सावधान! आपके बच्चे के स्कूल में भी तो नहीं चल रहा ‘फीस का खेल‘? गरीबों का हक और सरकारी खजाने पर प्राइवेट स्कूल डाल रहे डाका!
ब्यूरो रिपोर्ट । शिक्षा के पवित्र मंदिर को कमाई का अड्डा बनाने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कटिहार जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी के कड़े तेवर के बाद जिले के चार प्रतिष्ठित निजी स्कूलों के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी राशि के गबन की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद से जिले के निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।

DM बने ‘डिटेक्टिव‘: खुद फोन घुमाया और खुल गई पोल
अक्सर अधिकारी कागजी रिपोर्ट पर भरोसा करते हैं, लेकिन जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने मामले की तह तक जाने के लिए खुद कमान संभाली। शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत गरीब बच्चों (EWS) के मुफ्त नामांकन और उनकी फीस की प्रतिपूर्ति के लिए स्कूलों ने आवेदन दिए थे। जिलाधिकारी ने रैंडम तरीके से आवेदन में दिए गए नंबरों पर अभिभावकों को खुद फोन मिलाया।
बातचीत के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिन बच्चों को ‘मुफ्त’ पढ़ाने का दावा कर स्कूल सरकार से लाखों रुपये की मांग कर रहे थे, असल में उन बच्चों के गरीब माता-पिता से स्कूल पहले ही मोटी फीस वसूल चुके थे।
सरकार से भी पैसा और गरीब से भी वसूली: दोहरा मुनाफा
जांच में पाया गया कि यह महज एक चूक नहीं बल्कि सुनियोजित ‘महाफ्रॉड’ है। जिलाधिकारी के अनुसार:
- स्कूलों ने सरकार को गलत सूचना दी।
- नियमों के विरुद्ध गरीब बच्चों से फीस वसूली गई।
- फीस लेने के बावजूद सरकार से उन्हीं बच्चों के नाम पर पैसे (प्रतिपूर्ति) हड़पने की कोशिश की गई।
इन 4 स्कूलों के निदेशकों और प्राचार्यों पर गिरी गाज
जिला प्रशासन ने जांच के बाद निम्नलिखित स्कूलों को दोषी पाते हुए उन पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया:
- शिक्षा निकेतन, विनोदपुर
- सीमा पब्लिक स्कूल, कटिहार
- जेपी पब्लिक स्कूल, कोढ़ा
- गॉड्स ग्रेस पब्लिक स्कूल, फलका

“भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, आगे भी जारी रहेगी जांच”
मामले की पुष्टि करते हुए जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा:
“सरकार की नीति स्पष्ट है—भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस। ये स्कूल न केवल गरीबों का हक मार रहे थे, बल्कि सरकारी निधि का गबन करने का प्रयास कर रहे थे। यह सीधे-सीधे फ्रॉड का केस है। हमने चार स्कूलों पर एफआईआर दर्ज कराई है और यह जांच आगे भी जारी रहेगी। जो भी नियम तोड़ेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
अभिभावकों से अपील
प्रशासन ने आम जनता और अभिभावकों से भी अपील की है कि यदि कोई स्कूल आरटीई (RTE) के तहत नामांकन के बावजूद पैसे की मांग करता है या किसी प्रकार का मानसिक उत्पीड़न करता है, तो इसकी सूचना तुरंत जिला शिक्षा विभाग या जिलाधिकारी कार्यालय को दें।
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