बाढ़ का मंडराया खतरा! सोन, कोसी और गंडक से छूटा सैलाब का पानी, बिहार में हाहाकार, तेजस्वी बोले- केंद्र दे विशेष पैकेज

 पटना : बिहार में कुदरत का कहर और नदियों का उफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य की प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार हो रही भयानक बढ़ोतरी से पूरे बिहार पर महाबाढ़ का संकट मंडराने लगा है। जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी), बिहार द्वारा जारी आंकड़ों ने पूरे राज्य की नींद उड़ा दी है। राज्य के प्रमुख बैराजों से लगातार पानी का डिस्चार्ज बढ़ाया जा रहा है, जिससे मैदानी इलाकों और नदियों के तटीय क्षेत्रों में प्रलयकारी स्थिति उत्पन्न हो गई है।

बैराजों से निकला जल-सैलाब, बढ़ता जा रहा जलस्तर

जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के तीनों प्रमुख बैराजों से पानी छोड़ने की दर लगातार बढ़ रही है:

  1. सोन बैराज (इंद्रपुरी): सोन बैराज की डिजाइन डिस्चार्ज क्षमता 14.58 लाख क्यूसेक है। 06 सितंबर 2026 को दोपहर 2:00 बजे तक यहां से 2,01,092 (दो लाख एक हजार बांधवे) क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। लगातार बढ़ते रुझान (राइजिंग ट्रेंड) के कारण सोन नदी का जलस्तर तेजी से चढ़ रहा है।
  2. कोसी बैराज (वीरपुर): वीरपुर स्थित कोसी बैराज की क्षमता 9.50 लाख क्यूसेक है। दोपहर 2:00 बजे तक यहां से 1,81,145 (एक लाख एकासी हजार एक सौ पैंतालीस) क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। सुबह 11:00 बजे यह 1.69 लाख क्यूसेक था, जो दोपहर तक लगातार बढ़कर जल प्रलय का संकेत दे रहा है।
  3. गंडक बैराज (वाल्मीकिनगर): वाल्मीकिनगर बैराज (क्षमता 8.50 लाख क्यूसेक) से दोपहर 2:00 बजे तक 1,29,300 (एक लाख उनतीस हजार तीन सौ) क्यूसेक पानी छोड़ा गया। यहां स्थिति स्थिर (स्टैडी) बनी हुई है, लेकिन विशाल जलराशि निचले इलाकों में तबाही मचाने के लिए काफी है।

दियारा क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न, गांवों का संपर्क टूटा

बैराजों से छोड़े गए लाखों क्यूसेक पानी और गंगा के उफान से राज्य के निचले इलाकों तथा दियारा (नदी तटीय) क्षेत्रों की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। सैकड़ों गांव पानी से घिर चुके हैं और दियारा का मुख्य शहरों से संपर्क पूरी तरह कट चुका है। हजारों लोग ऊंचे स्थानों और बांधों पर शरण लेने को मजबूर हैं। फसलों के डूबने से किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

सरकार पर बरसे तेजस्वी यादव, केंद्र से मांगी विशेष पैकेज

गंगा और अन्य नदियों के भयावह रूप पर चिंता जताते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि गंगा के किनारे बसे कई इलाकों में हालात बेकाबू हो चुके हैं। खासकर दियारा क्षेत्र पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है और लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने आपदा की इस घड़ी में केंद्र सरकार से बिहार के लिए तत्काल विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग की। उन्होंने राज्य सरकार से भी मांग की कि प्रभावित परिवारों तक सूखा राशन, दवाएं, नावें और सुरक्षित आश्रय स्थल तुरंत उपलब्ध कराए जाएं।

प्रशासन अलर्ट पर, तटबंधों की निगरानी तेज

जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी संबंधित जिलों के अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा है। अभियंता (इंजीनियर) लगातार तटबंधों पर गश्त कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार के कटाव या दरार को तुरंत ठीक किया जा सके। निचले इलाकों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

मवेशी बह गए, हजार करोड़ का सार्वजनिक ढांचा तबाह

बाढ़ के इस महाविनाश में सबसे भारी मार पशुपालकों और किसानों पर पड़ी है। पशुपालकों के सैकड़ों मवेशी बाढ़ के तेज बहाव में डूबकर बह गए हैं। इसके अलावा सड़कें, पुल-पुलिया, स्कूल और अन्य सार्वजनिक ढांचे बुरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। राज्य को हजारों करोड़ रुपये के जान-माल का नुकसान हुआ है। प्रभावित इलाकों में भुखमरी और जल जनित बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का तंज: बिहार सरकार दिवालिया, केंद्र घोषित करे राष्ट्रीय आपदा

गंगा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर पर गहरा असंतोष और चिंता व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार की व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिवालिया हो चुकी बिहार सरकार बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने में पूरी तरह उदासीन और निष्प्रभावी साबित हो रही है।

तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार से मांग की है कि:

  1. बिहार की इस विनाशकारी बाढ़ को तुरंत राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए।
  2. बदहाल बिहार के लिए तत्काल 5 हजार करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जाए।
  3. बाढ़ राहत, खोज और बचाव कार्यों के लिए भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर्स का सहयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि फंसे हुए लोगों तक भोजन और राहत सामग्री पहुँचाई जा सके।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी पुरजोर आग्रह किया कि वे अविलंब बिहार का दौरा कर यथास्थिति का हवाई व जमीनी सर्वेक्षण करें और पीड़ित जनता को तत्काल राहत पहुँचाने के लिए ठोस कदम उठाएं।

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