उपेंद्र कुशवाहा के बेटे (मंत्री) की कुर्सी पर मंडराया संकट, अंतिम समय में ‘पत्ता’ खुलने का इंतजार; लोजपा (रा.) ने अशरफ अंसारी को मैदान में उतारकर चली बड़ी चाल।
पटना। बिहार विधान परिषद (MLC) की 9 सीटों और 1 सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर सूबे की सियासत में भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी रणनीति के तहत 9 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने 4-4 सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। लेकिन इस पूरी लिस्ट में सबसे चौंकाने वाला और सनसनीखेज मोड़ लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के फैसले और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के कोटे को लेकर आया है।

चिराग पासवान का ‘मास्टरस्ट्रोक‘, पुराने चेहरे पर जताया भरोसा लोजपा (रामविलास) के मुखिया चिराग पासवान ने शनिवार को एक बड़ा सियासी दांव खेलते हुए सबको हैरान कर दिया। पार्टी के केंद्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड ने बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए अपने पुराने और भरोसेमंद मुस्लिम चेहरे, प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष अशरफ अंसारी को उम्मीदवार घोषित किया है। चिराग के इस ‘मुस्लिम कार्ड’ को विपक्ष के कोर वोट बैंक में सेंधमारी के रूप में देखा जा रहा है। टिकट मिलने के बाद अशरफ अंसारी ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताते हुए कहा, “पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे।”

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश की कुर्सी खतरे में! दूसरी तरफ, सबसे बड़ा सस्पेंस सम्राट सरकार में पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश (दीपक कुशवाहा) को लेकर बना हुआ है। एनडीए की घोषित 9 सीटों में उनका नाम गायब है। चूंकि वह अभी किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य नहीं हैं, इसलिए मंत्री पद पर बने रहने के लिए उनका एमएलसी बनना अनिवार्य है। इस झटके के बाद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे के मंत्री पद पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
अंतिम समय में पत्ता खुलने की उम्मीद, कुशवाहा ने संभाली कमान इस संकट के बीच राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे को एमएलसी बनाने की जुगत में पूरी ताकत से जुट गए हैं। शनिवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “अभी नामांकन खत्म होने में दो दिन बाकी हैं, तब तक इंतजार कीजिए।” कुशवाहा ने पुष्टि की कि वह इस मसले पर एनडीए के शीर्ष नेताओं से लगातार संपर्क में हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अंतिम समय में कोई बड़ा उलटफेर हो सकता है और दीपक प्रकाश का पत्ता खुल सकता है।

क्या है सीटों का गणित? बिहार विधान परिषद में विधानसभा कोटे की 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और पूर्व सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई 1 सीट पर उपचुनाव हो रहा है। विधानसभा में संख्याबल के हिसाब से कुल 10 में से 9 सीटों पर एनडीए की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है, जबकि 1 सीट विपक्ष के खाते में जा सकती है। चुनाव के लिए 8 जून को नामांकन का आखिरी दिन है, जबकि 18 जून को मतदान होना है। अब देखना यह है कि आखिरी दो दिनों में उपेंद्र कुशवाहा अपनी साख और बेटे की मंत्री कुर्सी बचा पाते हैं या नहीं!
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