TRE-4 की जंग: तेजस्वी का प्रहार, चिराग की टीस और मंत्री का आश्वासन… लाठी के साये में शिक्षक अभ्यर्थी!

पटना। बिहार की राजधानी में एक बार फिर नियुक्तियों को लेकर संग्राम छिड़ गया है। बीपीएससी (BPSC) के चौथे चरण की शिक्षक भर्ती (TRE-4) का विज्ञापन जारी करने की मांग कर रहे युवाओं पर पटना पुलिस ने उस वक्त बर्बर लाठीचार्ज किया, जब वे जेपी गोलंबर के पास बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। इस हिंसक झड़प में कई अभ्यर्थियों के घायल होने की सूचना है, जिसके बाद बिहार की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है।

जेपी गोलंबर पर पुलिसिया कार्रवाई के बीच नारेबाजी करते TRE-4 अभ्यर्थी। तस्वीर में दिख रहा आक्रोश बिहार के युवाओं के भीतर पनप रहे रोजगार के संकट की गवाही दे रहा है।

मैदान-ए-जंग बना पटना: सड़कों पर बहा लहू

मंगलवार को हजारों की संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार जानबूझकर TRE-4 का विज्ञापन अटका रही है, जिससे उनका भविष्य अधर में लटका है। जैसे ही प्रदर्शन उग्र हुआ और युवाओं ने सुरक्षा घेरा लांघा, पुलिस ने उन्हें तितर-बितर करने के लिए लाठियां भांजनी शुरू कर दीं। भगदड़ के बीच पुलिसिया कार्रवाई में कई छात्र लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े।

तेजस्वी का तीखा प्रहार: अपराधी बेखौफ, छात्र लाचार

घटना के तुरंत बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा, आज बीपीएससी TRE-4 के छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और उनकी सुनवाई करने के बजाय उनकी आवाज दबाई जा रही है। बिहार में अपराधियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, लेकिन अपना हक मांग रहे छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं। यह सरकार केवल अपनों को उपकृत करने में लगी है, जनता की इन्हें परवाह नहीं।”

चिराग की टीस: गठबंधन सरकार के भीतर से उठे सवाल

हैरानी की बात यह रही कि सरकार में सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी इस घटना पर अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने लाठीचार्ज को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा कि युवाओं की मांगों पर प्रशासन को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी। चिराग का यह रुख साफ करता है कि शिक्षक भर्ती का मुद्दा अब गठबंधन के भीतर भी एक असहज स्थिति पैदा कर रहा है।

शिक्षा मंत्री का आश्वासन: धैर्य रखें, समाधान होगा

इस भारी हंगामे के बीच बिहार के नए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने अभ्यर्थियों से शांति की अपील करते हुए कहा, मैं एक छात्र और शिक्षक, दोनों की समस्याओं को गहराई से समझता हूं। हम विभाग की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित कर रहे हैं। अगर मांग तार्किक होगी, तो सरकार उस पर बिना किसी विलंब के सकारात्मक निर्णय लेगी। यह शासन के लिए नहीं, बल्कि सेवा के लिए बनी सरकार है।”

मंत्री का 4-सूत्रीय विजन: शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे चार स्तरों पर काम करेंगे:

  1. छात्र के हित: समस्याओं का त्वरित समाधान।
  2. शिक्षक का सम्मान: उनकी चुनौतियों का विश्लेषण।
  3. पारदर्शिता: हर निर्णय निष्पक्ष और ओपन होगा।
  4. रोजगार: शिक्षा को सीधे तौर पर रोजगार से जोड़ना।

आंदोलनकारियों की दो टूक: विज्ञापन नहीं तो चैन नहीं

एक तरफ सरकार धैर्य की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ घायल अभ्यर्थी हार मानने को तैयार नहीं हैं। अस्पताल में इलाज करा रहे छात्रों का कहना है कि जब तक TRE-4 का आधिकारिक विज्ञापन जारी नहीं हो जाता, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

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वादाखिलाफी के खिलाफ माले का मोर्चा: “भाजपा-सम्राट सरकार में युवाओं पर बरसीं लाठियां” प्रदर्शनकारियों पर हुए इस बल प्रयोग की तीखी निंदा करते हुए आइसा (AISA) के जिला प्रभारी  समस्तीपुर सह भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने इसे ‘बर्बर और अन्यायपूर्ण’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार विज्ञापन निकालने की घोषणा कर पीछे हट रही है और अब परीक्षा पैटर्न में बदलाव कर अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। माले नेता ने आरोप लगाया कि पुलिस ने अभ्यर्थियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, जिससे दर्जनों युवाओं के सिर और हाथ-पैर टूट गए हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार के छात्र अब लाठी-गोली की यह राजनीति बर्दाश्त नहीं करेंगे। माले ने सरकार से अविलंब TRE-4 का विज्ञापन जारी करने, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करने और घायलों का मुफ्त इलाज कराने की मांग की है।


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