग, पशुपालन-मछली पालन विभाग, कॉमर्स, फूड प्रोसेसिंग और नीति आयोग के ‘होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच‘ (संपूर्ण सरकार का दृष्टिकोण) की अभूतपूर्व सफलता का प्रतीक है, जिसने एक साथ इतने बड़े और सर्वसम्मत फैसले दुनिया के सामने रखकर इतिहास रच दिया है।

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ताजपुर में गरीबों के निवाले पर सरकारी डाका! 3867 राशनकार्ड रद्द होने से भड़का आक्रोश, मोतीपुर में सड़क पर उतरे आम लोग,

बुलडोजर राज और महंगाई के खिलाफ खेग्रामस-माले का बिगुल, मांगें पूरी नहीं हुईं तो थमेगा चक्का

ताजपुर। ताजपुर प्रखंड में सरकारी तंत्र द्वारा गरीबों को भूखे मारने की एक बड़ी साजिश सामने आई है। यहाँ एक झटके में गरीब, मजदूर और अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोगों के 3867 राशनकार्ड अचानक रद्द कर दिए गए हैं। सरकार के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ शनिवार को मोतीपुर में खेग्रामस (अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा) और भाकपा माले के नेतृत्व में विरोध मार्च निकाला गया। मार्च में शामिल ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

महंगाई और बेरोजगारी के बीच खाद्यान्न संकट : आक्रोश मार्च को संबोधित करते हुए माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ देश में महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है, वहीं दूसरी तरफ सरकार गरीबों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में कटौती कर उनके पेट पर लात मार रही है। राशनकार्ड रद्द होने से हजारों परिवारों के सामने अचानक दाने-दाने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने मांग की कि सभी रद्द राशनकार्डों को बिना किसी देरी के तुरंत बहाल किया जाए।

ताजपुर प्रखंड के मोतीपुर में रद्द किए गए 3867 राशनकार्डों को बहाल करने, बुलडोजर राज पर रोक लगाने और वास-आवास के अधिकार को लेकर बैनर थामकर विरोध प्रदर्शन करते खेग्रामस एवं भाकपा माले के नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह व अन्य ग्रामीण कार्यकर्ता।

बुलडोजर राज और वासभूमि पर आर-पार की जंग इस दौरान वक्ताओं ने मनरेगा को प्रभावी ढंग से दोबारा चालू कर सभी जरूरतमंद ग्रामीण परिवारों को नियमित रोजगार देने की मांग उठाई। साथ ही, भूमिहीन गरीबों को वासभूमि व पक्का मकान देने और सूबे में चल रहे ‘बुलडोजर राज’ पर तुरंत रोक लगाने की मांग की गई। नेताओं ने साफ कहा कि गरीबों और वंचितों के अधिकारों पर हो रहे इस प्रशासनिक हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रखंड कमिटी सदस्य ललन दास ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रशासन ने जल्द ही इन रद्द राशनकार्डों को बहाल नहीं किया और गरीबों की मांगें नहीं मानीं, तो आने वाले दिनों में चक्का जाम कर एक व्यापक आंदोलन खड़ा किया जाएगा। इस विरोध मार्च में मुख्य रूप से सुशील सहनी, विभा देवी, देबकी सहनी, चंदन सहनी, राजकुमारी देवी, अनुठिया देवी समेत भारी संख्या में स्थानीय महिलाएं, पुरुष और खेग्रामस के जुझारू कार्यकर्ता शामिल रहे।

ताजपुर में गुंडाराज का तांडव! व्यवसायियों पर गोलियां, 22 जून को थाना का घेरााव

ताजपुर। एक तरफ जहां आम जनता सरकारी नीतियों से त्रस्त है, वहीं दूसरी तरफ अपराधियों के तांडव से ताजपुर दहल उठा है। लगातार बढ़ रही हत्या, लूट और गोलीबारी की वारदातों के कारण लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। बिहार राज्य व्यवसाई संघ और भाकपा माले ने बढ़ते अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने में पुलिस की घोर विफलता के विरोध में 22 जून 2026 को ताजपुर थाना का पूर्ण घेराव करने का एलान किया है।

ताजपुर के राजधानी चौक स्थित चौधरी किराना स्टोर के मालिक नरेश चौधरी पर दुकान बंद करते समय अपराधियों ने की फायरिंग। बचने के प्रयास में उनके बांया हाथ में लगी गोली। घायल के इलाज की तस्‍वीर

किराना दुकानदार को मारी गोली, मरे जा रहे बेगुनाह  : बीती रात अपराधियों ने राजधानी चौक स्थित एक किराना दुकान में घुसकर दुकानदार नरेश चौधरी को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। घायल व्यवसाई से मिलकर उनका हालचाल जानने के बाद माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रखंड कमिटी सदस्य सह व्यवसाई मो० एजाज और बिहार राज्य व्यवसाई संघ के राज्य कमिटी सदस्य सह व्यवसाई प्रभात रंजन गुप्ता ने पुलिस प्रशासन को निकम्मा करार दिया।

नेताओं ने याद दिलाया कि इससे पहले 15 मई को गांधी चौक के पास मोटरसाइकिल मिस्त्री संजीव सहनी की दिनदहाड़े बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इन बेतहाशा आपराधिक घटनाओं ने व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच भारी भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

आर-पार की लड़ाई का एलान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई और बढ़ते अपराध पर प्रभावी रोक नहीं लगी, तो 22 जून 2026 को जनता मैदान से एक विशाल आक्रोश जुलूस निकाला जाएगा, जो ताजपुर थाना का घेराव कर पुलिसिया निष्क्रियता के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करेगा।

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सावधान मास्टर साहब! सरकारी स्कूल छोड़कर प्राइवेट स्कूल,कोचिंग चमकाई तो खैर नहीं, पत्र संख्या 613 से बिहार के शिक्षक महकमे में हड़कंप!

गरीब के बच्चों से धोखा बर्दाश्त नहीं! सजन आर का अल्टीमेटम—कोचिंग-ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षकों की सीधे जाएगी नौकरी!

बिहार के इतिहास में शिक्षा सुधार का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम : पर्दे के पीछे शातिर शिक्षको का खेल नहीं चलेगा, रडार पर ‘मनी ट्रेल’,पकड़ना नहीं है मुश्किल,सरकार मांग सकती है शपथ पत्र, बैंक खातों की जांच से खुलेगा राज,

पटना: बिहार के शिक्षा गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर आ रही है। सरकारी खजाने से हर महीने मोटी सैलरी उठाने वाले और प्राइवेट कोचिंग-स्कूलों में जाकर अपनी जेबें गर्म करने वाले शिक्षकों के खिलाफ बिहार सरकार के शिक्षा विभाग ने अंतिम और निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने एक ऐसा विस्फोटक और सनसनीखेज आदेश जारी किया है, जिसने पूरे राज्य के शिक्षक महकमे की नींद उड़ा दी है। माध्यमिक शिक्षा के निदेशक सजन आर ने सीधे तौर पर राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को लिखित रूप से हंटर चलाने का अल्टीमेटम थमा दिया है। इस नए और सख्त फरमान के मुताबिक, यदि कोई भी सरकारी स्कूल का शिक्षक अपने तय विद्यालय के समय में या उसके बाद किसी भी प्राइवेट स्कूल, कोचिंग संस्थान, निजी ट्यूशन या किसी भी प्रकार के व्यावसायिक केंद्र में अपनी सेवाएं देते हुए पाया गया, तो उसकी नौकरी सीधे चली जाएगी। विभाग ने इसे शिक्षकों के लिए बनाई गई आचार संहिता का खुला उल्लंघन माना है और साफ किया है कि अब गरीब के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग (माध्यमिक शिक्षा निदेशालय) द्वारा जारी पत्र संख्या 11/नियमावली 1-1/2021 (अंश-1) 613, जिस पर निदेशक सजन आर के हस्ताक्षर हैं। दिनांक 11-6-26 को जारी इस कड़े पत्र में राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में प्राइवेट कोचिंग, निजी ट्यूशन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में संलिप्त सरकारी शिक्षकों को चिह्नित कर उन पर तत्काल अनुशासनात्मक और दंडात्मक ऐक्शन लेने का आदेश दिया गया है।

पत्र संख्या 613 से थर्राया महकमा: सजन आर का सीधे ऐक्शन का ऑर्डर

शिक्षा विभाग के निदेशक सजन आर द्वारा जारी किए गए पत्र संख्या 11/नियमावली 1-1/2021 (अंश-1) 613 ने राज्य की पूरी प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। दिनांक 11-6-26 को पटना से निर्गत इस पत्र में साफ शब्दों में चेतावनी दी गई है कि सरकारी शिक्षकों की यह मनमानी अब और नहीं चलेगी। पत्र में इस बात का स्पष्ट और कड़ा उल्लेख है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य के प्राथमिक विद्यालयों से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक में बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से रिकॉर्ड स्तर पर बेहद योग्य और प्रतिभावान शिक्षकों की पारदर्शी बहाली की गई है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक उपलब्ध हैं, इसलिए पढ़ाई के स्तर में कोई कमी नहीं आनी चाहिए। इस नए परिप्रेक्ष्य में सरकार का पूरा फोकस गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को बेहतरीन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने पर है। निदेशक सजन आर ने दो टूक कहा है कि हर एक शिक्षक को बच्चों की पढ़ाई के प्रति शत-प्रतिशत जवाबदेह और वफादार होना ही पड़ेगा।

सरकारी ट्रेनिंग का फायदा प्राइवेट में? अब नहीं चलेगा यह दोहरा खेल

इस सनसनीखेज फैसले के पीछे के कारणों का जब हम गहरा विश्लेषण करते हैं, तो सरकार की चिंता पूरी तरह जायज नजर आती है। शिक्षकों को सरकार समय-समय पर बेहतरीन और अत्याधुनिक शैक्षणिक ट्रेनिंग भी दे रही है ताकि उनकी कार्यकुशलता और पढ़ाने का तरीका इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का हो सके। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट थी। कुछ स्वार्थी शिक्षकों ने इस बेहतरीन ट्रेनिंग और अपनी योग्यता को प्राइवेट कोचिंग सेंटरों, होम ट्यूशनों और बड़े-बड़े नामी प्राइवेट स्कूलों में मोटी फीस के बदले बेचना शुरू कर दिया था। इस दोहरे खेल के कारण सरकारी स्कूलों के मासूम बच्चों का भविष्य पूरी तरह से अंधकार में डूब रहा था। शिक्षक अपने मूल पदस्थापित सरकारी विद्यालयों में केवल अपनी हाजिरी बनाने और कागजी कोरम पूरा करने आते थे, जबकि अपनी असली ऊर्जा वे प्राइवेट ठिकानों पर खपा रहे थे। निदेशक सजन आर ने अपने पत्र में बहुत ही तल्ख शब्दों में लिखा है कि शिक्षकों द्वारा अपने विद्यालय परिसर अथवा अन्य किसी भी बाहरी स्थान पर कोचिंग या निजी ट्यूशन पढ़ाने से उनके मूल सरकारी स्कूल के बच्चों की पढ़ाई सीधे तौर पर प्रभावित होती है, जिसे सरकार अब और एक सेकंड के लिए भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

जिला शिक्षा पदाधिकारियों को खुली छूट: संदिग्ध ठिकानों पर होगी छापेमारी

इस कड़े फैसले को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीन पर उतारने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को असीमित प्रशासनिक शक्तियां सौंप दी हैं। आदेश के अनुसार, सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में विशेष उड़नदस्ता टीमों का गठन करने को कहा गया है। ये टीमें सुबह से लेकर शाम तक अलग-अलग कोचिंग हबों, प्राइवेट स्कूलों और रिहायशी इलाकों में औचक छापेमारी (सरप्राइज रेड) करेंगी। अगर इस छापेमारी के दौरान कोई भी सरकारी स्कूल का शिक्षक ब्लैकबोर्ड पर चाक चलाते हुए या किसी प्राइवेट बेंच पर बच्चों को बैच बनाकर पढ़ाते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया, तो उसकी किस्मत का फैसला ऑन द स्पॉट हो जाएगा। विभाग ने साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की पैरवी, राजनीतिक रसूख या ढिलाई को पूरी तरह से खारिज कर दिया जाएगा। जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश है कि वे बिना किसी पूर्व सूचना के संदिग्ध कोचिंग संस्थानों की लिस्ट बनाकर तत्काल रेड मारें और इसकी साप्ताहिक रिपोर्ट सीधे पटना मुख्यालय को भेजें।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

पर्दे के पीछे का खेल: पत्नी और बच्चों के नाम पर शिक्षा का व्यापार, रडार पर ‘मनी ट्रेल’

सरकारी तंत्र की आंखों में धूल झोंकने के लिए कुछ शातिर शिक्षकों ने भ्रष्टाचार का एक नया और बेहद सुरक्षित रास्ता निकाल लिया है। ये शिक्षक खुद ब्लैकबोर्ड पर चाक लेकर नहीं खड़े होते, बल्कि अपनी सरकारी नौकरी से मिली मोटी पूंजी को प्राइवेट स्कूलों और बड़े कोचिंग सेंटरों में बेनामी तौर पर निवेश कर रहे हैं। अपनी गर्दन बचाने के लिए इस धंधे के मालिकाना हक की कागजी कमान अपनी पत्नी, बच्चों या बेहद नजदीकी रिश्तेदारों के नाम पर सौंप रखी है। भले ही इन संस्थानों में बाहर के शिक्षकों से पढ़ाई कराई जा रही हो, लेकिन इन सरकारी गुरुजी का पूरा ‘मन और धन’ चौबीसों घंटे इसी व्यापार को चमकाने में लगा रहता है। स्कूल के भीतर रहने के दौरान भी इनका दिमाग अपने प्राइवेट स्कूल की बैलेंस शीट और मुनाफे को जोड़ने में व्यस्त रहता है। शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि भले ही इस गुप्त खेल का पत्र संख्या 613 में सीधा उल्लेख न हो, लेकिन आचार संहिता के व्यापक नियमों के तहत यह पूरी तरह से अवैध और सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन है। आम जनता द्वारा ऐसी बेनामी संपत्तियों और गुप्त व्यापार की शिकायत मिलते ही ये शातिर शिक्षक सीधे विभाग के निशाने पर आ जाएंगे।

पकड़ना नहीं है मुश्किल: सरकार मांग सकती है शपथ पत्र, बैंक खातों की जांच से खुलेगा राज

इस तरह के ‘सफेदपोश’ शिक्षा माफियाओं पर नकेल कसना सरकार के लिए कोई बहुत बड़ी चुनौती नहीं है। विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि शिक्षा विभाग को इन चालाक शिक्षकों की ‘मनी ट्रेल’ यानी पैसों के लेन-देन की समय-समय पर गहन जांच करानी चाहिए। इसके अलावा, एक बेहद कारगर तरीका यह हो सकता है कि सरकार हर साल सभी सरकारी शिक्षकों से एक अनिवार्य शपथ पत्र (एफिडेविट) मांगे। इस शपथ पत्र में शिक्षकों को स्पष्ट रूप से यह घोषणा करनी होगी कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य (पत्नी, बच्चे या आश्रित) किसी भी प्राइवेट स्कूल, कोचिंग या शैक्षणिक व्यवसाय में संलिप्त नहीं है, और यदि है तो उसकी आय का स्रोत क्या है। जैसे ही इनके और इनके परिजनों के बैंक खातों की जांच का शिकंजा कसेगा, सरकारी सैलरी की आड़ में चल रहा करोड़ों का यह बेनामी साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगा। विभाग अब ऐसे शातिर दिमाग वाले शिक्षकों की गुप्त सूचियां तैयार करने में जुट गया है, जो तन से सरकारी विद्यालय में हाजिरी बनाते हैं, लेकिन मन और धन से प्राइवेट तिजोरियां भर रहे हैं।

आचार संहिता का सीधा उल्लंघन: जेल और बर्खास्तगी की लटकी तलवार

शिक्षा विभाग द्वारा उठाया गया यह कदम कोई सामान्य विभागीय ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं है, बल्कि एक बड़ा कानूनी शिकंजा है। पत्र के अंतिम हिस्से में दी गई चेतावनी इतनी गंभीर है कि ट्यूशन माफियाओं के पूरे सिंडिकेट में सन्नाटा पसर गया है। पत्र में लिखा गया है, “अतः आप सभी यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी सरकारी विद्यालय के शिक्षक अपने विद्यालय परिसर अथवा अन्य स्थानों पर अवस्थित कोचिंग/निजी ट्यूशन एवं व्यवसायिक संस्थानों में पढ़ाने का कार्य नहीं करेंगे। यदि कोई शिक्षक कोचिंग/निजी ट्यूशन एवं व्यवसायिक संस्थानों में पढ़ाने में संलिप्त पाए जाते हैं तो शिक्षकों के लिए निर्धारित आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा और तदनुरूप उनके विरुद्ध कठोर एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी।” इसका सीधा और स्पष्ट मतलब यह है कि दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों की न सिर्फ सरकारी नौकरी जाएगी, बल्कि उनके खिलाफ सरकारी नियमों की अवहेलना, जालसाजी और विभागीय धोखाधड़ी का क्रिमिनल केस भी दर्ज किया जा सकता है। उनकी संचित पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सभी सरकारी लाभों को हमेशा के लिए जब्त किया जा सकता है।

क्यों जरूरी था शिक्षा विभाग का यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’?

यदि हम बिहार की शिक्षा व्यवस्था का सामाजिक और आर्थिक विश्लेषण करें, तो यह साफ हो जाता है कि प्राइवेट कोचिंग और होम ट्यूशन का यह धंधा राज्य के भीतर एक समानांतर ब्लैक इकॉनमी बन चुका था। बिहार लोक सेवा आयोग जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा पास करके आने वाले नए और ऊर्जावान शिक्षकों को भी इस ट्यूशन रूपी बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों से लगातार यह शिकायतें आ रही थीं कि सरकारी शिक्षक अपने स्कूलों में जानबूझकर पूरा सिलेबस नहीं पढ़ाते थे, ताकि बच्चे मजबूर होकर उनके निजी कोचिंग सेंटरों में मोटी रकम देकर एडमिशन लें। यह एक तरह का संगठित मानसिक और आर्थिक शोषण था, जिसने सरकारी स्कूलों को केवल मिड-डे मील की खिचड़ी बांटने का अड्डा बनाकर रख दिया था। शिक्षा विभाग के इस नए और ऐतिहासिक फरमान से उन गरीब अभिभावकों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई है, जो अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट कोचिंग या स्कूलों में भेजने का खर्च उठाने में पूरी तरह असमर्थ थे। अब शिक्षकों को मजबूरन स्कूल के निर्धारित 6 से 8 घंटों के दौरान अपनी पूरी ताकत और ज्ञान सरकारी स्कूल के बच्चों को ही देना होगा।

कोचिंग और प्राइवेट स्कूल माफियाओं में खलबली: अब आगे क्या?

निदेशक सजन आर के इस धमाकेदार आदेश के बाद राज्य के बड़े-बड़े कोचिंग संचालकों और प्राइवेट स्कूल प्रबंधकों के बीच गुप्त बैठकों का दौर शुरू हो गया है। पटना के मुसल्लहपुर हाट, नया टोला, बोरिंग रोड, कंकड़बाग और भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया जैसे बड़े कोचिंग हबों में सन्नाटा पसरने लगा है क्योंकि कई बड़े संस्थान इन्हीं स्टार सरकारी शिक्षकों के चेहरे पर करोड़ों का बिजनेस कर रहे थे। अब नौकरी जाने के डर से शिक्षकों ने इन कोचिंग संस्थानों  के बैनर, बोर्ड, से अपनी तस्वीरें, मोबाइल नम्‍बर,नाम,जैसी पर्सनली चीजें  हटाने की गुहार लगानी शुरू कर दी है। विशेषज्ञ इसे बिहार के इतिहास में शिक्षा सुधार का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम मान रहे हैं। अब देखना यह होगा कि निदेशक सजन आर का यह पत्र धरातल पर कितना असर दिखाता है और जिला शिक्षा पदाधिकारी इस आदेश का पालन कराने में कितने ईमानदार साबित होते हैं। लेकिन एक बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि सम्राट सरकार ने इस बार भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ आर-पार का मूड बना लिया है। अब सरकारी मास्टर साहब के पास केवल दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वे पूरी ईमानदारी से केवल सरकारी स्कूल में गरीब के बच्चों का भविष्य संवारें, या फिर हमेशा के लिए इस्तीफा देकर अपना प्राइवेट धंधा संभालें। दोनों नावों पर पैर रखने वालों का डूबना अब पूरी तरह तय है।

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बिहार में दूध क्रांति का शंखनाद, पटना में खुलेगा एनडीडीबी का भव्य कार्यालय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बदलेगी तस्वीर

पटना: बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और दुग्ध उत्पादकों के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ी खबर सामने आई है। राज्य में दुग्ध सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) ने पटना में अपना कार्यालय स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा लिया है।

COMFED परिसर के पास होगी कार्यालय की स्थापना प्राप्त जानकारी के अनुसार, एनडीडीबी के अध्यक्ष मीनेश शाह ने बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग के सचिव शिर्सत कपिल अशोक को पत्र लिखकर इस महत्वपूर्ण विकास की जानकारी दी है। एनडीडीबी ने पटना में कॉमफेड (COMFED) परिसर के निकट भूमि को चिह्नित कर लिया है। इस भूमि के आवंटन के साथ ही कार्यालय निर्माण की प्रक्रिया में तेजी आएगी। यह कदम न केवल राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा, बल्कि दुग्ध उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए आय के नए द्वार भी खोलेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान इस पहल को बिहार के लिए एक गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा है। एनडीडीबी के पटना में आने से राज्य के दुग्ध सहकारिता ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन आएगा। यह कार्यालय सीधे तौर पर राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगा, जिससे किसानों को तकनीक, बाजार और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने में आसानी होगी। इससे बिहार के हजारों दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री का जताया आभार इस महत्वपूर्ण निर्णय और सहयोग के लिए बिहार सरकार ने केंद्र सरकार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। राज्य की ओर से इस विकास कार्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री ललन सिंह का विशेष आभार जताया गया है। यह समन्वय दर्शाता है कि केंद्र और राज्य सरकार बिहार के किसानों की समृद्धि के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

अगला कदम: भूमि आवंटन एनडीडीबी ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही बिहार सरकार द्वारा विधिवत भूमि का आवंटन पूरा किया जाएगा, कार्यालय निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। 12 जून 2026 को जारी इस पत्र ने साफ कर दिया है कि बिहार अब दूध उत्पादन के क्षेत्र में एक नए युग की ओर कदम बढ़ा चुका है।

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