पटना/ब्यूरो रिपोर्ट: देश में लगातार हो रहे पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में मचे घमासान के बीच जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) ने एक ऐसा सनसनीखेज बयान दिया है, जिसने देश के शिक्षा जगत और सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है। प्रशांत किशोर ने सीधे तौर पर दावा किया है कि पेपर लीक कोई व्यक्तिगत गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक गहरा ‘संस्थागत भ्रष्टाचार‘ है, जिसकी असली जड़ें तेजी से फल-फूल रहे कोचिंग संस्थानों के साम्राज्य में धंसी हुई हैं।

“चाहे कोई भी दावा कर ले, आगे भी लीक होंगे पेपर!”
मीडिया से खुलकर बात करते हुए प्रशांत किशोर ने सरकार के तमाम दावों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने दो टूक कहा, “दो वर्ष पहले भी देश के स्तर पर नीट (NEET) का पेपर लीक हुआ था, इस बार भी हुआ है और लिखकर रख लीजिए—आगे भी होगा! देश में शायद ही कोई ऐसी परीक्षा बची है, जिसका पेपर लीक न हो रहा हो।” पीके ने इस गंभीर बीमारी की असली वजह का पर्दाफाश करते हुए कहा कि पिछले 10 से 15 सालों में देश के भीतर कोचिंग संस्थाओं का दबदबा इस कदर बढ़ चुका है कि वे अब ‘माफिया’ की तरह काम कर रही हैं।

कोचिंग संस्थाएं किसी भी हद तक जाने को तैयार
प्रशांत किशोर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कोचिंग संस्थान बच्चों को अपने यहाँ आकर्षित करने और अपनी ब्रांडिंग चमकाने के लिए “कुछ भी कीमत” देने को तैयार हैं। यही अंधाधुंध पैसा और लालच पेपर लीक के इस काले कारोबार को ऑक्सीजन दे रहा है।
सिस्टम पर खड़े हुए बड़े सवाल
प्रशांत किशोर के इस सीधे हमले ने अब एक नई बहस छेड़ दी है। क्या वाकई करोड़ों-अरबों का टर्नओवर रखने वाले ये कोचिंग संस्थान देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं? पीके के इस ‘विस्फोट’ के बाद अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह इन कोचिंग संस्थाओं के बढ़ते शिकंजे पर लगाम लगाने के लिए क्या कदम उठाती है।
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