मुजफ्फरपुर सिटी एसपी का बड़ा बयान— “बिल्डिंग निर्माण व फायर ऑडिट में मिली गड़बड़ी तो सीधे जेल जाएंगे हॉस्पिटल के ओनर और डायरेक्टर, जांच शुरू।”
मुजफ्फरपुर : ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ‘प्रसाद हॉस्पिटल’ में गुरुवार की तड़के सुबह इंसानियत को झकझोर देने वाला एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है। सुबह करीब 4:00 बजे जब पूरा शहर सो रहा था, तब अस्पताल के अत्यंत संवेदनशील आईसीयू (ICU) वार्ड में अचानक भीषण आग लग गई। इस भयंकर अग्निकांड में आईसीयू में भर्ती बेबस मरीज अपनी जान बचाने के लिए तड़प उठे और देखते ही देखते कुल 6 बेकसूर लोगों की दर्दनाक मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है। इस घटना के बाद पूरे जिले में कोहराम और आक्रोश का माहौल है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस महकमे ने बेहद आक्रामक और त्वरित कार्रवाई की है। मुजफ्फरपुर के नगर पुलिस अधीक्षक (सिटी एसपी) मो0 मोहिबुल्लाह अंसारी ने प्रेस मीडिया को रोंगटे खड़े कर देने वाले इस केस की पूरी जानकारी दी। सिटी एसपी ने बताया कि मंडल अग्निशमन पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर के लिखित आवेदन के आधार पर अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ काण्ड संख्या 177/26 दर्ज कर ली गई है।
ऑन-ड्यूटी डॉक्टर की घोर लापरवाही, 3 भेजे गए जेल
सिटी एसपी मो0 मोहिबुल्लाह अंसारी ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रथम दृष्टया अस्पताल प्रशासन की आपराधिक लापरवाही उजागर हुई है। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने कड़ा एक्शन लेते हुए 03 मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा रहा है। गिरफ्तार लोगों में:
- मेंटेनेंस हेड (जो सुरक्षा मानकों की देखरेख में नाकाम रहे)
- एडमिनिस्ट्रेशन हेड (जिन्होंने आपातकालीन सुरक्षा की अनदेखी की)
- आईसीयू ऑन-ड्यूटी डॉक्टर (जो हादसे के वक्त अपनी ड्यूटी से पूरी तरह नदारद और गायब थे)
एसपी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अस्पताल के ओनर और डायरेक्टर भी पुलिस के रडार पर हैं। जांच टीम यह खंगाल रही है कि क्या अस्पताल की बिल्डिंग बनाने में कानून (Building Bylaws) का उल्लंघन हुआ था और क्या फायर सेफ्टी का ऑडिट समय पर कराया गया था? अगर इनमें रत्ती भर भी खामी मिली, तो अस्पताल मालिकों को भी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे डाला जाएगा।
मृतकों की संख्या हुई 6; प्रशासन ने तुरंत बांटा मुआवजा

अस्पताल में लगी आग की चपेट में आने से घायल एक और मरीज बृजनंदन राय की उपचार के दौरान मृत्यु हो जाने से कुल मृतकों की संख्या बढ़कर अब 6 हो गई है। घटना की भयावहता को देखते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आया। माननीय मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश पर जिलाधिकारी के आदेशानुसार स्थानीय अंचलाधिकारी ने तत्काल मृतक के निकटतम आश्रित परिवार से मुलाकात की और आपदा प्रबंधन विभाग के तहत मिलने वाली ₹4-4 लाख की अनुग्रह अनुदान राशि का चेक रोते-बिलखते परिजनों को हाथों-हाथ सौंप दिया, ताकि पीड़ित परिवार को इस दुख की घड़ी में तुरंत राहत मिल सके।
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