मुजफ्फरपुर। नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या-03 के पार्षद आनंद कंद साह ने व्यवस्था की दोहरी नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरकार ने मुरौल को शहर तो घोषित कर दिया, लेकिन यहाँ की जनता आज भी सुविधाओं के लिए ग्रामीण व्यवस्था की कतार में खड़ी है। पार्षद साह ने एक वीडियो जारी कर सरकार और प्रशासन को सीधे चेतावनी दी है कि जब तक “शहरी टैक्स” के बदले “शहरी सुविधा” नहीं मिलती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

अनशन से हटे पर झुके नहीं! पार्षद ने दी चेतावनी- ‘जब तक समाधान नहीं, तब तक चैन नहीं‘
पार्षद आनंद कंद साह ने हाल ही में जिला कलेक्ट्रेट के समक्ष अनशन किया था। हालांकि, DSO मुजफ्फरपुर के आश्वासन के बाद उन्होंने अनशन स्थगित कर दिया है, लेकिन तेवर अब भी तल्ख हैं। साह का कहना है, “DSO ने इसे पॉलिसी मैटर बताकर पल्ला झाड़ लिया है, लेकिन सवाल यह है कि जब बिजली बिल DS-2 (शहरी) के हिसाब से लिया जा रहा है और जमीन की रजिस्ट्री में भारी MVR वसूला जा रहा है, तो गैस सिलेंडर के लिए 45 दिनों का इंतजार क्यों?”
45 दिन का ‘वनवास‘, सिस्टम पर गंभीर सवाल
सरकारी नोटिफिकेशन के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 25 दिनों के भीतर गैस रिफिल की सुविधा होनी चाहिए। लेकिन मुरौल और सकरा जैसी नवगठित नगर पंचायतों में स्थिति भयावह है। पार्षद साह ने तर्क दिया कि अगर हमें ग्रामीण समझकर 45 दिन बाद गैस दी जा रही है, तो हमसे होल्डिंग टैक्स और महंगा बिजली बिल क्यों लिया जा रहा है? उन्होंने बताया कि कंपनियों का तर्क है कि डिस्ट्रीब्यूटरशिप ग्रामीण कोटे से दी गई थी, जो अब जनता के लिए गले की फांस बन गई है।

कौन हैं आनंद कंद साह?
नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या-03 के पार्षद आनंद कंद साह अपनी बेबाकी और जमीनी संघर्ष के लिए जाने जाते हैं। पिछले कई महीनों से वे स्थानीय समस्याओं और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। उनका अनशन न केवल एक विरोध था, बल्कि व्यवस्था को आईना दिखाने की एक साहसिक कोशिश थी।
प्रशासन से क्या है मांग“
हमसे सेवा के नाम पर ‘शहरी शुल्क‘ वसूला जा रहा है, होल्डिंग टैक्स से लेकर बिजली बिल (DS-2) तक हम शहरी दर पर दे रहे हैं, लेकिन सुविधा हमें ग्रामीण स्तर की मिल रही है। 45 दिन का रिफिल चक्र हमारी माताओं-बहनों के लिए अभिशाप है। उन्हें लकड़ी बीनने को मजबूर किया जा रहा है। हमारी मांग एक सूत्रीय है—मुरौल को शहरी क्षेत्र का दर्जा मिल चुका है, तो हमें 25 दिन पर गैस रिफिल चाहिए और यह हमें मिलकर रहेगा।”
दिल्ली तक पहुँची गूँज, सांसद से भी संपर्क
यह समस्या सिर्फ मुरौल तक सीमित नहीं है। सकरा, ताजपुर, कांटी, बरूराज, मोतीपुर और मीनापुर की जनता भी इसी “शहरी-ग्रामीण” द्वंद्व में फंसी है। आनंद कंद साह ने इस मामले को दिल्ली के गलियारों तक पहुँचाने के लिए मुजफ्फरपुर सांसद के पीए (PA) से संपर्क कर जरूरी दस्तावेज दिल्ली कार्यालय भेजे हैं।
जनता की प्रखर आवाज बने आनंद कंद साह
आनंद कंद साह केवल एक पार्षद नहीं, बल्कि क्षेत्र में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ एक मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चुप नहीं बैठने वाले हैं। उन्होंने जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “आपकी प्रेरणा से ही आंशिक सफलता मिली है, लेकिन पूर्ण समाधान होने तक मेरा फॉलोअप जारी रहेगा।”
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