उपन्यास जैसी खौफनाक मर्डर मिस्ट्री के गुनहगारों को ‘फांसी का फंदा‘; बेगूसराय के तिहरे हत्याकांड और पत्नी की लाश के टुकड़े करने वाले दरिंदे को रेयरेस्ट ऑफ रेयर सजा
पटना। बिहार में अपराधियों की अब खैर नहीं है। सूबे में ‘कानून का राज’ स्थापित करने के लिए बिहार पुलिस ने कोर्ट के साथ मिलकर अपराधियों के खिलाफ ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि महज 4 महीनों के भीतर ही अपराधियों का साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह गया। जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच त्वरित विचारण के जरिए रिकॉर्ड 70,624 अपराधियों को दोषी सिद्ध कराकर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

बिहार पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंकड़ों का यह सनसनीखेज और खौफनाक ब्योरा खुद अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने साझा किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “कानून का राज स्थापित करने में कांडों के त्वरित विचारण की महत्वपूर्ण भूमिका है। पुलिस मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक इस पर चौबीसों घंटे फोकस किया जा रहा है।”

रूह कंपा देने वाले दो मामलों में मिली ‘फांसी‘
एडीजी विधि-व्यवस्था सुधांशु कुमार ने बताया कि कोर्ट ने दो जघन्य मामलों को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (दुर्लभ से दुर्लभतम) मानते हुए दो दरिंदों को फांसी की सजा सुनाई है:
- बेगूसराय का तिहरा हत्याकांड: इस खौफनाक मामले में अभियुक्त विकास कुमार ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए वादी के माता, पिता और बहन की गोली मारकर हत्या कर दी थी। 12 फरवरी को कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए फांसी का फंदा मुकर्रर किया।
- पत्नी की लाश के कर दिए थे टुकड़े: महेंदिया थाना (कांड संख्या 148/24) के तहत एक कसाई पति बीरबल साहू ने अपनी ही पत्नी सुमंती सिन्हा की निर्मम हत्या कर दी। हैवानियत यहीं नहीं रुकी, उसने लाश को कई टुकड़ों में काट डाला। कोर्ट ने त्वरित सुनवाई करते हुए इस कसाई पति को फांसी की सजा सुनाई।
सजा का ‘सुनामी‘ आंकड़ा: कंपकंपा उठेंगे अपराधी
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 120 दिनों में सजा पाने वाले अपराधियों की सूची लंबी और खौफनाक है:
- फांसी की सजा: 02 अभियुक्त
- आजीवन कारावास (उम्रकैद): 453 अभियुक्त
- 10 वर्ष या उससे अधिक की जेल: 253 अभियुक्त
- 10 वर्ष से कम की सजा: 651 अभियुक्त
- 2 वर्ष से कम की सजा: 981 अभियुक्त
- जुर्माना या बांड (शराबबंदी व अन्य मामले): 68,284 अभियुक्त

क्राइम फाइल: किस अपराध में कितने नपे?
बिहार पुलिस ने अलग-अलग अपराधों की धाराओं के तहत जो जाल बुना, उसमें बड़े-बड़े शातिर शिकारी फंस गए। आंकड़ों पर एक नजर:
| अपराध का प्रकार | कुल कांड | दोषी सिद्ध अपराधी |
| बलात्कार एवं पोक्सो (POCSO) | 218 | 267 |
| हत्या (Murder) | 213 | 506 |
| आर्म्स एक्ट (Arms Act) | 252 | 318 |
| लूट (Loot) | 59 | 66 |
| अपहरण (Kidnapping) | 51 | 62 |
| डकैती (Dacoity) | 17 | 34 |
पुलिस मुख्यालय की पैनी नजर
एडीजी सुधांशु कुमार ने सख्त लहजे में कहा कि स्पीडी ट्रायल के इस कड़े रुख से अपराधियों के मन में खौफ बैठना तय है। पुलिस केवल केस दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराधियों को उनकी आखिरी मंजिल यानी जेल के सींखचों और फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों को समय पर कोर्ट में पेश कर रही है। बिहार पुलिस का यह ‘मिशन क्लीन’ आगे भी इसी रफ्तार से जारी रहेगा।
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