पटना | मुख्य संवाददाता बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। राजधानी पटना के व्यस्ततम इलाकों में शुमार कदमकुआँ थाने के पुलिस अवर निरीक्षक-सह-अपर थानाध्यक्ष (Additional SHO) अर्जुन यादव को निगरानी की टीम ने ₹7,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया है। पुलिस महकमे के एक जिम्मेदार अधिकारी की इस गिरफ्तारी से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

निगरानी के शिकंजे में ‘रिश्वतखोर’ दरोगा: रिश्वत लेते गिरफ्तार कदमकुआँ थाने के अपर थानाध्यक्ष अर्जुन यादव (लाल घेरे में) को अपनी कस्टडी में ले जाती निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम।

साजिश के जाल में फंसाने का डर दिखाकर मांगी थी घूस मिली जानकारी के अनुसार, परिवादी शमशाद आलम ने निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी कि कदमकुआँ थाने में तैनात अर्जुन यादव उन्हें एक केस (कांड संख्या-315/26) में झूठा फंसाने की धमकी दे रहे थे। मामले को रफा-दफा करने के बदले में दरोगा द्वारा पैसों की मांग की जा रही थी। शिकायत मिलते ही ब्यूरो ने गुप्त रूप से सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगे जाने की बात सही पाई गई।

बुद्ध मूर्ति के पास हुई गिरफ्तारी शिकायत सही पाए जाने के बाद पुलिस उपाधीक्षक आदित्य राज के नेतृत्व में एक विशेष धावादल (Trapping Team) का गठन किया गया। गुरुवार (30 अप्रैल) को जैसे ही अर्जुन यादव ने बुद्ध मूर्ति के निकट जस्टिस राज किशोर पथ पर शमशाद आलम से रिश्वत की रकम ₹7,000 अपने हाथ में ली, सादे लिबास में तैनात निगरानी की टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। मौके पर ही उनके पास से रिश्वत के पैसे बरामद किए गए।

विजिलेंस की बड़ी कामयाबी निगरानी ब्यूरो की इस सफल कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त कोई भी अधिकारी कानून की पहुंच से बाहर नहीं है। गिरफ्तार दरोगा अर्जुन यादव को पूछताछ के बाद पटना स्थित विशेष निगरानी अदालत में पेश किया जाएगा।

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