बिहार के लिए ऐतिहासिक महाप्लान! बाढ़-सुखाड़ का खेल खत्म, 16000 करोड़ से ज्यादा की परियोजनाओं पर दिल्ली में महामंथन

पटना/नई दिल्ली, 31 अगस्त 2026: उत्तर बिहार में हर साल तबाही मचाने वाली बाढ़ और दक्षिण बिहार का सुखाड़ अब इतिहास बनने जा रहा है। बिहार की बदहाली दूर करने और राज्य को बाढ़-सुखाड़ के दोहरे संकट से हमेशा के लिए उबारने के लिए एक ऐतिहासिक महाप्लान तैयार किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक बेहद अहम बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से मुलाकात कर बिहार की जल प्रबंधन, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी लंबित और भावी योजनाओं को तेजी से लागू करने पर गहन विचार-विमर्श किया।

नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय के बैठक कक्ष में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल को स्मृति चिन्ह भेंट करते उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी।

कोसी-मेची लिंक और लंबित योजनाओं के लिए दिल्ली से मदद की मांग

बैठक के दौरान राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषित 11500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के तहत बिहार सरकार ने कुल 16339.18 करोड़ रुपये की योजनाओं का विस्तृत रिपोर्ट (DPR) केंद्र सरकार को भेजा था। हालांकि इनमें से अभी तक केवल 2 परियोजनाओं को ही अंतिम स्वीकृति मिल सकी है।

विशेष रूप से 3652.56 करोड़ रुपये की लागत वाली ऐतिहासिक कोसी-मेची अंतरराज्यीय रिवर लिंक परियोजना पर जोर दिया गया। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य कोसी नदी के अतिरिक्त पानी का सही उपयोग कर उत्तर बिहार के विशाल कृषि क्षेत्र में सिंचाई की क्रांति लाना है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 395.41 करोड़ रुपये और 2026-27 के लिए 570 करोड़ रुपये (कुल 965.41 करोड़ रुपये) का प्रावधान किया गया था, लेकिन अब तक केवल 156.745 करोड़ रुपये ही राज्य को प्राप्त हुए हैं। बैठक में प्रथम चरण की बकाया राशि तुरंत जारी करने और द्वितीय चरण के डीपीआर को तुरंत मंजूरी देने का पुरजोर आग्रह किया गया।

इसके अलावा 125.08 करोड़ रुपये की सिकरहना दायां तटबंध निर्माण योजना, जिसकी संस्तुति पहले ही की जा चुकी है, के लिए भी केंद्रीय राशि तुरंत विमुक्त करने की मांग रखी गई। वर्तमान में सिंचाई क्षेत्र की 5951.45 करोड़ रुपये की 3 और बाढ़ प्रबंधन क्षेत्र की 3896.14 करोड़ रुपये की 15 परियोजनाएं जल शक्ति मंत्रालय के विचार-विमर्श स्तर पर अटकी हुई हैं।

आगामी बजट 2026-27 के लिए बिहार का 3 बड़ा मास्टर प्लान

बैठक में आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए 3 बेहद महत्वपूर्ण परियोजनाओं को शामिल करने का प्रस्ताव प्रमुखता से रखा गया:

  1. इंद्रपुरी जलाशय परियोजना: सोन नहर प्रणाली को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने वाली इस बहुप्रतीक्षित योजना का रास्ता बिहार और झारखंड के बीच पानी के बंटवारे पर समझौता ज्ञापन (MoU) बनने के बाद साफ हो चुका है।
  2. सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना: इस योजना के तहत सोन नदी के जल को पाइपलाइन और नहरों के नेटवर्क से फल्गु नदी तक पहुंचाया जाएगा। इससे गयाजी और औरंगाबाद के सूखाग्रस्त इलाकों को पर्याप्त पानी मिलेगा और पवित्र फल्गु नदी में पूरे 12 महीने पानी का प्रवाह बना रहेगा।
  3. सारण जिला बाढ़ नियंत्रण एवं जलनिकासी परियोजना (फेज-1): 1350.95 करोड़ रुपये की इस योजना से मुख्य जलनिकासी नालों का जीर्णोद्धार होगा। इससे कृषि भूमि की सुरक्षा के साथ-साथ प्रस्तावित सोनपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और एयरोसिटी को बाढ़ से सुरक्षा मिलेगी।

पश्चिमी कोसी नहर का 8338 करोड़ का जीर्णोद्धार

बजट 2025-26 में शामिल पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के विस्तार और आधुनिकीकरण  के लिए बिहार सरकार ने 8338.89 करोड़ रुपये का डीपीआर केंद्रीय जल आयोग को भेजा है। केंद्र से हरी झंडी और राशि का इंतजार किए बिना बिहार सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से 3484.24 करोड़ रुपये की लागत से प्रथम चरण का काम शुरू भी कर दिया है। बैठक में इसकी औपचारिक मंजूरी और वित्तीय सहायता जल्द देने का आग्रह किया गया।

नेपाल सीमा विवाद, फराक्का बराज और राष्ट्रीय गाद नीति

बैठक में बाढ़ की स्थाई रोकथाम के लिए नेपाल से जुड़ी लंबित परियोजनाओं — कोसी हाई डैम, कमला बहुउद्देशीय परियोजना और बागमती बांध परियोजना के सर्वेक्षण और डीपीआर कार्य में तेजी लाने का मुद्दा गरमाया रहा। संयुक्त परियोजना कार्यालय (JPO) में बिहार के प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने पर बल दिया गया।

साथ ही फराक्का बराज तथा भारत-बांग्लादेश जल संधि के कारण बिहार की नदियों में जमा हो रही गाद (सिल्ट) की विकराल समस्या की ओर केंद्र का ध्यान आकर्षित किया गया। बिहार ने मांग की कि गंगा नदी में गाद की समस्या से निपटने के लिए एक राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाई जाए और इसके लिए अलग से एक समर्पित कोष गठित किया जाए। इसके साथ ही गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (GFCC) के अध्यक्ष का मुख्यालय पटना में ही बनाए रखने पर अडिग रुख अपनाया गया, क्योंकि बिहार देश का सबसे ज्यादा बाढ़ प्रभावित (73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र) राज्य है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विकास को मिलेगी नई रफ्तार

बैठक के अंत में विश्वास जताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बिहार के विकास को लगातार प्राथमिकता दे रही है। केंद्र और राज्य सरकार के साझा और समन्वित प्रयासों से इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने पर बिहार के किसानों, ग्रामीण क्षेत्रों और पूरी अर्थव्यवस्था में एक नया क्रांति का अध्याय लिखा जाएगा।

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