खाद्य सुरक्षा विभाग (FSSAI) ने जारी की सख्त ‘संशोधन विनियम 2026′ की अधिसूचना! 1 जुलाई 2027 से बिना इस सरकारी ‘वीगन लोगो‘ के बाजार में नहीं बिकेगा कोई भी वीगन फूड पैकेट; उल्लंघन करने वालों पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई।
विशेष रिर्पोट : एस. एस. कुमार ‘पंकज ’
देश में शुद्ध शाकाहार और वीगन जीवनशैली अपनाने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार की ओर से अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। बाजार में शुद्धता और ‘प्योर वेज’ के नाम पर चल रहे भ्रम को हमेशा के लिए जड़ से खत्म करने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। FSSAI ने ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (वीगन खाद्य पदार्थ) संशोधन विनियम, 2026′ की आधिकारिक राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है।

इस नए सरकारी फरमान के तहत अब देश में बिकने वाले हर एक वीगन प्रोडक्ट के पैकेट पर सरकार द्वारा प्रमाणित विशेष ‘वीगन लोगो‘ लगाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
वीगन एक ऐसी जीवनशैली और आहार पद्धति है, जो पूरी तरह से पशु-क्रूरता और उनके शोषण को समाप्त करने के सिद्धांत पर आधारित है। वीगन आहार अपनाने वाले लोग न केवल मांस-मछली और अंडे से दूरी बनाते हैं, बल्कि वे उन सभी चीजों का भी पूरी तरह त्याग करते हैं जो किसी भी जानवर से प्राप्त होती हैं—जैसे कि दूध, दही, पनीर, मक्खन, घी और यहाँ तक कि शहद भी। साधारण शाकाहार से अलग, वीगन जीवनशैली जीने वाले लोग चमड़े, ऊन, रेशम, या जानवरों पर टेस्ट किए गए सौंदर्य प्रसाधनों का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं। सीधे शब्दों में कहें, तो यह जीवन को पूरी तरह से केवल पेड़-पौधों से मिलने वाले (Plant-based) विकल्पों पर केंद्रित करने और पशुओं के प्रति दयाभाव रखने का एक संकल्प है।
1 जुलाई 2027 से लागू होगा ‘चक्रव्यूह‘
सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, यह नियम 1 जुलाई, 2027 से पूरे देश में पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। इस तारीख के बाद, यदि कोई भी कंपनी बिना FSSAI की लिखित मंजूरी और बिना तय मानक वाले ‘लोगो’ के अपने उत्पाद को ‘वीगन’ बताकर बेचती पाई गई, तो उसे कानूनन संगीन अपराध माना जाएगा और भारी जुर्माने के साथ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजित पुनहानी द्वारा जारी इस आदेश से मिलावटखोरों और भ्रामक विज्ञापन करने वाली कंपनियों में हड़कंप मच गया है।
क्या है ‘वीगन‘ का असली खेल और क्यों पड़ी जरूरत?
आम जनता अक्सर सामान्य शाकाहार (Vegetarian) और वीगन (Vegan) में अंतर नहीं समझ पाती। वीगन खाद्य पदार्थों में न केवल मांस-मछली, बल्कि दूध, दही, पनीर, घी, शहद या किसी भी जानवर से प्राप्त होने वाले तत्व की एक बूंद भी शामिल नहीं हो सकती।
अब तक बाजार में कंपनियां बिना किसी कड़े मानक के अपने मनमुताबिक पैकेट पर ‘वीगन’ लिख देती थीं, जिससे उपभोक्ता ठगे जा रहे थे। लेकिन अब FSSAI के इस नए चक्रव्यूह से फर्जीवाड़ा करने वाले ब्रांड्स का बचना नामुमकिन होगा। कंपनियों को इस लोगो को छापने के लिए FSSAI की प्रयोगशालाओं से कड़े वेरिफिकेशन टेस्ट से गुजरना होगा।

कैसा होगा नया सरकारी लोगो? (सटीक पैमाना तय)
FSSAI ने इस लोगो की बनावट और रंगों का बिल्कुल सटीक गणितीय पैमाना जारी किया है:
- डिजाइन: एक हरे रंग के चौकोर बॉक्स के अंदर अंग्रेजी का बड़ा ‘V’ अक्षर होगा, जिसके बीच में एक छोटी सी सुरक्षित पत्ती बनी होगी और नीचे स्पष्ट अक्षरों में ‘VEGAN’ लिखा होगा।
- सटीक आकार: सरकार ने मिलीमीटर (mm) में इसका साइज तय किया है (A=7, B=10, C=7, H=15, I=15 mm) ताकि कोई भी कंपनी इसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ न कर सके।
- रंग का कोड: लोगो के लिए विशेष हरा रंग निर्धारित किया गया है जिसका इंटरनेशनल प्रिंटिंग कोड (C=60, M=0, Y=89, K=0) तय है।
जनता पर क्या होगा असर?
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं को पैकेट के पीछे लिखे बारीक अक्षरों वाली सामग्री को पढ़ने के लिए सिरपच्ची नहीं करनी होगी। पैकेट के ठीक सामने लगा यह खास ‘V’ मार्क ही इस बात की सौ प्रतिशत गारंटी होगा कि प्रोडक्ट पूरी तरह से क्रूरता-मुक्त (Cruelty-free) और पशु-तत्व रहित है। अब आपकी थाली में धोखा परोसना नामुमकिन होगा!
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