Tuesday, November 3, 2026

मुजफ्फरपुर का ‘महा-सत्याग्रह’: 16,000 मजदूरों की जिद्द के आगे क्या झुकेगा सिस्टम? मंगलवार को पटना में होगी ‘आर-पार’ की वार्ता

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर इन दिनों एक ऐतिहासिक संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। ‘मनरेगा वॉच’ के नेतृत्व में पिछले 116 दिनों से जारी मजदूरों का धरना अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार की तमाम अनदेखी और तकनीकी पेच-फंसने के बावजूद, 16,000 से अधिक मजदूरों ने अपने हक को पाने की जो जिद्द ठानी है, उसने जिला प्रशासन से लेकर पटना तक की नींद उड़ा दी है।

मुजफ्फरपुर समाहरणालय परिसर में 116वें दिन भी जारी मजदूरों का संघर्ष। हाथों में तख्तियां और हौसलों में चट्टानी इरादे लिए ये मजदूर मंगलवार को पटना में होने वाली उच्च-स्तरीय वार्ता से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

100 से ज्यादा मजदूर, एक ही संकल्प

भले ही कागज पर 16,000 मजदूरों का संघर्ष है, लेकिन समाहरणालय परिसर में रोज 100 से अधिक मजदूर 116 वें दिन पूरी ताकत और धैर्य के साथ डटे हुए हैं। भीषण गर्मी और तमाम परेशानियों के बीच ये मजदूर केवल एक ही मांग कर रहे हैं—’हमें हमारा रोजगार दो, हमारा बकाया भुगतान करो।’ मुजफ्फरपुर के सभी 16 प्रखंडों से आई ये आवाजें अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी हैं।

मंगलवार को पटना में ‘फिक्स‘ होगा भविष्य

धरने के 116वें दिन, आंदोलन ने एक नई करवट ली है। मनरेगा वॉच के संजय सहनी ने जानकारी दी कि अब गेंद सीधे बिहार सरकार के पाले में है। मंगलवार को पटना में सरकारी अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक तय हुई है। यह बैठक महज औपचारिकता नहीं, बल्कि मजदूरों के भविष्य का फैसला करेगी। मजदूरों ने स्पष्ट कर दिया है कि कल की वार्ता के बाद ही तय होगा कि संघर्ष की अगली रणनीति क्या होगी।

‘VB-G RAM G’ बना मजदूरों का काल

मजदूरों का आरोप है कि सरकार की नई नीति ‘VB-G RAM G’ उनके लिए रोजगार का जरिया बनने के बजाय ‘काल’ बन गई है।

  • जॉब कार्ड का खेल: हजारों मजदूरों के जॉब कार्ड या तो डिलीट कर दिए गए हैं या फिर उन पर नई योजनाएं नहीं खोली जा रही हैं।
  • ऑफलाइन अटेंडेंस: तकनीकी खामियों के कारण मजदूरों की हाजिरी नहीं लग रही, जिससे काम करने के बावजूद उन्हें मजदूरी नहीं मिल रही।
  • बकाया भुगतान: सालों से लंबित भुगतान अभी भी हवा में लटका हुआ है।

सरकारी फाइलों में ‘गोला-बारूद‘, धरातल पर सन्नाटा

दस्तावेजों (पत्रांक 388175, दिनांक 30.03.2026) से खुलासा हुआ है कि मजदूरों के आंदोलन की गूँज पटना तक पहुँच चुकी है। सरकार ने मामले की जाँच के लिए राज्य स्तरीय ‘जाँच दल’ तो गठित कर दिया है, लेकिन मजदूरों का सवाल है—जाँच तो होती रहेगी, पेट की भूख कैसे मिटेगी? जिला प्रशासन की ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR 2026) का कड़वा सच यह है कि मुशहरी, तरौरा गोपालपुर और नरौली जैसे इलाकों में ‘तकनीकी खामियों’ और ‘प्रोजेक्ट उपलब्ध न होने’ का बहाना बनाकर मजदूरों को काम से वंचित रखा गया है। कहीं ‘Scure’ (सॉफ्टवेयर) का रोना रोया जा रहा है, तो कहीं ‘शहरी क्षेत्र’ बताकर काम देने से मना किया जा रहा है। 15 वर्षों से चल रहे इस मनरेगा विभाग के खेल ने अब मजदूरों की कमर तोड़ दी है।

116 दिनों का ‘अंधेरा‘, और अब मंगलवार की निर्णायक घड़ी

‘मनरेगा वॉच’ के संजय सहनी के नेतृत्व में हो रहे इस धरने में रोज 100 से ज्यादा मजदूर अपनी पूरी ताकत के साथ डटे हैं। मनरेगा के तहत नए निबंधन, पुराने जॉब कार्ड को सक्रिय करने और लंबित भुगतान की मांग केवल कागजों पर नहीं, बल्कि सड़कों पर दम तोड़ रही है।

प्रशासन पर सवाल     

संजय सहनी कहते हैं, “116 दिन हो गए, लेकिन सरकार की आंखें तब भी नहीं खुलीं। क्या सरकार नहीं चाहती कि गरीब का चूल्हा जले? हम कोई भीख नहीं मांग रहे, हम अपना कानूनी अधिकार मांग रहे हैं।”

अब सबकी निगाहें मंगलवार को पटना में होने वाली इस बैठक पर टिकी हैं। क्या सरकार मजदूरों के इस 116 दिनों के लंबे संयम और संघर्ष का सम्मान करेगी? या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और विकराल रूप लेगा? मुजफ्फरपुर की जनता से लेकर सरकार तक, सबकी नजरें कल के नतीजों पर हैं।


“आर-पार का अल्टीमेटम”: मुजफ्फरपुर में गैस आपूर्ति के दोहरे मापदंड के खिलाफ पार्षद का प्रशासन को ‘फिजिकल नोटिस’, 30 अप्रैल से होगा आमरण अनशन!

मुजफ्फरपुर, बिहार। नगर पंचायत मुरौल में गैस आपूर्ति को लेकर व्याप्त विसंगतियों और स्थानीय निवासियों के शोषण के खिलाफ अब मामला गंभीर हो गया है। ईमेल के जरिए पूर्व में दी गई सूचना के बाद, आज 27 अप्रैल को वार्ड संख्या 03 के पार्षद आनंद कंद साह ने खुद कमान संभालते हुए जिला प्रशासन को ‘अंतिम नोटिस’ सौंप दिया है। पार्षद ने मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी , जिला चिकित्सा पदाधिकारी और जिला आपूर्ति पदाधिकारी के कार्यालय पहुंचकर विधिवत रूप से आवेदन सौंपा है, जिससे प्रशासन के गलियारों में हलचल मच गई है।

मुजफ्फरपुर: जिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन सौंपने के बाद मीडिया से मुखातिब होते वार्ड पार्षद आनंद कंद साह। गैस आपूर्ति में हो रहे भेदभाव को लेकर उन्होंने प्रशासन को 30 अप्रैल के आमरण अनशन का अल्टीमेटम दिया है।

प्रशासन के सामने रखी मांग, अब समाधान का इंतजार

दस्तावेजों के साथ दफ्तर पहुंचे आनंद कंद साह ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह लड़ाई अब और नहीं टलेगी। उन्होंने कहा, “हमने ईमेल के माध्यम से पहले ही सूचना दे दी थी, लेकिन आज हमने भौतिक रूप से जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों को आवेदन सौंप दिया है। यह हमारी आखिरी चेतावनी है। अगर 30 तारीख तक गैस कंपनियों का डेटाबेस सुधारकर हमें 25 दिनों में गैस रिफिल की सुविधा नहीं दी गई, तो हम आमरण अनशन पर बैठने के लिए मजबूर होंगे।”

मीडिया के सामने पार्षद का तीखा बयान

कार्यालय से बाहर निकलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए आनंद कंद साह ने कहा:

“हमसे सेवा के नाम पर ‘शहरी शुल्क‘ वसूला जा रहा है, होल्डिंग टैक्स से लेकर बिजली बिल (DS-2) तक हम शहरी दर पर दे रहे हैं, लेकिन सुविधा हमें ग्रामीण स्तर की मिल रही है। 45 दिन का रिफिल चक्र हमारी माताओं-बहनों के लिए अभिशाप है। उन्हें लकड़ी बीनने को मजबूर किया जा रहा है। हमारी मांग एक सूत्रीय है—मुरौल को शहरी क्षेत्र का दर्जा मिल चुका है, तो हमें 25 दिन पर गैस रिफिल चाहिए और यह हमें मिलकर रहेगा।”

पार्षद ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अनशन में सिर्फ वे अकेले नहीं हैं, बल्कि नगर पंचायत मुरौल के तमाम ग्रामीण और नागरिक उनके साथ खड़े हैं। 30 अप्रैल, सुबह 11:30 बजे से जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर होने वाला यह प्रदर्शन अब मुजफ्फरपुर में चर्चा का विषय बन गया है।

शिक्षा का दीप जला, गरीबी का अंधेरा मिटा: सरायरंजन की मुसहर टोली में बच्चों के भविष्य को मिली नई उड़ान

सरायरंजन (समस्तीपुर) | 26 अप्रैल 2026 |  सरायरंजन प्रखंड के वार्ड संख्या 21, रविदास टोला में शिक्षा की एक ऐसी मशाल जली है, जो आने वाले समय में बाल श्रम और बाल विवाह के अंधेरे को पूरी तरह मिटाने का दम रखती है। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, अख्तियारपुर और ‘क्राई’  के संयुक्त प्रयासों से यहाँ एक सामुदायिक शिक्षा केंद्र का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र उन गरीब बच्चों के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनकर आया है, जो संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित रह जाते थे।

ज्ञान की ज्योति: सरायरंजन के रविदास टोला में सामुदायिक शिक्षा केंद्र के उद्घाटन अवसर पर दीप प्रज्वलित करते हुए वार्ड पार्षद सविता कुमारी, संस्था के पदाधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति।

दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत उद्घाटन समारोह का आयोजन अत्यंत भव्य रहा। वार्ड पार्षद सविता कुमारी, विद्यालय शिक्षा समिति की सचिव मुन्नी देवी, आंगनबाड़ी सेविका रिंकू कुमारी और जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर और फीता काटकर केंद्र का शुभारंभ किया।

शिक्षा ही गरीबी का काल: वार्ड पार्षद समारोह की मुख्य अतिथि वार्ड पार्षद सविता कुमारी ने कहा, “शिक्षा ही वह अनमोल रत्न है जो समाज में बराबरी लाती है। यह केंद्र न केवल बच्चों को पढ़ाएगा, बल्कि समाज से छुआ-छूत, गरीबी, बाल श्रम और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने में एक ढाल का काम करेगा।” उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को इस नि:शुल्क केंद्र में जरूर भेजें।

संस्था के सिनियर रिसर्च कंसल्टेंट बलराम चौरसिया और ललिता कुमारी ने शिक्षा की बढ़ती लागत पर चिंता जताते हुए कहा कि आज साधारण ट्यूशन फीस भी गरीब परिवारों के लिए पहाड़ जैसी है। इसी समस्या को देखते हुए संस्था सरायरंजन के कई महादलित टोलों में नि:शुल्क शिक्षा और पठन-पाठन सामग्री उपलब्ध करा रही है। इस उद्घाटन समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पहलू सामुदायिक शिक्षक संदीप कुमार सादा रहे। संदीप ने बताया कि वे स्वयं जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सहयोग से पढ़-लिखकर आज मैट्रिक-इंटर उत्तीर्ण कर पाए हैं। संस्था के कार्यों से प्रेरित होकर वे अब अपने ही समुदाय के 50 से अधिक गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ा रहे हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष गौरीशंकर चौरसिया ने की। इस अवसर पर नेहा कुमारी, दिव्या कुमारी, सुनील कुमार, आदर्श कुमार समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और जीविका दीदीयां मौजूद रहीं।


मानेसर जेल में कैद समस्तीपुर का ‘मजदूर बेटा’, रिहाई के बाद होगा ‘सम्मान’: भूख से बिलखते परिवार के आंसू पोंछने पहुंची माले टीम

समस्तीपुर, 26 अप्रैल 2026 , हरियाणा के मानेसर में ‘हक की आवाज’ उठाने की सजा समस्तीपुर के एक गरीब मजदूर को सलाखों के पीछे जाकर चुकानी पड़ी है। मानेसर के चर्चित मजदूर आंदोलन में समस्तीपुर नगर निगम क्षेत्र के मोहनपुर वार्ड-39 के निवासी मो० शाहीद (23 वर्ष) की गिरफ्तारी ने न केवल उनके परिवार को सड़क पर ला दिया है, बल्कि पूरे इलाके में आक्रोश है। बेटे की गिरफ्तारी के बाद घर में पसरे सन्नाटे और चूल्हा न जलने की मजबूरी को देखते हुए अब खेग्रामस-माले की टीम ने मोर्चा संभाल लिया है।

तस्वीर : समस्तीपुर के मोहनपुर स्थित अपने घर पर जेल में बंद बेटे मो० शाहीद की राह तकती मां रिजवाना खातुन और परिवार के अन्य सदस्य, नीचे  दायें लाल घेरे में शाहीद ।

अन्याय के खिलाफ आवाज बनी ‘गुनाह‘ खेग्रामस जिला सचिव जीबछ पासवान के नेतृत्व में भाकपा माले की टीम जब मोहनपुर स्थित पीड़ित मजदूर के घर पहुंची, तो वहां का मंजर दिल दहला देने वाला था। स्थानीय लोगों ने टीम को बताया कि शाहीद किसी आपराधिक गतिविधियों में शामिल नहीं है, बल्कि वह तो अपनी बड़ी बहन की शादी और परिवार का आशियाना बनाने के सपने लेकर मानेसर गया था। वहां वह स्पोर्ट्स कंपनी में सिलाई का काम करता था। कंपनी में 12 घंटे जबरन ओवरटाइम और तय मजदूरी से कम पैसे देने के खिलाफ जब उसने अन्य मजदूरों के साथ मिलकर आवाज उठाई, तो सरकारी शह पर पुलिस ने उसे जेल की कालकोठरी में डाल दिया।

बेटे के इंतजार में बिलखती मां शाहीद की गिरफ्तारी से घर में दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बूढ़ी मां रिजवाना खातुन और पिता मो० यूसुफ का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार का इकलौता सहारा जेल में है, जिससे पूरे घर के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। खेग्रामस जिला अध्यक्ष उपेंद्र राय ने कहा कि शाहीद जैसे मेहनतकश युवाओं का जेल में होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

रिहाई के बाद होगा सम्मान, कानूनी लड़ाई जारी खेग्रामस-माले की टीम ने शाहीद के परिजनों को भरोसा दिलाया है कि वे दिल्ली और गुरुग्राम स्थित खेग्रामस-माले-ऐक्टू की टीम के साथ मिलकर हरसंभव कानूनी और आर्थिक मदद पहुंचाएंगे। टीम ने घोषणा की है कि जिस दिन शाहीद जेल से रिहा होकर समस्तीपुर लौटेगा, उसे एक ‘मजदूर योद्धा’ की तरह सम्मानित किया जाएगा। माले ने जिला प्रशासन और तमाम राजनीतिक दलों से इस संकट की घड़ी में पीड़ित परिवार को मदद करने की अपील की है।


मिशन ‘सृजन’: सकरा में कांग्रेस का बड़ा दांव, चुनावी बिगुल फूंकते हुए उमेश राम ने भरी हुंकार—”देश बचाना है तो कांग्रेस को लाना है”


सकरा (मुजफ्फरपुर): सकरा विधानसभा क्षेत्र की सियासत में हलचल तेज हो गई है। सकरा प्रखंड कांग्रेस कमिटी ने अब जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी तरह कमर कस ली है। इसी कड़ी में ‘कांग्रेस आश्रम’ में ‘सृजन साथी‘ सदस्यता अभियान की जोरदार शुरुआत की गई, जिसने आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गरम कर दी हैं।

“सकरा में कांग्रेस की नई रणनीति: जन-जुड़ाव के साथ वादों की भी तैयारी।“

चुनावी बिगुल और उमेश राम की अपील कार्यक्रम में पहुंचे अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के सदस्य और सकरा (सु०) विधानसभा से कांग्रेस महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी, उमेश कुमार राम ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरा। उन्होंने मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए सीधा और आक्रामक संदेश दिया। उन्होंने कहा, “देश को बचाना है तो कांग्रेस को लाना है।” उनकी इस हुंकार ने कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों में नई ऊर्जा का संचार किया।

‘सृजन साथी‘ अभियान से बढ़ेगा कुनबा सकरा प्रखंड कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में दर्जनों नए सदस्यों को पार्टी से जोड़ा गया। ‘सृजन साथी’ अभियान के तहत कांग्रेस ने अब बूथ स्तर पर अपनी ताकत को विस्तार देने की रणनीति बनाई है। कार्यक्रम स्थल पर लगे पोस्टरों में सरकार की योजनाओं और आर्थिक सहयोग के वादों का जिक्र भी साफ तौर पर देखा गया, जो सीधे जनता से जुड़ाव की कोशिश है।

ये रहे प्रमुख रूप से उपस्थित: इस राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के दौरान कई दिग्गज नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  • डा० मनीष यादव
  • सरोज कुमार उर्फ हरी यादव
  • मो० हैदर रजक
  • मो० सुल्तान
  • रामभरोस साह
  • जमीला खारुन
  • लीला देवी
  • मो० अरफात अली उर्फ चांद
  • शीला देवी
  • मो० जसीम
  • मो० जावेद
  • सत्यनारायण प्रसाद सहित अन्य कार्यकर्ता।

सियासी मायना: जानकारों का मानना है कि ‘सृजन साथी’ अभियान के माध्यम से कांग्रेस सकरा विधानसभा क्षेत्र में अपनी पुरानी साख को फिर से जीवंत करने की कोशिश में है। आने वाले समय में यह सदस्यता अभियान कितना असरदार साबित होगा, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि कांग्रेस ने अब आर-पार की लड़ाई के संकेत दे दिए हैं।


ब्रेकिंग: बिहार के नवगठित नगर निकायों में गैस संकट पर आर-पार की लड़ाई! पार्षद आनंद कंद साह ने छेड़ा ‘अधिकार का महासंग्राम’

शहरी टैक्स, ग्रामीण सुविधा: आखिर कब तक चलेगी ये दोहरी नीति?

मुजफ्फरपुर: बिहार के नवगठित नगर निकायों में व्याप्त प्रशासनिक उदासीनता और जनता के साथ हो रहे घोर भेदभाव के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई का शंखनाद हो चुका है। मुरौल नगर पंचायत के वार्ड संख्या-03 के पार्षद आनंद कंद साह ने 30 अप्रैल 2026 से जिलाधिकारी कार्यालय, मुजफ्फरपुर के समक्ष ‘आमरण अनशन’ पर बैठने का अंतिम अल्टीमेटम जारी कर दिया है। यह अनशन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की बहाली के लिए जनता के आक्रोश का ज्वलंत प्रतीक है।

जिलाधिकारी कार्यालय, मुजफ्फरपुर के समक्ष ‘आमरण अनशन’ की प्रतीकात्‍मक तैयारी (दायें) एवं जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर को ‘आमरण अनशन’ की सूचनात्‍मक प्रति (बायें से ) ।

यह लड़ाई सिर्फ मुरौल की नहीं, पूरे बिहार के नवगठित निकायों की है

पार्षद आनंद कंद साह का यह संघर्ष अब केवल मुरौल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बिहार के उन तमाम नवगठित नगर निकायों के लिए एक महासंग्राम बन चुका है, जहाँ शासन का तंत्र ‘दोहरी नीति’ का खेल,खेल रहा है। इस दायरे में मुरौल के साथ-साथ  सकरा, कांटी, बरूराज, मोतीपुर, साहेबगंज, ताजपुर और सरायरंजन जैसे क्षेत्र भी प्रमुखता से शामिल हैं। इन इलाकों को नगर पंचायत या नगर परिषद का दर्जा तो दे दिया गया है, लेकिन गैस आपूर्ति के मामले में इन्हें आज भी ग्रामीण क्षेत्र के ’45-दिवसीय चक्र’ की बेड़ियों में जकड़ रखा है। जबकि, नियमानुसार शहरी निकायों में उपभोक्ताओं को 25 दिन में गैस रिफिलिंग की सुविधा मिलनी चाहिए।

जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर को प्रेषित पत्र में क्‍या कहा है पार्षद आनन्‍द कंद ने जाने क्या है पूरा मामला?

‘सॉफ्टवेयर डेटाबेस’ के नाम पर जनता के अधिकारों का खुला हनन हो रहा है। प्रशासन का तर्क और प्रणाली इन क्षेत्रों को शहरी मानने को तैयार नहीं है, जबकि हकीकत यह है कि इन इलाकों के निवासियों से होल्डिंग टैक्स, बिजली बिल और जमीन की रजिस्ट्री (MVR) जैसे सभी सरकारी शुल्क ‘शहरी दरों’ पर वसूले जा रहे हैं। जनता टैक्स तो शहरी भर रही है, लेकिन सुविधा उन्हें ग्रामीण स्तर की भी ठीक से नहीं मिल रही। पार्षद आनंद कंद साह ने इसे ‘डेटाबेस घोटाला’ और ‘जनता के साथ विश्वासघात’ करार दिया है।

बड़े संवैधानिक संस्थानों के निर्देशों की सरेआम धज्जियाँ

यह प्रशासनिक सुस्ती नहीं, बल्कि ‘संवैधानिक अवहेलना’ है। बिहार सरकार की गजट अधिसूचना (संख्या 1037, दिनांक 03.03.2021) के तहत इन क्षेत्रों को नगर निकाय का दर्जा मिले 5 साल बीत चुके हैं। राष्ट्रपति सचिवालय, प्रधानमंत्री कार्यालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और मुख्य सचिव तक के निर्देश मिलने के बावजूद धरातल पर सुधार न होना, यह सिद्ध करता है कि विभाग उच्च संवैधानिक संस्थाओं को भी गंभीरता से नहीं ले रहा है।

कौन हैं आनंद कंद साह?

नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या-03 के पार्षद आनंद कंद साह केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता की प्रखर आवाज बनकर उभरे हैं। वे पिछले कई महीनों से लगातार स्थानीय समस्याओं, प्रशासनिक भ्रष्टाचार और जन-अधिकारों के लिए जमीनी स्तर पर संघर्षरत हैं। उनका यह अनशन महज एक विरोध नहीं है, बल्कि अपनी कर्तव्यनिष्ठा और नगर पंचायत मुरौल की जनता के प्रति अपनी गहरी जवाबदेही का प्रतीक है।

प्रशासन को सीधी चेतावनी: तीन दिन का अल्टीमेटम

पार्षद आनंद कंद साह ने शासन और प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है, “अब निर्णय आपके हाथों में है।” उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यदि आगामी तीन कार्यदिवसों के भीतर तेल कंपनियों के डेटाबेस में सुधार कर 25-दिवसीय शहरी रिफिल चक्र लागू नहीं किया गया, तो 30 अप्रैल की सुबह 11:30 बजे से वे आमरण अनशन शुरू कर देंगे। अनशन के दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की पूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित तेल कंपनियों की होगी।

किन अधिकारियों को दी गई सूचना?

पार्षद आनंद कंद साह ने इस आंदोलन की विधिवत सूचना और कार्रवाई हेतु मांग पत्र निम्नलिखित उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया है:

  1. सचिव, राष्ट्रपति सचिवालय, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली।
  2. प्रधानमंत्री कार्यालय, नई दिल्ली।
  3. अध्यक्ष, राष्ट्रीय/राज्य मानवाधिकार आयोग।
  4. सचिव, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।
  5. मुख्य सचिव, बिहार सरकार, पटना।
  6. वरीय आरक्षी अधीक्षक, मुजफ्फरपुर।
  7. असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर।
  8. क्षेत्रीय प्रबंधक, संबंधित तेल कंपनी।

अब देखना यह है कि क्या प्रशासन का कुंभकरण जागता है या फिर इन नवगठित निकायों की लाखों जनता को अपने मूलभूत अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ेगा।

जिलाधिकारी मुजफ्फरपुर को दिए गये ‘आमरण अनशन’ की सूचनात्‍मक प्रति

पटना में छेड़खानी की तो खैर नहीं! छात्राओं की मदद को सड़कों पर उतरा ‘शक्ति सुरक्षा दल’, कॉल करते ही दौड़ेगी खाकी

कोचिंग सेंटरों और स्कूल-कॉलेजों के बाहर अब पुलिस की सीधी निगरानी; छात्राओं की हर समस्या पर ‘ऑन-द-स्पॉट‘ होगी कार्रवाई

विशेष संवाददाता, पटना

पटना की सड़कों पर अब मनचलों की मनमानी नहीं चलेगी। छात्राओं, युवतियों और महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के संकल्प के साथ, वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) पटना के मार्गदर्शन और नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) के नेतृत्व में ‘शक्ति सुरक्षा दल‘ ने मोर्चा संभाल लिया है। अब कोचिंग सेंटरों, स्कूल-कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस की सीधी नजर है। छेड़खानी की एक कॉल और पुलिस की टीम मौके पर हाजिर होगी।

सार्वजनिक स्थलों पर पुलिस(‘शक्ति सुरक्षा दल’) की सीधी नजर , जानकारी देती  सुश्री  दीक्षा नगर पुलिस अधीक्षक पटना (मध्य)

सीधा संवाद, त्वरित समाधान

यह टीम केवल शिकायतों का इंतजार नहीं करती, बल्कि खुद शिक्षण संस्थानों तक पहुँचकर छात्राओं से सीधा संवाद स्थापित कर रही है। उनका उद्देश्य एक ऐसा सुरक्षा चक्र तैयार करना है जहाँ महिलाएं बिना किसी डर के अपनी समस्याएं साझा कर सकें। इस टीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि शिकायत मिलते ही पुलिस ‘ऑन-द-स्पॉट’ (घटनास्थल पर ही) कार्रवाई को प्राथमिकता देती है, ताकि पीड़िता को थाने के चक्कर न काटने पड़ें।

हालिया घटनाओं से मिली सीख, टीम हुई और आक्रामक

शक्ति सुरक्षा दल की सक्रियता का असर पिछले कुछ दिनों में साफ देखा गया है:

  • इस्कॉन मंदिर के पास: फिजिक्स वाला कोचिंग सेंटर के पास छात्राओं ने कॉल कर बताया था कि लड़कों का एक समूह उन्हें लगातार परेशान कर रहा है। शक्ति सुरक्षा दल ने न केवल उन लड़कों को चिह्नित किया, बल्कि उन्हें सख्त चेतावनी देकर सुधारा। बाद में छात्राओं से पुष्टि करने पर पाया गया कि अब वे पूरी तरह सुरक्षित हैं।
  • रवींद्र बालिका विद्यालय एवं NIFT: कदमकुआं स्थित रवींद्र बालिका विद्यालय और NIFT के बाहर भी छेड़खानी की शिकायतें मिलने पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। कदमकुआं के मामले में तो एक विक्षिप्त व्यक्ति द्वारा छात्राओं को डराने की सूचना पर टीम तुरंत वहां पहुंची और स्थिति को संभाला।

पहचान रहेगी पूरी तरह गोपनीय

नगर पुलिस अधीक्षक (मध्य) पटना, सुश्री दिक्षा ने इस पहल के बारे में स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और गोपनीयता पुलिस की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “हेल्पलाइन नंबरों पर केवल महिला पुलिस अधिकारी ही कॉल उठाएंगी, ताकि लड़कियां बिना किसी संकोच के अपनी बात रख सकें। उनकी पहचान पूरी तरह से गुप्त रखी जाएगी। यदि मामला गंभीर हुआ, तो स्थानीय थाने के सहयोग से सख्त कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।”

तुरंत करें संपर्क, पटना पुलिस है साथ

पटना पुलिस ने सभी छात्राओं और महिलाओं से अपील की है कि वे किसी भी अवांछित गतिविधि को नजरअंदाज न करें। यदि कोई उन्हें परेशान कर रहा है, तो सीधे नीचे दिए गए नंबरों पर कॉल या व्हाट्सएप करें:

टीम का नामसंपर्क नंबर
शक्ति सुरक्षा दल – 01 (गांधी मैदान पूर्व)9296598170
शक्ति सुरक्षा दल – 02 (गांधी मैदान पश्चिम)9296580210

नोट: यद्यपि क्षेत्रों का बंटवारा किया गया है, लेकिन आप अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी नंबर पर कॉल कर तुरंत सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

अंतिम 72 घंटे: अगर वोटर लिस्ट में नाम नहीं, तो नहीं चुन पाएंगे अपना पार्षद; जानिए सुधार का पूरा तरीका

पटना। बिहार राज्य निर्वाचन आयोग ने नगरपालिका आम और उप-निर्वाचन 2026 के लिए प्रारूप मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) सार्वजनिक कर दी है। आयोग ने मतदाताओं को सचेत किया है कि यदि सूची में कोई गड़बड़ी है या नाम गायब है, तो उसे ठीक कराने के लिए अब आपके पास केवल 3 दिन (28 अप्रैल तक) का समय बचा है।

लापरवाही पड़ सकती है भारी

अक्सर देखा जाता है कि मतदाता सीधे पोलिंग बूथ पर पहुंचते हैं और वहां नाम न होने पर मायूस होकर लौट जाते हैं। आयोग का कहना है कि मतदाता सूची का प्रकाशन इसीलिए पहले किया गया है ताकि नागरिक अपनी प्रविष्टियों की जांच कर सकें। यदि आपकी आयु 18 वर्ष पूरी हो चुकी है, या आपके वार्ड/मकान संख्या में कोई त्रुटि है, तो आप ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से दावा/आपत्ति (Claim/Objection) दर्ज कर सकते हैं। 28 अप्रैल के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार करना संभव नहीं होगा।

इन क्षेत्रों में होने हैं उपचुनाव

बिहार के विभिन्न जिलों में खाली पड़े पदों के लिए यह चुनाव प्रक्रिया चल रही है। मुख्य रूप से पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और आरा जैसे बड़े नगर निगमों के रिक्त वार्डों के साथ-साथ राज्य की विभिन्न नगर परिषदों और नगर पंचायतों में जहां पार्षदों या मुख्य पार्षदों के पद किसी कारणवश (त्यागपत्र, मृत्यु या अयोग्यता) खाली हुए हैं, वहां उप-निर्वाचन कराए जा रहे हैं। इसके अलावा नई गठित नगर पालिकाओं में आम चुनाव की तैयारी भी इसी मतदाता सूची के आधार पर की जा रही है।

आम चुनाव मुख्य रूप से नवगठित और उत्क्रमित निकायों में हो रहे हैं, जिनमें नगर परिषद फुलवारी शरीफ, दानापुर निजामत, खगौल (पटना), सोनपुर (सारण) और नगर पंचायत मदनपुर, जम्हौर (औरंगाबाद), महाराजगंज (सिवान) एवं मधुबन (पूर्वी चम्पारण) शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, राज्य के विभिन्न नगर निकायों में रिक्त हुए पदों को भरने के लिए उपचुनाव भी कराए जा रहे हैं। इनमें नगर पंचायत नौबतपुर (पटना), नगर परिषद डुमराव (बक्सर), रक्सौल (पूर्वी चम्पारण), नगर पंचायत बिरौल (दरभंगा) और अलौली (खगड़िया) समेत करीब 26 अन्य निकायों के विभिन्न वार्डों में मतदान होना है। इन क्षेत्रों के निवासियों के लिए मतदाता सूची में नाम चेक करना अनिवार्य है।


चेक करने के 5 आसान स्टेप्स

1 वेबसाइट एक्सेस करें

आधिकारिक पोर्टल                      

1.वेबसाइट एक्सेस करें:आधिकारिक पोर्टल.

अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर www.sec.bihar.gov.in टाइप करें। होमपेज पर दाहिनी ओर ऊपर ‘तीन लाइन’ वाले मेनू बटन पर क्लिक करें।

2 इलेक्शन टैब चुनें, सही साल का चयन,

2.इलेक्शन टैब चुनें:सही साल का चयन.मेनू में ‘नगरपालिका आम/उप निर्वाचन 2022/2023/2025/2026’ के विकल्प पर जाएं और वहां ‘मतदाता सूची से संबंधित‘ लिंक को चुनें।

3 प्रारूप प्रकाशन 2026, सूची का लिंक

3.प्रारूप प्रकाशन 2026:सूची का लिंक.अगले पेज पर ‘मतदाता सूची का प्रकाशन 2026′ वाले लिंक पर क्लिक करें। आप सीधे अपने EPIC नंबर (वोटर कार्ड नंबर) से भी नाम खोज सकते हैं।

4 क्षेत्रीय विवरण भरें, फिल्टर प्रक्रिया

4.क्षेत्रीय विवरण भरें:फिल्टर प्रक्रिया.ड्रॉप-डाउन मेनू से अपना जिला, अनुमंडल और संबंधित नगरपालिका का नाम चुनें। इसके बाद ‘SHOW’ बटन पर क्लिक करें।

5 वार्ड वार सूची, अंतिम जांच

5.वार्ड वार सूची:अंतिम जांच.अब आपके सामने वार्डों की सूची आ जाएगी। अपने वार्ड के सामने दिए गए लिंक पर क्लिक करें और पीडीएफ में अपना नाम, पिता का नाम और फोटो की शुद्धता जांच लें।

चूंकि आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि 28 अप्रैल 2026 है, इसलिए यदि आपको कोई त्रुटि दिखती है, तो तुरंत नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:


ऑनलाइन दावा/आपत्ति (Claim/Objection) दर्ज करने की प्रक्रिया

आप सीधे राज्य निर्वाचन आयोग की समर्पित वेबसाइट के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं:

  1. वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले sec.bihar.gov.in पर जाएं।
  2. दावा-आपत्ति पोर्टल खोजें: होमपेज पर या ‘मतदाता कॉर्नर’ (Voter Corner) सेक्शन में ‘Electoral-Roll Claim & Objection 2026’ (निर्वाचक सूची दावा आपत्ति 2026) लिंक पर क्लिक करें।
  3. ऑनलाइन आवेदन चुनें: पोर्टल पर आपको ‘Online Apply’ का विकल्प मिलेगा। उस पर क्लिक करते ही एक नया फॉर्म खुल जाएगा।
  4. विवरण भरें: फॉर्म में अपना नाम, पता, वार्ड संख्या, जिला और जिस सुधार की आवश्यकता है (जैसे- नया नाम जोड़ने हेतु, नाम हटाने हेतु या त्रुटि सुधार हेतु) उसका चयन करें।
  5. दस्तावेज अपलोड करें: सुधार के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज (जैसे- आधार कार्ड, वोटर आईडी, या निवास प्रमाण पत्र) स्कैन करके अपलोड करें।
  6. सबमिट करें: सभी जानकारी भरने के बाद फॉर्म को सबमिट करें और प्राप्त ‘रसीद/एप्लिकेशन नंबर’ को भविष्य के संदर्भ के लिए सुरक्षित रख लें।

ऑफ़लाइन (Offline) प्रक्रिया

यदि आप तकनीकी रूप से ऑनलाइन आवेदन करने में सहज नहीं हैं, तो आप पारंपरिक तरीके से भी आवेदन कर सकते हैं:

  1. फॉर्म डाउनलोड करें: वेबसाइट पर ‘Offline Download’ या ‘नगरपालिका निर्वाचन प्रपत्र’ वाले सेक्शन से संबंधित प्रपत्र (Form) डाउनलोड करें।
    • नाम जोड़ने के लिए: प्रपत्र-1 (Form-1)
    • नाम पर आपत्ति/हटाने के लिए: प्रपत्र-2 (Form-2)
  2. फॉर्म भरें: प्रपत्र को साफ-साफ अक्षरों में भरें और अपने नजदीकी संबंधित निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO/ARO) या जिला निर्वाचन कार्यालय (नगरपालिका) में जमा करें।
  3. पावती (Receipt) लें: फॉर्म जमा करते समय संबंधित कार्यालय से पावती अवश्य प्राप्त करें।

विशेष सुझाव: > * अंतिम समय की प्रतीक्षा न करें: 28 अप्रैल बहुत करीब है, सर्वर पर दबाव हो सकता है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

  • दस्तावेज तैयार रखें: आधार कार्ड या पहचान पत्र की फोटोकॉपी/स्कैन कॉपी हमेशा साथ रखें, इसकी जरूरत हर चरण में पड़ेगी।
  • हेल्पलाइन: यदि वेबसाइट खोलने या फॉर्म भरने में कोई तकनीकी समस्या आती है, तो बिना संकोच के आयोग के टोल फ्री नंबर 1800 3457 243 पर कॉल करें।

विशेष नोट: यदि सूची में आपका नाम नहीं है, तो तुरंत अपने प्रखंड (Block) कार्यालय या संबंधित नगर निकाय के कार्यालय में जाकर फॉर्म भरें या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आपत्ति दर्ज करें। आपकी एक छोटी सी जागरूकता आपके मताधिकार की रक्षा करेगी।


“बिहार को बुलडोजर राज की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे”: भाकपा माले का सरकार के खिलाफ आर-पार का एलान

दरभंगा: बिहार की राजनीति में एक बड़े तूफान के संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। आगामी 16-18 मई, 2026 को दरभंगा के लहेरियासराय स्थित प्रेक्षागृह में आयोजित होने वाले भाकपा (माले) के 12वें राज्य सम्मेलन को लेकर पार्टी ने अपनी कमर कस ली है। शुक्रवार को हुई मिथिला जोन स्तरीय बैठक में पार्टी ने सिर्फ सम्मेलन की तैयारी ही नहीं की, बल्कि सरकार के खिलाफ “जन-आंदोलन” का शंखनाद भी कर दिया है।

दरभंगा के लहेरियासराय में आयोजित भाकपा माले की मिथिला जोन स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए राज्य सचिव का० कुणाल,  मंच पर उनके साथ मिथिलांचल प्रभारी का० धीरेंद्र झा, पोलिट ब्यूरो सदस्य का० अमर एवं अन्य पार्टी पदाधिकारी।

“भाजपा का असली चेहरा अब सामने है”

बैठक को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के राज्य सचिव का० कुणाल ने तीखे शब्दों में कहा कि, “विगत चुनाव के बाद से भाजपा अपने असली तेवर में आ गई है। बिहार की सत्ता अब सीधे उनके नियंत्रण में है और आते ही उन्होंने राज्य को ‘बुलडोजर राज की प्रयोगशाला’ में बदलने की साजिश शुरू कर दी है।”

पार्टी ने स्पष्ट किया कि अब बिहार में महिला उत्पीड़न, मॉब लिंचिंग, दलितों और गरीबों के घर उजाड़ने की घटनाएं आम हो चुकी हैं। यह सम्मेलन इन्हीं चुनौतियों के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई की शुरुआत है।

देश की विदेश नीति पर तीखा प्रहार

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सचिव ने मोदी सरकार की विदेश नीति को “दलाली” करार देते हुए कहा कि देश को संकट की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा देश कभी न्याय की आवाज बुलंद करता था, लेकिन आज मोदी सरकार अमेरिका और इजरायल के सामने घुटने टेक चुकी है। रूस से तेल खरीदने और न खरीदने के अमेरिकी आदेशों का पालन करना हमारी संप्रभुता पर चोट है। भाजपा के पूर्वज जो पहले अंग्रेजों की दलाली करते थे, आज वही दल सत्ता में आकर अमेरिकी गुलामी में लगा हुआ है।”

भाकपा माले की मिथिला जोन स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी पदाधिकारी एवं मंच के सामने कार्यकर्त्‍ता गण ।

“उल्टा पलायन” और मजदूरों का दर्द

भाकपा (माले) ने देश की अर्थव्यवस्था और बढ़ती महंगाई पर भी सरकार को घेरा। का० कुणाल ने चेतावनी दी कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण जो वैश्विक गैस और तेल संकट पैदा हुआ है, उसका सीधा असर बिहार के मजदूरों पर पड़ रहा है। लाखों मजदूर देश के विभिन्न कोनों से वापस अपने घरों की ओर लौट रहे हैं—जिसे पार्टी ने ‘उल्टा पलायन’ कहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और स्थिर मजदूरी ने मजदूरों का जीवन दूभर कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप नोएडा से लेकर लुधियाना तक मजदूरों के स्वतःस्फूर्त आंदोलन शुरू हो गए हैं।

मिथिलांचल में फिर से गूंजेगी वामपंथ की आवाज

इस सम्मेलन का एक बड़ा राजनीतिक संदेश उत्तर बिहार (दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर) के लिए है। मिथिलांचल प्रभारी का० धीरेंद्र झा और पोलिट ब्यूरो सदस्य का० अमर की मौजूदगी में पार्टी ने साफ किया कि मिथिलांचल और कोसी इलाका हमेशा से वाम आंदोलन का गढ़ रहा है। इस सम्मेलन के जरिए पार्टी अपनी पुरानी साख को फिर से हासिल करने और गरीबों के हक की लड़ाई को सड़क से सदन तक मजबूती से ले जाने की तैयारी में है।

पार्टी का केंद्रीय नारा है—“बिहार को भाजपाई बुलडोजर राज की प्रयोगशाला बनाने के खिलाफ व्यापक जनप्रतिरोध खड़ा करें।” आगामी 16 से 18 मई तक दरभंगा का पोलो मैदान इसी संकल्प के साथ एक बड़े जनांदोलन का केंद्र बनेगा।


ताजपुर को ‘शहर’ का टैक्स, पर सुविधाएं ‘गांव’ वाली! रसोई गैस के लिए हाहाकार, माले ने दी आंदोलन की चेतावनी

ताजपुर/समस्तीपुर : ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत ने आम जनता के घरों का चूल्हा ठंडा कर दिया है। शहर के उपभोक्ता पिछले काफी समय से इस दोहरी मार को झेल रहे हैं—जहाँ उनसे टैक्स की वसूली तो ‘शहर’ के हिसाब से की जा रही है, लेकिन उन्हें मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं ‘गांव’ के स्तर की भी नहीं हैं। इसी प्रशासनिक उपेक्षा और गैस एजेंसियों की मनमानी के खिलाफ भाकपा माले ने मोर्चा खोलते हुए जिलाधिकारी को अल्टीमेटम दिया है।

“इंतजार की इंतेहा: ताजपुर में रसोई गैस की भारी किल्लत के बीच एजेंसियां और उपभोक्ता आमने-सामने। जहां एक ओर गोदामों में गैस की उपलब्धता के दावे किए जाते हैं, वहीं आम जनता को 45 दिन की लंबी प्रतीक्षा सूची में धकेल दिया गया है।”

दोहरी मार: शहर का दर्जा, लेकिन गैस में ‘गांव‘ वाली देरी

ताजपुर के निवासियों के लिए यह स्थिति किसी दुस्वप्न से कम नहीं है। भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में इस विसंगति को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने बताया कि ताजपुर वर्ष 2021 से ही ‘नगर परिषद’ के रूप में अस्तित्व में है। सरकारी नियमों के मुताबिक, यहाँ होल्डिंग टैक्स, बिजली बिल और जमीन रजिस्ट्री जैसे सभी महत्वपूर्ण शुल्क शहरी दरों पर वसूले जा रहे हैं।

लेकिन, जब बात रसोई गैस आपूर्ति की आती है, तो गैस एजेंसियां खुद को प्रशासनिक भूल या अस्पष्टता की आड़ में बचा लेती हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के प्रावधानों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को 25 दिनों के भीतर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना अनिवार्य है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह सीमा 45 दिन है। ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र होने के बावजूद, यहां की गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं को 45 दिनों का इंतजार करवा रही हैं।

एजेंसियों का पल्ला झाड़ने वाला तर्क

जब इस देरी पर एजेंसी संचालकों से सवाल पूछा जाता है, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला होता है। उनका तर्क होता है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने ताजपुर को अभी तक अपनी आधिकारिक सूची में ‘शहरी क्षेत्र’ के रूप में अपडेट नहीं किया है। माले नेता ने इसे स्थानीय जनता के साथ सरासर अन्याय और प्रशासन की लापरवाही करार दिया है।

आम गृहणियों और परिवारों पर संकट

45 दिनों के लंबे इंतजार के कारण आम परिवारों का बजट पूरी तरह चरमरा गया है। एक सिलेंडर के भरोसे रहने वाले घरों में गैस खत्म होने पर उन्हें या तो महंगे दामों पर कालाबाजारी से गैस खरीदने को मजबूर होना पड़ता है, या फिर वैकल्पिक ईंधन के रूप में लकड़ी या कोयले पर निर्भर होना पड़ता है। विशेष रूप से कामकाजी महिलाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद कष्टकारी बनी हुई है।

माले का अल्टीमेटम: ‘सुधार नहीं, तो आंदोलन‘

भाकपा माले के प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी है कि अब इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने स्पष्ट कहा है:

“ताजपुर नगर परिषद से शहरी टैक्स तो वसूला जा रहा है, लेकिन सुविधा देने के वक्त उसे गांव बता दिया जाता है। यह प्रशासनिक विफलता है। प्रशासन तत्काल गैस एजेंसियों की जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि बुकिंग के अधिकतम 25 दिनों के भीतर हर उपभोक्ता को सिलेंडर मिल जाए। यदि जल्द ही इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो हम आम उपभोक्ताओं को साथ लेकर सड़कों पर उतरेंगे और उग्र जनांदोलन शुरू करेंगे।”

मुख्य मांगें:

  • 25-दिवसीय चक्र: गैस बुकिंग के 25 दिन के भीतर सिलेंडर की होम डिलीवरी सुनिश्चित हो।
  • स्थिति स्पष्ट करें: प्रशासन पेट्रोलियम मंत्रालय से समन्वय कर ताजपुर को शहरी क्षेत्र की सूची में शामिल कराए।
  • एजेंसियों की जांच: गैस एजेंसियों की मनमानी पर रोक लगाने के लिए नियमित निगरानी हो।

अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी कार्यालय पर टिकी हैं कि क्या इस विरोध के बाद प्रशासन गैस एजेंसियों पर नकेल कसता है या जनता को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ेगा।