Saturday, October 31, 2026

निगरानी का सेन्‍चुरी, साल 2026 का100 वां घूसखोर शिकंजा में  : 8 हजार रिश्वत लेते प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी गिरफ्तार !

10 सितंबर, 2026 पटना :  पटना जिले के नौबतपुर में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस अन्वेषण ब्यूरो) ने एक बड़ी  कार्रवाई की है। प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय परिसर, नौबतपुर से प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी विनोद कुमार राम को 8,000 (आठ हजार) रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई के साथ ही निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने साल 2026 में घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने वाले अभियुक्तों का ‘शतक‘ पूरा कर लिया है। गिरफ्तार अधिकारी विनोद कुमार राम वर्ष 2026 के 100वें अभियुक्त बने हैं जिन्हें निगरानी की टीम ने घूस की रकम के साथ रंगे हाथों दबोचा है।

रिपोर्ट भेजने के नाम पर मांगी थी रिश्वत

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, परिवादी कृष्णा शर्मा (पिता- अरुण कुमार दत्ता, निवासी- बेला, थाना- पिपलॉवा, जिला- पटना) ने ब्यूरो के पटना स्थित कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकान की माह अगस्त 2026 की रिपोर्ट बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने के एवज में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी विनोद कुमार राम द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है।

सत्यापन के बाद गठित हुआ धावा दल

शिकायत मिलने के पश्चात निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा मामले का गुप्त सत्यापन कराया गया। सत्यापन के क्रम में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी द्वारा रिश्वत मांगे जाने का आरोप सही पाया गया। प्राथमिक जांच में आरोप की पुष्टि होने के बाद निगरानी थाना में कांड संख्या 0-100/26 (दिनांक 20.08.2026) दर्ज किया गया।

इसके बाद अनुसंधानकर्ता और पुलिस निरीक्षक उदय कुमार सिंह के अनुरोध पर पुलिस पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) आदित्य राज के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया।

कार्यालय परिसर में रंगे हाथ दबोचा गया अधिकारी

योजना के अनुसार, जैसे ही परिवादी कृष्णा शर्मा रिश्वत की राशि 8,000 रुपये देने नौबतपुर के प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय पहुंचे और विनोद कुमार राम को पैसे थमाए, पहले से घात लगाकर बैठी निगरानी मुख्यालय की टीम ने धावा बोल दिया। अधिकारी को रिश्वत के रुपयों के साथ मौके से रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया।

कार्रवाई के तुरंत बाद आरोपी अधिकारी के पटना स्थित गृह और अन्य ठिकानों पर सघन तलाशी ली जा रही है। पूछताछ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभियुक्त को पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में पेश किया जाएगा।

साल 2026 में निगरानी का ‘शतक‘, कुल 107 प्राथमिकियां दर्ज

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना ने वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुस्तैदी का एक बड़ा रिकॉर्ड बनाया है:

  • कुल दर्ज केस: इस वर्ष अब तक भ्रष्टाचार के विरुद्ध कुल 107 प्राथमिकियां दर्ज की जा चुकी हैं।
  • रंगे हाथ गिरफ्तारी (ट्रैप): अब तक 100 अभियुक्तों को घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है।
  • कुल बरामदगी: 2026 में अब तक रिश्वत की कुल 36,66,800 रुपये (छत्तीस लाख छियासठ हजार आठ सौ रुपये) की नकद राशि तथा एक नई वाशिंग मशीन (कीमत 37,000 रुपये) बरामद की गई है।
  • गत वर्ष का आंकड़ा: तुलनात्मक रूप से पिछले वर्ष 2025 में कुल 101 ट्रैप कांड दर्ज किए गए थे और 37,80,300 रुपये बरामद हुए थे।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की अपील

“भ्रष्टाचार के खिलाफ ब्यूरो का अभियान जारी है। यदि कोई भी लोक सेवक (सरकारी अधिकारी या कर्मचारी) आपसे किसी काम के एवज में रिश्वत की मांग करता है, तो तुरंत नीचे दिए गए माध्यमों पर शिकायत दर्ज कराएं:”

  • लैंडलाइन नंबर: 0612-2215030, 0612-2215032, 0612-2215033, 0612-2215036, 0612-2215037, 0612-2999752
  • हेल्पलाइन नंबर: 0612-2215344
  • मोबाइल नंबर: 7765953261
  • व्हाट्सएप नंबर: 9473494167
  • ई-मेल: spvig-bih@nic.in
  • पता: निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, 6 सर्कुलर रोड, पटना

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घूसखोर अंचल अधिकारी गिरफ्तार: स्पेशल विजिलेंस यूनिट का बड़ा शिकार, 20 हजार रुपये रिश्वत लेते चान्दन सीओ रंगे हाथ दबोचे गए!

बांका / पटना: बिहार में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में एसवीयू की टीम ने बांका जिले के चान्दन अंचल में बड़ी कार्रवाई करते हुए अंचल अधिकारी (सीओ) रविकांत कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है। जमीन पर दखल कब्जा दिलाने के नाम पर कुल 2 लाख रुपये की घूस मांगी गई थी, जिसकी पहली किश्त लेते ही अधिकारी को दबोच लिया गया।

2 लाख रुपये की मांगी गई थी रिश्वत

विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) की टीम के घेरे में रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार चान्दन (बांका) के अंचल अधिकारी रविकांत कुमार (पीले शर्ट में)।

विशेष निगरानी इकाई के अपर पुलिस महानिदेशक सुधांशु कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि परिवादी सियाराम कुमार (पिता: वासुदेव यादव, निवासी: ग्राम-झाझा, टोला-मोरवे, पोस्ट-लोहारी, थाना-चान्दन, जिला-बांका) ने एसवीयू पटना में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, टाइटल सूट केस संख्या-2395/95 में पारित आदेश के आलोक में संबंधित जमीन पर दखल कब्जा दिलाने के एवज में अंचल अधिकारी रविकांत कुमार द्वारा 2,00,000 (दो लाख) रुपये रिश्वत की मांग की जा रही थी। इसके अलावा तत्काल काम आगे बढ़ाने के लिए 20 से 25 हजार रुपये की मांग की गई थी।

जांच में सही पाई गई शिकायत, रचा गया जाल

एसवीयू द्वारा जब शिकायत का गोपनीय सत्यापन कराया गया, तो अंचल अधिकारी रविकांत कुमार द्वारा शिकायतकर्ता सियाराम कुमार से रिश्वत मांगे जाने की बात पूरी तरह सच साबित हुई।

सत्यापन के बाद आरोपी रविकांत कुमार के विरुद्ध विशेष निगरानी इकाई थाना में कांड संख्या-24/2026, दिनांक-09.09.2026, धारा-7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

डीएसपी अरुण कुमार अकेला के नेतृत्व में रेड

प्राथमिकी दर्ज होने के तुरंत बाद विशेष निगरानी इकाई, पटना के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) अरुण कुमार अकेला के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल (रेडिंग टीम) का गठन किया गया।

योजना के तहत धावा दल ने चान्दन अंचल कार्यालय में दबिश दी और अंचल अधिकारी रविकांत कुमार को 20,00,00/— (बीस हजार) रुपये की रिश्वत राशि स्वीकार करते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी से आगे की पूछताछ कर रही है और कानूनी कार्रवाई जारी है।

भ्रष्टाचार की शिकायत के लिए एसवीयू का हेल्पलाइन नंबर:

विशेष निगरानी इकाई ने आम जनता से अपील की है कि रिश्वत मांगने से संबंधित किसी भी शिकायत के लिए कार्यालय अवधि में इन नंबरों पर संपर्क करें:

  • दूरभाष नंबर: 0612-2506253
  • मोबाइल नंबर: 9031633641

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मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे में हड़कंप: एसएसपी की गाज गिरी पारू और औराई थानाध्यक्ष पर, लापरवाही और स्वेच्छाचारिता के गंभीर आरोप में दोनों सस्पेंड!

मुजफ्फरपुर। जिला पुलिस महकमे से इस वक्त की बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, स्वेच्छाचारिता, मनमानेपन और वरीय अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने वाले दो थानाध्यक्षों पर वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय, मुजफ्फरपुर ने कड़ा रुख अपनाते हुए गाज गिराई है। वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पारू थानाध्यक्ष पुलिस अवर निरीक्षक आशुतोष कुमार शुक्ला तथा औराई थानाध्यक्ष पुलिस अवर निरीक्षक सुनील कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

सांकेतिक (प्रतीकात्‍मक) तस्‍वीर

केस 1: पारू थाना — कस्टडी से भागे अभियुक्त और बिना बताए संदिग्ध को छोड़ा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सरैया एवं अंचल पुलिस निरीक्षक पारू द्वारा पारू थानाध्यक्ष के विरुद्ध एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में खुलासा किया गया कि थानाध्यक्ष पारू द्वारा मध्यस्थता के बाद पूछताछ के लिए लाए गए एक व्यक्ति को वरीय अधिकारियों को बिना सूचित किए ही छोड़ दिया गया।

इतना ही नहीं, थानाध्यक्ष की घोर लापरवाही और अविवेकपूर्ण निर्णयों के कारण चुराई हुई संपत्ति, आर्म्स एक्ट तथा बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत पकड़े गए अभियुक्तों को उचित संरक्षण में नहीं रखा गया। इसका नतीजा यह हुआ कि महज 15 दिनों के भीतर 02 अभियुक्त पुलिस की हिरासत से भाग निकले। कर्तव्य में इतनी बड़ी लापरवाही, अनुशासनहीनता और वरीय अधिकारियों के आदेश की नाफरमानी के आरोप में पुलिस अवर निरीक्षक आशुतोष कुमार शुक्ला, थानाध्यक्ष पारू को तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन यापन भत्ता पर निलंबित कर दिया गया है।

केस 2: औराई थाना — लूट के मामले को छोटा करने और ई-साक्ष्य ऐप में लापरवाही का आरोप

दूसरा मामला औराई थाने से जुड़ा है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पूर्वी-1, मुजफ्फरपुर द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में औराई थानाध्यक्ष की कारगुजारियों का पर्दाफाश हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक थानाध्यक्ष औराई ने लापरवाही और मनमाने तरीके से काम करते हुए लूट की गंभीर वारदात का न्यूनीकरण (मामले को हल्का) कर दिया। उन्होंने इसे महज गृह अतिचार और गृहभेदन में मामला दर्ज कर वरीय अधिकारियों को गुमराह और दिग्भ्रमित करने का कुत्सित प्रयास किया।

इसके अलावा, अपराध अनुसंधान की अति-अनिवार्य प्रक्रिया जैसे कि ‘ई-साक्ष्य ऐप’ पर घटनास्थल का विवरण दर्ज करने, तलाशी, जब्ती की कार्रवाई और गवाहों के बयान दर्ज करने में भारी शिथिलता बरती गई। साथ ही निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप लंबित कांडों की समीक्षा भी नहीं की जा रही थी। कांडों को दबाने, स्वेच्छाचारिता, घोर लापरवाही और आदेशों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस अवर निरीक्षक सुनील कुमार, थानाध्यक्ष औराई को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर सामान्य जीवन यापन भत्ता पर भेज दिया गया है।

वरीय अधिकारियों की इस ताबड़तोड़ और सख्त कार्रवाई से साफ संदेश गया है कि खाकी में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार या स्वेच्छाचारिता को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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बिहार के मेधावी छात्रों पर हुई नोटों की बारिश! सम्राट चौधरी ने 168 टॉपर्स को बांटे लाखों के चेक और लैपटॉप, किया बड़ा एलान

पटना, 09 सितम्बर 2026: बिहार के मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए 09 सितम्बर का दिन ऐतिहासिक बन गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना स्थित लोक सेवक आवास के ‘नेक संवाद’ सभागार में आयोजित एक भव्य एवं गरिमामय समारोह में इंटरमीडिएट और मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2026 के कुल 168 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को मेडल, प्रशस्ति पत्र, लैपटॉप क्रय हेतु 51000 रुपये की अतिरिक्त राशि तथा सांकेतिक चेक प्रदान कर प्रोत्साहित किया।

पटना स्थित लोक सेवक आवास के ‘नेक संवाद’ सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में मेडल, प्रशस्ति पत्र और सांकेतिक चेक के साथ मुस्कुराते इंटरमीडिएट एवं मैट्रिक परीक्षा 2026 के टॉपर मेधावी छात्र-छात्राएं एवं उनके अभिभावक।

इनामों की बौछार: किसे कितना मिला?

सम्मान समारोह में टॉपर्स को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का विवरण इस प्रकार है:

  • प्रथम स्थान : 2 लाख रुपये + मेडल + प्रशस्ति पत्र + 51000 रुपये (लैपटॉप हेतु)
  • द्वितीय स्थान : 1.5 लाख रुपये + मेडल + प्रशस्ति पत्र + 51000 रुपये (लैपटॉप हेतु)
  • तृतीय स्थान : 1 लाख रुपये + मेडल + प्रशस्ति पत्र + 51000 रुपये (लैपटॉप हेतु)
  • इंटरमीडिएट में चतुर्थ एवं पंचम स्थान: 30 हजार रुपये + 51000 रुपये (लैपटॉप हेतु)
  • मैट्रिक में चतुर्थ से दशम स्थान: 20 हजार रुपये + 51000 रुपये (लैपटॉप हेतु)

(नोट: सभी सम्मानित 168 टॉपर्स को लैपटॉप खरीदने के लिए 51000 रुपये अलग से दिए गए हैं।)

विभिन्न संकायों के सम्मानित टॉपर्स के नाम

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों एवं कक्षाओं के शीर्ष मेधावियों को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया:

  • इंटरमीडिएट (विज्ञान संकाय – टॉप 3): आदित्य प्रकाश अमन, साक्षी कुमारी, सपना कुमारी।
  • इंटरमीडिएट (कला संकाय – टॉप 4): निशु कुमारी, सिद्धि शिखा, चंद्रदीप कुमार, मो० लक्की अंसारी।
  • इंटरमीडिएट (वाणिज्य संकाय – टॉप 2): अदिति कुमारी, माहि कुमारी।
  • इंटरमीडिएट (व्यावसायिक पाठ्यक्रम – टॉप 2): प्रियांशु राज, अनिका उपाध्याय।
  • वार्षिक माध्यमिक/मैट्रिक परीक्षा (टॉप 3): पुष्पांजलि कुमारी, साबरीन परवीन, नाहिद सुल्ताना।

अब रिजल्ट के 1 महीने के अंदर होगा टॉपर्स सम्मान समारोह: सम्राट चौधरी

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ी नीतिगत घोषणा की। उन्होंने कहा:

“जब मैं इस कार्यक्रम की समीक्षा कर रहा था, तब मुझे पता चला कि परीक्षा परिणाम आने के काफी महीनों बाद (नवंबर-दिसंबर में) टॉपर्स का सम्मान किया जाता है। मैंने तुरंत अधिकारियों को निर्देश दिया कि मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद होना चाहिए। अब अगले साल से टॉपर्स सम्मान समारोह परीक्षा परिणाम घोषित होने के ठीक 1 महीने के भीतर आयोजित किया जाएगा, ताकि छात्रों को सही समय पर प्रोत्साहन मिल सके।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बिहार का शैक्षिक इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। मगध की ऐतिहासिक धरती से बिक्रमशिला और नालंदा विश्वविद्यालय संचालित होते थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों से नालंदा विश्वविद्यालय को वर्ष 2024 में पुनः स्थापित किया गया है। वहीं बिक्रमशिला विश्वविद्यालय के लिए भी 15 जुलाई को 200 एकड़ भूमि आवंटित कर दी गई है।

700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों में कोचिंग और लाइव ट्यूटर की सुविधा

राज्य में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कोचिंग, लाइव क्लास और लाइव ट्यूटर की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, पूर्ववर्ती छात्रों को भी अपने विद्यालयों से जुड़कर योगदान देने के लिए आमंत्रित किया गया है।

छात्रों की समस्याओं और सुझावों के त्वरित समाधान के लिए ‘सहयोग पोर्टल‘ भी शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से विद्यार्थी विकसित बिहार के निर्माण हेतु अपने सुझाव सीधे साझा कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी मेधावी छात्र को मेडल, प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि का चेक प्रदान कर सम्मानित करते हुए।

“नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें युवा”

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत‘ और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘समृद्ध बिहार‘ के संकल्प को पूरा करने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 1000 उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। बिहार में युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता  के नए-नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं, इसलिए युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें।

राज्य में बारिश और बाढ़ की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि 38 प्रतिशत कम वर्षापात के बावजूद बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है। सरकार केवल तात्कालिक राहत और बचाव तक सीमित न रहकर जल-चक्र और प्राकृतिक जल-प्रवाह तंत्र को व्यवस्थित करने के लिए दीर्घकालिक स्थायी समाधान पर काम कर रही है।

टॉपर्स और अभिभावकों के साथ मुख्यमंत्री ने किया भोजन

पुरस्कार वितरण के उपरांत लोक सेवक आवास परिसर में ही सभी 168 पुरस्कृत विद्यार्थियों और उनके साथ आए अभिभावकों के लिए भव्य प्रीति भोज का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्वयं छात्रों के बीच बैठकर भोजन किया और उनसे आत्मीय बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की भविष्य की योजनाओं, करियर गोल्स और अन्य गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री से बातचीत कर छात्र-छात्राएं बेहद उत्साहित और आनंदित दिखे।

कार्यक्रम में ये प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद

कार्यक्रम का शुभारंभ बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ० त्यागराजन एस०एम० द्वारा मुख्यमंत्री को हरित पौधा एवं प्रतीक चिह्न भेंट कर किया गया। समारोह में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के कार्यों पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।

कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव तथा शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी संबोधित किया।

इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष डॉ० त्यागराजन एस०एम० सहित अनेक वरीय प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, मेधावी विद्यार्थी एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे।

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ताजपुर नगर परिषद में सफ़ाई के नाम पर हर महीने 30 लाख का बड़ा खेल: 10 लाख की पूँजी वाली संदिग्ध सिलीगुड़ी कंपनी को ठेका, आरटीआई माँगने पर फूले हाथ-पाँव!

गोल-मटोल जवाब से भड़का जनाक्रोश: भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने खोला मोर्चा, उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग।

ताजपुर (समस्तीपुर):ताजपुर नगर परिषद में सफ़ाई व्यवस्था के नाम पर सरकारी धन की जमकर बंदरबांट और बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटाले की आशंका गहरा गई है। भाकपा माले के ताजपुर प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने नगर परिषद प्रशासन और आउटसोर्सिंग एजेंसी की साठगाँठ पर करारा हमला बोलते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच कराने की माँग की है।

मामले की जानकारी देते हुए भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि नगर परिषद ताजपुर में सफ़ाई व्यवस्था के नाम पर लाखों रुपये का वारा-न्यारा किया जा रहा है। सच सामने लाने के उद्देश्य से उन्होंने कार्यपालक पदाधिकारी से सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन देकर सफ़ाई मजदूरों की वास्तविक संख्या, उनके नाम-पता और भुगतान से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण जानकारियाँ माँगी थीं।

आरटीआई के तहत माँगी गई मुख्य जानकारियाँ:

  • नगर परिषद क्षेत्र में कार्यरत सफ़ाई कर्मियों की कुल वास्तविक संख्या।
  • सभी सफ़ाई कर्मियों का पूरा नाम एवं स्थायी पता।
  • सफ़ाई मद में प्रतिमाह खर्च की जाने वाली सरकारी राशि एवं मानदेय भुगतान का ब्योरा।

निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के बावजूद नगर परिषद प्रशासन द्वारा स्पष्ट जानकारी देने के बजाय गोल-मटोल और टालमटोल भरा जवाब थमा दिया गया। अधिकारियों की ओर से लिखित में कहा गया कि “ताजपुर नगर परिषद में आउटसोर्सिंग एजेंसी आरईएस क्लीनिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सफ़ाई कार्य कराया जाता है। संबंधित एजेंसी द्वारा ही सफ़ाई कर्मियों का चयन, संख्या में बदलाव और मानदेय का भुगतान किया जाता है।”

सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया कि वास्तविक आँकड़े छुपाना सीधे तौर पर यह दर्शाता है कि ज़मीन पर बेहद कम संख्या में मजदूर रखकर कागज़ों पर भारी संख्या दिखाई जा रही है और हर महीने सरकारी खज़ाने से भारी-भरकम राशि का अवैध उठाव किया जा रहा है।

जब सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने उक्त एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट और कॉरपोरेट डेटा का गहन विश्लेषण किया, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया। एजेंसी “आरईएस क्लीनिंग सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड” का पंजीकृत कार्यालय “केयर ऑफ़ अंजली अपार्टमेंट, ब्लॉक-सी/बी, एम एम दत्ता रोड बाय लेन, डी.बी. पारा, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल – 734004″ दर्ज है।

हैरानी की बात यह है कि महज 10 लाख रुपये की मामूली शेयर कैपिटल (पूँजी) वाली इस बाहरी एजेंसी को ताजपुर नगर परिषद द्वारा प्रतिमाह लगभग 30 लाख रुपये का भारी-भरकम ठेका दे दिया गया है। कंपनी के ऑनलाइन पोर्टल पर कोई ज़रूरी अपडेट भी मौजूद नहीं हैं, जिससे इसके फर्जी अथवा केवल कागज़ों पर संचालित होने का प्रबल संदेह पैदा होता है।

भाकपा माले नेता ने तल्ख लहजे में कहा कि यदि नगर परिषद में सफ़ाई मद का सारा काम नियमों के अनुकूल और पारदर्शी तरीके से हुआ है, तो फिर जनता के पैसे का ब्योरा सार्वजनिक करने में अधिकारियों के पसीने क्यों छूट रहे हैं? सूचना छुपाने की यह कोशिश साफ़ संकेत देती है कि यहाँ सफ़ाई के नाम पर करोड़ों रुपये का घपला किया जा रहा है।

उन्होंने जिला प्रशासन समस्तीपुर, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा राज्य सूचना आयोग से इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने आरटीआई में माँगी गई पूरी जानकारी अविलंब सार्वजनिक करने तथा सफ़ाई मद में हुई वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय कमेटी से जाँच करवाकर दोषी अधिकारियों एवं फर्जीवाड़ा करने वाली एजेंसी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पुरज़ोर माँग की है।

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निगरानी का सर्जिकल स्ट्राइक: एक ही दिन में 3 घूसखोर गिरफ्तार, जेई, बड़ा बाबू और दारोगा रंगे हाथों दबोचे गए

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अब तक की सबसे बड़ी और ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए एक ही दिन में तीन अलग-अलग जिलों से तीन सरकारी अधिकारियों को घूस लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम की गिरफ्त में रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए जहानाबाद मनरेगा के कनीय अभियंता अमन कुमार।

पहला मामला: जहानाबाद में 20 हजार घूस लेते जेई गिरफ्तार जहानाबाद के प्रखंड सदर में तैनात मनरेगा के कनीय अभियंता अमन कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते आंबेडकर चौक स्थित एक ढाबा (होटल) से गिरफ्तार किया गया। परिवादी अशोक कुमार (निवासी कुमरडीह, मखदुमपुर) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि ग्राम पंचायत जामुक में मनरेगा के तहत 6,77,790 रुपये की तीन योजनाओं का कार्य पूर्ण होने के बाद मापी पुस्तिका (एमबी) सत्यापन के एवज में 3% (20,000 रुपये) रिश्वत मांगी जा रही थी। सत्यापन में आरोप सही मिलने पर पुलिस निरीक्षक संतोष कुमार दुबे के अनुरोध पर पुलिस उपाधीक्षक आसिफ इकबाल मेहंदी के नेतृत्व में गठित धावा दल ने यह कार्रवाई की।

दूसरा मामला: शेखपुरा में 15 हजार लेते लिपिक पकड़ाया जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ), शेखपुरा के निम्नवर्गीय लिपिक (बड़ा बाबू) कुणाल कुमार को 15 हजार रुपये घूस लेते कार्यालय के वरीय लिपिक कक्ष से गिरफ्तार किया गया। परिवादी राजू प्रसाद (निवासी डीहा, अरियारी) से ट्रैक्टर संख्या यू०पी० 30ए०सी० 4378 का बिहार नंबर जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही थी। पुलिस निरीक्षक अरुण कुमार सिंह के अनुरोध पर पुलिस उपाधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद के नेतृत्व में धावा दल ने रंगे हाथों गिरफ्तारी की।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम की गिरफ्त में रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए (बाएं से दाएं) दीघा यातायात थाना के दारोगा उपेन्द्र साह, जिला परिवहन कार्यालय शेखपुरा के लिपिक कुणाल कुमार

तीसरा मामला: पटना में 10 हजार लेते यातायात थाना का दारोगा गिरफ्तार पटना के जे०पी० गंगा पथ, दीघा स्थित यातायात थाना (गांधी मैदान) के पुलिस अवर निरीक्षक उपेन्द्र साह को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते थाना के सिरिस्ता कक्ष से गिरफ्तार किया गया। परिवादी जमील अंसारी (निवासी बड़ी तकिया, चैनपुर, कैमर) ने शिकायत की थी कि जब्त किए गए उनके वाहन को छोड़ने के एवज में घूस मांगी जा रही है। पुलिस निरीक्षक राधेश्याम राम के अनुरोध पर पुलिस उपाधीक्षक श्रीराम चौधरी के नेतृत्व में गठित टीम ने छापेमारी कर उन्हें दबोच लिया।

वर्ष 2026 में अब तक 99 आरोपी गिरफ्तार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध दर्ज यह 105वीं, 106वीं एवं 107वीं प्राथमिकी है। इस साल ट्रैप संबंधी 97वें, 98वें एवं 99वें कांड के तहत अब तक कुल 99 अभियुक्तों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनसे कुल 36,58,800 रुपये नगद एवं एक वाशिंग मशीन बरामद की गई है। (ज्ञात हो कि वर्ष 2025 में कुल 101 ट्रैप कांड दर्ज कर 37,80,300 रुपये बरामद किए गए थे।)

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72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान: गुजरात के एकता नगर में लगेगा बॉलीवुड से लेकर साउथ के दिग्गजों का जमावड़ा!

कार्तिक आर्यन और ममूटी बने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, यामी गौतम को मिला सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का ताज; ‘आर्टिकल 370′ चुनी गई बेस्ट फीचर फिल्म।

नई दिल्‍ल‍ी : भारतीय सिनेमा के 70 से अधिक वर्षों के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सांस्कृतिक विविधता और क्षेत्रीय सिनेमा को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से एक बड़ा और दूरगामी नीतिगत निर्णय लिया है। अब तक देश की राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन तक सीमित रहने वाले प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार’ समारोह को इस बार राजधानी से बाहर ले जाया गया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर 2026 को गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित ऐतिहासिक एकता नगर (केवडिया) में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान करेंगी। यह आयोजन न केवल वर्ष 2024 में प्रदर्शित उत्कृष्ट भारतीय फिल्मों और कला साधना को सम्मानित करेगा, बल्कि ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की उस मूल भावना को भी मूर्तरूप देगा, जो देश के हर भाषाई और क्षेत्रीय सिनेमा को एक धागे में पिरोती है।

वर्ष 2024 के सिनेमाई महासमर का परिणाम: दमदार विषय-वस्तु और अभिनय की जीत

इस वर्ष के पुरस्कारों का बारीक विश्लेषण करें तो यह स्पष्ट होता है कि राष्ट्रीय जूरी ने व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ विषय-वस्तु की गंभीरता, सामाजिक प्रभाव और उच्चस्तरीय कलात्मक मूल्यों को प्राथमिकता दी है:

  • सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म (‘आर्टिकल 370′): राष्ट्र के महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय और सुरक्षा तंत्र की अंदरूनी रणनीतियों को पर्दे पर जीवंतता से उभारने वाली फिल्म ‘आर्टिकल 370’ को देश की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म घोषित किया गया है। यह फिल्म सिनेमाई कसावट और पटकथा की मजबूती के बल पर जूरी की पहली पसंद बनी।
  • सर्वश्रेष्ठ मुख्य अभिनेता (ममूटी और कार्तिक आर्यन): इस बार मुख्य अभिनेता का शीर्ष सम्मान दो अलग-अलग पीढ़ियों और शैलियों के कलाकारों के बीच साझा हुआ है। दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज कलाकार ममूटी को मलयालम हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘ब्रह्मयुगम’ में उनके अद्वितीय और बहुआयामी अभिनय के लिए चुना गया है। वहीं, बॉलीवुड के युवा स्टार कार्तिक आर्यन को स्पोर्ट्स-बायोपिक ‘चंदू चैंपियन’ में भारत के पहले पैरालिंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर के कठिन किरदार को पर्दे पर पूरी निष्ठा और शारीरिक बदलाव के साथ जीने के लिए यह सम्मान मिला है।
  • सर्वश्रेष्ठ मुख्य अभिनेत्री (यामी गौतम): फिल्म ‘आर्टिकल 370’ में एक एनआईए (NIA) अधिकारी की चुनौतीपूर्ण भूमिका को संयमित, दृढ़ और प्रभावशाली तरीके से निभाने के लिए यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ मुख्य अभिनेत्री के राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है।
  • सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक (रणदीप हुड्डा): ऐतिहासिक और जीवनी पर आधारित फिल्म ‘स्वतंत्र वीर सावरकर’ के जरिए अपने निर्देशन की शुरुआत करने वाले रणदीप हुड्डा को सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का पुरस्कार मिला है। फिल्म में उनके गहन शोध और बारीक निर्देशन शैली की काफी सराहना की गई है।

गैर-फीचर और डॉक्यूमेंट्री श्रेणी: वास्तविक जीवन के संघर्षों का दस्तावेजीकरण

सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का दर्पण भी है। गैर-फीचर फिल्म वर्ग में ‘भंगार’ ने सर्वश्रेष्ठ नॉन-फीचर फिल्म का खिताब अपने नाम किया, जबकि जूरी ने ‘राम-नामी’ को देश का सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) घोषित किया है। ये कृतियां जमीनी स्तर की वास्तविकताओं और सांस्कृतिक धाराओं को मुख्यधारा में लाने का काम करती हैं।

इतिहास के पन्नों में दर्ज हुआ संथाली सिनेमा, क्षेत्रीय भाषाओं का लहराया परचम

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का सबसे ऐतिहासिक पहलू यह रहा कि गैर-फीचर फिल्म वर्ग में पहली बार किसी संथाली भाषा की फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। यह भारत की जनजातीय भाषाओं और उनकी मौखिक व दृश्य परंपराओं के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।

इसके अलावा यह समारोह भारत की भाषाई बहुलता का प्रत्यक्ष प्रमाण बना। मराठी, संथाली, तमिल, मलयालम, तेलुगु, कन्नड़, तुलु और गढ़वाली जैसी कई भाषाओं की कृतियों ने अपनी छाप छोड़ी। बॉक्स ऑफिस पर अपार जनसमर्थन जुटाने वाली और तकनीकी रूप से उन्नत फिल्मों जैसे:

  1. ‘कल्कि 2898 ईस्वी’
  2. ‘अमरन’
  3. ‘पुष्पा: द रूल पार्ट-02’
  4. ‘भूल भुलैया 3’
  5. ‘स्त्री 2’

ने विभिन्न तकनीकी और कलात्मक श्रेणियों में पुरस्कार जीतकर यह साबित किया कि जनप्रिय सिनेमा भी राष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर सकता है।

सिनेमा पर गंभीर चिंतन: आलोचना और शोध भी सम्मानित

सिनेमा को वैचारिक और दार्शनिक धरातल प्रदान करने वाले लेखकों को भी इस मंच से सम्मान मिला है:

  • सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक: संजीव श्रीवास्तव को सिनेमाई बारीकियों के सटीक और निष्पक्ष विश्लेषण के लिए वर्ष का सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक चुना गया है।
  • सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक: डॉ. प्रदीप केंचनुरु द्वारा रचित और मिरर बुक्स द्वारा प्रकाशित कन्नड़ सिनेमा के राजनीतिक और दार्शनिक पहलुओं का अध्ययन करने वाली कृति— ‘नानिरुवुदे निमगागी, नादिरुवुदे ननगागीः कन्नड सिनेमाद तात्विक मत्तु राजकीय‘ (आई स्टैंड फॉर यू, द स्टेट स्टैंड्स फॉर असः पॉलिटिकल एंड फिलॉसॉफिकल डाइमेंशन्स ऑफ कन्नड़ सिनेमा)—को सर्वश्रेष्ठ पुस्तक का पुरस्कार देने की घोषणा हुई है।

दिल्ली से एकता नगर (केवडिया) तक का सफर क्यों है खास?

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 1954 में हुई थी। पिछले सात दशकों में यह पहला मौका है जब इतने बड़े स्तर पर समारोह को दिल्ली से दूर स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की छाया में आयोजित किया जा रहा है। यह कदम भारत सरकार के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत देश के बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों को राज्यों की प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों तक ले जाया जा रहा है।

22 सितंबर को जब सरदार वल्लभभाई पटेल की विशाल प्रतिमा के साये में भारतीय सिनेमा के दिग्गज एकत्र होंगे, तब यह केवल एक पुरस्कार वितरण समारोह नहीं होगा, बल्कि पूरे भारत की कला, भाषा और अखंडता का एक ऐतिहासिक जश्न होगा।

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अधिकारियों की लापरवाही पर भड़के मुख्यमंत्री: 30 दिनों में समस्याओं का निपटारा नहीं हुआ तो गिरेगी गाज, लापरवाही बर्दाश्त नहीं!

सहयोग कार्यक्रम में 137 मामलों की सुनवाई, फरियादियों की जुबानी सुनते ही दिए कड़े निर्देश; कहा- जिनका काम हो चुका वे पटना न आएं

पटना, 8 सितम्बर 2026:  राज्य की जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करने और उन्हें न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय स्थित राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम हॉल में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में सीधे जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुना। कार्यक्रम में पहुंचे कुल 137 आवेदकों की समस्याओं का तुरंत निष्पादन किया गया।

पटना स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम हॉल में फरियादी की बात ध्यानपूर्वक सुनते और समस्याओं के तुरंत समाधान का निर्देश देते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी।

मुख्यमंत्री ने कड़े और सख्त लहजे में अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी कि जनता के आवेदनों के निष्पादन में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि अधिकारी और कर्मी पूरी पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ समय-सीमा के अंदर जनता की समस्याओं का निष्पादन करें। मुख्यमंत्री ने लक्ष्य तय करते हुए कहा कि सहयोग शिविर के माध्यम से लोगों की समस्याओं का समाधान हर हाल में 30 दिन के अंदर मिलना चाहिए।

जटिल समस्याओं वाले ही आएं पटना, जिनका काम हुआ वे न लगाएं चक्कर

मुख्यमंत्री ने राज्य भर से आने वाले फरियादियों के लिए एक बड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की समस्याओं का जिला स्तर पर समाधान हो गया है, उन्हें बेवजह पटना आने की जरूरत नहीं है। जिन आवेदकों की समस्याएं अधिक जटिल हैं और जिनका समाधान जिला स्तर पर नहीं हो पा रहा है, केवल वही आवेदक राज्य स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में अपनी शिकायतें लेकर पटना आएं। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक की शिकायतों का निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान हो।

इन विभागों से जुड़ी आई थीं सबसे अधिक शिकायतें

सहयोग कार्यक्रम के दौरान राज्य भर से आए आवेदकों ने सीधे मुख्यमंत्री के सामने अपनी पीड़ा रखी। इसमें मुख्य रूप से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, शिक्षा विभाग, गृह विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, स्वास्थ्य विभाग, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग और समाज कल्याण विभाग से जुड़े मामले शामिल थे। मुख्यमंत्री ने मौके पर ही संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी मामलों का समय-सीमा के भीतर निपटारा करें।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने वृद्धा पेंशन तथा राशन कार्ड के योग्य आवेदकों को तुरंत लाभ देने का कड़ा निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र व्यक्ति केवल किसी तकनीकी कारण से सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए।

बैठक में मौजूद प्रमुख लोग एवं अधिकारी

कार्यक्रम के दौरान राज्य सरकार के संबद्ध विभागों के मंत्रीगण के अलावा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक विनय कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव उपस्थित थे। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के जिलाधिकारी, वरीय पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक तथा वरीय अधिकारी भी सीधे जुड़े हुए थे।

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अकाली चौक लूटकांड का पुलिस ने किया पर्दाफाश: दो कुख्यात लुटेरे गिरफ्तार, लूटा हुआ मोबाइल और वारदात में इस्तेमाल बाइक बरामद!

बोचहां/मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर जिले के बोचहां थाना क्षेत्र स्थित अकाली चौक के पास 6 अगस्त 2026 को हुई बाइक सवार अपराधियों द्वारा लूटपाट की घटना का पुलिस ने सफल पर्दाफाश कर दिया है। इस सनसनीखेज वारदात में शामिल दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस ने इनके पास से लूटा गया मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली है।

बोचहां लूटकांड का सफल खुलासा करते ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह प्रभाकर एवं पुलिस टीम की गिरफ्त में दो अभियुक्त।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर गठित हुई थी विशेष टीम

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरपुर के निर्देश पर सब डिविजनल पुलिस ऑफिसर (एसडीपीओ) ईस्ट-1 के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था। इस टीम में बोचहां थानाध्यक्ष और थाना के अन्य पुलिस अधिकारी शामिल थे। पुलिस टीम ने मैनुअल और टेक्निकल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करते हुए अज्ञात लुटेरों की पहचान की और घेराबंदी कर उन्हें धर दबोचा।

कटरा थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं गिरफ्तार लुटेरे

मामले का खुलासा करते हुए ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह प्रभाकर ने प्रेस वार्ता में बताया कि 6 अगस्त को अकाली चौक के पास तीन अज्ञात बाइक सवार अपराधियों ने लूट की घटना को अंजाम दिया था। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और बोचहां थाना कांड संख्या 228/26 दर्ज कर छानबीन शुरू की गई।

कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार किए गए दोनों अपराधियों की पहचान कटरा थाना क्षेत्र निवासी श्रवण कुमार और राजा कुमार के रूप में हुई है।

पुराना आपराधिक इतिहास, पुलिस खंगाल रही अन्य मामले

ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह प्रभाकर ने आगे बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों का पहले से आपराधिक इतिहास रहा है। ये दोनों आरोपी कटरा थाना क्षेत्र के कई आपराधिक मामलों में पूर्व से ही चार्जशीटेड हैं। पुलिस फिलहाल इनसे गहन पूछताछ कर रही है ताकि इनके गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके काम करने के तरीके (मोडस ऑपरेंडी) का पता लगाया जा सके। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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बाढ़ पीड़ितों के दर्द पर मरहम: खुद बाल्टी संभाल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परोसा खाना, सोनपुर और हाजीपुर में राहत शिविरों का किया तूफानी दौरा!

पटना / हाजीपुर / सोनपुर (07 सितम्बर 2026): बिहार में बाढ़ के कहर के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद मैदान में उतर चुके हैं। वैशाली और सारण जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का तूफानी दौरा करते हुए मुख्यमंत्री ने हाजीपुर और सोनपुर में संचालित राहत शिविरों की कमान अपने हाथों में ले ली। आपदा की इस संकट घड़ी में बाढ़ पीड़ितों का दर्द बांटने पहुंचे मुख्यमंत्री ने खुद अपने हाथों से बाल्टी और कलछी उठाकर पीड़ितों को खाना परोसा और सोनपुर में उनके साथ बैठकर भोजन भी किया।

बाढ़ राहत शिविर में हाथ में बाल्टी और कलछी थामकर बाढ़ पीड़ितों को खुद अपने हाथों से गर्म भोजन परोसते मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, साथ में उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी।

राहत शिविरों में खुद लिया व्यवस्थाओं का जायजा

वैशाली जिले के गंगा ब्रिज थाना के सामने बने बाढ़ राहत शिविर में पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कम्युनिटी किचन, भोजन वितरण काउंटर और निबंधन सह नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण किया। उन्होंने महिलाओं और पुरुषों के रहने के लिए बने अलग-अलग शिविरों में जाकर सीधे लोगों से बात की। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र और शैक्षणिक शिविर में बच्चों से पढ़ाई और खान-पान का हाल जाना।

मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की मदद, किसानों के लिए मुआवजे का ऐलान

स्वास्थ्य शिविर का जायजा लेते हुए मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को तुरंत इलाज मुहैया कराने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने पशु चिकित्सा शिविर में दवा और पशु चारा की पूरी व्यवस्था करने को कहा। बाढ़ में डूबने से हुई मौतों पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि के चेक सौंपे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि बाढ़ से हुए फसल नुकसान का सर्वे कराकर सभी प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।

गंगा के पानी में 17 से 18 सेंटीमीटर की गिरावट, फरक्का से 15 लाख क्यूसेक डिस्चार्ज

सोनपुर के स्काउट एंड गाइड सेंटर शिविर में निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि गंगा के जलस्तर में लगभग 17 से 18 सेंटीमीटर की गिरावट आई है और फरक्का बराज से करीब 15 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। अगले 2 से 3 दिनों में स्थिति में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि गंगा नदी के स्ट्रेच को सीमा में बांधने और बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए केंद्रीय जल आयोग से भी बातचीत की गई है।

निरीक्षण में मौजूद रहे कई दिग्गज

इस दौरे में मुख्यमंत्री के साथ उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, विधायक जनक सिंह, विधायक संजय सिंह, विधायक सिद्धार्थ पटेल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, गृह विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह, सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, सारण के वरीय पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार और वैशाली के पुलिस अधीक्षक सुभांक मिश्रा समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।

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