03 नवम्बर 2026, मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर के स्थानीय महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (एम.डी.डी.एम.) में मंगलवार को सिनेमा के इतिहास पर आधारित एक बेहद रोमांचक और ज्ञानवर्द्धक महाविद्यालय प्रस्तुतीकरण (कॉलेज प्रस्तुतिकरण) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कॉलेज की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और बड़े पर्दे के अनछुए सफर को बेहद खूबसूरती से प्रदर्शित किया।

यथार्थवाद और समानांतर सिनेमा पर विशेष फोकस
यह पूरा कार्यक्रम मुख्य रूप से भारतीय सिनेमा में यथार्थवाद और समानांतर सिनेमा के महत्त्व पर केंद्रित रहा। छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रस्तुति के जरिए यह दिखाया कि कैसे व्यावसायिक फिल्मों की चकाचौंध से कोसों दूर, समानांतर सिनेमा ने समाज की कड़वी सच्चाई, गरीबी, जातिगत भेदभाव और आम आदमी के संघर्षों को पर्दे पर पूरी ईमानदारी के साथ उतारा है। सत्यजीत रे की मशहूर कृति ‘पथेर पांचाली’ से लेकर बिमल रॉय और बाद के दौर में श्याम बेनेगल जैसे महान कलाकारों के योगदान को रेखांकित करते हुए यथार्थवादी सिनेमा के गहरे महत्त्व को समझाया गया।

सिनेमा समाज का जीवंत दस्तावेज: अलका जायसवाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कॉलेज की प्राचार्या डा. अलका जायसवाल ने इतिहास और भारतीय सिनेमा को गहराई से समझने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन भर नहीं है, बल्कि यह हमारे बदलते समाज, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का एक जीवंत दस्तावेज है। यथार्थवादी सिनेमा हमें हमेशा समाज की जमीनी वास्तविकताओं से जोड़े रखता है। इस भव्य आयोजन में विश्वविद्यालय इतिहास विभाग, बीआरएबीयू की तरफ से डा. अर्चना पांडे विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।

इनकी रही खास उपस्थिति
कार्यक्रम का शानदार मंच संचालन इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डा; प्रांजलि द्वारा किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में शर्मिला, नेहा, अनु, शाल्वि, रिमझिम, निशा और नगमा खातून ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर महाविद्यालय की तमाम छात्राओं के साथ-साथ अन्य विभागों के शिक्षकगण और शिक्षकेतर कर्मचारीगण भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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